“This post-budget brainstorming is important from the point of view of implementation and time-bound delivery. This also ensures proper utilization of every penny of taxpayers money”
“The more emphasis we put on good governance, the more easily our goal of reaching the last mile will be accomplished”
“Approach of reaching the last mile and policy of saturation complement each other”
“When our aim is to reach everyone, then there will be no scope for discrimination and corruption”
“This year’s Budget has paid special attention to taking the mantra of reaching the last mile to tribal and rural areas”
“For the first time, the country is tapping the huge potential of the tribal society of our country at this scale”
“Whole-of-the-Nation approach is needed to rapidly provide facilities under special mission for the most deprived among the tribal community”
“The Aspirational District Program has emerged as a successful model in terms of Reaching The Last Mile”

आमतौर पर ये परंपरा रही है कि बजट के बाद, बजट के संदर्भ में संसद में चर्चा होती है। और ये जरूरी भी है, उपयोगी भी है। लेकिन हमारी सरकार बजट पर चर्चा को एक कदम आगे लेकर गई है। बीते कुछ वर्षों से हमारी सरकार ने बजट बनाने से पहले भी और बजट के बाद भी सभी स्टेकहोल्डर्स से गहन मंथन की नई परंपरा शुरू की है। ये Implementation के लिहाज से, Time Bound Delivery के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण है। इससे Taxpayers Money की पाई-पाई का सही इस्तेमाल भी सुनिश्चित होता है। बीते कुछ दिनों में मैं अलग-अलग फील्ड के एक्सपर्ट्स से बात कर चुका हूं। आज Reaching The Last Mile, जो महात्मा गाँधी कहते थे की आपकी नीतियां, आपकी योजनाएं आखरी छोर पर बैठे हुए व्यक्ति तक कितनी जल्दी पहुँचती है, कैसे पहुँचती है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। और इसलिए आज सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ ईसी विषय पर व्यापक चर्चा हो रही है के बजट में लोक कल्याण के इतने काम होते हैं, इतना बजट होता है, हम उसको लाभार्थी तक पूरी transparency के साथ कैसे पहुँचा सकते हैं ।

साथियों,

हमारे देश में एक पुरानी अवधारणा रही है कि लोगों का कल्याण और देश का विकास सिर्फ धन से ही होता है। ऐसा नहीं है। देश और देशवासियों के विकास के लिए धन तो ज़रूरी है ही लेकिन धन के साथ ही मन भी चाहिए। सरकारी कार्यों और सरकारी योजनाओं की सफलता की सबसे अनिवार्य शर्त है- Good Governance, सुशासन, संवेदनशील शासन, जन सामान्य को समर्पित शासन। जब सरकार के काम Measurable होते हैं, उसकी निरंतर मॉनीटरिंग होती है तो स्वाभाविक है की आप समय सीमा में निर्धारित किये हुए लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं Desired Result मिल सकते हैं। इसलिए Good Governance पर हम जितना जोर देंगे, उतना ही Reaching The Last Mile का हमारा लक्ष्य आसानी से पूरा होगा। आप याद करिए, हमारे देश में पहले दूर-दराज के क्षेत्रों तक वैक्सीन पहुंचने में कई-कई दशक लग जाते थे। देश वैक्सीनेशन कवरेज के मामले में बहुत पीछे था। देश के करोड़ों बच्चों को, खासकर गांवों और ट्राइबल बेल्ट में रहने वाले बच्चों को वैक्सीन के लिए बरसों का इंतजार करना पड़ता था। अगर पुरानी अप्रोच के साथ काम करते तो भारत में वैक्सीनेशन करवेज को शत-प्रतिशत करने में कई दशक और बीत जाते। हमने नई अप्रोच के साथ काम शुरू किया, मिशन इंद्रधनुष शुरू किया और पूरे देश में वैक्सीनेशन की व्यवस्था को सुधारा। जब कोरोना वैश्विक महामारी आई, तो इस नई व्यवस्था, नए सिस्टम का लाभ हमें दूर-सुदूर वैक्सीन पहुंचाने में मिला। और मैं मानता हूँ Good Governance का इसमें बहुत बड़ा रोल है, ताकत है जिसने Last Mile delivery को संभव बनाया।

