हमारी सरकार ने संविधान को मजबूत बनाने के लिए, संविधान की भावना को हर देशवासी तक पहुंचाने के लिए लगातार काम किया है: पूर्णिया में पीएम मोदी
एनडीए सरकार के लिए वंचित-शोषित वर्ग पहली प्राथमिकता है। जिसको किसी ने नहीं पूछा, हम उसको पूज रहे हैं: पूर्णिया में पीएम मोदी

भारत माता की…. भारत माता की….जय

माई पूर्ण देवी, बिसहरी माय की जय… मैं भक्त प्रहलाद और महर्षि मेही बाबा की इस पावन धरती को नमन करता हूं। मौर्य साम्राज्य के रूप में भारत के गौरव को दूर दूर तक फैलाने वाले सम्राट अशोक की आज जयंती भी है। उनसे प्रेरणा लेने वाले बड़ी संख्या में लोग आज भाजपा को अपना आशीर्वाद देने आए हैं। एनडीए सरकार की तीसरी पारी को लेकर पहले से भी ज्यादा उत्साह नजर आ रहा है, आपका यह उत्साह बता रहा है फिर एक बार.... फिर एक बार..... फिर एक बार..... फिर एक बार..... विकसित भारत के लिए 4 जून.... 4 जून.... 4 जून....

साथियों,

आज एनडीए सरकार के लिए वंचित शोषित वर्ग हमारी पहली प्राथमिकता है। जिसको किसी ने नहीं पूछा, हम उसको पूज रहे हैं. एक समय था जब केंद्र की सरकारें बिहार को पिछड़ा कहकर पीछा छुड़ा लेतीं थी, बिहार की सरकारें सीमांचल को पिछड़ा कह कर के पलड़ा झाड़ लेती थी लेकिन हमने सीमांचल और पूर्णिया के पूर्ण विकास को अपना मिशन बनाया है। एनडीए सरकार ने सीमांचल के भाग्य को बदलने के लिए आकांक्षी जिला और अब आकांक्षी ब्लॉक ऐसी बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना चलाई। आज हमारे पूर्णिया ने देश में सबसे बेहतर प्रगति करने वाले आकांक्षी जिलों में अपनी जगह बनाई है। मैं इसके लिए पूर्णिया के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आपका उत्साह अद्भुत है.. ऐसा उत्साह बहुत कम ही देखने को मिलता है लेकिन अगर आपका उत्साह मेरी आवाज पहुंचने ही नहीं देगा तो फिर इस सभा का फायदा क्या होगा। तो मेरी बात वहां बैठे लोग सुन सके इसलिए मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप आपके नारे आपके उत्साह को थोड़ा नीचे करें तो अच्छा होगा करेंगे मेरी बात को.. मेरी बात को मानेंगे, पक्का मानेंगे.. बिहार के लोग इतने बढ़िया है यहां के नौजवान इतने बढ़िया है कि मेरी हर बात को स्वीकार करते हैं यह मेरा सौभाग्य है।

साथियों,

बिहार और पूर्णिया के पास सामर्थ्य की कभी कमी नहीं थी हमारे बिहार का किसान भरपूर मक्का उत्पादन करता है बिहार में जूट और मखाने की खेती भी खूब होती है.. पिछले 10 वर्षों में हमने जूट की एमएसपी को बढ़ाकर दो गुना किया है बिहार का 20 प्रतिशत मखाना अकेले पूर्णिया के किसान ही पैदा करते हैं। हमने आपके सामर्थ्य को प्रोत्साहन दिया, नतीजा यह हुआ कि आपने मखाना के सीड प्रोडक्शन को करीब दो गुना कर दिया आज एनडीए सरकार मखाने को सुपर फूड के रूप में प्रमोट कर रही है... मोटे अनाज यानी श्री अन्न की तो मोदी ने पूरी दुनिया में मार्केटिंग की है आपने जी-20 में देखा होगा मोदी ने दुनिया के बड़े-बड़े राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को श्री अन्न, मोटा अनाज खिलाया कहा कि हमारे छोटे किसानों की मेहनत है इसमें अब मोटा अनाज गरीब का खाना नहीं अमीरों का खाना बन रहा है... इसका फायदा सीधे हमारे किसानों तक पहुंच रहा है मक्के को भी मुनाफे की फसल बनाने के लिए हमारी सरकार ने एमएसपी पर खरीद बढ़ाई और अब तो मक्के से एथेनॉल भी बनाया जा रहा है देश का पहला, पूरे भारत का पहला ग्रीन फील्ड एथेनॉल प्लांट पूर्णिया में लगाया गया है। हमारे नीतीश जी ने ही इसका उद्घाटन किया था, साथियों कृषि और उद्योग के इन अवसरों को गति देने के लिए पूर्णिया में रेल और रोड के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी आधुनिक बनाया जा रहा है कुछ समय पहले ही मैंने कटिहार जोगबानी रेल सेक्शन के विद्युतीकरण लोकार्पण किया था, हमारी सरकार सीमांचल में अच्छी सड़कों का निर्माण भी करवा रही है और अब तो वह दिन दूर नहीं जब पूर्णिया में हवाई जहाज भी उतरेगी... हमारी सरकार सीमांचल में वंदे भारत, नमो भारत, जैसी ट्रेनों के जरिए कनेक्टिविटी बढ़ाने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी काम करेगी।

