"भारत में, हम एआई नवाचार के प्रति उत्साह देख रहे हैं"
"सरकार की नीतियां और कार्यक्रम 'सभी के लिए एआई' द्वारा निर्देशित हैं"
"भारत एआई के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है"
"इसमें कोई संदेह नहीं है कि एआई परिवर्तनकारी है लेकिन इसे अधिक से अधिक पारदर्शी बनाना हम पर निर्भर है"
"एआई पर भरोसा तभी बढ़ेगा जब संबंधित नैतिक, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा"
"अप-स्किलिंग और री-स्किलिंग को एआई ग्रोथ कर्व का हिस्सा बनाएं"
"हमें एआई के नैतिक उपयोग के लिए एक वैश्विक ढांचा तैयार करने के लिए मिलकर काम करना होगा"
"क्या किसी सूचना या उत्पाद को एआई जनित के रूप में चिह्नित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर वॉटरमार्क पेश किया जा सकता है"
“एक ऑडिट तंत्र का पता लगाएं जो एआई टूल को उनकी क्षमताओं के अनुसार लाल, पीले या हरे रंग में वर्गीकृत कर सके”

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी अश्विनी वैष्णव जी, राजीव चंद्रशेखर जी, GPAI के Outgoing Chair, जापान के मिनिस्टर हिरोशी योशिदा जी, Member countries के अन्य Ministers, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

Global Partnership on Artificial Intelligence समिट में, मैं आप सभी का स्वागत करता हूं। मुझे खुशी है कि अगले साल भारत इस समिट की अध्यक्षता करने जा रहा है। ये समिट एक ऐसे समय हो रही है, जब AI को लेकर पूरी दुनिया में बहुत बड़ी डिबेट छिड़ी हुई है। इस डिबेट से पॉजिटिव और नेगेटिव, हर प्रकार के aspects सामने आ रहे हैं। इसलिए इस समिट से जुड़े प्रत्येक देश पर बहुत बड़ा दायित्व है। बीते दिनों में मुझे अनेक Political and industry leaders से मिलने का अवसर मिला है। मैंने उनसे मुलाकात में भी इस समिट की चर्चा की है। AI के प्रभाव से वर्तमान और आने वाली पीढियां, कोई भी छूटी नहीं हैं। हमें बहुत सतर्कता के साथ, बहुत सावधानी के साथ आगे बढ़ना है। और इसलिए मैं समझता हूं इस समिट से निकले विचार, इस समिट से निकले सुझाव, पूरी मानवता की जो मूलभूत मूल्य है उसकी रक्षा और उसको दिशा देने का काम करेंगे।

Friends,

आज भारत AI talent और AI से जुड़े new ideas का सबसे प्रमुख प्लेयर है। भारत के युवा टेक एक्सपर्ट्स, रिसर्चर्स, AI's limits को एक्सप्लोर कर रहे हैं। भारत में हम एक बहुत ही जोश से भरी हुई AI innovation spirit देख रहे हैं। यहां आने से पहले मुझे AI expo में जाने का अवसर मिला। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कैसे जीवन बदल सकती है, ये हम इस expo में देख सकते हैं। YUVA AI initiative के तहत चुने गए युवाओं के ideas को देखकर मुझे ज्यादा खुशी होना वो स्वाभाविक भी था। ये युवा, टेक्नॉलॉजी के द्वारा सामाजिक बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। भारत में AI से जुड़े सॉल्यूशन्स की चर्चा तो अब गांव-गांव तक पहुंच रही है। हाल ही में हमने agriculture में AI chat-bot को लॉन्च किया। इससे किसानों को अपने application status, payment details और गवर्नमेंट स्कीम्स से जुड़े अपडेट्स जानने में मदद मिलेगी। हम AI की मदद से भारत में अपने हेल्थ सेक्टर को भी पूरी तरह से ट्रांस्फॉर्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं। Sustainable development Goals को हासिल करने में भी AI अहम भूमिका निभा सकती है।