साथियों,

Reaching The Last Mile की अप्रोच और सैचुरेशन की नीति, एक दूसरे की पूरक है। एक समय था जब गरीब मूल सुविधाओं के लिए सरकार के पास चक्कर लगाता था, किसी बिचौलिये की तलाश में रहता था जिसके कारण corruption भी बढ़ता था और लोगों के अधिकारों का हनन भी होता था। अब सरकार गरीब के दरवाजे पर जाकर उसे सुविधाएं दे रही है। जिस दिन हम ठान लेंगे कि हर मूलभूत सुविधा, हर क्षेत्र में, हर नागरिक तक बिना भेद भाव के पहुंचाकर ही रहेंगे, तो देखिएगा कितना बड़ा परिवर्तन स्थानीय स्तर पर कार्यसंस्कृति में आता है। सैचुरेशन की नीति के पीछे यही भावना है। जब हमारा लक्ष्य, हर एक के पास पहुंचने का होगा, हर हितधारक के पास पहुंचने का होगा, तो फिर किसी के साथ भेदभाव की, भ्रष्टाचार की, भाई-भतीजावाद की गुंजाइश ही नहीं रह जाएगी। और तभी Reaching The Last Mile का लक्ष्य़ भी आप पूरा कर पाएंगे। आप देखिए, आज पहली बार देश में पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से स्ट्रीट वेंडर्स को फॉर्मल बैंकिंग से जोड़ा गया है। आज पहली बार देश में बंजारा, घुमंतु-अर्ध घूमंतु वर्ग के लिए वेलफेयर बोर्ड बना है। गांवों में बने 5 लाख से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर्स, सरकार की सेवाओं को गांवों तक ले गए हैं। मैंने कल ही मन की बात में विस्तार से बताया है कि कैसे देश में टेलीमेडिसीन के 10 करोड़ केसेस पूरे हुए हैं। ये भी स्वास्थ्य को लेकर Reaching The Last Mile की भावना का ही प्रतिबिंब है।

साथियों,

भारत में जो आदिवासी क्षेत्र हैं, ग्रामीण क्षेत्र हैं, वहां आखिरी छोर तक Reaching The Last Mile के मंत्र को ले जाने की जरूरत है। इस साल के बजट में भी इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। Reaching The Last Mile के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ही जल-जीवन मिशन के लिए हजारों करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में किया गया है। साल 2019 तक हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में सिर्फ

तीन करोड़ घरों में ही नल से जल आता था। अब इनकी संख्या बढ़कर 11 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, और इतने कम समय में भी। सिर्फ एक साल के भीतर ही देश में लगभग 60 हजार अमृत सरोवरों का काम शुरू हुआ है और मुझे जो जानकारी बताई गयी है अब तक 30 हजार से अधिक अमृत सरोवर बन भी चुके हैं। ये अभियान, दूर-सुदूर में रहने वाले उस भारतीय का जीवन स्तर सुधार रहे हैं, जो दशकों से ऐसी व्यवस्थाओं का इंतजार करता था।

लेकिन साथियों,

हमें यहाँ रुकना मंज़ूर नहीं है। हमें एक मैकेनिज्म क्रिएट करना होगा ताकि पानी के नए कनेक्शन्स में हम water consumption का pattern देख सकें। हमें इस बात की भी समीक्षा करनी है कि पानी समिति को और सशक्त करने के लिए क्या किया जा सकता है। गर्मी का मौसम आ ही गया है। जल संरक्षण के लिए अभी से हम पानी समितियों का क्या इस्तेमाल कर सकते हैं, ये भी हमें सोचना होगा। बारिश के पहले ही catch the rain movement के लिए लोक शिक्षण हो जाए, लोगों की सक्रियता हो जाए, जैसे ही पानी आये, काम शुरू हो जाए।

