साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं: प्रधानमंत्री मोदी
किसान और उपभोक्ता के बीच के layers और उपज की बर्बादी को कम करना हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए परंपरागत कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है: पीएम मोदी
सरकार का जोर कृषि टेक्नॉलॉजी आधारित स्टार्ट अप्स को प्रमोट करने पर भी है ताकि स्मार्ट और प्रिसिजन एग्रीकल्चर के लिए ज़रूरी किसानों के डेटाबेस और एग्री स्टैक का उपयोग किया जा सके: प्रधानमंत्री

गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री विजय रुपाणी जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी, श्री पुरुषोत्तम रुपाला जी, गुजरात के कृषिमंत्री श्री आरसी फाल्दु जी, मंच पर विराजमान अन्य महानुभाव, देश और दुनियाभर से आए वैज्ञानिक गण और मेरे प्यारे किसान बहनों और भाईयों।

महात्मा की धरती पर, महात्मा मंदिर में आप सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन है, स्वागत है।

मुझे बताया गया है कि Global Potato Conclave में दुनिया के अनेक देशों से साइंटिस्ट आज इस Conclave में आए हैं, हज़ारों किसान साथी और दूसरे Stakeholders भी इस समारोह में जुटे हैं। अगले तीन दिनों में आप सभी पूरे विश्व के Food और Nutrition की डिमांड से जुड़े हुए महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करने वाले हैं, कुछ नए समाधान निकालने वाले हैं।

इस कॉन्कलेव की खास बात ये भी है कि यहां Potato Conference, Agri Expo और Potato Field Day, तीनों एक साथ हो रहे हैं। मुझे बताया गया है कि करीब 6 हज़ार किसान फील्ड डे के मौके पर सब गुजरात के खेतों में जाने वाले हैं। मैं समझता हूं कि अपने आप में ये प्रशंसनीय प्रयास है।

साथियों, ये भी बहुत अच्छी बात है कि इस बार Potato Conclave दिल्ली से बाहर हो रहा है, हजारों आलू किसानों के बीच हो रहा है। गुजरात में इस कॉन्क्लेव का होना इसलिए भी अहम है क्योंकि, ये राज्य Potato की Productivity के लिहाज़ से देश का पहले नंबर का राज्य है।

साथियों,

गुजरात बीते 2 दशकों में आलू उत्पादन और आलू का एक्सपोर्ट हब बनकर उभरा है। बीते 10-11 साल में जहां भारत का कुल Potato Production करीब 20 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, वहीं गुजरात में ये दर 170 प्रतिशत से बढ़ा है

आलू की क्वांटिटी और क्वालिटी में हुई इस वृद्धि का कारण है, बीते 2 दशकों में लिए गए पॉलिसी डिसिजन और सिंचाई की आधुनिक और पर्याप्त सुविधाएं। बेहतर पॉलिसी डिसिजंस के कारण आज देश के बड़े Potato Processing Units आज गुजरात में हैं और ज्यादातर Potato Exporters भी गुजरात बेस्ड हैं। गुजरात में कोल्ड स्टोरेज का एक बड़ा और आधुनिक नेटवर्क है। इनमें से अनेक वर्ल्ड क्लास फैसिलिटीज़ से लैस हैं।

इसके अलावा आज सुजलाम-सुफलाम और सौनी योजना के माध्यम से गुजरात के उन क्षेत्रों में भी सिंचाई की सुविधा पहुंची है, जो कभी सूखे से प्रभावित रहते थे।

सरदार सरोवर डैम के कारण गुजरात का एक बड़ा हिस्सा सिंचाई के दायरे में आ गया। नहरों का इतना व्यापक नेटवर्क बहुत कम समय में तैयार करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

सिंचाई में भी साइंटिफिक और टेक्नॉलॉजिकल अप्रोच लगातार सुधार होने लगा है, उसे अपनाया जा रहा है। Per Drop More Crop इस मंत्र की भाव लगातार सुधार होने लगा है, उसे अपनाया जा रहा है। ना पर काम करते हुए माइक्रो इरिगेशन पर फोकस किया गया, Drip या Sprinkler Irrigation को प्रमोट किया गया।

साथियों,

गुजरात के ये प्रयोग बीते 5 वर्ष में पूरे देश के लिए भी किए गए हैं। साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर के हम लगातार आगे बढ़ते गए है और बहुत कुछ Achieve करते गए है। महत्तवपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं किसानों के प्रयास और सरकार की पॉलिसी के कॉम्बिनेशन का ही परिणाम है कि अनेक अनाजों और दूसरे खाने के सामान के उत्पादन में भारत दुनिया के टॉप-3 देशों में है। एक समय में हमारे सामने दाल का संकट आ गया था, लेकिन इस संकट पर भी देश के किसानों ने ठान ली और देश ने विजय पाई है।

