यह हमारी नारी शक्ति को सशक्त बनाने का एक ऐतिहासिक अवसर है: प्रधानमंत्री
निर्णय लेने की प्रक्रिया में नारी शक्ति को सम्मिलित करना एक विकसित भारत के निर्माण की कुंजी है: प्रधानमंत्री मोदी
अधिक से अधिक महिलाएं जमीनी स्तर पर नेतृत्व कर रही हैं: प्रधानमंत्री
हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं; यह उनका अधिकार है: प्रधानमंत्री मोदी
हमारे संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या की बात नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्धता है: प्रधानमंत्री

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज सुबह से चर्चा प्रारंभ हुई है। काफी साथी यहां से भी जिन मुद्दों को स्पर्श किया गया है, उसको तथ्यों से और तर्क से सदन को जरूर जानकारी देंगे। और इसलिए मैं उन विषयों में जाना नहीं चाहता।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय की समाज की मनोस्थिति और नेतृत्व की क्षमता, उस पाल को कैप्चर करके एक राष्ट्र की अमानत बना देती है, एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती है। मैं समझता हूं कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह वैसे ही पल हैं। आवश्यकता तो यह थी कि 25-30 साल पहले जब से यह विचार सामने आया, आवश्यकता महसूस हुई, हम इसको लागू कर देते और हम आज उसको काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते हैं। और आवश्यकता के अनुसार उसमें समय-समय पर सुधार भी होते और यही तो लोकतंत्र की ब्‍यूटी होती है। हमारी, हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी हैं। हमारी हजारों साल की लोकतंत्र की एक विकास यात्रा रही है, और उस विकास यात्रा में एक नया आयाम जोड़ने का एक शुभ अवसर सदन के हम सभी साथियों को मिला है। और मैंने प्रारंभ में कहा है कि हम सब भाग्यवान हैं कि हमें ऐसे महत्वपूर्ण और देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। यह हम लोगों के लिए सौभाग्य है और मैं चाहता हूं कि मेरे सभी माननीय सांसद, मैं इधर-उधर की आज बात नहीं करना चाहता हूं, हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने ना दें। हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने के लिए जा रहे हैं और मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति की भी, उसके रूप स्वरूप को तो तय करने ही करने वाला है, लेकिन यह देश की दिशा और दशा भी तय करने वाला है, इतने महत्वपूर्ण मोड़ पर हम खड़े हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्व में भी आज भारत की स्वीकृति हम सब महसूस कर रहे हैं और यह हम सबके लिए गौरव का पल है। एक समय हमारे पास आया है, और इस समय को हमने एक विकसित भारत के संकल्प के साथ जोड़ा है। और मैं पक्का मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब केवल उत्तम प्रकार के रेल, रास्ते, इंफ्रास्ट्रक्चर या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े, सिर्फ इतने से ही विकसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम लोग नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत, जिसके नीति निर्धारण में सबका साथ सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50% जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने, यह समय की मांग है। हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कोई भी होंगे, जिम्‍मेवार कोई भी होंगे, लेकिन इस सच्चाई को हमें स्वीकार करना होगा कि जब हम अकेले मिलते हैं, तब मानते हैं हां यार! लेकिन जब सामूहिक रूप से मिलते हैंं, मुझे याद है जब इसकी प्रक्रिया चली थी, सभी दलों से मिलना हुआ है, एक दल को छोड़कर के, जिन-जिन से मिलना हुआ है, हर एक ने सैद्धांतिक विरोध नहीं किया है। बाद में जाकर के जो कुछ भी हुआ होगा, राजनीतिक दिशा पकड़ी जा रही है। लेकिन जो राजनीतिक दिशा में ही सोचते हैं, मैं उनको भी एडवाइस करना चाहूंगा, एक मित्र के रूप में एडवाइस करता हूं और सबको काम आएगी। हमारे देश में जबसे वूमेन रिजर्वेशन को लेकर चर्चा हुई है और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, हर चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया है, जिस-जिस ने विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है। उनका हाल बुरे से बुरा किया है। लेकिन यह भी देखिए कि 24 का चुनाव में ऐसा नहीं हुआ। क्यों नहीं हुआ? यह इसलिए नहीं हुआ कि 24 में सबने सहमति से इसको पारित किया, तो यह विषय ही नहीं रहा। किसी के पक्ष में पॉलिटिकल फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान भी नहीं हुआ। सहज रूप से जो मुद्दे थे, उन मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ा, क्योंकि 24 में सब साथ में थे। कुछ लोग यहां हैं, कुछ लोग नहीं है, लेकिन सब साथ में थे। आज भी मैं कहता हूं, अगर हम सब साथ में जाते हैं, तो इतिहास गवाह है कि यह किसी एक के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा। यह देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा, देश के सामूहिक निर्णय शक्ति के पक्ष में जाएगा और हम सब उसके यश के हकदार होंगे। ना ट्रेजरी बैंक इसका हकदार रहेगा, ना मोदी उसका हकदार रहेगा, यहां बैठे हुए सब हकदार रहेंगे और इसलिए जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है, मैं चाहूंगा कि वह खुद के परिणामों को पिछले 30 साल में देख लें। फायदा उनका भी इसी में है, रास्ता दिखा रहा हूं कि इसी में फायदा है कि जो नुकसान हो रहा है, उससे बच जाओगे और इसलिए मैं समझता हूं कि इसमें राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मुझे याद है, तब तो मैं शासकीय व्यवस्था की राजनीति में नहीं था, मैं एक एक संगठन के कार्यकर्ता के नाते काम करता था। उस समय एक चर्चा सुनने को मिलती थी गलियारों में कि देखिए यह कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण देना है, तो बहुत आराम से दे देते हैं। लेकिन पंचायतों में आरक्षण देना है, तो आराम से देते हैं क्योंकि उसमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है। उसको लगता है, हम सुरक्षित है यार, वहां दे दो। यह उस समय गलियारों में बहुत चर्चा थी कि बोले यह कभी नहीं करेंगे यहां बैठे हुए, क्यों? क्योंकि उनका कुछ जाएगा और इसलिए और बाकी पंचायत का हो जाता है, 50% तक पहुंच गए।

