प्रधानमंत्री ने देसर में विश्वस्तरीय 'स्वर्णिम गुजरात खेल विश्वविद्यालय' का उद्घाटन किया
"जब आयोजन इतना अद्भुत और अद्वितीय हो, तो उसकी ऊर्जा ऐसी ही असाधारण होगी"
"खेल के मैदान में खिलाड़ियों की जीत, उनका दमदार प्रदर्शन, अन्य क्षेत्रों में देश की जीत का भी रास्ता बनाता है"
"स्पोर्ट्स की सॉफ्ट पावर, देश की पहचान को, देश की छवि को कई गुना ज्यादा बेहतर बना देती है"
"सावज, एशियाई शेर का शुभंकर भारत के युवाओं के बीच निर्भीक भागीदारी के मूड को दर्शाता है"
"जब इंफ्रास्ट्रक्चर का स्तर अच्छा होता है, तो एथलीटों का मनोबल भी ऊंचा होता है"
“हमने स्पोर्ट्स स्पिरिट के साथ स्पोर्ट्स के लिए काम किया। टॉप्स जैसी योजनाओं के जरिए वर्षों तक मिशन मोड में तैयारी की"
"आज फिट इंडिया और खेलो इंडिया जैसे प्रयास एक जन-आंदोलन बन गए हैं"
"पिछले 8 वर्षों में देश का खेल बजट करीब 70 प्रतिशत बढ़ा है"
"खेल हजारों वर्षों से भारत की विरासत और विकास यात्रा का हिस्सा रहा है"

भारत माता की जय,

भारत माता की जय,

इस भव्य आयोजन में हमारे साथ उपस्थित गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत जी, हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई, संसद के मेरे साथी सी.आर पाटिल, भारत सरकार में मंत्री श्री अनुराग जी, राज्य के मंत्री हर्ष संघवी जी, मेयर किरीट भाई, खेल संस्थाओं के प्रतिनिधिगण और देश भर से यहाँ जुटे मेरे युवा खिलाड़ियों।

आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है, अभिनंदन है। ये दृश्य, ये तस्वीर, ये माहौल, शब्दों से परे है। विश्व का सबसे बड़ा स्टेडियम, विश्व का इतना युवा देश, और देश का सबसे बड़ा खेल उत्सव! जब आयोजन इतना अद्भुत और अद्वितीय हो, तो उसकी ऊर्जा ऐसी ही असाधारण होगी। देश के 36 राज्यों से 7 हजार से ज्यादा athletes, 15 हजार से ज्यादा प्रतिभागी, 35 हजार से ज्यादा कॉलेज, यूनिवर्सिटीज़, और स्कूलों की सहभागिता, और 50 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स का नेशनल गेम्स से सीधा जुड़ाव, ये अद्भुत है, ये अभूतपूर्व है। नेशनल गेम्स का anthem ‘जुड़ेगा इंडिया, जीतेगा इंडिया। मैं कहुंगा जुड़ेगा इंडिया, आप बोलियेगा जीतेगा इंडिया। ‘जुड़ेगा इंडिया, जीतेगा इंडिया, ‘जुड़ेगा इंडिया, जीतेगा इंडिया, ‘जुड़ेगा इंडिया, जीतेगा इंडिया, ये शब्द, ये भाव आज आसमान में गूंज रहा है। आपका उत्साह आज आपके चेहरों पर चमक रहा है। ये चमक आगाज है, खेल की दुनिया के आने वाले सुनहरे भविष्य के लिए। नेशनल गेम्स का ये प्लेटफ़ॉर्म आप सभी के लिए एक नए launching pad का काम करेगा। मैं इन खेलों में शामिल हो रहे सभी खिलाड़ियों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनायें देता हूँ।

 