Friends,

भारत में हमारा विकास मंत्र है- सबका साथ, सबका विकास। हमने ‘AI for all’ की भावना से प्रेरित होकर सरकार की नीतियां और प्रोग्राम तैयार किए हैं। हमारा प्रयास है कि हम social development और inclusive growth के लिए AI की क्षमताओं का पूरा फायदा उठा सकें। भारत, AI के responsible और ethical use के लिए भी पूरी तरह कमिटेड है। हमने “National Program on Artificial Intelligence” शुरू किया है। हम भारत में AI मिशन भी लॉन्च करने जा रहे हैं। इस मिशन का लक्ष्य, भारत में AI compute power की पर्याप्त क्षमता स्थापित करना है। इससे भारत के start-ups और innovators को और बेहतर सुविधायें मिलेंगी। इस मिशन के तहत agriculture, health-care, education जैसे सेक्टर्स में AI applications को प्रमोट किया जाएगा। हम अपने Industrial training Institutes के माध्यम से AI skills को टीयर-2 और टीयर-3 शहरों तक पहुंचा रहे हैं। हमारे पास "National AI Portal" है, जो देश में Artificial Intelligence initiatives को बढ़ावा देता है। आपने ‘एरावत’ initiative के बारे में भी सुना होगा। इस कॉमन platform का उपयोग, बहुत जल्द सभी रिसर्च लैब इंडस्ट्री और स्टार्ट-अप्स कर सकेंगे।

Friends,

AI के साथ हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। Artificial Intelligence का विस्तार टेक्नोलॉजी के एक टूल से भी कहीं ज्यादा है। AI हमारे नए भविष्य को गढ़ने का सबसे बड़ा आधार बन रही है। AI की एक बहुत बड़ी ताकत है, लोगों को Connect करने की उसकी क्षमता। AI के सही इस्तेमाल से सिर्फ देश की आर्थिक प्रगति ही सुनिश्चित नहीं होती बल्कि ये समानता और सामाजिक न्याय को भी पक्का करता है। इसलिए AI को अपने भविष्य के लिए अलग प्रकार के AI की भी जरूरत पड़ेगी। यानि, AI को All Inclusive बनाना पड़ेगा, All Ideas को अपनाना पड़ेगा। AI की development journey जितनी ज्यादा inclusive होगी, उसके परिणाम भी उतने ही ज्यादा inclusive आएंगे।

हमने देखा है कि पिछली शताब्दी में टेक्नॉलॉजी तक Unequal access की वजह से समाज में मौजूद असमानताएं और बढ़ गई थीं। अब इस तरह की गलती से हमें पूरी मानवता को बचाना है। हम जानते हैं कि टेक्नॉलॉजी के साथ जब Democratic values जुड़ जाती हैं तो वो inclusion की दिशा में multiplier के तौर पर काम करती है। इसलिए Artificial intelligence के भविष्य की दिशा भी human values पर, Democratic values पर पूरी तरह निर्भर करेगी। Artificial intelligence हमारी efficiency को बढ़ाने में मदद कर सकता है। लेकिन ये हम पर है कि हम emotions की भी जगह बनाए रखें। Artificial intelligence हमारी effectiveness को बढ़ा सकती है, लेकिन ये हम पर है कि हम अपने ethics को भी बनाएं रखें। इस दिशा में ये मंच, विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में मदद कर सकता है।

