दशकों के शासन के बाद भी कांग्रेस और वामपंथियों के पास अपनी उपलब्धियों के तौर पर गिनाने के लिए कुछ भी नहीं है: अट्टिंगल में पीएम मोदी
26 अप्रैल को कमल के बटन पर आपका वोट भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को मजबूत करेगा: अट्टिंगल में पीएम मोदी

जय-जय पद्मनाभ!
तिरुवनन्तपुरथे एन्टे सहोदरी-सहोदरनमारे, एल्लावरक्कुम एन्टे नमस्कारम। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आज मुझे पद्मनाभ स्वामी और माता भद्रकाली की धरती पर आने का अवसर मिला है। इस भूमि पर श्री नारायण गुरू जी, महात्मा अय्यंकाली जी और श्री विद्यादिराजा का आशीर्वाद रहा है। कल मलयाली नववर्ष विशू का पर्व भी था, ऐसे शुभ समय में केरला की जनता का ये आशीर्वाद हमें मिल रहा है। ये आशीर्वाद केरला में नई शुरुआत का आशीर्वाद है। ये आशीर्वाद बदलाव का आशीर्वाद है। आपका ये विश्वास बता रहा है कि- फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार! दूसरा मैं क्षमा चाहूंगा। एक तो मुझे आने में विलंब हुआ, दूसरा मंच पर जो प्रोटोकॉल थे उसको मैं निभा नहीं पाया। कई साथियों के साथ अन्याय हुआ होगा। वे सब मुझे क्षमा करें। क्योंकि मुझे अभी तमिलनाडु जाना है और वहां हेलिकॉप्टर उड़ेगा, नहीं उड़ेगा, ये चिंता का विषय होने के कारण मैं एकदम जल्दी-जल्दी में तुरंत आके माइक ले लिया। तो मंच के सभी लोग मुझे क्षमा करेंगे, और आप सब भी क्षमा करेंगे। मेरे साथ बोलिए...भारत माता की।

साथियों,
इस शुभ माहौल में कल दिल्ली में बीजेपी ने अपना संकल्प-पत्र जारी किया है। बीजेपी का संकल्प-पत्र यानी, मोदियुडे गारण्टी। मोदियुडे गारण्टी- Next five years में भारत world’s third largest economy बनेगा। मोदियुडे गारण्टी- भारत world class infrastructure का सेंटर बनेगा। मोदियुडे गारण्टी- भारत स्पेस सेक्टर में गगनयान जैसी monumental achievements हासिल करेगा। मोदियुडे गारण्टी- पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा किसानों को मिलना जारी रहेगा। और इस सबके साथ ही, गरीबों के लिए Three Crore नए घर भी बनेंगे, Seventy Years के ऊपर के हर सिटिज़न को free treatment की सुविधा मिलेगी, और Ten Crore बहनों के सेल्फ हेल्प ग्रुप को हम आईटी, हेल्थ, टूरिजम, रिटेल और ऐसे अन्य सेक्टर्स की ट्रेनिंग देंगे। यानी, बीजेपी के development vision में केरला के हर वर्ग, हर समाज के लिए एक व्यापक रोडमैप मौजूद है। सबसे पहले तो इधर-उधर जिधर मेरी नजर जा रही है। छोटी-छोटी गुड़िया, सब ... कर रही है। मेरा इन सभी गुड़ियां को बहुत-बहुत आशीर्वाद। अब आपलोग बैठिए। आपलोग बहुत समय से हाथ हिला रहे हैं, बैठिए।

साथियों,
बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टों में घोषणा की है कि हम अपनी विरासत से ग्लोबल टूरिस्ट को जोड़ेंगे और अपनी विरासत को वर्ल्ड हेरिटेज के स्तर पर ले जाएंगे, उस ऊंचाई तक पहुंचाएंगे। यहां केरला में तो इसकी बहुत ज्यादा संभावना है। बीजेपी का प्लान, बड़े टूरिस्ट डेस्टिनेशंस के ओवरऑल डवलपमेंट है। भाजपा केरला में इको-टूरिज्म के नए सेंटर्स भी बनाएगी। इससे होम स्टे के जो अवसर बनेंगे उसका बड़ा लाभ हमारे ट्राइबल परिवारों को मिलेगा। बीजेपी गवर्नमेंट होम स्टे के लिए महिलाओं को Financial Help भी देगी।

