"भूकंप से मची तबाही को पीछे छोड़कर भुज और कच्छ के लोग अब अपने परिश्रम से इस क्षेत्र का नया भाग्य लिख रहे हैं"
"बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सिर्फ बीमारी के इलाज तक ही सीमित नहीं होती हैं, ये सामाजिक न्याय को प्रोत्साहित करती हैं"
“जब किसी गरीब को सस्ता और उत्तम इलाज सुलभ होता है, तो उसका व्यवस्था पर भरोसा मज़बूत होता है। इलाज के खर्च की चिंता से गरीब को मुक्ति मिलती है तो वो निश्चिंत होकर गरीबी से बाहर निकलने के लिए परिश्रम करता है”


नमस्कार

आप सभी को मेरा जय स्वामीनारायण | मेरे कच्छी भाई बहेनो कैसे हो? मजे में? आज के.के. पटेल सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल का हमारी सेवा में लोकार्पण हो रहा है |
आप सभी को मेरी बहुत बहुत शुभकामनाएँ |

गुजरात के लोकप्रिय मृदु एवं मक्‍कम हमारे मुख्‍यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, महंत स्‍वामी पूज्‍य धर्मनंदन दास जी, केंदीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मनसुख मांडविया जी, गुजरात विधानसभा अध्‍यक्ष नीमाबेन आचार्य, गुजरात सरकार के अन्‍य मंत्रीगण, संसद में मेरे साथी श्री विनोद छाबड़ा, अन्‍य जन-प्रतिनिधिगण, वहां उपस्थित श्रद्धेया संतगण, कछीय लेवा पटेल एजुकेशन और मेडिकल ट्रस्‍ट के चेयरमैन गोपालभाई गोरछिया जी, अन्‍य सभी ट्रस्‍टी, समाज के प्रमुख साथी, देश और दुनिया से आस सभी दानी सज्‍जन महानुभाव, चिकित्‍सक गण और सभी सेवारत और कर्मचारीऔर कच्‍छ के मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनों।

आरोग्‍य से जुड़े इतने बड़े कार्यक्रम के लिए कच्‍छवासियों को बहुत-बहुत बधाई। गुजरात को भी बधाई। भूकंप से मची तबाही को पीछे छोड़कर भुज और कच्‍छ के लोग अब अपने परिश्रम से इस क्षेत्र का नया भाग्‍य लिख रहे हैं। आज इस क्षेत्र में अनेक आधुनिक मेडिकल सेवाएं मौजूद हैं। इसी कड़ी में भुज को आज एक आधुनिक सुपर स्‍पेशियलिटी अस्‍पताल मिल रहा है। ये कच्‍छ का पहला चैरिटेबल सुपर स्‍पेशियलिटी अस्‍पताल है। इस आधुनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा के लिए कच्‍छ को बहुत-बहुत बधाई। 200 बेड का ये सुपर स्‍पेशियलिटी अस्‍पताल कच्‍छ के लाखों लोगों को सस्‍ती और बेहतरीन इलाज की सुविधा देने वाला है। यह हमारे सैनिकों और अर्द्धसैनिक बलों के परिवारों और व्‍यापार जगत के अनेक लोगों के लिए भी उत्‍तम इलाज की गारंटी बनकर सामने आने वाला है।

साथियो,

बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं सिर्फ बीमारी के इलाज तक ही सीमित नहीं होतीं। ये सामाजिक न्‍याय को प्रोत्‍साहित करती हैं, प्रतिष्ठित करती हैं। जब किसी गरीब को सस्‍ता और उत्‍तम इलाज सुलभ होता है तो उसका व्‍यवस्‍था पर भरोसा मजबूत होता है। इलाज के खर्च की चिंता से गरीब को मुक्ति मिलती है तो वो निश्चिंत होकर गरीबी से बाहर निकलने के लिए परिश्रम करता है। बीते सालों में हेल्‍थ सेक्‍टर की जितनी भी योजनाएं लागू की गईं उनकी प्रेरणा यही सोच है। आयुष्‍मान भारत योजना और जन-औ‍षिधि योजना से हर साल गरीब और मिडिल क्‍लास परिवारों के लाखों करोड़ रुपए इलाज में खर्च होने से बच रहे हैं। हेल्‍थ एंड वैलनेस सेंटर्स, आयुष्‍मान भारत हेल्‍थ इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर योजना जैसे अभियान इलाज को सबके लिए सुलभ बनाने में मदद कर रहे हैं।

आयुष्‍मान भारत डिजिटल हेल्‍थ मिशन से मरीजों की सुविधाएं और बढ़ेंगी। आयुष्‍मान हेल्‍थ इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर मिशन के माध्‍यम से आधुनिक और क्रिटिकल हेल्‍थकेयर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को जिला और ब्‍लॉक लेवल तक पहुंचाया जा रहा है। देश में आज दर्जनों एम्‍स के साथ-साथ अनेकों सुपर स्‍पेशियलिटी अस्‍पतालों का निर्माण भी किया जा रहा है। देश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण का लक्ष्‍य हो या फिर मेडिकल एजुकेशन को सबकी पहुंच में रखने का प्रयास, इससे आने वाले दस सालों में देश को रिकॉर्ड संख्‍या में नए डॉक्‍टर मिलने वाले हैं।

