भारत के सामाजिक जीवन में अनुशासन की भावना पैदाकरने में एनसीसी की प्रमुख भूमिका है: प्रधानमंत्री
भारत रक्षा उपकरणों के बाजार के बजाय इसके प्रमुख उत्पादक के रूप में उभरेगा: प्रधानमंत्री
सीमा और तटीय इलाकों में एकनईभूमिका निभाने के लिए 1 लाख कैडेटों को सेना, वायु सेना और नौसेना द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है, इनमें एक तिहाई महिला कैडेट हैं: प्रधानमंत्री

देश के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी, चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत, थलसेना, नौसेना और वायु सेनाध्यक्ष, रक्षा सचिव, NCC महानिदेशक और देश भर से यहां जुटे राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा से ओतप्रोत NCC कैडेट्स आप सभी युवा साथियों के बीच जितनी भी पल बिताने का मौका मिलता है, ये बहुत ही सुखद अनुभव देता है। अभी जो आपने यहां पर मार्च पास्ट किया, कुछ कैडेट्स ने पैरा सेलिंग का हुनर दिखाया, जो ये सांस्कृतिक प्रदर्शन हुआ, वो देखकर सिर्फ मुझे ही नहीं, आज टीवी के माध्‍यम से भी जो लोग देखते होंगे, हर किसी को गर्व महसूस होता होगा। देश के कोने-कोने से आकर आपने 26 जनवरी की परेड में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। आपकी इस मेहनत को पूरी दुनिया ने देखा है। हम देखते हैं, दुनिया में जिन भी देशों में समाज जीवन में अनुशासन होता है, ऐसे देश सभी क्षेत्रों में अपना परचम लहराते हैं। और भारत में समाज जीवन में अनुशासन लाने की ये बहुत अहम भूमिका NCC बखूबी निभा सकती है। और आपमें भी ये संस्कार, जीवन पर्यंत रहना चाहिए। NCC के बाद भी अनुशासन की ये भावना आपके साथ रहनी चाहिए। इतना ही नहीं, आप अपने आसपास के लोगों को भी निरंतर इसके लिए प्रेरित करेंगे तो भारत का समाज इससे मजबूत होगा, देश मजबूत होगा।

साथियों,

दुनिया के सबसे बड़े uniformed youth organization के रूप में, NCC ने अपनी जो छवि बनाई है, वो दिनों-दिन और मजबूत होती जा रही है। और जब मैं आपके प्रयास देखता हूं, तो मुझे बहुत खुशी मिलती है, आप पर भरोसा और मजबूत होता है। शौर्य और सेवा भाव की भारतीय पंरपरा को जहां बढ़ाया जा रहा है- वहां NCC कैडेट्स नजर आता है। जहां संविधान के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने का अभियान चल रहा हो- वहां भी NCC कैडेट्स दिखते हैं। पर्यावरण को लेकर कुछ अच्छा काम हो रहा हो, जल संरक्षण या स्वच्छता से जुड़ा कोई अभियान हो, तो वहां NCC कैडेट्स जरूर नजर आते हैं। संकट के समय में आप सभी जिस अद्भुत तरीके से संगठित काम करते हैं, उसके उदाहरण बाकी जगह पर बहुत कम देखने को मिलते हैं। बाढ़ हो या दूसरी आपदा, बीते वर्ष NCC के कैडेट्स ने मुश्किल में फंसे देशवासियों की राहत और बचाव में सहायता की है। कोरोना के इस पूरे कालखंड में लाखों-लाख कैडेट्स ने देशभर में जिस प्रकार प्रशासन के साथ मिलकर, समाज के साथ मिलकर जिस तरह काम किया है, वो प्रशंसनीय है। हमारे संविधान में जिन नागरिक कर्तव्यों की बात कही गई है, जिनकी हमसे अपेक्षा की गई है, वो निभाना सभी का दायित्व है।

हम सभी इसके साक्षी हैं कि जब सिविल सोसायटी, स्थानीय नागरिक अपने कर्तव्यों पर बल देते हैं, तब बड़ी से बड़ी चुनौतियों को भी हल किया जा सकता है। जैसे आप भी भली-भांति जानते हैं कि हमारे देश में एक समय में नक्सलवाद-माओवाद कितनी बड़ी समस्या थी। देश के सैकड़ों जिले इससे प्रभावित थे। लेकिन स्थानीय नागरिकों का कर्तव्यभाव और हमारे सुरक्षाबलों का शौर्य साथ आया, तो नक्सलवाद की कमर टूटनी शुरू हो गई। अब देश के कुछ गिनती के जिलों में ही नक्सलवाद सिमटकर रह गया है। अब देश में न सिर्फ नक्सली हिंसा बहुत कम हुई है, बल्कि अनेकों युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास के कार्यों से जुड़ने लगे हैं। एक नागरिक के तौर पर अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देने का प्रभाव हमने इस कोरोना काल में भी देखा है। जब देश के लोग एकजुट हुए, अपना दायित्व निभाया, तो देश कोरोना का अच्छी तरह मुकाबला भी कर पाया।