साथियों,
बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में संकल्प लिया है कि हम कोस्ट लाइन प्रोटेक्शन के लिए काम करेंगे। ये केरला के मेरे फिशरमेन साथियों को बहुत फायदा पहुंचाएगा। इनकी आजीविका को जो LDF-UDF ने पिछले बरसों में बर्बाद किया है, उसे हम बचाने का भरपूर प्रयास करेंगे। हम फिशरीज के प्रोडक्शन और प्रोसिंसिंग के लिए नए क्लस्टर्स बनाएंगे। हम केरला के फिशरमैन परिवारों की Quality Of life सुधारेंगे, उनकी Dignity बढ़ाने के लिए काम करेंगे।

साथियों,
तेजी से आगे बढ़ता हुआ भारत, मॉर्डन इंफ्रास्ट्रक्चर पर लाखों करोड़ रुपए Invest कर रहा है। अगले कुछ वर्षों में आप भारतीय रेल का कायाकल्प होते हुए देखेंगे। वंदेभारत ट्रेनों के तीन स्वरूप- स्लीपर, चेयरकार और मेट्रो, तीनों ही भविष्य में भारत की शान बढ़ाएंगे। अब बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में एक और बड़ी घोषणा की है। आप जानते हैं भारत के पश्चिम में अहमदाबाद-मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन का काम चल रहा है। वो आने वाले कुछ समय में पूरा भी होगा। बुलेट ट्रेन दौड़ना भी शुरू होगी। लेकिन उसमें से जो हमने सीखा है, समझे हैं, उसके आधार पर भारत के उत्तर में, भारत के पूरब में और भारत के साउथ में भी बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी। NDA सरकार के तीसरे कार्यकाल में बहुत जल्द बुलेट ट्रेन से जुड़ा सर्वे का काम शुरू कराया जाएगा।

साथियों,
केरला का विकास वही पार्टी कर सकती है, जिसकी अपनी विश्वसनीयता हो, जिसकी अपनी credibility हो। आप मुझे बताइये,क्या आप कांग्रेस और LDF पर विश्वास कर सकते हैं क्या? न इनके काम की कोई क्रेडेबिलिटी है, न इनके पॉलिटिकल कैरक्टर की कोई क्रेडेबिलिटी है। ये लोग केरला में आपस में सबसे बड़े दुश्मन की तरह लड़ते हैं। लेकिन, दिल्ली में यही कांग्रेस और लेफ्ट दोस्ती बढ़ाने के लिए मीटिंग्स करते हैं। यहां केरला में ये दोनों एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। लेकिन, यहां से कुछ ही दूर पर तिरुनेवेली में कांग्रेस और लेफ्ट एक ही अलायंस का हिस्सा हैं।

साथियों,
कांग्रेस और लेफ्ट की विश्वसनीयता इतनी है कि दशकों तक सरकार चलाने के बाद भी इनके पास गिनाने के लिए अपने काम नहीं हैं। ये जनता के बीच में जाते हैं तो झूठ बोलकर केंद्र सरकार की योजनाओं का क्रेडिट खाने का प्रयास करते हैं। यहां तो बारी-बारी से UDF-LDF की सरकार रही है, मैं इनका रिपोर्ट कार्ड आपको बताता हूं। आज केरला में, वरकला और नेडुमंगाड जैसी जगहों में ड्रग्स का खुला कारोबार फैल रहा है, ड्रग्स माफियाओं को संरक्षण मिल रहा है। केरला के युवाओं का भविष्य खत्म किया जा रहा है। इसका क्रेडिट किसका है? ये पाप के लिए जिम्मेवार कौन है। आज केरला के कई हिस्सों में पानी का संकट पैदा हो चुका है। लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। इस पाप के लिए कौन जिम्मेवार है। इसका क्रेडिट किसका है? आज केरला की कॉयर industry बंद होने की कगार पर है। कॉयर industry के वर्कर्स के आगे जीवनयापन का संकट है। इस पाप के लिए कौन जिम्मेवार है। इसका क्रेडिट कौन लेगा?