और ईसका लाभ अपने कच्छ को ही मिलने वाला है. यहां गोपालभाई मुझे कह रह थे, मैने लाल किले से कहा कि, आजादी का अमृत महोत्सव में हर एक को कुछ न कुछ योगदान देना चाहिए और आज वो संकल्प पूरा हो रहा है| उसके लिए सच में यह कर्तव्य भावना, समाज के प्रति निष्ठा का भाव, समाज के प्रति सदभावना-संवेदना, वह अपनी सबसे बडीं पूंजी होती है और कच्छ की एक विशेषता है | आप कहीं पर भी जाओ, कहीं भी मिलो, कच्छी कहो, उसके बाद कोई नहीं पूछेगा कि आप कौन से गांव के है, कौन सी जाति के है कुछ भी नहीं | आप तुरंत उसके हो जाते हो| यही कच्छ की विशेषता है, और कच्छ के कर्तव्य के क रूप में पहचान बने ईस तरह आप कदम रख रहे हो, और इसलिए आप सब और यहां इतने ही नहीं, और जेसे भूपेन्द्रभाई ने कहा, प्रधानमंत्री का सबसे प्रिय जिला, वास्तव में किसी को भी जब हम मुसीबत के समय पसंद आये हो, तो वो रिश्ता इतना अटूट बन जाता है | और कच्छ में भूकंप से जो दर्दनाक स्थिति थी, एसी परिस्थिति में मेरा जो आपसे घनिष्ठ संबंध जुड गया, उसका परिणाम है | न तो मैं कच्छ को छोड सकता हुं, न हीं कच्छ मुझे छोड सकता है | और ऐसा सौभाग्य सार्वजनिक जीवन में बहुत कम लोगो को मिलता है, और मेरे लिए यह गर्व की बात है | गुजरात आज चारो दिशा में प्रगति कर रहा है |

गुजरात के विकास की बात मात्र गुजरात में नहीं बल्की देश में भी उसका संज्ञान लिया जाता है|आप विचार करो, दो दसक पहले गुजरात में मात्र 9 मेडिकल कॉलेज थी. दो दसक मात्र 9 मेडिकल कॉलेज, और मात्र गुजरात के युवाओं को डोक्टर बनना हो तो ग्यारह सौ सीट थी |आज एक एम्स है, और तीन दर्जन से ज्यादा मेडिकल कॉलेज है| और जब दो दसक पहले हजार बालकों को स्थान मिलता था, आज छ हजार बालकों को डॉक्टर बनाने की व्यवस्था है, और 2021 में 50 सीट के साथ राजकोट में ऐम्स की शुरूआत हो चुकी है | अहमदाबाद, राजकोट में मेडिकल कॉलेज का अपग्रेडेशन का काम चल रहा है| भावनगर के मेडिकल कॉलेज का अपग्रेडेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है | सिविल अस्पताल अहमदाबाद 1500 बेड वाला, और मेरी दृष्टि से ये एक बडा काम है | मातृ और शिशु, माता और बालकों उनके लिए सही अर्थ में एक उम्दा व्यवस्था वाली पूरी संरचना अपने यहां बनी है|कार्डियोलोजी हो, रिसर्च हो उसके लिए भी 800 बेड का अलग अस्पताल है जहाँ रिसर्च का भी काम होता है| गुजरात में कैंसर अनुसंधान का काम भी बडे पैमाने पर चल रहा है | इतना ही हमने पूरे देश में किडनी के पेशेंट और डायालिसिस की जरूरत का बडा संकट था | जहां डायालिसिस हफ्ते में दो बार करवाना होता है, महिनें में दो बार भी मौका न मिलता हो, उसके शरीर का क्या हो? आज जिले-जिले में मुफ्त में डायालिसिस की सेवा हमने शुरू की है | तो एक तरह से खूब बडे पैमाने पर काम चल रहा है |

पर मुझे आप सभी भाइयों - बहनों से एक बात करनी है | यह आजादी का अमृत महोत्सव है, हम कितने भी अस्पताल बनाए, कितने भी, लाखो नए बेड बना दे, पर उससे कभी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता | परंतु हम समाज के अंदर ऐसी जागृति लाए, हम सब अपने कर्तव्य का पालन करे, और ऐसा वातावरण और ऐसी स्थिति बनाए की हॉस्पिटल जाना ही ना पडे | इन सभी मुसीबतो का उपाय यह है की अस्पताल जाना ही ना पडे और आज खूब सुंदर अस्पताल का उद्दघाटन हो रहा है | पर मुझे जो शुभकामना देनी हो तो मैं क्या दू? मैं शुभकामना दु, की अपने के. के. पटेल चेरिटेबल ट्र्स्ट में इतने सारे करोडो रुपये लगाए, सुंदर अस्पताल बनाया पर भगवान करे किसी को भी अस्पताल आना ही ना पडे और होस्पिटल खाली ही रहे | हमे तो ऐसे ही दिन देखने है | और होस्पिटल खाली कब रह सकती है, जब हम स्वच्छता के उपर ध्यान देते हो | स्वच्छता के सामने जोरदार लोगों में आक्रोश हो, गंदगी का घर में बाहर कहीं भी नामोनिशान ना हो, गदंगी के लिए नफरत, यह जो वातावरण पैदा हो, तो बिमारी घुसने का रस्ता मिल सकता है, नहीं मिल सकता | उसी तरह पानी, शुद्ध पीने का पानी, अपने देश में स्वच्छता का अभियान चलाया, शौचालय बनाने का अभियान चलाया, खुले में शौच मुक्ति के लिए अभियान चलाया और समाज ने भी पूरे देश में सहयोग दिया | और सबको पता है यह कोरोना की लडाई में हम जीतने लगे क्योंकी मूलभूत शरीर मजबूत हो, तो लडाई जीती जा सकती है | इतना बडा तूफान आया फिर भी हम ल़ड रहे है क्योंकी अभी भी कोरोना गया नहीं, हमें भूल नहीं करनी है परंतु यह अन्य देखभाल और जल जीवन मिशन के द्वारा नल से जल पहुंचाने का काम पूरे देश में चल रहा है | जो शुद्ध पीने का पानी मिले, इसी तरह पोषण, उसमें भी जंकफूड खाते रहे, पोस्ट ओफिस में जैसे सब डालते है वैसे सब डाला करे, तो न शरीर को लाभ होगा और न हीं स्वास्थ्य को लाभ होगा और इसके लिए ये जो डॉक्टर बैठै हैं, वो मुस्कुरा रहे है मेरी बात सुनकर, कारण, आहार के अंदर अपने यहाँ शास्त्रों में भी कहा है, आहार के अंदर जितनी नियमितता हो, जितना संयम हो, वो खूब महत्व का होता है | और आचार्य विनोबा जी ने, जो लोगो ने पढा हो उन्होंने बहुत अच्छी बात कही है, आचार्य विनोबाजी ने कहा है कि, व्रत करना आसान है, आप आसानी से व्रत कर सकते हो परंतु संयमपूर्ण भोजन करना मुश्किल काम है| टेबल पर बैठे हो और चार चीजे आई तो मन तो हो ही जाता है |