साथियों,

इस वर्ष के बजट में हमने गरीबों के घर के लिए करीब 80 हज़ार करोड़ रुपए रखे हैं। हमें Housing for All की मुहिम को तेजी से आगे बढ़ाना होगा। हाउसिंग को technology से कैसे जोड़ें, कम खर्च में ज्यादा टिकाऊ और मजबूत घर कैसे बने? ग्रीन एनर्जी, जैसे सोलर पावर का फायदा कैसे हो? ग्रुप हाउसिंग के नए मॉडल, गांव और शहरों में भी स्वीकार्य हों, ये क्या हो सकते हैं? इस पर ठोस चर्चा की ज़रूरत है। आपके अनुभव का निचोड़ उसमें निकलना चाहिए।

साथियों,

हमारे देश के ट्राइबल समाज के विशाल पोटेंशियल को टैप करने के लिए पहली बार देश में इतने बड़े स्तर पर काम हो रहा है। इस बार के बजट में भी ट्राइबल डेवलपमेंट को प्रमुखता दी गयी है। एकलव्य मॉडल रेज़ीडेंशियल स्कूलों में शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती का बहुत बड़ा प्रावधान किया गया है। एकलव्य मॉडल स्कूलों में हमें ये भी देखना होगा कि विद्यार्थियों का फीडबैक क्या है, शिक्षकों का फीडबैक क्या है? इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को देश के बड़े शहरों में एक्सपोजर कैसे मिले, इनमें अटल टिंकरिंग लैब्स ज्यादा से ज्यादा कैसे बनें, इस दिशा में भी हमें सोचना होगा। आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर हम इन स्कूलों में अभी से स्टार्ट-अप्स के लिए, डिजिटल मार्केटिंग के लिए वर्कशॉप्स शुरू करवाएं तो इसका कितना बढ़ा लाभ हमारे आदिवासी समाज को होगा। जब ये बच्चे एकलव्य मॉडल स्कूलों से पढ़कर निकलेंगे तो उन्हें पहले से पता होगा कि अपने क्षेत्र के ट्राइबल प्रॉडक्ट को उन्हें कैसे प्रमोट करना है, कैसे ऑनलाइन उनकी ब्राडिंग करनी है।

साथियों,

पहली बार आदिवासियों में भी जो सबसे वंचित हैं, उनके लिए एक विशेष Mission हम शुरु कर रहे हैं। देश के 200 से अधिक जिलों में 22 हज़ार से अधिक गांवों में ट्राइबल साथियों तक हमें तेज़ी से सुविधाएं पहुंचानी है। वैसे ही हमारे लघुमति समाज में, ख़ास करके हमारे मुस्लमान समाज में पश्मंदा समाज है, वहाँ तक लाभ कैसे पहुँचे, जो आज भी आजादी की इतने साल बाद भी बहुत पीछे रह गए हैं। इस बजट में सिकल सेल से पूरी तरह से मुक्ति का लक्ष्य भी रखा गया है। इसके लिए whole of the nation approach की ज़रूरत है। इसलिए हेल्थ से जुड़े हर स्टेकहोल्डर्स को तेजी से काम करना होगा।

साथियों,

Aspirational District Program, Reaching The Last Mile के लिहाज से एक सक्सेस मॉडल बन कर उभरा है। इसी अप्रोच पर अब देश के 500 ब्लाक्स में aspirational block कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। Aspirational Block programme के लिए हमें comparative parameters को ध्यान में रखते हुए वैसे ही काम करना है जैसे हमने Aspirational Districts के लिए काम किया है। हमें हर ब्लॉक में भी एक दूसरे के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना है। मुझे विश्वास है कि इस वेबिनार से Last Mile delivery से जुड़े नए विचार, नए सुझाव इस मंथन में से वो अमृत निकलेगा जो हमारे दूर-दराज के क्षेत्रों में आखरी छोर पर बैठे हुए जो हमारे भाई बहन हैं, उनके जीवन में बदलाव लेन के लिए आपके सुझाव बहुत काम आयेंगे। हमें आगे के लिए सोचना है, हमें इम्प्लीमेंटेशन पर बल देना है, हमें टेक्नोलॉजी का सर्वधिक्क उपयोग करते हुए, transparency को सुनिश्चत करना है। हितधारक सही हो, उसको मिलने की व्यवस्था उसके काम आने वाली हो, और समय सीमा में मिले, ताकि जल्दी से जल्दी वो एक नए विश्वास के साथ खुद गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए हमारा एक सैनिक बन जायेगा। हमारे गरीबों की फ़ौज, गरीबी को परास्त करने के लिए ताकतवर होनी चाहिए। हमें गरीबों की ऐसी शक्ति बढ़नी है ताकि हमारा गरीब ही गरीबी को परास्त करे, हर गरीब ये संकल्प लेना शुरू करे की अब मुझे गरीब नहीं रहना है, मुझे मेरे परिवार को गरीबी से बाहर निकलना है, सरकार मेरा हाथ पकड़ रही है मैं चल पडूंगा। ये वातावरण हमें पैदा करना है, और इसके लिए मुझे आप जैसे सभी stakeholders के सक्रिय सहयोग की अपेक्षा है। मुझे विश्वास है की आज का ये वेबिनार एक प्रकार से सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय एक बहुत बड़े संकल्प की पूर्ती का कारण बनेगा। मेरे तरफ से आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं ! धन्यवाद !

