रामागुंडम में उन्होंने उर्वरक संयंत्र समर्पित किया
"दुनिया भर के विशेषज्ञ भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास पथ को लेकर उत्साहित हैं"
"एक नया भारत खुद को आत्मविश्वास और विकास की आकांक्षाओं के साथ दुनिया के सामने पेश कर रहा है"
"उर्वरक क्षेत्र केंद्र सरकार के ईमानदार प्रयासों का प्रमाण"
"एससीसीएल के निजीकरण का कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन नहीं है"
“तेलंगाना सरकार की एससीसीएल में 51% हिस्सेदारी है, जबकि केंद्र सरकार की 49% हिस्सेदारी है; केंद्र सरकार अपने स्तर पर एससीसीएल के निजीकरण से संबंधित कोई निर्णय नहीं ले सकती है”

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

ई सभकु, विच्च्चे-सिना रइतुलु,

सोदरा, सोदरी-मनुलकु, नमस्कार-मुलु।

तेलंगाना की गवर्नर डॉक्टर तमिलिसाई सौंदरराजन जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी श्री किशन रेड्डी जी, भगवंत खूबा जी, संसद में मेरे साथी बंदी संजय कुमार जी, श्री वेंकटेश नेथा जी, अन्य महानुभाव, भाइयों और बहनों।

रामागुंडम की धरती से पूरे तेलंगाना को मेरा आदरपूर्वक नमस्कार! और अभी मुझे बताया गया और मैं अभी टीवी स्क्रीन पर भी देख रहा था कि इस समय तेलंगाना की 70 विधानसभा क्षेत्रों में, 70 assembly segment में, हजारों किसान भाई-बहन वे भी इस कार्यक्रम में हमारे साथ जुड़े हुए हैं। मैं उन सभी किसान भाइयों-बहनों को भी उनका स्वागत करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं।

 

साथियों,

आज 10 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास तेलंगाना के लिए हुआ है। ये परियोजनाएं यहां खेती और उद्योग, दोनों को बल देने वाली हैं। फर्टिलाइज़र प्लांट हो, नई रेल लाइन हो, हाईवे हों, इनसे उद्योगों को भी विस्तार मिलेगा। इन परियोजनाओं से तेलंगाना में रोज़गार के नए अवसर बनेंगे, सामान्य जन की Ease of Living भी बढ़ेगी। इन सभी परियोजनाओं के लिए देशवासियों को, तेलंगाना वासियों को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

पिछले दो-ढाई साल से पूरा विश्व कोरोना महामारी से लड़ रहा है, दूसरी तरफ जो संघर्ष चल रहे हैं, तनाव चल रहे हैं, मिलिट्री एक्सन हो रहे हैं, उसका परिणाम भी, उसका प्रभाव भी देश और दुनिया पर पड़ रहा है। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों के बीच आज हम सभी पूरी दुनिया में एक और बात प्रमुखता से सुन रहे हैं। दुनिया के तमाम एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि भारत बहुत जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनॉमी बनकर के, उस दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा हैं। सभी एक्सपर्ट्स यह भी कह रहें हैं कि जितनी ग्रोथ 90 के बाद के 30 साल में हुई, उतनी अब सिर्फ कुछ ही वर्षों में होने वाली है। आखिर इतना अभूतपूर्व विश्वास आज दुनिया को, आर्थिक जगत के विद्वानों को इतना विश्वास आज भारत पर क्यों है? इसका सबसे बड़ा कारण है भारत में पिछले 8 वर्ष में हुआ बदलाव। पिछले 8 सालों में देश ने काम करने के पुराने तौर-तरीके बदल डाले हैं। इन 8 वर्षों में गवर्नेंस को लेकर सोच में भी बदलाव आया है, अप्रोच में भी बदलाव आया है। चाहे इंफ्रास्ट्रक्चर हो, चाहे सरकारी प्रक्रियाएं हो, चाहे Ease of Doing Business हो, इन बदलावों को प्रेरित कर रही हैं भारत की Aspirational Society, आज विकसित होने की आकांक्षा लिए, आत्मविश्वास से भरा हुआ नया भारत दुनिया के सामने है।

भाइयों और बहनों,

विकास हमारे लिए 24 घंटे, सातों दिन, 12 महीने और पूरे देश में चलने वाला मिशन है। हम एक प्रोजेक्ट का लोकार्पण करते हैं, तो अनेक नए प्रोजेक्ट पर काम करना शुरु कर देते हैं। ये हम आज यहां भी देख रहे हैं। और हमारा ये भी प्रयास होता है कि जिस प्रोजेक्ट का शिलान्यास हो, उस पर तेजी से काम हो, और वो तेजी से पूरा हो। रामागुंडम का ये फर्टिलाइज़र कारखाना इसका एक उदाहरण है। साल 2016 में इसका शिलान्यास किया था और आज इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया है।

