प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 69वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को अपनी शुभकामनाएं दीं
15 अगस्त की सुबह 125 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और सपनों की आशा की सुबह: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आजादी की लड़ाई में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले महापुरुषों को श्रद्धांजलि दी
प्रधानमंत्री मोदी ने समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के लिएटीम इंडिया- 125 करोड़ भारतीयों की टीम की सराहना की
भारत की ताकत भारतीयों की सादगी और उनकी एकता में निहित है: प्रधानमंत्री मोदी
जातिवाद और सांप्रदायिकता के लिए कोई जगह नहीं है। विकास इन सब से ऊपर है और विकास ही एकमात्र मुद्दा है: प्रधानमंत्री मोदी
‘जन भागीदारी’ लोकतंत्र की सबसे बड़ी संपत्ति: श्री नरेन्द्र मोदी 
वित्तीय प्रणाली से गरीबों को जोड़ने के लिए बैंक खाते आवश्यक: प्रधानमंत्री
हमारी सभी योजनाएं गरीबों के लिए उपयोगी होनी चाहिए; हमें वित्तीय समावेशन के माध्यम से उन्हें सशक्त करना है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की चर्चा की
सभी क्षेत्रों के लोगों ने स्वच्छ भारत अभियान के बारे में जागरूकता पैदा की: प्रधानमंत्री
बच्चों ने स्वच्छ भारत मिशन को अधिकतम शक्ति प्रदान की: प्रधानमंत्री मोदी
श्रमेव जयते योजना भारत में श्रमिकों के प्रति हमारे दृष्टिकोण को बदलने का प्रयास: प्रधानमंत्री
श्रम की गरिमा हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य होना चाहिए: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
भ्रष्टाचार को तंत्र से पूर्णतः हटाना ही होगा: प्रधानमंत्री
हमें कृषि उत्पादकता को बढ़ाने की जरूरत: प्रधानमंत्री
भारत के विकास के लिए आवश्यक है कि पहले पूर्वोत्तर भारत का विकास हो: प्रधानमंत्री मोदी
हम उन सभी गांवों को बिजली उपलब्ध कराएंगे जहाँ अभी तक बिजली की सुविधा नहीं है: प्रधानमंत्री मोदी
हम एक ऐसा तंत्र ला रहें हैं जिसमें स्टार्ट-अप को प्रमुखता दी जाएगी। हमें स्टार्ट-अप में नंबर 1 बनना होगा। ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ और ‘स्टैंड अप इंडिया’: प्रधानमंत्री
हम ‘वन रैंक, वन पेंशन’ को लागू करेंगे। इसके कार्यान्वयन के लिए प्रयास किये जा रहे हैं, सकारात्मक परिणाम मिलेंगे: प्रधानमंत्री

आज प्रधानमंत्री जी श्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्‍वतंत्रता दिवस 2015 के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से देश को संबोंधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है -

भारत के सवा सौ करोड़ मेरे प्‍यारे देशवासियों।

आजादी के पावन पर्व पर आप सबको हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 15 अगस्‍त का यह सवेरा मामूली सवेरा नहीं है। यह विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र का स्‍वातंत्र्य पर्व का सवेरा है। यह सवेरा, सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों का सवेरा है। यह सवेरा सवा सौ करोड़ देशवासियों के संकल्‍प का सवेरा है और ऐसे पावन पर्व पर जिन महापुरूषों के बलिदान के कारण, त्‍याग और तपस्‍या के कारण सदियों तक भारत की अस्मिता के लिए जूझते रहे, अपने सर कटवाते रहे, जवानी जेल में खपाते रहे, यातनाएं झेलते रहे, लेकिन सपने नहीं छोड़े, संकल्‍प नहीं छोड़े। ऐसे आजादी के स्‍वतंत्रता सेनानियों को मैं आज कोटि-कोटि वंदन करता हूं। पिछले दिनों हमारे देश के अनेक गणमान्‍य नागरिकों ने, अनेक युवकों ने, साहित्‍यकारों ने, समाजसेवियों ने, चाहे वो बेटा हो या बेटी हो, विश्‍वभर में भारत का माथा ऊंचा करने का अभिनंदनीय कार्य किया है। अननिगत वो लोग हैं, जिनको मैं आज लालकिले के प्राचीर से भारत का माथा ऊंचा करने के लिए हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, अभिनंदन करता हूं। विश्‍व के सामने भारत की विशालता, भारत की विविधता इसके गुणगान होते रहते हैं। लेकिन जैसे भारत की अनेक विशेषताएं हैं, भारत में अनेक विविधताएं हैं, भारत की विशालता है, वैसे ही भारत के जन-जन में सरलता भी है और भारत के कोने-कोने में एकता भी है। यही हमारी पूंजी है, यह हमारे राष्‍ट्र की शक्ति है। हमारे देश की शक्ति को सदियों से संजोया गया है। हर युग में उसे नया निखार देने का प्रयास हुआ है। समय की आवश्‍यकता के अनुसार, भविष्‍य के सपनों को साकार करने की आवश्‍यकता के अनुसार उन्‍हें ढाला गया है, उन्‍हें पनपाया गया है और उससे चिर पुरातन परंपराओं के बीच, नित्‍य नूतन संकल्‍पों के साथ यह देश आज यहां पहुंचा है। हमारी एकता, हमारी सरलता, हमारा भाई-चारा, हमारा सद्भाव यह हमारी बहुत बड़ी पूंजी है। इस पूंजी को कभी दाग नहीं लगना चाहिए, कभी उसे चोट नहीं पहुंचनी चाहिए। अगर देश की एकता बिखर जाए, तो सपने भी चूर-चूर हो जाते हैं। और इसलिए चाहे जातिवाद का जहर हो, सम्‍प्रदायवाद का जुनून हो, उसे हमें किसी भी रूप में जगह नहीं देनी, पनपने नहीं देना है। जातिवाद का जहर हो, सम्‍प्रदायवाद का जुनून हो, उसे हमें विकास के अमृत से मिटाना है, विकास की अमृतधारा पहुंचानी है और विकास की अमृतधारा से एक नई चेतना प्रकट करने का प्रयास करना है। भाइयों-बहनों यह देश टीम इंडिया के कारण आगे बढ़ रहा है। और ये Team India, सवा सौ करोड़ देशवासियों की बृहत Team है। क्या कभी दुनिया ने सोचा है कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की ये Team, जब टीम बनकर के लग जाती है तो वो राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हैं, वे राष्ट्र को बनाते हैं, वो राष्ट्र को बढ़ाते हैं, वे राष्ट्र को बचाते भी हैं, और इसलिए हम जो कुछ भी कर रहे हैं, हम जहां पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, वह ये सवा सौ करोड़ की Team India के कारण है और टीम इंडिया के आभारी हैं। 

लोकतंत्र में जनभागीदारी, ये सबसे बड़ी पूंजी होती है, अगर सवा सौ करोड़ देशवासियों की भागीदारी से हम देश को चलाएंगे तो देश हर पल सवा सौ करोड़ कदम आगे चलता चला जाएगा और इसलिए, Team इंडिया के इस रूप में जनभागीदारी को बल दिया गया है, प्राथमिकता दी गई है। चाहे Electronic के platform के माध्यम से mygov.in हो, चाहे नागरिकों से लगातार आते रहे लाखों पत्र हो, चाहे मन की बात हो, चाहे नागरिकों के साथ संवाद हो। इसी मार्ग से दिनों-दिन जनभागीदारी बढ़ती चली जा रही है। बहुत बड़ी मात्रा में हर काम में, दूर-सुदूर गांवों में बैठे हुए लोगों के भी सुझाव हमें मिलते रहे हैं और यही, Team India की ताकत है। मेरे प्यारे देशवासियों, ये बात निश्चित है इस Team India का एक ही जनादेश है और वो जनादेश है हमारी सारी व्यवस्थाएं, हमारी सारी योजनाएं इस देश के गरीब के काम आनी चाहिए। अगर हम गरीब को गरीबी की मुक्ति की लड़ाई में बल प्रदान करते हैं, उसे सामर्थ्य प्रदान करते हैं, तो देश का कोई गरीब, गरीबी में गुजारा करना नहीं चाहता है, वह भी गरीबी से जंग लड़ना चाहता है और इसलिए शासन व्यवस्था की सार्थकता इस बात में है कि हमारी व्यवस्थाएं, हमारे संसाधन, हमारी योजनाएं, हमारे कार्यक्रम गरीबों के कल्याण के लिए किस प्रकार से उपयोग आते हैं।

भाईयों-बहनों, गत 15 अगस्त को मैंने आपके सामने कुछ विचार रखे थे, तब मैं नया था। अब मैंने जो शुरू-शुरू में देखा था, उसको मैंने, कोई लाग-लपेट के बिना खुले मन से सवा सौ करोड़ देशवासियों के सामने रख दिया था लेकिन आज, एक वर्ष के बाद, उसी लालकिले की प्राचीर से पवित्र तिरंगे झंडे की साक्षी से, मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि एक साल में Team India, सवा सौ करोड़ देशवासी, एक नए विश्वास के साथ, नए सामर्थ्य के साथ परिश्रम की पराकाष्ठा करते हुए समय-सीमा में सपनों को साकार करने में जुट गए हैं। एक नया विश्वास का माहौल पैदा हुआ। मैंनें गत 15 अगस्त को प्रधानमंत्री जन-धन योजना इसकी घोषणा की। देश में साठ साल बीते, गरीबों के लिये बैंको का राष्ट्रीयकरण किया गया लेकिन इसके बावजूद भी साठ साल से भी अधिक समय के बाद गत 15 अगस्त को देश के चालीस प्रतिशत लोग बैंक खातों से वंचित थे। गरीब के लिये बैंकों के दरवाजे बंद थे। हमने संकल्प किया कि इस कलंक को मिटाना है और विश्व में Financial Inclusion की बातें होती हैं, उस Financial Inclusion को एक मजबूत धरातल पर लाना है तो देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को आर्थिक गतिविधि की मुख्य धारा में जोड़ना पड़ेगा और Bank account, ये उसका एक प्रारम्भ बिंदु है। हमने तय किया था, ''करेंगे, करते हैं, सोचते हैं, देखते हैं'' ऐसा नहीं, हमने कहा था- 26 जनवरी को जब देश फिर एक बार तिरंगे झंडे के सामने खड़ा होगा तब तक समय सीमा में काम पूरा करेंगे। मेरे देशवासियों मैं आज गर्व से कहता हूं कि हमने समय सीमा पर काम पूरा किया। 17 करोड़ लोगों ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत खाते खुलवाए। हमने तो कहा था, गरीबों को अवसर देना था इसलिए कहा था- एक भी रूपया नहीं होगा, एक नया पैसा भी नहीं होगा, तो भी बैंक का accounts खोलेगें। बैंकों को खोलने की कागज़ पट्टी का खर्चा होगा तो होने देंगे। आखिर बैंक किसके लिए हैं! गरीब के लिए होना चाहिए, और इसलिए जीरो बैलेंस से हमने अकाउंट खोलने का संकल्‍प किया था। लेकिन, मेरे देश के अमीरों को हमने देखा है, और इस बार देश ने गरीबों को भी देखा है और गरीबों की अमीरी को देखा है। मैं इन गरीबों की अमीरी को आज लालकिले के प्राचीर से शत-शत नमन करना चाहता हूं, सलाम करना चाहता हूं क्योंकि जीरो बैलेंस से अकाउंट खोलने का कहने के बावजूद भी इन गरीबों ने बीस हजार करोड़ रुपया बैंक के खातों में जमा करवाया।

अगर ये गरीबों की अमीरी न होती तो कैसे संभव होता और इसलिये गरीबों की अमीरी के बलबूते ये टीम इंडिया आगे बढ़ेगी, ये मेरा विश्‍वास आज प्रकट हो रहा है। भाइयों-बहनों हमारे देश में कहीं पर एक बैंक का ब्रांच खुल जाए या बैंक का नया मकान बन जाए तो इतनी बड़ी चर्चा होती है कि वाह! बहुत बड़ा काम हो गया, बड़ा विकास हो रहा है, बड़ी प्रगति हो रही है क्‍योंकि 60 साल तक हमने इन्‍हीं मानदंडों से देश के विकास को नापा है। वो नापने की पट्टी यही रही है कि एक बैंक का ब्रांच खुल जाए, बहुत बड़ी वाहवाही हो जाती है, बहुत बड़ा जय-जयकार हो जाता है। सरकार की बल्‍ले-बल्‍ले बात हो जाती है। लेकिन मेरे प्‍यारे देशवासियों, बैंक का ब्रांच खोलना मुश्‍किल काम नहीं है। सरकारी तिजोरी से वो काम हो जाता है। लेकिन 17 करोड़ देशवासियों को बैंक के दरवाजे तक लाना ये बहुत बड़ा कठिन काम होता है, बहुत बड़ा परिश्रम लगता है। जी-जान से जुटना पड़ता है, पल-पल हिसाब मांगना पड़ता है। और मैं टीम इंडिया के मेरे महत्‍वपूर्ण साथी, टीम इंडिया के इस महत्‍वपूर्ण साथी बैंक के कर्मचारियों का, बैंकों का हृदय से अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने बैंक को गरीबों के सामने ला करके रख दिया और ये चीज आने वाले दिनों में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाली है।