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Gen Z और Gen Alpha भारत को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएगी: पीएम मोदी
December 26, 2025
प्रधानमंत्री ने कहा - आज के दिन हम राष्ट्र के गौरव, अदम्य साहस और वीरता के सर्वोच्च आदर्शों के प्रतीक वीर साहिबजादों को याद करते हैं
प्रधानमंत्री ने कहा - माता गुजरी जी, श्री गुरु गोविंद सिंह जी और चारों साहिबजादों का साहस और आदर्श प्रत्येक भारतीय को शक्ति प्रदान करते हैं
प्रधानमंत्री ने कहा - भारत ने गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होने का संकल्प लिया है
प्रधानमंत्री ने कहा - जैसे-जैसे भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्त हो रहा है, हमारी भाषाई विविधता शक्ति के स्रोत के रूप में उभर रही है
प्रधानमंत्री ने कहा - जेनरेशन जेड और जेनरेशन अल्फा देश के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करेगी

केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अन्नपूर्णा देवी, सावित्री ठाकुर, रवनीत सिंह, हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली सरकार से आए हुए मंत्री महोदय, अन्य महानुभाव, देश के कोने-कोने से यहां उपस्थित सभी अतिथि और प्यारे बच्चों !

आज देश ‘वीर बाल दिवस’ मना रहा है। अभी वंदे मातरम की इतनी सुंदर प्रस्तुति हुई है, आपकी मेहनत नजर आ रही है।

साथियों,

आज हम उन वीर साहिबजादों को याद कर रहे हैं, जो हमारे भारत का गौरव है। जो भारत के अदम्य साहस, शौर्य, वीरता की पराकाष्ठा है। वो वीर साहिबजादे, जिन्होंने उम्र और अवस्था की सीमाओं को तोड़ दिया, जो क्रूर मुगल सल्तनत के सामने ऐसे चट्टान की तरह खड़े हुए कि मजहबी कट्टरता और आतंक का वजूद ही हिल गया। जिस राष्ट्र के पास ऐसा गौरवशाली अतीत हो, जिसकी युवा पीढ़ी को ऐसी प्रेरणाएं विरासत में मिली हों, वो राष्ट्र क्या कुछ नहीं कर सकता।

साथियों,

जब भी 26 दिसंबर का ये दिन आता है, तो मुझे ये तसल्ली होती है कि हमारी सरकार ने साहिबजादों की वीरता से प्रेरित वीर बाल दिवस मनाना शुरू किया। बीते 4 वर्षों में वीर बाल दिवस की नई परंपरा ने साहिबजादों की प्रेरणाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाया है। वीर बाल दिवस ने साहसी और प्रतिभावान युवाओं के निर्माण के लिए एक मंच भी तैयार किया है। हर साल जो बच्चे अलग-अलग क्षेत्रों में देश के लिए कुछ कर दिखाते हैं, उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस बार भी, देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 20 बच्चों को ये पुरस्कार दिए गए हैं। ये सब हमारे बीच में हैं, अभी मुझे उनसे काफी गप्पे-गोष्टि करने का मौका मिला। और इनमें से किसी ने असाधारण बहादुरी दिखाई है, किसी ने सामाजिक सेवा और पर्यावरण के क्षेत्र में सराहनीय काम किया है। इनमें से कुछ विज्ञान और टेक्नोलॉजी में कुछ इनोवेट किया है, तो कई युवा साथी खेल, कला और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। मैं इन पुरस्कार विजेताओं से कहूंगा, आपका ये सम्मान आपके लिए तो है ही, ये आपके माता-पिता का, आपके टीचर्स और मेंटर्स का, उनकी मेहनत का भी सम्मान है। मैं पुरस्कार विजेताओं को, और उनके परिवारजनों को उज्ज्वल भविष्य के लिए अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