मैं राजनीतिक दृष्टि से और भी एक बात समझाना चाहता हूं साथियों,

आज से 25 साल, 30 साल पहले जिसने भी विरोध किया, तो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना, पिछले 25-30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर के आई हुई बहनों में एक political consciousness है, वह ओपिनियन मेकर हैं ग्रास रूट लेवल पर, 30 साल पहले वह शांत रहती थी, बोलती नहीं थी, समझती थी, बोलती नहीं थी। आज वह वोकल है और इसलिए अब जो भी पक्ष-विपक्ष होगा, वो जो लाखों बहनें कभी ना कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं, प्रतिनिधित्व कर चुकी है, जनता के सुख-दुख की समस्याओं को गहराई से देखा है, वह आंदोलित है। वह कहती हैं कि झाड़ू-कचरा वाले काम में तो हमें जोर देते हो, वह तो परिवार में भी पहले होता था, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभा में और पार्लियामेंट में होती हैं। और इसलिए मैं राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, मैं किसी भी संसद की बात करता हूं, किसी भी एमलए की बात करता हूं, यह दल वो दल की बात मैं नहीं कर रहा हूं। जो भी राजनीतिक जीवन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उनको यह मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25-30 साल में लाखों बहनें ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33% का नहीं, वहां भी वह आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं और इसलिए जो आज विरोध करेंगे उसको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी, लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। और इसलिए राजनीतिक समझदारी भी इसी में है कि हम ग्रास रूट लेवल पर महिलाओं की जो पॉलिटिकल लीडरशिप खड़ी हुई है, उसको आपने अब कंसीडर करना पड़ेगा। यहां मैंने सुना, हमारे मुलायम सिंह जी थे तब से एक विषय चला रहे हैं, उनके परिवार वाले भी चला रहे हैं। आप देश की बहनों पर भरोसा करो ना, उनकी समझदारी पर भरोसा करो, एक बार 33% बहनों को यहां आने दो, आकर के उनको निर्णय करने दो, किसको देना है, किसको नहीं देना है, इस वर्ग को देना है, उस वर्ग को देना है, करेंगे वह निर्णय, हम उनके सामर्थ्य पर आशंका क्यों करते हैं भाई? एक बार आने तो दो! उनको आने तो दो! जब आएंगे, तो 34 में और धर्मेंद्र जी, धर्मेंद्र जी मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह बात सही है, मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। धर्मेंद्र जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं और अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, तो कभी-कभी मदद कर देते हैं। यह बात सही है कि मैं अति पिछडे समाज से आता हूं, लेकिन मेरा दायित्व समाज के सबको साथ लेकर के चलने का है और यही मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है। मेरे लिए, मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है और इसलिए और यह संविधान की ताकत है कि मेरे जैसा अत्यंत छोटे समाज का अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को इतना बड़ा दायित्व देश ने दिया है। और इसलिए मैं तो देशवासियों का ऋणी हूँ और मैं तो संविधान निर्माताओं का ऋणी हूँ कि जिसके कारण आज मैं यहां हूं।