साथियों,

ये कालखंड चुनौतीपूर्ण तो रहा, पर ये अपने साथ अवसर भी लाया। अवसर - चुनौतियों से निपटने का, विजयी बनने का, अवसर - देश के लिए कुछ कर गुजरने का, अवसर - देश की क्षमताएं बढाने का, अवसर आत्मनिर्भर बनने का, अवसर- साधारण से असाधारण, असाधारण से सर्वश्रेष्ठ बनने का। इन सब लक्ष्यों की प्राप्ति में भारत की युवा शक्ति की भूमिका और युवा शक्ति का योगदान सबसे महत्त्वपूर्ण है। आप सभी के भीतर भी मैं एक राष्ट्र सेवक के साथ ही एक राष्ट्र रक्षक भी देखता हूं। इसलिए सरकार ने विशेष प्रयास किया है कि NCC की भूमिका का और विस्तार किया जाए। देश के सीमावर्ती और समुद्री किनारों की रक्षा और सुरक्षा से जुड़े नेटवर्क को सशक्त करने के लिए NCC की भागीदारी को बढ़ाया जा रहा है।

पिछले वर्ष 15 अगस्त को ये ऐलान किया गया था कि Coastal और Border Areas के करीब पौने 2 सौ जिलों में NCC को नया दायित्व दिया जाएगा। इसके लिए लगभग 1 लाख NCC Cadets को Army, Navy और Airforce ट्रेन कर रही है। इसमें भी एक तिहाई, वन थर्ड, हमारी Girls Cadets को ट्रेनिंग दी जा रही है। इन कैडेट्स का सेलेक्शन सभी स्कूलों और कॉलेजों, चाहे वो सरकारी हों, प्राइवेट हों, केंद्र के हों या राज्य सरकार के हों, सभी को इसमें शामिल किया जा रहा है। NCC की ट्रेनिंग क्षमताओं को भी सरकार तेजी से बढ़ा रही है। अब तक आपके पास सिर्फ एक फाइरिंग सिम्यूलेटर होता था। इसे अब बढ़ाकर 98 किया जा रहा है, करीब-करीब 100, कहां एक और कहां 100. माइक्रोलाइट फ्लाइट सिम्यूलेटर को भी 5 से बढ़ाकर 44 और रोविंग सिम्यूलेटर को 11 से बढ़ाकर 60 किया जा रहा है। ये आधुनिक सिम्यूलेटर्स, NCC ट्रेनिंग की क्वालिटी को और सुधारने में मदद करेंगे।

साथियों,

ये आयोजन अभी जिस ग्राउंड पर हो रहा है, उसका नाम फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा जी के नाम पर है। वो भी आपके लिए बड़ी प्रेरणा हैं। करियप्पा जी का जीवन शौर्य की अनेक गाथाओं से भरा हुआ है। 1947 में उनके रणनीतिक कौशल की वजह से भारत को युद्ध में निर्णायक बढ़त मिली थी। आज फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा जी की जन्मजयंती है। मैं सभी देशवासियों की तरफ से, आप NCC कैडेट्स की तरफ से उन्हें आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

आप में से भी अनेक साथियों की ये प्रबल इच्छा होगी कि आप भारत की Defense Forces का हिस्सा बनें। आप सभी में वो सामर्थ्य भी है और सरकार आपके लिए अवसर भी बढ़ा रही है। विशेष रूप से Girls Cadets को मैं आग्रह से कहूंगा कि आपके लिए भी अनेक अवसर आपका इंतजार कर रहे हैं। मैं अपने सामने भी देख पा रहा हूं और आंकड़े भी बताते हैं कि बीते वर्षों में NCC में Girls कैडेट्स में करीब –करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब हमारी Forces के हर फ्रंट को आपके लिए खोला जा रहा है। भारत की वीर बेटियां हर मोर्चे पर शत्रु से लोहा लेने के लिए आज भी मोर्चे पर डटी हुईं हैं। आपके शौर्य की देश को ज़रूरत है और नई बुलंदी आपका इंतज़ार कर रही है। और मैं आपमें भविष्य की ऑफीसर्स, भविष्य के ऑफीसर्स भी देख रहा हूं। मुझे याद है, मैं जब कुछ दो-ढाई महीना पहले, दीवाली पर जैसलमेर की लोंगेवाला पोस्ट पर गया था, तो कई यंग ऑफीसर्स से मेरी मुलाकात हुई थी। देश की रक्षा के लिए उनका जज्बा, उनका हौसला, उनकी चेहरे पर दिख रही अदम्य इच्छाशक्ति, मैं कभी भूल नहीं सकता।

साथियों,

लोंगेवाला पोस्ट का भी अपना एक गौरवमयी इतिहास है। सन 71 के युद्ध में लोंगेवाला में हमारे वीर जांबाजों ने निर्णायक विजय प्राप्त की थी। तब पाकिस्तान से युद्ध के दौरान पूरब और पश्चिम के हजारों किलोमीटर लंबे बॉर्डर पर भारत की फौज ने अपने पराक्रम से, दुश्मन को धूल चटा दी थी। उस युद्ध में पाकिस्तान के हजारों सैनिकों ने भारत के जांबाजों के सामने सरेंडर कर दिया था। सन 71 की ये जंग, भारत के मित्र और हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश के निर्माण में भी सहायक बनी। इस वर्ष, इस युद्ध में विजय के भी 50 वर्ष हो रहे हैं। भारत के हम लोग, 1971 की जंग में देश को जिताने वाले भारत के वीर बेटे-बेटियों के साहस, उनके शौर्य, आज पूरे देश उन्‍हें सैल्यूट करता है। इस युद्ध में देश के लिए जो शहीद हुए, आज मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि भी अर्पित करता हूं।