साथियों,

खेती को लाभकारी बनाने के लिए सरकार का फोकस खेत से लेकर फूड प्रोसेसिंग और डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर तक एक आधुनिक और व्यापक नेटवर्क खड़ा करने का है। आने वाले 5 वर्षों में सिर्फ सिंचाई और खेती से जुड़े दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं।

इतना ही नहीं, फूड प्रोसेसिंग से जुड़े सेक्टर को प्रमोट करने के लिए केंद्र सरकार ने भी अनेक कदम उठाए हैं। चाहे इस सेक्टर को 100 परसेंट फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के लिए खोलने का फैसला हो या फिर पीएम किसान संपदा योजना के माध्यम से वैल्यू एडिशन और वैल्यू चेन डेवलपमेंट में मदद, हर स्तर पर कोशिश की जा ही है। इस योजना के तहत बहुत ही कम समय में सैकड़ों करोड़ रुपए के अनेक प्रोजेक्टस देश में पूरे हो चुके हैं।

साथियों,

सरकार का प्रयास है कि खेती की लागत कम हो, किसान का खर्च कम हो। सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से, किसानों के अनेक छोटे खर्चों को पूरा करने में मदद मिली है। अब तक 8 करोड़ किसानों को इसका लाभ दिया जा चुका है। इस महीने के शुरुआत में, एक साथ 6 करोड़ किसानों के बैंक खातों में, 12 हजार करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर करके एक नया रिकॉर्ड भी बनाया गया है।

साथियों,

किसान और उपभोक्ता के बीच के Layers और उपज की बर्बादी को कम करना हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए परंपरागत कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसानोंको ऋण की, टेक्नॉलॉजी की और मार्केट तक एक्सेस आसान हो, इसके लिए Farmer Producer Organizations को प्रमोट किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि आने वाले 5 वर्षों में 10 हज़ार नए FPOs तैयार किए जाएं। यही नहीं e-NAM के रूप में एक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट किसानों के बीच में लोकप्रिय हो रहा है।

साथियों,

सरकार का जोर कृषि टेक्नॉलॉजी आधारित स्टार्ट अप्स को प्रमोट करने पर भी हैताकि स्मार्ट और प्रिसिजन एग्रीकल्चर के लिए ज़रूरी किसानों के डेटाबेस और एग्री स्टैक का उपयोग किया जा सके। इससे किसानों को पानी, खाद और कीटनाशकों के उचित उपयोग में मदद मिलेगी। इससे लागत की कम होगी और ग्लोबल मार्केट में भारतीय किसानों की ज्यादा भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।

साथियों,

सरकार के ये प्रयास और सफल तभी होंगे, जब आप जैसे साइंटिस्ट, रिसर्चर्स इन Perishable Vegetables को और अधिक सस्टेनेबल बनाने के लिए Affordable Solutions तैयार करें। आने वाले दशकों की चुनौतियों को देखते हुए, Productivity, Affordability और किसानों को उचित दाम मिले, ऐसे समाधान तैयार करने होंगे।

इसके लिए हमें ऐसे बीज भी तैयार करने होंगे जो पानी कम इस्तेमाल करें, जो अधिक पोषक भी हों और उनकी लाइफ और प्रोडक्टिविटी भी ज्यादा हो। हमारा ये प्रयास होना चाहिए कि बीज की कीमत भी कम हो और उससे जुड़ी इनपुट कॉस्ट भी ज्यादा न हो।

इसके साथ-साथ एग्रीकल्चर सेक्टर में आधुनिक बायोटेक्नॉलॉजी, Artificial Intelligence, Block chain, Drone Technology, ऐसी हर नई टेक्नॉलॉजी का कैसे बेहतर उपयोग हो सकता है, इसको लेकर भी आपके सुझाव और समाधान अहम रहेंगे।

साथियों,

आलू की उपयोगिता को देखते हुए, Potato Sub sector को बढ़ावा देने के लिए नई पॉलिसी और रिसर्च एजेंडा बनाने का समय आ गया है। इस पॉलिसी और एजेंडा के मूल में Hunger और Poverty से लड़ाई और ग्लोबल फूड सिक्योरिटी होनी चाहिए।