भाइयों और बहनों,

21वीं सदी का भारत, बड़े लक्ष्यों को तय करके, उन्हें तेजी से प्राप्त करके ही आगे बढ़ सकता है। और आज जब लक्ष्य बड़े होते हैं, तो नई पद्धति अपनानी होती है, नई व्यवस्थाएं बनानी होती हैं। आज केंद्र सरकार पूरी ईमानदारी से इसी प्रयास में जुटी है। देश का फर्टिलाइजर सेक्टर भी इसका गवाह बन रहा है। बीते दशकों में हमने देखा है कि देश फर्टिलाइज़र के लिए ज्यादातर विदेशों पर इंपोर्ट करके उसी पर हम अपना गुज़ारा करते थे। यूरिया की डिमांड पूरी करने के लिए जो कारखाने लगे भी थे, वो भी टेक्नॉलॉजी पुरानी होने के कारण बंद हो चुके थे। जिसमें रामागुंडम का खाद कारखाना भी था। इसके अलावा एक और बड़ी दिक्कत थी। इतना महंगा यूरिया विदेश से आता था, लेकिन वो किसान तक पहुंचने के बजाय अवैध कारखानों में चोरी करके पहुंचाया जाता था। इससे किसानों को यूरिया पाने के लिए ही रात-रात भर कतारों में खड़ा रहना पड़ता था और कई बार लाठियां भी झेलनी पड़ती थीं। 2014 से पहले हर साल, हर सीज़न में यही समस्या किसानों के सामने आती थी।

साथियों,

2014 के बाद केंद्र सरकार ने पहला काम ये किया कि यूरिया की शत-प्रतिशत नीम कोटिंग कर दी। इससे यूरिया की कालाबाज़ारी रुक गई। केमिकल की फैक्ट्री में जो यूरिया पहुंच जाता था वो बंद हो गया। खेत में कितना यूरिया डालना है, ये पता करने के लिए भी किसान के पास बहुत सुविधा नहीं थी, रास्ते नहीं थे। इसलिए हमने किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड देने का पूरे देश में अभियान किया। सॉयल हेल्थ कार्ड मिलने से किसान को ये जाऩकारी मिली, की भई अगर हमें उपज़ बढ़ानी है तो बेवजह यूरिया के उपयोग की जरूरत नहीं है, उसको मिट्टी के स्वभाव का पता चलने लगा।

साथियों,

एक बहुत बड़ा काम हमने यूरिया में आत्मनिर्भरता को लेकर शुरु किया। इसके लिए देश के जो 5 बड़े खाद कारखाने बरसों से बंद पड़े थे, उनको फिर से शुरु करना जरूरी था। अब आज देखिए यूपी के गोरखपुर में खाद उत्पादन शुरु हो चुका है। रामागुंडम खाद कारखाने का भी लोकार्पण हो गया है। जब ये पांचों कारखानें चालू हो जाएंगे तो देश को 60 लाख टन यूरिया मिलने लगेगा। यानि हज़ारों करोड़ रुपए विदेश जाने से बचेंगे और किसानों को यूरिया और आसानी से मिलेगा। रामागुंडम खाद कारखाने से तेलंगाना के साथ ही आंध्र प्रदेश, कर्नाटका, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के किसानों को भी मदद मिलेगी। इस प्लांट की वजह से इसके आसपास दूसरे बिजनेस के अवसर भी बनेंगे, लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट से जुड़े काम खुलेंगे। यानि 6 हज़ार करोड़ रुपए जो केंद्र सरकार ने यहां निवेश किया है, इससे कई हज़ार करोड़ का लाभ तेलंगाना के नौजवानों को होने वाला है।

भाइयों और बहनों,

देश के फर्टिलाइजर सेक्टर को आधुनिक बनाने के लिए हम नई टेक्नॉलॉजी पर भी उतना ही बल दे रहे हैं। भारत ने यूरिया की नैनो टेक्नॉलॉजी विकसित की है। एक बोरी यूरिया से जो लाभ होता है, वो नैनो यूरिया की एक बोतल से ही मिलने वाला है।