अब आज बडी चिंता यह है कि वजन बढ रहा है| अब वहां बैठे ज्यादा वजन वाले लोग शरमाना मत, वजन बढ रहा है, डायबिटीस का रोग घर-घर पहुंच रहा है| यह ऐसी चीजे है और डायबिटीस खुद ऐसी बिमारी है, जो दुनियाभर की बिमारी को निमंत्रण देती है | अब हमें अपना वजन घटाने के लिए कोई के. के. अस्पताल की राह देखनी होती है, हमें डायबिटीस से बचना हो तो थोडा सुबह में चलने जाना, चलना-फिरना होगा की नहीं, जो हम ये सब करते है, फिर जो स्वास्थ्य के लिए मूलभूत चीजे है वो हमें अस्पताल जाने नहीं देगी | उसी तरह आंतरराष्ट्रीय योग दिवस द्वारा हम सारी दुनिया में योग के लिए अभियान चला रहे है | सारी दुनिया ने योग को स्वीकारा है | इस बार आपने देखा होगा, कोरोना में हमारा योग और हमारा आर्युवेद पर लगभग दुनियाभर की नजरें गई है | दुनिया के हर देश में कोइ ना कोइ चीज आप देखिये, अपनी हल्दी सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट हो गई है | कोरोना में क्यों जनता को पता चला की भारत की जो जडी बूटियां होती है, वो स्वास्थ्य के लिये लाभदायी है | लेकीन अपने ही उसे छोड दे तो और उसके लिए हम उस तरफ जा सके | मैं मेरे कच्छ के लोगो को कहना चाहता हुं कि इस बार जब जून महिने में आंतरराष्ट्रीय योग दिवस आये तो क्या कच्छ वर्ल्ड रेकोर्ड कर सकता है ? इतना जबरदस्त विशाल कच्छ के अंदर योग के कार्यक्रम हो सकते है ? कच्छ का कोई ऐसा गांव ना हो, अभी भी डेढ- दो महिने बाकी है | इतनी महेनत किजीये, इतनी महेनत कीजीये कि अच्छे से अच्छा योग का कार्यक्रम हम करे | आप देखियेगा कभी होस्पिटल जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी | और मेरी जो इच्छा है कि किसी को के. के. होस्पिटल में आना ही ना पडे| मेरी इच्छा आप पुरी कीजीये स्वस्थ रहके | हा एक्सिडेन्ट होके जाना पडे वो अपने हाथ मे नहीं होता लेकिन मेरा मत यह है की ये सब चीज हम आग्रह पूर्वक करे |

अब जब कच्छ के भाइयो को मिल रहा हूं तब अब तो मेरा हक बनता है, आपके पास कुछ ना कुछ मांगने का और आपको देना हीं पडेंगा | हक से कहता हूं अब देखिये, दुनिया के इतने सारे देश मैं अपने कच्छी भाइ रहते है | हमारा कच्छ का रणोत्सव देखने पूरे देश के लोग अपने आप आने लगे है | कच्छ की जाहो-जलाली बढा रहे है | कच्छ की आर्थिक व्यवस्था को बढा रहे है | इससे बडी बात ये है की, कच्छ की महेमान नावाजी की पुरे हिंदुस्तान मैं प्रशंसा हो रही है | भाइ, कच्छ यानी की कच्छ ये जनता कहने लगी है | अब मुजे बताइये की कच्छ रणोत्सव में इतनी सारी महेनत सरकार करे, कच्छ के लोग महेमान नवाजी करे, उसका इतना जय जयकार होता है | लेकिन विदेशी महेमान कच्छ के रण में न दिखाइ दे, वह कैसे चलेंगा | हम हेल्थ टूरिज्म में लोग आये इसके लिये होस्पिटल बनाते है लेकिन टुरिजम के लिये आये उसकी तो शरूआत कीजीये | मेरी ये कच्छ के भाइयो को विनंती है और खास करके हमारे लेउआ पटेल समाज के भाइ यहा बेठे है, वह हिंदुस्तान में भी फैले हुए है और विश्व में भी फैले हुए है | हर साल और में चाहता हूं, आप हिसाब रखियेगा और अपने गोपालभाइ तो हिसाब किताब वाले इंसान है| वह तो पक्का करेंगे मेरी आप सबको विनंती है की हर साल विदेश में बसते हर कच्छी परिवार कम से कम पांच विदेशी नागरिको को हमारा कच्छ का रण देखने के लिये यहाँ भेजे | आप मुझे बताइए कि हमारा कच्छ का रण कैसे भरा हुआ लगेगा और दुनियाभर में सही मायने में कच्छ की पहेचान बने ही बने ? ये कोइ बहुत बडा काम नहीं है | आपके लिये आपको वहा छींक आयेंगी तो भी आप भूज आ जाये एसे लोग है | विदेश में बिमार पडे तो कहते हैं कच्छ में भूज जाकर एक हफ्ता हवा पानी चेन्ज करके आ जाओ तो स्वस्थ्य हो जाओगें| यह हमारा कच्छ के लिये प्रेम है, और जब यह प्रेम हो तो हम कम से कम 5 विदेशी लोग, भारतीय नहीं, उनको कच्छ के रण में लाये और इस साल इस दिसंबर मास में उसे भेजाना है | दुसरा सरदार पटेल साहेब को इतनी बडी श्रद्धांजलि आजादी के इतने साल बाद | सरदार साहेब का इतना बडा स्मारक बना उसका आपको गर्व है की नहीं है | आप तो मेरी प्रशंसा करते रहो मुजे शाबाशी देते रहो की मोदी साहेब आपने तो बहुत अच्छा काम किया | गुजरात सरकार तो भी अभिनंदन देते रहो कि बहुत अच्छा किया इतने से बात ख़त्म नहीं होती |

