नमो ड्रोन दीदियों के कृषि ड्रोन प्रदर्शन के साक्षी बने
1,000 नमो ड्रोन दीदियों को ड्रोन सौंपे
स्वयं सहायता समूहों को लगभग 8,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण और 2,000 करोड़ रुपये के पूंजीकरण सहायता कोष का वितरण किया
लखपति दीदियों को सम्मानित किया
"ड्रोन दीदियां और लखपति दीदियां सफलता के नए अध्याय लिख रही हैं
" कोई भी समाज केवल अवसर पैदा करके और नारी शक्ति की गरिमा सुनिश्चित करके ही प्रगति कर सकता है"
"मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने लाल किले की प्राचीर से शौचालय, सैनिटरी पैड, धुएं से भरी रसोई, नल का जल जैसे मुद्दे उठाए"
"मोदी की संवेदनाएं और मोदी की योजनाएं रोजमर्रा की जिंदगी के अनुभवों से उभरी हैं"
"कृषि में ड्रोन प्रौद्योगिकी का परिवर्तनकारी प्रभाव देश की महिलाओं से संचालित हैं"
मुझे पूरा विश्वास है कि नारी शक्ति देश में प्रौद्योगिकी क्रांति का नेतृत्व करेगी"
"पिछले दशक में भारत में स्वयं सहायता समूहों का विस्तार उल्लेखनीय रहा है। इन समूहों ने देश में महिला सशक्तिकरण की कहानी दोबारा लिखी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमान गिरिराज सिंह जी, श्री अर्जुन मुंडा जी, श्री मनसुख मांडविया जी, और देश के अलग-अलग हिस्सों से आई हुई, विशाल संख्या में यहां पधारीं हुई और आपके साथ-साथ वीडियो के माध्यम से भी देशभर में लाखों दीदी आज हमारे साथ जुड़ी हुई हैं। मैं आप सबका स्वागत करता हूं, अभिनदंन करता हूं। और इस सभागृह में तो मैं देख रहा हूं कि शायद ये लघु भारत है। हिन्दुस्तान की हर भाषा, हर कोने के लोग यहां नजर आ रहे हैं। तो आप सबको बहुत-बहुत बधाई।
आज का ये कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण के लिहाज से बहुत ऐतिहासिक है। आज मुझे नमो ड्रोन दीदी अभियान के तहत, 1000 आधुनिक ड्रोन, महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को सौंपने का अवसर मिला है। देश में जो 1 करोड़ से ज्यादा बहनें, पिछले दिनों अलग-अलग योजनाओं और लाख प्रयासों के कारण, 1 करोड़ बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। ये आंकड़ा छोटा नहीं है। और अभी जब मैं बात कर रहा था तो वो किशोरी बहन मुझे कह रही थी, वो तो हर महीने 60-70 हजार, 80 हजार तक पहुंच जाती है, बोले कमाने में। अब देश के नौजवानों को भी प्ररेणा दे सकते हैं, गांव में एक बहन अपने उद्दयन से हर महीने 60 हजार, 70 हजार रूपया कमाती है। उनका आत्मविश्वास देखिए, हां किशोरी वहां बैठी है, हाथ ऊपर कर रही है। और जब मैं ये सुनता हूं, देखता हूं तो मेरा विश्वास बहुत बढ़ जाता है। आपको आश्चर्य होगा कभी-कभी आप जैसे लोगों से छोटी-मोटी बाते सुनने को मिलती है ना, तो मुझे विश्वास बढ़ जाता...हां यार हम सही देशा में हैं, देश का जरूर कुछ भला होगा। क्योंकि हम योजना तो बनाए, लेकिन इस योजना को पकड़कर के आप जो लग जाते हैं ना...और आप परिणाम दिखाते हैं। और उस परिणाम के कारण सरकारी बाबुओं को भी लगता है...हां यार कुछ अच्छा हो रहा है, तो काम तेजी से बढ़ता है। और इसी के कारण जब मैंने फैसला लिया कि मुझे अब 3 करोड़ लखपति दीदी के आंकड़ों को पार करना है। और इस ही उद्देश्य से आज 10 हजार करोड़ रुपए की राशि भी, इन दीदियों के खाते में ट्रांसफर की गई है। और मैं आप सभी बहनों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