साथियों,
आज देश में कांग्रेस और लेफ्ट में कोई अंतर नहीं बचा है। लेफ्ट और कांग्रेस, दोनों का बस नाम ही बचा है। दोनों को देश ने रिजेक्ट कर दिया है। कांग्रेस-लेफ्ट दोनों विकास विरोधी हैं। कांग्रेस-लेफ्ट दोनों ही भ्रष्टाचार में एक दूसरे का मुकबला करते हैं। कांग्रेस-लेफ्ट का ट्रैक रिकॉर्ड विकास के लिए जरूरी इंडस्ट्री को तबाह करने का है। दोनों की जहां सरकार रह जाती है, उस राज्य को बर्बाद कर देते हैं। केरला की जनता आज इसी पीड़ा से गुजर रही है। आज केरला की चर्चा राजनैतिक हिंसा और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के लिए हो रही है।

साथियों,
पहले कांग्रेस, और अब LDF की सरकारों ने केरला को अपनी लूट और भ्रष्टाचार के अड्डे के तौर पर इस्तेमाल किया। ये एक ऐसी सरकार है, जिस पर खुद गोल्ड स्मगलिंग में संलिप्त होने, स्मगलर्स को संरक्षण देने के आरोप लगते हैं। गोल्ड स्मगलिंग स्कैम में अपराधियों को बचाने के लिए पूरी सरकार लगी हुई है।

साथियों,
केरला में गरीबों, मजदूरों, महिलाओं, गल्फ से लौटे लोगों के पैसे की खुलेआम लूट हो रही है। केरला में 300 से ज्यादा कॉपरेटिव बैंक हैं और इनके पास केरला के लोगों का करीब-करीब One Lakh Crore Rupees जमा हैं। CPM के करप्शन की वजह से ये पैसा खतरे में पड़ा हुआ है। कितने ही कॉपरेटिव बैंकों में CPM के सदस्यों द्वारा गरीबों का पैसा लूट लिया गया है। इस करप्शन में CPM के नेताओं को जो रिश्वत मिली है, वो भी सैकड़ों करोड़ रुपए में है। जैसे अकेले त्रिशूर में ही Eighty से ज्यादा अघोषित खातों में 25 करोड़ रुपए की रिश्वत जमा है। अकेले त्रिशूर के CPM जिला सचिव के नाम पर 100 से ज्यादा प्रॉपर्टी खरीदी गई है। जब एक स्थान का ये हाल है, तो हम बाकी केरला का अंदाजा लगा सकते हैं। कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड से जुड़े एक और घोटाले में तो आरोपियों ने सीधे मुख्यमंत्री और उनकी बेटी तक को रिश्वत दिए जाने की बात स्वीकार की है। इस केस की जांच ना हो, इसके लिए केरला सरकार पूरी ताकत लगा रही है।

