आज का न्यू इंडिया अपने एथलीटों पर पदक जीतने के लिए दबाव नहीं देता, बल्कि उनसे अपना सर्वश्रेष्ठ देने की अपेक्षा करता है: पीएम
हमारे गांव और दूरदराज के इलाके प्रतिभा से भरे हुए हैं और पैरा-एथलीटों का दल इसका जीता-जागता उदाहरण है: पीएम
आज देश खिलाड़ियों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है, ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है: पीएम
स्थानीय प्रतिभाओं की पहचान के लिए खेलो इंडिया केन्द्र की संख्या को मौजूदा 360 से बढ़ाकर 1,000 किया जायेगा: पीएम
हमें भारत में खेल संस्कृति को विकसित करने के लिए अपने तौर-तरीकों और व्यवस्था में सुधार जारी रखना होगा, पिछली पीढ़ियों के डर को दूर करना होगा: पीएम
देश अपने खिलाड़ियों की खुले दिल से मदद कर रहा है: पीएम
आप किसी भी राज्य, क्षेत्र से आते हों, कोई भी भाषा बोलते हों, इन सबसे बढ़कर आज आप 'टीम इंडिया' हैं। यह भावना हमारे समाज के हर हिस्से में और हर स्तर पर व्याप्त होनी चाहिए: पीएम
पहले दिव्यांगजन को सुविधाएं देना कल्याण का कार्य माना जाता था, आज देश इसे अपना दायित्व समझकर काम कर रहा है: पीएम
'दिव्यांगजनों के लिए अधिकार अधिनियम' जैसे कानून और 'सुगम्य भारत अभियान' जैसी पहल पूरे देश स्तर पर जीवन में बदलाव ला रहे हैं और असंख्य प्रतिभाओं में आत्मविश्वास की भावना का संचार कर रहे हैं: प्रधानमंत्री

नमस्कार!

कार्यक्रम में मेरे साथ जुड़ रहे भारत सरकार में हमारे खेल मंत्री श्रीमान अनुराग ठाकुर जी, सभी खिलाड़ी साथियों, सारे कोचेस, और विशेष रूप से अभिभावक आपके माता पिता । आप सभी से बात करके मेरा विश्वास बढ़ गया है कि इस बार पैरालम्पिक गेम्स में भी भारत नया इतिहास बनाने जा रहा है। मैं अपने सभी खिलाड़ियों को और सभी कोचेस को आपकी सफलता के लिए, देश की जीत के लिए ढेरों शुभकामनाएँ देता हूँ।

साथियों,

आपका आत्मबल, कुछ हासिल करके दिखाने की आपकी इच्छा शक्ति मैं देख रहा हूं असीम है। आप सभी के परिश्रम का ही परिणाम है कि आज पैरालम्पिक्स में सबसे बड़ी संख्या में भारत के athletes जा रहे हैं। आप लोग बता रहे थे कि कोरोना महामारी ने भी आपकी मुश्किलों को जरूर बढ़ाया, लेकिन आपने कभी भी इस क्रम को टूटने नहीं दिया। आपने उसको भी overcome करने के लिए जो भी आवश्यकता हो उसको भी कर लिया है। आपने अपना मनोबल कम नहीं होने दिया, अपनी प्रैक्टिस को रुकने नहीं दिया। और यही तो सच्ची 'स्पोर्ट्समैन स्पिरिट' है हर हालात में वो यही हमें सिखाती है कि- yes, we will do it! We can do it और आप सबने करके दिखाया भी । सबने करके दिखाया।

साथियों,

आप इस मुकाम तक पहुँचे हैं क्योंकि आप असली चैम्पियन हैं। जिंदगी के खेल में आपने संकटों को हराया है। जिंदगी के खेल में आप जीत चुके हैं, चैम्पियन हैं। एक खिलाड़ी के रूप में आपके लिए आपकी जीत, आपका मेडल बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन मैं बार बार कहता हूँ कि नई सोच का भारत आज अपने खिलाड़ियों पर मेडल का दबाव नहीं बनाता। आपको बस अपना शत-प्रतिशत देना है, पूरी लगन के साथ,कोई भी मानसिक बोझ के बिना, सामने कितना मजबूत खिलाड़ी है इसकी चिंता किए बिना बस हमेशा याद रखिए और इसी विश्वास के साथ मैदान पर अपनी मेहनत करनी है। मैं जब नया-नया प्रधानमंत्री बना तो दुनिया के लोगों से मिलता था। अब वो तो ऊँचाई में भी हमसे ज्यादा होते हैं। उन देशों को रूतबा भी बड़ा होता है। मेरा भी बैकग्राउंड आपके जैसा ही था और देश में भी लोग शंका करते थे कि ये मोदी जी को दुनिया का तो कुछ पता नहीं हैं ये प्रधानमंत्री बन गये क्या करेंगा। लेकिन मैं जब दुनिया के लीडरों से हाथ मिलाता था। तो मैं कभी यह नहीं सोचता था कि नरेन्द्र मोदी हाथ मिला रहा है। मैं यही सोचता था कि 100 करोड़ से भी बड़ी आबादी वाला देश हाथ मिला रहा है। मेरे पीछे 100 करोड़ से ज्यादा देशवासी खड़े हैं। ये भाव रहता था और उसके कारण मुझे कभी भी मेरे कान्फिडेंस को समस्या नहीं आती थी। मैं देख रहा हूं आपके अंदर तो जिंदगी को जीतने का कान्फिडेंस भी है और गेम जीतना तो आपके लिए बाएं हाथ का खेल होता है। मेडल तो मेहनत से अपने आप आने ही वाले हैं। आपने देखा ही है, ओलम्पिक्स में हमारे कुछ खिलाड़ी जीते, तो कुछ चूके भी। लेकिन देश सबके साथ मजबूती से खड़ा था, सबके लिए cheer कर रहा था।

