जिला न्यायालय से स्वारगेट तक, पुणे मेट्रो खंड का उद्घाटन किया
बिडकिन औद्योगिक क्षेत्र को राष्ट्र को समर्पित किया
सोलापुर हवाई अड्डे का उद्घाटन किया
भिडेवाड़ा में क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के प्रथम बालिका विद्यालय के स्मारक का शिलान्यास किया
“महाराष्ट्र में विभिन्न परियोजनाओं के शुभारंभ से शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के लिए ‘जीवन यापन में सुगमता’ में उल्लेखनीय वृद्धि होगी”
“हम पुणे शहर में जीवन यापन की सुगमता बढ़ाने के अपने सपने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं”
“सोलापुर को सीधी हवाई-संपर्क सुविधा प्रदान करने के लिए हवाई अड्डे को उन्नत करने का कार्य पूरा हो चुका है”
“भारत आधुनिक होना चाहिए, भारत का आधुनिकीकरण होना चाहिए, लेकिन यह हमारे मूलभूत मूल्यों पर आधारित होना चाहिए”

नमस्कार।

महाराष्ट्र के गर्वनर सी. पी. राधाकृष्णन जी, महाराष्ट्र के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान एकनाथ शिंदे जी, उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस जी, अजीत पवार जी, पुणे के सांसद और मंत्री परिषद के मेरे युवा साथी भाई मुरलीधर, केंद्र के अन्य मंत्री जो वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़़े हुए हैं, महाराष्ट्र के सभी वरिष्ठ मंत्रीगण भी मेरे सामने मुझे दिखाई दे रहे हैं, सांसदगण, विधायकगण, और इस कार्यक्रम से जुड़े सभी भाइयों एवं बहनों!

पुण्यातील माझ्या सर्व लाडक्या बहिणींना

आणि लाडक्या भावांना माझा नमस्कार।

दो दिन पहले मुझे कई बड़ी परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के लिए पुणे आना था। लेकिन, भारी बारिश के चलते वो कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। उसमें मेरा तो नुकसान है ही, क्योंकि पुणे के कण-कण में राष्ट्रभक्ति है, पुणे के कण-कण में समाजभक्ति है, ऐसे पुणे में आना वो अपने आप में ऊर्जावान बना देता है। तो मेरा तो बड़ा loss है कि मैं आज पुणे नहीं आ पा रहा हूं। लेकिन अब टेक्नोलॉजी के माध्यम से आप सभी के दर्शन करने का मुझे सौभाग्य मिला है। आज पुणे की ये धरती....भारत की महान विभूतियों की प्रेरणा भूमि, महाराष्ट्र के विकास के नए अध्याय की साक्षी बन रही है। अभी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से स्वारगेट सेक्शन रूट का लोकार्पण हुआ है। इस रूट पर भी अब मेट्रो चलना शुरू हो जाएगी। स्वारगेट-कात्रज सेक्शन का आज शिलान्यास भी हुआ है। आज ही हम सबके श्रदेह क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले मेमोरियल की नींव भी रखी गई है। पुणे शहर में Ease of Living बढ़ाने का हमारा जो सपना है, मुझे खुशी है कि हम उस दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।

भाइयों-बहनों,

आज भगवान विट्ठल के आशीर्वाद से उनके भक्तों को भी स्नेह उपहार मिला है। सोलापुर को सीधे एयर-कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए एयरपोर्ट को अपग्रेड करने का काम पूरा कर लिया गया है। यहां के टर्मिनल बिल्डिंग की क्षमता बढ़ाई गई है। यात्रियों के लिए नई सुविधाएं तैयार की गई हैं। इससे देश विदेश हर स्तर पर विठोबा के भक्तों को काफी सुविधा होगी। भगवान विट्ठल के दर्शन करने के लिए लोग अब सीधे सोलापुर पहुँच सकेंगे। यहां व्यापार, कारोबार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मैं महाराष्ट्र के लोगों को, आप सबको इन सभी विकास कार्यों के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