दुनिया में आर्थिक चिंतनधाराओं में एक चिन्‍तनधारा ये भी है कि financial inclusion यह हमेशा अच्‍छा नहीं होता है और उसके कारण गरीबी का बोझ व्‍यवस्‍थाओं पर पड़ता है। मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं। भारत जैसे देश में अगर विकास का Pyramid हम देखें। तो Pyramid के जो सबसे नीचे की सतह होती है, वो सबसे चौड़ी होती है। अगर वो मजबूत हो तो विकास का सारा Pyramid मजबूत होता है। आज विकास के Pyramid में हमारे देश का दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, उपेक्षित, वो वहां पर बैठा हुआ है। हमें विकास की Pyramid की इस नींव को मजबूत करना है ताकि, financial inclusion के द्वारा अगर वो ताकतवर होगा तो विकास का Pyramid कभी हिलेगा नहीं। कितने ही झोंके क्‍यों न आए, उसे कोई संकट नहीं आएगा और विकास का ये Pyramid आर्थिक मजबूती पर खड़ा होगा तो उनकी खरीद शक्‍ति बहुत बढ़ेगी और जब समाज के आखिरी इंसान की खरीद शक्‍ति बढ़ती है तो इस economy को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। वो बहुत तेज गति से देश को विकास की नई उंचाइयों पर ले जाता है और इसलिए हमारी कोशिश यह है कि हम उस पर बल दें। हमने सामाजिक सुरक्षा पर बल दिया है। गरीबों की भलाई पर बल दिया है।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और जीवन-ज्‍योति योजना, हमारे देश में करोड़ों-करोड़ों लोग हैं जिनको सुरक्षा का कवच नहीं है। Insurance का लाभ हमारे देश में निम्‍न मध्‍यम वर्ग को भी नहीं पहुंचा है गरीब की बात तो छोड़ो। हमने योजना बनाई एक महीने का एक रुपया, ज्‍यादा नहीं एक महीने का एक रुपया। 12 महीने का 12 रुपया और आप प्रधानमंत्री सुरक्षा-बीमा के हकदार बन जाइए। अगर आपके परिवार में कोर्इ आपत्ति आई तो दो लाख रुपया आपके परिवार को मिल जाएगा। अर्थतंत्र को कैसे चलाया जाता है। हम प्रधानमंत्री जीवन-ज्‍योति बीमा लाये। एक दिन के 90 पैसे, एक रुपए से भी कम, सालभर का 330 रुपया। आपके परिवार के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए, आपके परिवार की सुरक्षा के लिए 2 लाख रुपयों का बीमा सिर्फ 90 पैसे दो रोज के, हमने किया। भाइयो-बहनों भूतकाल में योजनाएं तो बनती रहीं, कौन सरकार होगी जो योजना नहीं बनाती होगी। हर कोई बनाता है, कौन सरकार होगी जो घोषणाएं नहीं करती होगी हर कोई करती है। कौन सरकार होती है जो उद्घाटन दीये न जलाती हो, फीता न काटती हो, सब कोई करते हैं, लेकिन कसौटी इस बात की होती है कि हम जिन बातों को कहते हैं, उसको पूरा करते हैं कि नहीं करते हैं। हमने एक नये Work culture पर दबाव डाला है, हमने एक नई कार्य-संस्‍कृति पर दबाव डाला है। और भाइयो-बहनों हमारे देश की कई योजनाएं जो 40 साल पुरानी हैं, 50 साल पुरानी हैं, 5 करोड़, 7 करोड़ लोगों से आगे नहीं पहुंच पाती हैं। इस योजना को अभी तो 100 दिन पूरे हुए है, 100 दिन। 100 दिन में 10 करोड़ नागरिकों ने इसका लाभ लिया है, 10 करोड़ नागरिकों ने। हमारे देश में ये 10 करोड़ नागरिक मतलब कि 10 करोड़ परिवार हैं। इसका मतलब ये हुआ कि देश में जो 30-35 करोड़ परिवार हैं उसमें से 100 दिन के भीतर-भीतर 10 करोड़ परिवार इस योजना में शरी‍क हो गए हैं। भाइयों-बहनों, हमारी सरकार की Team India की पिछले एक साल की जो विशेषता है, Team India का जो पराक्रम है, Team India सवा सौ करोड़ देशवासी टीम इंडिया हैं। उन्‍होंने जो सबसे बड़ा काम किया है समय-सीमा में निर्धारित कामों को पूरा करना। मैंने पिछली बार लाल किले पर से शौचालय की बात की थी, स्‍वच्‍छता की बात की थी। देश के लिए पहले घंटे-दो घंटे अजूबा लगा कि कैसे प्रधानमंत्री है कि लाल किले पर शौचालय बनाने में किसलिए समय खपा रहा है। लेकिन आज पूरे देश में जितने भी सर्वे होते हैं, हर सर्वे में एक बात उजागर आती है कि इस Team India की सबसे महत्‍वपूर्ण जन-जन को छूने वाली कोई बात है तो वो स्‍वच्‍छता का अभियान है। भाइयो-बहनों हमने स्‍वच्‍छता अभियान को आगे बढ़ाने के लिए समाज के लोगों का आह्वान करते रहते थे 9-9 लोगों का नाम अंकित करते थे एक दौर चल पड़ा था। लेकिन आज इस Team India को मुझे बधाई देनी है चाहे celebrity हो, चाहे राजनयिक हो, चाहे समाज सेवक हो, शिक्षाविद् हो, संप्रदायी जीवन से जुड़े हुए, आध्‍यात्‍मिक जीवन से जुड़े हुए महानुभाव हो, चाहे हमारे media के मित्र हो, सबने किसी की आलोचना किए बिना, बुराइयों को खोजने के बिना, जन-सामान्‍य को प्रशिक्षित करने का एक बहुत बड़ा बीड़ा उठाया है। मैं, जिन्‍होंने इस काम को किया है उन सबका आज ह्दय से अभिनंदन करता हूं। लेकिन सबसे ज्‍यादा एक बात मुझे कहनी है ये स्‍वच्‍छ-भारत के अभियान को ये सबसे बड़ी ताकत कहां से मिली है। उसके सबसे बड़े Brand Ambassador कौन है। आपका ध्‍यान नहीं गया होगा लेकिन आप अपने परिवार में याद कीजिए क्‍या हुआ था। हिन्‍दुस्‍तान में ऐसे कोटि-कोटि परिवार है जिन परिवारों में 5 साल के 10 साल के 15 साल के बालक इस स्‍वच्‍छ भारत अभियान के सबसे बड़े Ambassador बने है। ये बालक घर में कोई कूड़ा-कचरा करता है तो बच्‍चे मां-बाप को रोकते है कि नहीं, गंदगी मत करो, कूड़ा-कचरा मत फेकों, किसी पिता को गुटखा खाने की आदत है और कार का शीशा खोलता है तो बच्‍चा रोक देता है कि दादा बाहर थूकना नहीं, भारत स्‍वच्‍छ रहना चाहिए ये कार्यक्रम की सफलता उन छोटे-छोटे बालकों के कारण है। मैं, मेरे देश के भविष्‍य के प्रति, उन बालकों के प्रति अपना सर झुकाना चाहता हूं। सर झुका करके नमन करना चाहता हूं। जो बात बड़े-बड़े लोगों को समझने में देर लगती है वो भोले-भाले निर्मल मन के बालकों ने तुरंत पकड़ लिया है। और मुझे विश्‍वास है जिस देश का बालक इतना सजग हो, स्‍वच्‍छता के लिए प्रतिबद्ध हो वह देश स्‍वच्‍छ होकर रहेगा। गंदगी के प्रति नफरत पैदा होकर रहेगी।

2019, महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती हम मनाने वाले हैं और महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती स्‍वच्‍छ भारत को हमें उन्हे अर्पित करना है। महात्‍मा गांधी को 150वीं जयंती पर इससे बड़ी कोई श्रद्धांजलि नहीं हो सकती। और इसलिए अभी तो काम शुरू हुआ है लेकिन मुझे इसको आगे बढ़ाना है। इसको रोकना नहीं है, संतोष मानना नहीं है। मैंने trial के लिए, क्‍या ये काम टीम इं‍डिया कर पाती है कि नहीं कर पाती? इसके ट्रायल के लिए, एक जिसको नाप सकूं, ऐसे कार्यक्रम को मैंने यहां से घोषित किया था। किसी से सलाह-मशविरा करके घोषित नहीं किया था। जिलों से, गांवों से, जानकारियां प्राप्त कर-करके घोषित नहीं किया था। बस मेरे दिल में आया था और मैंने कह दिया था कि अगली 15 अगस्‍त तक हमारे विद्यालयों में हमारे स्‍कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय बना देंगे और बाद में जब हमने काम शुरू किया, टीम इंडिया ने अपनी जिम्‍मेदारी को समझा, ध्‍यान में आया कि इस देश में 2 लाख 62 हजार विद्यालय ऐसे थे, जिसमें सवा चार लाख से ज्‍यादा toilet बनवाने थे। ये आंकड़ा इतना बड़ा था कि कोई भी सरकार सोचती- नहीं साहब! इसके लिए समय बढ़ा दीजिए, लेकिन टीम इंडिया का संकल्‍प देखिए किसी ने भी समय बढ़ाने की मांग नहीं की और आज 15 अगस्‍त को, मैं उस टीम इंडिया का अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने भारत के तिरंगे झंडे का सम्‍मान करते हुए, इस सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और करीब-करीब सारे toilet बनाने के काम में टीम इंडिया ने सफलता पाई है। 

मैं इसके लिए राज्‍य सरकारों को अभिनंदन देता हूं, जिला इकाई में बैठे हुए सरकारी अफसरों को अभिनंदन करता हूं, शिक्षा संस्‍था में बैठे हुए नीति निर्धारक हो या संचालक हो, उन सबका अभिनंदन करता हूं। ये मुद्दा सवा चार लाख toilet बनने का नहीं है। ये मुद्दा, जो निराशा का माहौल है कुछ हो नहीं सकता है, कैसे होगा, कैसे करेंगे, ये जो माहौल है, उस माहौल के सामने यह आत्‍मविश्‍वास पैदा कर सकता है। हम भी कुछ कम नहीं हैं, टीम इंडिया पीछे नहीं हट सकती है, टीम इंडिया सफलता लेके रह सकती है, ये इसमें से संकेत मिल रहा है और इसलिए राष्‍ट्र चलता है आत्‍मविश्‍वास के भरोसे। राष्‍ट्र चलता है नए-नए संकल्‍पों की पूर्ति कर-करके, राष्‍ट्र चलता है, नए-नए सपनों को संजो करके। हम कहीं बंद नहीं हो सकते, हमें निरंतर आगे बढ़ना होता है। और इसलिए

भाइयों- बहनों हमारे देश का मजदूर, हमने योजना बनाई श्रमेव जयते। भारत में गरीब मजदूर के प्रति देखने का रवैया हमें शोभा नहीं देता है। हम कोई कोट, पैंट, टाई पहना हुआ महापुरूष मिल जाए, लम्‍बा कुर्ता जैकेट पहन करके कोई महापुरूष मिल जाए तो खड़े होकर उसका बड़ा अभिवादन करते हैं। लेकिन कोई ऑटो-रिक्‍शा वाला आ जाए, कोई पैडल रिक्‍शा वाला आ जाए, कोई अखबार बेचने वाला आ जाए, कोई दूध बेचने वाला आ जाए, इन गरीबों के प्रति हमारा देखने का भाव ठीक नहीं है। राष्‍ट्र की इस कमी को सवा सौ करोड़ देशवासियों ने अपने मन के संकल्‍प से मिटाना है। जिनके कारण हम अच्‍छे दिखते हैं, जिनके कारण हमारा अच्‍छा काम होता है, उससे बड़ा हमारा कोई हितैषी नहीं होता है। और इसलिए dignity of labour, श्रमिकों का सम्‍मान, श्रमिकों का गौरव,ये हमारा राष्‍ट्रीय कर्तव्य होना चाहिए यह हमारा राष्‍ट्रीय स्‍वभाव होना चाहिए। यह जन-जन की प्रवृति होनी चाहिए, यह जन-जन की वृत्ति होनी चाहिए। पिछले दिनों कुछ योजनाओं के तहत जो unorganised labour हैं, उनको विशेष पहचान पत्र देने का हमने अभियान प्रारंभ किया। उस पहचान पत्र के द्वारा उसको कई सुरक्षा की योजनाओं का लाभ मिलने वाला है। इन असंगठित मजदूरों की तरफ कभी देखा नहीं जाता था, उसी प्रकार से हमारे देश के मजदूरों ने अपनी मेहनत से सरकार की तिजोरी में अपना हिस्‍सा जमा करवाया। धीरे-धीरे यह रकम 27 हजार करोड़ रुपये पहुंची। लेकिन वो मजदूर बेचारा 6-8 महीने नौकरी करके कहीं और चला जाता है। फिर साल दो साल के बाद कहीं और चला जाता है। आगे जहां पैसे कटवा करके आया है, उसका कोई हिसाब-किताब रहता नहीं। पूंजी भी इतनी कम होती है कि मन नहीं करता है कि चलो 200 रुपये किराया खर्च करके फिर वापस जाकर पैसा ले आऊं। और इसके कारण 27 हजार करोड़ रुपया मेरे देश के गरीबों का, मेरे देश के मजदूरों का, उनकी पसीने की कमाई का सरकार की तिजोरी में सड़ रहा है। हमने उपाय खोजा, हमने मजदूरों को, श्रमिकों को एक special पहचान कार्ड नम्‍बर दे दिया। और उनको कहा कि अब आपका तबादला कहीं पर भी होगा, आप एक नौकरी छोड़कर कहीं पर भी चले जाएंगे, एक कारखाना छोड़कर दूसरे कारखाना चले जाएंगे, एक राज्‍य छोड़कर दूसरे राज्‍य चले जाएंगे यह नम्‍बर आपके साथ-साथ चलेगा और वो रुपये भी आपके साथ-साथ चलते जाएंगे। आपका एक रुपया कोई हजम नहीं कर पाएगा। 27 हजार करोड़ रूपया गरीबों को वापस करने की दिशा में हमने प्रयत्‍न किया।

हमारे देश में एक फैशन हो गया है। हर चीज में कानून बनाते रहो, हर चीज में कानून बनाते रहो और हमारे न्‍यायालयों को busy रखते रहो। एक कानून से दूसरा कानून उल्‍टी बात बताता हो, लेकिन एक ही विषय का कानून हो। confusion create करना यही काम हमारे यहां चलता रहा। Good Governance के लिए अच्‍छी निशानी नहीं है। और इसलिए कानून स्‍पष्‍ट हो, कानून सटीक हो, कानून कालबाह्य नहीं होना चाहिए। समाज तभी तो गति करता है। हमारे मजदूरों के लिए भिन्‍न-भिन्‍न प्रकार के 44 कानूनों के ढ़ेर, उसमें से बेचारा मजदूर अपने हित की बात कहां खोजेगा। हमने उसमें बदलाव लाया है। 44 कानूनों को चार आचार संहिताओं में समेट करके.. गरीब से गरीब, अनपढ़ से अनपढ़ मजदूर भी अपने हित की बात को पकड़ सकें, इस योजना को हमने बल दिया है।

भाइयों-बहनों हमारे देश में भ्रष्‍टाचार को ले करके बहुत बातें होती हैं। आपने देखा होगा बीमार व्‍यक्ति भी, दूसरे को स्‍वस्‍थ कैसे रहना चाहिए, उसकी Tips देने का आदत रखता है। खुद तो अपने आप को संभालता नहीं है, लेकिन हर इंसान का स्‍वभाव होता है.. तुम ऐसा करो ठीक हो जाओगे, तुम वैसा करो ठीक हो जाओगे। ये corruption भी ऐसा है, जो इसमें लिप्त है, वो भी सलाह देता है, जो इसके कारण परेशान है, वो भी सलाह देता है और एक प्रकार से एक-दूसरे को सलाह देना, यही चला है।

भाईयों-बहनों मैंने कभी ये घोषणा नहीं की है, लेकिन आज मैं हिसाब देना चाहता हूं, मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं, मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India को कहना चाहता हूं कि ये देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो सकता है। अनुभव के आधार पर कह रहा हूं, ऊपर से शुरू करना होता है।

साथ-साथ भ्रष्टाचार हमारे देश में दीमक की तरह लगा हुआ है और दीमक ऐसे फैलती चली जाती है, पहले तो दिखती नहीं है लेकिन जब Bedroom तक जुड़ जाए, कपड़े जहां लगे हो उस cupboard तक पहुंच जाए तब पता चलता है और जब दीमक से मुक्ति लेनी है तो हर square meter जमीन पर injection लगाने पड़ते हैं दवाइयों के, घर में एक जगह पर injection लगाने से काम नहीं बनता है, दीमक को अगर खत्म करना है तो हर square meter में हर महीने injection लगाते रहना पड़ता है तब जाकर के, सालों प्रयास करने के बाद दीमक से मुक्ति मिलती है। इतने बड़े देश में भी भ्रष्टाचार रूपी दीमक से मुक्ति के लिए अनेक प्रकार के कोटि-कोटि प्रयासों की आवश्यकता है और उसे किया भी जा सकता है।