साथियों,

आप सभी जब दिल्ली आए हैं, तो नेशनल वॉर मेमोरियल जाना बहुत स्वाभाविक है। राष्ट्ररक्षा के लिए जीवन अर्पित करने वालों को सम्मान देना हम सभी का दायित्व है। बल्कि इस गणतंत्र दिवस को तो हमारा जो Gallantry Awards Portal है- www.gallantry awards.gov.in, उसको भी नए रंगरूप में Re-launch किया गया है। इसमें परमवीर और महावीर चक्र जैसे सम्मान पाने वाले हमारे सैनिकों के जीवन से जुड़ी जानकारी तो है ही, आप इस पोर्टल पर जाकर इनकी वीरता को नमन कर सकते हैं। और मेरा एनसीसी में वर्तमान और पूर्व सभी कैडेट्स से आग्रह है कि आपको इस पोर्टल पर जाना चाहिए, जुड़ना चाहिए और लगातार उसके साथ इंगेज रहना चाहिए।

साथियों,

मुझे ये भी बताया गया है कि जो NCC Digital Platform बनाया गया है, उसमें अभी तक 20 हज़ार से ज्यादा कैडेट्स जुड़ चुके हैं। इन कैडेट्स ने अपने अनुभव, अपने Ideas शेयर करना शुरु भी कर दिया है। मुझे विश्वास है कि आप सभी इस प्लेटफॉर्म का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करेंगे।

साथियों,

राष्ट्र भक्ति और राष्ट्रसेवा के जिन मूल्यों को लेकर आप चले हैं, उनके लिए ये साल बहुत महत्वपूर्ण है। इस वर्ष भारत अपनी आज़ादी के 75वें वर्ष में प्रवेश करने वाला है। ये वर्ष नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती का भी है। जीवन में प्रेरणा के इतने बड़े अवसर एक साथ आएं, ऐसा कम ही होता है। नेताजी सुभाष, जिन्होंने अपने पराक्रम से दुनिया की सबसे मजबूत सत्ता को हिला कर रख दिया था। आप नेताजी के बारे में जितना पढ़ेंगे, उतना ही आपको लगेगा कि कोई भी चुनौती इतनी बड़ी नहीं होती कि आपके हौसले को डिगा सके। देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देने वाले ऐसे अनेक वीर आपको, अपने सपनों का भारत बनाते हुए देखना चाहते हैं। और आपके जीवन के अगले 25-26 साल बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये 25-26 साल भारत के लिए भी उतने ही अहम हैं।

वर्ष 2047 में जब देश अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब आपके आज के प्रयास, भारत की इस यात्रा को मजबूती देंगे। यानि ये वर्ष एक कैटेड के रूप में और नागरिक के रूप में भी नए संकल्प लेने का वर्ष है। देश के लिए संकल्‍प लेने का वर्ष है। देश के लिए नए सपने लेकर के चल पड़ने का वर्ष है। बीते साल में बड़े-बड़े संकटों का जिस सामूहिक शक्ति से, एक राष्ट्र, एक मन से हमने सामना किया, उसी भावना को हमें और सशक्त करना है। हमें देश की अर्थव्यवस्था पर इस महामारी के जो दुष्‍प्रभाव पड़े हैं, उसको भी पूरी तरह नेस्‍तनाबूद करना है। और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी हमें पूरा करके दिखाना है।

साथियों,

बीते साल भारत ने दिखाया है कि Virus हो या Border की चुनौती, भारत अपनी रक्षा के लिए पूरी मज़बूती से हर कदम उठाने में सक्षम है। Vaccine का सुरक्षा कवच हो या फिर भारत को चुनौती देने वालों के इरादों को आधुनिक मिसाइलों से ध्वस्त करना, भारत हर मोर्चे पर समर्थ है। आज हम Vaccine के मामले में भी आत्मनिर्भर हैं और अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए उतनी ही तेजी से प्रयास कर रहे हैं। भारत की सभी सेनाएं सर्वश्रेष्ठ हो, इसके लिए हर कदम उठाए जा रहे हैं। आज भारत के पास दुनिया की बेहतरीन War Machines हैं। आपने आज मीडिया में भी देखा होगा, कल ही भारत में, फ्रांस से तीन और रफाएल फाइटर प्लेन आए हैं। भारत के इन फाइटर प्लेन्स ही मिड-एयर ही री-फ्यूलिंग हुई है। और ये री-फ्यूलिंग, भारत के मित्र युनाइटेड अरब अमीरात ने की है और इसमें ग्रीस और सउदी अरब ने सहयोग किया है। ये भारत के खाड़ी देशों के साथ मजबूत होते संबंधों की एक तस्वीर भी है।

