डिजिटल रूप से सशक्त युवा इस दशक को भारत का ‘टेकेड’ बनाएंगेः प्रधानमंत्री
डिजिटल इंडिया आत्मनिर्भर भारत का साधन हैः प्रधानमंत्री
डिजिटल इंडिया का अर्थ तेज लाभ,पूरा लाभ, डिजिटल इंडिया का अर्थ न्यूनतम सरकार,अधिकतम शासनः प्रधानमंत्री
कोरोना काल में भारत के डिजिटल सॉल्यूशंस ने विश्व का ध्यान आकर्षित किया हैः प्रधानमंत्री
10 करोड़ से अधिक किसान परिवार के खातों में 1.35 लाख करोड़ रुपए जमा किए गएः प्रधानमंत्री
डिजिटल इंडिया ने एक देश-एक एमएसपी के भाव को साकार किया हैः प्रधानमंत्री

नमस्‍कार,

केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी श्री रविशंकर प्रसाद जी, श्री संजय धोत्रे जी, Digital India अलग-अलग Initiatives से जुड़े सभी मेरे साथियों, भाइयों और बहनों! Digital India अभियान के 6 वर्ष पूरे होने पर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं !

आज का दिन भारत के सामर्थ्य, भारत के संकल्प और भविष्य की असीम संभावनाओं को समर्पित है। आज का दिन, हमें ये याद दिला रहा है कि एक राष्ट्र के रूप में, सिर्फ 5-6 वर्षों में हमने Digital Space में कितनी ऊंची छलांग लगाई है।

साथियों,

भारत को डिजिटल पथ पर तेज़ गति से आगे बढ़ाते हुए हर देशवासी का जीवन आसान बनाने का सपना पूरे देश का है। इसको पूरा करने में हम सभी दिन रात लगे हुए हैं। देश में आज एक तरफ Innovation का जूनून है तो दूसरी तरफ उन Innovations को तेजी से adopt करने का जज़्बा भी है। इसलिए, Digital India, भारत का संकल्प है। Digital India, आत्मनिर्भर भारत की साधना है, Digital India, 21वीं सदी में सशक्त होते भारत का एक जयघोष है।

साथियों,

Minimum Government – Maximum Governance के सिद्धांत पर चलते हुए, सरकार और जनता के बीच, सिस्टम और सुविधाओं के बीच, समस्याओं और सर्विस के बीच gap कम करना, इनके बीच की मुश्किलें खत्म करना और जन सामान्‍य की सुविधा बढ़ाना, ये समय की मांग रहा है और इसलिए, Digital India, सामान्य नागरिक को सुविधा और उनके Empowerment का एक बहुत बड़ा माध्यम है।

साथियों,

Digital India ने ये कैसे संभव किया है, इसका शानदार उदाहरण है- डिजी लॉकर। स्कूल के सर्टिफिकेट, कॉलेज की डिग्री, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, आधार या दूसरे दस्तावेज़ों को संभालकर रखना हमेशा से लोगों के लिए बहुत बड़ी चिंता रहा है। कई बार बाढ़ में, भूकंप में, सुनामी में, कहीं आग लगने की वजह से, लोगों के जरूरी पहचान पत्र नष्ट हो जाते हैं। लेकिन अब 10वीं, 12वीं, कॉलेज, यूनिवर्सिटी की मार्कशीट से लेकर दूसरे तमाम दस्तावेज़ सीधे डिजीलॉकर में सहज रूप से रखे जा सकते हैं। अभी कोरोना के इस काल में, कई शहरों के कॉलेज, एडमिशन के लिए स्कूल सर्टिफिकेट्स का वेरिफिकेशन, डिजि-लॉकर की मदद से ही कर रहे हैं।

साथियों,

ड्राइविंग लाइसेंस हो, बर्थ सर्टिफिकेट हो, बिजली का बिल भरना हो, पानी का बिल भरना हो, इनकम टैक्स रिटर्न भरना हो, इस तरह के अनेक कामों के लिए अब प्रक्रियाएं डिजिटल इंडिया की मदद से बहुत आसान, बहुत तेज हुई है। और गांवों में तो ये सब, अब अपने घर के पास CSC सेंटर में भी हो रहा है। Digital India ने गरीब को मिलने वाले राशन की डिलिवरी को भी आसान किया है।

ये Digital India की ही शक्ति है कि वन नेशन, वन राशन कार्ड का संकल्प पूरा हो रहा है। अब दूसरे राज्य में जाने से नया राशन कार्ड नहीं बनाना होगा। एक ही राशनकार्ड पूरे देश में मान्य है। इसका सबसे बड़ा लाभ उन श्रमिक परिवारों को हो रहा है, जो काम के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। अभी मेरी एक ऐसे ही साथी से बात भी हुई है।

हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी इससे जुड़ा एक बड़ा अहम फैसला दिया है। कुछ राज्‍य हैं जो इस बात को मानते नहीं थे। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने हुक्‍म किया है कि जिन राज्‍यों ने अब तक वन नेशन, वन राशन कार्ड वाली बात नहीं स्‍वीकार की है, वो तुरंत लागू करें। हुक्‍म करना पड़ा सुप्रीम कोर्ट को। उन्हें भी इस योजना को लागू करने को कहा गया है। मैं इस फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट का भी अभिनंदन करता हूं, क्‍योंकि ये गरीबों के लिए है, मजदूरों के लिए है। अपने स्‍थान से बाहर जिनको जाना पड़ रहा है उनके लिए है। और अगर संवेदनशीलता है तो ऐसे काम को प्राथमिकता तुरंत मिलती है।

साथियों,

Digital India, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मज़बूती से आगे बढ़ा रहा है। Digital India, उन लोगों को भी सिस्टम से connect कर रहा है, जिन्होंने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी। अभी कुछ और लाभार्थियों से मैंने बात की है। वो बड़े गौरव और संतोष के साथ बता रहे थे कि डिजिटल समाधान से कैसे उनके जीवन में बदलाव आया है।

रेहड़ी-ठेला-पटरी वालों ने कब सोचा था कि वो बैंकिंग सिस्टम से जुड़ेंगे और उनको भी बैंक से आसान और सस्ता ऋण मिलेगा। लेकिन आज स्वनिधि योजना से ये संभव हो रहा है। गांव में घर और जमीन से जुड़े विवाद और असुरक्षा की खबरें भी अक्सर सुनने में आती रही हैं। लेकिन अब स्वामित्व योजना के तहत गांव की जमीनों को ड्रोन मैपिंग की जा रही है। डिजिटल माध्यम से ग्रामीणों को अपने घर की कानूनी सुरक्षा का दस्तावेज़ मिल रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर दवाई तक के लिए, जो प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं, उनसे देश के करोड़ों साथी आज लाभान्वित हो रहे हैं।

साथियों,

दूर सुदूर तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाने में भी Digital India अहम भूमिका निभा रहा है। थोड़ी देर पहले बिहार के साथी ने मुझे बताया कि e-संजीवनी ने कैसे इस मुश्किल समय में घर बैठे ही उनकी दादी मां के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ की चिंता की। सबको स्वास्थ्य सुविधा मिले, समय पर अच्छी सुविधा मिले, ये हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए National Digital Health Mission के तहत एक प्रभावी प्लेटफॉर्म पर भी काम चल रहा है।

इस कोरोना काल में जो Digital Solutions भारत ने तैयार किए हैं, वो आज पूरी दुनिया में चर्चा का भी विषय हैं और आकर्षण का भी विषय हैं। दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल Contact Tracing App में से एक, आरोग्य सेतु से कोरोना संक्रमण को रोकने में बहुत मदद मिली है। टीकाकरण के लिए भारत के COWIN app में भी आज अनेकों देश दिलचस्‍पी दिखा रहे हैं। वो चाहते हैं कि उनके देश में इस योजना का लाभ मिले। Vaccination की प्रक्रिया के लिए ऐसा Monitoring tool होना हमारी तकनीकी कुशलता का प्रमाण है।

साथियों,

कोविड काल में ही हमने अनुभव किया कि डिजिटल इंडिया ने हमारे काम को कितना सरल बना दिया है। आज तो हम देखते हैं कि कोई पहाड़ों से, कोई गांवों में बने होम स्टे से, अपना काम कर रहा है। कल्पना कीजिए, ये डिजिटल कनेक्ट नहीं होता तो कोरोना काल में क्या स्थिति होती? कुछ लोग डिजिटल इंडिया के प्रयासों को सिर्फ गरीब से जोड़कर देखते हैं। लेकिन इस अभियान ने मध्यम वर्ग और युवाओं की जिंदगी भी बदल दी है।

और हमारे ये आजकल ये Millennials, अगर आज ये सारी दुनिया न होती, टेक्‍नोलॉजी न होती तो उनका क्या हाल होता? बिना सस्ते स्मार्टफोन, सस्ते इंटरनेट और सस्ते डेटा के, उनके Daily routine में जमीन आसमान का अंतर होता। इसलिए, मैं कहता हूं, Digital India यानि सबको अवसर, सबको सुविधा, सबकी भागीदारी। डिजिटल इंडिया यानि सरकारी तंत्र तक हर किसी की पहुंच। Digital India यानि पारदर्शी, भेदभाव रहित व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर चोट। Digital India यानि समय, श्रम और धन की बचत। Digital India यानि तेज़ी से लाभ, पूरा लाभ। Digital India यानि मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिम गवर्नेंस।

साथियों,

Digital India अभियान की एक और खास बात रही कि इसमें Infrastructure के Scale और Speed, दोनों पर बहुत बल दिया गया। देश के गांवों में करीब ढाई लाख Common Service Centre ने इंटरनेट को वहां भी पहुंचाया, जहां कभी ये बहुत मुश्किल माना जाता था। भारत-नेट योजना के तहत गांव-गांव, ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने के लिए मिशन मोड पर काम चल रहा है।

