प्रधानमंत्री ने दुनिया के पहले सीएनजी टर्मिनल की आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री ने भावनगर में क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र का भी उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री ने सौनी योजना लिंक 2 के पैकेज 7, 25 मेगावाट पालिताना सौर पीवी परियोजना, एपीपीएल कंटेनर परियोजना सहित कई अन्य परियोजनाओं का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री ने सौनी योजना लिंक 2 के पैकेज 9, चोरवडला जोन जलापूर्ति परियोजना सहित अन्य परियोजनाओं की आधारशिला रखी
"300 वर्षों की अपनी इस यात्रा में भावनगर ने सतत विकास की, सौराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाई है"
"बीते 2 दशकों में गुजरात की कोस्टलाइन को भारत की समृद्धि का द्वार बनाने के लिए हमने ईमानदारी से प्रयास किया है"
"भावनगर पोर्ट से जुड़े विकास के एक शानदार उदाहरण के रूप में उभर रहा है"
"लोथल दुनिया का सबसे पुराना बंदरगाह है और लोथल समुद्री संग्रहालय के निर्माण से इस स्थान को एक नई पहचान मिलेगी"
"किसानों के सशक्तिकरण की तर्ज पर, मछुआरों को क्रेडिट कार्ड जारी किए गए"
"पीछे छूट गए लोगों की मदद करना डबल इंजन वाली सरकार की प्रतिबद्धता है"
"गरीबों के सपने और उनकी आकांक्षाएं मुझे निरंतर काम करने की ऊर्जा देती हैं"

भावनगर के सभी स्वजनों को नवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। सबसे पहले तो मुझे भावनगर से माफी मांगनी है, मैं भूतकाल में कभी भी इतने ज्यादा समय के बाद भावनगर आया हूँ, ऐसी यह पहली घटना है। बीच में आ नहीं सका, इसलिए क्षमा मांगता हूँ। और फिर भी आज आपने जो आशीर्वाद बरसाएं हैं, जो प्यार दिया है, यह मैं कभी भी नहीं भूलूंगा। दूर-दूर तक मेरी नजर जा रही है, इतनी बड़ी संख्या में और वह भी इतनी गर्मी में, आप सभी को शत-शत नमन करता हूँ।

आज मेरी भावनगर की मुलाकात विशेष है। एक तरफ देश जहां आज़ादी के 75 वर्ष पूरे कर चुका है, वहीं इस साल भावनगर अपनी स्थापना के 300 वर्ष पूरे करने जा रहा है। 300 वर्षों की अपनी इस यात्रा में भावनगर ने सतत विकास की, सौराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में अपनी एक पहचान बनाई है। इस विकास यात्रा को नए आयाम देने के लिए आज यहां करोड़ों रुपयों के अनेक प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। ये प्रोजेक्ट भावनगर की पहचान को सशक्त करेंगे, सौराष्ट्र के किसानों को सिंचाई की नई सौगात देंगे, आत्मनिर्भर भारत अभियान को और मज़बूती देंगे। रीजनल साइंस सेंटर के बनने से शिक्षा और संस्कृति के शहर के रूप में भावनगर की पहचान और समृद्ध होगी। इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए आप सभी को बहुत-बहुत बधाई।

भाइयों और बहनों,

जब भी मैं भावनगर आया हूं तो एक बात ज़रूर कहता रहा हूं। बीते ढाई-तीन दशकों में जो गूंज सूरत, वडोदरा और अहमदाबाद की रही है, अब वही गूंज राजकोट, जामनगर, भावनगर की होने वाली है। सौराष्ट्र की समृद्धि को लेकर मेरा विश्वास इसलिए प्रगाढ़ रहा है, क्योंकि यहां उद्योग, खेती, पर्यटन, इन तीनों के लिए ही अभूतपूर्व संभावनाएं हैं। आज का ये कार्यक्रम इसी दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ते डबल इंजन सरकार के प्रयासों का एक जीता जागता सबूत है। भावनगर समंदर के किनारे बसा जिला है। गुजरात के पास देश की सबसे लंबी कोस्टलाइन है। लेकिन आजादी के बाद कई दशकों में तटीय विकास पर उतना ध्यान ना दिए जाने की वजह से, ये विशाल कोस्टलाइन एक तरह से लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी। समंदर का खारा पानी,

यहां के लिए अभिशाप बना हुआ था। समंदर के किनारे बसे गांव के गांव खाली हो गए थे। लोग यहां-वहां पलायन करने लगे थे। कितने ही नौजवान सूरत जाते थे, वहां एक ही कमरे में 10-10, 15-15, 20-20 लोग जैसे-तैसे गुज़ारा करते थे। ये स्थिति बहुत दुखद थी।