साथियों,

अपनी सेनाओं की ज्यादातर ज़रुरतों को भारत में ही पूरा किया जा सके, इसके लिए भी सरकार द्वारा बड़े फैसले लिए गए हैं। 100 से ज्यादा सुरक्षा से जुड़े सामानों की विदेशों से खरीद को बंद कर उनको भारत में ही तैयार किया जा रहा है। अब भारत का अपना तेजस फाइटर प्लेन भी समंदर से लेकर आसमान तक अपना तेज फैला रहा है। हाल में वायुसेना के लिए 80 से ज्यादा तेजस का ऑर्डर भी दिया गया है। इतना ही नहीं, Artificial Intelligence आधारित Warfare में भी भारत किसी से पीछे ना रहे, इसके लिए हर ज़रूरी R and D पर फोकस किया जा रहा है। वो दिन दूर नहीं जब भारत Defense Equipments के बड़े मार्केट के बजाय एक बड़े Producer के रूप में जाना जाएगा।

साथियों,

आत्मनिर्भरता के अनेक लक्ष्यों को आज आप साकार होते हुए देख रहे हैं, तो आपके भीतर गर्व का एहसास होना बहुत स्वाभाविक है। आप भी अब अपने में, अपने दोस्तों के बीच में लोकल के प्रति उत्साह अनुभव कर रहे हैं। मैं देख रहा हूं कि Brands को लेकर भारत के युवाओं की Preferences में भी एक बड़ा बदलाव आया है। अब आप खादी को ही लीजिए। खादी को किसी जमाने में नेताओं के लिबास के रूप में ही अपने हाल में छोड़ दिया गया था। आज वही खादी युवाओं का पसंदीदा Brand बन चुका है। खादी के कुर्ते हों, खादी का जैकेट हो, खादी का दूसरा सामान है, वो आज युवाओं के लिए फैशन का सिंबल बन चुका है। इसी तरह, आज टेक्सटाइल हो या इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन हो या पैशन, त्योहार हो या शादी, लोकल के लिए हर भारतीय वोकल बनता जा रहा है। कोरोना के मुश्किल समय में भी भारत में रिकॉर्ड संख्या में स्टार्ट अप्स बने हैं और रिकॉर्ड यूनिकॉर्न देश के युवाओं ने तैयार किए हैं।

साथियों,

21वीं सदी में आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मविश्वासी युवा बहुत ज़रूरी है। ये आत्मविश्वास, फिटनेस से बढ़ता है, एजुकेशन से बढ़ता है, स्किल और उचित अवसरों से आता है। आज सरकार देश के युवाओं के लिए ज़रूरी इन्हीं पहलुओं पर काम कर रही है और इसके लिए सिस्टम में हर ज़रूरी रिफॉर्म्स भी किए जा रहे हैं। हजारों अटल टिंकरिंग लैब से लेकर बड़े-बड़े आधुनिक शिक्षा संस्थान तक, स्किल इंडिया मिशन से लेकर मुद्रा जैसी योजनाओं तक, सरकार हर दिशा में प्रयास कर रही है। आज Fitness और Sports को भारत में अभूतपूर्व प्राथमिकता दी जा रही है। फिट इंडिया अभियान और खेलो इंडिया अभियान, देश के गांव-गांव में बेहतर फिटनेस और बेहतर टैलेंट को प्रोत्साहित कर रहा है। फिट इंडिया अभियान और योग को प्रोत्साहन देने के लिए तो NCC में भी विशेष कार्यक्रम चलते हैं।

नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के माध्यम से भारत के एजुकेशन सिस्टम को प्री नर्सरी से लेकर पीएचडी तक Student सेंट्रिक बनाया जा रहा है। अपने बच्चों को, युवा साथियों को अनावश्यक दबाव से मुक्त करके, उसकी अपनी इच्छा, अपनी रुचि के हिसाब से आगे बढ़ने के लिए माहौल बनाया जा रहा है। खेती से लेकर स्पेस सेक्टर तक, हर स्तर पर युवा टैलेंट के लिए, युवा उद्यमियों के लिए अवसर दिए जा रहे हैं। आप इन अवसरों का जितना लाभ उठाएंगे, उतना ही देश आगे बढ़ेगा। हमें वयं राष्ट्र जागृयामः, इस वैदिक आह्वान को 21वीं सदी की युवा ऊर्जा का उद्घोष बनाना है। हमें ‘इदम् राष्ट्राय इदम् न मम्’ यानि ये जीवन राष्ट्र को समर्पित है, इस भावना को आत्मसात करना है। हमें ‘राष्ट्र हिताय राष्ट्र सुखाय च’ का संकल्प लेकर प्रत्येक देशवासी के लिए काम करना है। आत्मवत सर्वभूतेषु और सर्वभूत हितेरता यानि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र के साथ हमें आगे बढ़ना है।

अगर हम इन मंत्रों को अपने जीवन में उतारेंगे तो आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि में बहुत ज्यादा समय नहीं लगेगा। एक बार फिर आप सभी को गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनने के लिए बहुत-बहुत बधाई और भविष्य के लिए भी अनेक-अनेक मंगलकामनाएं।

 

बहुत-बहुत धन्यवाद !