आप सभी साथी ये करने में सक्षम हैं। ये आप सभी के प्रयासों से ही संभव हुआ है कि 19वीं सदी में आलू की बीमारी के कारण यूरोप और अमेरिका में जो स्थिति बनी, वो दोबारा नहीं आई।

21St Century में भी कोई भूखा और कुपोषित- Malnourished ना रहे,इसकी भी एक बड़ी जिम्मेदारी आप सभी के कंधों पर है चाहे किसान हो] व्यापारी हो] वैज्ञानिक हो] प्रगतिशाली व्यापारी हो] फूड प्रोसेसिंग में काम करता हो हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुझे विश्वास है कि आने वाले 3 दिनों में आप इसी दिशा में गंभीर मंथन करेंगे।

एक बार फिर भारत में, गुजरात में पधारने के लिए आप सभी का आभार। मैं कृषि विभाग का भी अभिनंदन करता हूं उन्होनें दिल्ली से बाहर इस समिट को ले गए इतना ही नहीं देश और दुनिया के लोगों को आप खेतों में ले जाने वाले है, किसानों से रूबरू कराने वाले हो यह अपने आप में धरती से जुड़ा हुआ यह कार्यक्रम आने वाले दिनों में कितना सफल होगा इसका मै पूरा-पूरा अंदाज लगा सकता हूं। मैं फिर एक बार गुजरात में आपका स्वागत करते हुए आपका प्रवास मंगल रहे। आप गुजरात की अद्भुत हॉस्पिटेलिटी को एंजॉय करें, गांधी जी से जुड़े स्थानों को विज़िट करें, स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की यादें लेकर जाएं, इसी कामना के साथ बहुत-बहुत आभार जैसे व्यक्त करता हूं। जय जवान जय किसान

धन्यवाद !!

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INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक का सेवा में शामिल होना भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक: कोलकाता में पीएम मोदी
June 21, 2026
INS Agray, INS Dunagiri, and INS Sanshodhakhave been inducted into the Indian Navy: PM
आज 21 जून को वर्ल्ड हाइड्रो-ग्राफीडे के रूप में भी मनाया जाता है और ये बहुत ही अद्भुत संयोग है, कि आज के दिन हमने भारत के सबसे एडवांस्ड हाइड्रो-ग्राफीक जहाज, INS संशोधक को कमीशन किया है: पीएम मोदी
जिस देश का समुद्री सामर्थ्य मजबूत होगा, उसका आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भी उतना ही मजबूत होगा; भारत इस सच्चाई को समझता है और उसी के अनुसार खुद को तैयार कर रहा है: पीएम मोदी
INS विक्रांत से लेकर INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक के कमीशनिंग होने तक की यात्रा भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतिबिंब है: पीएम मोदी
भारत ने शिपबिल्डिंग के क्षेत्र के लिए एक नई सोच के साथ आगे बढ़ना शुरू किया है; घरेलू निर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं: पीएम मोदी
शिपबिल्डिंग, शिप रिपेयर, शिप रिसाईक्लिंग तथा MRO को एक बड़े राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जा रहा है: पीएम मोदी
भारत समुद्र को सहयोग के माध्यम के रूप में देखता है, लेकिन यह भी जानता है कि ताकत शांति की रक्षा करती है, सुरक्षा समृद्धि की रक्षा करती है और आत्मनिर्भरता भविष्य का निर्माण करती है: पीएम मोदी
Today, INS Agray, INS Dunagiri, and INS Sanshodhak have joined the Indian Navy as symbols of this very spirit: PM

श्चिम बंगाल के राज्यपाल आर एन रवि जी, यहां के ऊर्जावान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी जी, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ कृष्णा स्वामीनाथन जी, उपस्थित देवियों और सज्जनों!

आज का दिन कई मायनों में विशेष है। आज पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। मुझे प्रसन्नता है कि इसी अवसर पर मुझे बंगाल की इस महान भूमि पर आने का अवसर मिला। यह वह भूमि है, जिसने भारत के विचारों को नई दिशा दी है। जिसने भारत के पुनर्जागरण को गति दी है, और जिसने सदियों तक भारत को समुद्र के रास्ते दुनिया से जोड़ा है। आज इसी धरती पर आत्मनिर्भर भारत, सुरक्षित भारत और विकसित भारत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम हो रहा है। कुछ देर पहले INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। वैसे आज 21 जून को “वर्ल्ड हाइड्रो-ग्राफीडे” के रूप में भी मनाया जाता है। और यह बहुत ही अद्भुत संयोग है, कि आज के दिन हमने भारत का सबसे एडवांस्ड हाइड्रो-ग्राफी जहाज़ “INS संशोधक” कमीशन किया है। मैं भारतीय नौसेना को, इन परियोजनाओं से जुड़े सभी वैज्ञानिकों को, इंजीनियरों को, श्रमिकों को और मेरे प्यारे देशवासियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