साथियों,

मोदी के के लिए आपके सपने ही मोदी का संकल्प है इसलिए गांव गरीब दलित वंचित दशकों से जिन समस्याओं से जूझ रहे थे मोदी ने 10 साल में उनका समाधान दिया है देश के 25 करोड़ गरीबी से बाहर तब आए जब हमनें दिन-रात उनके लिए मेहनत की देश के चार करोड़ गरीबों को पीएम आवास कब मिला जब आपने मोदी को सेवा करने का आशीर्वाद दिया। देश के 50 करोड़ से ज्यादा दलितों, वंचितों, गरीबों का बैंक में खाता तब खुला जब आपने मोदी को आशीर्वाद देकर के सेवा करने का मौका दिया। करोड़ों माताओं- बहनों को चूल्हे के धुएं से मुक्ति तब मिली जब मोदी ने उज्ज्वला सिलेंडर देकर उनकी सुध ली देश के 11 करोड़ परिवारों तक पहली बार पाइप से पानी तब पहुंचा जब मोदी ने हर घर जल को अपना मिशन बनाया। आज 11 करोड़ छोटे किसानों के खातों में किसान सम्मान निधि भी एनडीए सरकार ही भेज रही है... इन योजनाओं का बहुत बड़ा लाभ हमारे ततमा समाज, महलदार समाज और ऋषिदेव समाज के मेरे परिजनों को भी हुआ है, लेकिन साथियों मोदी इतने से संतुष्ट नहीं है जो काम हुआ है ना वह तो ट्रेलर है ट्रेलर... अभी हमें पूर्णिया को, सीमांचल को, बिहार को और पूरे हिंदुस्तान को बहुत आगे लेकर जाना है। कई बार लोग पूछते हैं कि मोदी के लिए समाज के आखिरी पायदान पर खड़ा व्यक्ति हमारा दलित, पिछड़ा, आदिवासी यह इतनी प्राथमिकता क्यों है... ये समाज मोदी की प्राथमिकता इसलिए है क्योंकि यही समाज सबसे ज्यादा गरीबी से प्रभावित है और मोदी गरीबी से ही निकलकर आपके बीच आया है। मोदी के ऊपर अपने इस समाज का, बाबा साहब का और उनके संविधान का बहुत बड़ा कर्ज है। इसलिए हमारी सरकार ने संविधान को एक श्रद्धा का स्थान मिले... संविधान को आस्था का स्थान मिले.... संविधान के प्रति देश का प्रत्येक व्यक्ति समर्पित हो, संविधान की भावना को हर देशवासी तक पहुंचाने के लिए लगातार काम किया है। हमारी ही सरकार ने देश में संविधान दिवस मनाने की शुरुआत की... आज बाबा साहब के संविधान को सेलिब्रेट करने के लिए बच्चों के स्कूलों से लेकर, सुप्रीम कोर्ट और संसद तक में कार्यक्रम किए जाते हैं और ये वक्त तो बहुत विशेष है, इस साल संविधान के 75 वर्ष की शुरुआत हो रही है जैसे हमनें आजादी के 75 वर्ष पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाया इसी तरह इस वर्ष हमें संविधान के 75 वर्ष का पर्व मनाना है हमनें तय किया है हम देश के कोने- कोने में बाबा साहब के संविधान की भावना को लेकर जाएंगे.. देश की युवा पीड़ी को, देश की गौरवशाली संविधान के निर्माण की प्रक्रिया, उसके अध्याय, उसका महत्व बताएंगे, लेकिन दूसरी तरफ वो लोग हैं जिन्होंने आपातकाल में संविधान को रद्द करने, संविधान को बंधक बनाने, और संविधान को तोड़ने-मरोड़ने का काम किया था...हमें याद रखना है जो लोग सत्ता और सरकार को एक परिवार की मुट्ठी में रखना चाहते हैं, संविधान उनकी आंखों में हमेशा खटकते है इसलिए अब यह लोग संवैधानिक व्यवस्था से हुए चुनाव के नतीजों को अस्वीकार करने की धमकी देने लगे हैं लेकिन इनके मंसूबे कामयाब ना हो संविधान दलित, पिछड़ा, आदिवासी की ताकत बना रहे इसके लिए हमें एकजुट होकर साथ खड़े रहना है।