साथियों,

मैं आज गुजरात के लोगों की भी सराहना करता हूँ, जिन्होंने बहुत ही कम समय में इस भव्य आयोजन के लिए सारी व्यवस्थाएं कीं। ये गुजरात का सामर्थ्य है, यहां के लोगों का सामर्थ्य है। लेकिन साथियों अगर आपको कहीं कमी महसूस हो, कहीं कोई असुविधा महसूस हो तो उसके लिए मैं गुजराती के नाते आप सबसे एडवांस में क्षमा मांग लेता हूं। कल अहमदाबाद में जिस तरह का शानदार, भव्य ड्रोन शो हुआ, वो देखकर तो हर कोई अचंभित है, गर्व से भरा है। टेक्नोलॉजी का ऐसा सधा हुआ इस्तेमाल, ड्रोन की तरह ही गुजरात को, भारत को नई ऊंचाईयों पर ले जाएगा। यहां जो पहले नेशनल स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया, उसकी सफलता की भी बहुत चर्चा हो रही है। इन सारे प्रयासों के लिए मैं मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेन्द्र भाई पटेल और उनकी पूरी टीम की भी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं। अभी कुछ दिन पहले नेशनल गेम्स का official mascot ‘सावज’ भी लॉंच हुआ है। गिर के शेरों को प्रदर्शित करता ये शुभांकर सावज भारत के युवाओं के मिजाज को दिखाता है, निडर होकर मैदान में उतरने के जुनून को दिखाता है। ये वैश्विक परिदृश्य में तेजी से उभरते भारत के सामर्थ्य का भी प्रतीक है।

 

साथियों,

आज आप यहाँ जिस स्टेडियम में, जिस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में मौजूद हैं, इसकी विशालता और आधुनिकता भी एक अलग प्रेरणा का कारण है। ये स्टेडियम तो दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम है ही, साथ ही ये सरदार पटेल स्पोर्ट्स enclave और कॉम्प्लेक्स भी कई मायनों में सबसे अनूठा है। आमतौर पर ऐसे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स एक या दो या तीन खेलों पर ही केंद्रित होकर रह जाते हैं। लेकिन सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में फुटबाल, हॉकी, बास्केटबॉल, कबड्डी, बॉक्सिंग और लॉन टेनिस जैसे अनेकों खेलों की सुविधा एक साथ उपलब्ध है। ये एक तरह से पूरे देश के लिए एक मॉडल है। क्योंकि, जब इनफ्रास्ट्रक्चर इस स्टैंडर्ड का होता है, तो खिलाड़ियों का मनोबल भी एक नई ऊंचाई तक पहुंच जाता है। मुझे विश्वास है, हमारे सभी खिलाड़ी इस कॉम्प्लेक्स के अपने अनुभवों को जरूर enjoy करेंगे।

 

मेरे नौजवान साथियों,

सौभाग्य से इस समय नवरात्रि का पावन अवसर भी चल रहा है। गुजरात में माँ दुर्गा की उपासना से लेकर गरबा तक, यहाँ की अपनी अलग ही पहचान है। जो खिलाड़ी दूसरे राज्यों से आए हैं, उनसे मैं कहूंगा कि खेल के साथ ही यहां नवरात्रि आयोजन का भी आनंद जरूर लीजिये। गुजरात के लोग आपकी मेहमान-नवाज़ी में, आपके स्वागत में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। वैसे मैंने देखा है कि कैसे हमारे नीरज चोपड़ा कल गरबा का आनंद ले रहे थे। उत्सव की यही खुशी, हम भारतीयों को जोड़ती है, एक दूसरे का साथ देने के लिए प्रेरित करती है। मैं इस अवसर पर, आप सभी को, सभी गुजरातवासियों और देशवासियों को एक बार फिर नवरात्रि की बधाई देता हूँ।

 

मेरे युवा मित्रों,

किसी भी देश की प्रगति और दुनिया में उसके सम्मान का, खेलों में उसकी सफलता से सीधा संबंध होता है। राष्ट्र को नेतृत्व देश का युवा देता है, और खेल-स्पोर्ट्स, उस युवा की ऊर्जा का, उसके जीवन निर्माण का प्रमुख स्रोत होता है। आज भी आप देखेंगे, दुनिया में जो देश विकास और अर्थव्यवस्था में टॉप पर हैं, उनमें से ज्यादातर मेडल लिस्ट में भी टॉप पर होते हैं। इसलिए, खेल के मैदान में खिलाड़ियों की जीत, उनका दमदार प्रदर्शन, अन्य क्षेत्रों में देश की जीत का भी रास्ता बनाता है। स्पोर्ट्स की सॉफ्ट पावर, देश की पहचान को, देश की छवि को कई गुना ज्यादा बेहतर बना देती है।