माताओं-बहनों,

कोई भी देश हो, कोई भी समाज हो, वो नारीशक्ति की गरिमा बढ़ाते हुए, उनके लिए नए अवसर बनाते हुए ही आगे बढ़ सकता है। लेकिन दुर्भाग्य से देश में पहले जो सरकारें रहीं, उनके लिए आप सभी महिलाओं का जीवन, आपकी मुश्किलें, कभी प्राथमिकताएं नहीं रहीं, और आपको, आपके नसीब पर छोड़ दिया। मेरा अनुभव ये है कि अगर हमारी माताओं-बहनों को थोड़ा अगर अवसर मिल जाए, थोड़ा उनको सहारा मिल जाए तो फिर उनको सहारे की जरूरत नहीं रहती है, वे खुद लोगों का सहारा बन जाती है। औऱ ये मैंने तब ज्यादा महसूस किया, जब लाल किले से मैंने महिला सशक्तिकरण के बारे में बात करनी शुरू की। मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने लाल किले से हमारी माताओं-बहनों को शौचालय ना होने के विषय में जो मुश्किलें होती हैं, उस पीड़ा को मैंने व्यक्त किया था कि कैसे गांव की बहनें, कैसे जिंदगी जीती हैं।

मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने लाल किले से सैनीटरी पैड्स का विषय उठाया था। मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने लाल किले से कहा कि रसोई में लकड़ी पर खाना बनाती हमारी माताएं-बहनें 400 सिगरेट का जितना धुआं होता है ना...वो हर रोज बर्दाश्त करती हैं, अपने शरीर में ले जाती हैं। मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने घर में नल से जल ना आने पर आप सभी महिलाओं को होने वाली परेशानी का जिक्र किया, इसके लिए जल जीवन मिशन का ऐलान किया। मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने लाल किले से हर महिला के पास बैंक खाते होने की जरूरत पर बात कही। मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने लाल किले से आप महिलाओं के खिलाफ बोले जाने वाले अपमानजनक शब्दों का विषय उठाया।

मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने कहा कि बेटी तो अगर देर से घर आती है शाम को तो मां, बाप, भाई सब पूछते हैं कि कहा गई थी, क्यों देर हो गई। लेकिन ये दुर्भाग्य है कि कोई मां-बाप अपना बेटा देर से आता है तो पूछता नहीं कि बेटा कहा गया था, क्यों? बेटे को भी तो पूछो। और ये बात मैंने लाल किले से उठाई थी। और मैं आज देश की हर महिला, हर बहन, हर बेटी को ये बताना चाहता हूं। जब-जब मैंने लाल किले से आपके सशक्तिकरण की बात की, दुर्भाग्य से कांग्रेस जैसे देश के राजनीतिक दल, उन्होंने मेरा मजाक उड़ाया, मेरा अपमान किया।

साथियों,

मोदी की संवेदनाएं और मोदी की योजनाएं, ये जमीन से जुड़े जीवन के अनुभवों से निकली हैं। बचपन में जो अपने घर में देखा, अपने आस-पास, पड़ोस में देखा, फिर देश के गांव-गांव में अनेक परिवारों के साथ रहकर के अनुभव किया, वही आज मोदी की संवेदनाओं और योजनाओं में झलकता है। इसलिए ये योजनाएं मेरी माताओं-बहनों-बेटियों के जीवन को आसान बनाती हैं, उनकी मुश्किलें कम करती हैं। सिर्फ अपने परिवार के लिए सोचने वाले, परिवारवादी नेताओं को ये बात कतई समझ नहीं आ सकती है। देश की करोड़ों को मुश्किलों से, माताओं-बहनों को मुक्ति दिलाने की सोच, ये हमारी सरकार की अनेक योजनाओं का आधार रही है।

मेरी माताओं-बहनों,

पहले की सरकारों ने एक दो योजनाएं शुरू करने को ही महिला सशक्तिकरण का नाम दे दिया था। मोदी ने इस राजनीतिक सोच को ही बदल दिया। 2014 में सरकार में आने के बाद मैंने आप महिलाओं के जीवन चक्र के हर पड़ाव के लिए योजनाएं बनाईं, उन्हें सफलतापूर्वक लागू किया। आज पहली सांस से लेकर आखिरी सांस तक मोदी कोई ना कोई योजना लेकर के भारत की बहन-बेटियों की सेवा में हाजिर हो जाता है। गर्भ में बेटी की हत्या ना हो, इसके लिए हमने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू किया। गर्भ की अवस्था में मां को सही पोषण मिले, इसके लिए हर गर्भवती को 6 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी। जन्म के बाद बेटी को पढ़ाई में मुश्किल ना हो, इसके लिए ज्यादा से ज्यादा, ज्यादा ब्याज देने वाली सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की। बड़ी होकर बेटी काम करना चाहे तो आज उसके पास मुद्रा योजना का इतना बड़ा साधन है। बेटी के करियर पर प्रभाव ना पड़े, इसके लिए हमने प्रेगनेंसी लीव को भी बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया। 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान योजना हो, 80 परसेंट डिस्काउंट पर सस्ती दवा देने वाले जन औषधि केंद्र हों, इन सबका सबसे ज्यादा लाभ आप माताओं-बहनों-बेटियों को ही तो हो रहा है।

