प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए 45,000 से अधिक आवासों का प्रधानमंत्री ने शिलान्यास करते हुए उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया
प्रधानमंत्री ने तरंगा हिल-अंबाजी-आबू रोड नई ब्रॉड गेज लाइन की आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री ने प्रसाद योजना के तहत अंबाजी मंदिर में तीर्थ सुविधाओं के विकास की आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री ने वेस्टर्न फ्रेट डेडिकेटेड कॉरिडोर के 62 किलोमीटर लंबे न्यू पालनपुर-न्यू महेसाणा खण्ड और 13 किलोमीटर लंबे न्यू पालनपुर-न्यू चटोदर खण्ड को समर्पित किया
"माँ अम्बा के आशीर्वाद से हमें अपने सभी संकल्पों को सिद्ध करने की शक्ति मिलेगी"
"हम अपने देश भारत को एक माँ के रूप में देखते हैं, और खुद को माँ भारती की संतान मानते हैं"
"सरकार देश में 80 करोड़ से अधिक लोगों के लिए निःशुल्क राशन योजना का विस्तार करने पर लगभग 4 लाख करोड़ रूपए खर्च कर रही है"
"पीएमजीकेएवाई का विस्तार किया गया ताकि त्योहारों के मौसम में बहनों और माताओं को रसोई चलाने में कोई कठिनाई न हो"
यह हमारा सौभाग्य है कि आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में हम इस रेलवे लाइन को अम्बा माता के चरणों में समर्पित कर रहे हैं"

“बोल मारी माँ, बोल मारी माँ!”

जय मां अंबे!

आज मां के पांचवें स्वरूप, स्कंदमाता की पूजा का दिन है। इस शुभ अवसर पर आज मां अंबे के दर्शन और पूजन करने का सौभाग्य मिल रहा है। अंबाजी में माता के दर्शन करने के लिए एक प्रकार से मैं कहूं तो मां की गोद में ही हमारी जिंदगी बीती है, आप सबकी भी बीती है और हम हमेशा अनुभव करते हैं, जब भी यहां आते हैं एक नई ऊर्जा, नई प्रेरणा लेकर के जाते हैं, नया विश्वास लेकर के जाते हैं। इस बार ऐसे समय में यहां आया हूं, जब विकसित भारत का विराट संकल्प देश ने लिया है। 130 करोड़ देशवासियों ने लिया है कि 25 साल के अंदर-अंदर हम हिन्‍दुस्‍तान को विकसित राष्ट्र बना के रहेंगे। मां अंबा के आशीर्वाद से हमें हमारे सभी संकल्पों की सिद्धि के लिए शक्ति मिलेगी, ताकत मिलेगी। इस पावन अवसर पर मुझे बनासकांठा के साथ-साथ गुजरात के अनेक जिलों को हजारों करोड़ रुपए की योजनाओं का उपहार देने का अवसर भी मिला है। आज जिन 45 हज़ार से अधिक घरों का लोकार्पण और करीब लोकार्पण और शिलान्यास मिला दें तो 61 हजार, उन सभी लाभार्थियों को भी मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। उन बहनों को विशेष शुभकामनाएं, जिन्हें आज अपना घर मिला है। इस बार आप सभी की दिवाली नए घर में मनेगी, अपने खुद के घर में मनेगी। हमें आनंद होगा कि नहीं होगा, खुद के घर में दिवाली मनाने की बात की जाए, जिसने जिदंगी झोपड़ी में बिताई हो, तब वह खुद के पक्के घर में दिवाली मनाए, तब यह उसके जिदंगी की बड़ी से बड़ी दिवाली होगी कि नहीं होगी।

भाइयों और बहनों,

जब हम नारी सम्मान की बात करते हैं, तो हमारे लिए ये बहुत सहज सी बात लगती है। लेकिन जब हम गंभीरता से इस पर विचार करते हैं, तो पाते हैं कि हमारे संस्कारों में नारी सम्मान कितना रचा-बसा है। दुनियाभर में जो शक्तिशाली लोग होते हैं, जहां शक्ति की चर्चा होती है उनके साथ उनके पिता का नाम जुड़ता है। आपने सुना होगा कि वो फलाना भाई का लड़का बहादुर है, ऐसा कहते हैं कि नहीं। भारत में हमारे यहां वीर पुरुषों के साथ मां का नाम जोड़ा गया है। मैं उदाहरण देता हूं, आप भी सोचिए, अब देखिए, अर्जुन, महान वीर पुरुष थे, लेकिन कभी हमने ये नहीं सुनते हैं कि पांडु पुत्र अर्जुन, ऐसा नहीं बोलते लोग, लोग क्‍या कहते हैं हम जब भी सुनते हैं तो उनका नाम पार्थ सुना, ये पार्थ क्या है, जो पृथा यानि कुंति के पुत्र हैं। अर्जुन का जब वर्णन आता है तो कौन्तेय के पुत्र कुंतिपुत्र के नाम से भी जाना गया है। इसी प्रकार से भगवान श्री कृष्ण, सर्वशक्तिमान उनका भी जब परिचय दिया जाता है तो देवकीनंदन कहते हैं। देवकी का पुत्र कृष्ण, इस प्रकार से कहते हैं। हनुमान जी की बात आती है तो हनुमान जी को भी, हनुमान जी से बड़ा कोई वीर तो हमने कभी सुना नहीं है, लेकिन उनकी भी बात आती है तो कहते हैं अंजनी पुत्र हनुमान यानि मां के नाम के साथ वीरों के नाम हमारे देश में, ये मां के नाम के महात्म्य को, नारी के महात्म्य को, स्त्री शक्ति का महात्म्य हमें हमारी संस्कार की पूंजी के साथ हमें मिला हुआ है। इतना ही नहीं, ये हमारे संस्कार ही हैं, कि हम अपने देश भारत को भी मां के रूप में देखते हैं, खुद को मां भारती की संतान मानते हैं।