कभी-कभी, मैं अगर ये कहता कि मैं LPG Gas subsidy 15 हजार करोड़ रूपया cut करने वाला हूं तो मैं दावे से कहता हूं हिंदुस्तान में इस सरकार की वाहवाही के सैंकड़ों लेख लिखे गए होते कि ये मोदी बड़ा दम वाला है कि उसने 15 हजार करोड़ रूपए की गैस की सब्सिडी को बंद कर दिया, ये आदमी है, जो बड़े कठोर निर्णय़ कर सकता है और अगर वो नहीं किया तो यार कुछ होता नहीं है, कुछ दिखता नहीं है। कभी-कभी कुछ लोगों को निराशा के गर्त में डूबने का शौक होता है, जब तक वो चार लोगों के बीच निराशा की बातें न करें, उनको रात को नींद नहीं आती है, ये उनका एक व्यसन होता है। कुछ बीमार लोग होते हैं, जिनको कोई बीमारी के लिए पूछे तो पसंद नहीं आता है, वो चाहते नहीं है कि बीमारी का पता चले और कुछ बीमार ऐसे होते हैं वो इंतजार करते हैं, यार वो आया नहीं, वो पूछने नहीं आया और फिर उसको घंटे भर वर्णन करते हैं कि ऐसा हुआ-ऐसा हुआ है, मैं देख रहा हूं कुछ लोग होते हैं जो निराशा ढूंढ़ते रहते हैं, निराशा फैलाते रहते हैं और जितनी ज्यादा निराशा फैले, उतनी उनको ज्यादा गहरी नींद आती है। ऐसे लोगों के लिए न योजनाएं होती हैं, न कार्यकलाप होते हैं और न ही सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India इनके लिए भी समय invest करने के लिए तैयार है लेकिन होता कैसे है। एलपीजी की सब्सिडी हमने Direct benefit transfer की scheme लाए, जन-धन account का फायदा लिया, आधार कार्ड का फायदा लिया और ग्राहकों के खाते में सीधी सब्सिडी पहुंचाई और इसके कारण जो दलाल थे, उनकी दुकान बंद हो गई, जो बिचौलिए थे, उनकी दुकान बंद हो गई, जो कालाबाजारी थे, उनकी दुकान बंद हो गई। सही व्यक्ति को सही लाभ, किसी का एक रुपया काटा नहीं है। बड़ी वाहवाही हो, ऐसी घोषणाएं नहीं की, व्यवस्था में सुधार किया और मैं आज मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India को कहना चाहता हूं, इसके कारण करीब-करीब 15 हजार करोड़ रुपया, हर साल का 15 हजार करोड़ रुपया जो कि गैस सिलेंडर के नाम से चोरी होता था, वो बंद हो गया, भ्रष्टाचार चला गया मेरे देशवासियों। लगता होगा, काम कैसे होते हैं मेरे भाइयों-बहनों 15 हजार करोड़ रुपया भारत जैसे देश के लिए सामान्य बात नहीं होती और वो हमने करके दिखाया है और हमने खुली website बनाई, डीलरों का यहां board लगवाया। इसके बावजूद भी किसी की भी शिकायत है तो आधी रात को उसको गैस सिलेंडर मिल जाएगा लेकिन देश को लूटने वालों के लिए इजाजत नहीं है, गरीबों के पैसे लूटने वालों के लिए इजाजत नहीं है क्या ये काम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का काम नहीं, है कि नहीं? मेरे भाइयों-बहनों देश से एक request की थी मैंने मेरे देशवासियों से, कि अगर आप आर्थिक रूप से संपन्न हैं तो आप एलपीजी सब्सिडी क्यों लेते हैं, ये 500-700 रुपया आपके लिए क्या जरूरत है। 500-700 रुपया तो आप चाय-पान में एक दिन में खर्च करने वाले लोग हैं। मैंने अभी बात शरू की है, अभियान नहीं चलाया है क्योंकि Team India पर मेरा भरोसा है जैसे-जैसे बात पहुंचेगी परिणाम मिलता जाएगा लेकिन आज मैं गर्व से कहता हूं कि एलपीजी गैस सिलेंडर की सब्सिडी give it up का movement चलाया। अब तक 20 लाख लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी भाइयों। ये आंकड़ा छोटा नहीं है, ये छोटा आंकड़ा नहीं है। हम मंदिर में भी प्रसाद की कतार में भी खड़े रहते हैं तो कभी मन करता है कि छोटे भाई के लिए भी और एक प्रसाद दे दे, ये हमारी प्रकृति है लेकिन और ये 20 लाख कोई अमीर घराने के लोग नहीं हैं, सामान्य मध्यम वर्ग, कोई शिक्षक, पेंशन पर गुजारा करता है लेकिन जब उसने सुना कि ये सिलेंडर किसी गरीब परिवार को जाने वाला है उसने अपनी सब्सिडी छोड़ दी। मेरे भाइयों-बहनों गरीबों के कल्याण के लिए जब 20 लाख गैस सिलेंडर उस गरीब परिवार में पहुंचेंगे, जहां का रसोड़ा kitchen धुंए से भरा हुआ रहता है, आप मुझे बताइए उस मां को कितना सुख मिलेगा, छोटे-छोटे बच्चे धुंए के कारण रोते रहते हैं, उनको कितना सुख मिलेगा। काम सही दिशा में करने से परिणाम मिलता है। भाइयों-बहनों अगर मैं कोयले की चर्चा करूंगा तो कुछ political पंडित उसको राजनीति की तराजू से तोलेंगे, ये जगह उस काम के लिए नहीं है और इसलिए मैं सभी political पंडितों को प्रार्थना करता हूं कि मैं जिस कोयले की चर्चा करने जा रहा हूं, उसको राजनीति की तराजू से कृपा करके मत तोलिए। ये राष्ट्र की संकल्प शक्ति का तकाजा है। जब CAG ने कहा कि कोयले पर्ची से कोयला की खदान देने के कारण 1 लाख 76 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। हम भी चुनाव में बोलते थे लेकिन मन में रहता था कि यार इतना तो नहीं हुआ होगा, बोलते तो थे लेकिन मेरे भाइयों-बहनों हमने समय-सीमा के अंदर तय किया कि कोयला हो, Spectrum हो और कोई खनिज हो अब उसकी नीलामी की जाएगी, auction किया जाएगा और मेरे प्यारे देशवासियों ये Team India का पराक्रम देखिए, सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India का संकल्प देखिए, समय-सीमा में कोयले का Auction हुआ और करीब-करीब 3 लाख करोड़ रुपया देश के खजाने में आएंगे। भाइयों-बहनों आप अपनी आत्मा से पूछिए, क्‍या भ्रष्‍टाचार गया कि नहीं गया, दलालों का ठेका गया कि नहीं गया, हिन्‍दुस्‍तान की संपत्‍ति को लूटने वालों के दरवाजे बंद हुए कि नहीं हुए? मैंने कोई भाषण नहीं दिया था, करके दिखाया।

Spectrum में वहीं हुआ। अभी एफएम रेडियो का auction चल रहा है, बड़े-बड़े लोग परेशान है। मुझ पर बहुत दबाव डाला गया कि मोदी जी, एफएम रेडियो, रेडियो तो सामान्‍य व्‍यक्‍ति को काम आता है, कोई कमाई नहीं होती है। आप एफएम रेडियो का auction क्‍यों करते हैं। बहुत दबाव डाला गया था। हर प्रकार से मेरा ध्‍यान आकर्षित करने का प्रयास हुआ था। लेकिन हमने कहा, सवा सौ करोड़ देशवासियों की टीम इंडिया transparency चाहती है, पारदर्शिता चाहती है और अभी एफएम रेडियो के करीब-करीब 80-85 शहरों का auction चल रहा है। परसों जब मैंने पूछा auction में हजार करोड़ रुपयों से भी ऊपर चला गया था। ये पैसा गरीब के काम आने वाला है। भाइयों-बहनों, देश को ठेकेदारों ने कैसे चलाया, कैसे लूटा, नीतियों पर प्रभाव पैदा किया। हमारे देश में कैसा कारोबार किया गया है। विदेश से जो कोयला आता है, वो कोयला समुद्री तट के बिजली के कारखानों को नहीं दिया जाता है। उसको जहां कोयले की खदानें हैं, उसके अगल-बगल के कारखानों को देने के लिए वहां से transport किया जाता है और कोयले की खदानों का कोयला है उसको transport करके समुद्र तट के कारखानों तक ले जाया जाता है। इस देश के छोटे बालक को भी समझ आ सकता है कि भाई इधर का माल उधर और उधर का माल उधर के बजाए, जिसका जहां है वहां लगाओ। भाइयों-बहनों हमने निर्णय बदल दिया है। कारखाने के नजदीक में जो है उसका लाभ सबसे पहले उसे मिले और मैं कहना चाहूंगा कि एक छोटे से इस निर्णय ने दलालों की दुकानें बंद की और सरकार की तिजोरी में 1100 करोड़ रुपया जमा हो गया मेरे भाइयों और बहनों, और ये हर वर्ष होगा।

भ्रष्‍टाचार एक प्रकार से व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा बन गया है। जब तक व्‍यवस्‍था के हिस्‍सों से उसे उकाटा नहीं जाएगा, भाइयों और बहनों मैं आज तिरंगे झंडे की साक्षी से बोल रहा हूं, लाल किले की प्राचीर से बोल रहा हूं। सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों को समझ करके बोल रहा हूं। 15 महीने हो गए, आपने दिल्‍ली में जो सरकार बैठाई है, उस सरकार पर एक नए पैसे के भ्रष्‍टाचार का आरोप नहीं है और मैं, मेरे देशवासियों, आपने, आपने मुझे जिस काम के लिए बैठाया है इस काम को पूरा करने के लिए हर जुर्म को सहता रहूंगा, हर अवरोधों को झेलता रहूंगा। लेकिन आपके आशीर्वाद को लेकर के भ्रष्‍टाचार मुक्‍त भारत के सपने को साकार करके रहूंगा, ये आपको मैं कहने आया हूं। लेकिन मैंने कहा था, ये दीमक है। सिर्फ दिल्‍ली सरकार से भ्रष्‍टाचार जाए इससे बात बनने वाली नहीं है। अभी-भी छोटे-छोटे स्‍थान पर परेशानियां हो रही हैं। गरीब आदमी इन छोटे लोगों की परेशानी से परेशान है। इसके लिए, हमारी एक राष्‍ट्रीय चेतना को जगाने की आवश्‍यकता है। हमने भ्रष्‍टाचार के इस रूप से भली-भांति उसको समझ करके, जन-जन को उसकी मुक्‍ति के लिए जोड़ना है और तब जाकर के इस कलंक को हम मिटा सकते हैं।

भाइयों-बहनों, मुझे ये भी कहना है, काला धन। काले धन के लिए इतने कम समय में हमने एक के बाद, अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार बनने के पहले दिन सुप्रीम कोर्ट मार्गदर्शन में SIT बना दी। तीन साल से लटका हुआ काम हमने पहले ही सप्‍ताह में पूरा कर दिया, वो SIT आज काम कर रही है। मैं जी-20 समिट में गया, दुनिया के वो देश वहां मौजूद थे, जिनकी मदद से काला धन वापस आ सकता है। जी-20 समिट में भारत के आग्रह पर काले धन के खिलाफ प्रस्‍ताव किया गया और हर देश एक-दूसरे को मदद करेगा, काला धन देशों को वापस पहुंचाने के लिए, इसका संकल्‍प लिया गया। अमेरिका के साथ FATCA का कानून, हमने नाता जोड़ दिया। हमने विश्‍व के उन देशों के साथ उस प्रकार की संधियां की है, ताकि वो देश, अपने पास इस प्रकार का कोई भारतीय नागरिक का धन हो तो उसकी जानकारियां हमें real time में देता रहे। एक के बाद एक कदम उठाते रहे। भाइयों-बहनों हमने एक कठोर कानून पारित किया। अब जब कानून पारित हो गया, तो हर हफ्ते कोई न कोई हमारी सरकार का संपर्क करता है और कहता है आपकी सरकार ने बड़ा जुल्‍म किया है। ऐसा कठोर कानून बना दिया, कोई कहता है कि ऐसा काला कानून बना दिया। इसके कारण अफसरों का जुल्‍म बढ़ जाएगा। भाइयों-बहनों कभी-कभार जब बीमारी बड़ी भयानक होती है तो ऐसे इंजेक्‍शन की जरूरत पड़ती है और जब इंजेक्‍शन लेते हैं, तो डॉक्‍टर भी कहता है कि side effect होगा। लेकिन यह बीमारी इतनी भयंकर है कि side effect झेलने के बाद भी इसी दवा से मुक्ति मिलेगी। मैं जानता हूं यह काला धन का हमने कानून बनाया है, उसके कारण बहुत लोग परेशान हैं, बहुत लोगों को मुसीबत दिखाई दे रही है। काला धन थोड़ा dilute हो, थोड़ा नियमों में छूट आ जाए, इसके लिए हमारे तक संदेश पहुंचाए जाते हैं। मैं इन Team India सवा सौ करोड़ देशवासी मैं आज कहना चाहता हूं, वो side effect की तैयारी के साथ भी काले धन के खिलाफ कठोरता से काम लेने के दिशा में हम आगे बढ़े और बढ़ेंगे और इतना हो गया है काला धन वापस लाने की एक लम्‍बी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इतना तो हो गया है कि अब कोई काला धन बाहर भेजने की हिम्‍मत नहीं करता है। यह तो फायदा हुआ ही हुआ है। कोई माने या न माने। इतना ही नहीं, अभी कुछ दिनों में जब यह समय दिया है कि आप अपना घोषित कर सकते हो। मैं आज कह सकता हूं करीब 65 सौ करोड़ रुपया अब अघोषित आय। लोगों ने आकर के घोषित सामने से करना शुरू कर दिया। यह पैसा हिंदुस्‍तान की तिजोरी में आएगा। भारत के गरीब के काम आएगा। और भाइयों-बहनों आपको जो मैंने विश्‍वास दिया है, उसे पूरा करने के लिए पूरे संकल्‍प के साथ हम आगे बढ़ेंगे।

भाइयों-बहनों सीबीआई के द्वारा हमारी सरकार बनने के पहले एक वर्ष में भ्रष्‍टाचार के सिर्फ 800 केस हुए थे। 800.. भाइयों-बहनों हमने सत्‍ता में आने के बाद हम तो नये हैं.. अब तक One Thousand Eight Hundred – 1800 केस हम दर्ज करा चुके हैं और अफसरों के खिलाफ हमने कार्रवाई शुरू की है। सरकार के मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। आप कल्‍पना कर सकते हैं हमारे आने से पहले एक साल में 800 और हमारे बाद 10 महीने के भीतर-भीतर 1800, यह बताता है कि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ने का हमारा माद्दा कैसा है। ये दिखाता है कि हमारी भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता, press conference करके हमने नहीं जताई है हमने धरती पर कदम उठा करके जताई है और हमने परिणाम पाया है। हमने व्‍यवस्‍थाओं को बदलने की कोशिश की है, मनरेगा, सीधा जनधन एकाउंट में पैसा कैसे जाए, बच्‍चों की स्‍कॉलरशिप, सीधा पैसा बैंक के एकाउंट में कैसे जाए, कम से कम दलाली कैसे हो, उस दिशा में हमने काम प्रारंभ किया है और मुझे विश्‍वास है कि इन कामों के कारण देश, उन बातों को पूर्ण कर पाएगा। मेरे किसान भाइयों-बहनों, गत वर्ष वर्षा का संकट हुआ था, जितनी मात्रा में वर्षा चाहिए नहीं हुई थी, देश के अर्थतंत्र को भी नुकसान हुआ था और किसानों को भी नुकसान हुआ था। उसके बावजूद भी महंगाई को नीचे लाने में हम सफल हुए। ये मानना पड़ेगा कि हमारे आने से पहले महंगाई double digit थी, दो अंकों में चलती थी। हमारे आने के एक के बाद एक प्रयासों के कारण बारिश कम होने के बावजूद भी, किसान परेशान हुआ, उसके बावजूद भी, महंगाई को दो अंकों से नीचे लाते-लाते, करीब 3-4 percent तक लाने में हम सफल हो गए। उसको और नीचे लाए जाने का प्रयास हमारा जारी रहेगा क्‍योंकि गरीब से गरीब की थाली में संतोषजनक खाना मिले, इन सपनों को ले करके हम चल रहे हैं।

लेकिन हमारे देश के कृषि जीवन को एक बहुत बड़े बदलाव की आवश्‍यकता है। जमीन कम होती जा रही है, परिवारों में जमीन बंटती चली जा रही है, टुकड़े छोटे हो जा रहे हैं। हमारी जमीन की उपजाऊ ताकत बढ़ानी पड़ेगी, productivity बढ़ानी पड़ेगी, किसान को पानी चाहिए, किसान को बिजली चाहिए। उस सपने को पूरा करने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। पचास हजार करोड़ रुपया, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए हमने लगाने का तय किया है और खेत तक पानी कैसे पहुंचे और पानी बचाना भी होगा। save water, save energy, save fertilizer, इस मंत्र को ले करके हमने हमारे कृषि जीवन में आंदोलन खड़ा करना है और इसलिए हम उस काम को आगे बढ़ाने के लिए per drop more crop एक-एक बूंद से अधिकतम फसल और सफल किसान इस काम का आगे बढ़ाने की दिशा में, ये धन खर्च करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। पिछले दिनों जब ओले गिरे, हमने 50 प्रतिशत उसको जो क्षति हुई थी, उस क्षति पूर्ति में वृद्धि कर दी। 60 साल में इतना बड़ा jump कभी लगा नहीं, इतना ही नहीं पहले अगर कभी नुकसान होता था तो 50 प्रतिशत नुकसान हो, तभी वो मुआवजे के दायरे में आता था, हमने इसको कम करके 30 प्रतिशत कर दिया। इससे बड़ा किसान को मदद का काम, पिछले 60 साल में कभी हुआ नहीं है। किसान को urea चाहिए, हमने नीम कोटिंग urea, मैं फिर एक बार कहता हूं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ कैसे लड़ाई लड़ी जा सकती है, नीम कोटिंग, नीम कोटिंग ये कोई मोदी के दिमाग की पैदावार नहीं है, ये वैज्ञानिकों से सुझाया हुआ विचार है, और ये विचार सिर्फ मेरी सरकार के सामने आया ऐसा नहीं, पहले भी सरकारों के सामने आया है।