भाइओ,मेरी इच्छा है की दुनियाभर में से जैसे कच्छ के रण मे 5 लोग आये वैसे ही वोह 5 लोग स्टेच्यु ओफ युनिटी भी देखने जाये | आप देखिएगा, गुजरात का टूरिज्म का बहुत विकास होगा और टूरिज्म ऐसा व्यापार है की गरीब लोगों को रोज़गार देता है | कम से कम पूंजी लागत से ज्यादा से ज्यादा मुनाफा मिलता है| आप देखिए कच्छ के रण मे आपने देख लिया की छोटी से छोटी चीज बनाकर बेचने से बारह महिने का काम दो महिने मे हो जाता है | टुरिस्ट आता है तो रिक्शा वाला कमाता है, टैक्सी वाला कमाता है और चाय बेचने वाला भी कमाता है| इसलिए मेरी आप सबसे यह विनती है की हमको कच्छ को टूरिज्म का बड़ा सेंटर बनाना है | और इसके लिये मेरी अपेक्षा है की विदेश मे रहते मेरे कच्छी भाइयों और बहनें इस बार तय करे की हर फॅमिली हर बार 5 लोगो को ठीक से समझाये और भारत भेजने के लिये आग्रह करे और उसको समझाये की कहा जाना है, कैसे जाना है, आपकी वहा कैसी महेमान नवाजी होती है, आइए चलिये | और मैं 100 प्रतिशत कहता हूँ की अब टूरिज्म के लिये भारत अब लोगों में आकर्षण पैदा हुआ है | यहाँ कोरोना से पहले बहुत ज्यादा टुरिस्ट आने लगे थे लेकिन कोरोना के कारण रोक लग गइ | फिर से शुरु हो गया है, और आप मेरी मदद करो तो चारो दिशा में अपना जयजय कार हो जायेगा| और मेरी इच्छा है की आप इसका काम कीजीये | दुसरा एक काम और, कच्छ के भाइयों के प्रति मेरी यह तो अपेक्षा है ही, अब देखीये हमारे मालधारीभाइ कच्छ में दो चार महिने रुकते हो और फिर छ आठ महिना उनके पशुधन लेकर रोड पर जाते है | मीलों तक चलते है, क्या यह हमारे कच्छ को शोभा देता है ? जिस जमाने मे कच्छ आपको छोडना पडा दुनियाभर में कच्छी को क्यों जाना पडा, जल की कमी की वजह से कच्छ में रहेना मुश्कील हो गया | बच्चे दुखी हो, वैसी परिस्थिति पैदा हुइ थी | इसिलिये दुनिया में जाके महेनत करके रोजी रोटी कमा के खुद का गुजारा किया | उसने किसी के सामने अपना हाथ नहीं फैलाया और वह अपने पैरो पर खडा भी हुआ| और जहां भी गये अपने समाज का भला किया | कोइ स्कूल चला रहा है, तो कोइ गौशाला चला रहा हे, जहा भी जाये कच्छीमांडु किसी ना किसी प्रकार का काम करता ही है | अब जब हम इतना सारा काम करते है तब मेरी आपसे विनती है | मेरी खासकर के मालधारीओ से विनती है की पहले के समय मे ठीक है की आप अपने पशुओ को लेकर निकल पडते थे, लेकिन अब कच्छ मे पानी आ गया है |

अब कच्छ में हरियाली भी आ गइ है| अब कच्छ मे जीरा की फसल होती है, सुन कर आनंद होता है कि कच्छ में जीरा की फसल होती है | कच्छ के आम विदेश मे जाते हैं कितना आनंद होता है | हमारे कच्छ ने तो कमलम की पहचान बनाइ है | अपनी खजुर क्या कुछ नहीं है अपने कच्छ में फिर भी मेरे मालधारी भाइओ को हिजरत करनी पडे वह नहीं चलेगा | अब वहा भी घास चारा भी वहां पे है | हम को वहां पे स्थायी होना पडेगा | अब तो वहां पे डेरी भी हो गइ है, और आपके लिये तो पांचो उंगलीया घी मे हो ऐसे दिन आ रहे है | इसीलीये अपने मालधारी भाइयो को मिले और समझाएँ की अब पशुओं को ले के हिजरत करना बंद करे और यहा पे रहे| आपको यहा पे कोइ तकलीफ नहीं है | आप रहे यहाँ और अपने बच्चो को पढाइये, क्योंकी हिजरत करने वाले लोगो के बच्चे पढते नहीं है| और इस बात की मुझे पीड़ा रहती है | इसमे मुझे आपकी मदद चाहिए और एक महत्व का काम आप करे वह मरी अपेक्षा है | हम आजादी के अमृत महोत्सव में 75 तालाब हर एक जिले में बनाने को कहा है| हमारे कच्छ में दो तीन साल मे तालाब भरे ऐसा पानी आता है | कइ बार तो पाँच सालों में भी नहीं आता | कई बार तो मैंने देखा है की बच्चा पैदा होता है वह चार साल का होता है, लेकिन उसने बारीश हीं नहीं देखी होती | ऐसे दिन हमारे कच्छ के लोगों ने देखे है | यह समय में मेरी आप सबको विनती है की 75 भव्य तालाब ऐतिहासिक तालाब कच्छ की अंदर हम बना सकते है| और इसके लिये हिंदुस्तान मे जो कच्छी फैले हुए है, मुंबइ में तो आप बहुत मात्रा में रहते है, केरल में रहेते है, आसाम में बहुत मात्रा मे आप रहते हैं | कही भी, आप कम नहीं है | हिंदुस्तान के आधे से भी ज्यादा जिले में कच्छीभाइ पहुंच चुके है | 75 तालाब, आप मानीए की छत्तीसगढ में कच्छी समाज है तो एक तालाब वह संभाले, मुंबइ में कच्छी समाज है तो 5 तालाब संभाले, और तालाब छोटा नहीं होना चाहीए| हमारे नीमाबेन के 50 ट्रक अंदर हो तो दिखाइ ना दे उतने गहरे होने चाहिए| आप देखीएगा पानी का संग्रह होगा भले दो साल बाद पानी आये तीन साल बाद पानी आये, दो इंच पानी आये फिर भी जब तालाब भर जायेगा कच्छ की बड़ी ताकात बन जायेंगा | और कच्छ के लिये मैंने जो किया, उससे ज्यादा कच्छ ने मेरी बात को मान के बहुत ज्यादा किया है | और जब आप ज्यादा काम करते हो तब आपको ज्यादा काम करने का मन होता है | आप कुछ करते ही ना तो नमस्ते कहके मैं निकल जाता, लेकिन आप करते हो तो कहने का मन होता है| और इसलिये मेरी आप सब से विनती है की हमारे कच्छ को कर्तव्यभाव वाला कच्छ उसकी उंचाइयो को नया आयाम बताये और टूरिज्म हो की जल संग्रह, दोनों मे विश्व में रहता | कच्छी हो या हिंदुस्तान के कोने कोने मे रहेता कच्छी हो| आईए हम सब मिलकर भुपेन्द्रभाइ के नेतृत्व मे गुजरात को जिस तेज गति से आगे बढाया है उसमे हम भी अपने कर्तव्य को निभाये |