Friends,

किसी भी सिस्टम को sustainable बनने के लिए, उसे Transformative, Transparent और Trusted बनाना पड़ता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि AI transformative तो है ही। लेकिन ये हम पर है कि हम इसे ज्यादा से ज्यादा transparent बनाएं। अगर हम इस्तेमाल हो रहे डेटा और algorithms को, transparent और free from bias बना सके तो ये एक अच्छी शुरुआत होगी। हमें दुनियाभर के लोगों को ये यकीन दिलाना होगा कि AI उनके लाभ के लिए है, उनके भले के लिए है। हमें दुनिया के विभिन्न देशों को ये भी विश्वास दिलाना होगा कि इस टेक्नॉलॉजी की विकास यात्रा में किसी को भी पीछे नहीं छोड़ा जाएगा। AI पर trust तब बढ़ेगा जब AI से जुड़े ethical, economic और social concerns पर ध्यान दिया जाए। उदाहरण के लिए, अगर up-skilling और re-skilling, AI के growth curve का हिस्सा बन जाए, तो युवा ये भरोसा कर पाएंगे कि AI उनके भविष्य की बेहतरी के लिए है। अगर डेटा की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए, तो लोग यकीन कर पाएंगे कि AI उनकी प्राइवेसी में दखल दिए बिना विकास को आगे बढ़ाएगा। अगर ग्लोबल साउथ को ये पता होगा कि AI के विकास में उनकी भी बड़ी भूमिका होगी तो वो इसे भविष्य के एक रास्ते के रुप में स्वीकार कर पाएंगे।

Friends,

AI के अनेक पॉजिटिव पहलू हैं, लेकिन इससे जुड़ी नेगेटिव बातें भी उतनी ही चिंता का विषय हैं। AI, 21वीं सदी में विकास का सबसे बड़ा Tool बन सकता है और 21वीं सदी को तबाह करने में भी सबसे बड़ी भूमिका निभा भी सकता है। Deep fake का चैलेंज आज पूरी दुनिया के सामने है। इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी, डेटा थेफ्ट और आतंकियों के हाथ में AI tools के आने का भी बहुत बड़ा खतरा है। अगर आतंकी संगठनों के पास AI लैस हथियार पहुंच जाएं, तो उससे ग्लोबल सिक्योरिटी पर बहुत बड़ा असर होगा। हमें इस विषय पर चर्चा करके एक ठोस प्लान तक पहुंचने की जरूरत है, कि कैसे AI के गलत इस्तेमाल को रोका जाए। इसलिए ही, G20 प्रेसिडेंसी के दौरान, हमने Responsible Human-Centric AI governance का फ्रेमवर्क तैयार करने का प्रस्ताव रखा था। G20 New Delhi Declaration ने 'AI Principles' के प्रति सभी सदस्य देशों के कमिटमेंट की पुष्टि की है। सभी सदस्यों में AI के उपयोग से जुड़े खतरों को लेकर एक understanding थी। जिस तरह, हमारे पास विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों के लिए समझौते और protocols हैं, उसी तरह हमें AI के ethical use के लिए मिलकर global framework तैयार करना होगा। इसमें high-risk या Frontier AI tools की Testing और Deployment के लिए प्रोटोकॉल भी शामिल होगा। इसके लिए conviction, commitment, coordination और collaboration की सबसे अधिक ज़रूरत है। हमें मिलकर ऐसे कदम उठाने ही होंगे जिससे AI का responsible use सुनिश्चित हो सके। आज इस समिट के माध्यम से भारत, पूरे वैश्विक जगत का आह्वान करता है कि इस दिशा में हमें अब एक पल भी गंवाना नहीं है। इस साल में अब कुछ ही दिन बचे हैं, नया साल आने ही वाला है। हमें एक तय समय सीमा के भीतर global framework को पूरा करना ही होगा। मानवता की रक्षा के लिए ये किया जाना बहुत ही जरूरी है।

Friends,

AI सिर्फ एक नई टेक्नोलॉजी ही नहीं है, ये एक worldwide movement बन गई है। इसलिए हम सभी का मिलकर काम करना बहुत ही आवश्यक है। अगले दो दिन आप सभी बहुत से विषयों पर चर्चा करेंगे। मैं तो जब भी किसी AI एक्सपर्ट से मिलता हूं, तो अपने सवाल और सुझाव रोक नहीं पाता। आज आप एक्सपर्ट्स से बातें करते हुए भी कई बातें मेरे मन में आ रही हैं। हमें ये सोचना होगा कि AI generated information की credibility को कैसे बढ़ाया जा सकता है? ऐसे क्या data sets हो सकते हैं, जिनके उपयोग से हम AI tools को train और test कर सकें? किसी AI tool को मार्केट में रिलीज करने से पहले कितना test करना चाहिए, इस पर भी ज़रूर सोचना चाहिए। क्या हम कोई सॉफ्टवेयर वाटर-मार्क introduce कर सकते हैं, जो ये बताए कि ये information या product, AI generated है। इससे जो व्यक्ति AI generated information का इस्तेमाल करेगा, उसे उसकी limitations के बारे में पता रहेगा।