साथियों,

अगले पांच वर्षों के कामकाज के लिए बीजेपी ने अपना संकल्प पत्र जारी किया है... इस संकल्प पत्र में मोदी ने गारंटी दी है। देश के सभी जरूरतमंदों को आगे भी फ्री राशन, मुफत राशन मिलता रहेगा। मोदी ने गारंटी दी है गरीब, दलित, वंचित के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को हम हर जरूरतमंद तक लेकर जाएंगे। हमारी सरकार 3 करोड़ नये पक्के घर बनाएगी। देश में 70 साल से अधिक उम्र के सभी बुजुर्गों को मुफ्त इलाज की जिम्मेदारी भी सरकार उठाएगी। आप अपने परिवार में अपने बुजुर्गों को कह दीजिए अब वो बीमारी को छुपाए नहीं, अगर कोई तकलीफ है तो मोदी बैठा है ये मोदी की गारंटी है....

साथियों,

पिछले 10 वर्षों में एनडीए सरकार ने वो काम किए हैं जिन्हें पहले असंभव माने जाते थे। आज हर कोई कह रहा है बड़े कामों का दम सिर्फ भाजपा के पास है, एनडीए के पास है। आपको याद होगा पहले अड़ोस-पड़ोस के देश यहां हमला करके चले जाते थे, सीमा पर हमारे जवानों की आए दिन शहादत होती थी आप लोगों को दुख के साथ ही गुस्सा भी आता था आपका मन करता था कि इन्हें घर में घुसकर मारो... मोदी ने आपकी इच्छा का पालन किया और इसका नतीजा क्या हुआ जो देश हमें आंखें दिखाता था वो कटोरा लेकर के भटक रहा है।

साथियों,

दशकों से देश में लोग मांग कर रहे थे कि कश्मीर में अलग झंडा, अलग संविधान नहीं चलना चाहिए जो लोग दिन-रात संविधान के नाम पर हमको गालियां देते हैं ना इतने दशकों तक उन्होंने राज किया, आजादी के बात उनके हाथ में सत्ता आई अब तक आई लेकिन उनमें हिम्मत नहीं थी कि बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान को जम्मू- कश्मीर में लागू कर पाएं। बाबासाहब का संविधान वहां लागू नहीं होता था ये मोदी है, जो संविधान को समर्पित है। आज जम्मू- कश्मीर में भी आन-बान-शान के साथ हमारा संविधान लागू हो गया। कश्मीर से आपकी इच्छा थी 370 हटनी चाहिए तो ये घमंडिया गठबंधन वाले क्या कहते थे, ये कहते थे कि 370 हटी तो कश्मीर में आग लग जाएगी। आज आर्टिकल 370 का द-एंड हो चुका है। अगर कश्मीर में नहीं भारत को बांटने वालों के मंसूबों में जलन हो रही है आग लगी है।