हमारे देश में किसानों के नाम urea जाता है, अरबों-खरबों का urea जाता है, लेकिन वो यूरिया 15%, 20%, 25% chemical की फैक्‍ट्ररियों में चला जाता है, raw material के रूप में। नाम किसान का होता है, दलालों के माध्‍यम से चोरी होती है। नीम coating शत-प्रतिशत किये बिना यह चोरी रोकी नहीं जा सकती। और इसलिए हमने सरकार की तिजोरी पर बोझ पड़े तो भी, यूरिया का 100% नीम coating करने का काम पूरा कर दिया। और इसके कारण अब यह यूरिया खेती के सिवा किसी काम नहीं आ सकता। कोई chemical फैक्‍ट्री इसमें से कुछ नहीं निकाल सकती। और इसलिए किसान को जितना यूरिया चाहिए, उतना मिलेगा और नीम coating होने के कारण उसको जो nutrition value चाहिए जमीन में 10% कम यूरिया उपयोग करते हुए भी उसको इसका लाभ मिलने वाला है, आने वाले season में मेरे देश के किसानों को यूरिया का एक नया लाभ। और मैं तो सभी किसानों को कहता हूं, कोई गलती से भी बिना नीम coating का यूरिया आपको दिखाता है, तो आप मान लेना कि वो सरकार के द्वारा अधिकृत नहीं है। किसी ने पीले रंग का कोई पाऊडर आपको दे दिया है, आप हाथ मत लगाना।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों मैं कहता हूं कि भारत का अगर विकास करना है तो पूर्वी हिंदुस्‍तान के विकास के बिना भारत विकसित नहीं हो सकता। भारत का पश्चिमी छोर, यही अगर आगे बढ़ेगा, तो हिंदुस्‍तान कभी आगे नहीं बढ़ सकता। हिंदुस्‍तान तब आगे बढ़ेगा, जब हमारा पूर्वी उत्‍तर प्रदेश ताकतवर बने, हमारा बिहार ताकतवर बने, हमारा पश्चिम-बंगाल ताकतवर बने, हमारा असम, हमारा ओडि़शा, हमारा north east, यह भू-भाग हिंदुस्‍तान का, यह ताकतवर बनना चाहिए। और इसलिए infrastructure का मामला हो, Rail connectivity का मामला हो, Digital Connectivity का मामला हो, हमने हर बात में पूर्वी भारत में ध्‍यान केंद्रित किया है और पूर्वी भारत में ध्‍यान करने में, हम गैस की पाइप-लाइन लगा रहे हैं। किसी ने सोचा होगा कि जिन राज्‍यों में kitchen में पीने का पानी अभी Tap से आना मुश्किल लगता है, वहां गैस का पाइप तक पहुंचाने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। और चार यूरिया Fertilizer के कारखाने जो पूर्वी भारत में बंद पड़े थे, वहां के नौजवान बेरोज़गार हुए थे, वहां का किसान परेशान हो रहा था। हमने नई यूरिया नीति बनाई, हमने गैस supply की नई नीति बनाई और उसका परिणाम है कि गोरखपुर हो, बरेली हो, तालचेर हो, सिंदरी हो, यह सारे पूर्व से जुड़े हुए, इनके Fertilizer के कारखानों को पुनर्जीवित करके नौजवानों को रोज़गार देना और किसानों को Fertilizer देना, उसकी दिशा में हम काम कर रहे हैं। भाइयों-बहनों देश में सेना के जवानों के लिए, जवानों के कल्‍याण के लिए विभाग होता है। लेकिन इस देश में जितना माहात्म्य जवान का है, उतना ही माहात्म्य किसान का है। 60 साल में हमने क्‍या किया है, हमने कृषि के आर्थिक पहलू पर बल दिया है। हमारी कृषि अच्‍छी हो, कृषि का विकास हो, और सरकार के मंत्रालय का नाम भी कृषि मंत्रालय रहा। भाइयों-बहनों कृषि मंत्रालय का जितना महत्‍व है, उतना ही महत्‍वपूर्ण समय की मांग है, किसान कल्‍याण का भी महत्‍व है। अकेले कृषि विकास यह बात, ग्रामीण जीवन के लिए, कृषि जीवन के लिए अधूरी है, वो पूर्ण तब होगी जब किसान-कल्‍याण को भी जोड़ा जाए। और इसलिए भाईयों-बहनों अब भारत सरकार का जो मंत्रालय कृषि मंत्रालय के रूप में जाना जाता था, वो कृषि मंत्रालय एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के रूप में जाना जाएगा और आने वाले दिनों में कृषि के लिए जैसे योजना बनेगी, वैसे ही किसान कल्‍याण की भी योजना बनेगी, ताकि मेरे किसान को जो व्‍यक्तिगत जीवन में समस्‍याएं झेलनी पड़ती हैं, मुसीबतों से गुजरना पड़ा है, तो सरकार एक स्‍थायी व्‍यवस्‍था के रूप में उसको मदद करने की दिशा में प्रयास करेगी। भाईयों-बहनों आने वाले दिनों में एक काम की ओर मैं ध्‍यान देना चाहता हूं, आजादी के इतने वर्ष हो गए लेकिन आज भी हमारे देश में करीब साढ़े 18 हजार, 18,500 गांव ऐसे हैं कि जहां बिजली का तार नहीं पहुंचा है, बिजली का खंभा नहीं पहुंचा है। आजादी का सूरज, आजादी का प्रकाश, आजादी के विकास की किरणें, 18500 गांव वंचित हैं। अगर पुराने तरीके से चलते रहे तो शायद इन 18,500 गावों में खंभा पहुंचाते-पहुंचाते, बिजली का तार पहुंचाते-पहुंचाते, 10 साल लग जाएंगे। देश, 10 साल इंतजार करने के लिए तैयार नहीं है। मैंने सरकार के मुलाजिमों की meeting ली, मैंने उनको पूछा, क्या करोगे तो कोई कहता है साहब 2019 तक कर देंगे, कोई कहता है 2022 तक कर देंगे। बोले घने जंगलों में है। फलानी जगह पर है, पहाड़ों में है, बर्फीली प्रदेश में है, कैसे पहुंचे?

सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India का संकल्प है, इन 18500 गांवों में 1000 दिन के अंदर बिजली का खंभा, बिजली का तार और बिजली पहुंचे ये काम पूरा करके दिया जाएगा और मैं राज्यों से आग्रह करता हूं कि हम इसको करके दिखाएं और सब राज्यों में ये बाकी नहीं है, कुछ ही राज्यों में ज्यादा बाकी है। अगर मैं उन राज्यों का नाम दूंगा तो फिर मेरी बात को political तराजू से तौला जाएगा, राजनीतिक छींटाकशी होगी और इसलिए मैं उस चक्कर में पड़ना नहीं चाहता और इसलिए मैं कहता हूं सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India, लालकिले से ये संकल्प करती है कि राज्यों के सहयोग से, स्थानीय इकाइयों के सहयोग से, आने वाले 1000 दिन में 18500 गांवों में हम बिजली पहुंचाने का काम करेंगे। 


हमारे देश में जैसे किसान कल्याण एक चिंता का विषय मैंने हाथ लगाया है, उसी प्रकार से जहां से देश को ताकत मिलती है, जहां से खनिज संपदा निकलती है। चाहे कोयला निकलता हो, चाहे बॉक्साइट निकलता हो, चाहे और खनिज संपदा निकलती हो लेकिन वहां का जो क्षेत्र है, उसके विकास के प्रति उदासीनता रहती है। आप वहां के लोगों का जीवन देखो, हमारे देश को तो वो समृद्ध बनाने के लिए पसीना बहाते हैं लेकिन उस क्षेत्र का विकास नहीं होता है और इसलिए हमने जहां से खनिज निकलती है, वहां के मजदूरों के विकास के लिए, वहां के किसानों के विकास के लिए एक विशेष योजना बनाई है और हर वर्ष करीब-करीब 6 हजार करोड़ रुपया उन-उन इलाकों के लिए खर्च किया जाएगा जो ज्यादातर मेरे आदिवासी भाइयों के इलाके में है, मेरे आदिवासी क्षेत्रों में है। कोयला कहां है, आदिवासियों के बीच में है, वहां का विकास हो उस पर हमने काम शुरू किया है।

भाईयों-बहनों, 21वीं सदी में देश को आगे बढ़ाने में हमारी युवा शक्ति का महत्व है और आज मैं घोषित करना चाहता हूं। पूरे विश्व की तुलना में हमें आगे बढ़ना है तो हमारे युवकों को हमें प्रोत्साहित करना होगा, उनको अवसर देना होगा। हमारे युवक नए उद्योगकार कैसे बने, हमारे युवक, नए उत्पादक कैसे बने, पूरे देश में इन नए उद्यमियों के द्वारा एक Start up का पूरा Network कैसे खड़ा हो? हिंदुस्तान का कोई जिला, हिन्‍दुस्‍तान का कोई ब्लॉक ऐसा न हो जहां आने वाले दिनों में नए Start up शुरु न हुए हों। क्या भारत यह सपना नहीं देख सकता कि हम दुनिया में, Start up की दुनिया में भारत नंबर एक पर पुहंचेगा, आज हम नहीं हैं। भाईयों और बहनों इस Start up को मुझे बल देना है और इसलिए मेरा संकल्प है आने वाले दिनों में Start up India और देश के भविष्य के लिये Stand Up India! Start Up India! Stand up India… यह Start Up India! Stand Up India! इस काम को जब मैं आगे लेकर जाना चाहता हूं तब मेरे भाइयों-बहनों हमारे देश में पिछले एक साल में बैंक के लोगों ने बहुत बड़ा पराक्रम किया.. और जब आप अच्छा करते हो तो मेरी जरा अपेक्षाएं भी ज्यादा बढ़ जाती है। मेरे बैंक के मित्रों बाबा साहब आंबेडकर की सवा सौवीं जयंती का वर्ष 125वीं जयंती का वर्ष, सवा लाख बैंक की ब्रांच हैं। क्या हमारे बैंक की ब्रांच.. ये जो मेरा Start Up India का कार्यक्रम है, उसकी और कोई योजनाएं बनेंगी.. लेकिन हर ब्रांच यह संकल्प करे और आने वाले दिनों में इसको पूरा करे कि अपने बैंक के ब्रांच के इलाके में हर ब्रांच जहां, Tribal बस्ती हो वहां मेरे आदिवासी भाई को जहां, आदिवासी बस्ती नहीं हैं वहां मेरे दलित भाई को और हर ब्रांच एक दलित को या एक आदिवासी को Start Up के लिये लोन दें Financial मदद करें औऱ एक साथ देश में सवा लाख मेरे दलित उद्योगकार पैदा हों। इस देश में Tribal बस्ती में मेरे आदिवासी उद्योगकार पैदा हों। ये काम हम कर सकते हैं Start Up को एक नया Dimension दे सकते हैं। और दूसरा ये सवा लाख ब्रांच.. क्या विशेष योजना.. महिला उद्यमी के लिये बना सकती हैं। सवा लाख ब्रांच, सवा लाख महिला उद्यमी उनके Start Up को Promote करें उनको मदद करें। आप देखिए, देखते ही देखते हिन्दुस्तान के कोने कोने में Start Up का जाल बिछ जाएगा। नये उद्योगकार तैयार होंगे। कोई एक कोई दो कोई कोई चार को नौकरी देगा और देश के आर्थिक जीवन में बदलाव आएगा। भाइयों बहनों देश में जब पूंजी निवेश होता है तो हम एक बात पर आग्रह रखते हैं कि Manufacturing का काम हो और ज्यादा से ज्यादा Export हो और उसके लिये पूंजी निवेश करने वालों को सरकार का आर्थिक विभाग अनेक नई - नई स्कीम देता है। इसका अपना महत्व है इसको बनाए रखना है। लेकिन आज मैं एक नई बात लेकर करे आगे बढ़ना चाहता हूं। हमारे देश में जो पूंजी निवेश हो, Manufacturing Sector में पूंजी निवेश हो, उसमें सरकार की मदद के जो Parameter है उसमें एक महत्वपूर्ण Parameter यह रहेगा कि आप जिस उद्योग को ला रहे हो उसमें आप अधिकतम - अधिकतम लोगों को अगर रोज़गार देंगे तो आपको आर्थिक Package अलग प्रकार का मिलेगा। सरकार की सहायता रोज़गार के साथ जोड़कर के नई इकाइयों के लिये सरकार अब योजना बनाएगी। देश में रोज़गार के अवसर बढ़ें, उस पर हम बल देना चाहते हैं। Skill India, Digital India इन सपनों को पूरा करने की दिशा में हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं। भाइयों-बहनों, भ्रष्टाचार का एक क्षेत्र है नौकरी। गरीब से गरीब व्यक्ति चाहता है कि बेटे को नौकरी मिले। और हमने देखा है जब नौकरी के लिये Interview का कॉल आता है तो नौजवान किसी को ढूंढता है कि मेरा रेलवे में Interview आया है, टीचर में Interview आया है, टूल का Interview आया है, ड्राइवर का Interview आया है, कोई सिफारिश के लिये किसके पास जाऊं विधवा मां भी सिफारिश के लिये जगह सोचती है। क्‍यों, क्‍योंकि हमारे यहां merit से भी ज्‍यादा interview के कारण व्‍यक्‍ति के साथ न्‍याय और अन्‍याय के खेल खेले जाते हैं और कहा जाता है कि interview में फेल हो गए। मैंने अभी तक ऐसे मनोवैज्ञानिक नहीं देखे हैं कि दो मिनट का interview करें और मनुष्‍यों को पूरा जांच लें। भाइयों-बहनों, मेरे मन में कई दिनों से चल रहा है एक गरीब मां का बेटा है। कम शिक्षा पाया हुआ व्‍यक्‍ति, जिसे छोटी-छोटी नौकरियों की जरूरत है। क्‍या उसको interview देना जरूरी है। क्‍या बिना interview के नौकरी नहीं मिल सकती है। क्‍या online उसकी मार्कशीट के आधार पर, ऑनलाइन उसकी मार्कशीट के आधार पर यह तय हो कि हमें 500 लोगों की जरूरत, पहले 500 लोग कौन है। हमें 2000 की जरूरत है, पहले 2000 कौन है। हां, जहां पर physical fitness की testing है, उसके दायरे अलग हो, उसकी पद्धति अलग हो। जहां ऊपर की नौकरियां है, जहां पर personality का महत्‍व रहता है, appearance का महत्‍व रहता है, लेकिन छोटी-छोटी। मैं तो देख रहा हूं रेलवे की नौकरी के लिए नागालैंड, मिजोरम से लोग exam देने के लिए, interview देने के लिए मुंबई तक बेचारे दौड़ते हैं। ये मुझे बीमारी बंद करनी है। मैं आग्रह करता हूं राज्‍य सरकारों को, मैं आग्रह करता हूं सरकार के मेरे सभी साथियों को कि हम छोटी-छोटी नौकरियों से ये interview हो सके उतना जल्‍द बंद करें। merit के आधार पर दें। देश में से भ्रष्‍टाचार जो गरीब आदमी को परेशान करता है, उसे उसको मुक्‍ति मिलेगी और उसको हमें पूरा करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए, ये मेरा आग्रह है।

मेरा देश चैन से सोता है। सवा सौ करोड़ देशवासी चैन की नींद सोते हैं। उसका कारण हमारे देश के जवान सीमा पर अपने आप को बलि चढ़ाने के लिए प्रति पल तैयार रहते हैं। कोई देश, अपनी सेना का मूल्‍यांकन कम नहीं आंक सकता है। सवा सौ करोड़ देशवासियों की टीम इंडिया, उनके लिए भी मेरे देश का हर फौजी, हर जवान, हर सैनिक एक राष्‍ट्र की शक्‍ति है, राष्‍ट्र की संपत्‍ति है, राष्‍ट्र की ऊर्जा है।

कई वर्षों से कई सरकारें आई और चली गई। one rank one pension ये विषय हर सरकारों के सामने आया है। हर सरकारों के सामने प्रस्‍ताव रखे गए हैं। हर सरकारों ने छोटे-मोटे वचन भी दिए हैं, वादे भी किए हैं, लेकिन समस्‍या का समाधान नहीं हुआ है। मेरे आने के बाद भी अभी तक मैं इसको कर नहीं पाया। मैं आज मेरे सेना के सभी जवानों को विश्‍वास फिर से एक बार दे रहा हूं और ये बात, एक व्‍यक्‍ति नहीं बोल रहा है। सवा सौ करोड़ टीम इंडिया की तरफ से मैं कह रहा हूं, तिरंगे की छत्रछाया में कह रहा हूं। लाल किले की प्राचीर से कह रहा हूं। मेरे सेना के जवानों, सिद्धांतत: one rank, one pension हमने स्‍वीकार किया हुआ है। लेकिन इसके संगठनों से बातचीत का दौर चल रहा है। हम चाहते हैं अंतिम दौर में ये जहां तक पहुंची है। संपूर्ण राष्‍ट्र के विकास को ध्‍यान में रखते हुए हर किसी को न्‍याय मिले। इस बात को ध्‍यान में रखते हुए 20-20, 25-25 साल से लटकी हुई समस्‍या का हमने रास्‍ता खोजना है। मुझे विश्‍वास है कि जिस विश्‍वास के साथ वार्ता चल रही है, मैं सुखद परिणाम की आशा करता हूं और इसलिए मैं फिर एक बार विश्‍वास दिलाता हूं कि सिद्धांतत: इस सरकार ने one rank , one pension की बात को स्‍वीकार किया है। उसकी Nitty gritty को देख करके लागू कैसे किया जाए, उसके लिए संबंधित लोगों से बातचीत करके हमारी बात को आगे हम बढ़ा रहे हैं।



भाइयो-बहनों, 2022, भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। भारत की आजादी के 75 साल, 2022, 15 अगस्‍त को मना करके चुप नहीं होना है। आज ही, आज इसी 15 अगस्‍त को, 2022, 15 अगस्‍त के लिए हमें संकल्‍प लेना है। हिन्‍दुस्तान के 6 लाख गांव, हर गांव एक सपना तय करे, संकल्‍प तय करे कि 2022 को हमारे गांव को इस समस्‍या से हम मुक्‍त कर देंगे।