एक बात मैं भारत में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के दिग्गजों से भी कहूंगा। सरकारों के पास योजनाओं से जुड़ा विभिन्न तरह का डेटा होता है। इसका उपयोग evidence-based decision making में कैसे कर सकते हैं? क्या हम ऐसे डेटा का AI tools को train करने में उपयोग कर सकते हैं? क्या हम एक ऐसा audit mechanism स्थापित कर सकते हैं, जिसमें AI tools को उसकी क्षमता के आधार पर red, yellow या green में categorise किया जा सके? क्या हम एक institutional mechanism स्थापित कर सकते हैं, जो resilient employment को सुनिश्चित करे? क्या हम standardised Global AI education curriculum ला सकते हैं? क्या AI-driven future के लिए लोगों को तैयार करने के Standards तय कर सकते हैं? ऐसे अनेक सवालों पर सरकार से जुड़े लोग और आप सभी एक्सपर्ट्स ज़रूर विचार करें।

Friends,

आप जानते हैं कि भारत में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं, हजारों बोलियां हैं। Digital inclusion को बढ़ाने के लिए AI की मदद से स्थानीय भाषा में digital services कैसे उपलब्ध कराई जा सकती हैं, इस बारे में भी सोचें। जो भाषा अब नहीं बोली जाती, उसे AI की मदद से कैसे रीवाईव किया जा सकता है, इस पर भी काम करें। संस्कृत भाषा का knowledge base और literature बहुत समृद्ध है। उसे AI की मदद से कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है, इस पर भी सोचें। AI की मदद से वैदिक मैथेमेटिक्स के missing volumes को क्या फिर से जोड़ा जा सकता है, इस बारे में भी प्रयास किए जाने चाहिए।

Friends,

मुझे विश्वास है कि ये समिट, Ideas exchange करने का बेहतरीन अवसर उपलब्ध कराएगी। मैं चाहता हूं कि इस समिट में शामिल होने वाले हर delegate के लिए ये एक great learning experience साबित हो। अगले दो दिनों तक आप AI के विभिन्न पहलुओं पर गहनता से विचार-विमर्श करेंगे। मुझे आशा है कि हमारे पास specific outcomes होंगे। इन पर अमल करके हम एक responsible और sustainable future के निर्माण का रास्ता जरूर सशक्त करेंगे। आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कार।

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पूर्वी भारत में विकास और समृद्धि का प्रवेश द्वार बनकर उभर रहा ओडिशा: पहाड़पुर में पीएम मोदी
June 20, 2026
I extend my heartfelt birthday greetings to President Smt. Droupadi Murmu Ji, I wish her long life and excellent health: PM
Pahadpur village will now be rapidly developed as a solar village, that is, solar power will be ensured in every home here: PM
The vision of the Central Government is the development of India through the development of Eastern India: PM
To uplift tribal society, we are connecting tribal youth with opportunities for education and employment: PM
These children should get better facilities for studies; for this, around 500 Eklavya Model Schools have been opened across the country: PM

जॉय जगन्नाथ! जॉय मां किचकेश्वरी! मोर सबू भाई,भौणी,मां,मौसी मानंकु मोर नमोस्कार।

माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, राज्यपाल श्री हरि बाबु जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी, उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव जी, प्रवती परीदा जी, ओडिशा के मंत्री गणेश सिंह खूंटिया जी, कृष्ण चंद्र महापात्र जी, सांसद नबा चरण माझी जी, मनमोहन सामल जी, बैजयंत पांडा जी, अन्य महानुभाव, भाइयों और बहनों।