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21वीं सदी के इस दशक में भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है: ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी
February 13, 2026
Amid numerous disruptions, this decade has been one of unprecedented development for India, marked by strong delivery and by efforts that have strengthened our democracy: PM
In this decade of the 21st century, India is riding the Reform Express: PM
We have made the Budget not only outlay-focused but also outcome-centric: PM
Over the past decade, we have regarded technology and innovation as the core drivers of growth: PM
Today, we are entering into trade deals with the world because today's India is confident and ready to compete globally: PM

आप सभी का इस ग्लोबल बिजनेस समिट में, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं। हम यहां A Decade Of Disruption, A Century Of Change, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। विनीत जी का भाषण सुनने के बाद मुझे लगता है कि मेरा काम बहुत सरल हो गया है। लेकिन एक छोटी request करूं, इतना सारा आपको पता है, तो कभी ET में तो दिखना चाहिए।

साथियों,

21वीं सदी का बीता दशक अभूतपूर्व डिसरप्शन का रहा है। ग्लोबल Pandemic, ग्लोब के अलग-अलग हिस्सों में तनाव, युद्ध और ग्लोब के संतुलन को हिला देने वाले Supply Chain Breakdowns, दुनिया ने एक दशक के भीतर काफी कुछ देख लिया। लेकिन साथियों, कहते हैं, संकट के समय ही किसी देश के सामर्थ्य पता चलता है और मुझे बहुत गर्व है, अनेक Disruptions के बीच भी भारत के लिए यह दशक, अभूतपूर्व डेवलपमेंट का रहा है, शानदार डिलीवरी का रहा है और डेमोक्रेसी को मजबूत करने वाला रहा है। जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तो भारत ग्यारहवें नंबर की अर्थव्यवस्था था। इतनी उथल-पुथल में पूरी आशंका थी कि भारत और नीचे चला जाएगा, लेकिन आज भारत, बहुत तेजी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। और आप जिस Century Of Change की बात कर रहे हैं, उसका बहुत बड़ा आधार और यह मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, इसका बहुत बड़ा आधार भारत ही होने जा रहा है। आज भारत, दुनिया की ग्रोथ में 16 परसेंट से ज्यादा योगदान दे रहा है। और मुझे विश्वास है, इस सेंचुरी के हर आने वाले साल में हमारा योगदान और भी बढ़ता रहेगा, निरंतर बढ़ता रहेगा। मैं वह मदान की तरह astrologer के रूप में नहीं आया हूं। भारत, दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव करेगा, दुनिया की ग्रोथ का नया इंजन बनेगा।

साथियों,

दुनिया में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था बनी थी, एक नए वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। लेकिन सात दशक के बाद, वो व्यवस्था टूट रही है। दुनिया आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है। आखिर यह क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि तब जो व्यवस्था बनी थी, उसकी नींव One Size Fits All, इसी सोच पर टिकी थी। तब ये माना गया कि World Economy Core में होगी, Supply Chains मजबूत और विश्वसनीय हो जाएगी। इस व्यवस्था में नेशन्स को केवल कंट्रीब्यूटर्स के रूप में ही देखा गया। लेकिन आज, इस मॉडल को चुनौती मिल रही है। यह अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। आज हर देश को यह पता चल रहा है कि उसे अपनी रज़ीलियन्स खुद बनानी होगी।

साथियों,

आज दुनिया जिसकी चर्चा कर रही है। उसको भारत ने 2015 में, आज से 10 साल से पहले, 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। दस साल पहले जब नीति आयोग बना, तो उसके फाउंडिंग डॉक्यूमेंट में ही भारत ने अपना विजन क्लीयर कर दिया था और विजन यह कि भारत किसी दूसरे देश से कोई सिंगल डेवलपमेंट मॉडल इंपोर्ट नहीं करेगा। हम भारत के विकास के लिए भारतीय अप्रोच को लेकर ही चलेंगे। इस नीति ने भारत को अपने हिसाब से, अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से, अपने हित में फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया और यह एक बड़ा कारण है कि डिसरप्शन के दशक में भी भारत की इकोनॉमी कमजोर नहीं पड़ी, निरंतर मजबूत होती गई।

साथियों,

आज 21वीं सदी के इस दशक में भारत Reform Express पर सवार है और इस Reform Express की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम इसे compulsion में नहीं, बल्कि conviction के साथ, Reform के कमिटमेंट के साथ गति दे रहे हैं। यहां तो बहुत बड़ी-बड़ी संख्या में बड़े-बड़े expert बैठे हैं, अर्थजगत के दिग्गज बैठे हैं। आपने भी 2014 से पहले का दौर देखा है। जब तक हालात मजबूर न कर दें, जब तक कोई संकट न आ जाए, जब कोई और रास्ता न बचे, तब मजबूरन रिफॉर्म्स किए जाते थे। आप याद करिए, 1991 का रिफॉर्म्स भी तब हुआ, जब देश पर दिवालिया होने का खतरा आ गया था। जब देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था। पहले की सरकारों का यही तरीका था, वो reforms compulsion में ही किया करती थीं। जब 26/11 का आतंकी हमला हुआ, कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई, तो NIA का गठन किया गया। जब पावर सेक्टर बर्बाद हो गया, ग्रिड फेल होने लगे, तब मजबूरी में कांग्रेस को पावर सेक्टर में याद आई।

साथियों,

ऐसी एक लंबी सूची है, जो याद दिलाती है कि जब compulsion में, मजबूरी में reform होता है, तो न सही नतीजे मिलते हैं, न देश को सही परिणाम मिलते हैं।