दुनिया गवाह है कि मैरीटाइम क्षमता के बिना कोई भी राष्ट्र बड़ी शक्ति नहीं बन सकता। समुद्र से विकास जुड़ा है, सुरक्षा जुड़ी है, समृद्धि जुड़ी है। आज दुनिया का अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों से ही होता है। दुनिया को जोड़ने वाले डेटा के विशाल नेटवर्क समुद्र के नीचे से गुजरते हैं। आने वाले समय में, क्रिटिकल मिनरल्स, डीप-सी रिसोर्सेज और नई ऊर्जा के स्रोत भी समुद्र से ही जुड़ेंगे। इसलिए जिस देश का समुद्री सामर्थ्य मजबूत होगा, उसका आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भी उतना ही मजबूत होगा। और भारत इस वास्तविकता को अच्छी तरह से समझता है। भारत इसके लिए स्वयं को तैयार कर रहा है। और आज का ये दिन इस बात का साक्षी है कि हमारी क्षमता क्या है, हमारा कौशल क्या है।

साथियों,

कुछ वर्ष पहले जब हमने INS विक्रांत को राष्ट्र को समर्पित किया था, तब भारत ने अपने समुद्री सामर्थ्य के नए अध्याय का उद्घोष किया था, विश्वभर के सामने हमारे सामर्थ्य का वो उद्घोष था। INS विक्रांत से लेकर आज तक की यात्रा केवल नए युद्धपोतों की यात्रा नहीं है। यह भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता की यात्रा भी है। आज INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक उसी यात्रा को नई गति दे रहे हैं। ये तीनों पोत, भारत के तीन महत्वपूर्ण संकल्पों के भी प्रतीक हैं। इनका निर्माण भारत में हुआ है। इनकी डिज़ाइन भारत में तैयार हुई है। इनके निर्माण में भारतीय उद्योगों की प्रतिभा लगी है। भारतीय इंजीनियरों का कौशल लगा है। भारतीय श्रमिकों का परिश्रम लगा है। और यही नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

साथियों,

आज भारत रक्षा क्षेत्र में केवल खरीदार बनकर नहीं रहना चाहता। हमारी सैन्य शक्ति दुनिया के लिए बाजार नहीं बन सकती। मेरी शक्ति की पहचान विश्व के बाजार बनने से नहीं है, मेरी शक्ति की सामर्थ्य की पहचान मेरी आत्मनिर्भरता पर है। भारत निर्माता बनना चाहता है। और जिस दिन निर्माता होंगे ना, उस दिन हम निर्णायक भी होंगे। और इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीते वर्षों में 40 से अधिक मेड इन इंडिया युद्धपोत और पनडुब्बियां नौसेना में शामिल हुई हैं। यानी लगभग हर कुछ सप्ताह में भारतीय नौसेना को एक नई शक्ति मिली है। वर्तमान में भी 45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं। यह केवल संख्या नहीं है। यह भारत की औद्योगिक क्षमता का प्रमाण है। यह भारत के भविष्य का संकेत है।

साथियों,

आने वाले वर्षों में भारत का Maritime Sector लाखों नए रोजगार तैयार करने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि हम Maritime Sector को केवल एक सेक्टर, isolated sector नहीं मानते। हम इसे विकसित भारत के रोजगार इंजन के रूप में देखते हैं। एक आधुनिक जहाज़ में सैकड़ों टन स्टील लगता है, इलेक्ट्रॉनिक्स लगते हैं, मशीनरी लगती है, हजारों पुर्जे लगते हैं। और इन सबके पीछे हजारों कंपनियां काम करती हैं, यानी हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलता है। आज जिन तीन जहाजों की कमीशनिंग हुई है, उनके निर्माण में 200 से अधिक MSMEs ने योगदान दिया है। हम कल्पना कर सकते हैं कि कितनी बड़ी संख्या में इन 200 MSME में, इन लघु उद्योगों में रोजगार पैदा हुआ होगा।

साथियों,

अब समय आ गया है कि भारत समुद्री शक्ति के अगले चरण में प्रवेश करे। इसलिए भारत ने शिपबिल्डिंग के क्षेत्र के लिए एक नई दृष्टि के साथ आगे बढ़ना शुरू किया है। हाल के वर्षों में अनेक पॉलिसी रिफॉर्म्स किए गए हैं। घरेलू निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। और शिपबिल्डिंग, शिप रिपेयर, शिप रिसाईक्लिंग तथा MRO को एक बड़े राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जा रहा है।