माताओं-बहनों,

मोदी समस्याओं को टालता नहीं, उनसे टकराता है, उनके स्थाई समाधान के लिए काम करता है। मैं जानता हूं कि भारत में महिलाओं को सशक्त करने के लिए हमें उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ानी होगी। इसलिए हमने अपनी सरकार के हर निर्णय में, हर योजना में इस पहलू का ध्यान रखा। मैं आप माताओं-बहनों को एक उदाहरण देता हूं। आप भी जानती हैं कि हमारे यहां, संपत्ति होती थी तो पुरुष के नाम पर होती थी। कोई जमीन खरीदता था...तो पुरुष के नाम पर..कोई दुकान खरीदी जाती थी...तो पुरुष के नाम पर...घर की महिला के नाम पर कुछ भी नहीं होता था? इसलिए हमने पीएम आवास के तहत मिलने वाले घर महिलाओं के नाम रजिस्टर किए। आपने तो खुद देखा है कि पहले नई गाड़ी आती थी, ट्रैक्टर आता था, तो ज्यादातर पुरुष ही चलाते थे। लोग सोचते थे कि कोई बिटिया इसे कैसे चला पाएगी? घर में कोई नया उपकरण आता था, नया टीवी आता था, नया फोन आता था, तो पुरुष ही खुद को उसके स्वाभाविक जानकार मानते थे। उन परिस्थितियों से, उस पुरानी सोच से अब हमारा समाज आगे निकल रहा है। और आज का ये कार्यक्रम इसका एक और उदाहरण बना है कि भारत की कृषि को नई दिशा देने वाली ड्रोन टेक्नोलॉजी की पहली पायलट ये मेरी बेटियां हैं, ये मेरी बहनें हैं।

हमारी बहनें देश को सिखाएंगी कि ड्रोन से आधुनिक खेती कैसे होती है। ड्रोन पायलट, नमो ड्रोन दीदियों का कौशल अभी मैं मैदान में जाकर के देखके आया हूं। मेरा विश्वास है और मैं कुछ दिन पहले ‘मन की बात’ में ऐसे ही एक ड्रोन दीदी से बात करने का मौका मिला था। उसने कहा मैं एक दिन में इतने खेत में काम करती हूं, एक दिन में इतने खेत में, मेरी इतनी कमाई होती है। और बोले मेरा इतना विश्वास बढ़ गया है और गांव में मेरा इतना सम्मान बढ़ गया है, गांव में अब मेरी पहचान बदल गई है। जिसको साइकिल चलाना भी नहीं आता है, उसको गांव वाले पायलट कहकर के बुलाते हैं। मेरा विश्वास है देश की नारीशक्ति, 21वीं सदी के भारत की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व दे सकती है। आज हम स्पेस सेक्टर में देखते हैं, IT सेक्टर में देखते हैं, विज्ञान के क्षेत्र में देखते हैं, कैसे भारत की महिलाएं अपना परचम लहरा रही हैं। और भारत तो महिला कमर्शियल पायलट्स के मामले में दुनिया का नंबर वन देश है। हवाई जहाज उड़ाने वाली बेटियों की संख्या हमारी सबसे ज्यादा है। आसमान में कमर्शियल फ्लाइट हो या खेती किसानी में ड्रोन्स, भारत की बेटियां कहीं भी किसी से भी पीछे नहीं हैं। और इस बार तो 26 जनवरी आपने देखा होगा TV पे, 26 जनवरी के कार्यक्रम में कर्तव्य पथ पर सारा हिन्दुस्तान देख रहा था, नारी-नारी-नारी-नारी की ही ताकत का जलवा था वहां पर।