साथियों,

आज मुझे गर्व है कि बीते 11 वर्षों में हमने पूरे conviction के साथ रिफॉर्म किए हैं और यह रिफॉर्म Policy में हुए हैं, Process में हुए, Delivery में हुए और इतना ही नहीं, Mindset में भी reform हुआ है। क्योंकि साथियों, अगर पॉलिसी बदले, लेकिन प्रोसेस वही रहे, माइंडसेट वही रहे, डिलीवरी ठीक से ना हो, तो रिफॉर्म्स सिर्फ और सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाता है। इसलिए हमने पूरे सिस्टम को बदलने के लिए ईमानदारी से कोशिश की है।

साथियों,

मैं प्रोसेस की बात करूं, तो एक साधारण लेकिन बहुत जरूरी प्रोसेस है, कैबिनेट नोट्स का। यहां कई लोगों को अंदाजा होगा कि पहले की सरकारों में एक कैबिनेट नोट बनने में ही कुछ महीने लग जाते थे, महीने। अब इस स्पीड से देश का विकास कैसे होता? इसलिए हमने इस process को बदला। हमने डिसीजन मेकिंग को time-bound और technology-driven बनाया। हमने यह तय कर दिया कि इस अफसर की टेबल पर यह कैबिनेट नोट इतने घंटे से ज्यादा रहेगा ही नहीं। या तो रिजेक्ट करो या निर्णय लो और इसका नतीजा आज देश देख रहा है।

साथियों,

मैं आपको रेलवे ओवर ब्रिज के अप्रूवल का भी उदाहरण दूंगा। पहले R.O.B का एक डिजाइन अप्रूव कराने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, कई सारी क्लीयरेंस की ज़रूरत थीं, कई जगह चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं और यह मैं प्राइवेट के लिए नहीं कह रहा हूं, सरकार को। हमने इसको भी बदला और आज देखिए कितनी तेजी से रोड और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। विनीत जी ने बहुत विस्तार से इस बात को बताया।

साथियों,

एक बड़ा Interesting उदाहरण बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का है। अब बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की security से जुड़ा हुआ होता है। आप कल्पना कर सकते हैं, एक समय था, जब बॉर्डर एरियाज़ में एक साधारण सी सड़क बनाने के लिए भी कुछ परमिशन दिल्ली से लेनी पड़ती थी। जिला स्तर पर निर्णय लेने के यानी इसके सामने एक प्रकार से उसका कोई अधिकारी ही नहीं थे, दीवार ही दीवार थीं, वो निर्णय नहीं कर सकता था और इसलिए तो दशकों बाद भी हमारे देश में बॉर्डर इंफ्रा इतना बेहाल रहा। 2014 के बाद हमने इस प्रोसेस में भी रिफॉर्म किया, हमने स्थानीय प्रशासन को Empower किया और आज हम देश के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से डेवलप होते देख रहे हैं।

साथियों,

बीते दशक में भारत के जिस Reform ने दुनिया में हलचल मचा दी है, वो है UPI, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम। यह सिर्फ एक App नहीं है, यह policy, process और delivery के एक शानदार कन्वर्जेंस का प्रमाण है। जो लोग कभी बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े बेनिफिट्स के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, UPI देश के ऐसे नागरिकों को सर्व कर रहा है। यह जो डिजिटल इंडिया है, डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जनधन आधार मोबाइल की ट्रिनिटी है, यह रिफॉर्म किसी compulsion से नहीं हुआ, यह हमारा कन्विक्शन था। और कन्विक्शन यह था कि जिन लोगों तक पहले की सरकारें कभी नहीं पहुंची, हमें ऐसे नागरिकों का इंक्लूजन करना है। जिसे कोई नहीं पूछता, उसे मोदी पूजता है। और इसलिए यह रिफॉर्म्स किए गए हैं और आज भी हमारी सरकार इसी सोच के साथ चल रही है।

साथियों,

भारत का यह जो नया मिज़ाज है, वो हमारे बजट में भी रिफ्लेक्ट होता है। पहले जब बजट की चर्चा होती थी, तो फोकस सिर्फ Outlay पर होता था। कितना पैसा आवंटित हुआ, क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और उस दिन टीवी देखेंगे, तो पूरी टीवी एक ही यानी इनके लिए, बजट मतलब इंकम टैक्‍स ऊपर गया कि नीचे गया, इसके आगे उनको देश दिखता ही नहीं है। और होता क्‍या था, कितनी नई ट्रेनें घोषित हुईं, यही चलता रहता था, उन घोषणाओं का बाद में क्या हुआ, कोई पूछने वाला ही नहीं था। और इसलिए हमने बजट को Outlay के साथ-साथ Outcome सेंट्रिक बनाया।

साथियों,

बजट में एक और बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले Off-Budget Borrowing पर बहुत अधिक चर्चा होती थी। लेकिन अब Off-Budget Reforms की चर्चा होती है। बजट से बाहर, नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म्स हुए, प्लानिंग कमीशन की जगह नीति आयोग बनाया, आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया।