आज महाराष्ट्र को नए संकल्पों के साथ बड़े लक्ष्यों की जरूरत है। इसके लिए हमें पुणे जैसे हमारे शहरों को प्रगति का, urban development का सेंटर बनाना जरूरी है। आज पुणे जिस गति से आगे बढ़ रहा है, यहाँ जनसंख्या का दबाव भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। पुणे की बढ़ती जनसंख्या शहर की स्पीड को कम न करे, बल्कि उसका सामर्थ्य बढ़ाए, इसके लिए हमें अभी से कदम उठाने की जरूरत है। ये तब होगा, जब पुणे का पब्लिक ट्रांसपोर्ट आधुनिक होगा, ये तब होगा, जब शहर का विस्तार तो हो लेकिन एक क्षेत्र की दूसरे से कनेक्टिविटी बेहतरीन रहे। आज महायुति की सरकार, इसी सोच और अप्रोच के साथ दिन-रात काम कर रही है।

साथियों,

पुणे की आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बहुत पहले से काम किए जाने की जरूरत थी। पुणे में मेट्रो जैसा advanced ट्रांसपोर्ट सिस्टम बहुत पहले आ जाना चाहिए था। लेकिन दुर्भाग्य से, बीते दशकों में हमारे देश के शहरी विकास में प्लानिंग और विज़न दोनों का अभाव रहा। अगर कोई योजना चर्चा में आती भी थी, तो उसकी फ़ाइल ही कई-कई वर्षों तक अटकी रहती थी। अगर कोई योजना बन भी गई, तो भी एक-एक प्रोजेक्ट कई-कई दशकों तक लटका रहता था। उस पुराने वर्क कल्चर का बहुत बड़ा नुकसान हमारे देश को, महाराष्ट्र को और पुणे को भी हुआ। आप याद करिए, पुणे में मेट्रो बनाने की बात सबसे पहले 2008 में शुरू हुई थी। लेकिन, 2016 में इसकी आधारशिला तब रखी गई जब हमारी सरकार ने अड़चनों को हटाकर तेजी से निर्णय़ लेना शुरू किया। और आज देखिए...आज पुणे मेट्रो रफ्तार भी भर रही है और उसका विस्तार भी हो रहा है।

आज भी, एक ओर हमने पुराने काम का लोकार्पण किया है, तो साथ ही स्वारगेट सें कात्रज लाइन का शिलान्यास भी किया है। इसी साल मार्च में मैंने रूबी हाल क्लीनिक से रामवाड़ी तक मेट्रो सेवा का लोकार्पण भी किया था। 2016 से अब तक, इन 7-8 वर्षों में पुणे मेट्रो का ये विस्तार....इतने रूट्स पर काम की ये प्रगति और नए शिलान्यास....अगर पुरानी सोच और कार्यपद्धति होती तो इनमें से कोई भी काम पूरे नहीं हो पाते...पिछली सरकार तो 8 साल में मेट्रो का एक पिलर भी खड़ा नहीं कर पाई थी। जबकि हमारी सरकार ने पुणे में मेट्रो का आधुनिक नेटवर्क तैयार कर दिया है।

साथियों,

राज्य की प्रगति के लिए विकास को प्राथमिकता देने वाली सरकार की निरंतरता जरूरी होती है। जब-जब इसमें रुकावट आती है, तो महाराष्ट्र को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। आप देखिए, मेट्रो से जुड़े प्रोजेक्ट्स हों, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन हो, या किसानों के लिए सिंचाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम हों, डबल इंजन सरकार से पहले महाराष्ट्र के विकास के लिए जरूरी ऐसे कितने ही प्रोजेक्ट्स डिरेल हो गए थे। इसी का एक और उदाहरण है- बिडकिन इंडस्ट्रियल एरिया! हमारी सरकार के समय मेरे मित्र देवेन्द्र जी ने ऑरिक सिटी की संकल्पना रखी थी। उन्होंने दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रीयल कॉरिडॉर पर शिंद्रा-बिडकीन इंडस्ट्रीयल एरिया की नींव रखी थी। National Industrial Corridor Development Programme के तहत इस पर काम होना था। लेकिन, बीच में ये काम भी ठप्प हो गया था। अब शिंदे जी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने उन अड़चनों को भी हटाने का काम किया है। आज यहाँ बिडकिन इंडस्ट्रियल नोड को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया है। छत्रपति संभाजी नगर में लगभग 8 हजार एकड़ में बिडकिन इंडस्ट्रियल एरिया का विस्तार होगा। कई बड़े-बड़े उद्योगों के लिए यहाँ जमीन allot हो गई है। इससे यहाँ हजारों करोड़ का निवेश आएगा। इससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। निवेश से नौकरी पैदा करने का ये मंत्र, आज महाराष्ट्र में युवाओं की बड़ी ताकत बन रहा है।