साथियों,

आने वाले सालों में देश में ड्रोन टेक्नोलॉजी का बहुत विस्तार होने वाला है। छोटी-छोटी मात्रा में दूध-सब्ज़ी और दूसरे उत्पाद अगर नज़दीक के मार्केट तक पहुंचाना हैं, तो ड्रोन एक सशक्त माध्यम बनने वाला है। दवाई की डिलिवरी हो, मेडिकल टेस्ट के सैंपल की डिलिवरी हो, इसमें भी ड्रोन बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। यानि नमो ड्रोन दीदी योजना से जो बहनें ड्रोन पायलट बन रही हैं, उनके लिए भविष्य में अनगिनत संभावनाओं के द्वार खुलने जा रहे हैं।

माताओं-बहनों,

बीते 10 वर्षों में जिस तरह भारत में महिला स्वयं सहायता समूहों का विस्तार हुआ है, वो अपने आप में एक अध्ययन का विषय है। इन महिला स्वयं सहायता समूहों ने भारत में नारी सशक्तिकरण का नया इतिहास रच दिया है। आज इस कार्यक्रम से मैं स्वयं सहायता समूह की हर बहनों को उनका मैं गौरवगान करता हूं, उनको शुभकामनाएं देता हूं। उनकी मेहनत ने महिला स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्र निर्माण का प्रमुख समूह बना दिया है। आज स्वयं सहायता समूहों में महिलाओं की संख्या 10 करोड़ को पार कर गई है। बीते 10 वर्षों में हमारी सरकार ने सेल्फ हेल्प ग्रुप्स का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि 98 प्रतिशत समूहों के बैंक अकाउंट भी खुलवाए हैं, यानि करीब-करीब 100 परसेंट। हमारी सरकार ने समूहों को मिलने वाली मदद भी 20 लाख रुपए तक बढ़ा दी है। अभी तक 8 लाख करोड़ से, अब आंकड़ा छोटा नहीं है। आप लोगों के हाथ में 8 लाख करोड़ रूपये से भी अधिक की मदद बैंकों से मेरी इन बहनों के पास पहुंच चुकी है। इतना पैसा, सीधा-सीधा गांव में पहुंचा है, बहनों के पास पहुंचा है। और बहनों का स्वभाव होता है, सबसे बड़ा गुण होता है ‘बचत’ वो बर्बाद नहीं करती वो बचत करती है। और जो बचत की ताकत होती है ना...वो उज्जवल भविष्य की निशानी भी होती है। और मैं जब भी इन दीदियों से बात करता हूं तो ऐसी-ऐसी, नई-नई चीजें बताती है वो, उनका आत्मविश्वास बताता है। यानि, सामान्य मानवी कल्पना नहीं कर सकता है। और जो इतने बड़े स्तर पर गांव में आजकल जो सड़कें बनी हैं, हाईवे बने हैं, इसका लाभ भी इन समूहों को हुआ है। अब लखपति दीदियां, अपने उत्पादों को शहर में जाकर आसानी से बेच पा रही हैं। बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से शहर के लोग भी अब गांवों में जाकर इन समूहों से सीधी खरीद करने लगे हैं। ऐसे ही कारणों से बीते 5 वर्षों में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के सदस्यों की आय में 3 गुना की वृद्धि हुई है।

साथियों,

जिन बहनों को, उनके सपनों को, आकांक्षाओं को सीमित कर दिया गया था, आज वे राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका का विस्तार कर रही हैं। आज गांव-देहात में नए-नए अवसर बन रहे हैं, नए-नए पद बने हैं। आज लाखों की संख्या में बैंक सखी, कृषि सखी, पशु सखी, मत्स्य सखी और सर्विस सेक्टर से जुड़ी दीदियां, गांवों में सेवाएं दे रही हैं। ये दीदियां, स्वास्थ्य से लेकर डिजिटल इंडिया तक, देश के राष्ट्रीय अभियानों को नई गति दे रही हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान को चलाने वाली 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं और 50 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी भी महिलाएं हैं। सफलताओं की ये श्रंखला ही नारीशक्ति पर मेरे भरोसे को और ज्यादा मजबूत करती है। मैं देश की हर माता-बहन-बेटी को ये विश्वास दिलाता हूं कि हमारा तीसरा कार्यकाल नारीशक्ति के उत्कर्ष का नया अध्याय लिखेगा।