वहीं अपेक्षा, सब को जय स्वामिनारायण मेरी बहुत बहुत शुभकामनाएँ | धन्यवाद |

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Text of PM’s remarks in the Lok Sabha
April 16, 2026

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज सुबह से चर्चा प्रारंभ हुई है। काफी साथी यहां से भी जिन मुद्दों को स्पर्श किया गया है, उसको तथ्यों से और तर्क से सदन को जरूर जानकारी देंगे। और इसलिए मैं उन विषयों में जाना नहीं चाहता।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय की समाज की मनोस्थिति और नेतृत्व की क्षमता, उस पाल को कैप्चर करके एक राष्ट्र की अमानत बना देती है, एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती है। मैं समझता हूं कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह वैसे ही पल हैं। आवश्यकता तो यह थी कि 25-30 साल पहले जब से यह विचार सामने आया, आवश्यकता महसूस हुई, हम इसको लागू कर देते और हम आज उसको काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते हैं। और आवश्यकता के अनुसार उसमें समय-समय पर सुधार भी होते और यही तो लोकतंत्र की ब्‍यूटी होती है। हमारी, हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी हैं। हमारी हजारों साल की लोकतंत्र की एक विकास यात्रा रही है, और उस विकास यात्रा में एक नया आयाम जोड़ने का एक शुभ अवसर सदन के हम सभी साथियों को मिला है। और मैंने प्रारंभ में कहा है कि हम सब भाग्यवान हैं कि हमें ऐसे महत्वपूर्ण और देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। यह हम लोगों के लिए सौभाग्य है और मैं चाहता हूं कि मेरे सभी माननीय सांसद, मैं इधर-उधर की आज बात नहीं करना चाहता हूं, हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने ना दें। हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने के लिए जा रहे हैं और मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति की भी, उसके रूप स्वरूप को तो तय करने ही करने वाला है, लेकिन यह देश की दिशा और दशा भी तय करने वाला है, इतने महत्वपूर्ण मोड़ पर हम खड़े हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्व में भी आज भारत की स्वीकृति हम सब महसूस कर रहे हैं और यह हम सबके लिए गौरव का पल है। एक समय हमारे पास आया है, और इस समय को हमने एक विकसित भारत के संकल्प के साथ जोड़ा है। और मैं पक्का मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब केवल उत्तम प्रकार के रेल, रास्ते, इंफ्रास्ट्रक्चर या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े, सिर्फ इतने से ही विकसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम लोग नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत, जिसके नीति निर्धारण में सबका साथ सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50% जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने, यह समय की मांग है। हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कोई भी होंगे, जिम्‍मेवार कोई भी होंगे, लेकिन इस सच्चाई को हमें स्वीकार करना होगा कि जब हम अकेले मिलते हैं, तब मानते हैं हां यार! लेकिन जब सामूहिक रूप से मिलते हैंं, मुझे याद है जब इसकी प्रक्रिया चली थी, सभी दलों से मिलना हुआ है, एक दल को छोड़कर के, जिन-जिन से मिलना हुआ है, हर एक ने सैद्धांतिक विरोध नहीं किया है। बाद में जाकर के जो कुछ भी हुआ होगा, राजनीतिक दिशा पकड़ी जा रही है। लेकिन जो राजनीतिक दिशा में ही सोचते हैं, मैं उनको भी एडवाइस करना चाहूंगा, एक मित्र के रूप में एडवाइस करता हूं और सबको काम आएगी। हमारे देश में जबसे वूमेन रिजर्वेशन को लेकर चर्चा हुई है और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, हर चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया है, जिस-जिस ने विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है। उनका हाल बुरे से बुरा किया है। लेकिन यह भी देखिए कि 24 का चुनाव में ऐसा नहीं हुआ। क्यों नहीं हुआ? यह इसलिए नहीं हुआ कि 24 में सबने सहमति से इसको पारित किया, तो यह विषय ही नहीं रहा। किसी के पक्ष में पॉलिटिकल फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान भी नहीं हुआ। सहज रूप से जो मुद्दे थे, उन मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ा, क्योंकि 24 में सब साथ में थे। कुछ लोग यहां हैं, कुछ लोग नहीं है, लेकिन सब साथ में थे। आज भी मैं कहता हूं, अगर हम सब साथ में जाते हैं, तो इतिहास गवाह है कि यह किसी एक के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा। यह देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा, देश के सामूहिक निर्णय शक्ति के पक्ष में जाएगा और हम सब उसके यश के हकदार होंगे। ना ट्रेजरी बैंक इसका हकदार रहेगा, ना मोदी उसका हकदार रहेगा, यहां बैठे हुए सब हकदार रहेंगे और इसलिए जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है, मैं चाहूंगा कि वह खुद के परिणामों को पिछले 30 साल में देख लें। फायदा उनका भी इसी में है, रास्ता दिखा रहा हूं कि इसी में फायदा है कि जो नुकसान हो रहा है, उससे बच जाओगे और इसलिए मैं समझता हूं कि इसमें राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मुझे याद है, तब तो मैं शासकीय व्यवस्था की राजनीति में नहीं था, मैं एक एक संगठन के कार्यकर्ता के नाते काम करता था। उस समय एक चर्चा सुनने को मिलती थी गलियारों में कि देखिए यह कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण देना है, तो बहुत आराम से दे देते हैं। लेकिन पंचायतों में आरक्षण देना है, तो आराम से देते हैं क्योंकि उसमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है। उसको लगता है, हम सुरक्षित है यार, वहां दे दो। यह उस समय गलियारों में बहुत चर्चा थी कि बोले यह कभी नहीं करेंगे यहां बैठे हुए, क्यों? क्योंकि उनका कुछ जाएगा और इसलिए और बाकी पंचायत का हो जाता है, 50% तक पहुंच गए।