विकसित भारत के शिखर पर पहुंचने के लिए हमें कई पड़ाव पार करने हैं। भारत आधुनिक हो...भारत का modernization भी हो...लेकिन हमारे मूलभूत मूल्यों के आधार पर हो। भारत विकसित भी हो...विकास भी करे और विरासत को भी गर्व के साथ लेकर आगे बढ़े। भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक हो...और ये भारत की आवश्यकताओं और भारत की प्राथमिकताओं के आधार पर हो। भारत का समाज एक मन, एक लक्ष्य के साथ तेज गति से आगे बढ़े। इन सारी बातों को ध्यान में रखकर हमें आगे चलना ही है।

महाराष्ट्र के लिए भी जितना जरूरी future ready इंफ्रास्ट्रक्चर है, उतना ही जरूरी है कि विकास का लाभ हर वर्ग तक पहुंचे। ये तब होगा, जब देश के विकास में हर वर्ग, हर समाज की भागीदारी होगी। ये तब होगा, जब विकसित भारत के संकल्प का नेतृत्व देश की महिलाएं करेंगी। समाज में बदलाव की ज़िम्मेदारी जब महिलाएं उठाती हैं, तो क्या कुछ हो सकता है, महाराष्ट्र की धरती तो इसकी साक्षी रही है। इसी धरती ने और इस धरती से सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की शिक्षा के लिए इतना बड़ा आंदोलन शुरू किया था। यहाँ बहन-बेटियों के लिए पहला स्कूल खोला गया था। इसकी स्मृति को, इस विरासत को संजो कर रखना जरूरी है। आज मैंने देश के उसी प्रथम गर्ल्स स्कूल में सावित्री बाई फुले मेमोरियल की आधारशिला रखी है। मुझे खुशी है कि इस मेमोरियल में एक स्किल डवलपमेंट सेंटर, library और दूसरी जरूरी सुविधाओं का निर्माण भी किया जा रहा है। ये मेमोरियल सामाजिक चेतना के उस जन-आंदोलन की स्मृतियों को जीवंत करेगा। ये मेमोरियल हमारे समाज को, हमारी नई पीढ़ी को प्रेरणा देगा।

भाइयों और बहनों,

आज़ादी के पहले देश में जो सामाजिक हालात थे, जो गरीबी और भेदभाव था, उन हालातों में हमारी बेटियों के लिए शिक्षा बहुत मुश्किल थी। सावित्रीबाई फुले जैसी विभूतियों ने बेटियों के बंद शिक्षा के दरवाजों को खोला। लेकिन, आज़ादी के बाद भी देश उस पुरानी मानसिकता से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ। कितने ही क्षेत्रों में पिछली सरकारों ने महिलाओं की एंट्री बंद करके रखी थी। स्कूलों में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। इसके कारण, स्कूल होने के बावजूद भी स्कूलों के दरवाजे बेटियों के लिए बंद थे। जैसे ही बच्चियाँ थोड़ी बड़ी होती थीं, उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ता था। सैनिक स्कूलों में तो बेटियों के एड्मिशन पर रोक थी। सेना में ज़्यादातर कार्यक्षेत्रों में महिलाओं की नियुक्ति पर रोक थी। इसी तरह, कितनी ही महिलाओं को pregnancy के दौरान नौकरी छोड़नी पड़ती थी। हमने पुरानी सरकारों की उन पुरानी मानसिकताओं को बदला, पुरानी व्यवस्थाओं को बदला। हमने स्वच्छ भारत अभियान चलाया। उसका सबसे बड़ा फायदा देश की बेटियों को, हमारी माताओं-बहनों को हुआ। उन्हें खुले में शौच से छुटकारा मिला। स्कूलों में बनाए गए शौचालयों के कारण और बेटियों के लिए अलग शौचालयों के कारण बेटियों का ड्रॉप आउट रेट कम हुआ। हमने आर्मी स्कूल्स के साथ-साथ सेना में तमाम पदों को महिलाओं के लिए खोल दिया। हमने महिला सुरक्षा पर कड़े कानून बनाए। और इस सबके साथ, देश ने नारीशक्ति वंदन अधिनियम के जरिए लोकतंत्र में महिलाओं के नेतृत्व की गारंटी भी दी है।