साथियों,

एक खिलाड़ी के तौर पर आप ये बखूबी जानते हैं कि, मैदान में जितनी फ़िज़िकल स्ट्रेंथ की जरूरत होती है उतनी ही मेंटल स्ट्रेंथ भी मायने रखती है। आप लोग तो विशेष रूप से ऐसी परिस्थितियों से निकलकर आगे बढ़े हैं जहां मेंटल स्ट्रेंथ से ही इतना कुछ मुमकिन हुआ है। इसीलिए, आज देश अपने खिलाड़ियों के लिए इन सभी बातों का ध्यान रख रहा है। खिलाड़ियों के लिए 'स्पोर्ट साइकॉलजी' उसपर वर्कशॉप्स और सेमिनार्स इसकी व्यवस्था लगातार करते रहे हैं। हमारे ज़्यादातर खिलाड़ी छोटे शहरों, कस्बों और गाँवों से आते हैं। इसलिए, exposure की कमी भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती होती है। नई जगह, नए लोग, अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियाँ, कई बार ये चुनौतियाँ ही हमारा मनोबल कम कर देती है। इसीलिए ये तय किया गया कि इस दिशा में भी हमारे खिलाड़ियों को ट्रेनिंग मिलनी चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं कि टोक्यो पैरालम्पिक्स को ध्यान में रखते हुए जो तीन सेशन्स आपने जॉइन किए, इनसे आपको काफी मदद भी मिली होगी।

साथियों,

हमारे छोटे छोटे गाँवों में, दूर-सुदूर क्षेत्रों में कितनी अद्भुत प्रतिभा भरी पड़ी है, कितना आत्मविश्वास है, आज मैं आप सबको देखकर के कह सकता हूं कि मेरे सामने प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। कई बार आपको भी लगता होगा कि आपको जो संसाधन सुविधा मिली, ये न मिली होती तो आपके सपनों का क्या होता? यही चिंता हमें देश के दूसरे लाखों युवाओं के बारे में भी करनी है। ऐसे कितने ही युवा हैं जिनके भीतर कितने ही मेडल लाने की योग्यता है। आज देश उन तक खुद पहुँचने की कोशिश कर रहा है, ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आज देश के ढाई सौ से ज्यादा जिलों में 360 'खेलो इंडिया सेंटर्स' बनाए गए हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर ही प्रतिभाओं की पहचान हो, उन्हें मौका मिले। आने वाले दिनों में इन सेंटर्स की संख्या बढ़ाकर एक हजार तक की जाएगी। इसी तरह, हमारे खिलाड़ियों के सामने एक और चुनौती संसाधनों की भी होती थी। आप खेलने जाते थे तो अच्छे ग्राउंड, अच्छे उपकरण नहीं होते थे। इसका भी असर खिलाड़ी के मनोबल पर पड़ता था। वो खुद को दूसरे देशों के खिलाड़ियों से कमतर समझने लग जाता था। लेकिन आज देश में स्पोर्ट्स से जुड़े इनफ्रास्ट्रक्चर का भी विस्तार किया जा रहा है। देश ने खुले मन से अपने हर एक खिलाड़ी की पूरी मदद कर रहा है। 'टार्गेट ओलम्पिक पोडियम स्कीम' के जरिए भी देश ने खिलाड़ियों को जरूरी व्यवस्थाएं दीं, लक्ष्य निर्धारित किए। उसका परिणाम आज हमारे सामने है।

साथियों,

खेलों में अगर देश को शीर्ष तक पहुँचना है तो हमें उस पुराने डर को मन से निकालना होगा जो पुरानी पीढ़ी के मन में बैठ गया था। किसी बच्चे का अगर खेल में ज्यादा मन लगता तो घर वालों को चिंता हो जाती थी कि ये आगे क्या करेगा? क्योंकि एक-दो खेलों को छोड़कर खेल हमारे लिए सफलता या करियर का पैमाना ही नहीं रह गए थे। इस मानसिकता को, असुरक्षा की भावना को तोड़ना हमारे लिए बहुत जरूरी है।