मैं राजनीतिक दृष्टि से और भी एक बात समझाना चाहता हूं साथियों,

आज से 25 साल, 30 साल पहले जिसने भी विरोध किया, तो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना, पिछले 25-30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर के आई हुई बहनों में एक political consciousness है, वह ओपिनियन मेकर हैं ग्रास रूट लेवल पर, 30 साल पहले वह शांत रहती थी, बोलती नहीं थी, समझती थी, बोलती नहीं थी। आज वह वोकल है और इसलिए अब जो भी पक्ष-विपक्ष होगा, वो जो लाखों बहनें कभी ना कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं, प्रतिनिधित्व कर चुकी है, जनता के सुख-दुख की समस्याओं को गहराई से देखा है, वह आंदोलित है। वह कहती हैं कि झाड़ू-कचरा वाले काम में तो हमें जोर देते हो, वह तो परिवार में भी पहले होता था, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभा में और पार्लियामेंट में होती हैं। और इसलिए मैं राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, मैं किसी भी संसद की बात करता हूं, किसी भी एमलए की बात करता हूं, यह दल वो दल की बात मैं नहीं कर रहा हूं। जो भी राजनीतिक जीवन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उनको यह मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25-30 साल में लाखों बहनें ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33% का नहीं, वहां भी वह आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं और इसलिए जो आज विरोध करेंगे उसको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी, लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। और इसलिए राजनीतिक समझदारी भी इसी में है कि हम ग्रास रूट लेवल पर महिलाओं की जो पॉलिटिकल लीडरशिप खड़ी हुई है, उसको आपने अब कंसीडर करना पड़ेगा। यहां मैंने सुना, हमारे मुलायम सिंह जी थे तब से एक विषय चला रहे हैं, उनके परिवार वाले भी चला रहे हैं। आप देश की बहनों पर भरोसा करो ना, उनकी समझदारी पर भरोसा करो, एक बार 33% बहनों को यहां आने दो, आकर के उनको निर्णय करने दो, किसको देना है, किसको नहीं देना है, इस वर्ग को देना है, उस वर्ग को देना है, करेंगे वह निर्णय, हम उनके सामर्थ्य पर आशंका क्यों करते हैं भाई? एक बार आने तो दो! उनको आने तो दो! जब आएंगे, तो 34 में और धर्मेंद्र जी, धर्मेंद्र जी मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह बात सही है, मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। धर्मेंद्र जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं और अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, तो कभी-कभी मदद कर देते हैं। यह बात सही है कि मैं अति पिछडे समाज से आता हूं, लेकिन मेरा दायित्व समाज के सबको साथ लेकर के चलने का है और यही मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है। मेरे लिए, मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है और इसलिए और यह संविधान की ताकत है कि मेरे जैसा अत्यंत छोटे समाज का अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को इतना बड़ा दायित्व देश ने दिया है। और इसलिए मैं तो देशवासियों का ऋणी हूँ और मैं तो संविधान निर्माताओं का ऋणी हूँ कि जिसके कारण आज मैं यहां हूं।

लेकिन आदरणीय अध्यक्ष जी!