केरला में इन स्कैम्स की वजह से हजारों परिवारों का जीवन दांव पर लग गया है। यहां CPM के मुख्यमंत्री लगातार झूठ बोल रहे हैं कि कॉपरेटिव स्कैम के पीड़ितों को उनका पैसा वापस मिलेगा, दोषियों पर कार्रवाई होगी। ये आपका सेवक मोदी है जो सख्ती से इस केस की जांच करवा रहा है। अब तक स्कैम करने वालों की करीब Ninety Crore Rupees की संपत्ति अटैच हो चुकी है। मैं इस बारे में कानूनी सलाह ले रहा हूं कि कैसे जिन गरीबों ने बैंकों में पैसा रखा था और जिन गरीबों का पैसा डूबा है, इनकी संपत्ति जब्त करके मैं इन गरीबों को पैसे वापस कैसे दूं इस पर मैं काम कर रहा हूं। बीजेपी सरकार पहले भी देश में Seventeen Thousand Crore Rupees ऐसे स्कैम पीड़ितों को वापस दिलवा चुकी है। इसलिए, मैं कॉरपेटिव स्कैम के पीड़ितों को भरोसा देता हूं कि उनका पैसा वापस दिलाने में मैं पूरी ताकत लगा दूंगा और पाई-पाई उनसे निकलवाउंगा। और आपको पैसा वापस मिले इसके लिए पूरी ताकत लगा दूंगा।

साथियों,
खुली लूट के कारण केरला आर्थिक तबाही की कगार पर पहुंच चुका है।सरकारी खजाने खाली हो चुके हैं। राज्य सरकार के पास अपने कर्मचारियों को, पेंशनर्स को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं बचे हैं। केंद्र सरकार, केरला के विकास के लिए जो पैसा भेजती है, उससे राज्य सरकार अपना कर्जा चुकाने में खर्च करती है। और ये लोग केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट गए, तो वहां से भी इन्हें फटकार ही मिली। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि केरला में फाइनेंसियल क्राइसिस के लिए यहां की राज्य सरकार जिम्मेदार है। कांग्रेस हो या लेफ्ट, ये लोग केरला में मजबूत रहे तो केरला को तबाह करके मानेंगे। कुछ भी नहीं बचने देंगे।

साथियों,
पिछले 10 साल में मैंने देश में ईमानदार सरकार चलाकर दिखाई है। हमारी सरकार ने करप्शन पर भी कड़ी कार्रवाई की है। इसीलिए, ये करप्ट लोग मोदी को रोकने के लिए अलायंस बना रहे हैं। लेकिन, मोदी इनसे डरने वाला नहीं है। 26 को कमल के बटन पर आपका एक-एक वोट करप्शन के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन को मजबूत करेगा।

साथियों,
बीजेपी ने कोल्लम से श्री कृष्णकुमार जी को अपना उम्मीदवार बनाया है। उनके लोकसेवा के कार्यों और लोकप्रियता से आप सभी परिचित हैं। बीजेपी ने तिरुवनंतपुरम से मेरे मित्र श्री राजीव चंद्रशेखर और अट्टिंगल लोकसभा से श्री वी. मुरलीधरन को प्रत्याशी बनाया है। इन दोनों ही लोगों ने अपनी शिक्षा और योग्यता से देश में अलग पहचान बनाई है, केरला का सम्मान बढ़ाया है। मुरलीधरन जी ने विदेश राज्यमंत्री के तौर देश-विदेश में अपनी प्रतिभा को साबित किया है। वैश्विक संकट के कई मौकों पर इन्होंने केरला और देश के लोगों को वापस भारत लाने के लिए बहुत काम किया है। राजीव जी आईटी सेक्टर, सेमीकंडक्टर और ऐसे महत्वाकांक्षी क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के काम में लगे हैं। इन तीनों दिया गया आपका हर वोट केरला के विकास की नींव रखेगा। आप पर एक जिम्मेदारी मेरी तरफ से है। आप केरला के घर घर जाकर के मोदी जी का प्रणाम जरूर पहुंचाइए। मेरे साथ बोलिए... भारत माता की। पूरी ताकत से बोलिए। आप नहीं बोलोगे तो चलेगा। (मंच पर बैठे लोगों से)
भारत माता की।

भारत माता की।

भारत माता की।

बहुत बहुत धन्यवाद।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Engineering goods exports up 10.4% in January,2026, crosses $100 billion mark in April-January Period of FY26

Media Coverage

Engineering goods exports up 10.4% in January,2026, crosses $100 billion mark in April-January Period of FY26
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।