साथियों,

बीते 2 दशकों में गुजरात की कोस्टलाइन को भारत की समृद्धि का द्वार बनाने के लिए हमने ईमानदारी से प्रयास किया है। रोजगार के अनेक नए अवसर खड़े किये हैं। गुजरात में हमने अनेकों पोर्ट्स विकसित किए, बहुत से पोर्ट्स का आधुनिकीकरण कराया, गुजरात में आज तीन बड़े LNG टर्मिनल हैं, पेट्रोकेमिकल हब्स हैं और देश में गुजरता पहला राज्य था, जहां पहला LNG टर्मिनल बना था। राज्य के तटीय इलाकों में हमने सैकड़ों कोस्टल इंडस्ट्रीज डेवलप की, छोटे-बड़े अनेक उद्योग विकसित किए। उद्योगों की ऊर्जा की मांग को पूरा करने के लिए हमने कोल-टर्मिनल्स का नेटवर्क भी तैयार किया है। आज गुजरात के तटीय इलाकों में अनेक पॉवर प्लांट्स जो केवल गुजरात ही नहीं पूरे देश को ऊर्जा देते हैं। हमारे मछुवारे भाई-बहनों की मदद के लिए हमने फिशिंग हार्बर्स बनवाए, फिश लेंडिंग सेंटर्स और फिश प्रोसेसिंग को भी बढ़ावा दिया। फिशिंग हार्बर का जो मजबूत नेटवर्क हमने तैयार किया है, उसका भी निरंतर विस्तार किया जा रहा है, उसका आधुनिकीकरण किया जा रहा है। गुजरात के तटीय क्षेत्र में मैंग्रूव के जंगलों का विकास करके हमने कोस्टल इकोसिस्टम को और सुरक्षित बनाया है, और मजबूत बनाया है, और उस समय भारत सरकार में जो मंत्री हुआ करते थे। उन्होंने एक बार कहा था। कि हिन्दुस्तान के तटीय राज्यों को गुजरात से मैंग्रूव का विकास कैसे हो सकता है, ये सीखना चाहिए। ये काम आप सबके सहयोग से गुजरात में हुआ है।

हमने Aquaculture को भी निरंतर बढ़ावा दिया। गुजरात देश के उन अग्रणी राज्यों में है, जहां Sea-Weed की खेती को लेकर बड़े प्रयास हुए हैं। आज गुजरात की कोस्ट लाइन, देश के आयात-निर्यात में बहुत बड़ी भूमिका निभाने के साथ ही लाखों लोगों को रोजगार का माध्यम भी बनी है। आज गुजरात की कोस्टलाइन, री-न्यूएबल एनर्जी और हाइड्रोजन इकोसिस्टम उसका पर्याय बनकर उभर रही है। हमने सौराष्ट्र को भी ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने का प्रयास किया है। गुजरात और देश की ऊर्जा उसकी जो जरूरतें हैं। उसके लिए जो कुछ भी चाहिए, आज ये क्षेत्र उसका बड़ा हब बन रहा है। अब तो सौर ऊर्जा के भी अनेक प्रोजेक्ट इस क्षेत्र में लग रहे हैं। पालिताना में आज जिस सोलर पावर प्रोजेक्ट का उद्घाटन हुआ है, उससे क्षेत्र के अनेक परिवारों को सस्ती और पर्याप्त बिजली मिल पाएगी। एक समय था, जो आज 20-22 साल के होंगे ना उनको तो इन बातों को पता भी नहीं होगा, यही हमारे गुजरात में एक समय था, जब शाम को खाना खाने के समय अगर बिजली आ गई तो खुशी का दिन होता था। और मुझे याद है, मैं मुख्यमंत्री बना पहले ही दिन से लोग कहते थे कि कम से कम शाम को खाना खाते समय बिजली मिले ऐसा तो करो। वो सारे दुख वाले दिन चले गए दोस्तों।

आज यहां पर्याप्त बिजली के कारण बिजनेस के नए अवसर यहां बन रहे हैं, उद्योग-धंधे फल-फूल रहे हैं। धोलेरा में री-न्यूएबल एनर्जी, स्पेस और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को लेकर जो निवेश होने जा रहा है, उसका लाभ भी भावनगर को मिलने वाला है। क्योंकि एक प्रकार से वो भावनगर का पड़ोसी इलाका डेवलप हो रहा है और वो दिन दूर नहीं होगा अहमदाबाद से धोलेरा, भावनगर ये पूरा क्षेत्र विकास की नई–नई ऊंचाईयों को प्राप्त करने वाला है।

भाइयों और बहनों,

भावनगर आज Port-led Development के एक अहम सेंटर के रूप में विकसित हो रहा है। इस पोर्ट की देशभर के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों के साथ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। मालगाड़ियों के लिए अलग से जो ट्रैक बिछाया जा रहा है, उससे भी ये पोर्ट जुड़ेगा और दूसरे हाईवे, रेलवे नेटवर्क से भी बेहतर कनेक्टिविटी होगी। पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान ये कनेक्टिविटी की परियोजनाओं को और नया बल देने वाली है। यानि भावनगर का ये पोर्ट आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाएगा और रोज़गार के सैकड़ों नए अवसर यहां बनेंगे। यहां भंडारण, ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े व्यापार-कारोबार का विस्तार होने वाला है। ये बंदरगाह गाड़ियों की स्क्रैपिंग, कंटेनर उत्पादन और धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स की भी ज़रूरतों को पूरा करेगा। इससे यहां नए रोज़गार बनेंगे, स्वरोजगार की संभावनाएं बनेंगी।

साथियों,

अलंग को दुनिया के बड़े शिप ब्रेकिंग यार्ड में से एक के लिए जाना जाता है। शायद ही कोई ऐसा हो, जिसको अलंग का पता ना हो। केंद्र सरकार ने जो नई व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी यानि पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने के लिए जो नीति बनाई। वो जब लागू होगी, मैं साथियों दावे से कहता हूं। पूरे हिन्दुस्तान में ये व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी का सबसे पहले और सबसे ज्यादा लाभ किसी को मिलने वाला है, तो आप लोगों को मिलने वाला है। इसका कारण है, अलंग के पास तो स्क्रैपिंग से जुड़ी विशेषज्ञता है। बड़े-बड़े जहाजों को कैसे स्क्रैप किया जाता है, उसकी उनको जानकारी है। ऐसे में जहाजों के साथ-साथ दूसरे छोटे वाहनों की स्क्रैपिंग का भी देश का ये बड़ा सेंटर बन सकता है। भावनगर के मेरे होनहार उद्यमियों को मुझे ये याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि वो विदेशों से भी ये छोटी-छोटी गाड़ियां लाकर, उन्हें यहां स्क्रैप करने का काम भी शुरू कर देंगे।