 

साथियों,

मैं स्पोर्ट्स के साथियों को अक्सर कहता हूँ- Success starts with action! यानी, आपने जिस क्षण शुरुआत कर दी, उसी क्षण सफलता की शुरुआत भी हो गई। आपको लड़ना पड़ सकता है, जूझना पड़ सकता है। आप लड़खड़ा सकते हैं, गिर सकते हैं। लेकिन, अगर आपने दौड़ने का जज़्बा नहीं छोड़ा है, आप चलते जा रहे हैं तो ये मानकर चलिए कि जीत खुद एक-एक कदम आपकी ओर बढ़ रही है। आजादी के अमृतकाल में देश ने इसी हौसले के साथ नए भारत के निर्माण की शुरुआत की है। एक समय था, जब दुनिया ओलंपिक्स जैसे वैश्विक खेल महाकुंभ के लिए दीवानी होती थी। लेकिन हमारे यहाँ वो खेल, बरसों तक सिर्फ जनरल नॉलेज के विषय के तौर पर ही समेट दिए गए थे। लेकिन अब मिजाज बदला है, मूड नया है, माहौल नया है। 2014 से ‘फ़र्स्ट एंड बेस्ट’ का जो सिलसिला देश में शुरू हुआ है, हमारे युवाओं ने वो जलवा खेलों में भी बरकरार रखा है।

आप देखिए, आठ साल पहले तक भारत के खिलाड़ी, सौ से भी कम इंटरनेशनल इवेंट्स में हिस्सा लेते थे। अब भारत के खिलाड़ी तीन सौ से भी ज्यादा इंटरनेशनल इवेंट्स में शामिल होते हैं। आठ साल पहले भारत के खिलाड़ी, 20-25 खेलों को खेलने ही जाते थे। अब भारत के खिलाड़ी करीब 40 अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेने जाते हैं। आज भारत के मेडल की संख्या भी बढ़ रही है और भारत की धमक भी बढ़ रही है। कोरोना के कठिन समय में भी देश ने अपने खिलाड़ियों का मनोबल कम नहीं होने दिया। हमने हमारे युवाओं को हर जरूरी संसाधन दिये, ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजा। हमने स्पोर्ट्स स्पिरिट के साथ स्पोर्ट्स के लिए काम किया। TOPS जैसी योजनाओं के जरिए वर्षों तक मिशन मोड में तैयारी की। आज बड़े-बड़े खिलाड़ियों की सफलता से लेकर नए खिलाड़ियों के भविष्य निर्माण तक, TOPS एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। आज हमारे युवा हर खेल में नए रिकॉर्ड्स बना रहे हैं, और अपने ही रिकॉर्ड्स ब्रेक भी करते चले जा रहे हैं। टोक्यो में इस बार भारत ने ओलंपिक्स का अपना सबसे शानदार प्रदर्शन किया। टोक्यो ओलंपिक में पहली बार युवाओं ने इतने मेडल्स देश के नाम किए। उसके बाद थॉमस कप में हमने हमारी बैडमिंटन टीम की जीत का जश्न मनाया। यूगांडा में पैरा-बैडमिंटन टीम ने भी 47 मेडल्स जीतकर देश की शान बढ़ाई। इस सफलता का सबसे ताकतवर पक्ष ये है कि इसमें हमारी बेटियाँ भी बराबरी से भागीदार हैं। हमारी बेटियाँ आज सबसे आगे तिरंगे की शान बढ़ा रही हैं।

 