सवा सौ करोड़ देशवासी अपने जीवन में, 2022 भारत की आजादी के 75 साल हम भी एक संकल्‍प करें, हर नागरिक एक संकल्‍प करे कि मैं देश की भलाई के लिए, समाज की भलाई के लिए इस काम को करुंगा। एक बार मेरे सवा सौ करोड़ देशवासी एक संकल्‍प ले करके आगे बढ़ें तो 2022 का जब सवेरा होगा 15 अगस्‍त का, हमारे देश के लिए मर-मिटने वाले आजादी के सैनिकों, उनकी आत्‍मा जब देखेगी तो देश ने सवा सौ करोड़ संकल्‍पों को पूरा किया होगा। 6 लाख गांव ने 6 लाख सपनों को पूरा किया होगा। शहरों ने, महानगरों ने, सरकार के हर विभाग ने, सरकार की हर इकाई ने एक-एक संकल्‍प ले करके अभी से जुट जाना है और अब हमारा कोई literature ऐसा न हो, हमारी कोई बात ऐसी न हो जिसमें 2022, 15 अगस्‍त को दोहराया न जाए। जिसमें आजादी के 75 साल का संकल्‍प को दोहराया न जाए। एक momentum खड़ा करना चाहिए।

आजादी का आंदोलन, भाइयो-बहनों, दशकों तक चला, आजादी सामने नहीं दिखती थी तो 1910 में भी कोई आजादी की बात करता था, बीस में करता था, तीस में भी करता था। दशकों तक एक बात को दोहराया गया तब आजादी प्राप्‍त हुई। स्‍वाभिमानी, गौरवशाली, समृद्ध राष्‍ट्र के लिए हमें सक्षम-भारत बनाना है, समृद्ध-भारत बनाना है, स्‍वस्‍थ-भारत बनाना है, सुसंस्कृत-भारत का सपना हमें पूरा करना है। स्‍वाभिमानी भारत बनाना है, श्रेष्‍ठ भारत बनाना है। 2022 तक इस देश में कोई गरीब बिना घर के न रहे। 24 घंटे बिजली पहुंचाने की दिशा में हमें सफल होना है। हमारा कृषक सबल हो, हमारा श्रमिक संतुष्‍ट हो, हमारी महिलाएं सशक्‍त हों, हमारे युवा स्‍वाबलंबी हों, हमारे बुजुर्ग सकुशल हों, और हमारे गरीब सम्‍पन्‍न हों, समाज में कोई पिछड़ा न रहे। हमारे हर किसी के अधिकार समान हो, और पूरे भारतीय समाज में समरसता का माहौल हो, इसी सपने के साथ मैं फिर एक बार आजादी के पावन-पर्व पर आजादी की 75वीं वर्षगांठ एक निश्चित role में आपके साथ, आगे बढ़ाने की तैयारी के साथ सवा सौ करोड़ देशवासियों को हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे साथ पूरी ताकत से बोलेंगे-

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

 

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्, वंदे मातरम्।

 

जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद।
Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
‘Have to isolate dimaagi Naxals’: PM Modi in Independence Day speech from Red Fort

Media Coverage

‘Have to isolate dimaagi Naxals’: PM Modi in Independence Day speech from Red Fort
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Through the efforts and hard work of 140 crore citizens, we must achieve the goal of Viksit Bharat: PM Modi on 80th Independence Day at Red Fort
August 15, 2026

मेरे प्यारे देशवासियों,

आज हम सब 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आज हर दिलों की धड़कन वंदे मातरम के नाद से गूंज रही है। आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है और देश उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर के आज आगे बढ़ रहा है। आप सबको स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। देश आज उन महान सपूतों का पुण्य स्मरण करती है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए त्याग, बलिदान की पराकाष्‍ठा की। अपने तप, त्याग और बलिदान से आजादी के एकमात्र लक्ष्य को लेकर के अपनी पूरी जिंदगी खपा दी। पूज्य बापू समेत सभी स्‍वतंत्र सेनानियों को बलिदान की महान परंपरा जगाने वाले महान क्रांतिकारियों को आज मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। आज जो इस समारोह में उपस्थित हैं, उन सबके लिए आज एक ऐतिहासिक पल भी है। आजादी के बाद 15 अगस्त को लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गूंज रहा है। आज जब हम देश के लोग वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहे हैं, तो इससे बड़ा उत्तम अवसर क्‍या हो सकता है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

पिछले दिनों, देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ का प्रकोप रहा, भूस्खलन का प्रकोप रहा, अनेक परिवार प्रभावित हुए। उनके दुख, दर्द को हम भलिभांति अनुभव करते हैं। पीड़ित परिवारों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हम और पूरा देश उनके साथ खड़े हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है, तब अपनी सिद्धियों को प्राप्त करता है, जब अपने सपनों, अपने संकल्पों और अपने सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है।

मेरे देशवासियों,

अब छोटे सपनों से चलने वाला नहीं है, हमें बड़े सपने क्‍योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं। हमारी सोच के क्षितिज को भी विस्तृत करते हैं। हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए, जब संकल्प दृढ़ होता है, तो कठिनाइयों से, आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप उभरकर के आता है।

और मेरे प्‍यारे देशवासियों,

हमारे संकल्प भी ऊंचे होने चाहिए क्योंकि जब सपने ऊंचे होते हैं, संकल्प ऊंचे होते हैं, तो हमारे सामर्थ्य की ऊंचाई भी बढ़ती है, हमारे प्रयासों की ऊंचाई भी बढ़ती है और तब जाकर के हम सपनों को साकार कर सकते हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

आज भारत ने भी एक बहुत बड़ा सपना देखा है, दृढ़ संकल्प के साथ देखा है, नई ऊंचाइयों को छूने के लिए देखा है, और वह सपना है, जब आजादी के 100 साल होंगे। 2047 में हम विकसित भारत बना के रहेंगे। 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से, इस लक्ष्य को हमें हासिल करना है और जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है, तो यह दुनिया की नजरों में भी हमारे साहस का परिचायक बन जाता है। दुनिया हमारी तरफ देखने का नजरिया बदलने के लिए मजबूर हो जाती है।

प्यारे देशवासियों,

और मैं ऐसे ही नहीं कह रहा हूं। पिछले 12 वर्ष में देश के कोटि-कोटि नागरिकों ने दलित हो, पीड़ित हो, वंचित हो, आदिवासी हो, गांव में रहने वाला हो, शहर में रहने वाला हो, गरीब हो, मध्यम वर्ग का हो, युवा हो, बुजुर्ग हो, नारी हो, पुरुष हो, उत्तर हो, दक्षिण हो, पूरब हो, पश्चिम हो, हर किसी ने पिछले 12 साल में एक संकल्प के साथ, समर्पण के साथ, देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में हर प्रकार से प्रयास किया है। मैं उनके इन प्रयासों का आदरपूर्वक स्वीकार करता हूं और उसी का परिणाम है, कि इतने कितने कम समय में 25 करोड़ देशवासी, गरीबी को परास्त करके गरीबी से बाहर निकले हैं। इन्हीं देशवासियों के प्रयास का परिणाम है कि हम कभी फ्रेजाइल फाइव में गिने जाते थे। 12 साल के भीतर-भीतर हम एक मेजर इकोनॉमी में फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी बन गए हैं।

साथियों,

देश आजाद हुआ, बहुत सारे सपने लेकर के आजाद हुआ, लेकिन हम गति नहीं पकड़ पाए, रफ्तार नहीं पकड़ पाए। होती है, चलती है, अरे हो जाएगा, देखा जाएगा, उसी में खोए रहे। 2014 तक आते-आते तो पूरे विश्व ने हमें फ्रेजाइल फाइव के उसमें डंप कर दिया था। ऐसे समय, पिछले 12 साल में भारत ने एक नई रफ्तार पकड़ी है, तेज गति से हम आगे बढ़ रहे हैं और देशवासियों का संकल्प है कि अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प को सामर्थ्य को रोकना नामुमकिन है।

प्यारे देशवासियों,

पिछले 12 वर्षों में डिफेंस प्रोडक्शन करीब 4 गुना हुआ। खादी और ग्राम उद्योग का उत्पादन करीब 5 गुना हुआ, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग करीब 7 गुना बढ़ा, आधुनिक रेलवे कोच का निर्माण 21 गुना बढ़ा, मोबाइल फोन उत्पादन 35 गुना बढ़ा, इतना ही नहीं आधुनिक युग को देखकर के भी डिजिटल और इनोवेशन की दुनिया में भी हमने अपना परचम लहराया। इंटरनेट यूजर, इंटरनेट कंज्यूमर करीब-करीब चार गुना बढ़े, पेटेंट ग्रांट होने की संख्या 4 गुना बढ़ी, डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 गुना बढ़े, सामान्य मानवी की सुविधाओं की तरफ भी हमने उतना ही गंभीरता से काम किया। हर साल औसतन 15 गुना ज्यादा तेजी से हमने नल से जल कनेक्शन दिए। हर साल औसतन छह गुनी ज्यादा रफ्तार से लोगों को गैस कनेक्शन दिए। हर साल चार गुनी रफ्तार से गरीबों के लिए टॉयलेट बनाने का काम किया। हर साल तीन गुना ज्यादा तेजी से गरीबों को घर देने का काम किया। देश ने गवर्नेंस में भी बहुत बदलाव लाया। हजारों की संख्या में compliances खत्म किए। सैंकड़ों की तादाद में पुराने कानून खत्म किए। पिछली शताब्दी के कानूनों से 21वीं शताब्दी की मार्च नहीं हो सकती। हमने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मेट्रो का विस्तार किया है, हमने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ताकत दी। जिस स्पीड से काम, जिस स्केल पर काम किया, यह सब यह रफ्तार, यह विस्तार, यह अचीवमेंट आजादी के बाद पहली बार पिछले एक दशक ने देखा है और जब इतनी सारी सिद्धियां हमारे सामने हों, इतनी तेज गति दिखाई देती हो, देशवासियों का सामर्थ्य पल-पल प्रबल होता है, तब तो 2047 में विकसित भारत बनने का संकल्प कभी भी अधूरा नहीं रह सकता है। यह सारे आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि हम आगे बढ़ने वाले हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

लेकिन उसके लिए आत्मविश्वास की जरूरत होती है, आत्म गौरव की जरूरत होती है और साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत होना भी बहुत जरूरी होता है। और इसलिए बीते वर्षों में हमारा कनविक्शन रहा है कि भारत को हमें अब दूसरे देशों पर निर्भर रहकर के नहीं जीना चाहिए, हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए। दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, जल्दी मिल सकता है, लेकिन उससे हमारा सामर्थ्य तैयार नहीं होता है, ना हमारे सामर्थ्य की कसौटी होती है और इसलिए हमें भी अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है, अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद को करनी है, और इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प बहुत दृढ़ता के साथ हम लेकर के आगे बढ़ रहे हैं। मेक इन इंडिया, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल, इन सारे क्षेत्रों में आज हर भारतीय का मन जुड़ रहा है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

मैं आपको एक उदाहरण देता हूं सेमीकंडक्टर का, देश आजाद होने के बाद विश्व में तो सेमीकंडक्टर की चर्चा हो चुकी थी। हमारे यहां भी बातें होती थी, लेकिन सेमीकंडक्टर का कोई बड़ा प्लान हम आगे नहीं बढ़ा पाए और आज स्थिति क्या है? आज की डिजिटल दुनिया में, आज की टेक्नोलॉजी में, चिप का महात्म्य हम समझते हैं। कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गुड्स होगा, हमारे मेडिकल इक्विपमेंट होंगे, हमारा ट्रांसपोर्ट के रास्ते होंगे, हर किसी में चिप अनिवार्य है और इसे इस चिप के बिना दुनिया थम जाए, ऐसी स्थिति पैदा हो चुकी है और इसलिए भारत ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में अपना सेमीकंडक्टर प्लांट, बड़ा सेमीकंडक्टर प्लांट, तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं। और मुझे बताया गया है कि वहां जो प्रोडक्शन हो रहा है, वह एक्सपोर्ट होना शुरू हो चुका है और मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं, आने वाले सात-आठ वर्ष में और 5-7 या 8 सेमीकंडक्टर प्लांट बहुत ही जल्द शुरू होने वाले हैं। यह आत्मनिर्भर भारत हमें विकसित भारत की दिशा में जाने का महामार्ग देती है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

वैसी ही एक चर्चा क्रिटिकल मिनरल की हो रही है। पूरी टेक्नोलॉजी क्रिटिकल मिनरल पर निर्भर है। भारत इसमें भी अपने आप को सुरक्षित करने में जुटा हुआ है। क्रिटिकल मिनरल का लक्ष्य साझा किया जाए, नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स यह हमने लॉन्च किया। बजट में क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर की हमने घोषणा की है, कई देशों के साथ एग्रीमेंट हो रहे हैं, विश्व के कई देश अब इस क्रिटिकल मिनरल्स की दिशा में भारत पर भरोसा करने लगे हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

जैसे सेमीकंडक्टर की बात हो, क्रिटिकल मिनरल की बात हो, वैसे ही जिस टेक्नोलॉजी की दिशा में हम जा रहे हैं, दुनिया जा रही है, उसमें एनर्जी का महत्व और बढ़ता चला जा रहा है। अब एनर्जी के बिना भी नई दुनिया को चलाना मुश्किल है और इसलिए हमें चिप हो, AI हो, डाटा सेंटर हो, हमें बहुत बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। एनर्जी सिक्योरिटी, यह हमारे समय की मांग है और इसलिए हमने पहले से ही उस दिशा में एक के बाद एक मजबूत कदम उठाए हैं। एनर्जी सिक्योरिटी का एक बड़ा माध्यम है, परमाणु ऊर्जा न्यूक्लियर एनर्जी, हमने पार्लियामेंट में शांति एक्ट पास कर करके, एक नए लक्ष्य पर जाने का रास्ता तय कर लिया है। 2047 तक हम 100 गीगावॉट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य लेकर के चल रहे हैं। इसी एक दशक में हम पांच नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य लेकर के चल रहे हैं। इस वर्ष भारत ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करके एक अहम पड़ाव पार किया है और उसके कारण परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में हमें एक बहुत बड़ा सफलता का कदम हमने रखा है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

कई बार संसाधनों की कमी के कारण देश रुकता नहीं है, लेकिन रुकने का कारण सोच की सीमाएं होती हैं। जब सोच बंध जाती है, सीमाओं में सड़ने लग जाती है, तब हम अपने सामर्थ्य को भी पहचान नहीं पाते हैं। देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है और हमारी गलत सोच के कारण है। आप जान कर हैरान हो जाएंगे, हमने समुद्री तट पर 99% हमारा समुद्री तट का पूरा हिस्सा ऐसी सोच के कारण नो-गो एरिया घोषित करके रखा था, हमने ही समुद्र के अंदर जाकर के एक्सप्लोरेशन न करने का निर्णय कर लिया था। यह सोच का दारिद्रय था, हमने फैसला किया, यह नहीं चल सकता। हमने उस 99% को, जो कभी नो-गो एरिया हुआ करते थे, हमने उसको गो अहेड एरिया के रूप में खुला कर दिया है और अब हम समुद्र के भीतर भी एक्सप्लोरेशन करने की और नए-नए भंडार खोजने की दिशा में हम प्रवृत्त हैं, हम प्रयास कर रहे हैं। हमने पिछले वर्ष उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखते हुए, समुद्र मंथन की घोषणा की थी और पिछले दिनों हमने 85000 करोड रुपए इस काम के लिए आवंटित करके काम को गति देने का निर्णय कर लिया है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

एनर्जी सिक्योरिटी, इसका मैंने कहा कि हमें अल्टरनेट स्रोतों की तरफ भी पूरी शक्ति लगाना बहुत जरूरी है और इसलिए ऊर्जा का सही इस्तेमाल बढ़ाते हुए भारत इसी दिशा में आज तेजी से काम कर रहा है। 2014 से पहले मतलब आज से 12 साल पहले, हमारे देश में सिर्फ 70 शहरों में पाइप से गैस की व्यवस्था थी, पाइप से गैस डिस्ट्रीब्यूशन होता था। 12 साल में इन 70 शहरों को हमने 700 शहरों तक पहुंचा दिया है। यह होती है रफ्तार, यह होता है विस्तार। 2014 के पहले मुश्किल से 20-22 लाख घरों में पाइप से गैस पहुंचता था, आज पौने दो करोड़ घरों में पाइप से गैस पहुंचाने का काम हो रहा है। 12 वर्ष पहले देश में सोलर एनर्जी की कैपेसिटी सिर्फ 2 गीगावॉट थी, 2 गीगावॉट, आज 160 गीगावॉट हमने प्राप्त किया है लक्ष्य।