साथियों,

यहां जहाज़ों को तोड़कर जो लोहा निकलता है, अभी तक कंस्ट्रक्शन सेक्टर में उसका बड़ा उपयोग होता है। हाल ही में हमने देखा है कि कंटेनरों के लिए किसी एक ही देश पर अति-निर्भरता से कितना बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। भावनगर के लिए ये भी एक नया अवसर है और बड़ा अवसर है। एक तरफ वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ रही है और दूसरी तरफ दुनिया भी कंटेनर्स के मामले में भरोसेमंद सप्लायर की तलाश में है। पूरी दुनिया को लाखों कंटेनर की जरूरत है। भावनगर में बनने वाले कंटेनर, आत्मनिर्भर भारत को भी ऊर्जा देंगे और यहां रोज़गार के अनेक अवसर भी बनाएंगे।

साथियों,

जब मन में लोगों की सेवा का भाव हो, परिवर्तन लाने की इच्छाशक्ति हो, तो बड़े से बड़े लक्ष्य को पाना संभव होता है। सूरत से भावनगर आने-जाने वाली गाड़ियों की क्या स्थिति होती थी, ये आप लोग अच्छी तरह जानते हैं। घंटों का सफर, सड़क हादसे, पेट्रोल-डीजल का खर्चा, कितनी सारी मुश्किलें थीं। अब जीवन पर संकट भी कम हुआ है, किराए-भाड़े का पैसा और समय भी बच रहा है। तमाम अड़चनों के बावजूद हमने घोघा-दहेज फ़ेरी शुरू करके दिखाई, इस सपने को पूरा किया। घोघा-हज़ीरा रो-रो फेरी सर्विस से सौराष्ट्र और सूरत की दूरी लगभग 400 किलोमीटर से घटकर के 100 किलोमीटर से भी कम हो गई है। बहुत ही कम समय में इस सेवा से लगभग 3 लाख यात्री सफर कर चुके हैं। 80 हज़ार से अधिक गाड़ियों को यहां से वहां पहुंचाया गया है और इसी साल अब तक 40 लाख लीटर से अधिक पेट्रोल-डीज़ल की बचत हुई है, मतलब उतने पैसे आप लोगों की जेब में बचे हैं। आज से तो इस रूट पर बड़े जहाजों के लिए भी रास्ता साफ हुआ है।

साथियों,

आप समझ सकते हैं ये कितनी बड़ी सेवा इस क्षेत्र के सामान्य जनों, किसानों और व्यापारियों की हुई है। लेकिन इतना सब कुछ बिना किसी शोर-शराबे के, बड़े-बड़े विज्ञापन के पीछे पैसे बर्बाद किए बिना ये सारे काम हो रहे हैं, साथियों। क्योंकि हमारी प्रेरणा और लक्ष्य कभी भी सत्ता सुख नहीं रहा है। हम तो हमेशा सत्ता को सेवा का माध्यम मानते हैं। ये हमारा सेवा का यज्ञ चल रहा है। इसी सेवाभाव के कारण ही इतना प्यार, इतना आशीर्वाद निरंतर बढ़ता ही चला जा रहा है, बढ़ता ही चला जा रहा है।

साथियों,

हमारे प्रयासों से इस क्षेत्र में सिर्फ आना-जाना, ट्रांसपोर्टेशन ही नहीं, इतनी ही सुविधा हुई है ऐसा नहीं है, लेकिन टूरिज्म को भी बढ़ावा मिला है। अपनी समुद्री विरासत को सहेजकर उसको पर्यटन की ताकत बनाने पर गुजरात के तटीय क्षेत्रों में अभूतपूर्व काम हो रहा है। लोथल में बनने वाला मेरीटाइम म्यूज़ियम, शायद आपमें से बहुत कम लोगों को मालूम होगा। लोथल में दुनिया में नाम कमा सके, ऐसा मेरीटाइम म्यूज़ियम बन रहा है। जैसे Statue of Unity उसने एक पहचान बनाई है। ये लोथल का मेरीटाइम म्यूज़ियम भी बनाएगा। क्योंकि हमारे लिए गर्व की बात है। दुनिया का सबसे पुराना बंदरगाह लोथल ये हमारी गुजरात की धरती पर है, ये हमारे भावनगर के किनारे पर है। लोथल हमारी विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जिसको पूरी दुनिया के पर्यटन नक्शे पर लाने के लिए बहुत परिश्रम किया जा रहा है। लोथल के साथ वेलावदर नेशनल पार्क में इको टूरिज्म से जुड़े सर्किट का लाभ भी भावनगर को होने वाला है, विशेष रूप से छोटे–छोटे जो बिजनेसमेन हैं, छोटे-छोटे कारोबारी हैं, व्यापारी हैं, उनको विशेष होने वाला है।