साथियों,

बजट में घोषित हों, या बजट से बाहर, रिफॉर्म एक्सप्रेस लगातार गति पकड़ रही है। अगर मैं पिछले एक साल की ही बात करूं तो हमने Ports & Maritime सेक्टर में Reform किया, शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के लिए अनेक Initiative लिए, जन-विश्वास एक्ट के तहत रिफॉर्म्स को और आगे बढ़ाया, Energy Security के लिए Shanti Act बनाया, लेबर कानूनों से जुड़े रिफॉर्म्स को लागू किया, भारतीय न्याय संहिता लेकर आए, वक्फ कानून में Reform किया गया है, गांव में रोजगार के लिए नया G RAM G कानून बनाया, ऐसे अनेक Reforms साल भर होते रहे हैं।

साथियों,

इस साल के बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और आगे बढ़ाया है। वैसे तो बजट के बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन मैं दो Important फैक्टर्स की बात करूंगा। Capex और Technology, बीते वर्षों की भांति इस बजट में भी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। और आप जानते हैं कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर effect कितना बड़ा होता है। इससे देश की कैपेसिटी और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। अनेकों सेक्टर्स में बहुत बड़ी संख्या में जॉब क्रिएशन भी होती है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन्स का निर्माण और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ऐसे बजट अनाउंसमेंट्स, सही मायने में युवाओं पर, देश के फ्यूचर पर, यह इन्वेस्टमेंट हैं।

साथियों,

बीते दशक में हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रोथ का कोर ड्राइवर माना है। इसी सोच के साथ, देश में स्टार्टअप कल्चर, हैकाथॉन कल्चर, उसको हमने प्रमोट किया। आज देश में, दो लाख से अधिक स्टार्टअप, रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और यह डायवर्स सेक्टर्स में काम कर रहे हैं। हमने युवाओं को प्रोत्साहित किया, देश में रिस्क टेकिंग कल्चर को पुरस्कृत करने का भाव जगाया और परिणाम हमारे सामने है। इस साल का बजट, हमारी इसी प्राथमिकता को और मजबूत करता है। विशेष तौर पर बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे सेक्टर के लिए, इस बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

साथियों,

आज जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ी है, तो हम राज्यों को भी उतना ही ज्यादा सशक्त कर रहे हैं। मैं एक और आंकड़ा आपको देना चाहता हूं। 2004 से 2014, 10 साल, इस दरमियान राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तौर पर 18 लाख करोड़ रुपए के आसपास ही मिले थे, 2004 से 2014 तक। जबकि 2014 से लेकर 2025 तक, राज्यों को 84 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। अगर मैं इस साल बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ का आंकड़ा और जोड़ दूं, तो हमारी सरकार में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के करीब-करीब 100 लाख करोड़ रुपए मिलने तय हुए हैं। यह राशि केंद्र सरकार की तरफ से अलग-अलग राज्य सरकारों को मिली है, ताकि वो अपने यहां विकास के कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

साथियों,

आजकल आप लोग भारत के FTA’s यानि फ्री ट्रेड डील्स पर काफी चर्चा कर रहे हैं और मैं यहां enter हुआ, वहीं से शुरू हो गए लोग। दुनियाभर में इसका एनालिसिस हो रहा है। लेकिन मैं आज इसका एक और इंटरेस्टिंग एंगल आपको बताता हूं, मीडिया को जो चाहिए, वो तो इसमें नहीं होगा शायद, लेकिन हो सकता है कि कुछ काम में आ जाए। और मैं पक्का मानता हूं, जो बात मैं कहने जा रहा हूं, आपने भी इसके बारे में विचार नहीं किया होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आज इतने सारे विकसित देशों के साथ फ्री-फ्री ट्रेड डील्स हो रहे हैं, क्या यही काम 2014 से पहले क्यों नहीं हो पाए? देश वही, युवा शक्ति वही, सरकारी सिस्टम वही, तो बदला क्या? बदलाव, सरकार के विजन में आया है, नीति और नीयत में बदलाव आया है, भारत के सामर्थ्य में बदलाव आया है।

साथियों,

आप ज़रा सोचिए, फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी जब थी, तब कौन हमारे साथ डील करता? गांव में भी गरीब की बेटी को कोई रईस के परिवार वाला शादी करता है क्या? वो उसको छोटा मानता है, हमारा भी यही हाल था भाई दुनिया में। जब देश पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा था, चारों तरफ घोटाले और घपले थे, तब कौन भारत पर भरोसा कर पाता? 2014 से पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बेस बहुत कमजोर था और जिसके कारण, पहले की सरकारें भी डरती थी, एक तो कोई आता नहीं था और जरा सा भी कोई कोशिश करें, तो यह लोग भी डरते थे और डर यह था कि अगर विकसित देशों के साथ डील हो गई, तो वो हमारे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, वो यहां अपने प्रोडक्ट डंप करने लगेंगे, हताशा-निराशा के उस माहौल में 2014 से पहले यूपीए सरकार सिर्फ चार देशों के साथ ही कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट कर पाई थी। जबकि, बीते दशक में भारत ने जो ट्रेड डील्स की हैं, उनमें दुनिया के 38 कंट्री कवर होते हैं, 38 कंट्री। और यह दुनिया के अलग-अलग रीजन्स में हैं। आज हम इसलिए दुनिया के साथ ट्रेड डील्स कर रहे हैं क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज का भारत, दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए तैयार है। बीते 11 वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम देश में विकसित किया है। इसलिए, आज भारत समर्थ है, सशक्त है और इसलिए दुनिया भी हम पर भरोसा करती है। यही बदलाव हमारी Trade Policy में आए Paradigm Shift का आधार बने और यही Paradigm Shift विकसित भारत की हमारी यात्रा का अनिवार्य स्तंभ बना है।