साथियों,

खाद में आत्मनिर्भरता कितनी आवश्यक है, ये हम आज की वैश्विक परिस्थिति को देखते हुए और ज्यादा अनुभव कर रहे हैं। कोरोना आया, लड़ाई छिड़ी तो, दुनिया में फर्टिलाइजर की कीमत बढ़ गई। लेकिन हमने इन बढ़ी कीमतों का बोझ अपने किसान भाइयों-बहनों पर नहीं पड़ने दिया। यूरिया का हर बैग जो केंद्र सरकार विदेश से लाती हैं वो लगभग एक बोरा, एक बोरी फर्टिलाइजर बाहर से लाते हैं तो 2 हज़ार रुपए में खरीदते हैं, भारत सरकार 2 हज़ार रूपये देकर के लाती हैं। लेकिन किसानों से 2 हज़ार रूपये नहीं लेते हैं। सारा खर्च भारत सरकार उठाती है, सिर्फ 270 रुपए में ये फर्टिलाइजर की थैली किसान को मिलती है। इसी प्रकार DAP का एक बैग भी सरकार को करीब-करीब 4 हजार रुपए में पड़ता है। लेकिन किसानों से 4 हज़ार रूपये नहीं लेते हैं। इस एक बैग पर भी सरकार, एक-एक बैग पर ढ़ाई हजार रुपए से भी ज्यादा सब्सिडी सरकार देती है।

 

 

साथियों,

बीते 8 वर्षों में किसान को सस्ती खाद देने के लिए ही केंद्र सरकार ये आंकड़ा भी याद रखना भाइयों बताना लोगों को 8 वर्ष में किसान को खाद का बोझ न बढ़े, उसको सस्ती खाद मिले, इसलिए साढ़े नौ लाख करोड़ रुपए यानि करीब़-करीब़ 10 लाख करोड़ रूपये भारत सरकार खर्च कर चुकी है। इस वर्ष ही केंद्र सरकार ढाई लाख करोड़ रुपए से ज्यादा किसानों को सस्ती खाद देने के लिए खर्च करेगी। ढाई लाख करोड़ रुपया। इसके अलावा हमारी सरकार पीएम किसान सम्मान निधि के तहत भी लगभग सवा 2 लाख करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर चुकी है। किसानों के हितों को सर्वोपरि रखने वाली जब सरकार दिल्ली में हैं तो किसानों की भलाई के लिए अनेक ऐसे प्रकल्पों को आगे बढ़ाते हैं, काम करते हैं।

साथियों,

दशकों से हमारे देश के किसान खाद से जुड़ी एक और समस्या से भी जूझ रहे थे। दशकों से खाद का ऐसा बाज़ार बन गया था, जिसमें भांति-भांति के फर्टिलाइज़र, भांति-भांति फर्टिलाइज़र के ब्रांड ये बाजार में बिकते थे। इस वजह से किसान के साथ धोखाधड़ी भी बहुत होती थी। अब केंद्र सरकार ने इससे भी किसानों को राहत देने की शुरुआत की है। अब देश में यूरिया का सिर्फ, सिर्फ और सिर्फ एक ही ब्रांड होगा, भारत यूरिया-भारत ब्रांड। इसकी कीमत भी तय है और क्वालिटी भी तय है। ये सारे प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि देश के किसानों, विशेष रूप से छोटे किसानों के लिए कैसे हम सिस्टम को रिफॉर्म कर रहे हैं।

साथियों,

हमारे देश में एक और चुनौती कनेक्टिविटी के इंफ्रास्ट्रक्चर की रही है। आज देश इस कमी को भी दूर कर रहा है। देश के सभी राज्यों में हाईवे, आधुनिक रेलवे, एयरपोर्ट्स, वॉटरवेज़ और इंटरनेट हाईवे पर तेजी से काम हो रहा है। अब इसे पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान से नई ऊर्जा मिल रही है। आप याद करिए पहले क्या होता था? उद्योगों के लिए स्पेशल जोन डिक्लेयर होते थे। लेकिन वहां तक सड़क, बिजली, पानी जो प्राथमिक सुविधाएं चाहिए, वो भी पहुंचाने में कई-कई साल लग जाते थे। अब इस कार्यशैली को हम बदल रहे हैं। अब इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर सभी स्टेकहोल्डर और प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर, एक तय रणनीति पर काम करते हैं। इससे प्रोजेक्ट्स के लटकने-भटकने की संभावना खत्म हो रही है।

साथियों,

भद्राद्रि कोत्तागुडेम ये जिला और खम्मम जिले को जोड़ने वाली नई रेल लाइन आज आपकी सेवा के लिए समर्पित है। इस रेल लाइन से यहां के स्थानीय लोगों को तो लाभ होगा ही, पूरे तेलंगाना को भी लाभ होगा। इससे तेलंगाना के बिजली सेक्टर को लाभ होगा, उद्योगों को लाभ होगा और नौजवानों के लिए रोज़गार के नए अवसर बनेंगे। निरंतर प्रयासों के कारण 4 साल में ये रेल लाइन बनकर भी तैयार है और बिजलीकरण भी हो चुका है। इससे कोयला कम खर्च में बिजली कारखाने तक पहुंच पाएगा और प्रदूषण भी कम होगा।