साथियों,

ऐसी महान संस्कृति से जुड़े होने के बावजूद हमारे देश में ये भी हमने देखा, कि घर की संपत्ति पर, घर के आर्थिक फैसलों पर, ज्यादातर हक पिता का या बेटे का रहा। हम सबको पता है घर हो तो पुरुष के नाम, गाड़ी हो तो पुरुष के नाम पर, दुकान हो तो पुरुष के नाम पर, खेत हो तो पुरुष के नाम पर। महिला के नाम पर कुछ नहीं होता, और पति जो गुजर जाये तो सब कुछ पुत्र के नाम पर हो जाता है। हमने निर्णय लिया है कि प्रधानमंत्री आवास जो हम देंगे, दीनदयाल आवास जो हम देंगे उसमें माता का भी नाम होगा। इसलिए 2014 के बाद हमने फैसला लिया कि गरीबों को सरकार जो पक्के घर बनाकर दे रही है, वो मां के नाम होगा या फिर मां और उसके पति के नाम पर होगा, मां या उसके बेटे के संयुक्त नाम पर होगा। अभी तक देश में गरीबों को 3 करोड़ से अधिक घर बनाकर हमने गरीबों को दिए हैं। ये जो खुशी आप जिन लोगों के चेहरों पर देख रहे थे न इस देश के 3 करोड़ लोगों को घर मिला है और ऐसी ही खुशी उनके चेहरे पर आज नजर आ रही है और जिनमें से अधिकतर घरों की मालकिन माताएं बहनें हैं। अपना घर होने की वजह से, अब जो ये घर मिला है न, इस घर की जो कीमत हैं तो उससे ये सभी बहनें लखपति हो गई हैं, आप सभी को पीछे बराबर सुनाई दे रहा है न। मैं गुजरात सरकार को बधाई दूंगा कि वो हर गरीब को पक्का घर देने के अभियान को तेज़ी से पूरा करने में जुटी है। मैं भूपेंद्र भाई को धन्यवाद करता हूं। पिछले वर्ष ही डेढ़ लाख घर गुजरात में पूरे हो चुके हैं। त्योहारों के इस मौसम में गरीब परिवारों की बहनों को अपनी रसोई चलाने में समस्या ना हो, इसलिए सरकार ने मुफ्त राशन की योजना भी आने वाले तीन महीने के लिए और बढ़ा दी है। मुश्किल समय में देश के 80 करोड़ से अधिक साथियों को राहत देने वाली इस स्कीम पर केंद्र सरकार करीब-करीब 4 लाख करोड़ रुपए खर्च कर रही है। बीते 2 दशकों से माताओं-बहनों के सशक्तिकरण के लिए काम करने का बहुत बड़ा सौभाग्य मुझे मिला है। बनासकांठा तो इसका एक बहुत बड़ा साक्षी रहा है। मुझे बहुत कष्ट होता था कि जहां माता अंबाजी और माता नळेश्वरी विराजमान हैं, वहां बेटियों की पढ़ाई को लेकर भी हम पीछे क्यों हैं? इसलिए मैंने जब मां नर्मदा से बनासकांठा के खेत-खलिहान को लहलहाने का प्रण लिया था, तब आपसे मैंने मां सरस्वती को भी घर में स्थान देने का आग्रह किया था। मुझे याद है कि मैं बहनों से बार-बार कहता था कि बेटियां नहीं पढ़ेंगी, तो माँ सरस्वती घर में नहीं आएँगी। जहाँ सरस्वती न हो, वहाँ लक्ष्मीजी कभी पाँव तक नहीं रखती हैं। मुझे खुशी है कि बनासकांठा की बहनों ने, आदिवासी परिवारों ने मेरे आग्रह को स्वीकार किया। आज मां नर्मदा का नीर यहां की तकदीर बदल रहा है, तो बेटियां भी बड़े शौक से स्कूल-कॉलेज जा रही हैं। कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई में भी बनासकांठा ने बहुत सहयोग दिया है। प्रसूति के दौरान माताओं को सुखड़ी (रेसिपी) वितरण का कार्यक्रम हो या फिर दूध दान करने का अभियान, बनासकांठा ने सफलता के साथ इसे आगे बढ़ाया है।

भाइयों और बहनों,

मातृसेवा का जो संकल्प हमने यहां लिया, 2014 के बाद इसके लिए पूरे देश में काम चल रहा है। माताओं-बहनों-बेटियों के जीवन की हर पीड़ा, हर असुविधा, हर अड़चन को दूर करने के लिए, उन्हें भारत की विकास यात्रा का सारथी बनाया जा रहा है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर देश की सेना में बेटियों की संपूर्ण भागीदारी तक, बेटियों के लिए अवसरों के दरवाजे खोले जा रहे हैं। टॉयलेट्स हों, गैस कनेक्शन हों, हर घर जल हो, जनधन खाते हों, मुद्रा योजना के तहत मिल रहे बिना गारंटी के ऋण हों, केंद्र सरकार की हर बड़ी योजना के केंद्र में देश की मातृशक्ति है, नारी शक्ति है।

साथियों,

जब मां सुखी होती है, तो परिवार सुखी होता है, जब परिवार सुखी होता है, तो समाज सुखी होता है, और समाज सुखी होता है तो देश सुखी होता है मेरे भाइयों। यही सही विकास है, इसी विकास के लिए हम निरंतर काम कर रहे हैं। आप मुझे बताइए, यहां मंदिर के सामने जो इतना जाम लगता था, इससे मुक्ति मिलनी चाहिए थी कि नहीं मिलनी चाहिए थी? वहां शांति का वातावरण चाहिए था कि नहीं चाहिए था? मार्बल लेकर जो ये बड़े-बड़े ट्रक मंदिर के सामने से गुजरते हैं, इनके लिए अलग रास्ता होना चाहिए था कि नहीं चाहिए था? आज नई रेल लाइन और बाईपास के रूप में हम सभी की ये कामना पूरी कर रहे हैं।

भाइयों और बहनों,

आज मैं आपको एक हैरानी की बात भी बताऊंगा। आप सबको ये जानकर बड़ा आश्चर्य होगा कि आज जिस तारंगा हिल-अंबाजी-आबु रोड, मेहसाना ये जो रेल लाइन का शिलान्यास हुआ है न, देश जब गुलाम था, अंग्रेज जब राज करते थे, अंग्रेजों के ज़माने में ये रेल लाइन बनाने का फैसला अंग्रेजों ने 1930 में किया था, यानि करीब-करीब सौ साल पहले, फाइलें पड़ी हैं। इसकी परिकल्पना अंग्रेजों के जमाने में हुई थी। यानि इस क्षेत्र में रेल लाइन की कितनी अहमियत थी, रेल लाइन की जरूरत कितनी थी, ये सौ साल पहले पहचान लिया गया था। लेकिन साथियों, शायद ये काम भी परमात्मा ने, मां अंबा ने मुझे ही करने के लिए कहा होगा। दुर्भाग्य से आजादी के बाद ये काम नहीं हुआ। आज़ादी के इतने दशकों तक ये फाइल सड़ती रहीं। जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था तो इसके पीछे लगा हुआ था, इसका प्रस्ताव रखा था। लेकिन तब हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई, सरकार कुछ और थी। ये हमारा सौभाग्य है कि आज जब देश आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है, तब हमारी डबल इंजन की सरकार को इसे माता के चरणों में समर्पित करने का अवसर मिला है। इस रेल लाइन से और बायपास से जाम और दूसरी समस्याओं से तो मुक्ति मिलेगी ही, साथ ही मार्बल उद्योग को भी बल मिलेगा। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में है, जो आज चालू हो गया है। डेडिकेटेट फ्रेट कॉरिडोर से यहां का मार्बल, और ये हमारे किसान तो यहां आलू की खेती करने में मशगूल हो गए अब, सब्जियों की खेती कर रहे हैं, टमाटर की खेती कर रहे हैं और दूध में भी पीछे नहीं हैं। इन सारी चीज़ों के लिए बहुत आसानी से रास्ता मिल जाएगा, आसानी से इन्हें पहुंचाना सरल हो जाएगा। किसानों को विशेष लाभ इसलिए भी होगा क्योंकि आने वाले समय में विशेष किसान रेल भी यहां से चल सकती है।