भाइयों और बहनों,

सौराष्ट्र में किसानों और मछुआरों, दोनों के जीवन में पिछले 2 दशकों में बहुत बड़ा बदलाव आया है। एक समय था, जब जानकारी के अभाव में अक्सर मछुआरों का जीवन खतरे में पड़ जाता था। जब मैं यहां मुख्यमंत्री था, तब मछुआरों को एक लाल रंग की बास्केट दी गई थी, जिसमें अलग अलग बटन लगे थे। दुर्घटना की स्थिति में बटन दबाने पर कोस्ट गार्ड के ऑफिस में सीधा अलर्ट पहुंच जाता था। जिससे तुरंत सहायता पहुंचाना संभव हो पाता था। इसी भावना का 2014 के बाद पूरे देश के लिए हमने विस्तार किया है। मछुआरों की नावों को आधुनिक बनाने के लिए सब्सिडी दी, किसानों की तरह ही मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए।

साथियों,

आज मुझे बहुत संतोष होता है, जब सौनी योजना से हो रहे बदलाव को मैं देखता हूं। मुझे याद है मैंने जब सौनी योना की बात कही थी तो हमारे सौराष्ट्र में मैंने राजकोट में आकर के इसकी शुरूआत की थी। सारे मीडिया वालों ने लिखा था कि देखो चुनाव आया, इसलिए मोदी जी ने घोषणा कर दी है। चुनाव जाएगा, भूल जाएंगे। लेकिन मैंने सबको गलत सिद्ध कर दिया। आज सौनी योजना नर्मदा मैया को लेकर के उसे जहां-जहां पहुंचाने का संकल्प किया था, तेज गति से पहुंच रही है भाइयों। हम वचन के पक्के लोग हैं, हम समाज के लिए जीने वाले लोग हैं।

साथियों,

इस सौनी परियोजना के इसके एक हिस्से का लोकार्पण आज होता है और दूसरे हिस्से पर काम शुरु होता है। हम काम रूकने नहीं देते। आज भी जिस हिस्से का लोकार्पण हुआ है, उससे भावनगर और अमरेली जिले के अनेक डैम तक पानी पहुंच रहा है। इससे भावनगर के गारीयाधार, जेसर और महुवा तालुका और अमरेली जिले के राजुला और खांभा तालुका अनेक गांवों के किसानों को लाभ होने वाला है। भावनगर, गिर सोमनाथ, अमरेली, बोटाद, जूनागढ़, राजकोट, पोरबंदर इन जिलों के सैकड़ों गांवों और दर्जनों शहरों तक पानी पहुंचाने के लिए भी आज काम नए सिरे से जोड़ा गया है।

भाइयों और बहनों,

अभाव को दूर करना और जो विकास में पीछे छूट गया, उसका हाथ पकड़कर आगे ले जाना, ये डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता है। गरीब से गरीब को जब साधन मिलते हैं, जब सरकार उनको संसाधन देती है तो वो अपनी तकदीर बदलने में जुट जाता है। वो दिन रात मेहनत करता है और गरीबी से लड़ाई लड़कर गरीबी को परास्त करता है। गुजरात में हम अक्सर गरीब कल्याण मेले का आयोजन करते थे। ऐसे ही एक कार्यक्रम के दौरान यहां भावनगर में एक बहन को मैंने तीन पहियें वाली साइकिल दी थी। दिव्यांग बहन थी, तो उसने मुझे क्या कहा। आप देखिए, मिजाज देखिए भावनगर के लोगों का, गुजरातियों का स्प्रिट देखिए, मुझे बराबर याद है। उस बहन ने कहा कि मुझे तो साइकिल चलाना आता नहीं है। मुझे तो इलेक्ट्रिकल ट्राइसिकल दीजिए। ये मिजाज है मेरे गुजरात का, ये मिजाज है मेरे भावनगर का और ये जो विश्वास था, उस बहन के मन में जो भरोसा था, वो भरोसा मेरी सबसे बड़ी पूंजी है भाइयों। गरीबों के यही सपने, यही आकांक्षाएं मुझे निरंतर काम करने की ऊर्जा देते हैं। आपके आशीर्वाद से ये ऊर्जा बनी रहे, और निरंतर आपका प्यार बढ़ता चला जा रहा है। और मैं आज ये जरूर कहुंगा कि मुझे आने में कुछ साल लग गए, मैं देर से आया, लेकिन खाली हाथ नहीं आया हूं। पिछले सालों का जो बकाया था, वो भी लेकर के आ गया हूं। और वैसे भी भावनगर का मेरे ऊपर अधिकार है भाई, आप भावनगर आओ और नरसीबापा का गांठीया, दास के पेड़े और जब गांठीया याद करूं, तब मुझे मेरे हरिसिंह दादा याद आते हैं। कई सालों पहले मैं छोटे कार्यकर्ता के रुप में तब तो मैं राजनीति में भी नहीं था। मुझे गांठीया खाना खाना किसी ने सिखाया है, तो हरिसिंह दादा ने सिखाया। जब अहमदाबाद आए, तब गांठीया लेकर आए, वह हमारी चिंता करते थे। आज जब भावनगर आया हूँ, तब अभी नवरात्रि का व्रत चल रहा है, तो अभी सब किसी काम का नहीं है। फिर भी भावनगर का गांठीया देश और दुनिया में प्रसिद्ध है, यह छोटी-मोटी बात नहीं है दोस्तों। यह भावनगर की ताकत है। साथियों आज विकास के अनेक प्रकल्प लेकर मैं आया हूँ। अनेक परियोजना लेकर आया हूँ। यह भावनगर की युवा पीढ़ी के भविष्य को निश्चित करने वाली योजनाएं हैं। भावनगर के भविष्य को चार चांद लगाने वाली योजनाएं हैं। कोई कल्पना नहीं कर सकेगा, तेज गति से भावनगर का विकास हो, इसके लिए यह योजनाएं हैं। और उसका लाभ समग्र सौराष्ट्र को मिलेगा, सारे गुजरात को मिलेगा और देश को भी उसके फल चखने को मिलेगा। भाइयों-बहनों आपने जो प्यार बरसाया है, जो आशीर्वाद बरसाया है। इतनी विराट संख्या में आप आए हैं, मैं अंतःकरणपूर्वक आपका आभारी हूँ। मेरे साथ दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए,