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज जीवन के हर एक क्षेत्र में हम देखें कि नारी शक्ति देश के गौरव को बढ़ाने वाले, परचम लहराने में कहीं पीछे नहीं हैं जी। हम गर्व कर सकें, इस प्रकार से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में आज हमारी माताएं-बहनें बहुत बड़ा योगदान, हमारी बेटियां तो कमाल कर रही हैं, जीवन के हर क्षेत्र में! इतना बड़ा सामर्थ्‍य, उसको हम हिस्सेदारी से रोकने के लिए क्यों इतनी ताकत खपा रहे हैं जी, उनके जुड़ने से सामर्थ्‍य बढ़ने वाला है और इसलिए मैं आज अपील करने आया हूं आपके पास कि इसको राजनीति के तराजू से मत तौलिये। यह राष्ट्रहित का निर्णय है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज का हमारा यह, हमारे सामने यह अवसर एक साथ बैठकर के, एक दिशा में सोच करके विकसित भारत बनाने में हमारी नारी शक्ति की भागीदारी को एक खुले मन से निर्णय करने का अवसर है, स्वीकार करने का अवसर है और मैंने जैसा पहले भी कहा कि आज पूरा देश और विशेष करके नारी शक्ति, हमारे निर्णय तो देखेंगी, लेकिन निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। और इसलिए हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से एक प्रकार से इस अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना, उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगे और इसलिए वह कभी राजनीतिक इशू भी नहीं बना, एक अच्छी स्थिति है। अब सवाल यह है कि हमें कितने समय तक इसको रोकना है, अब यहां जो लोग जनसंख्या वगैरा के विषय उठाते हैं, क्या आपको मालूम नहीं है, मैं चाहूंगा कि अमित भाई अपने भाषण में इन सारी चीजों को उल्‍लेख करेंगे, जब कि हमने जनगणना के संबंध में कब-कब क्या-क्या किया था, बाद में कोविड आया, उसके कारण क्या मुसीबत आई, कैसे रुकावटें आई। यह सारी बात हम सबके सामने हैं, इसमें कोई विषय नहीं है। लेकिन पिछले दिनों जब हम 23 में चर्चा कर रहे थे, तब भी व्यापक रूप से बात यह थी कि इसको जल्दी करो, हर कोई कह रहा था जल्दी करो। अब 24 में संभव नहीं था क्योंकि इतने कम समय में यह करना मुश्किल था। अब 29 में हमारे पास अवसर है, अगर हम उन 29 में भी नहीं करते, तो स्थिति क्या बनेगी, हम कल्पना कर सकते हैं, तो फिर हम देश की माताओं-बहनों को यह विश्वास नहीं बना पाएंगे कि हम सचमुच में यह प्रयास सच्चे अर्थ से कर सकते हैं। और इसलिए समय की मांग है कि अब हम ज्यादा विलंब ना करें, इस दरमियान राजनीतिक दल के लोगों से, संविधान के जानकार लोगों से, जो महिलाओं में एक्टिविस्ट के नाते काम करने वाले, ऐसे लोगों से भी कई चर्चाएं हुई, कुछ लोगों ने खुद होकर के भी सुझाव दिए। सारा मंथन करते-करते यहां भी सभी दलों से लगातार बातें करके होती रही हैं। स्ट्रक्चरल वे में भी हुई है, इनफॉर्मल वे में भी हुई है और उसमें से आखिर बनाए हुए यह कुछ रास्ता निकालना होगा, ताकि हम हमारी माताओं-बहनों की शक्ति को जोड़ सकते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा। यहां बैठ करके हमें किसी को संविधान ने देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। जो शपथ लेकर के हम बैठे हैं ना, हम सबको एक राष्ट्र के रूप में विचार करना हमारा दायित्व बनता है। चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, हम टुकड़ों में ना सोच सकते हैं, ना टुकड़ों में हम निर्णय कर सकते हैं। और इसलिए निराधार रूप में, जिसमें कोई सच्चाई नहीं, रत्ती भर सच्चाई नहीं, सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए जो बवंडर खड़ा किया जा रहा है, मैं आज बड़ी जिम्मेवारी के साथ इस सदन में इस पवित्र जगह से कहना चाहता हूं, क्या यह दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हो, बड़े राज्य हो, मैं आज यह जिम्मेवारी से कहना चाहता हूं कि यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी, भूतकाल में जो सरकारें रहीं और जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, तो उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात पर होगी। अगर गारंटी शब्द चाहिए, तो मैं गारंटी शब्द उपयोग करता हूं। वादा की बात करते हो, तो मैं वादा शब्द उपयोग करता हूं। अगर तमिल में कोई अच्छा शब्द हो, तो वो भी मैं बोलने के लिए तैयार हूं, क्योंकि जब नियत साफ है, तो फिर शब्दों का खेल करने की हमें जरूरत नहीं है जी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं आज सदन के सभी साथियों को यह भी कहना चाहता हूं कि साथियों, हम भ्रम में ना रहे, हम उस अहंकार में ना रहे हैं और मैं हम शब्द का उपयोग कर रहा हूं। मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं मैं, हम इस भ्रम में ना रहें कि हम देश की नारी शक्ति को हम कुछ दे रहे हैं, जी नहीं। उसका हक है; और हमने, हमने कई दशकों से उसको रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित करके हमें उस पाप में से मुक्ति पाने का यह अवसर है। हम सब जानते हैं, हर एक ने कैसे चालाकी की हर बार, चतुराई की, बिल्कुल हम तो इसके पक्ष में ही है, लेकिन; हम इसके साथ ही हैं, लेकिन; हर बार कोई ना कोई टेक्निकल पूंछ लगा दी इसको और इसको रोका गया है। हर बार ऐसे ही चीजें लाई गई हैं। हिम्मत नहीं हैं कि हम 33% महिलाओं के आरक्षण का विरोध कर पाए, वह तो जमाना चला गया, आपको करना नहीं है, लेकिन कहने की हिम्मत भी नहीं है। और इसलिए टेक्निकल बहानेबाजी, यह करो तो यह, वो करो तो वो, ढिकना करो तो, अब देश की नारी को यह नहीं समझा पाओगे, सदन में नंबर का खेल क्या होता है, वह तो समय तय करेगा, लेकिन यह पक्का है कि अब इन भांति-भांति के बहानेबाजी, भांति-भांति टेक्निकल मुद्दों के आधार पर चीजों को उलझा करके तीन दशक तक इसको अड़ंगे डालें हमने फंसा-फंसा कर रखा, आपने जो अचीव करना था, कर लिया, अब छोड़ दो ना भाई! तीन दशक कम पढ़ते हैं क्या रोकने में, तीन दशक तक आपने रोका, फिर भी कुछ कर नहीं पाए, तो अब तो करो।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं ना कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अरे भाई, इनको बोलने दीजिए, वहां पर बेचारे के मुंह पर ताला लगा हुआ है, वहां बंगाल में कोई बोलने नहीं देता उसको।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आदरणीय अध्यक्ष जी,