हमारा ओडिशा इन दिनों उत्सवों के आनंद में डूबा हुआ है। यहाँ का गणपर्व रज, पिछले हफ्ते ही धूमधाम से मनाया गया है। महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की तैयारियां भी पुरजोश चल रही है। मयूरभंज के बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और, इस सबके बीच ही लोकतन्त्र का विकास का उत्सव भी चल रहा है। ओडिशा की बीजेपी सरकार ने अपने 2 साल भी पूर्ण किए हैं। इस मौके पर, आप सबके बीच आना, मयूरभंज आने का ये सौभाग्य, और इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति, ये अवसर मेरे लिए बहुत खास है। आपका अपनापन मुझे बार-बार यहां खींच लाता है। मैं आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। और ओडिशा की जनता को डबल इंजन सरकार में विकास यात्रा की भी बधाई देता हूँ, शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, इस अवसर पर मैं पंडित रघुनाथ मुर्मू जी, डॉ. दमयंती बेश्रा जी, और श्री चरण हेम्ब्रम जी जैसी विभूतियों को भी नमन करता हूँ। रघुनाथ मुर्मू जी ने संथाली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि का निर्माण किया था। हमारी सरकार ने संथाली भाषा में भारत के संविधान को प्रस्तुत किया है। ओडिशा की संतानों को पद्म सम्मान देकर सम्मानित किया है। पिछले 2 वर्षों में ओडिशा सरकार भी इन सभी विभूतियों के सपनों को पूरा करने में दिन रात पुरुषार्थ कर रही है।

साथियों,

आज का ये अवसर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ीं, ओडिशा की बेटी, माननीय राष्ट्रपति जी हमारे बीच उपस्थित हैं। आज उनका जन्मदिन भी है। मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकमानाएं देता हूं, मैं उनके दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। जनगन्नाथ जी भगवान के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूं। ओडिशा की बेटी आज देश के इतने बड़े पद पर पहुंची हैं, हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं, ये हम सभी के लिए बहुत गौरव की बात है। राष्ट्रपति जी का व्यक्तित्व, उनका उदार और सहृदय स्वभाव, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए उनका अटल समर्पण, उन्होंने मयूरभंज ही नहीं, पूरे ओडिशा की पहचान सशस्त की है। मैं इस अवसर पर, उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

ये कार्यक्रम जब बना, तो इसमें मूल कारण तो लॉजिस्टिक था, लंबे अर्से से यहां आने के लिए चर्चा चल रही थी, लेकिन कोई तालमेल नहीं बैठता था। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस कोलकाता में तय हुआ, तो फिर मैंने कहा अच्छा है, आज बंग दिवस भी है, तो क्यों न मैं सुबह मयूरभंज होकर के शाम को फिर कोलकाता के कार्यक्रम में जाऊं। और इसके कारण ये 20 जून तय हुई। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसकी मंगल कामनाएं ईश्वरआधीन होती हैं, और इसलिए आज एक शुभ मंगल हो गया, कि राष्ट्रपति का जन्मदिन भी, मुझे आज उनके गांव में जाकर के, उनको शुभकामनाएं देने का अवसर मिला।

साथियों,

आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था। मैं इस क्षेत्र के बच्चों के लिए उनके द्वारा बनवाए गए स्कूल भी गया। बच्चों के साथ कुछ यादगार समय बिताने का अवसर मुझे मिला। मैं देख रहा था, बच्चों के चेहरों की चमक, राष्ट्रपति जी की उपस्थिति और आत्मीयता, वहां मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा, किसी बच्चे को ये लगा हो कि राष्ट्रपति जी आई हैं, हर बच्चे को लगता था उनकी मां आई है। वे बच्चे भी बहुत भाग्यवान हैं, कैसे इस क्षेत्र के गरीब, वंचित और आदिवसी समाज के बच्चों को प्रेरणा मिल रही है, उन्हें देश के लिए कुछ बड़ा करने का आत्मविश्वास मिल रहा है। मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूं कि उन्होंने इन अनुभवों से गुजरने का आज मुझे अवसर दिया। ये मेरा दिन, एक प्रकार से मेरी शिक्षा का दिवस था, कुछ सीखने का अवसर था मेरे लिए।