भारत माता की-जय,

भारत माता की-जय,

भारत माता की-जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

डिस्क्लेमर: प्रधानमंत्री के भाषण का कुछ अंश गुजराती भाषा में भी है, जिसका भावानुवाद यहाँ किया गया है।

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21वीं सदी के इस दशक में भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है: ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी
February 13, 2026
Amid numerous disruptions, this decade has been one of unprecedented development for India, marked by strong delivery and by efforts that have strengthened our democracy: PM
In this decade of the 21st century, India is riding the Reform Express: PM
We have made the Budget not only outlay-focused but also outcome-centric: PM
Over the past decade, we have regarded technology and innovation as the core drivers of growth: PM
Today, we are entering into trade deals with the world because today's India is confident and ready to compete globally: PM

आप सभी का इस ग्लोबल बिजनेस समिट में, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं। हम यहां A Decade Of Disruption, A Century Of Change, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। विनीत जी का भाषण सुनने के बाद मुझे लगता है कि मेरा काम बहुत सरल हो गया है। लेकिन एक छोटी request करूं, इतना सारा आपको पता है, तो कभी ET में तो दिखना चाहिए।

साथियों,

21वीं सदी का बीता दशक अभूतपूर्व डिसरप्शन का रहा है। ग्लोबल Pandemic, ग्लोब के अलग-अलग हिस्सों में तनाव, युद्ध और ग्लोब के संतुलन को हिला देने वाले Supply Chain Breakdowns, दुनिया ने एक दशक के भीतर काफी कुछ देख लिया। लेकिन साथियों, कहते हैं, संकट के समय ही किसी देश के सामर्थ्य पता चलता है और मुझे बहुत गर्व है, अनेक Disruptions के बीच भी भारत के लिए यह दशक, अभूतपूर्व डेवलपमेंट का रहा है, शानदार डिलीवरी का रहा है और डेमोक्रेसी को मजबूत करने वाला रहा है। जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तो भारत ग्यारहवें नंबर की अर्थव्यवस्था था। इतनी उथल-पुथल में पूरी आशंका थी कि भारत और नीचे चला जाएगा, लेकिन आज भारत, बहुत तेजी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। और आप जिस Century Of Change की बात कर रहे हैं, उसका बहुत बड़ा आधार और यह मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, इसका बहुत बड़ा आधार भारत ही होने जा रहा है। आज भारत, दुनिया की ग्रोथ में 16 परसेंट से ज्यादा योगदान दे रहा है। और मुझे विश्वास है, इस सेंचुरी के हर आने वाले साल में हमारा योगदान और भी बढ़ता रहेगा, निरंतर बढ़ता रहेगा। मैं वह मदान की तरह astrologer के रूप में नहीं आया हूं। भारत, दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव करेगा, दुनिया की ग्रोथ का नया इंजन बनेगा।

साथियों,

दुनिया में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था बनी थी, एक नए वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। लेकिन सात दशक के बाद, वो व्यवस्था टूट रही है। दुनिया आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है। आखिर यह क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि तब जो व्यवस्था बनी थी, उसकी नींव One Size Fits All, इसी सोच पर टिकी थी। तब ये माना गया कि World Economy Core में होगी, Supply Chains मजबूत और विश्वसनीय हो जाएगी। इस व्यवस्था में नेशन्स को केवल कंट्रीब्यूटर्स के रूप में ही देखा गया। लेकिन आज, इस मॉडल को चुनौती मिल रही है। यह अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। आज हर देश को यह पता चल रहा है कि उसे अपनी रज़ीलियन्स खुद बनानी होगी।

साथियों,

आज दुनिया जिसकी चर्चा कर रही है। उसको भारत ने 2015 में, आज से 10 साल से पहले, 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। दस साल पहले जब नीति आयोग बना, तो उसके फाउंडिंग डॉक्यूमेंट में ही भारत ने अपना विजन क्लीयर कर दिया था और विजन यह कि भारत किसी दूसरे देश से कोई सिंगल डेवलपमेंट मॉडल इंपोर्ट नहीं करेगा। हम भारत के विकास के लिए भारतीय अप्रोच को लेकर ही चलेंगे। इस नीति ने भारत को अपने हिसाब से, अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से, अपने हित में फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया और यह एक बड़ा कारण है कि डिसरप्शन के दशक में भी भारत की इकोनॉमी कमजोर नहीं पड़ी, निरंतर मजबूत होती गई।

साथियों,

आज 21वीं सदी के इस दशक में भारत Reform Express पर सवार है और इस Reform Express की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम इसे compulsion में नहीं, बल्कि conviction के साथ, Reform के कमिटमेंट के साथ गति दे रहे हैं। यहां तो बहुत बड़ी-बड़ी संख्या में बड़े-बड़े expert बैठे हैं, अर्थजगत के दिग्गज बैठे हैं। आपने भी 2014 से पहले का दौर देखा है। जब तक हालात मजबूर न कर दें, जब तक कोई संकट न आ जाए, जब कोई और रास्ता न बचे, तब मजबूरन रिफॉर्म्स किए जाते थे। आप याद करिए, 1991 का रिफॉर्म्स भी तब हुआ, जब देश पर दिवालिया होने का खतरा आ गया था। जब देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था। पहले की सरकारों का यही तरीका था, वो reforms compulsion में ही किया करती थीं। जब 26/11 का आतंकी हमला हुआ, कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई, तो NIA का गठन किया गया। जब पावर सेक्टर बर्बाद हो गया, ग्रिड फेल होने लगे, तब मजबूरी में कांग्रेस को पावर सेक्टर में याद आई।