देखिए इसका अगर विरोध करेंगे, तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। लेकिन साथ चलेंगे, तो किसी को भी नहीं होगा, यह लिखकर रखो। किसी को नहीं होगा, क्योंकि फिर अलग पहलू हो जाता है, फिर किसी को फायदा नहीं होता। और इसलिए हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही यह पारित हो जाए, मैं कल advertisement दे करके सबका धन्यवाद करने के लिए तैयार हूं, सबकी फोटो छपवाने के लिए तैयार हूं, क्रेडिट आप ले लो चलो! क्रेडिट की चिंता है क्या जी? ले लो ना क्रेडिट, आपको जिसकी फोटो छपवानी है, सरकारी खर्चे से हम करवा देंगे। सामने से, सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूँ।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारी संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी यह सिर्फ आंकड़ों का खेल या एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार, इतना सीमित नहीं है। लोकतंत्र की जननी के रूप में, मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में यह निर्णय भारत का कमिटमेंट है, यह सांस्कृतिक कमिटमेंट है और इसी कमिटमेंट के कारण पंचायतों में यह व्यवस्था बनी और अब तो 20 से अधिक राज्‍यों में 50% हुआ है और हमने अनुभव किया है, मुझे लंबे अरसे तक, मुझे लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का जनता ने अवसर दिया और उसी कालखंड में ग्रासरूट लेवल पर वूमेन लीडरशिप को मैंने देखा है। मेरा अनुभव है कि संवेदनशीलता के साथ समस्याओं के समाधान में उनका कमिटमेंट बहुत ही परिणामकारी रहते थे, विकास की यात्रा को गति देने में रहते थे और उस अनुभव के आधार पर मैं कहता हूं कि इस सदन में उनकी आवाज नई शक्ति बनेगी, नई सोच जुड़ेगी, देश की दिशा में एक संवेदनशीलता जुड़ेगी, तथ्य और तर्क के आधारों पर अनुभव जब जुड़ता है, तब मैं समझता हूं उसका सामर्थ्य अनेक गुना बढ़ जाता है और सदन कितना समृद्ध होता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारे देश में अनुभवी नारी शक्ति की कोई कमी नहीं है, सामर्थ्यवान में कोई कमी नहीं है, हम भरोसा करें, वह कंट्रीब्यूट करेंगी, बहुत अच्छा कंट्रीब्यूट करेंगी और आज भी जितनी हमारी बहनें यहां हैं, जब भी उनको अवसर मिला है, उन्होंने बहुत अच्छे ढंग से अपनी बात बताई है, सदन को समृद्ध किया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज देश में वर्तमान में, देश में 650 से ज्यादा पंचायत हैं, डिस्ट्रिक्ट पंचायत, करीब पौने तीन सौ महिलाएं उसका नेतृत्व कर रही हैं और केंद्र के कैबिनेट मिनिस्टर से ज्यादा उनके पास जिम्मेदारी और धन और व्यवस्था होती है, काम करती हैं जी। करीब 6700 ब्लॉक पंचायतों में 2700 से अधिक ब्लॉक पंचायत ऐसी हैं, जिसका नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। आज देश में 900 से अधिक शहरों में अर्बन लोकल बॉडीज की हेड के रूप में मेयर्स हों या स्टैंडिंग कमेटी का काम देखने वाली बहनें हैं, उनकी ताकत है। और मैं मानता हूं कि आज देश जो प्रगति कर रहा है, उस प्रगति में इनका भी महत्वपूर्ण योगदान है, उस ऋण को हमें स्वीकार करने का यह अवसर है। और जब यह अनुभव सदन के साथ जड़ेगा, तब वह अनेक गुना ताकत बढ़ा देगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

एक लंबी प्रतीक्षा यानी एक प्रकार से हम सबके लिए यह सवालिया निशान पैदा हो, ऐसी परिस्थिति हम ही लोगों ने पैदा की है। यह अवसर है कि हम पुरानी जो कुछ भी मर्यादा रही होंगी, मुश्किलें रही होंगी, उससे बाहर निकले, हिम्मत के साथ हम आगे बढ़े और नारी शक्ति का राष्ट्र के विकास में उनकी सहभागिता को हम सुनिश्चित करें और मैं पक्का मानता हूं कि अगर आज हम मिलकर के निर्णय करते हैं और मैं तो आग्रह करूंगा कि हमें सर्व सहमति से इसको को आगे बढ़ना चाहिए और जब सर्वसम्मति से बढ़ता है, तो ट्रेजरी बैंक पर एक दबाव रहता है जी, उनको भी लगता है कि नहीं भाई सबको सबका इसमें हक है, हर एक की बात मान के चलो, कोई नुकसान नहीं है। सामूहिक शक्ति से तो अनेक परिणाम हमें अच्छे मिलते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं ज्यादा समय न लेते हुए इतना ही कहूंगा कि इसको राजनीति के तराजू से ना तोलें। हम जब भी कुछ निर्णय करने जा रहे हैं, तो देश के, इतने बड़े देश का आधा जिम्मा जो उठा रहे हैं, उनका भी कोई हक बनता है यहां आने का, हमें रोकना नहीं चाहिए। और दूसरा संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी एक मत पहले से बनता आया था, चर्चा थी कि साहब यह जो है, इनका कम मत करो, अधिक कर दो, तो जल्दी हो जाएगा। वह अधिक वाला विषय अब आया है कि चलो भाई पहले जो संख्या थी 33% और बढ़ा दो, ताकि किसी को ऐसा ना लगे कि मेरा हक चला गया। एक नई शक्ति जुड़ेगी, अतिरिक्त शक्ति जुड़ेगी और अब सदन के रचना भी तो अब, जो पहले से हमने सोच कर रखा है, जगह तो बना ली है।

और आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं लाइटर वे में जरूर कहना चाहूंगा, हर एक के अपने राजनीतिक कारण होते हैं और पराजय का डर जरा हैरान करने वाला होता है। लेकिन अपने यहां जब कोई भी शुभ काम होता है, उसको नजर ना लग जाए, इसलिए काला टीका लगाने की परंपरा है। मैं आपका धन्यवाद करता हूं काला टीका लगाने के लिए!

बहुत-बहुत धन्यवाद!