साथियों,

मैं आपको सरकार का ये निर्णय भी बताना चाहता हूं कि पहाड़पुर गांव को, अब तेजी से सुर्यग्राम, सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी यहां हर घर में सोलर बिजली बने, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। और हम तो बड़ा गर्व के साथ कह सकते हैं कि यही ओडिशा है, जहां कोणार्क में सुर्य मंदिर की एक पहचान है, वैसे ही पहाड़पुर सुर्यग्राम की पहचान बन जाएगा। सुर्यग्राम, से पूरा गांव सोलर विलेज के रूप में पहचाना जाए, इस दिशा में काम तुरंत शुरू हो ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस अभियान से, पहाड़पुर के लोगों को मुफ्त सोलर बिजली भी मिलेगी और जो ज्यादा बिजली होगी, वो उनकी आय भी बढ़ाएगी।

साथियों,

ओडिशा में डबल इंजन सरकार के 2 साल कई मायनों में ऐतिहासिक रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी के नेतृत्व में, आज ओडिशा तेज गति से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। आज यहां गरीब कल्याण की योजनाओं से सामान्य मानवी का जीवन बदल रहा है। ओडिशा में आर्थिक गतिविधियाँ निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने का सामर्थ्य आज नज़र आ रहा है। यहाँ रोजगार के नए अवसरों के लिए तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

केंद्र सरकार का विज़न है- पूर्वी भारत के विकास से भारत का विकास। इसीलिए, हम पूर्वोदय की नीति पर काम कर रहे हैं। जिस पूर्वी भारत को काँग्रेस के दौर में पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वो प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। आज ओडिशा खुद इस बदलाव का साक्षी बन रहा है।

साथियों,

ओडिशा के पास समुद्र है, खनिज संपदा है, कृषि की शक्ति है और सबसे सामर्थ्यवान यहां युवा प्रतिभा है। इस सामर्थ्य का पूरा उपयोग करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं। इसीलिए, आज ओडिशा में रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। नई सड़कें और आर्थिक कॉरिडोर बन रहे हैं। पोर्ट्स का विस्तार हो रहा है। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक उद्योगों में निवेश आ रहा है। आज भी यहां ओडिशा के विकास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बिजली, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी इन परियोजनाओं से, आप सभी लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है। मैं इन परियोजनाओं के लिए ओडिशा के लोगों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को, ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़ा निवेश आए, यहाँ नए उद्योग लगें, इसके लिए उत्कर्ष ओडिशा जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत, अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अनेक मेगा परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बने, इसके लिए ओडिशा के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। पावर सेक्टर में 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो रहा है। समृद्ध शहर योजना के तहत शहरी विकास को गति दी जा रही है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का परिणाम हमें देखने को मिलने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार की बड़ी विशेषता ये है कि वो खुद जनता तक पहुँचती है। हमारा प्रयास है कि सामान्य नागरिक को किसी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम लोगों की अपेक्षाएँ आज पूरी हो रही हैं। आप देखिए, धान खरीद में किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का निर्णय लिया गया। सुभद्रा योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक माताओं और बहनों तक आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। आयुष्मान भारत को लागू करके ओडिशा के परिवारों के लिए देशभर के अस्पतालों में इलाज का रास्ता खोला गया। आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए माधो सिंह हाथ-खर्चा योजना शुरू की गई। महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए श्रीमंदिर के श्रद्धालुओं के लिए सारे द्वार खोल दिए गए, चारों-चार द्वार खोल दिए गए। डबल इंजन की ताकत मिलने से आज यहां चारों दिशाओं में विकास सुनिश्चित हो रहा है।