मेरे प्यारे देशवासियों,

मैं एक और जानकारी देता हूं, हमने इसका लाभ देश के मध्यम वर्ग को, सामान्य परिवार को मिले, इस तरफ भी उतना ही ध्यान केंद्रित किया है। हमने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना चालू की और आज मुझे संतोष है कि इतने कम समय में 50 लाख घरों का सोलर एनर्जी का काम, हम आंकड़ा पार कर चुके हैं, तेजी से चल रहा है और उसके कारण हजारों घरों का बिजली बिल जीरो हो गया है, हजारों घर अपनी बिजली का उपयोग करने से अतिरिक्त बिजली आज बेचकर के कमाई कर रहे हैं। हर परिवार को हम इस काम के लिए 80000 रुपया सरकार की तरफ से एक-एक परिवार को मदद दी जा रही है, तब जाकर के हम इस काम को पूरा कर रहे हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

आपको जानकर के हैरानी होगी, यह जो हमारी रेलवे है, उसका इलेक्ट्रिफिकेशन का काम हमारे देश में 1925 में शुरू हुआ था। 1925 में इलेक्ट्रिफिकेशन का काम शुरू हुआ, लेकिन 90 साल में 1925 से लेकर के 90 साल में सिर्फ 30% रेल का इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ था। यानी 90 साल में 30%, हमारी रफ्तार देखिए, लक्ष्य को पाने के लिए हमारी दौड़ देख लीजिए। हमने इन एक दशक के अंदर शत प्रतिशत काम पूरा कर दिया। 90 साल में 30%, 10 साल में 70%, यह होता है काम और इसके कारण डीजल, जो हमें बाहर से लाना पड़ता है, उसकी बचत हुई। बिजली से हमारी ट्रेनें चली, पर्यावरण को फायदा होने लगा।

मेरे प्यारे देशवासियों,

हम यहां से नहीं रुके हैं। हम दुनिया के अंदर पीछे रहना नहीं चाहते, पिछले दिनों अपने खबर सुनी होगी, भारत ने ईंधन का यह नया क्षेत्र को भी छू लिया है। देश ने पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन शुरू कर दी है और मुझे खुशी है कि ये सबसे लंबी ट्रेन है और सबसे ताकतवर ट्रेन है और दुनिया में हाइड्रोजन ट्रेन के क्षेत्र में भी भारत अपना ने झंडा गाड़ दिया है।

प्यारे देशवासियों,

पिछले 10-12 साल हम लगातार 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए दौड़ रहे हैं। एक के बाद एक सोपान सिद्ध कर रहे हैं। हमने सोचा भी नहीं था कि हमें इसमें भी कुछ मुसीबतों को झेलना पड़ेगा। पिछले 10-12 वर्ष में कितने संकटों का सामना करना पड़ा। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया था, सारी व्यवस्थाएं चरमरा गई थीं, कोरोना से बाहर निकले, युद्ध की विभीषिका की खबरें आने लगीं, कहीं यूक्रेन तो कहीं पश्चिम एशिया, हर जगह पर तनाव का माहौल और पता नहीं भविष्य वेत्ताओं ने तो न जाने क्या-क्या घोषणाएं कर दी थी। देश को डराना, देश को भयभीत रखना, देश को चिंतित रखना, इसी में कुछ लोगों को आनंद आता है। वैक्सीन नहीं मिलेगी, कोविड में लोग बचेंगे नहीं, कुछ भी नहीं होने वाला। वेस्ट एशिया का क्राइसिस आया, पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगा, डीजल नहीं मिलेगा, फर्टिलाइजर नहीं मिलेगा, सारी दुनिया भर की अफवाहें फैला करके, भारत के लोगों को भयभीत करने का, डराने का, चिंता के अंदर डुबो देने का, कुछ लोगों को आनंद आ रहा था। लेकिन देश ने देख लिया कि पिछले 10-12 साल की सुविचारित योजनाएं रंग ला रही हैं और हम इतने बड़े संकट के बावजूद भी नागरिक देवो भवः के मंत्र को लेकर के जीते हुए भारत ने जो तैयारियां की थी, एक के बाद एक कदम उठाया था, सोचा नहीं था कि यह संकट आएगा, लेकिन उस संकट के समय में यह सारी चीजें काम आ गई और आज देश में गैस भी है, पेट्रोल भी है, यूरिया भी है। हम अपनी ताकत के ऊपर खड़े हो रहे हैं, चल रहे हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

दुनिया के इन संकटों का प्रभाव हर किसी पर हुआ, हम भी अछूते नहीं हैं। यूरिया के दाम दुनिया में 3000 रूपया पहुंच गया एक बोरी का। आज भी हम मेरे देश के किसानों को वो बोझ सहने के लिए मजबूर नहीं कर रहे, सरकार अपने कंधों पर वो बोझ उठा रहा है और दुनिया से जो 3000 रूपया में यूरिया का बोरा हमें मिलता है, वो हमारे किसानों को हम सिर्फ 300 रूपये में दे पाते हैं। इतना ही नहीं DAP, आज दुनिया में बाजार 5000 पहुँच चुका है, लेकिन मेरे देश के किसानों को दिक्कत ना हो, इसलिए 1350 रुपए में आज भी DAP देने का काम हम कर रहे हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

एक समय था, जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था, तो कुछ लोग एयर कंडीशन चैंबर में बैठकर सोचने वाले लोग हमें बता रहे थे, ग्लोबलाइजेशन का क्या होगा। लेकिन दुनिया देख रही है कि पिछले एक दशक में ऐसा लग रहा है कि दुनिया ने ग्लोबलाइजेशन बोलना ही बंद कर दिया है। जहां से ग्लोबलाइजेशन की आवाजें आती थी, वह बंद हो गई, सुनाई नहीं देती है। दुनिया का हर देश अपनी-अपनी सवालों के मिजाज की तरफ गया है, लेकिन दुर्भाग्य से इस संकट के कालखंड में कुछ लोगों ने अपना रुतबा दिखाने के लिए संसाधनों को वेपनाइज करने का खेल खेला है। दुनिया अपने पास जो कुछ भी है, उसको वेपनाइज करने में लगी है। संसाधनों का वेपनाइज, रिसोर्स का वेपनाइज, पेट्रोल, डीजल, फर्टिलाइजर, दवाइयां, टेक्नोलॉजी की चिप्स, इतना ही नहीं भू-भाग को भी वेपनाइज किया जा रहा है। और ऐसे समय अगर हम आत्मनिर्भरता के मंत्र को लेकर 10 साल सही दिशा में न चले होते, तो हम कल्पना कर सकते हैं, कि तो ऐसी चुनौतियों का मजबूती से मुकाबला कैसे करते और हमारी तैयारियां निरंतर बढ़ती जा रही हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

दूसरी तरफ आज भारत का प्रोफाइल पूरी तरह बढ़ रहा है। आज भारत दुनिया के लिए एक स्वीकृत और सम्माननीय देश के रूप में बन रहा है। भारत के पास स्थिर पॉलिटिकल मैंडेट है, स्थिर सरकार है, भारत का वाइब्रेंट लोकतंत्र है, भारत का मजबूत न्याय तंत्र है और हम सबको दिशा देने वाला भारत का संविधान है और अब दुनिया हमारे इस सामर्थ्य को पहचानने लगी है। और इसलिए 2014 के बाद, दुनिया के करीब 40 देशों के साथ हमारा एफटीए एग्रीमेंट हो रहा है। आप देखिए, कितना बड़ा अवसर आया है, लेकिन मैं यह जो ट्रेड एग्रीमेंट्स हुए हैं, यह एक बहुत बड़ा अवसर है और इसलिए खास करके मैं मेरे MSMEs को कहना चाहूंगा कि हमें इस मौके को छोड़ना नहीं है। दुनिया में हमें पहुंचना है, भारत के उत्पाद की हर चीज विश्व के बाजार में पहुंचे और चाहे हमारा टेक्सटाइल हो, हमारी मशीनरी हो, दवाइयां हो, हमने मौका छोड़ता नहीं है, लेकिन वैश्विक जो पैरामीटर्स हैं, उस पैरामीटर को हमें पार करना होगा। हमें दुनिया से जो मिलता है, उससे अच्छा देना पड़ेगा। दुनिया में जो मिलता है, उससे सस्ता देना पड़ेगा और पंजाब के लुधियाना से लेकर के तमिलनाडु के तिरुपुर तक हमारा टेक्सटाइल सेक्टर दुनिया में पहुंच सकता है। इतना ही नहीं, केरलम से लेकर के गुजरात और तमिलनाडु से लेकर के बंगाल, यह हमारा समुद्री तट, हमारे मछुआरे भाई-बहन आज इस FTA के कारण हमारे श्रिंप यानी झींगा, उसके एक्सपोर्ट की बहुत संभावना बढ़ी है। हमारे सी फूड की दुनिया में पहुंच बनने की संभावना बढ़ी हुई है और इसलिए मैं चाहूंगा कि हमें इस स्थिति का फायदा उठाते हुए, हम आगे चलते हुए, हम इन कामों को पार करने के लिए प्रयास करें।

मेरे प्यारे देशवासियों,

मैंने यह जो भूमिका आपके सामने रखी है, उसके पीछे 2047 का लक्ष्य इन मजबूत नींव पर खड़ा है। 2047 विकसित भारत का लक्ष्य हमने पिछले 10-12 साल में देशवासियों ने जो सामर्थ्य दिखाया है, उस सामर्थ्य का हिस्सा है।

और इसलिए मेरे प्यारे भाइयों बहनों,

सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, और अगला एक चौथाई हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब हम रुक नहीं सकते हैं, हमारी गति नहीं रुक सकती है, हमारी दिशा तय हो चुकी है, हमें प्राप्त करके रहना है और इसके लिए हमें अपना वर्क कल्चर बदलना होगा, हमारे वर्क कल्चर को बदलते हुए हमें हमारी सोच को भी बदलना होगा, हमें हमारे काम की गति को भी बदलना होगा। जो काम पिछले 5-7 दशक में नहीं हुए हैं, वो काम हमें आने वाले 5-7 साल में करने हैं और मेरा भरोसा है, मेरे देश की युवा शक्ति पर, मेरे देश के नौजवानों पर, मेरे देश की माताओं-बहनों पर, मेरे देश के किसानों पर, मेरे देश के मजदूरों पर कि हम, हम इस सपने को साकार कर सकते हैं। और इसलिए हमें रिफॉर्म की गति को भी आगे बढ़ाना है और जब मैं रिफॉर्म की बात कर रहा हूं, रिफॉर्म ना ही हमारे लिए कंपल्शन है, ना ही रिफॉर्म यह हमारे लिए कोई Buzzword है, हमारी यह रिफॉर्म यह कनविक्शन है, आउट आफ कनविक्शन। हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं और हम आने वाले दिनों में भी नेक्स्ट लेवल रिफॉर्म की ओर बढ़ने वाले हैं और इसलिए सरकार, समाज, उद्योग, उत्पादक, किसान, हर किसी ने अपनी ट्रेडिशनल व्यवस्थाओं में रिफॉर्म करना पड़ेगा, सोच में रिफॉर्म करना होगा, अपने लक्ष्यों को रिफॉर्म करना होगा।

और इसलिए मेरे प्यारे देशवासियों,

हमें एक निश्चित दिशा को लेकर के चलना होगा। मैं आज उस युग को भी याद करना चाहूंगा, जब देश भारत का सामर्थ्य सप्त सिंधु के रूप में हम जानते थे, हम समझते थे, हम सुनते थे और विकसित भारत बनाने के लिए हमें नई धारा चाहिए। आज लाल किले की प्राचीर से मैं देश के सामने शक्ति की इस सप्त धारा का आह्वान करता हूं। आने वाले 5-7 साल में, जो पिछले 5-7 दशक में नहीं हुआ, वो सप्त धारा के सामर्थ्य से, शक्ति से, हम देश को नई ऊंचाई, नई गति देंगे और नए लक्ष्यों को पार करने वाला सामर्थ्य देंगे। और इसके साथ-साथ देश की युवा शक्ति के सामर्थ्य का भरपूर राष्ट्र निर्माण में उपयोग होगा, उनकी शक्ति जोड़ी जाएगी। आने वाले दिनों में जब मैं सप्त धारा की बात करता हूं, सप्त धारा की पहली शक्ति है - मैन्युफैक्चरिंग पावर।

मेरे प्यारे देशवासियों,

हमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बहुत आगे बढ़ाना होगा और प्रोडक्शन बढ़ाने के साथ-साथ हमें छोटे-छोटे पुर्जे भी बनाने हैं और बड़े-बड़े प्रोडक्ट भी बनाने हैं। पूरा वैल्यू चैन हमारा होना चाहिए और उसे लेकर के चलना, हमें कंपोनेंट भी चाहिए और हमें कंप्लीट मैन्युफैक्चरिंग भी चाहिए, कंप्लीट प्रोडक्ट भी चाहिए। डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक भारत को ग्लोबल सप्लाई चैन का भरोसेमंद केंद्र बनना होगा। इसके लिए मैं तीन चीजों पर विशेष जोर देना चाहता हूं। मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में जो मेरे भाई-बहन हैं। यह समय का यह अवसर है, इस अवसर को जाने मत दे और इसके लिए हमें कोस्ट, क्वालिटी और स्केल, इसके विषय में वैश्विक मानदंडों से खरा उतरना पड़ेगा। हमारी factories competitive हो, हमारे प्रोडक्ट्स यूजर फ्रेंडली हो, हमारा पैकेजिंग दुनिया के लोगों को लुभावने वाला हो, आकर्षित करने वाला हो। हमारा जीरो डिफेक्ट precision मैन्युफैक्चरिंग, यह हमारी पहचान बनना चाहिए। हर मैन्युफैक्चरर, हर एंटरप्रेन्योर, हर MSMEs से मैं कहना चाहता हूं, ग्लोबल मार्केट में हमारी पहचान विश्वसनीयता और गुणवत्ता के आधार पर होनी चाहिए। क्वालिटी के संबंध में नो कॉम्प्रोमाइज और इसलिए हमारा मंत्र क्वालिटी, क्वालिटी, क्वालिटी होना चाहिए। यही हमारा ग्लोबल ब्रांड वैल्यू बनेगा।

मेरे प्यारे देशवासियों,

इस सप्त धारा की दूसरी शक्ति है, कृषि और फूड प्रोडक्शन। फूड प्रोसेसिंग, हमें इस दिशा में आगे बढ़ना होगा। हमारे किसानों ने अब दुनिया के बाजार खुल चुके हैं, FTA के कारण हमें एक बहुत बड़ा मार्केट मिल रहा है, हमें वहां पहुंचना है, हमें उसे जगह को हाथ लगाना है, हमें खेत से लेकर के एक्सपोर्ट मार्केट की ओर जाना होगा। हमारे पारंपरिक खान-पान हो, हमारे मिलेटस हों, हमारे मसाले हों, हमारे फल हों, फूल हों, क्या कुछ नहीं है हमारे पास। वह ग्लोबल ब्रांड्स बनने चाहिए, हमारे किसान केमिकल फ्री खेती को बल देंगे, दुनिया में इनकी मांग और बढ़ने वाली है और जो ग्लोबल parameters के अंदर हर प्रकार से सिद्ध होने वाले हमारे एग्रो प्रोडक्ट होंगे, तो उस दुनिया में हम आसानी से पहुंच पाएंगे। मेरी सप्तधारा की तीसरी शक्ति है टेक्नोलॉजी और इनोवेशन।

मेरे प्यारे देशवासियों,

आज जमाना AI का है, क्वांटम का है, स्पेस का है, रोबोटिक्स का है, डाटा सेंटर्स का है, पूरी तरह एक नया क्षेत्र खुल चुका है। और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज यह भी हर पल हमें चुनौती दे रही हैं और इसलिए देश को दुनिया के लिए मार्केट नहीं बना देना, हमें इनोवेशन का हब बनना है। हमने यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में लोहा मनवा लिया है, हमारी ताकत का परिचय करवा दिया है। अब भारत को डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजीज़, उसको भी दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाना है। भारत को नेक्स्ट जनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में लीड करना है। मेड इन इंडिया 6G हर कोने में पहुंचे यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए और हमें इसमें तेजी करनी चाहिए और इसके लिए हमारा प्रयास कम नहीं होना चाहिए। सप्त धारा की चौथी शक्ति है, गति शक्ति। यह गति शक्ति, देश के अंदर सीमलेस फास्ट कनेक्टिविटी पर हमें बल देना होगा। शहरों को हाई स्पीड रेल से हमें जोड़ना होगा। मॉडर्न हाईवेज़ चाहिए, इनलैंड वाटरवेज़ चाहिए, एयरपोर्ट्स चाहिए, multimodel लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था चाहिए। हमें पोर्ट्स को सिर्फ सामान उतारने चढ़ाने की जगह नहीं, दुनिया के शिप्स आकर के लंगर हो जाए इतना नहीं, हमें हमारे पोर्ट्स को पोर्ट लेड डेवलपमेंट ग्रोथ की दिशा में हमें आगे बढ़ना होगा। हमारी पांचवी शक्ति है सप्त धारा की वो है रक्षा शक्ति। और यह रक्षा शक्ति का महत्व हर प्रकार से है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