साथियों,

शिपिंग सेक्टर के लिए 70 हजार करोड़ रुपये का जो प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया गया है, वह केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं है। वह भारत के समुद्री भविष्य में निवेश है।वह भारत के औद्योगिक विस्तार में निवेश है।

साथियों,

भारत आज अपने पूरे Maritime Ecosystem को सशक्त बना रहा है। इसलिए, आज भारत अपने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण कर रहा है। नई क्षमता तैयार कर रहा है। नई कनेक्टिविटी बना रहा है। नदी जलमार्गों का विस्तार कर रहा है। मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित कर रहा है। सागरमाला जैसे अभियान इसी व्यापक सोच का हिस्सा हैं। इससे व्यापार की लागत कम हो रही है। उद्योगों को नई गति मिल रही है और तटीय क्षेत्रों में नए अवसर बन रहे हैं।

साथियों,

एक समय था, जब भारत की पहचान दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस इंपोर्टर्स, आयातकों में होती रही है। इस निर्भरता के कारण हमारे सामने रणनीतिक और सुरक्षा, दोनों तरह की चुनौतियां भी थीं। 2014 में सरकार बनने के बाद हमने स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। इसके लिए नीतियों के स्तर पर बड़े रिफॉर्म किए गए, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई। इन प्रयासों का परिणाम है कि आज रक्षा क्षेत्र में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट की नई संभावनाएं बनी हैं। 2014 तक देश का कुल डिफेंस प्रोडक्शन 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास था। आज यह बढ़कर लगभग 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

और साथियों,

एक तरफ देश में रक्षा उत्पादन तेजी से बढ़ा है, दूसरी तरफ हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। 2014 तक भारत करीब 700 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात करता था, Seven Hundred Crore। आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 40 हजार करोड़ रुपये पहुंच रहा है। भारत में बने रक्षा उपकरण अब दुनिया के 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं।

साथियों,

आत्मनिर्भरता की यात्रा में, अभी बहुत कुछ करना बाकी है। मेरे हिसाब से तो अभी ये शुरूआत है, लेकिन 12 साल में जो प्रगति हुई है, वो ये बताती है कि जब नीति स्पष्ट हो, जब दिशा ठीक हो, जब साथ साथ मिलकर काम करें तो देश में कितना बड़ा परिवर्तन हो सकता है।

साथियों,

जब समुद्री विरासत की बात होती है, तो बंगाल का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता है। यह भारत के समुद्री संपर्कों की भी महत्वपूर्ण भूमि रही है। हुगली की धाराओं ने इतिहास को बदलते हुए देखा है। व्यापार के नए अध्याय देखे हैं। विकास की नई यात्राएं देखी हैं। और संयोग देखिए, ये पोर्ट बंगाल के ही सपूत, देश के पहले उद्योग मंत्री, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर है।

साथियों,

भारत आज जिस नए समुद्री युग की ओर बढ़ रहा है। उसमें पश्चिम बंगाल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है। यहां बंदरगाहों की क्षमता है, यहां उद्योगों की क्षमता है, यहां प्रतिभा है, यहां कौशल है, यहां समुद्री अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता है। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में पश्चिम बंगाल, भारत की Blue Economy, Maritime Manufacturing, Logistics और Coastal Development का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

साथियों,

भारत ने हमेशा से समुद्र को सहयोग का माध्यम माना है। लेकिन भारत ये भी जानता है कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य भी उतना ही आवश्यक है। समृद्धि की रक्षा के लिए सुरक्षा आवश्यक है। और भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य है। आज INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक इसी भावना के प्रतीक बनकर भारतीय नौसेना में शामिल हुए हैं। ये उस भारत के प्रतीक हैं जो 21वीं सदी में अपने सामर्थ्य को पहचान रहा है, जो अपनी क्षमताओं पर विश्वास कर रहा है, और जो दुनिया के सामने नए आत्मविश्वास के साथ तेज गति से ऊर्जा से भरे हुए संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

इस शुभ अवसर पर, मैं नेवी के सभी साथियों को, देश के सभी साथियों को, अनेक अनेक शुभकामनाएं देता हूं। मैं एक बार फिर भारतीय नौसेना को, सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, श्रमिकों और देशवासियों को हृदयपूर्वक बहुत-बहुत बधाई देता हूं। धन्यवाद।