“भारत वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने और विरासत सरंक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है”
“भारत इतना प्राचीन है कि यहां वर्तमान का हर बिन्दु किसी न किसी गौरवशाली अतीत की गाथा कहता है”
“प्राचीन विरासत की कलाकृतियों की वापसी वैश्विक उदारता और इतिहास के प्रति सम्मान का प्रदर्शन है”
“मोइदम, पूर्वोत्तर से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान बनाने वाली पहली प्रविष्टि अपने अनूठेपन के कारण विशेष है”
“भारत की विरासत केवल एक इतिहास नहीं है। भारत की विरासत एक विज्ञान भी है”
“भारत का इतिहास और भारतीय सभ्यता, ये सामान्य इतिहास बोध से कहीं ज्यादा प्राचीन और व्यापक हैं”
“भारत का दुनिया से स्पष्ट आह्वान है कि वे एक-दूसरे की विरासत को बढ़ावा देने और मानव कल्याण की भावना के विस्तार के लिए एकजुट हों”
“भारत का तो विजन है- विकास भी, विरासत भी”

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी एस जयशंकर जी, गजेंद्र सिंह शेखावत जी, यूनेस्को की डायरेक्टर जनरल ऑद्रे ऑज़ुले जी, मंत्रिमंडल के मेरे अन्य सदस्य राव इंद्रजीत सिंह जी, सुरेश गोपी जी, और वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी के चेयरमैन विशाल शर्मा जी, अन्य सभी महानुभाव,देवियों और सज्जनों,

आज भारत गुरु पूर्णिमा का पवित्र पर्व मना रहा है। सबसे पहले, मैं आप सभी को और सभी देशवासियों को ज्ञान और आध्यात्म के इस पर्व की बधाई देता हूँ। ऐसे अहम दिन आज 46th World Heritage Committee की इस Meeting की शुरुआत हो रही है। और भारत में ये आयोजन पहली बार हो रहा है, और स्वाभाविक है कि मेरे सहित सभी देशवासियों को इसकी विशेष खुशी है। मैं इस अवसर पर पूरी दुनिया से आए सभी Dignitaries, और अतिथियों का स्वागत करता हूँ। खास तौर पर मैं यूनेस्को की डाइरेक्टर जनरल ऑद्रे ऑज़ुले का भी अभिनंदन करता हूँ। मुझे विश्वास है, हर ग्लोबल आयोजन की तरह ये इवेंट भी भारत में सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ेगा।

साथियों,

अभी मैं विदेशों से वापस लाई गईं प्राचीन धरोहरों की प्रदर्शनी भी देख रहा था। बीते वर्षों में हम भारत की 350 से ज्यादा प्राचीन धरोहरों को वापस लाये हैं। प्राचीन धरोहरों का वापस आना, ये वैश्विक उदारता और इतिहास के प्रति सम्मान के भाव को दिखाता है। यहाँ Immersive Exhibition भी अपने आप में एक शानदार अनुभव है। जैसे-जैसे टेक्नालजी Evolve होगी इस क्षेत्र में रिसर्च और टूरिज़्म की अपार संभावनाएं भी बनती जा रही हैं।

Friends,

वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी का ये कार्यक्रम भारत के लिए एक गौरवशाली उपलब्धि से जुड़ा है। मुझे बताया गया है कि, हमारे नॉर्थ ईस्ट इंडिया के ऐतिहासिक ‘मोइदम’ यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल होना प्रस्तावित हैं। ये भारत की 43rd वर्ल्ड हेरिटेज साइट और नॉर्थ ईस्ट इंडिया की पहली धरोहर होगी, जिसे कल्चरल वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा मिल रहा है। मोइदम अपनी विशेषताओं के कारण बेहद खास हैं। मुझे विश्वास है, वर्ल्ड हेरिटेज सूची में आने के बाद इनकी लोकप्रियता और बढ़ेगी, दुनिया का आकर्षण बढ़ेगा।