और मैं देखता हूं कि कई बहनें शायद स्वयं सहायता समूह की अपनी मिले, बैठे का छोटा सा आर्थिक कारोबार ऐसा नहीं, कुछ लोग तो मैंने देखा है गांव में बहुत सी चीजें कर रही हैं। खेलकूद स्पर्धाएं कर रही है, स्वयं सहायता समूह बहनों को प्रोत्साहित कर रही हैं। जो बच्चियां पढ़ती हैं, उनको बुलाकर के, लोगों को बुलाकर के उनसे बातचीत करवाती है। खेलकूद में जो बच्चियां गांव में अच्छा काम कर रही हैं, स्वयं सहायता समूह की बहनें उनका स्वागत-सम्मान करती हैं। यानि, मैंने देखा है कि कुछ स्कूलों में इन स्वयं सहायता समूह की बहनों को भाषण के लिए बुलाते हैं, उनको कहते हैं आपका सफलता का कारण बताइए। और स्कूल वाले भी बड़े आतुरतापूर्वक सुनते है बच्चे, टीचर सुनते हैं। यानि एक प्रकार से बहुत बड़ा Revolution आया है। और मैं स्वयं सहायता समूह की दीदी से कहूंगा, मैं अभी एक योजना लाया हूं जैसे ड्रोन दीदी है ना, वो तो मैंने आप ही के चरणों में रख दी है, और मुझे विश्वास है, जिन माताओं-बहनों के चरणों में मैंने ड्रोन रखा है ना, वो माताएं-बहनें ड्रोन को आसमान में तो ले जाएगी, देश के संकल्प को भी इतना ही ऊंचा ले जाएगी।

लेकिन एक योजना ऐसी है जिसमें हमारी स्वयं सहायता समूह की बहनें आगे आए। मैंने एक योजना बनाई है ‘पीएम सूर्यघर’ ये ‘पीएम सूर्यघर’ की विशेषता ये है, एक प्रकार से मुफ्त बिजली की ये योजना है। बिजली का बिल जीरो। अब आप ये काम कर सकते हैं कि नहीं कर सकते? कर सकते हैं कि नहीं कर सकते? सब बताए तो मैं बोलू...कर सकते हैं...पक्का कर सकते हैं। हमने तय किया है कि हर जो परिवार में छत होती है उस पर ‘सोलर पैनल’ लगाना, सूर्य किरण से बिजली पैदा करना, और उस बिजली का घर में उपयोग करना। 300 यूनिट से ज्यादा बिजली का उपयोग करने वाले परिवार बहुत कम होते हैं। पंखा हो, एयर कंडीशन हो, घर में फ्रिज हो, वाशिंग मशीन हो तो 300 यूनिट में गाड़ी चल जाती है। मतलब आपका जीरो बिल आएगा, जीरो बिल। इतना ही नहीं, अगर आपने ज्यादा बिजली पैदा की, आप कहेंगे बिजली पैदा तो बड़े-बड़े कारखाने में बिजली पैदा होती है, बड़े-बड़े अमीर लोग बिजली पैदा कर सकते हैं, हम गरीब क्या कर सकते हैं। यही तो मोदी करता है, अब गरीब भी बिजली पैदा करेगा, अपने घर पर ही बिजली का कारखाना लग जाएगा। और अतिरिक्त जो बिजली बनेगी, वो बिजली सरकार खरीद लेगी। उससे भी हमारी इन बहनों को, परिवार को इनकम होगी।

तो आप ये पीएम सूर्यघर, उसको आप अगर, आपके यहां कॉमन सभी सेंटर में जाएंगे तो वहां पर अप्लाई कर सकते हैं। मैं सब बहनों को कहूंगा स्वयं सहायता समूह की बहनों को कहूंगा कि आप मैदान में आइए और इस योजना को घर-घर पहुंचाइए। आप इसका कारोबार हाथ में ले लीजिए। आप देखिए कितना बड़ा बिजली का काम अब मेरी बहनों के द्वारा हो सकता है और मुझे पूरा विश्वास है, हर घर में जब जीरो यूनिट बिजली का बिल हो जाएगा ना...पूरा जीरो बिल तो वो आपको आशीर्वाद देंगे कि नहीं देंगे। और उनका जो पैसा बचेगा वो अपने परिवार के काम आएगा कि नहीं आएगा। तो ये योजना का सबसे ज्यादा लाभ हमारी स्वयं सहायता समूह की जो बहनें हैं उसका नेतृत्व करके अपने गांव में करवा सकती हैं। और मैंने सरकार को भी कहा है कि जहां-जहां स्वयं सहायता समूह की बहनें इस काम के लिए आगे आती हैं, हम उनको प्राथमिकता देंगे और जीरो बिल बिजली का इस अभियान को भी सफलतापूर्वक मुझे आगे बढ़ाना है। मैं फिर एक बार आपको

बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!