साथियों,

भारत में स्पोर्ट्स कल्चर को विकसित करने के लिए हमें अपने तौर-तरीकों को लगातार सुधारते रहना होगा। आज अंतर्राष्ट्रीय खेलों के साथ साथ पारंपरिक भारतीय खेलों को भी नई पहचान दी जा रही है। युवाओं को अवसर देने के लिए, professional environment देने के लिए मणिपुर के इम्फ़ाल में देश की पहली स्पोर्ट यूनिवर्सिटी भी खोली गई है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी पढ़ाई के साथ साथ खेलों को बराबर प्राथमिकता दी गई है। आज देश खुद आगे आकर 'खेलो इंडिया' अभियान चला रहा है।

साथियों,

आप किसी भी स्पोर्ट्स से जुड़े हों, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को भी मजबूत करते हैं। आप किस राज्य से हैं, किस क्षेत्र से हैं, कौन सी भाषा बोलते हैं, इन सबसे ऊपर आप आज 'टीम इंडिया' हैं। ये स्पिरिट हमारे समाज के हर क्षेत्र में होनी चाहिए, हर स्तर पर दिखनी चाहिए। सामाजिक बराबरी के इस अभियान में, आत्मनिर्भर भारत में मेरे दिव्यांग भाई-बहन देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण भागीदार हैं। आपने ये साबित किया है कि शारीरिक कठिनाई से जीवन रुक नहीं जाना चाहिए। इसलिए आप सभी के लिए, देशवासियों के लिए खासकर के नई पीढ़ी के लिए आप सब बहुत बड़ी प्रेरणा भी हैं।

साथियों,

पहले दिव्यांगजनों के लिए सुविधा देने को वेलफेयर समझा जाता था। लेकिन आज देश इसे अपना दायित्व मानकर काम कर रहा है। इसीलिए, देश की संसद ने 'The Rights for Persons with Disabilities Act, जैसा कानून बनाया, दिव्यांगजनों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा दी। सुगम्य भारत अभियान' इसका एक और बड़ा उदाहरण है। आज सैकड़ों सरकारी buildings, सैकड़ों रेलवे स्टेशन,हजारों ट्रेन कोच, दर्जनों domestic airports के इनफ्रास्ट्रक्चर को दिव्यांग जनों के लिए सुगम बनाया जा चुका है। इंडियन साइन लैंग्वेज की स्टैंडर्ड डिक्शनरी बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है। NCERT की किताबों को भी साइन लैंग्वेज में translate किया जा रहा है। इस तरह के प्रयासों से कितने ही लोगों का जीवन बदल रहा है, कितनी ही प्रतिभाओं को देश के लिए कुछ करने का भरोसा मिल रहा है।

साथियों,

देश जब प्रयास करता है, और उसके सुनहरे परिणाम भी हमें तेजी से मिलते हैं, तो हमें और बड़ा सोचने की, और नया करने की प्रेरणा भी उसी में से मिलती है। हमारी एक सफलता हमारे कई और नए लक्ष्यों के लिए हमारा रास्ता साफ कर देती है। इसलिए, जब आप तिरंगा लेकर टोक्यो में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे तो केवल मेडल ही नहीं जीतेंगे, बल्कि भारत के संकल्पों को भी आप बहुत दूर तक ले जाने वाले हैं, उसको एक नई ऊर्जा देने वाले हैं, उसको आगे बढ़ाने वाले हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आपके ये हौसले, आपका ये जोश टोक्यो में नए कीर्तिमान गढ़ेगा। इसी विश्वास के साथ आप सभी को एक बार फिर ढेरों शुभकामनाएँ। बहुत बहुत धन्यवाद!

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Prime Minister greets people of Goa on Goa Statehood Day
May 30, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today extended his greetings to the people of Goa on the occasion of Goa Statehood Day.

The Prime Minister said that Goa is widely known for its vibrant culture, rich heritage, natural beauty and warm-hearted people.

The Prime Minister noted that the occasion is an opportunity to remember with gratitude all those who worked tirelessly for the progress and identity of Goa.

The Prime Minister expressed hope that Goa will continue to prosper and play an important role in building a Viksit Bharat.

Shri Modi also prayed for the good health and prosperity of every Goan.

The Prime Minister wrote on X;

“Greetings to the people of Goa on the special occasion of Goa Statehood Day. Goa’s vibrant culture, rich heritage, natural beauty and warm-hearted people are widely known. This day is also an opportunity to remember with gratitude all those who worked tirelessly for its progress and identity. May Goa continue to prosper and play an important role in building a Viksit Bharat. Praying for the good health and prosperity of every Goan.”