साथियों,

आज के इस आयोजन में दुनिया के कोने-कोने से आए एक्सपर्ट्स, ये अपने आप में इस समिट की समृद्धि को दर्शाता है। ये आयोजन भारत की उस धरती पर हो रहा है, जो विश्व की प्राचीनतम जीवंत सभ्यताओं में से एक है। हमने देखा है...विश्व में विरासतों के अलग-अलग केंद्र होते हैं। लेकिन भारत इतना प्राचीन है कि यहाँ वर्तमान का हर बिन्दु किसी न किसी गौरवशाली अतीत की गाथा कहता है। आप दिल्ली का ही उदाहरण लीजिये...दुनिया दिल्ली को भारत की कैपिटल सिटी के रूप में जानती है। लेकिन, ये शहर हजारों वर्ष पुरानी विरासतों का केंद्र भी है। यहाँ आपको कदम-कदम पर ऐतिहासिक विरासतों के दर्शन होंगे। यहां से करीब 15 किलोमीटर दूर ही कई टन का एक लौह स्तम्भ है। एक ऐसा स्तम्भ, जो 2 हजार वर्षों से खुले में खड़ा है, फिर भी आज तक Rust Resistant है। इससे पता चलता है कि उस समय भी भारत की मैटलर्जी कितनी उन्नत थी। स्पष्ट है कि भारत की विरासत केवल एक इतिहास नहीं है। भारत की विरासत एक विज्ञान भी है।

भारत की हेरिटेज में टॉप नॉच इंजीन्यरिंग की एक गौरवशाली यात्रा के भी दर्शन होते हैं। यहां दिल्ली से कुछ सैंकड़ों किलोमीटर दूर ही 3500 Meters के Altitude पर केदारनाथ मंदिर है। आज भी वो जगह भौगोलिक रूप से इतनी दुर्गम है कि लोगों को कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर या हेलीकॉप्टर से जाना पड़ता है। वो स्थान आज भी किसी कन्स्ट्रकशन के लिए बहुत चैलिंजिंग है...साल के ज्यादातर समय बर्फबारी की वजह से वहां काम हो पाना असंभव है। लेकिन, आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि केदारघाटी में इतने बड़े मंदिर का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ था। उसकी इंजीन्यरिंग में कठोर वातावरण और ग्लेशियर्स का पूरा ध्यान रखा गया। यही नहीं, मंदिर में कहीं भी मोर्टर का इस्तेमाल नहीं हुआ है। लेकिन, वो मंदिर आज तक अटल है। इसी तरह, दक्षिण में राजा चोल द्वारा बनवाए गए बृहदीश्वर मंदिर का भी उदाहरण है। मंदिर का आर्किटेक्चरल Layout, Horizontal और Vertical Dimensions, मंदिर की मूर्तियाँ, मंदिर का हर हिस्सा अपने आप में आश्चर्य लगता है।

Friends,

मैं जिस गुजरात राज्य से आता हूँ, वहाँ धोलावीरा और लोथल जैसे स्थान हैं। धोलावीरा में 3000 से 1500 BCE पहले जिस तरह की अर्बन प्लानिंग थी…जिस तरह का वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम और व्यवस्थाएं थीं…वो 21वीं सदी में भी एक्स्पर्ट्स को हैरान करते हैं। लोथल में भी दुर्ग और लोअर टाउन की प्लानिंग…स्ट्रीट्स और ड्रेन्स की व्यवस्था…ये उस प्राचीन सभ्यता के आधुनिक स्तर को बताता है।

Friends,

भारत का इतिहास और भारतीय सभ्यता, ये सामान्य इतिहास बोध से कहीं ज्यादा प्राचीन और व्यापक हैं। इसीलिए, जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं…जैसे-जैसे इतिहास का वैज्ञानिक Verification हो रहा है… हमें अतीत को देखने के नए दृष्टिकोण विकसित करने पड़ रहे हैं। यहां मौजूद वर्ल्ड एक्सपर्टस को उत्तर प्रदेश के सिनौली में मिले सबूतों के बारे में जरूर जानना चाहिए। सिनौली की Findings कॉपर एज की हैं। लेकिन, ये इंडस वैली सिविलाइज़ेशन की जगह वैदिक सिविलाइज़ेशन से मेल खाती हैं। 2018 में वहाँ एक 4 हजार साल पुराना रथ मिला है, वो ‘हॉर्स ड्रिवेन’ था। ये शोध, ये नए तथ्य बताते हैं कि भारत को जानने के लिए अवधारणाओं से मुक्त नई सोच की जरूरत है। मैं आप सभी से आह्वान करता हूँ...नए तथ्यों में, उसके आलोक में इतिहास की जो नई समझ विकसित हो रही है, आप उसका हिस्सा बनें, उसे आगे बढ़ाएँ।