साथियों,

यहां बीते दिनों स्वच्छता को लेकर जो विशेष अभियान चला है, उसकी भी मुझे जानकारी मिली है। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में तो सफाई अभियान छाया हुआ है, यानी स्वच्छता से स्वागत, मैं ओडिशा की इस पहल के लिए, यहां के नगारिको का, सरकार का, मुख्यमंत्री जी का, इस प्रशंसनीय पहल के लिए बहुत ही प्रशंसा करता हूं, संतोष व्यक्त करता हूं।

साथियों,

स्वच्छता हमारे जीवन शैली का हिस्सा होनी चाहिए, हर रोज की आदत होनी चाहिए। मैं यहां स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी लोगों का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने अपने जीवन का कुछ महत्वपूर्ण कालखंड जनजातीय क्षेत्रों में एक वालंटियर के रूप में काम करते हुए बिताया है। माननीय राष्ट्रपति जी तो बरसों तक ऐसे क्षेत्रों में चुनौतियां का सामना करती रही हैं। आप और हम जानते हैं कि जनजातीय क्षेत्रों में जीवन की सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंचती थीं। इसलिए, हमारी सरकार ने जनजातीय विकास को बहुत प्राथमिकता दी है। हमने ऐसे इलाकों को सुविधाओं से जोड़ने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास से जुड़े विभाग मिलकर के सर्वागीण विकास के लिए काम कर रहे हैं। ताकि वहां रहने वाले लोगों की कठिनाइयां दूर हो सकें। इसी तरह, पीएम जनमन अभियान तो राष्ट्रपति जी के साथ हुई चर्चाओं का, उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है। ये विशेष रूप से देश के ऐसे जनजातीय समूहों के लिए है, जो जनजातीय समुदाय में भी सबसे पीछे रह गए हैं। ऐसे जनजातीय समुदायों तक अब सरकार स्वयं चलकर उनके गांव, उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

साथियों,

आदिवासी समाज के उत्थान के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए देश में करीब 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं। करीब साढ़े सात सौ एकलव्य स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक लेवल पर, डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी बच्चों को सैकड़ों करोड़ रुपए की स्कॉलर्शिप दी गई है। मुझे ये बताते हुए भी खुशी है कि यहां मयूरभंज में एक और नवोदय विद्यालय बनाने के लिए भी स्वीकृति दे दी गई है।

साथियों,

दूर-दराज इलाकों में रहने के कारण, जनजातीय समाज स्वास्थ्य से जुड़ी कठिनाइयों का भी शिकार रहा है। सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियाँ एक बहुत बड़ी चुनौती रही हैं। हमने इनके खिलाफ देश भर में अभियान चलाया, चार करोड़ से ज्यादा हेल्थ कार्ड बांटे, मुफ्त इलाज के लिए करोड़ों आदिवासी लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिये। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम आज हमें दिख रहा है। आदिवासी समाज दशकों पुरानी कठिनाइयों से बाहर आ रहा है, और, विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहा है।

साथियों,

आने वाले समय में हमारे सामने दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। और, 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यानी, ओडिशा और देश का लक्ष्य एक ही दिशा में है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो भारत मजबूत होगा। मुझे ओडिशा के सामर्थ्य पर भरोसा है। हमें मिलकर ओडिशा को विकास की बुलंदियों पर पहुंचाना है।

साथियों,

कल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाना है। ज्ञान और योग की धरती ओडिशा, योग यहाँ के संस्कारों का हिस्सा रहा है। मैं ओडिशा की धरती से पूरे देश से, पूरी दुनिया के लोगों से आह्वान करता हूँ, आप सब ज्यादा से ज्यादा संख्या में योग दिवस में हिस्सा लें। मैं एक बार फिर आप सभी को आज के अवसर, और विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं माननीय राष्ट्रपति जी का विशेष रूप से आभार प्रकट करता हूं, कि मुझे उनके साथ उनकी कर्मभूमि को देखने का मौका मिला। एक बार फिर उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।