लेकिन आदरणीय अध्यक्ष जी!

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज जीवन के हर एक क्षेत्र में हम देखें कि नारी शक्ति देश के गौरव को बढ़ाने वाले, परचम लहराने में कहीं पीछे नहीं हैं जी। हम गर्व कर सकें, इस प्रकार से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में आज हमारी माताएं-बहनें बहुत बड़ा योगदान, हमारी बेटियां तो कमाल कर रही हैं, जीवन के हर क्षेत्र में! इतना बड़ा सामर्थ्‍य, उसको हम हिस्सेदारी से रोकने के लिए क्यों इतनी ताकत खपा रहे हैं जी, उनके जुड़ने से सामर्थ्‍य बढ़ने वाला है और इसलिए मैं आज अपील करने आया हूं आपके पास कि इसको राजनीति के तराजू से मत तौलिये। यह राष्ट्रहित का निर्णय है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज का हमारा यह, हमारे सामने यह अवसर एक साथ बैठकर के, एक दिशा में सोच करके विकसित भारत बनाने में हमारी नारी शक्ति की भागीदारी को एक खुले मन से निर्णय करने का अवसर है, स्वीकार करने का अवसर है और मैंने जैसा पहले भी कहा कि आज पूरा देश और विशेष करके नारी शक्ति, हमारे निर्णय तो देखेंगी, लेकिन निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। और इसलिए हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से एक प्रकार से इस अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना, उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगे और इसलिए वह कभी राजनीतिक इशू भी नहीं बना, एक अच्छी स्थिति है। अब सवाल यह है कि हमें कितने समय तक इसको रोकना है, अब यहां जो लोग जनसंख्या वगैरा के विषय उठाते हैं, क्या आपको मालूम नहीं है, मैं चाहूंगा कि अमित भाई अपने भाषण में इन सारी चीजों को उल्‍लेख करेंगे, जब कि हमने जनगणना के संबंध में कब-कब क्या-क्या किया था, बाद में कोविड आया, उसके कारण क्या मुसीबत आई, कैसे रुकावटें आई। यह सारी बात हम सबके सामने हैं, इसमें कोई विषय नहीं है। लेकिन पिछले दिनों जब हम 23 में चर्चा कर रहे थे, तब भी व्यापक रूप से बात यह थी कि इसको जल्दी करो, हर कोई कह रहा था जल्दी करो। अब 24 में संभव नहीं था क्योंकि इतने कम समय में यह करना मुश्किल था। अब 29 में हमारे पास अवसर है, अगर हम उन 29 में भी नहीं करते, तो स्थिति क्या बनेगी, हम कल्पना कर सकते हैं, तो फिर हम देश की माताओं-बहनों को यह विश्वास नहीं बना पाएंगे कि हम सचमुच में यह प्रयास सच्चे अर्थ से कर सकते हैं। और इसलिए समय की मांग है कि अब हम ज्यादा विलंब ना करें, इस दरमियान राजनीतिक दल के लोगों से, संविधान के जानकार लोगों से, जो महिलाओं में एक्टिविस्ट के नाते काम करने वाले, ऐसे लोगों से भी कई चर्चाएं हुई, कुछ लोगों ने खुद होकर के भी सुझाव दिए। सारा मंथन करते-करते यहां भी सभी दलों से लगातार बातें करके होती रही हैं। स्ट्रक्चरल वे में भी हुई है, इनफॉर्मल वे में भी हुई है और उसमें से आखिर बनाए हुए यह कुछ रास्ता निकालना होगा, ताकि हम हमारी माताओं-बहनों की शक्ति को जोड़ सकते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा। यहां बैठ करके हमें किसी को संविधान ने देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। जो