वीर बाल दिवस का ये दिन भावना और श्रद्धा से भरा दिन है। साहिबजादा अजीत सिंह जी, साहिबजादा जुझार सिंह जी, साहिबजादा जोरावर सिंह जी, और साहिबजादा फतेह सिंह जी, छोटी सी उम्र में इन्हें उस समय की सबसे बड़ी सत्ता से टकराना पड़ा। वो लड़ाई भारत के मूल विचारों और मजहबी कट्टरता के बीच थी, वो लड़ाई सत्य बनाम असत्य की थी। उस लड़ाई के एक ओर दशम गुरु श्रीगुरु गोविंद सिंह जी थे, दूसरी ओर क्रूर औरंगजेब की हुकूमत थी। हमारे साहिबजादे उस समय उम्र में छोटे ही थे। लेकिन, औरंगजेब को, उसकी क्रूरता को उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वो जानता था, उसे अगर भारत के लोगों को डराकर उनका धर्मांतरण कराना है, तो इसके लिए उसे हिंदुस्तानियों का मनोबल तोड़ना होगा। और इसलिए उसने साहिबजादों को निशाना बनाया।

लेकिन साथियों,

औरंगजेब और उसके सिपाहसालार भूल गये थे, हमारे गुरु कोई साधारण मनुष्य नहीं थे, वो तप, त्याग का साक्षात अवतार थे। वीर साहिबजादों को वही विरासत उनसे मिली थी। इसीलिए, भले ही पूरी मुगलिया बादशाहत पीछे लग गई, लेकिन वो चारों में से एक भी साहिबजादे को डिगा नहीं पाये। साहिबजादा अजीत सिंह जी के शब्द आज भी उनके हौसले की कहानी कहते हैं- नाम का अजीत हूं, जीता ना जाऊंगा, जीता भी गया, तो जीता ना आउंगा !

साथियों,

कुछ दिन पूर्व ही हमने श्रीगुरू तेग बहादुर जी को, उनके तीन सौ पचासवें बलिदान दिवस पर याद किया। उस दिन कुरुक्षेत्र में एक विशेष कार्यक्रम भी हुआ था। जिन साहिबजादों के पास श्री गुरू तेग बहादुर जी के बलिदान की प्रेरणा हो, वो मुगल अत्याचारों से डर जाएंगे, ये सोचना ही गलत था।

साथियों,

माता गुजरी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और चारों साहिबजादों की वीरता और आदर्श, आज भी हर भारतीय को ताकत देते हैं, हमारे लिए प्रेरणा है। साहिबजादों के बलिदान की गाथा देश में जन-जन की जुबान पर होनी चाहिए थी। लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी देश में गुलामी की मानसिकता हावी रही। जिस गुलामी की मानसिकता का बीज अंग्रेज राजनेता मैकाले ने 1835 में बोया था, उस मानसिकता से देश को आजादी के बाद भी मुक्त नहीं होने दिया गया। इसलिए आजादी के बाद भी देश में दशकों तक ऐसी सच्चाइयों को दबाने की कोशिश की गई।