डिफेंस में आत्मनिर्भर होना, अब भारत ने अनुभव कर लिया है, दुनिया ने अनुभव कर लिया है, इसके बिना कोई चारा नहीं है। विश्व जब अपनी-अपनी ही सोच रहा है, तब भारत विश्व के लिए बाजार बनकर के नहीं रह सकता है। हमें डिफेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना होगा। नेक्स्ट जनरेशन डिफेंस टेक्नोलॉजी डेवलप करके हमें ग्लोबल सप्लायर बनने की दिशा में हमें लक्ष्य लेकर के चलना है। हमें ड्रोन, काउंटर ड्रोन सिस्टम को विकसित करना होगा और हायपरसोनिक डिफेंस टेक्नोलॉजीज़, उस पर हमें लीडरशिप लेनी होगी।

साथियों,

साइबर सुरक्षा भी आज हर घर के लिए एक समस्या बन रही है। वह भी एक रक्षा का क्षेत्र है, जिसमें हमारे युवाओं के जो सामर्थ्य है, उस सामर्थ्य का उपयोग हम देश के और दुनिया के लिए कर सकते हैं। हमारी सप्त धारा की छठी शक्ति है- ग्रीन इकोनॉमी, ब्लू इकोनामी, जो ग्रीन जॉब्स को भी जन्म देती है। हमें ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग इन ग्लोबल स्केल, हमें पाकर के रहना है। हमें दुनिया में, दुनिया जब ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा करते रहती है, हम रास्ते खोजते रहते हैं, हम समस्याओं का समाधान दे रहे हैं और भारत यह ग्रीन मूवमेंट का बहुत बड़ा सामर्थ्य लेकर के चली है। भारत के पास ब्लू इकोनॉमी के लिए भी बहुत बड़ा अवसर है, बहुत बड़ा लंबा हमारा कोस्ट लाइन है, ब्लू इकोनॉमी के लिए बहुत बड़े अवसर हैं, फिशरीज हैं, कोस्टल टूरिज्म है, ओसियन टेक्नोलॉजी है, ऐसे कितने ही क्षेत्र हैं, जिसमें हम आगे बढ़ सकते हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

भारत सप्त धारा की जब बात लेकर के चला है, तब हमारी सातवी धारा है और दुनिया के लिए इसका अपना भी एक महत्व है और वह है- भारत का सॉफ्ट पावर। भारत के सॉफ्ट पावर की ताकत है। आज योग ने पूरी दुनिया को भारत के साथ जोड़कर रखा हुआ है। योग दुनिया के लिए एक ऊर्जा बनता जा रहा है। भारत के लिए विश्वास का बड़ा कारण बनता जा रहा है। जिस भारत के पास आस्था के केंद्र हो, जिस भारत के पास आयुर्वेद हो, जिस प्रकार से भारत के पास होलिस्टिक हेल्थ केयर की व्यवस्था हो, हील इन इंडिया का मूवमेंट हो, हम दुनिया के अंदर हमारे सामर्थ्य को लेकर के जा सकते हैं। हैंडीक्राफ्ट हो, संस्कृति हो, हमारी फिल्में हो, हमारा क्रिएटिव वर्ल्ड हो, वीएफएक्स हो, हमारा एनीमेशन हो, हमारे गेमिंग हो, डिजिटल कंटेंट हो, क्रिएटिव वर्ल्ड के अंदर भारत अपना रुतबा दिखा सकता है। हमने उसको एक वैश्विक सामर्थ्य के रूप में विकसित करना होगा। आज भारत ने WAVES समिट को एक बहुत बड़ी ताकत दी है। दुनिया धीरे-धीरे भारत का यह जो वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट है, उसकी राह देखता रहता है और वह भारत के सॉफ्ट पावर को, भारत के क्रिएटिव दुनिया को दुनिया से परिचित कराएगा।

मेरे प्यारे देशवासियों,

भारत के पास विशाल वन्य संपदाएं हैं। हमारे पास 100 से ज्यादा नेशनल पार्क हैं। क्षमता बहुत है, लेकिन विदेशी टूरिस्टों को आकर्षित करने में हम कम पड़े हैं। हमें मौका है हमारे सॉफ्ट पावर के माध्यम से दुनिया के टूरिस्टों को भारत के लिए आकर्षित करने का, हमारा सामर्थ्य हमें दुनिया को दिखाना है। हम यह काम करें और हम जल्दी जल्द से जल्द हम इन लोगों को आज दुनिया में स्पोर्ट्स जो है, वो भी एक बहुत बड़ा भारत के प्रति आकर्षण का केंद्र, दुनिया के स्पोर्ट्स इवेंट भारत में क्यों ना हो। कॉन्सर्ट इकॉनमी बहुत बढ़ रही है, देश के नौजवानों का आकर्षण है। विश्व का हर कोई कलाकार चाहता है, कभी न कभी भारत की धरती पर अपना कॉन्सर्ट करे। यह बहुत बड़ा अवसर है, हमें इसको मोबिलाइज करने के लिए व्यवस्थाएं खड़ी करनी होंगी।

साथियों,

सप्तधारा की इस सात शक्तियां, सप्त शक्तियां उद्देश्य सिर्फ एक सेक्टर में प्रगति करने का नहीं है। एक होलिस्टिक एप्रोच के साथ हमें राष्ट्र को जो लक्ष्य लेकर के हम चल रहे हैं, जो एंबिशन लेकर के चल रहे हैं, उस स्केल को हमें पार करने की दिशा में काम करना है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

कुछ चीजें मैंने बताई हैं, लेकिन मैं इससे भी आगे सोचता हूं। मैं जरा देश को झकझोरना चाहता हूं। मैं देश की शक्ति को भी झकझोरना चाहता हूं। देश यानी सिर्फ सरकार नहीं होती है, देश यानी हर नागरिक जुड़ता है। क्या हम सोच नहीं सकते कि Fortune 500 की चर्चा तो बहुत सुनते हैं। आने वाले एक दशक में इन Fortune 500 में 50 कंपनियां भारत की क्यों ना हो, यह लक्ष्य हमारा क्यों ना होना चाहिए। आज बैंकिंग सेक्टर फल फूल रहा है। दुनिया की टॉप बैंक के अंदर भारत की बैंक का झंडा भी क्यों ना फहरता हो। भारत की बैंक भी टॉप बैंक, पांच बैंक में भारत की भी एक बैंक होनी चाहिए। भारत की फार्मा, फार्मा की दिशा में हमने बहुत काम किया है। लेकिन समय की मांग है कि दुनिया की पांच बड़ी फार्मा कंपनियों में भारत की भी एक-दो फार्मा कंपनियों का नाम गूंजना चाहिए। भारत का उसमें अपना स्थान बनना चाहिए। लॉ फर्म्स होते हैं, रेटिंग एजेंसीज़ होती हैं। क्या समय की मांग नहीं है कि ग्लोबल लीडरशिप अब हमारे हाथ में होनी चाहिए। टैलेंट है, सामर्थ्य है, हमारा लंबा इतिहास भी है, भाषाओं पर हमारा प्रभुत्व है। हमें विश्व में पहुंचना चाहिए। हमारी कोई कंसल्टिंग फर्म, अकाउंटिंग फर्म, दुनिया के टॉप फर्म्स के अंदर क्यों नहीं होनी चाहिए। भारत की टेक्नोलॉजी कंपनियां दुनिया के अंदर सिरमौर हो, यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। हमारे ऐसे ब्रांड हो, जिससे दुनिया आकर्षित होती हो। हमारे ब्रांड हमारे देश की पहचान हो और विश्व के लिए एक डेस्टिनेशन बन जाए, उस दिशा में हमें काम करना है। और इसके लिए मैं राज्य सरकारों को कहना चाहता हूं, मैं स्थानिक स्वराज की संस्थाओं को कहना चाहता हूं, भारत सरकार का भी यह दायित्व है कि हमें हमारे रिफॉर्म की गति बढ़ानी होगी। हमें 2047 के लक्ष्य के अनुरूप हमारी व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा। हम बीते हुए काल के नीति नियमों से नहीं चल सकते। हमें आने वाले सपनों के हिसाब से नीति नियमों को गढ़ना होगा और इसको अगर हम गढ़ेगे, तो मुझे पूरा विश्वास है और मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं। इसी रास्ते मेहनत में कोई कमी ना रखते हुए हम विकसित भारत का सपना पार करके रहेंगे। हम सबको मिलकर के चलना है। केंद्र सरकार हो, राज्य सरकार हो, इंडस्ट्री हो, हम सब ने मिलकर के आगे बढ़ना है। हमें रिफॉर्म्स करते रहना है। रिफॉर्म्स को आगे बढ़ाते रहना है। और मैंने पहले भी कहा था, हम रिफॉर्म कंपलशन से नहीं, कन्विक्शन से कर रहे हैं। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर रहे हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

जब मैं यह विकसित भारत की बात कर रहा हूं, देश को तेज गति से आगे बढ़ाने की बात कर रहा हूं, उसका सबसे बड़ा लाभार्थी कौन है, इन सारे प्रयासों का सबसे बड़ा साधक कौन है, अगर साधक है तो मेरे देश का युवा है, मेरे देश की युवा शक्ति है। विकसित भारत की यात्रा में युवाओं की बहुत बड़ी भूमिका है। इतना ही नहीं, विकसित भारत का सबसे बड़ा लाभार्थी भी मेरे देश का युवा है और इसलिए हमें विकसित भारत के लक्ष्य को युवाओं के साथ जोड़कर के आगे बढ़ाना है। युवाओं हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ हमें आगे बढ़ना है।

साथियों,

पिछले 10-12 साल में उस दिशा में बहुत कुछ हुआ है। स्टार्टअप इंडिया अभियान आज पूरे देश में ढाई लाख से ज्यादा registered स्टार्टअप्स बन गए हैं। देश के नौजवान, खुद तो काम कर रहे हैं, अनेकों को रोजगार दे रहे हैं। 1 लाख करोड़ रुपया, इनोवेशन फंड भारत सरकार ने घोषित किया है। मैं देश के नौजवानों को कहना चाहता हूं, आप अपने सपनों को लेकर के आइए, संसाधनों की कमी नहीं रहने देंगे। 1 लाख करोड़ रुपया, आपके दिल दिमाग को सामर्थ्य देने का एक व्यवस्था हमने कर दी है। रिसर्च के नए अवसर मिले, डिजिटल इंडिया के नए सस्ते डाटा, यह युवाओं को सशक्त किया है। दुनिया में सस्ता डाटा कहीं है, तो भारत की धरती पर है और देश के नौजवानों को उसने नई ताकत दी है। स्किल इंडिया हमने नेशनल प्रोग्राम बनाया है। स्पेस सेक्टर को हमने ओपन कर दिया। नेशनल ड्रोन पॉलिसी हमने बनाई है। खेलो इंडिया पॉलिसी बनाई है। 35 वर्षों तक एजुकेशन पॉलिसी नहीं थी, नई एजुकेशन पॉलिसी लेकर के आए हैं और इसका फायदा मिडिल क्लास के परिवारों को हुआ है।

साथियों,

2004 से 2014, आंकड़े मुझे देना चाहिए आपको। 2004 से 2014, हमारे देश में 350 से भी कम यूनिवर्सिटीज थी और आज 10-12 साल के भीतर-भीतर, करीब 650 नई यूनिवर्सिटीज जुड़ चुकी है। करीब 1000 का आंकड़ा हम पहुंच रहे हैं। 2014 के पहले मेडिकल की सिर्फ 400 सीटें हुआ करती थी, आज करीब-करीब 850 सीटें मेडिकल की हो रही है। इतना ही नहीं, अब विदेशी यूनिवर्सिटीज भी भारत की धरती पर आ रही है। भारत के अंदर विदेशी यूनिवर्सिटी की डिग्री मेरे नौजवान को मिले इसका प्रबंध भी हो चुका है। हमारे देश के युवा मन बचपन से ही टेक्नोलॉजी की तरफ आकर्षित हो, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं और इसलिए हमने करीब 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब छोटे-छोटे बच्चों के हवाले कर दी है, ताकि उनका इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के अंदर उनका मन बने। हमने अनेक रास्ते खोले, हमने स्टार्टअप ओपन कर दिया। आपने देखा होगा, भारत के प्राइवेट स्टार्टअप 28 साल के एवरेज उम्र के बच्चों ने, नौजवानों ने, दुनिया में पहला, पहले ही ट्रायल में अपना सेटेलाइट लॉन्च कर दिया और रॉकेट लॉन्च कर दिया उन्होंने, बहुत बड़ा काम कर दिया।

साथियों,

आज करीब ढाई लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप हैं। हमने पिछले दिनों एआई इंपैक्ट समिट किया था। एआई का विस्तार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। लाल किले से मैं देश के नौजवानों के लिए घोषणा करना चाहता हूं। हमने तय किया है कि आने वाले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को एआई स्किल के लिए ट्रेनिंग देने का हम काम करेंगे ताकि हमारा देश का नौजवान एआई की दुनिया में भी नेतृत्व करने का सामर्थ्य हो।

मेरे साथियों,

बायोइकोनॉमी एक नया क्षेत्र है। एक समय था 2014 के पहले, सिर्फ 60,000 करोड़ रुपये का बायोइकोनमी का काम होता था। मेरे देश के नौजवान, आपने क्या कमाल कर दिया है। देखिए, नीतियां जब सही होती है, लक्ष्य जब साफ होता है, तो मेरे देश के नौजवान कैसा करके देते हैं। बायोइकोनॉमी में देश की युवा शक्ति ने सामर्थ्य दिखाया। 2014 के पहले जो 60 हजार करोड़ का कारोबार था, आज वो बायोइकोनॉमी 20 लाख करोड़ पहुंच चुकी है दोस्तों। 2009-10 का कालखंड था, सिर्फ 1.5 लाख डेढ़ लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल बिके थे, 2009-10 में डेढ़ लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल। इस 25-26 में 25 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल बिके हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

एविएशन सेक्टर भी मेरे नौजवानों के लिए बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। नए एयरपोर्ट, नए रूट, नए-नए रोजगार के अवसर बना रहे हैं। मेंटेनेंस, ओवरहालिंग, इसके भी कारण देश में बहुत बड़ी मात्रा में skilled मैन पावर को काम मिल रहा है। मेड इन इंडिया हवाई जहाज बनाने की दिशा में हमने सफलता पाई है। मेड इन इंडिया डिफेंस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C295 ऑलरेडी अपनी उड़ान भर चुका है, सफल उड़ान भर चुका है। यह देश के नौजवानों के लिए, मेरे साथियों ड्रोन ने भी बहुत बड़ा काम किया है। स्वामित्व योजना गांव में ड्रोन से स्वामित्व योजना सफल हो रही है। करीब सवा तीन करोड़ परिवारों को स्वामित्व योजना का लाभ मिला है और इसके कारण 140 लाख करोड़ रुपये जैसी संपत्ति अनलॉक हुई है, जिसके कारण बैंक से लोन मिल सकता है, लोग अपना कारोबार कर सकते हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

हमारे मध्‍यम वर्गीय परिवारों के सामने एक बहुत बड़ा बोझ बन चुका है कोचिंग क्‍लासिस की स्‍पर्धा, हर मां-बाप को लग रहा है कि कोचिंग क्‍लास में बच्‍चे को नहीं भेजा, तो हम प्रतिष्‍ठित परिवार नहीं हैं। इन गरीब और मिडिल क्‍लास परिवारों की हम चिंता करते हुए हजारों-करोड़ रुपए का उनका खर्च है, वो भी बचे, बेटे भी अपने आस पास रह सके, उनकी देखभाल हो सके, परिवार पर आर्थिक बोझ न आए और इसलिए हमने युवाओं के लिए विभिन्न परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग हमने करने का निर्णय किया है, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, हमारे पास उत्तम टैलेंट है, टीचर्स हैं, उन संसाधनों को जोड़ करके हम देश के नौजवानों को फ्री कोचिंग देने का एक पूरा नेटवर्क हम खड़ा करने वाले हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