भाइयों और बहनों,

सबसे बड़ा लाभ यहां के पर्यटन उद्योगों को होने वाला है। यहां तो अंबाजी मां स्वयं विराजमान हैं और जब मैं मुख्‍यमंत्री था तो हमने यहां 51 शक्तिपीठों का भी निर्माण किया है। मां अंबा स्वयं 51 शक्तिपीठों में से एक हैं और हमने दुनिया भर में जहां-जहां मां अंबा का स्थान है उसकी replica यहां बनाई है यानि एक प्रकार से ये 51 तीर्थ क्षेत्रों की यात्रा अंबा जी में आने से हो जाती है। लेकिन मैंने देखा है, अभी भी लोग इतनी तेजी से आते हैं कि मां अंबा के दर्शन किये, फिर भाग जाते हैं। मैं ऐसी स्थिति पैदा करना चाहता हूं कि जो अंबा जी आएगा उसको दो-तीन दिन यहां रहना पड़े, इतनी सारी चीजें मुझे खड़ी कर देनी है ताकि यहां पूरी रोजी-रोटी बढ़ जाए। देखिए पास में गब्बर, अब हम गब्‍बर को बदल रहे हैं, आपको नजर आता होगा। किसी ने सोचा होगा क्‍या? आज गब्बर तीर्थ क्षेत्र के विकास के लिए मैं गुजरात की सरकार की बहुत प्रशंसा करता हूं। अब अजीतनाथ जैन मंदिर, तारांगा हिल, उसके दर्शन भी आसान हो जाएंगे जैसे पालीतला का महत्व बढ़ गया है, वैसे तारांगा हिल का भी महत्‍व बढ़ेगा। ये आप लिखकर करके रखिए। ट्रेन चलेगी तो ज्यादा तीर्थ यात्री यहां आएंगे, होटल-गेस्ट हाउस, दुकान-ढाबे वालों की यानि उनकी आय बढ़ेगी। छोटे-छोटे दुकानदारों को काम मिलेगा। युवाओं के लिए गाइड से लेकर टैक्सी सेवाओं तक नए मौके मिलेंगे। और धरोई डैम से लेकर के अंबा जी तक पूरा बेल्ट मुझे विकसित करना है। जैसे आप statue of unity पर जाकर के देखते हैं वैसा ही मैं यहां करना चाहता हूं। पूरा एक क्षेत्र धरोई डैम में वॉटर स्पोर्ट्स को लेकर संभावनाएं हैं, अब उन्हें भी और विस्तार मिलेगा।

भाइयों और बहनों,

एक तरफ आस्था और उद्योगों का ये गलियारा है और दूसरी तरफ हमारा बॉर्डर है, जहां हमारे वीर जवान राष्ट्र रक्षा में तैनात रहते हैं। हाल ही में सरकार ने सुईगाम तालुका में सीमा दर्शन प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। प्रयास ये है देशभर से लोग यहां आकर सीधे हमारे बीएसएफ के जवानों के अनुभवों को देखें, जान सकें। ये प्रोजेक्ट राष्ट्रीय एकता के पंच प्राण को भी ताकत देने वाला है और यहां पर्यटन से जुड़े नए रोजगारों का भी सृजन करेगा। मीठा-थराद-डीसा सड़क के चौड़ी होने से भी इस परियोजना को बल मिलेगा। डीसा में एयरफोर्स स्टेशन में रनवे और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर बनने से हमारी वायुसेना की ताकत भी इस क्षेत्र में बढ़ने वाली है। रणनीतिक लिहाज़ से ये एयरफोर्स स्टेशन देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। जब इतना बड़ा स्टेशन यहां बन रहा है, तब आसपास व्यापार-कारोबार भी बढ़ेगा। यहां दूध-फल-सब्जी से लेकर अनेक प्रकार की ज़रूरतें पैदा होंगी। जिससे यहां के किसानों, पशुपालकों, सभी को लाभ तय है।

भाइयों और बहनों,

बीते 2 दशकों के निरंतर प्रयासों से बनासकांठा की तस्वीर बदल चुकी है। नर्मदा के नीर, सुजलाम-सुफलाम और ड्रिप इरीगेशन ने स्थिति को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसमें बहनों की भूमिका, इस भूमिका में बहनों का रोल बहुत अग्रणी रहा है। बनासकांठा में कभी अनार की खेती होगी, अंगूर की खेती होगी, आलू और टमाटर इतने बड़े पैमाने में पैदा होंगे, कुछ साल पहले तक ये कोई सोच भी नहीं सकता था। आज जो परियोजनाएं शुरू हुई हैं, वो किसानों, युवाओं, महिलाओं, सभी का जीवन बदलने का काम करेंगी। एक बार फिर मां के चरणों में वंदन करते हुए आप सभी को विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई। आपका भरपूर आशीर्वाद हमें ऐसे ही मिलता रहेगा, इसी कामना के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद। और सबसे पहले मुझे तो आपसे माफी मांगनी है, क्योंकि मुझे यहाँ आते हुए देर हो गई, मुझे इसका अंदाजा नहीं था। मुझे लगा था कि यहाँ से सीधे निकलेंगे और पहुंच जायेंगे। रास्ते में इतनी विराट संख्या में ग्रामीणों से मुलाकात हुई, तो स्वाभाविक रुप से मेरा मन हो रहा था कि उनके पैर छूने का। तो ऐसा करते करते मुझे पहुंचने में देरी हो गई। इसलिए आप सबको ज्यादा इंतज़ार करना पड़ा, उसके लिए क्षमा चाहता हूँ। परंतु अपने बनासकांठा के भाइयों, और अब तो पास में अपना खेडब्रह्मा भी है, हमारे साबरकांठा का पट्टा भी सामने आता है। हम सबको विकास और प्रगति के नये शिखर पर पहुंचना है। और यह 25 सालों का बड़ा अवसर हमारे पास है, आज दुनिया में लोगों का भारत के लिए आकर्षण बढ़ा है। हम यह अवसर जाने दे सकते है? यह अवसर हम जाने दे सकते हैं क्या? मेहनत करनी पड़ेगी कि नहीं करनी पड़ेगी, विकास के कामों में जोर देना पड़ेगा कि नहीं। सबको साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए कि नहीं। यह करेंगे, तभी प्रगति होगी भाइयों और यह प्रगति करने के लिए आपने हंमेशा साथ और सहयोग दिया है। यही मेरी ताकत है, यही मेरी पूंजी है। यही आप सभी का आशीर्वाद हमें नया-नया करने के लिए प्रेरणा देता है। और इसलिए इस माता के धाम में से आप सभी गुजरात वासियों का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। बहुत बहुत धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री मोदी की 'नवभारत टाइम्स' के साथ बातचीत
May 23, 2024

प्रश्न: वोटिंग में मत प्रतिशत उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। क्या, कम वोट पड़ने पर भी बीजेपी 400 पार सीटें जीत सकती है? ये कौन से वोटर हैं, जो घर से नहीं निकल रहे?