शपथ लेकर के हम बैठे हैं ना, हम सबको एक राष्ट्र के रूप में विचार करना हमारा दायित्व बनता है। चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, हम टुकड़ों में ना सोच सकते हैं, ना टुकड़ों में हम निर्णय कर सकते हैं। और इसलिए निराधार रूप में, जिसमें कोई सच्चाई नहीं, रत्ती भर सच्चाई नहीं, सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए जो बवंडर खड़ा किया जा रहा है, मैं आज बड़ी जिम्मेवारी के साथ इस सदन में इस पवित्र जगह से कहना चाहता हूं, क्या यह दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हो, बड़े राज्य हो, मैं आज यह जिम्मेवारी से कहना चाहता हूं कि यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी, भूतकाल में जो सरकारें रहीं और जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, तो उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात पर होगी। अगर गारंटी शब्द चाहिए, तो मैं गारंटी शब्द उपयोग करता हूं। वादा की बात करते हो, तो मैं वादा शब्द उपयोग करता हूं। अगर तमिल में कोई अच्छा शब्द हो, तो वो भी मैं बोलने के लिए तैयार हूं, क्योंकि जब नियत साफ है, तो फिर शब्दों का खेल करने की हमें जरूरत नहीं है जी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं आज सदन के सभी साथियों को यह भी कहना चाहता हूं कि साथियों, हम भ्रम में ना रहे, हम उस अहंकार में ना रहे हैं और मैं हम शब्द का उपयोग कर रहा हूं। मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं मैं, हम इस भ्रम में ना रहें कि हम देश की नारी शक्ति को हम कुछ दे रहे हैं, जी नहीं। उसका हक है; और हमने, हमने कई दशकों से उसको रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित करके हमें उस पाप में से मुक्ति पाने का यह अवसर है। हम सब जानते हैं, हर एक ने कैसे चालाकी की हर बार, चतुराई की, बिल्कुल हम तो इसके पक्ष में ही है, लेकिन; हम इसके साथ ही हैं, लेकिन; हर बार कोई ना कोई टेक्निकल पूंछ लगा दी इसको और इसको रोका गया है। हर बार ऐसे ही चीजें लाई गई हैं। हिम्मत नहीं हैं कि हम 33% महिलाओं के आरक्षण का विरोध कर पाए, वह तो जमाना चला गया, आपको करना नहीं है, लेकिन कहने की हिम्मत भी नहीं है। और इसलिए टेक्निकल बहानेबाजी, यह करो तो यह, वो करो तो वो, ढिकना करो तो, अब देश की नारी को यह नहीं समझा पाओगे, सदन में नंबर का खेल क्या होता है, वह तो समय तय करेगा, लेकिन यह पक्का है कि अब इन भांति-भांति के बहानेबाजी, भांति-भांति टेक्निकल मुद्दों के आधार पर चीजों को उलझा करके तीन दशक तक इसको अड़ंगे डालें हमने फंसा-फंसा कर रखा, आपने जो अचीव करना था, कर लिया, अब छोड़ दो ना भाई! तीन दशक कम पढ़ते हैं क्या रोकने में, तीन दशक तक आपने रोका, फिर भी कुछ कर नहीं पाए, तो अब तो करो।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं ना कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अरे भाई, इनको बोलने दीजिए, वहां पर बेचारे के मुंह पर ताला लगा हुआ है, वहां बंगाल में कोई बोलने नहीं देता उसको।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आदरणीय अध्यक्ष जी,