साथियों,

ऐसी एक लंबी सूची है, जो याद दिलाती है कि जब compulsion में, मजबूरी में reform होता है, तो न सही नतीजे मिलते हैं, न देश को सही परिणाम मिलते हैं।

साथियों,

आज मुझे गर्व है कि बीते 11 वर्षों में हमने पूरे conviction के साथ रिफॉर्म किए हैं और यह रिफॉर्म Policy में हुए हैं, Process में हुए, Delivery में हुए और इतना ही नहीं, Mindset में भी reform हुआ है। क्योंकि साथियों, अगर पॉलिसी बदले, लेकिन प्रोसेस वही रहे, माइंडसेट वही रहे, डिलीवरी ठीक से ना हो, तो रिफॉर्म्स सिर्फ और सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाता है। इसलिए हमने पूरे सिस्टम को बदलने के लिए ईमानदारी से कोशिश की है।

साथियों,

मैं प्रोसेस की बात करूं, तो एक साधारण लेकिन बहुत जरूरी प्रोसेस है, कैबिनेट नोट्स का। यहां कई लोगों को अंदाजा होगा कि पहले की सरकारों में एक कैबिनेट नोट बनने में ही कुछ महीने लग जाते थे, महीने। अब इस स्पीड से देश का विकास कैसे होता? इसलिए हमने इस process को बदला। हमने डिसीजन मेकिंग को time-bound और technology-driven बनाया। हमने यह तय कर दिया कि इस अफसर की टेबल पर यह कैबिनेट नोट इतने घंटे से ज्यादा रहेगा ही नहीं। या तो रिजेक्ट करो या निर्णय लो और इसका नतीजा आज देश देख रहा है।

साथियों,

मैं आपको रेलवे ओवर ब्रिज के अप्रूवल का भी उदाहरण दूंगा। पहले R.O.B का एक डिजाइन अप्रूव कराने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, कई सारी क्लीयरेंस की ज़रूरत थीं, कई जगह चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं और यह मैं प्राइवेट के लिए नहीं कह रहा हूं, सरकार को। हमने इसको भी बदला और आज देखिए कितनी तेजी से रोड और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। विनीत जी ने बहुत विस्तार से इस बात को बताया।

साथियों,

एक बड़ा Interesting उदाहरण बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का है। अब बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की security से जुड़ा हुआ होता है। आप कल्पना कर सकते हैं, एक समय था, जब बॉर्डर एरियाज़ में एक साधारण सी सड़क बनाने के लिए भी कुछ परमिशन दिल्ली से लेनी पड़ती थी। जिला स्तर पर निर्णय लेने के यानी इसके सामने एक प्रकार से उसका कोई अधिकारी ही नहीं थे, दीवार ही दीवार थीं, वो निर्णय नहीं कर सकता था और इसलिए तो दशकों बाद भी हमारे देश में बॉर्डर इंफ्रा इतना बेहाल रहा। 2014 के बाद हमने इस प्रोसेस में भी रिफॉर्म किया, हमने स्थानीय प्रशासन को Empower किया और आज हम देश के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से डेवलप होते देख रहे हैं।

साथियों,

बीते दशक में भारत के जिस Reform ने दुनिया में हलचल मचा दी है, वो है UPI, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम। यह सिर्फ एक App नहीं है, यह policy, process और delivery के एक शानदार कन्वर्जेंस का प्रमाण है। जो लोग कभी बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े बेनिफिट्स के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, UPI देश के ऐसे नागरिकों को सर्व कर रहा है। यह जो डिजिटल इंडिया है, डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जनधन आधार मोबाइल की ट्रिनिटी है, यह रिफॉर्म किसी compulsion से नहीं हुआ, यह हमारा कन्विक्शन था। और कन्विक्शन यह था कि जिन लोगों तक पहले की सरकारें कभी नहीं पहुंची, हमें ऐसे नागरिकों का इंक्लूजन करना है। जिसे कोई नहीं पूछता, उसे मोदी पूजता है। और इसलिए यह रिफॉर्म्स किए गए हैं और आज भी हमारी सरकार इसी सोच के साथ चल रही है।

साथियों,

भारत का यह जो नया मिज़ाज है, वो हमारे बजट में भी रिफ्लेक्ट होता है। पहले जब बजट की चर्चा होती थी, तो फोकस सिर्फ Outlay पर होता था। कितना पैसा आवंटित हुआ, क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और उस दिन टीवी देखेंगे, तो पूरी टीवी एक ही यानी इनके लिए, बजट मतलब इंकम टैक्‍स ऊपर गया कि नीचे गया, इसके आगे उनको देश दिखता ही नहीं है। और होता क्‍या था, कितनी नई ट्रेनें घोषित हुईं, यही चलता रहता था, उन घोषणाओं का बाद में क्या हुआ, कोई पूछने वाला ही नहीं था। और इसलिए हमने बजट को Outlay के साथ-साथ Outcome सेंट्रिक बनाया।