साथियों,

आज जिन 3 हाईवे के चौड़ीकरण का काम शुरू हुआ है, उससे कोयला बेल्ट, औद्योगिक बेल्ट और गन्ना किसानों को सीधा लाभ होगा। यहां तो हल्दी की पैदावार बढ़ाने में भी हमारे किसान भाई-बहन जुटे हुए हैं। गन्ना किसान हों, हल्दी पैदा करने वाले किसान हों, यहां सुविधाएं बढ़ेंगी तो उनके लिए अपनी उपज का ट्रांसपोर्टेशन आसान होगा। इसी प्रकार कोयले की खदानों और बिजली कारखानों के बीच भी सड़क चौड़ी होने से सुविधा होगी, समय कम लगेगा। हैदराबाद-वारंगल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ककाटिया मेगा टेक्सटाइल पार्क की चौड़ी सड़कों से कनेक्टिविटी, इनका भी सामर्थ्य बढ़ाएगी।

साथियों,

जब देश विकास करता है, विकास के कार्यों में गति आती है, तो कई बार राजनीतिक स्वार्थ के लिए, कुछ विकृत मानस वाले लोग, कुछ ताकतें अपना अफवाह तंत्र rumours अफवाह तंत्र चलाने लगती हैं, लोगों को भड़काने लगती हैं। तेलंगाना में ऐसी ही अफवाहें आजकल ‘सिंगारेणी कोइलरीज कंपनी लिमिटेड-SCCL’ और विभिन्न कोल माइंस को लेकर उड़ाई जा रही है। और मैंने सुना है, हैदराबाद से उसको हवा दी जा रही है। उसमें नए-नए रंग भरे जा रहे हैं। मैं आज जब आपके बीच आया हूं, तो मैं कुछ जानकारी आपको देना चाहता हूं कुछ फैक्ट्स आपके सामने रखना चाहता हूं, कुछ तथ्य आपको बताना चाहता हूं। ये अफवाह फैलाने वाले को ये भी पता नहीं है कि ये झूठ उनका पकड़ा जाएगा। सबसे बड़ा झूठ समझिए और यहां पत्रकार मित्र बैठे हैं, जरा बारीकी से देख ले इसको। SCCL में 51 परसेंट भागीदारी ये तेलंगाना की राज्य सरकार की है, जबकि भारत सरकार की हिस्सेदारी सिर्फ 49 परसेंट है। SCCL के निजीकरण से जुड़ा कोई भी फैसला केंद्र सरकार अपने स्तर पर कर ही नहीं सकती है, 51 परसेंट उनके पास हैं। मैं एक बार फिर दोहराउंगा SCCL के प्राइवेटाइजेशन का कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन नहीं है और न ही केंद्र सरकार का कोई इरादा है। और इसलिए, मैं अपने भाई-बहनों से आग्रह करता हूं कि किसी अफवाह पर जरा भी ध्यान ना दें। ये झूठ के व्यापारियों को हैदराबाद में रहने दें।

साथियों,

हम सभी ने, देश में कोल माइंस को लेकर हज़ारों करोड़ रुपए के घोटाले होते देखें हैं। इन घोटालों में देश के साथ ही श्रमिकों, गरीबों और उन क्षेत्रों का नुकसान हुआ, जहां ये माइन्स थीं। आज देश में कोयले की बढ़ती हुई जरूरत को देखते हुए कोल माइंस की पूरी पारदर्शिता के साथ नीलामी की जा रही है। जिस क्षेत्र से खनिज निकल रहा है, उसका लाभ वहां रहने वाले लोगों को देने के लिए हमारी सरकार ने DMF यानि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड भी बनाया है। इस फंड के तहत भी हजारों करोड़ रुपए राज्यों को रिलीज किए गए हैं।

भाइयों और बहनों,

हम ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र पर चलते हुए तेलंगाना को आगे बढ़ाना चाहते हैं। तेलंगाना के तेज़ विकास के लिए आप सभी का आशीर्वाद हमें मिलता रहेगा, इसी विश्वास के साथ फिर एक बार आपको ये ढेर सारे विकास कार्यों की बहुत-बहुत बधाई। मेरे किसान भाइयों को विशेष बधाई और इतनी बड़ी तादाद में आप लोग आए, हैदराबाद में कुछ लोगों को आज नींद नहीं आएगी। इतनी बड़ी तादाद में आने के लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। धन्यवाद।

मेरे साथ बोलिए। भारत माता की जय। दोनों मुठ्ठी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

धन्यवाद जी!

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आपने सिर्फ पदकों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि पूरी पीढ़ी को तैयार किया: CWG चैंपियंस से पीएम मोदी
August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।