साथियों,

कल रामनवमी का पवित्र त्यौहार भी है, ये लोग राम मंदिर के लिए भी यही कहते थे, बोलते थे कि राम मंदिर बना तो देश में आग लग जाएगी... आज हमारा राम मंदिर पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ा रहा है। अब कुंठा में घिरे ये कांग्रेस के लोग घमंडिया गठबंधन के लोग राम मंदिर का अपमान कर रहे हैं घमंडिया गठबंधन ने तो सनातन को मिटाने की कसम खा रखी है, 26 अप्रैल को आपका वोट इन्हें बताएगा कि सनातन मिटता है या ये लोग रहते हैं।

साथियों,

हमारा सीमांचल बिहार का एक संवेदनशील इलाका है... वोट बैंक की राजनीति करने वालों ने पूर्णिया और सीमांचल को अवैध घुसपेठ का ठिकाना बनाकर यहां की सुरक्षा को दांव पर लगाया है। इसका शिकार हमारे दलित, वंचित, पिछड़े और गरीब को होना पड़ा है। हमारे दलित भाइयों के घरों तक को जलाया गया था लेकिन मैं आपको आश्वासन देना चाहता हूं, देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाला हर तत्व सरकार की नजर में है। 4 जून का परिणाम इसी सीमांचल की सुरक्षा तय करेगा और जो लोग राजनीतिक फायदे के लिए सीएए का विरोध कर रहे हैं वो भी एक बात जरूर जान लें ये मोदी है ये ना डरने वाला है और ना ही झुकने वाला है।

साथियों,

आपने वह दौर भी देखा है, जब बिहार में जंगल राज था उस समय बिहार के इस इलाके में महा-जंगल राज हुआ करता था हिंसा, अराजकता, अपहरण और भ्रष्टाचार का यहां उद्योग चलता था। नीतीश जी के नेतृत्व में हमने बहुत मुश्किल से उस दौर को बदला है लेकिन आज एक बार फिर जंगल राज और महा- जंगल राज वाले लोग उस दौर की वापसी चाहते हैं, इनका एक ही एजेंडा है भ्रष्टाचार और लूट। हमारे पूर्णिया में कहते हैं ना हर बहे से खर खाए, बकरी खाए अचार, भाव ये मेहनत गरीब जनता करे और मलाई ये आरजेडी वाले लूटें... मोदी के रहते ये मुमकिन नहीं है इसलिए सब भ्रष्टाचारी के लूट के ठिकाने बचाने के लिए वो अब एक हो रहे हैं। मैं कहता हूं भ्रष्टाचार हटाओ, ये कहते हैं भ्रष्टाचारी बचाओ। मैं आपको एक गारंटी देता हूं, अगले पांच साल भ्रष्टाचार के खिलाफ और बड़ी कार्रवाइयों के पांच साल मान के चलिए।

साथियों,

पूर्णिया से एनडीए उम्मीदवार श्री संतोष कुमार जी, संतोष कुमार जी और कटिहार से दुलाल चंद्र गोस्वामी जी ये हमारे प्रत्याशी हैं। 26 अप्रैल को आपको इसी उत्साह के साथ इन्हें वोट करना है, पूर्णिया और कटियार से जीत का रिकॉर्ड बनाना चाहिए। बनाओगे... घर-घर जाओगे? पोलिंग बुथ जीतोगे? पोलिंग बुत जितना है, जीतोगे? हर पोलिंग बुत जितना है, जीतोगे? अच्छा मेरा एक और काम करोगे? मेरा एक और काम करोगे? करोगे क्या? ये मेरा काम है, करोगे? देखिए यहां से जाने के बाद घर- घर जाइए और जाकर के सबको कहिए कि हमारे मोदी जी आए थे, उन्होंने आपको प्रणाम कहा है। मेरा प्रणाम पहुंचा दोगे... देखिए मेरा प्रणाम पहुंचेगा तो सभी परिवार के लोग मुझे आशीर्वाद देंगे और जब परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलता है ना तो नई ऊर्जा मिलती है नई शक्ति मिलती है और मैं उसके लिए दौड़ता रहूंगा, आपके लिए दौड़ता रहूंगा और पहले ही मैंने कहा था मेरा पल- पल आपके नाम। मेरा पल- पल देश के नाम और इसलिए मेरा संकल्प है 24/7…. 24/7 फॉर 2047… विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए 24/7 हर पल आपका।

मेरे साथ बोलिए, भारत माता की…… भारत माता की……… भारत माता की……

बहुत-बहुत धन्यवाद...

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।