PM-WANI योजना से, देश-भर में ऐसे Access points बनाए जा रहे हैं, जहां कम से कम कीमत में ब्रॉडबैंड-WIFI- इंटरनेट उपलब्ध हो सके। इससे विशेष रूप से हमारे गरीब परिवार के बच्चों को, युवा साथियों को ऑनलाइन शिक्षा के अवसरों से जोड़ने में मदद मिलेगी। अब तो कोशिश ये भी है कि देश में सस्ते Tablets और दूसरे डिजिटल डिवाइस उपलब्ध हो सकें। इसके लिए देश और दुनिया की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को PLI स्कीम की सुविधा दी गई है।

साथियों,

आज भारत जितनी मजबूती के साथ दुनिया की अग्रणी Digital Economies में से एक बना है, वो हर भारतवासी के लिए गौरव का विषय है। पिछले 6-7 साल में अलग-अलग योजनाओं के तहत करीब-करीब 17 लाख करोड़ रुपए सीधे, लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। कोरोना काल में Digital India अभियान देश के कितना काम आया है, ये भी हम सभी ने देखा है। जिस समय बड़े-बड़े समृद्ध देश, लॉकडाउन के कारण अपने नागरिकों को सहायता राशि नहीं भेज पा रहे थे, भारत हजारों करोड़ रुपए, सीधे लोगों के बैंक खातों में भेज रहा था। कोरोना के इस डेढ़ साल में ही भारत ने विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 7 लाख करोड़ रुपए DBT के माध्यम से लोगों के बैंक अकाउंट में भेजे हैं। भारत में आज सिर्फ BHIM UPI से ही हर महीने करीब 5 लाख करोड़ रुपए का लेन देन होता है।

साथियों,

किसानों के जीवन में भी डिजिटल लेनदेन से अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 10 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों को 1 लाख 35 करोड़ रुपए सीधे बैंक अकाउंट में जमा किए गए हैं। Digital India ने वन नेशन, वन MSP की भावना को भी साकार किया है। इस वर्ष गेहूं की रिकॉर्ड खरीद का लगभग 85 हज़ार करोड़ रुपए सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचा है। e-NAM पोर्टल से ही अब तक देश के किसान एक लाख 35 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन कर चुके हैं।

साथियों,

One Nation, One Card, यानि देशभर में ट्रांसपोर्ट और दूसरी सुविधाओं के लिए पेमेंट का एक ही माध्यम, एक बहुत बड़ी सुविधा सिद्ध होने वाला है। Fastag के आने से पूरे देश में ट्रांसपोर्ट आसान भी हुआ है, सस्ता भी हुआ है और समय की भी बचत हो रही है। इसी तरह GST से, eWay Bills की व्यवस्था से, देश में व्यापार-कारोबार में सुविधा और पारदर्शिता, दोनों सुनिश्चित हुई है। कल ही GST को चार वर्ष पूरे हुए हैं। कोरोना काल के बावजूद, पिछले आठ महीने से लगातार GST Revenue एक लाख करोड़ रुपए के मार्क को पार कर रहा है। आज एक करोड़ 28 लाख से अधिक रजिस्टर्ड उद्यमी, इसका लाभ ले रहे हैं। वहीं, Govt e-Marketplace यानि GeM से होने वाली सरकारी खरीद ने पारदर्शिता बढ़ाई है, छोटे से छोटे व्यापारी को अवसर दिया है।

साथियों,

ये दशक, डिजिटल टेक्नॉलॉजी में भारत की क्षमताओं को, ग्लोबल डिजिटल इकॉनॉमी में भारत की हिस्सेदारी को बहुत ज्यादा बढ़ाने वाला है। इसलिए बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स इस दशक को India’s Techade के रूप में देख रहे हैं। एक अनुमान है कि अगले कुछ सालों में भारत की दर्जनों टेक्नॉलॉजी कंपनियां यूनिकॉर्न क्लब में शामिल होंगी। ये दिखाता है कि डेटा और डेमोग्राफिक डिविडेंड की सामूहिक ताकत, कितना बड़ा अवसर हमारे सामने ला रही है।

साथियों,

5G टेक्नॉलॉजी पूरी दुनिया में जीवन के हर पहलू में बड़े बदलाव करने वाली है। भारत भी इसके लिए तैयारी में जुटा है। आज जब दुनिया इंडस्ट्री 4.0 की बात कर रही है, तो भारत इसके एक बड़े भागीदार के रुप में उपस्थित है। डेटा पावर-हाउस के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी का भारत को एहसास है। इसलिए Data protection के लिए भी हर ज़रूरी प्रावधान पर निरंतर काम चल रहा है। कुछ दिन पहले ही, साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी इंटरनेशनल रैंकिंग आई है। 180 से ज्यादा देशों के ITU-Global Cyber Security Index में भारत दुनिया के टॉप-10 देशों में शामिल हो चुका है। साल भर पहले तक हम इसमें 47वीं रैंक पर थे।

साथियों,

मुझे भारत के युवाओं पर, उनके सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है। मुझे विश्वास है कि हमारे युवा Digital Empowerment को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते रहेंगे। हमें मिलकर प्रयास करते रहना होगा। हम इस Decade को India’s Techade बनाने में सफल होंगे, इसी कामना के साथ आप सभी को फिर से मेरी बहुत बहुत शुभकामनाएं !

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।