उत्तर: किसी भी लोकतंत्र के लिए ये बहुत आवश्यक है कि लोग मतदान में बढ़चढ कर हिस्सा लें। ये पार्टियों की जीत-हार से बड़ा विषय है। मैं तो देशभर में जहां भी रैली कर रहा हूं, वहां लोगों से मतदान करने की अपील कर रहा हूं। इस समय उत्तर भारत में बहुत कड़ी धूप है, गर्मी है। मैं आपके माध्यम से भी लोगों से आग्रह करूंगा कि लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भूमिका जरूर निभाएं। तपती धूप में लोग ऑफिस तो जा ही रहे हैं, हर व्यक्ति अपने काम के लिए घर से बाहर निकल रहा है, ऐसे में वोटिंग को भी दायित्व समझकर जरूर पूरा करें। चार चरणों के चुनाव के बाद बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पा लिया है, आगे की लड़ाई 400 पार के लिए ही हो रही है। चुनाव विशेषज्ञ विश्लेषण करने में जुटे हैं, ये उनका काम है, लेकिन अगर वो मतदाताओं और बीजेपी की केमिस्ट्री देख पाएं तो समझ जाएंगे कि 400 पार का नारा हकीकत बनने जा रहा है। मैं जहां भी जा रहा हूं, बीजेपी के प्रति लोगों के अटूट विश्वास को महसूस रहा हूं। एनडीए को 400 सीटों पर जीत दिलाने के लिए लोग उत्साहित हैं।

प्रश्न: लेकिन कश्मीर में वोट प्रतिशत बढ़े। कश्मीर में बढ़ी वोटिंग का संदेश क्या है?

उत्तर: : मेरे लिए इस चुनाव में सबसे सुकून देने वाली घटना यही है कि कश्मीर में वोटिंग प्रतिशत बढ़ी है। वहां मतदान केंद्रों के बाहर कतार में लगे लोगों की तस्वीरें ऊर्जा से भर देने वाली हैं। मुझे इस बात का संतोष है कि जम्मू-कश्मीर के बेहतर भविष्य के लिए हमने जो कदम उठाए हैं, उसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। श्रीनगर के बाद बारामूला में भी बंपर वोटिंग हुई है। आर्टिकल 370 हटने के बाद आए परिवर्तन में हर कश्मीरी राहत महसूस कर रहा है। वहां के लोग समझ गए हैं कि 370 की आड़ में इतने वर्षों तक उनके साथ धोखा हो रहा था। दशकों तक जम्मू-कश्मीर के लोगों को विकास से दूर रखा गया। सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार से वहां के लोग त्रस्त थे, लेकिन उन्हें कोई विकल्प नहीं दिया जा रहा था। परिवारवादी पार्टियों ने वहां की राजनीति को जकड़ कर रखा था। आज वहां के लोग बिना डरे, बिना दबाव में आए विकास के लिए वोट कर रहे हैं।

प्रश्न: 2014 और 2019 के मुकाबले 2024 के चुनाव और प्रचार में आप क्या फर्क महसूस कर रहे हैं?

उत्तर: 2014 में जब मैं लोगों के बीच गया तो मुझे देशभर के लोगों की उम्मीदों को जानने का अवसर मिला। जनता बदलाव चाहती थी। जनता विकास चाहती थी। 2019 में मैंने लोगों की आंखों में विश्वास की चमक देखी। ये विश्वास हमारी सरकार के 5 साल के काम से आया था। मैंने महसूस किया कि उन 5 वर्षों में लोगों की आकांक्षाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने और बड़े सपने देखे हैं। वो सपने उनके परिवार से भी जुड़े थे, और देश से भी जुड़े थे। पिछले 5 साल तेज विकास और बड़े फैसलों के रहे हैं। इसका प्रभाव हर व्यक्ति के जीवन पर पड़ा है। अब 2024 के चुनाव में मैं जब प्रचार कर रहा हूं तो मुझे लोगों की आंखों में एक संकल्प दिख रहा है। ये संकल्प है विकसित भारत का। ये संकल्प है भ्रष्टाचार मुक्त भारत का। ये संकल्प है मजबूत भारत का। 140 करोड़ भारतीयों को भरोसा है कि उनका सपना बीजेपी सरकार में ही पूरा हो सकता है, इसलिए हमारी सरकार की तीसरी पारी को लेकर जनता में अभूतपूर्व उत्साह है।

प्रश्न: 10 साल की सबसे बड़ी उपलब्धि आप किसे मानते हैं और तीसरे कार्यकाल के लिए आप किस तरह खुद को तैयार कर रहे हैं?

उत्तर: पिछले 10 वर्षों में हमारी सरकार ने अर्थव्यवस्था, सामाजिक न्याय, गरीब कल्याण और राष्ट्रहित से जुड़े कई बड़े फैसले लिए हैं। हमारे कार्यों का प्रभाव हर वर्ग, हर समुदाय के लोगों पर पड़ा है। आप अलग-अलग क्षेत्रों का विश्लेषण करेंगे तो हमारी उपलब्धियां और उनसे प्रभावित होने वाले लोगों के बारे में पता चलेगा। मुझे इस बात का बहुत संतोष है कि हम देश के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर ला पाए। करोड़ों लोगों को घर, शौचालय, बिजली-पानी, गैस कनेक्शन, मुफ्त इलाज की सुविधा दे पाए। इससे उनके जीवन में जो बदलाव आया है, उसकी उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी। आप सोचिए, कि अगर करोड़ों लोगों को ये सुविधाएं नहीं मिली होतीं तो वो आज भी गरीबी का जीवन जी रहे होते। इतना ही नहीं, उनकी अगली पीढ़ी भी गरीबी के इस कुचक्र में पिसने के लिए तैयार हो रही होती।

हमने गरीब को सिर्फ घर और सुविधाएं नहीं दी हैं, हमने उसे सम्मान से जीने का अधिकार दिया है। हमने उसे हौसला दिया है कि वो खुद अपने पैरों पर खड़ा हो सके। हमने उसे एक विश्वास दिया कि जो जीवन उसे देखना पड़ा, वो उसके बच्चों को नहीं देखना पड़ेगा। ऐसे परिवार फिर से गरीबी में न चले जाएं, इसके लिए हम हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं। इसीलिए, आज देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है, ताकि वो अपनी आय अपनी दूसरी जरूरतों पर खर्च कर सकें। हम कौशल विकास, पीएम विश्वकर्मा और स्वनिधि जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर रहे हैं। हमने घर की महिला सदस्य को सशक्त बनाने के भी प्रयास किए। लखपति दीदी, ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं। मेरी सरकार के तीसरे कार्यकाल में इन योजनाओं को और विस्तार मिलेगा, जिससे ज्यादा महिलाओं तक इनका लाभ पहुंचेगा।

प्रश्न: हमारे रिपोर्टर्स देशभर में घूमे, एक बात उभर कर आई कि रोजगार और महंगाई पर लोगों ने हर जगह बात की है। जीतने के बाद पहले 100 दिनों में युवाओं के लिए क्या करेंगे? रोजगार के मोर्चे पर युवाओं को कोई भरोसा देना चाहेंगे?