साथियों,

आज हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ देश के हर नागरिक को विकास में सहभागी बनाते हुए कार्य कर रही है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया, हम उसके विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले की सरकारों ने दिव्यांग जनों के लिए सिर्फ घोषणाएं कीं, हम भी उसी रास्ते को जारी रख सकते थे, लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। आप में से शायद जो बातें मैं बता रहा हूं, आप जिस लेवल के लोग हैं, शायद उसमें फिट नहीं बैठती होगी। हमारे दिव्यांग जनों के लिए जैसे हमारे यहां Language में बिखराव है ना, Sign Language का भी वही हाल था जी। तमिलनाडु में जाओ तो एक Sign Language, उत्तर प्रदेश में जाओ तो दूसरी, गुजरात में जाओ तो तीसरी, असम में जाओ तो चौथी, अगर यहां का दिव्‍यांग असम गया, तो बेचारा समझ ही नहीं पाता था। अब यह कोई बड़ा काम तो नहीं था। अगर संवेदनशील सरकार होती है ना, तो उसको यह काम छोटा नहीं लगता है। और देश ने पहली बार Indian Sign Language को institutionalise किया, common किया, व्यवस्था बनाई है। ऐसे ही, देश की Transgender community कब से अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी। हमने उनके लिए भी कानून बनाकर उन्हें सम्मान से जीने का कवच दिया है। बीते दशक में ही देश की करोड़ों बहनों को तीन-तलाक की कुरीति से मुक्ति मिली, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का हुआ।

साथियों,

आज सरकारी मशीनरी की सोच भी बदली है, उसमें संवेदनशीलता आई है। सोच का अंतर क्या होता है, यह हम जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज देने वाली स्कीम में भी देखते हैं। विपक्ष के कुछ लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं और कुछ अखबारों में जरा छपता भी ज्यादा है। कोई मजाक उड़ाता है कि जब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल ही गए हैं, तो उनको मुफ्त राशन क्यों मिलता है? अजीबोगरीब सवाल है। अगर आप बीमार हैं, अस्पताल में गए और अस्पताल से आपको छुट्टी मिली, तो भी डॉक्टर कहता है कि सात दिन तक यह-यह संभालना, पंद्रह दिन तक यह-यह संभालना, कहता है कि नहीं कहता है? गरीबी से बाहर निकले हैं, लेकिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि निकले हैं, तो फिर अनाज क्यों देते हो? ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग, यह नहीं सोचते कि सिर्फ गरीबी से बाहर निकालना काफी नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति नियो मिडिल क्लास में आया है, वो फिर गरीबी के चंगुल में न फंस जाए, यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है। इसलिए उसे आज अनाज मुफ्त की सुविधा मिल रही है, यह आवश्यक है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, इससे गरीब और नियो मिडिल क्लास को बहुत बड़ा संबल मिला है।

साथियों,

सोच का एक और फर्क हम अपने आसपास भी देखते हैं। कुछ लोग हैं, जो कहते हैं कि ये मोदी 2047 की बात क्यों करता है? 2047 में विकसित भारत बनेगा, नहीं बनेगा, किसने देखा? हम रहें या ना रहें, उससे हमारा लेना देना क्या है? अब देखिए, यह सोच है और यह बड़े-बड़े लोगों की सोच है, यह कोई मैं अपने शब्द नहीं बता रहा हूं।

साथियों,

जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, लाठियां खाईं, कालापानी की सज़ाएं पड़ी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए, अगर वो भी यही सोचते कि आजादी पता नहीं कब मिले, हम क्यों आज आजादी के लिए लाठी खाएं, तो सोचिए, क्या उस सोच के साथ देश कभी आजाद हो पाता क्या? जब राष्ट्र प्रथम का भाव हो, जब देश हित सर्वोपरि हो, तो हर निर्णय देश के लिए होता है, हर नीति देश के लिए बनती है। हमारी सोच स्पष्ट है, विजन साफ है, हमें देश को विकसित बनाने के लिए निरंतर काम करना है। 2047 तक हम रहें न रहें, लेकिन यह देश रहेगा, इस देश की संतानें रहेंगी। इसलिए हमें और इसलिए हमें अपना आज खपाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित रहे, उज्ज्वल रहे। मैं आज अपनी आज बो रहा हूं क्योंकि कल की पीढ़ी को फल खाने को मौका मिले।

साथियों,

दुनिया को अब डिसरप्शन के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा। समय के साथ इनके नेचर में बदलाव आएगा, लेकिन यह तय है कि अब व्यवस्थाएं बहुत तेजी से बदलेंगी। AI से जो Disruption हो रहे हैं, वो तो आप देख ही रहे हैं। आने वाले समय में AI और भी क्रांतिकारी बदलाव लेकर आने वाली है, भारत इसके लिए भी तैयार है। कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। दुनिया के अनेक देश, दुनियाभर के टेक लीडर्स, इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। सभी के साथ मिलकर, हम एक बेहतर विश्व बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इसी भरोसे के साथ, एक बार फिर इस Summit के लिए आप सभी को बहुत सारी मेरी शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

वंदे मातरम!