देखिए इसका अगर विरोध करेंगे, तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। लेकिन साथ चलेंगे, तो किसी को भी नहीं होगा, यह लिखकर रखो। किसी को नहीं होगा, क्योंकि फिर अलग पहलू हो जाता है, फिर किसी को फायदा नहीं होता। और इसलिए हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही यह पारित हो जाए, मैं कल advertisement दे करके सबका धन्यवाद करने के लिए तैयार हूं, सबकी फोटो छपवाने के लिए तैयार हूं, क्रेडिट आप ले लो चलो! क्रेडिट की चिंता है क्या जी? ले लो ना क्रेडिट, आपको जिसकी फोटो छपवानी है, सरकारी खर्चे से हम करवा देंगे। सामने से, सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूँ।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारी संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी यह सिर्फ आंकड़ों का खेल या एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार, इतना सीमित नहीं है। लोकतंत्र की जननी के रूप में, मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में यह निर्णय भारत का कमिटमेंट है, यह सांस्कृतिक कमिटमेंट है और इसी कमिटमेंट के कारण पंचायतों में यह व्यवस्था बनी और अब तो 20 से अधिक राज्‍यों में 50% हुआ है और हमने अनुभव किया है, मुझे लंबे अरसे तक, मुझे लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का जनता ने अवसर दिया और उसी कालखंड में ग्रासरूट लेवल पर वूमेन लीडरशिप को मैंने देखा है। मेरा अनुभव है कि संवेदनशीलता के साथ समस्याओं के समाधान में उनका कमिटमेंट बहुत ही परिणामकारी रहते थे, विकास की यात्रा को गति देने में रहते थे और उस अनुभव के आधार पर मैं कहता हूं कि इस सदन में उनकी आवाज नई शक्ति बनेगी, नई सोच जुड़ेगी, देश की दिशा में एक संवेदनशीलता जुड़ेगी, तथ्य और तर्क के आधारों पर अनुभव जब जुड़ता है, तब मैं समझता हूं उसका सामर्थ्य अनेक गुना बढ़ जाता है और सदन कितना समृद्ध होता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारे देश में अनुभवी नारी शक्ति की कोई कमी नहीं है, सामर्थ्यवान में कोई कमी नहीं है, हम भरोसा करें, वह कंट्रीब्यूट करेंगी, बहुत अच्छा कंट्रीब्यूट करेंगी और आज भी जितनी हमारी बहनें यहां हैं, जब भी उनको अवसर मिला है, उन्होंने बहुत अच्छे ढंग से अपनी बात बताई है, सदन को समृद्ध किया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज देश में वर्तमान में, देश में 650 से ज्यादा पंचायत हैं, डिस्ट्रिक्ट पंचायत, करीब पौने तीन सौ महिलाएं उसका नेतृत्व कर रही हैं और केंद्र के कैबिनेट मिनिस्टर से ज्यादा उनके पास जिम्मेदारी और धन और व्यवस्था होती है, काम करती हैं जी। करीब 6700 ब्लॉक पंचायतों में 2700 से अधिक ब्लॉक पंचायत ऐसी हैं, जिसका नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। आज देश में 900 से अधिक शहरों में अर्बन लोकल बॉडीज की हेड के रूप में मेयर्स हों या स्टैंडिंग कमेटी का काम देखने वाली बहनें हैं, उनकी ताकत है। और मैं मानता हूं कि आज देश जो प्रगति कर रहा है, उस प्रगति में इनका भी महत्वपूर्ण योगदान है, उस ऋण को हमें स्वीकार करने का यह अवसर है। और जब यह अनुभव सदन के साथ जड़ेगा, तब वह अनेक गुना ताकत बढ़ा देगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

एक लंबी प्रतीक्षा यानी एक प्रकार से हम सबके लिए यह सवालिया निशान पैदा हो, ऐसी परिस्थिति हम ही लोगों ने पैदा की है। यह अवसर है कि हम पुरानी जो कुछ भी मर्यादा रही होंगी, मुश्किलें रही होंगी, उससे बाहर निकले, हिम्मत के साथ हम आगे बढ़े और नारी शक्ति का राष्ट्र के विकास में उनकी सहभागिता को हम सुनिश्चित करें और मैं पक्का मानता हूं कि अगर आज हम मिलकर के निर्णय करते हैं और मैं तो आग्रह करूंगा कि हमें सर्व सहमति से इसको को आगे बढ़ना चाहिए और जब सर्वसम्मति से बढ़ता है, तो ट्रेजरी बैंक पर एक दबाव रहता है जी, उनको भी लगता है कि नहीं भाई सबको सबका इसमें हक है, हर एक की बात मान के चलो, कोई नुकसान नहीं है। सामूहिक शक्ति से तो अनेक परिणाम हमें अच्छे मिलते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं ज्यादा समय न लेते हुए इतना ही कहूंगा कि इसको राजनीति के तराजू से ना तोलें। हम जब भी कुछ निर्णय करने जा रहे हैं, तो देश के, इतने बड़े देश का आधा जिम्मा जो उठा रहे हैं, उनका भी कोई हक बनता है यहां आने का, हमें रोकना नहीं चाहिए। और दूसरा संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी एक मत पहले से बनता आया था, चर्चा थी कि साहब यह जो है, इनका कम मत करो, अधिक कर दो, तो जल्दी हो जाएगा। वह अधिक वाला विषय अब आया है कि चलो भाई पहले जो संख्या थी 33% और बढ़ा दो, ताकि किसी को ऐसा ना लगे कि मेरा हक चला गया। एक नई शक्ति जुड़ेगी, अतिरिक्त शक्ति जुड़ेगी और अब सदन के रचना भी तो अब, जो पहले से हमने सोच कर रखा है, जगह तो बना ली है।

और आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं लाइटर वे में जरूर कहना चाहूंगा, हर एक के अपने राजनीतिक कारण होते हैं और पराजय का डर जरा हैरान करने वाला होता है। लेकिन अपने यहां जब कोई भी शुभ काम होता है, उसको नजर ना लग जाए, इसलिए काला टीका लगाने की परंपरा है। मैं आपका धन्यवाद करता हूं काला टीका लगाने के लिए!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Nepal praises India's efforts in times of crisis; calls PM Modi 'exceptionally generous'

Media Coverage

Nepal praises India's efforts in times of crisis; calls PM Modi 'exceptionally generous'
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
List of Outcomes: Prime Minister’s State Visit to Uzbekistan
August 30, 2026

MoUs and Agreements

Sl. No.

Title

1.

Cultural Exchange Programme between the Government of the Republic of India and the Government of the Republic of Uzbekistan for the years 2026-30.

2.

Letter of Intent between the Ministry of External Affairs of the Republic of India and the Cultural Heritage Agency of the Republic of Uzbekistan for the conservation and restoration of ancient buddhist sites of Fayaz Tepa and KaraTepa located in Termez, Uzbekistan.

3.

Memorandum of Understanding on Cooperation in the field of archival work between the National Archives under the Ministry of Culture of India and the Agency "Uzarchive" under the Ministry of Justice of the Republic of Uzbekistan.

4.

Memorandum of Understanding between the Government of the Republic of India and the Government of the Republic of Uzbekistan on cooperation in the field of Ayurveda and other traditional systems of medicine.

5.

Memorandum of Understanding between the Ministry of Mines of the Republic of India and Ministry of Mining Industry and Geology of the Republic of Uzbekistan on Cooperation in the fields of Geology and Mineral Resources.

6.

Partnership Program on cooperation between the Ministry of Tourism of the Republic of India and the Tourism Committee of the Republic of Uzbekistan in the field of tourism for 2026-28.

7.

Memorandum of Understanding between The Sushma Swaraj Institute of Foreign Service, Ministry of External Affairs, Republic of India and the Diplomatic Academy at the University of World Economy and Diplomacy, Ministry of Foreign Affairs of the Republic of Uzbekistan.

8.

Memorandum of Understanding (MoU) between the Ministry of Finance of the Republic of India and the Ministry of Economy and Finance of the Republic of Uzbekistan for an Economic and Financial Dialogue.

9.

Agreement between the Ministry of Environment and Forest and Climate Change of the Republic of India and National Committee on Ecology and Climate Change of the Republic of Uzbekistan on cooperation in the field of environmental protection.

10.

Memorandum of Understanding between the Government of the Republic of India and the Government of the Republic of Uzbekistan on Cooperation in the Field of Higher Education and Scientific Research.

11.

Cooperation Agreement between the Gujarat state of the Republic of India and the Samarkand region of the Republic of Uzbekistan of establishment of partnership relations.

Announcements

Sl. No.

Title

1.

Elevating the India-Uzbekistan Strategic Partnership to a Comprehensive Strategic Partnership

2.

Grant of USD 1 million for afforestation in the Aral Sea region

3.

 Lal Bahadur Shastri Scholarship for Hindi Language (100 Scholarships)

4.

ICCR Sanskrit Chair at Tashkent State University of Oriental Studies

5.

Commercial Agreement between NPCI International Payments Ltd (NIPL) with National Interbank Processing Centre JSC (NIPC), Uzbekistan to enable UPI Apps of India to scan national QR - UZQR for making merchant payments in Uzbekistan.