उत्तर: पिछले 10 वर्षों में हम महंगाई दर को काबू रख पाने में सफल रहे हैं। यूपीए के समय महंगाई दर डबल डिजिट में हुआ करती थी। आज दुनिया के अलग-अलग कोनों में युद्ध की स्थिति है। इन परिस्थितियों का असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ा है। हमने दुनिया के ताकतवर देशों के सामने अपने देश के लोगों के हित को प्राथमिकता दी, और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने नहीं दीं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़तीं तो हर चीज महंगी हो जाती। हमने महंगाई का बोझ कम करने के लिए हर छोटी से छोटी चीज पर फोकस किया। आज गरीब परिवारों को अच्छे से अच्छे अस्पताल में 5 लाख रुपये तक इलाज मुफ्त मिलता है। जन औषधि केंद्रों की वजह से दवाओं के खर्च में 70 से 80 प्रतिशत तक राहत मिली है। घुटनों की सर्जरी हो या हार्ट ऑपरेशन, सबका खर्च आधे से ज्यादा कम हो गया है। आज देश में लोन की दरें सबसे कम हैं। कार लेनी हो, घर लेना हो तो आसानी से और सस्ता लोन उपलब्ध है। पर्सनल लोन इतना आसान देश में कभी नहीं था। किसान को यूरिया और खाद की बोरी दुनिया के मुकाबले दस गुना कम कीमत पर मिल रही है। पिछले 10 वर्षों में रोजगार के अनेक नए अवसर बने हैं। लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के नए मौके बने हैं। EPFO के मुताबिक पिछले सात साल में 6 करोड़ नए सदस्य इसमें जुड़े हैं।

PLFS का डेटा बताता है कि 2017 में जो बेरोजगारी दर 6% थी, वो अब 3% रह गई है। हमारी माइक्रो फाइनैंस की नीतियां कितनी प्रभावी हैं, इस पर SKOCH ग्रुप की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 साल में हर वर्ष 5 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार पैदा हुए हैं। युवाओं के पास अब स्पेस सेक्टर, ड्रोन सेक्टर, गेमिंग सेक्टर में भी आगे बढ़ने के अवसर हैं। देश में डिजिटल क्रांति से भी युवाओं के लिए अवसर बने हैं। आज भारत में डेटा इतना सस्ता है तभी देश की क्रिएटर इकनॉमी बड़ी हो रही है। आज देश में सवा लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स हैं, इनसे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर बन रहे हैं। हमने अपनी सरकार के पहले 100 दिनों का एक्शन प्लान तैयार किया है, उसमें हमने अलग से युवाओं के लिए 25 दिन और जोड़े हैं। हम देशभर से आ रहे युवाओं के सुझाव पर गौर कर रहे हैं, और नतीजों के बाद उस पर तेजी से काम शुरू होगा।

प्रश्न: सोशल मीडिया में एआई और डीपफेक जैसे मसलों पर आपने चिंता जताई है। इस चुनाव में भी इसके दुरुपयोग की मिसाल दिखी हैं। मिसइनफरमेशन का ये टूल न बने, इसके लिए क्या किया जा सकता है? कई एक्टिविस्ट और विपक्ष का कहना रहा है कि इन चीजों पर सख्ती की आड़ में कहीं फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन पर पाबंदी तो नहीं लगेगी? इन सवालों पर कैसे आश्वस्त करेंगे?

उत्तर: तकनीक का इस्तेमाल जीवन में सुगमता लाने के लिए किया जाना चाहिए। आज एआई ने भारत के युवाओँ के लिए अवसरों के नए द्वार खोल दिए हैं। एआई, मशीन लर्निगं और इंटरनेट ऑफ थिंग्स अब हमारे रोज के जीवन की सच्चाई बनती जा रही है। लोगों को सहूलियत देने के लिए कंपनियां अब इन तकनीकों का उपयोग बढ़ा रही हैं। दूसरी तरफ इनके माध्यम से गलत सूचनाएं देने, अफवाह फैलाने और लोगों को भ्रमित करने की घटनाएं भी हो रही हैं। चुनाव में विपक्ष ने अपने झूठे नरैटिव को फैलाने के लिए यही करना शुरू किया था। हमने सख्ती करके इस तरह की कोशिश पर रोक लगाने का प्रयास किया। इस तरह की प्रैक्टिस किसी को भी फायदा नहीं पहुंचाएगी, उल्टे तकनीक का गलत इस्तेमाल उन्हें नुकसान ही पहुंचाएगा। अभिव्यक्ति की आजादी का फेक न्यूज और फेक नरैटिव से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने एआई के एक्सपर्ट्स के सामने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर डीप फेक के गलत इस्तेमाल से जुड़े विषयों को गंभीरता से रखा है। डीप फेक को लेकर वर्ल्ड लेवल पर क्या हो सकता है, इस पर मंथन चल रहा है। भारत इस दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रहा है। लोगों को जागरूक करने के लिए ही मैंने खुद सोशल मीडिया पर अपना एक डीफ फेक वीडियो शेयर किया था। लोगों के लिए ये जानना आवश्यक है कि ये तकनीक क्या कर सकती है।

देश के लोगों की सेहत को लेकर आपकी चिंता हम सब जानते हैं। आपने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस शुरू किया, योगा प्रोटोकॉल बनवाया, आपने आयुष्मान योजना शुरू की है। तीसरे कार्यकाल में क्या इन चीज़ों पर भी काम करेंगे, जो हमारी सेहत खराब होने के मूल कारक हैं। जैसे लोगों को साफ हवा, पानी, मिट्टी मिले। देश 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इस सपने को शक्ति तभी मिलेगी, जब देश का हर नागरिक स्वस्थ हो। शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत हो। यही वजह है कि हम सेहत को लेकर एक होलिस्टिक अप्रोच अपना रहे हैं। एलोपैथ के साथ ही योग, आयुर्वेद, भारतीय परंपरागत पद्धतियां, होम्योपैथ के जरिए हम लोगों को स्वस्थ रखने की दिशा में काम कर रहे हैं। राजनीति में आने से पहले मैंने लंबा समय देश का भ्रमण करने में बिताया है। उस समय मैंने एक बात अनुभव की थी कि घर की महिला सदस्य अपने खराब स्वास्थ्य के बारे छिपाती है। वो खुद तकलीफ झेलती है, लेकिन नहीं चाहती कि परिवार के लोगों को परेशानी हो। उसे इस बात की भी फिक्र रहती है कि डॉक्टर, दवा में पैसे खर्च हो जाएंगे। जब 2014 में मुझे देश की सेवा करने का अवसर मिला तो सबसे पहले मैंने घर की महिला सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता की। मैंने माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया और 10 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए। मैंने बुजुर्गों की सेहत पर भी ध्यान दिया है। हमारी सरकार की तीसरी पारी में 70 साल से ऊपर के सभी बुजुर्गों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलने लगेगा। यानी उनके इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। साफ हवा, पानी, मिट्टी के लिए हम काम शुरू कर चुके हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक पर हमारा अभियान चल रहा है। जल जीवन मिशन के तहत हम देश के लाखों गांवों तक साफ पानी पहुंचा रहे हैं। सॉयल हेल्थ कार्ड, आर्गेनिक खेती की दिशा में काम हो रहा है। हम मिशन लाइफ को प्राथमिकता दे रहे हैं और इस विचार को आगे बढ़ा रहे हैं कि हर व्यक्ति पर्यावरण के अनुकूल जीवन पद्धति को अपनाए।

प्रश्न: विदेश नीति आपके दोनों कार्यकाल में काफी अहम रही है। इस वक्त दुनिया काफी उतार चढ़ाव से गुजर रही है, चुनाव नतीजों के तुरंत बाद जी7 समिट है। आप नए हालात में भारत के रोल को किस तरह देखते हैं?