Friends,

हेरिटेज केवल हिस्ट्री नहीं, बल्कि Humanity की एक साझी चेतना है। हम दुनिया में कहीं भी किसी हेरिटेज को देखते हैं, तो हमारा मन वर्तमान के Geo-Political Factors से ऊपर उठ जाता है। हमें हेरिटेज के इस Potential को विश्व की बेहतरी के लिए प्रयोग करना है। हमें अपनी विरासतों के जरिए दिलों को जोड़ना है। और आज 46th World Heritage Committee Meeting के माध्यम से, भारत का, पूरे विश्व को यही आह्वान है... आइए...हम सब जुड़ें...एक दूसरे की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए... आइए...हम सब जुड़ें...मानव कल्याण की भावना के विस्तार के लिए! आइए...हम सब जुड़ें...अपनी हेरिटेज को संरक्षित करते हुए टूरिज्म बढ़ाने के लिए, ज्यादा से ज्यादा रोजगार के मौके बनाने के लिए।

Friends,

दुनिया ने वो दौर भी देखा है, जब विकास की दौड़ में विरासत को नजरअंदाज किया जाने लगा था। लेकिन, आज का युग, कहीं ज्यादा जागरूक है। भारत का तो विज़न है- विकास भी, विरासत भी! बीते 10 वर्षों में भारत ने एक ओर आधुनिक विकास के नए आयाम छुए हैं, वहीं ‘विरासत पर गर्व’ का संकल्प भी लिया है। हमने विरासत के संरक्षण के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर हो...अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो...प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का आधुनिक कैंपस बनाना हो...देश के कोने-कोने में ऐसे अनेकों काम हो रहे हैं। विरासत को लेकर भारत के इस संकल्प में पूरी मानवता की सेवा का भाव जुड़ा है। भारत की संस्कृति स्वयं की नहीं, वयं की बात करती है। भारत की भावना है- Not Me, Rather Us ! इसी सोच के साथ भारत ने हमेशा विश्व के कल्याण का साथी बनने का प्रयास किया है।

आज पूरा विश्व इंटरनेशनल योग दिवस मनाता है। आज आयुर्वेद विज्ञान का लाभ पूरी दुनिया को मिल रहा है। ये योग, ये आयुर्वेद... ये भारत की वैज्ञानिक विरासत हैं। पिछले साल हमने G-20 समिट को भी होस्ट किया था। इस समिट की थीम थी- One Earth, One Family, One Future'. इसकी प्रेरणा हमें कहाँ से मिली? इसकी प्रेरणा हमें ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के विचार से मिली। भारत Food और Water Crisis जैसे Challenges के लिए मिलेट्स को प्रमोट कर रहा है...हमारा विचार है- ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’अर्थात्, ये धरती हमारी माँ है, हम उसकी संतान हैं। इसी विचार को लेकर आज भारत इंटरनेशनल सोलर अलायंस और मिशन Life जैसे समाधान दे रहा है।

साथियों,

भारत वैश्विक विरासत के इस संरक्षण को भी अपनी ज़िम्मेदारी मानता है। इसीलिए, हम भारतीय विरासत के साथ-साथ ग्लोबल साउथ के देशों में भी हेरिटेज संरक्षण के लिए सहयोग दे रहे हैं। कंबोडिया के अंकोर-वाट, वियतनाम के चाम Temples, म्यांमार के बाग़ान में स्तूप, भारत ऐसी कई धरोहरों के संरक्षण में सहयोग दे रहा है। और इसी दिशा में आज मैं एक और अहम घोषणा कर रहा हूं। भारत यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर के लिए 1 मिलियन डॉलर का Contribution करेगा। ये ग्रांट, Capacity Building, Technical Assistance और वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स के Conservation में प्रयोग होगी। विशेष रूप से, ये पैसा ग्लोबल साउथ के देशों के काम आएगा। भारत में युवा Professionals के लिए World Heritage Management में सर्टिफिकेट प्रोग्राम भी शुरू हो गया है। मुझे विश्वास है, कल्चरल और क्रिएटिव इंडस्ट्री, ग्लोबल ग्रोथ में बड़ा Factor बनेगी।

साथियों,

आखिरी में, मैं विदेश से आए सभी मेहमानों से एक और अनुरोध करूंगा...आप भारत को जरूर Explore करें। हमने आपकी सुविधा के लिए Iconic Heritage Sites के लिए टूर सिरीज़ भी शुरू की है। मुझे विश्वास है, ये अनुभव आपकी इस यात्रा को यादगार बनाएँगे। आप सभी को एक बार फिर World Heritage Committee Meeting के लिए शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद ,नमस्ते।

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आपने सिर्फ पदकों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि पूरी पीढ़ी को तैयार किया: CWG चैंपियंस से पीएम मोदी
August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।