साथियों,

बजट में एक और बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले Off-Budget Borrowing पर बहुत अधिक चर्चा होती थी। लेकिन अब Off-Budget Reforms की चर्चा होती है। बजट से बाहर, नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म्स हुए, प्लानिंग कमीशन की जगह नीति आयोग बनाया, आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया।

साथियों,

बजट में घोषित हों, या बजट से बाहर, रिफॉर्म एक्सप्रेस लगातार गति पकड़ रही है। अगर मैं पिछले एक साल की ही बात करूं तो हमने Ports & Maritime सेक्टर में Reform किया, शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के लिए अनेक Initiative लिए, जन-विश्वास एक्ट के तहत रिफॉर्म्स को और आगे बढ़ाया, Energy Security के लिए Shanti Act बनाया, लेबर कानूनों से जुड़े रिफॉर्म्स को लागू किया, भारतीय न्याय संहिता लेकर आए, वक्फ कानून में Reform किया गया है, गांव में रोजगार के लिए नया G RAM G कानून बनाया, ऐसे अनेक Reforms साल भर होते रहे हैं।

साथियों,

इस साल के बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और आगे बढ़ाया है। वैसे तो बजट के बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन मैं दो Important फैक्टर्स की बात करूंगा। Capex और Technology, बीते वर्षों की भांति इस बजट में भी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। और आप जानते हैं कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर effect कितना बड़ा होता है। इससे देश की कैपेसिटी और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। अनेकों सेक्टर्स में बहुत बड़ी संख्या में जॉब क्रिएशन भी होती है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन्स का निर्माण और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ऐसे बजट अनाउंसमेंट्स, सही मायने में युवाओं पर, देश के फ्यूचर पर, यह इन्वेस्टमेंट हैं।

साथियों,

बीते दशक में हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रोथ का कोर ड्राइवर माना है। इसी सोच के साथ, देश में स्टार्टअप कल्चर, हैकाथॉन कल्चर, उसको हमने प्रमोट किया। आज देश में, दो लाख से अधिक स्टार्टअप, रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और यह डायवर्स सेक्टर्स में काम कर रहे हैं। हमने युवाओं को प्रोत्साहित किया, देश में रिस्क टेकिंग कल्चर को पुरस्कृत करने का भाव जगाया और परिणाम हमारे सामने है। इस साल का बजट, हमारी इसी प्राथमिकता को और मजबूत करता है। विशेष तौर पर बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे सेक्टर के लिए, इस बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

साथियों,

आज जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ी है, तो हम राज्यों को भी उतना ही ज्यादा सशक्त कर रहे हैं। मैं एक और आंकड़ा आपको देना चाहता हूं। 2004 से 2014, 10 साल, इस दरमियान राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तौर पर 18 लाख करोड़ रुपए के आसपास ही मिले थे, 2004 से 2014 तक। जबकि 2014 से लेकर 2025 तक, राज्यों को 84 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। अगर मैं इस साल बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ का आंकड़ा और जोड़ दूं, तो हमारी सरकार में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के करीब-करीब 100 लाख करोड़ रुपए मिलने तय हुए हैं। यह राशि केंद्र सरकार की तरफ से अलग-अलग राज्य सरकारों को मिली है, ताकि वो अपने यहां विकास के कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

साथियों,

आजकल आप लोग भारत के FTA’s यानि फ्री ट्रेड डील्स पर काफी चर्चा कर रहे हैं और मैं यहां enter हुआ, वहीं से शुरू हो गए लोग। दुनियाभर में इसका एनालिसिस हो रहा है। लेकिन मैं आज इसका एक और इंटरेस्टिंग एंगल आपको बताता हूं, मीडिया को जो चाहिए, वो तो इसमें नहीं होगा शायद, लेकिन हो सकता है कि कुछ काम में आ जाए। और मैं पक्का मानता हूं, जो बात मैं कहने जा रहा हूं, आपने भी इसके बारे में विचार नहीं किया होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आज इतने सारे विकसित देशों के साथ फ्री-फ्री ट्रेड डील्स हो रहे हैं, क्या यही काम 2014 से पहले क्यों नहीं हो पाए? देश वही, युवा शक्ति वही, सरकारी सिस्टम वही, तो बदला क्या? बदलाव, सरकार के विजन में आया है, नीति और नीयत में बदलाव आया है, भारत के सामर्थ्य में बदलाव आया है।

साथियों,

आप ज़रा सोचिए, फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी जब थी, तब कौन हमारे साथ डील करता? गांव में भी गरीब की बेटी को कोई रईस के परिवार वाला शादी करता है क्या? वो उसको छोटा मानता है, हमारा भी यही हाल था भाई दुनिया में। जब देश पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा था, चारों तरफ घोटाले और घपले थे, तब कौन भारत पर भरोसा कर पाता? 2014 से पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बेस बहुत कमजोर था और जिसके कारण, पहले की सरकारें भी डरती थी, एक तो कोई आता नहीं था और जरा सा भी कोई कोशिश करें, तो यह लोग भी डरते थे और डर यह था कि अगर विकसित देशों के साथ डील हो गई, तो वो हमारे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, वो यहां अपने प्रोडक्ट डंप करने लगेंगे, हताशा-निराशा के उस माहौल में 2014 से पहले यूपीए सरकार सिर्फ चार देशों के साथ ही कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट कर पाई थी। जबकि, बीते दशक में भारत ने जो ट्रेड डील्स की हैं, उनमें दुनिया के 38 कंट्री कवर होते हैं, 38 कंट्री। और यह दुनिया के अलग-अलग रीजन्स में हैं। आज हम इसलिए दुनिया के साथ ट्रेड डील्स कर रहे हैं क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज का भारत, दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए तैयार है। बीते 11 वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम देश में विकसित किया है। इसलिए, आज भारत समर्थ है, सशक्त है और इसलिए दुनिया भी हम पर भरोसा करती है। यही बदलाव हमारी Trade Policy में आए Paradigm Shift का आधार बने और यही Paradigm Shift विकसित भारत की हमारी यात्रा का अनिवार्य स्तंभ बना है।