उत्तर: शायद ये पहला चुनाव है, जिसमें भारत की विदेश नीति की इतनी चर्चा हो रही है। वो इसलिए कि पिछले 10 साल में दुनियाभर में भारत की साख मजबूत हुई है। जब देश की साख बढ़ती है तो हर भारतीय को गर्व होता है। जी20 समिट में भारत ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बना, अब जी7 में भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है। आज दुनिया का हर देश जानता है कि भारत में एक मजबूत सरकार है और सरकार के पीछे 140 करोड़ देशवासियों का समर्थन है। हमने अपनी विदेश नीति में भारत और भारत के लोगों के हित को सर्वोपरि रखा है। आज जब हम व्यापार समझौते की टेबल पर होते हैं, तो सामने वाले को ये महसूस होता है कि ये पहले वाला भारत नहीं है। आज हर डील में भारतीय लोगों के हित को प्राथमिकता दी जाती है। हमारे इस बदले रूप को देखकर दूसरे देशों को हैरानी हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। ये नया भारत है, आत्मविश्वास से भरा भारत है। आज भारत संकट में फंसे हर भारतीय की मदद के लिए तत्पर रहता है। पिछले 10 वर्षों में अनेक भारतीयों को संकट से बाहर निकालकर देश में ले आए। हम अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को भी देश में वापस ला रहे हैं। युद्ध में आमने-सामने खड़े दोनों देशों को भारत ने बड़ी मजबूती से ये कहा है कि ये युद्ध का समय नहीं है, ये बातचीत से समाधान का समय है। आज दुनिया मानती है कि भारत का आगे बढ़ना पूरी दुनिया और मानवता के लिए अच्छा है।

प्रश्न: अमेरिका भी चुनाव से गुजर रहा है। आपके रिश्ते ट्रम्प और बाइडन दोनों के साथ बहुत अच्छे रहे हैं। आप कैसे देखते हैं अमेरिका के साथ भारतीय रिश्तों को इन संदर्भ में?

उत्तर: हमारी विदेश नीति का मूल मंत्र है इंडिया फर्स्ट। पिछले 10 वर्षों में हमने इसी को ध्यान में रखकर विभिन्न देशों और प्रभावशाली नेताओं से संबंध बनाए हैं। भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती का आधार 140 करोड़ भारतीय हैं। हमारे लोग हमारी ताकत हैं, और दुनिया हमारी इस शक्ति को बहुत महत्वपूर्ण मानती है। अमेरिका में राष्ट्रपति चाहे ट्रंप रहे हों या बाइडन, हमने उनके साथ मिलकर दोनों देशों के संबंध को और मजबूत बनाने का प्रयास किया है। भारत-अमेरिका के संबंधों पर चुनाव से कोई अंतर नहीं आएगा। वहां जो भी राष्ट्रपति बनेगा, उसके साथ मिलकर नई ऊर्जा के साथ काम करेंगे। BJP का पूरा प्रचार आप पर ही केंद्रित है, क्या इससे सांसदों के खुद के काम करने और लोगों के संपर्क में रहने जैसे कामों को तवज्जो कम हो गई है और नेता सिर्फ मोदी मैजिक से ही चुनाव जीतने के भरोसे हैं। आप इसे किस तरह काउंटर करते हैं? बीजेपी एक टीम की तरह काम करती है। इस टीम का हर सदस्य चुनाव जीतने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है। चुनावी अभियान में जितना महत्वपूर्ण पीएम है, उतना ही महत्वपूर्ण कार्यकर्ता है। ये परिवारवादी पार्टियों का फैलाया गया प्रपंच है। उनकी पार्टी में एक परिवार या कोई एक व्यक्ति बहुत अहम होता है। हमारी पार्टी में हर नेता और कार्यकर्ता को एक दायित्व दिया जाता है।

मैं पूछता हूं, क्या हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रोज रैली नहीं कर रहे हैं। क्या हमारे मंत्री, मुख्यमंत्री, पार्टी पदाधिकारी रोड शो और रैलियां नहीं कर रहे। मैं पीएम के तौर पर जनता से कनेक्ट करने जरूर जाता हूं, लेकिन लोग एमपी उम्मीदवार के माध्यम से ही हमसे जुड़ते हैं। मैं लोगों के पास नैशनल विजन लेकर जा रहा हूं, उसे पूरा करने की गारंटी दे रहा हूं, तो हमारा एमपी उम्मीदवार स्थानीय आकांक्षाओं को पूरा करने का भरोसा दे रहा है। हमने उन्हीं उम्मीदवारों का चयन किया है, जो हमारे विजन को जनता के बीच पहुंचा सकें। विकसित भारत की सोच से लोगों को जोड़ने के लिए जितनी अहमियत मेरी है, उतनी ही जरूरत हमारे उम्मीदवारों की भी है। हमारी पूरी टीम मिलकर हर सीट पर कमल खिलाने में जुटी है।

प्रश्न: महिला आरक्षण पर आप ने विधेयक पास कराए। क्या नई सरकार में हम इन पर अमल होते हुए देखेंगे?

उत्तर: ये प्रश्न कांग्रेस के शासनकाल के अनुभव से निकला है, तब कानून बना दिए जाते थे लेकिन उसे नोटिफाई करने में वर्षों लग जाते थे। हमने अगले 5 वर्षों का जो रोडमैप तैयार किया है, उसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम की महत्वपूर्ण भूमिका है। हम देश की आधी आबादी को उसका अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इंडी गठबंधन की पार्टियों ने दशकों तक महिलाओं को इस अधिकार से वंचित रखा। सामाजिक न्याय की बात करने वालों ने इसे रोककर रखा था। देश की संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से महिला सशक्तिकरण का एक नया दौर शुरू होगा। इस परिवर्तन का असर बहुत प्रभावशाली होगा।

प्रश्न: महाराष्ट्र की सियासी हालत इस बार बहुत पेचीदा हो गई है। एनडीए क्या पिछली दो बार का रिकॉर्ड दोहरा पाएगा?

उत्तर: महाराष्ट्र समेत पूरे देश में इस बार बीजेपी और एनडीए को लेकर जबरदस्त उत्साह है। महाराष्ट्र में स्थिति पेचीदा नहीं, बल्कि बहुत सरल हो गई है। लोगों को परिवारवादी पार्टियों और देश के विकास के लिए समर्पित महायुति में से चुनाव करना है। बाला साहेब ठाकरे के विचारों को आगे बढ़ाने वाली शिवसेना हमारे साथ है। लोग देख रहे हैं कि नकली शिवसेना अपने मूल विचारों का त्याग करके कांग्रेस से हाथ मिला चुकी है। इसी तरह एनसीपी महाराष्ट्र और देश के विकास के लिए हमारे साथ जुड़ी है। अब जो महा ‘विनाश’ अघाड़ी की एनसीपी है, वो सिर्फ अपने परिवार को आगे बढ़ाने के लिए वोट मांग रही है। लोग ये भी देख रहे हैं कि इंडी गठबंधन अभी से अपनी हार मान चुका है। अब वो चुनाव के बाद अपना अस्तित्व बचाने के लिए कांग्रेस में विलय की बात कर रहे हैं। ऐसे लोगों को मतदान करना, अपने वोट को बर्बाद करना है। इस बार हम महाराष्ट्र में अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने वाले हैं।

प्रश्न: पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी ने बहुत प्रयास किए हैं। पिछली बार बीजेपी 18 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। बाकी राज्यों की तुलना में यह आपके लिए कितना कठिन राज्य है और इस बार आपको क्या उम्मीद है?