साथियों,

"हमारी बेटियों के लिए जब हर क्षेत्र के दरवाजे खुले, तभी हमारे देश के विकास के असली दरवाजे खुल पाए।" मुझे विश्वास है, सावित्रीबाई फुले मेमोरियल हमारे इन संकल्पों को, महिला सशक्तिकरण के हमारे इस अभियान को और ऊर्जा देगा।

साथियों,

मुझे भरोसा है, महाराष्ट्र की प्रेरणाएँ, महाराष्ट्र की ये धरती हमेशा की तरह देश का मार्गदर्शन करती रहेगी। हम सब मिलकर 'विकसित महाराष्ट्र, विकसित भारत' का ये लक्ष्य पूरा करेंगे। इसी विश्वास के साथ, आप सभी को एक बार फिर इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए हार्दिक बधाई देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India goes Intercontinental with landmark EU trade deal

Media Coverage

India goes Intercontinental with landmark EU trade deal
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
India’s democracy and demography are a beacon of hope for the world: PM Modi’s statement to the media ahead of the Budget Session of Parliament
January 29, 2026
राष्ट्रपति का संबोधन 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को दर्शाता है: प्रधानमंत्री
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता युवाओं, किसानों और निर्माताओं के लिए व्यापक अवसर खोलता है : प्रधानमंत्री
हमारी सरकार सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन में विश्वास करती है; देश तेजी से सुधार के मार्ग पर कदम बढ़ा रहा है : प्रधानमंत्री
भारत का लोकतंत्र और जनसांख्यिकी विश्व के लिए आशा की किरण है: प्रधानमंत्री
यह समाधानों, सशक्त निर्णय और सुधारों में तेजी लाने का समय है : प्रधानमंत्री

नमस्कार साथियों!

कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था और 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवा, उनके एस्पिरेशन को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन, सभी सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक बातें भी, कल आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सदन में सबके सामने रखी हैं। सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रूप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा और यह सत्र अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण सत्र होता है। यह बजट सत्र है, 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, यह दूसरी चौथाई का प्रारंभ हो रहा है, और 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है और यह दूसरे क्वार्टर का, इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का यह पहला बजट आ रहा है और वित्त मंत्री निर्मला जी, देश की पहली वित्त मंत्री ऐसी हैं, महिला वित्त मंत्री ऐसी हैं, जो लगातार 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही है। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में रजिस्टर हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का प्रारंभ बहुत ही पॉजिटिव नोट के साथ शुरू हुआ है। आत्मविश्वास से भरा हिंदुस्तान आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है, आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय यूनियन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आने वाली दिशाएं कितनी उज्ज्वल हैं, भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है, उसकी एक झलक है। यह फ्री ट्रेड फॉर एंबिशियस भारत है, यह फ्री ट्रेड फॉर एस्पिरेशनल यूथ है, यह फ्री ट्रेड फॉर आत्मनिर्भर भारत है और मुझे पक्का विश्वास है, खास करके जो भारत के मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे इस अवसर को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। और मैं सभी प्रकार के उत्पादकों से यही कहूंगा कि जब भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसको कहते हैं, वैसा समझौता हुआ है तब, मेरे देश के उद्योगकार, मेरे देश के मैन्युफैक्चरर्स, अब तो बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब बहुत सस्ते में हमारा माल पहुंच जाएगा, इतने भाव से वो बैठे ना रहे, यह एक अवसर है, और इस अवसर का सबसे पहले मंत्र यह होता है, कि हम क्वालिटी पर बल दें, हम अब जब बाजार खुल गया है तो उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के बाजार में जाएं और अगर उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के जाते हैं, तो हम यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के खरीदारों से पैसे ही कमाते हैं इतना ही नहीं, क्वालिटी के कारण से उनका दिल जीत लेते हैं, और वो लंबे अरसे तक प्रभाव रहता है उसका, दशकों तक उसका प्रभाव रहता है। कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ नए गौरव को प्रस्थापित कर देता है और इसलिए 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता, हमारे देश के मछुआरे, हमारे देश के किसान, हमारे देश के युवा, सर्विस सेक्टर में जो लोग विश्व में अलग-अलग जगह पर जाने के उत्सुक हैं, उनके लिए बहुत बड़े अवसर लेकर के आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है, एक प्रकार से कॉन्फिडेंस कॉम्पिटेटिव और प्रोडक्टिव भारत की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।

साथियों,

देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की यह पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। और अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं, बहुत तेजी से चल पड़े हैं और मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं, इस रिफॉर्म एक्सप्रेसवे को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति को लगा रहे हैं और उसके कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को भी लगातार गति मिल रही है। देश लॉन्ग टर्म पेंडिंग प्रॉब्लम अब उससे निकल करके, लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के मार्ग पर मजबूती के साथ कदम रख रहा है। और जब लॉन्ग टर्म सॉल्यूशंस होते हैं, तब predictivity होती है, जो विश्व में एक भरोसा पैदा करती है! हमारे हर निर्णय में राष्ट्र की प्रगति यह हमारा लक्ष्य है, लेकिन हमारे सारे निर्णय ह्यूमन सेंट्रिक हैं। हमारी भूमिका, हमारी योजनाएं, ह्यूमन सेंट्रिक है। हम टेक्नोलॉजी के साथ स्पर्धा भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी को आत्मसात भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को स्वीकार भी करेंगे, लेकिन उसके साथ-साथ हम मानव केंद्रीय व्यवस्था को जरा भी कम नहीं आकेंगे, हम संवेदनशीलताओं की महत्वता को समझते हुए टेक्नोलॉजी की जुगलबंदी के साथ आगे बढ़ने के व्यू के साथ आगे सोचेंगे। जो हमारे टिकाकार रहते हैं साथी, हमारे प्रति पसंद ना पसंद का रवैया रहता है और लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है, लेकिन एक बात हर कोई कहता है, कि इस सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजनाओं को फाइलों तक नहीं, उसे लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। और यही हमारी जो परंपरा है, उसको हम आने वाले दिनों में रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ आगे बढ़ाने वाले हैं। भारत की डेमोक्रेसी और भारत की डेमोग्राफी, आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है, तब इस लोकतंत्र के मंदिर में हम विश्व समुदाय को भी कोई संदेश दें, हमारे सामर्थ्य का, हमारे लोकतंत्र के प्रति समर्पण का, लोकतंत्र की प्रक्रियाओं के द्वारा हुए निर्णय का सम्मान करने का यह अवसर है, और विश्व इसका जरूर स्वागत भी करता है, स्वीकार भी करता है। आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान के माध्यम से रोते बैठने का नहीं है, आज हिम्मत के साथ समाधानकारी निर्णयों का कालखंड है। मैं सभी माननीय सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे आएं, राष्ट्र के लिए आवश्यक समाधानों के दौर को हम गति दें, निर्णयों को हम शक्ति दें और लास्ट माइल डिलीवरी में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ें, साथियों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।