साथियों,

आज हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ देश के हर नागरिक को विकास में सहभागी बनाते हुए कार्य कर रही है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया, हम उसके विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले की सरकारों ने दिव्यांग जनों के लिए सिर्फ घोषणाएं कीं, हम भी उसी रास्ते को जारी रख सकते थे, लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। आप में से शायद जो बातें मैं बता रहा हूं, आप जिस लेवल के लोग हैं, शायद उसमें फिट नहीं बैठती होगी। हमारे दिव्यांग जनों के लिए जैसे हमारे यहां Language में बिखराव है ना, Sign Language का भी वही हाल था जी। तमिलनाडु में जाओ तो एक Sign Language, उत्तर प्रदेश में जाओ तो दूसरी, गुजरात में जाओ तो तीसरी, असम में जाओ तो चौथी, अगर यहां का दिव्‍यांग असम गया, तो बेचारा समझ ही नहीं पाता था। अब यह कोई बड़ा काम तो नहीं था। अगर संवेदनशील सरकार होती है ना, तो उसको यह काम छोटा नहीं लगता है। और देश ने पहली बार Indian Sign Language को institutionalise किया, common किया, व्यवस्था बनाई है। ऐसे ही, देश की Transgender community कब से अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी। हमने उनके लिए भी कानून बनाकर उन्हें सम्मान से जीने का कवच दिया है। बीते दशक में ही देश की करोड़ों बहनों को तीन-तलाक की कुरीति से मुक्ति मिली, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का हुआ।

साथियों,

आज सरकारी मशीनरी की सोच भी बदली है, उसमें संवेदनशीलता आई है। सोच का अंतर क्या होता है, यह हम जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज देने वाली स्कीम में भी देखते हैं। विपक्ष के कुछ लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं और कुछ अखबारों में जरा छपता भी ज्यादा है। कोई मजाक उड़ाता है कि जब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल ही गए हैं, तो उनको मुफ्त राशन क्यों मिलता है? अजीबोगरीब सवाल है। अगर आप बीमार हैं, अस्पताल में गए और अस्पताल से आपको छुट्टी मिली, तो भी डॉक्टर कहता है कि सात दिन तक यह-यह संभालना, पंद्रह दिन तक यह-यह संभालना, कहता है कि नहीं कहता है? गरीबी से बाहर निकले हैं, लेकिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि निकले हैं, तो फिर अनाज क्यों देते हो? ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग, यह नहीं सोचते कि सिर्फ गरीबी से बाहर निकालना काफी नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति नियो मिडिल क्लास में आया है, वो फिर गरीबी के चंगुल में न फंस जाए, यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है। इसलिए उसे आज अनाज मुफ्त की सुविधा मिल रही है, यह आवश्यक है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, इससे गरीब और नियो मिडिल क्लास को बहुत बड़ा संबल मिला है।

साथियों,

सोच का एक और फर्क हम अपने आसपास भी देखते हैं। कुछ लोग हैं, जो कहते हैं कि ये मोदी 2047 की बात क्यों करता है? 2047 में विकसित भारत बनेगा, नहीं बनेगा, किसने देखा? हम रहें या ना रहें, उससे हमारा लेना देना क्या है? अब देखिए, यह सोच है और यह बड़े-बड़े लोगों की सोच है, यह कोई मैं अपने शब्द नहीं बता रहा हूं।

साथियों,

जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, लाठियां खाईं, कालापानी की सज़ाएं पड़ी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए, अगर वो भी यही सोचते कि आजादी पता नहीं कब मिले, हम क्यों आज आजादी के लिए लाठी खाएं, तो सोचिए, क्या उस सोच के साथ देश कभी आजाद हो पाता क्या? जब राष्ट्र प्रथम का भाव हो, जब देश हित सर्वोपरि हो, तो हर निर्णय देश के लिए होता है, हर नीति देश के लिए बनती है। हमारी सोच स्पष्ट है, विजन साफ है, हमें देश को विकसित बनाने के लिए निरंतर काम करना है। 2047 तक हम रहें न रहें, लेकिन यह देश रहेगा, इस देश की संतानें रहेंगी। इसलिए हमें और इसलिए हमें अपना आज खपाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित रहे, उज्ज्वल रहे। मैं आज अपनी आज बो रहा हूं क्योंकि कल की पीढ़ी को फल खाने को मौका मिले।

साथियों,

दुनिया को अब डिसरप्शन के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा। समय के साथ इनके नेचर में बदलाव आएगा, लेकिन यह तय है कि अब व्यवस्थाएं बहुत तेजी से बदलेंगी। AI से जो Disruption हो रहे हैं, वो तो आप देख ही रहे हैं। आने वाले समय में AI और भी क्रांतिकारी बदलाव लेकर आने वाली है, भारत इसके लिए भी तैयार है। कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। दुनिया के अनेक देश, दुनियाभर के टेक लीडर्स, इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। सभी के साथ मिलकर, हम एक बेहतर विश्व बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इसी भरोसे के साथ, एक बार फिर इस Summit के लिए आप सभी को बहुत सारी मेरी शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

वंदे मातरम!