लेकिन साथियों,

अब भारत ने तय किया है कि गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पानी ही होगी। अब हम भारतीयों के बलिदान, हमारे शौर्य की स्मृतियां दबेंगी नहीं। अब देश के नायक-नायिकाओं को हाशिये पर नहीं रखा जाएगा। और इसलिए वीर बाल दिवस को हम पूरे मनोभाव से मना रहे हैं। और हम इतने पर ही नहीं रुके हैं, मैकाले ने जो साजिश रची थी, साल 2035 में उसके 200 साल अब थोड़े समय में हो जाएंगे। इसमें अभी 10 साल का समय बाकी है। इन्हीं 10 सालों में हम देश को पूरी तरह गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहेंगे। 140 करोड़ देशवासियों का ये संकल्प होना चाहिए। क्योंकि देश जब इस गुलामी की मानसिकता से मुक्त होगा, उतना ही स्वदेशी का अभिमान करेगा, उतना ही आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता से मुक्ति के इस अभियान की एक झलक कुछ दिन पहले हमारे देश की पार्लियामेंट में भी दिखाई दी है। अभी संसद के शीतकालीन सत्र में सांसदों ने हिन्दी और अंग्रेजी के अलावा, दूसरी भारतीय भाषाओं में लगभग 160 भाषण दिये। करीब 50 भाषण तमिल में हुए, 40 से ज्यादा भाषण मराठी में हुए, करीब 25 भाषण बांग्ला में हुए। दुनिया की किसी भी संसद में ऐसा दृश्य मुश्किल है। ये हम सबके लिए गौरव की बात है। भारत की इस language diversity को भी मैकाले ने कुचलने का प्रयास किया था। अब गुलामी की मानसिकता से मुक्त होते हमारे देश में भाषाई विविधता हमारी ताकत बन रही है।

साथियों,

यहां मेरा युवा भारत संगठन से जुड़े इतने सारे युवा यहां उपस्थित हैं। एक तरह से आप सभी जेन जी हैं, जेन अल्फा भी हैं। आपकी जनरेशन ही भारत को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएगी। मैं जेन जी की योग्यता, आपका आत्मविश्वास देखता हूं, समझता हूं, और इसलिए आप पर बहुत भरोसा करता हूं। हमारे यहां कहा गया है, बालादपि ग्रहीतव्यं युक्तमुक्तं मनीषिभिः। अर्थात्, अगर छोटा बच्चा भी कोई बुद्धिमानी की बात करे, तो उसे ग्रहण करना चाहिए। यानी, उम्र से कोई छोटा नहीं होता, और कोई बड़ा भी नहीं होता। आप बड़े बनते हैं, अपने कामों और उपलब्धियों से। आप कम उम्र में भी ऐसे काम कर सकते हैं कि बाकी लोग आपसे प्रेरणा लें। आपने ये करके दिखाया है। लेकिन, इन उपलब्धियों को अभी केवल एक शुरुआत के तौर पर देखना है। अभी आपको बहुत आगे बढ़ना है। अभी सपनों को आसमान तक लेकर जाना है। और आप भाग्यशाली हैं, आप जिस पीढ़ी में जन्में हैं, आपकी प्रतिभा के साथ देश मजबूती से खड़ा है। पहले युवा सपने देखने से भी डरते थे, क्योंकि पुरानी व्यवस्थाओं में ये माहौल बन गया था कि कुछ अच्छा हो ही नहीं सकता। चारों तरफ निराशा, निराशा का वातावरण बना दिया गया था। उन लोगों को यहां तक लगने लगा कि भई मेहनत करके क्या फायदा है? लेकिन, आज देश टैलेंट को, प्रतिभा को खोजता है, उन्हें मंच देता है। उनके सपनों के साथ 140 करोड़ देशवासियों की ताकत लग जाती है।

डिजिटल इंडिया की सफलता के कारण आपके पास इंटरनेट की ताकत है, आपके पास सीखने के संसाधन हैं। जो साइंस, टेक और स्टार्टअप वर्ल्ड में जाना चाहते हैं, उनके लिए स्टार्टअप इंडिया जैसे मिशन हैं। जो स्पोर्ट्स में आगे बढ़ रहे हैं, उनके लिए खेलो इंडिया मिशन है। अभी दो ही दिन पहले मैंने सांसद खेल महोत्सव में भी हिस्सा लिया। ऐसे तमाम मंच आपको आगे बढ़ाने के लिए हैं। आपको बस focused रहना है। और इसके लिए जरूरी है कि आप short term popularity की चमक-दमक में न फंसे। ये तब होगा, जब आपकी सोच स्पष्ट होगी, जब आपके सिद्धान्त स्पष्ट होंगे। और इसलिए, आपको अपने आदर्शों से सीखना है, देश की महान विभूतियों से सीखना है। आपको अपनी सफलता को केवल अपने तक सीमित नहीं मानना है। आपका लक्ष्य होना चाहिए, आपकी सफलता देश की सफलता बननी चाहिए।