साथियों,

खेल की दुनिया में ये सामर्थ्य दिखाने की क्षमता देश में पहले भी थी। ये विजय अभियान पहले भी शुरू हो सकता था। लेकिन, खेलों में जो professionalism होना चाहिए था, उसकी जगह परिवारवाद और भ्रष्टाचार ने ले रखी थी। हमने सिस्टम की सफाई भी की, और युवाओं में उनके सपनों के लिए भरोसा भी जगाया। देश अब केवल योजनाएँ नहीं बनाता, बल्कि अपने युवाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ता है। इसीलिए, आज फिट इंडिया और खेलो इंडिया जैसे प्रयास एक जन-आंदोलन बन गए हैं। इसीलिए, आज खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा संसाधन भी दिए जा रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा अवसर भी मिल रहे हैं। पिछले 8 वर्षों में देश का खेल बजट करीब-करीब 70 प्रतिशत बढ़ा है। आज देश में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज बन रही हैं, कोने-कोने में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इतना ही नहीं रिटायर होने के बाद भी खिलाड़ियों को कोई तकलीफ न हो, इसके लिए भी प्रयास किया जा रहा है। रिटायर होने वाले खिलाड़ियों के अनुभवों का लाभ नई पीढ़ी को मिल सके, इस दिशा में भी काम हो रहा है।

 

साथियों,

स्पोर्ट्स, खेल, हजारों वर्षों से भारत की सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा रहा हैं। खेल हमारी विरासत और विकास यात्रा का जरिया रहे हैं। आजादी के अमृतकाल में देश अपनी विरासत पर गर्व के साथ इस परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है। अब देश के प्रयास और उत्साह केवल एक खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘कलारीपयट्टू’ और योगासन जैसे भारतीय खेलों को भी महत्व मिल रहा है। मुझे खुशी है कि इन खेलों को नेशनल गेम्स जैसे बड़े आयोजनों में शामिल किया गया है। जो खिलाड़ी इन खेलों का प्रतिनिधित्व यहाँ कर रहे हैं, उन्हें मैं एक बात विशेष तौर पर कहना चाहता हूं। आप एक ओर हजारों वर्ष पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, तो साथ ही खेल जगत के भविष्य को नेतृत्व भी दे रहे हैं। आने वाले समय में जब इन खेलों को वैश्विक मान्यता मिलेगी, तो इन क्षेत्रों में आपका नाम legends के रूप में लिया जाएगा।

 

साथियों,

आखिरी में, आप सभी खिलाड़ियों को मैं एक मंत्र और देना चाहता हूं। अगर आपको competition जीतना है, तो आपको commitment और continuity को जीना सीखना होगा। खेलों में हार-जीत को कभी भी हमें आखिरी नहीं मानना चाहिए। ये स्पोर्ट्स स्पिरिट आपके जीवन का हिस्सा होना चाहिए, तभी भारत जैसे युवा और भारत जैसा युवा देश, उसके सपनों को आप नेतृत्व देंगे, असीमित संभावनाओं को साकार करेंगे। और आपको याद रखना है, जहां गति होती है, वहीं पर प्रगति होती है। इसलिए, इस गति को आपको मैदान से बाहर भी बनाकर रखना है। ये गति आपके जीवन का मिशन होना चाहिए। मुझे विश्वास है, नेशनल गेम्स में आपकी जीत देश को जश्न का मौका भी देगी, और भविष्य के लिए एक नया विश्वास भी जगाएगी। इसी विश्वास के साथ, ये छत्तीसवें राष्ट्रीय खेलों के शुभारंभ का आह्वान करता हूं।

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Prime Minister shares Sanskrit Subhashitam, says life of Shyamji Krishna Varma inspires courage
March 30, 2026

The Prime Minister said that from the life of the great freedom fighter Shyamji Krishna Varma, we receive an extraordinary inspiration of courage and determination. “It also instills in the countrymen the sentiment of fulfilling their duties toward the nation”, Shri Modi added.

The Prime Minister shared a Sanskrit verse-

“विचित्रचरितोल्लेखचमत्कारितचेतनम्।

प्राप्यते किं यशः शुभ्रमनङ्गीकृत्य साहसम्॥”

The Prime Minister wrote on X;

“महान स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा के जीवन से हमें साहस और हौसले की अद्भुत प्रेरणा मिलती है। यह देशवासियों में राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन की भावना भी भरता है।

विचित्रचरितोल्लेखचमत्कारितचेतनम्।

प्राप्यते किं यशः शुभ्रमनङ्गीकृत्य साहसम्॥”