उत्तर: TMC हो, कांग्रेस हो, लेफ्ट हो, इन सबने बंगाल में एक जैसे ही पाप किए हैं। बंगाल में लोग समझ चुके हैं कि इन पार्टियों के पास सिर्फ नारे हैं, विकास का विजन नहीं हैं। कभी दूसरे राज्यों से लोग रोजगार के लिए बंगाल आते थे, आज पूरे बंगाल से लोग पलायन करने को मजबूर हैं। जनता ये भी देख रही है कि बंगाल में जो पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं, दिल्ली में वही एक साथ नजर आ रही हैं। मतदाताओं के साथ इससे बड़ा छल कुछ और नहीं हो सकता। यही वजह है कि इंडी गठबंधन लोगों का भरोसा नहीं जीत पा रहा। बंगाल के लोग लंबे समय से भ्रष्टाचार, हिंसा, अराजकता, माफिया और तुष्टिकरण को बर्दाश्त कर रहे हैं। टीएमसी की पहचान घोटाले वाली सरकार की बन गई है। टीएमसी के नेताओं ने अपनी तिजोरी भरने के लिए युवाओं के सपनों को कुचला है। यहां स्थिति ये है कि सरकारी नौकरी पाने के बाद भी युवाओं को भरोसा नहीं है कि उनकी नौकरी रहेगी या जाएगी। लोग बंगाल की मौजूदा सरकार से पूरी तरह हताश हैं।अब उनके सामने बीजेपी का विकास मॉडल है। मैं बंगाल में जहां भी गया, वहां लोगों में बीजेपी के प्रति अभूतपूर्व विश्वास नजर आया। विशेष रुप से बंगाल में मैंने देखा कि माताओं-बहनों का बहुत स्नेह मुझे मिल रहा है। मैं उनसे जब भी मिलता हूं, वो खुद तो इमोशनल हो ही जाती हैं, मैं भी अपने भावनाओं को रोक नहीं पाता हूं। इस बार बंगाल में हम पहले से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करेंगे।

प्रश्न: शराब मामले को लेकर अरविंद केजरीवाल को जेल जाना पड़ा है। उनका कहना है कि ईडी ने जबरदस्ती उन्हें इस मामले में घसीटा है जबकि अब तक उनके पास से कोई पैसा बरामद नहीं हुआ?

उत्तर: आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को सुना है जो आरोपी हो और ये कह रहा हो कि उसने घोटाला किया था। या कह रहा हो कि पुलिस ने उसे सही गिरफ्तार किया है। अगर एजेंसियों ने उन्हें गलत पकड़ा था, तो कोर्ट से उन्हें राहत क्यों नहीं मिली। ईडी और एजेसिंयो पर आरोप लगाने वाला विपक्ष आज तक एक मामले में ये साबित नहीं कर पाया है कि उनके खिलाफ गलत आरोप लगा है। वो कुछ दिन के लिए जमानत पर बाहर आए हैं, लेकिन बाहर आकर वो और एक्सपोज हो गए। वो और उनके लोग गलतियां कर रहे हैं और आरोप बीजेपी पर लगा रहे हैं। लेकिन जनता उनका सच जानती है। उनकी बातों की अब कोई विश्वसनीयता नहीं रह गई है।

प्रश्न: इस बार दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इससे क्या लगातार दो बार से सातों सीटें जीतने के क्रम में बीजेपी को कुछ दिक्कत हो सकती है? इस बार आपने छह उम्मीदवार बदल दिए

उत्तर: इंडी गठबंधन की पार्टियां दिल्ली में हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके सामने अपना अस्तित्व बचाने का संकट है। चुनाव के बाद वैसे भी इंडी गठबंधन नाम की कोई चीज बचेगी नहीं। दिल्ली की जनता ने बहुत पहले कांग्रेस को बाहर कर दिया था, अब दूसरे दलों के साथ मिलकर वो अपनी मौजूदगी दिखाना चाहते हैं। क्या कभी किसी ने सोचा था कि देश पर इतने लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस के ये दिन भी आएंगे कि उनके परिवार के नेता अपनी पार्टी के नहीं, बल्कि किसी और उम्मीदवार के लिए वोट डालेंगे।

दिल्ली में इंडी गठबंधन की जो पार्टियां हैं, उनकी पहचान दो चीजों से होती है। एक तो भ्रष्टाचार और दूसरा बेशर्मी के साथ झूठ बोलना। मीडिया के माध्यम से ये जनता की भावनाओं को बरगलाना चाहते हैं। झूठे वादे देकर ये लोगों को गुमराह करना चाहते हैं। ये जनता के नीर-क्षीर विवेक का अपमान है। जनता आज बहुत समझदार है, वो फैसला करेगी। बीजेपी ने लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बीजेपी में कोई लोकसभा सीट नेता की जागीर नहीं समझी जाती। जो जनहित में उचित होता है, पार्टी उसी के अनुरूप फैसला लेती है। हमारे लिए राजनीति सेवा का माध्यम है। यही वजह है कि हमारे कार्यकर्ता इस बात से निराश नहीं होते कि टिकट कट गया, बल्कि वो पूरे मनोयोग से जनता की सेवा में जुट जाते हैं।

प्रश्न: विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र खतरे में है और अगर बीजेपी जीतती है तो लोकतंत्र औपचारिक रह जाएगा। आप उनके इन आरोपों को कैसे देखते हैं?

उत्तर: कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम झूठ और अफवाह के सहारे चुनाव लड़ने निकला है। पुराने दौर में उनका यह पैंतरा कभी-कभी काम कर जाता था, लेकिन आज सोशल मीडिया के जमाने में उनके हर झूठ का मिनटों में पर्दाफाश हो जाता है।

उन्होंने राफेल पर झूठ बोला, पकड़े गए। एचएएल पर झूठ बोला, पकड़े गए। जनता अब इनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेती है। देश जानता है कि कौन संविधान बदलना चाहता है। आपातकाल के जरिए देश के लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश किसने की थी। कांग्रेस के कार्यकाल में सबसे ज्यादा बार संविधान की मूल प्रति को बदल दिया। कांग्रेस पहले संविधान संसोधन का प्रस्ताव अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा लगाने के लिए लाई थी। 60 वर्षों में उन्होंने बार-बार संविधान की मूल भावना पर चोट की और एक के बाद एक कई राज्य सरकारों को बर्खास्त किया। सबसे ज्यादा बार राष्ट्रपति शासन लगाने का रेकॉर्ड कांग्रेस के नाम है। उनकी जो असल मंशा है, उसके रास्ते में संविधान सबसे बड़ी दीवार है। इसलिए इस दीवार को तोड़ने की कोशिश करते रहते हैं। आप देखिए कि संविधान निर्माताओं ने धर्म के आधार पर आरक्षण का विरोध किया था। लेकिन कांग्रेस अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए बार-बार यही करने की कोशिश करती है। अपनी कोई कोशिशों में नाकाम रहने के बाद आखिरकार उन्होंने कर्नाटक में ओबीसी आरक्षण में सेंध लगा ही दी।

कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेता लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, लेकिन वास्तविकता ये है कि लोकतंत्र को कुचलने के लिए, जनता की आवाज दबाने के लिए ये पूरी ताकत लगा देते हैं। ये लोग उनके खिलाफ बोलने वालों के पीछे पूरी मशीनरी झोंक देते हैं। इनके एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाकर कार्रवाई कर रही है। इस काम में ये लोग खुलकर एक-दूसरे का साथ दे रहे हैं। जनता ये सब देख रही है, और समझ रही है कि अगर इन लोगों के हाथ में ताकत आ गई तो ये देश का, क्या हाल करेंगे।

प्रश्न: आप एकदम चुस्त-दुरुस्त और फिट दिखते हैं, आपकी सेहत का राज, सुबह से रात तक का रूटीन?

उत्तर: मैं यह मानता हूं कि मुझ पर किसी दैवीय शक्ति की बहुत बड़ी कृपा है, जिसने लोक कल्याण के लिए मुझे माध्यम बनाया है। इतने वर्षों में मेरा यह विश्वास प्रबल हुआ है कि ईश्वर ने मुझे विशेष दायित्व पूरा करने के लिए चुना है। उसे पूरा करने के लिए वही मुझे सामर्थ्य भी दे रहा है। लोगों की सेवा करने की भावना से ही मुझे ऊर्जा मिलती है।

प्रश्न: प्रधानमंत्री जी, आप काशी के सांसद हैं। बीते 10 साल में आप ने काशी को खूब प्रमोट किया है। आज काशी देश में सबसे प्रेफर्ड टूरिज्म डेस्टिनेशमन बन रही है। इसके अलावा आप ने जो इंफ्रास्ट्रक्चर के काम किए हैं, उससे भी बनारस में बहुत बदलाव आया है। इससे बनारस और पूर्वांचल की इकोनॉमी और रोजगार पर जो असर हुआ है, उसे आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: काशी एक अद्भूत नगरी है। एक तरफ तो ये दुनिया का सबसे प्राचीन शहर है। इसकी अपनी पौराणिक मान्यता है। दूसरी तरफ ये पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की आर्थिक धुरी भी है। 10 साल में हमने काशी में धार्मिक पर्यटन का खूब विकास किया। शहर की गलियां, साफ-सफाई, बाजारों में सुविधाएं, ट्रेन और बस के इंतजाम पर फोकस किया। गंगा में सीएनजी बोट चली, शहर में ई-बस और ई-रिक्शा चले। यात्रियों के लिए हमने स्टेशन से लेकर शहर के अलग-अलग स्थानों पर तमाम सुविधाएं बढ़ाई।

इन सब के बाद जब हम बनारस को प्रमोट करने उतरे, तो देशभर के श्रद्धालुओं में नई काशी को देखने का भाव उमड़ आया। यह यहां सालभर पहले से कई गुना ज्यादा पर्यटक आते हैं। इससे पूरे शहर में रोजगार के नए अवसर तैयार हुए।

हमने बनारस में इंडस्ट्री लानी शुरू की है। TCS का नया कैंपस बना है, बनास डेयरी बनी है, ट्रेड फैसिलिटी सेंटर बना है, काशी के बुनकरों को नई मशीनें दी जा रही है, युवाओं को मुद्रा लोन मिले हैं। इससे सिर्फ बनारस ही नहीं, आसपास के कई जिलों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली।

प्रश्न: आपने कहा कि वाराणसी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक धुरी जैसा शहर है। बीते 10 वर्षों में पू्र्वांचल में जो विकास हुआ है, उसको कैसे देखते हैं?

उत्तर: देखिए, पूर्वांचल अपार संभावनाओं का क्षेत्र है। पिछले 10 वर्षों में हमने केंद्र की तमाम योजनाओं में इस क्षेत्र को बहुत वरीयता दी है। एक समय था, जब पूर्वांचल विकास में बहुत पिछड़ा था। वाराणसी में ही कई घंटे बिजली कटौती होती थी। पूर्वांचल के गांव-गांव में लालटेन के सहारे लोग गर्मियों के दिन काटते थे। आज बिजली की व्यवस्था में बहुत सुधार हुआ है, और इस भीषण गर्मी में भी कटौती का संकट करीब-करीब खत्म हो चला है। ऐसे ही पूरे पूर्वांचल में सड़कों की हालत बहुत खराब थी। आज यहां के लोगों को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की सुविधा मिली है। गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, चंदौली जैसे टियर थ्री कहे जाने वाले शहरों में हजारों की सड़कें बनी हैं।

आजमगढ़ में अभी कुछ दिन पहले मैंने एयरपोर्ट की शुरुआत की है। महाराजा सुहेलदेव के नाम पर यूनिवर्सिटी बनाई गई है। पूरे पूर्वांचल में नए मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। बनारस में इनलैंड वाटर-वे का पोर्ट बना है। काशी से ही देश की पहली वंदे भारत ट्रेन चली थी। देश का पहला रोप-वे ट्रांसपोर्ट सिस्टम बन रहा है।

कांग्रेस की सरकार में पूर्वांचल के लोग ऐसी सुविधाएं मिलने के बारे में सोचते तक नहीं थे। क्योंकि लोगों को बिजली-पानी-सड़क जैसी मूलभूत सुविआधाओं में ही उलझाकर रखा गया था। यह स्थिति तब थी जब इनके सीएम तक पूर्वांचल से चुने जाते थे। तब पूर्वांचल में सिर्फ नेताओं के हेलिकॉप्टर उतरते थे, आज जमीन पर विकास उतर आया है।

प्रश्न: आप कहते हैं कि बनारस ने आपको बनारसी बना दिया है। मां गंगा ने आपको बुलाया था, अब आपको अपना लिया है। आप काशी के सांसद हैं, यहां के लोगों से क्या कहेंगे?

उत्तर: मैं एक बात मानता हूं कि काशी में सबकुछ बाबा की कृपा से होता है। मां गंगा के आशीर्वाद से ही यहां हर काम फलीभूत होते हैं! 10 साल पहले मैंने जब ये कहा था कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है, तो वो बात भी मैंने इसी भावना से कही थी। जिस नगरी में लोग एक बार आने को तरसते हैं, वहां मुझे दो बार सांसद के रूप में सेवा करने का अवसर मिला। जब पार्टी ने तीसरी बार मुझे काशी की उम्मीदवारी करने को कहा, तभी मेरे मन में यह भाव आया कि मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है। काशी ने मुझे अपार प्रेम दिया है। उनका यह स्नेह और विश्वास मुझ पर एक कर्ज है। मैं जीवनभर काशी की सेवा करके भी इस कर्ज को नहीं उतार पाऊंगा।

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स्रोत: नवभारत टाइम्स