मैं हमेशा कहता आया हूं, जो खेले, वह खिले। जब मैं खेले, वो खिले की बात कर रहा हूं, तब मेरे प्यारे देशवासियों, आज भारत खेल की दुनिया में अपनी जगह बना रहा है। अब खेल के पोडियम में भारत का राष्ट्रीय गीत सुनाई देता है, भारत का राष्ट्रगान सुनाई देता है, भारत का तिरंगा झंडा लहराता नजर आ रहा है। टॉप्स योजना ने बहुत बड़ी सफलता पाई है। खेलो इंडिया गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, विंटर गेम्स, बीच गेम्स, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पोर्ट्स के लिए कोचिंग, स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्पोर्ट्स के लिए न्यूट्रिशन, इन सारे विषयों में भारत अब महारत हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नौजवानों के लिए पूरा नया क्षेत्र खिलाड़ी ना बन सके, तो उसकी सपोर्ट सिस्टम में भी बहुत बड़ा क्षेत्र खुल रहा है। स्पोर्ट्स की दुनिया में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है और हम 2036 में ओलंपिक के मजबूत दावेदार बनकर के आगे बढ़ रहे हैं, और 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स को भारत अब होस्ट करने वाला है।

और मेरे साथियों,

दुनिया में जो ओलंपिक के खेल होते हैं, करीब 40 प्रकार के गेम होते हैं और करीब 325-350 स्पर्धाएं होती हैं ओलंपिक में और आपको जानकर के दुख होगा मेरे देशवासियों। मेरे नौजवानों, मैं आपको चुनौती देता हूं, मैं आह्वान करता हूं, मैं आपकी मदद चाहता हूं, 325 जितने स्पर्धाओं में भारत दो तिहाई खेलों में कहीं होता ही नहीं है। हमारी मौजूदगी नहीं होती, हम क्वालीफाई नहीं होते हैं, हमने तय किया है कि 2036 में जो ओलंपिक होगा, हम चाहते हैं कि वो भारत में हो, लेकिन 2036 में जिन विधाओं में आज भारत खेलता नहीं है, जिन विधाओं में भारत क्वालीफाई नहीं करता है, जिन स्पर्धाओं में भारत ने छोड़ के रखा है, तीन चौथाई हिस्सा हमारे इंतजार कर रहा है, भारत उस पर बल देगा और इसके लिए हम टैलेंट हंट का एक अभियान भी चलाना चाहते हैं। हमें अगर 2036 के लिए खिलाड़ी चाहिए, तो आज जो 5 साल, 10 साल, 15 साल, की उम्र के यह नौजवान हैं, बेटे हैं, उनकी तरफ ध्यान देना होगा, उन बेटियों पर ध्यान देना होगा। और इसलिए 5 से 15 उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभा ढूंढने के लिए गांव-गांव, शहर-शहर, स्कूल-स्कूल एक टैलेंट हंट का अभियान चलाया जाएगा, बच्चों की प्रतिभा को देखा जाएगा और फिर उनको स्पेशल ट्रेनिंग देकर के देश के लिए खेलने वाले अच्छे खिलाड़ी बनाए जाएंगे।

मेरे प्यारे युवा,

देश के सामने, देश के नौजवानों के सामने, नशा एक बहुत बड़ा संकट बनता जा रहा है। नशा मुक्त भारत, यह हम सबका सामूहिक दायित्व होना चाहिए। हमारे उज्ज्वल भविष्य के लिए हमारी युवा पीढ़ी मजबूत हो, हमारा युवा सामर्थ्य हमारे देश के लिए काम आए, इसलिए नशा मुक्त भारत, पिछले दिनों माय भारत के वालंटियर्स ने, देश के एनजीओस ने, देश के सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों ने, देश के आध्यात्मिक पुरुषों ने मिलकर के नशा मुक्त भारत का 100 सप्ताह का एक कार्यक्रम तय किया है। 100 सप्ताह तक एक अभियान चलने वाला है। मैं हर परिवार को कहना चाहता हूं कि आप भी इस इस अभियान का हिस्सा बने, आप इसके साथ जुड़िए और देश के नशा मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के लिए आप आगे आइए।

मेरे प्यारे देशवासियों,

21वीं सदी में दशकों पुरानी जो चुनौतियां है, उन चुनौतियों को खत्म करना बहुत अनिवार्य है। नक्सलवाद, माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया। अनेक माताओं के दूधमल नौजवानों को छीन लिया, बर्बाद कर दिया, हर मां-बाप के सपनों को चूर-चूर कर दिया। इस नक्सलवाद ने चार-चार दशक तक हिंदुस्तान के बहुत बड़े हिस्से को, बहुत बड़ी आबादी को दबोच करके रखा था, बंदूक के नोक पर दबोच करके रखा था, संविधान की धज्जियां उड़ा दी थी और देश के सामान्य नागरिकों की रक्षा में 3500 से ज्यादा हमारी पुलिस के सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए। युद्ध के अंदर जितने सैनिक मरते हैं, उससे ज्यादा हमारे पुलिस जवानों को जान की बाजी लगानी पड़ी, ताकि देश के सामान्य मानवी को सुरक्षा मिले। इस नक्सलवाद ने धरती को लहूलुहान कर दिया था। 2014 में आपने जब हमें मौका दिया, उसी दिन हमने संकल्प लिया था कि हम देश को नक्सलवाद से मुक्त करेंगे और आज मुझे खुशी है कि नक्सली माओवादी हिंसा आखिरी सांस भी शायद रहने की अब तो ताकत नहीं रही है, पूरी तरह उसे खत्म करने की दिशा में, जहां पर कभी नक्सलवादियों की गोलियां चलती थी, जहां पर कभी धरती रक्त रंजित रहा करती थी, आज उसी नक्सल क्षेत्रों में, उसी इलाकों में, नक्सल मुक्त होने के कारण विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

लेकिन इस चुनौती को हमने कम नहीं आंकना है। इस चुनौती से हमें और भी सावधान रहने की जरूरत है। वर्षों तक देश की सत्ता में माओवादी सोच के लोग गलियारों में अपनी जगह बनाकर के बैठे थे। सरकारी कमेटियों में सलाहकार के रूप में भी ये माओवादी सोच ने नीतियों को प्रभावित किया था।

मेरे प्यारे देशवासियों,

जंगलों में हमें हथियारी नक्सलों का खात्मा बुलाने में उस संकट से देश को मुक्त कराने में सफलता मिली है। लेकिन हथियारी नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल, यह दिमागी नक्सल मौके की तलाश में है। हिंसा अराजकता के वो रास्ते खोज रहे हैं। समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए भांति-भांति के दांव कर रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा और राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।

मेरे प्यारे देशवासियों,

सुरक्षित भारत बनाना हम सबका दायित्व है। चुनौती सीमा के भीतर हो या सरहद से बाहर भारत हर परिस्थिति के लिए तैयार है। आज युद्ध का नेचर बदल रहा है। अब युद्ध सीमा पर ही होता है यह गारंटी नहीं है। आज युद्ध सीमा के अंदर कहीं रिफाइनरी में जा करके, कहीं बैंकिंग सेक्टर को जाकर के, कहीं डाटा सेंटर को जाकर के, एक प्रकार से लड़ाई का नया रूप इंफ्रास्ट्रक्चर तोड़े जा रहे हैं, फैक्ट्रियां तोड़ी जा रही हैं। हमने मिशन सुदर्शन चक्र की पिछले सालों घोषणा की थी। बहुत तेजी से उस पर काम चल रहा है। आज डिफेंस एक्सपोर्ट हमारा करीब 50 गुना बढ़ा है। करीब 100 देशों में हमारे अस्त्र-शस्त्र पहुंच रहे हैं। वैश्विक पटल पर भारत की प्रतिष्ठा धीरे-धीरे बढ़ रही है। बदलते हुए समय में अस्त्र-शस्त्र की तरफ काम करना है, सैन्य बलों का सामर्थ्य बढ़ाना है। लेकिन साथ-साथ नागरिकों को भी तैयार करना होगा। पिछली शताब्दी के युद्धों के अनुरूप जो सिविल डिफेंस की व्यवस्थाएं हमारे देश में विकसित हुई है, वो कालबाह्य हो चुकी है और इसलिए मैं आज लाल किले से घोषणा कर रहा हूं कि, हम आने वाले दिनों में सिविल डिफेंस का एक वाइब्रेंट नेटवर्क खड़ा करेंगे। आधुनिक व्यवस्थाओं से उनको परिचित कराएंगे। आधुनिक संकटों से नागरिकों को रक्षा करने की क्या व्यवस्था हो सकती है, एक बहुत बड़ा वॉलंटरी फोर्स सिविल डिफेंस का आधुनिक चुनौतियों को पार करने वाला हम बनाने वाले हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,

राष्ट्र के निर्माण में आज हमारी बहनों बेटियों का योगदान हम सबके लिए बहुत बड़ा प्रेरणा का कारण बना हुआ है। फाइटर जेट हो या सिविल एविएशन, हमारी बेटियां सबसे आगे दिखाई दे रही हैं। खेल कूद का मैदान हो, हमारी बेटियां आगे दिखाई दे रहीं हैं। स्टेम एजुकेशन में भर्ती होने की प्रक्रिया हो सबसे ज्यादा हमारी बेटियां आगे दिख रही हैं। आज सेना में भी एनडीए से जो बेटियां निकली हैं वो बड़े रौब के साथ देश की सेना का नेतृत्व करने का सामर्थ्य दिखाने लगी है। मेरी बेटियों की ताकत कैसी है, मैं पिछले दिनों सानंद में एक सेमीकंडक्टर प्लांट में गया था, वहां आदिवासी बेटियां देश के अलग-अलग कोने से आई हुई बेटियां काम कर रही थी। वो उस गांव से आई थी जिन्होंने पासपोर्ट क्या होता है पता तक नहीं था। वो बेटियां विदेशों में गईं, ट्रेनिंग लेकर के आईं और आज चीप निर्माण का काम कर रही हैं और बड़े कॉन्फिडेंस, मैंने जो उनका कॉन्फिडेंस देखा, मैं सचमुच में बहुत प्रभावित हुआ था। आज तीन 3 करोड़ बहनों को हमने लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य तय किया था, उसको पार कर लिया। अब हम 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को लेकर के आगे बढ़ रहे हैं। 3 करोड़ नई लखपति दीदी बनना मतलब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव मातृशक्ति के द्वारा आने वाला है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

आज पंचायतों में, नगर पालिका में, महानगर पालिका में, बहुत बड़ी मात्रा में हमारी महिलाएं जनप्रतिनिधि बनकर के देश का मार्गदर्शन कर रही हैं, समस्याओं का समाधान कर रही हैं, बहुत ही सक्षम नेतृत्व दे रही हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए हमने पार्लियामेंट में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। लेकिन किसी न किसी कारण से राजनीति के अखाड़े में पिछले 40 साल से यह सपना हमेशा राजनीतिक अखाड़े का शिकार हो गया है। मैं देश के सभी राजनीतिक दलों से आज लाल किले की प्राचीर से तिरंगे झंडे की छाया में खड़े होकर के प्रार्थना करता हूं, आग्रह करता हूं। आइए, उन महिलाओं के सामर्थ्य के पुजारी बनिए। उन महिलाओं के सम्मान में आगे आइए और जल्द से जल्द हमारी माताओं-बहनों को 33% विधानसभा और लोकसभा में उनको प्रतिनिधित्व मिले, वह भारत की नीति गढ़ करके अंदर अपना योगदान दें। समय की मांग है और मैं सभी राजनीतिक दलों से फिर से आग्रह करता हूं, आइए महिला आरक्षण लागू करके महिला सम्मान में आप भी जुड़िए, आप भी यश लीजिए, आप भी क्रेडिट लीजिए, लेकिन मेरी माताओं-बहनों को हक दीजिए।

मेरे प्यारे देशवासियों,

विकसित भारत का संकल्प तभी पूरा होगा, जब विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। 2014 से पहले सिर्फ 25 करोड़ लोगों के पास सोशल सिक्‍योरिटी का कवर था, सिर्फ 25 करोड़ के पास।

साथियों,

पिछले 5-7 दशक में सिर्फ 25 करोड़, हमने एक दशक के भीतर-भीतर 100 करोड़ देशवासियों को सोशल सिक्योरिटी का कवच दिया है। आयुष्मान भारत योजना से 70 साल की उम्र के बुजुर्गों से भी आज 5 लाख रुपये तक मुफ्त दवाई की व्यवस्था हो रही है। करोड़ों-करोड़ों परिवारों को इसके कारण बहुत बड़ी सुविधा मिली है और इस आयुष्मान कार्ड के कारण 2 लाख करोड़ रुपया जो दवाई और ऑपरेशन के पीछे खर्च होना था, वो मेरे परिवारों के बचे हैं, वो गरीब परिवार हैं, वो मध्यम वर्ग के परिवार हैं, उनको इतनी बड़ी मदद मिली है!

मेरे प्यारे देशवासियों,

आज मुझे एक काम के लिए आपकी मदद चाहिए। मैं आप सबसे एक मदद मांग रहा हूं। सभी नौजवानों से मैं चाहता हूं कि आप इसका नेतृत्व करिए। आपका एक या दो घंटे देश को बहुत बड़ी शक्ति देने वाले हैं। आपको लगेगा एक दो घंटे में मैं देश की क्या शक्ति, मैं बताता हूं। आप बहुत बड़ी शक्ति बनने वाले हैं और इसलिए हर घर में वातावरण बने। इन दिनों देश में जनगणना का काम हो रहा है। Census का काम हो रहा है, गिनती चल रही है और गिनती सिर्फ आंकड़ों से बात बनती नहीं है। उसकी बारीकियों से नीतियां बनती हैं, योजनाएं बनती हैं, देश आगे बढ़ने की अपनी रूपरेखा तैयार करता है और इसलिए सटीक जानकारियां होना बहुत जरूरी है। कभी-कभी जो सरकार की तरफ से प्रतिनिधि आते हैं, वो इतनी जल्दी में होते हैं, कभी स्पेलिंग एक लिख देते हैं, कभी अलग लिख देते हैं और इसके कारण अल्टीमेटली परिणाम हमें सही मिलने में दिक्कतें आती है। अब जब टेक्नोलॉजी अवेलेबल है और इस बार निर्णय किया है आप स्वयं भी जनगणना में अपनी जानकारियां अपने मोबाइल फोन से भरकर के दे सकते हैं। बाद में कोई बाबू आएंगे, कोई प्रतिनिधि आएंगे, आपसे चर्चा करेंगे, लेकिन आप परिवार के सब बैठकर के अगर डिजिटली अपना रजिस्ट्री करवा दें, सारी बारीकियां स्पेलिंग में भी गलती ना हो, कोई भी जानकारियों में गलती ना हो, आप जितनी परफेक्ट जानकारी देंगे, देश को आगे बढ़ने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी और इसलिए मैं देश के नौजवानों को कहता हूं कि आप अपने परिवार के लोगों को बिठा करके पूरे फॉर्म को समझिए। पहले कागज पर फॉर्म को भर दीजिए, कोई गलती है, तो करेक्ट कर लीजिए और फिर टेक्नोलॉजिकली उसको डिजिटली, इसको अपलोड कर दीजिए। आप देखिए, इतना बड़ा काम देश कर लेगा और देश का समय और शक्ति सही काम के लिए उपयोग आएगा और इसलिए मेरे देश के नौजवानों को जनगणना के इस काम में सक्रियता से जुड़ने के लिए मैं आग्रह करता हूं।

मेरे प्यारे देश सेवक,

मैंने लाल किले से पंचप्रण की बात कही थी। इस पंच प्रण ने देश को अपने आत्म गौरव की ओर लेकर के आगे बढ़ने का, लक्ष्यों को पार करने के सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ने का एक बहुत बड़ा संबल दिया है। हमें गुलामी की मानसिकता हर पल मिटाते ही रहना है। जिस भारत का सपना नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देखा था, बाबा साहब आंबेडकर ने देखा था, पंडित नेहरू ने देखा था, सरदार पटेल, भगत सिंह, सुखदेव राजगुरु ने देखा था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देखा था, भगवान बिरसा मुंडा ने देखा था, ज्योतिबा फुले ने देखा था, उन सब से प्रेरणा लेकर के हम आगे बढ़े। आइए इस संकल्प को हम दोहराए। स्वयं से ऊपर राष्ट्र का हित हो। स्वयं से ऊपर राष्ट्र का हित हो और कर्तव्य ही हमारी पहचान हो। मैं सभी देशवासियों से कहूंगा समय हमारा है, मैं सभी देशवासियों से कहूंगा समय हमारा है, अवसर हमारा है, संकल्प हमारा है, आइए सपनों को संकल्प बनाएं, संकल्प को सामर्थ्य बनाएं और सामर्थ्य को सफलता में बदल के रहें। आइए हर कदम को विकास का कदम बनाएं, कदम से कदम मिलाएं, मन से मन मिलाए, लक्ष्य से जुड़े रहे, एक दीप से जले दीप हजारों, आओ मिलकर विकसित भारत बनाएं। इसी एक भावना के साथ इस मंगल पर्व पर आप सबको अनेक-अनेक शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिए

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

बहुत-बहुत धन्यवाद!