साथियों,

आज युवाओं के सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर नई पॉलिसी बनाई जा रही हैं। युवाओं को राष्ट्र-निर्माण के केंद्र में रखा गया है। ‘मेरा युवा भारत’, ऐसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को जोड़ने, उन्हें अवसर देने और उनमें लीडरशिप स्किल विकसित कराने का प्रयास किया जा रहा है। स्पेस इकोनॉमी को आगे बढ़ाना, खेलों को प्रोत्साहित करना, फिनटेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को विस्तार देना, स्किल डेवलपमेंट और इंटर्नशिप के अवसर तैयार करना, इस तरह के हर प्रयास के केंद्र में मेरे युवा साथी ही हैं। हर सेक्टर में युवाओं के लिए नए अवसर खुल रहे हैं।

साथियों,

आज भारत के सामने परिस्थितियां अभूतपूर्व हैं। आज भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। आने वाले पच्चीस वर्ष भारत की दिशा तय करने वाले हैं। आज़ादी के बाद शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि भारत की क्षमताएं, भारत की आकांक्षाएं और भारत से दुनिया की अपेक्षाएं, तीनों एक साथ मिल रही हैं। आज का युवा ऐसे समय में बड़ा हो रहा है, जब अवसर पहले से कहीं ज्यादा हैं। हम भारत के युवाओं की प्रतिभा, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को बेहतर मौके देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मेरे युवा साथियों,

विकसित भारत की मजबूत नींव के लिए भारत की एजुकेशन पॉलिसी में भी अहम Reforms किए गए हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का फोकस 21वीं सदी में लर्निंग के नए तौर-तरीकों पर है। आज फोकस प्रैक्टिकल लर्निंग पर है, बच्चों में रटने के बजाय सोचने की आदत विकसित हो, उनमें सवाल पूछने का साहस और समाधान खोजने की क्षमता आए, पहली बार इस दिशा में सार्थक प्रयास हो रहे हैं। Multidisciplinary studies, skill-based learning, स्पोर्ट्स को बढ़ावा और टेक्नोलाजी का उपयोग, इनसे स्टूडेंट्स को बहुत मदद मिल रही है। आज देशभर में अटल टिंकरिंग लैब्स में लाखों बच्चे इनोवेशन और रिसर्च से जुड़ रहे हैं। स्कूलों में ही बच्चे रोबोटिक्स, AI, सस्टेनेबिलिटी और डिजाइन थिंकिंग से परिचित हो रहे हैं। इन सारे प्रयासों के साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति में, मातृभाषा में पढ़ाई का विकल्प दिया गया है। इससे बच्चों को पढ़ाई में आसानी हो रही है, विषयों को समझने में आसानी हो रही है।

साथियों,

वीर साहिबजादों ने ये नहीं देखा था कि रास्ता कितना कठिन है। उन्होंने ये देखा था कि रास्ता सही है या नहीं है। आज उसी भावना की आवश्यकता है। मैं भारत के युवाओं के, और मैं भारत के युवाओं से यही अपेक्षा करता हूं, बड़े सपने देखें, कड़ी मेहनत करें, और अपने आत्मविश्वास को कभी भी कमजोर न पड़ने दें। भारत का भविष्य उसके बच्चों और युवाओं के भविष्य से ही उज्ज्वल होगा। उनका साहस, उनकी प्रतिभा और उनका समर्पण राष्ट्र की प्रगति को दिशा देगा। इसी विश्वास के साथ, इस जिम्मेदारी के साथ और इसी निरंतर गति के साथ, भारत अपने भविष्य की ओर आगे बढ़ता रहेगा। मैं एक बार फिर वीर साहिबजादों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। सभी पुरस्कार विजेताओं को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।