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"इस बजट में सरकार द्वारा, सैचुरेशन के इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप दिया गया है"
"ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से गांवों में सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, बल्कि ये गांवों में स्किल्ड युवाओं का एक बड़ा पूल तैयार करने में भी मदद करेगा"
"हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि राजस्व विभाग पर ग्रामीण लोगों की निर्भरता कम से कम हो"
"विभिन्न योजनाओं में शत-प्रतिशत कवरेज के लिए, हमें नई तकनीक पर ध्यान देना होगा, ताकि परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा किया जा सके और गुणवत्ता से भी समझौता नहीं हो"
“ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार हमारी महिला शक्ति है। फाइनेंशियल इंक्लुज़न ने परिवारों में महिलाओं की आर्थिक फैसलों में अधिक भागीदारी सुनिश्चित की है”

नमस्कार।

मंत्रीमंडल के मेरे सभी सहयोगी, राज्यों सरकारों के प्रतिनिधि‍, सामाजिक संस्थाओं से जुड़े साथी, विशेषरूप से नॉर्थ ईस्ट के दूर-दूर के इलाकों से जुड़े साथी!

देवियों और सज्जनों,

बजट के बाद, बजट घोषणाओं को लागू करने के दिशा में आज आप सभी स्टेकहोल्डर्स से संवाद अपने आप में एक बहुत अहम है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास हमारी सरकारी की पोलिसी और एक्शन इसका मूलभूत परिणाम सूत्र है। आज की थीम- ''Leaving no citizen behind'' ये भी इसी सूत्र से निकली है। आजादी के अमृतकाल के लिए जो संकल्प हमने लिए हैं, वो सबके प्रयास से ही सिद्ध हो सकते हैं। सबका प्रयास तभी संभव है जब विकास सबका होगा, हर व्यक्ति, हर वर्ग, हर क्षेत्र को विकास का पूरा लाभ मिलेगा। इसलिये बीते सात सालों में हमने देश के हर नागरिक, हर क्षेत्र के सामर्थय को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। देश के गांव और गरीब को पक्के घर, toilets, गैस, बिजली, पानी, सड़क जैसी बेसिक सुविधाओं से जोड़ने की योजनाओं का मकसद यही है। देश ने इनमें बहुत सफलता भी पाई है। लेकिन अब समय है इन योजनाओं के saturation का, इनके शत-प्रतिशत लक्ष्यों को हासिल करने का। इसके लिए हमें नई रणनीति भी अपनानी पड़ेगी। मॉनिटरिंग के लिए, अकाउंटेबिलिटी के लिए, टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग करते हुए। नई व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा। हमें पूरी ताकत लगानी होगी।

साथि‍यों,

इस बजट में सरकार द्वारा सैचुरेशन के इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप दिया गया है। बजट में पीएम आवास योजना, ग्रामीण सड़क योजना, जल जीवन मिशन, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी, गांवों की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, ऐसी हर योजना के लिए जरूरी प्रावधान किया गया है। ये ग्रामीण क्षेत्रों, नॉर्थ ईस्ट बॉर्डर के इलाकों और एस्पीरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स में सुविधाओं की सैचुरेशन की तरफ बढ़ने के प्रयासों का ही हिस्सा है। बजट में जो वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम घोषि‍त किया गया है, वो हमारे सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए बहुत अहम है। Prime Minister's Development Initiative for North East Region यानि पीएम-डिवाइन नॉर्थ ईस्ट में समय सीमा के भीतर विकास योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभ को सुनिश्चित करने में बहुत मदद करेगा।

साथियों,

गांवों के विकास में वहां घर और ज़मीन की प्रॉपर डिमार्केशन बहुत आवश्यक है। स्वामित्व योजना से इसमें बहुत मदद मिल रही है। अभी तक इसके तहत 40 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड्स जारी किए जा चुके हैं। लैंड रिकॉर्ड्स के रजिस्ट्रेशन के लिए एक नेशनल सिस्टम और एक यूनीक लैंड आइडेंटिफिकेशन पिन, एक बहुत बड़ी सुविधा होगी। रैवेन्यु डिपार्टमेंट पर सामान्य ग्रामीण की निर्भरता कम से कम हो हमें ये सुनिश्चित करना है। लैंड रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन और डिमार्केशन से जुड़े समाधानों को आधुनिक टेक्नॉलॉजी से जोड़ना आज की ज़रूरत है। मैं समझता हूं कि सभी राज्य सरकारें अगर समय-सीमा तय करके काम करेंगी, तो गांव के विकास को बहुत अधिक गति मिलेगी। ये ऐसे रिफॉमर्स हैं, जो गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स के निर्माण की गति को बढ़ाएंगे और गांवों में बिजनेस एक्टिविटी को भी प्रोत्साहित करेंगे। अलग-अलग योजनाओं में 100 परसेंट लक्ष्य पाने के लिए हमें नई टेक्नॉलॉजी पर भी फोकस करना होगा, ताकि तेज़ी से प्रोजेक्ट्स भी पूरे हों और क्वालिटी भी कंप्रोमाइज़ ना हो।

साथियों,

इस साल के बजट में पीएम आवास योजना के लिए 48 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस साल 80 लाख घर बनाने का जो लक्ष्य है, उसे भी तय समय में पूरा करने के लिए तेजी से काम करना होगा। आप सभी जानते हैं कि आज देश के 6 शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए नई टेक्नॉलॉजी का प्रयोग करते हुए, 6 लाइट हाउस प्रोजेकक्ट्स पर काम कर रहे हैं। इस प्रकार की टेक्नॉलॉजी गांवों के घरों में कैसे उपयोग हो, हमारे इकोसेंसटिव ज़ोन्स में हो रही कंस्ट्रक्शन के लिए हम नई टेक्नॉलॉजी का उपयोग कैसे कर सकते हैं, इनके समाधानों पर एक सार्थक और गंभीर चर्चा आवश्यक है। गांवों में, पहाड़ी क्षेत्रों में, नॉर्थ ईस्ट में सड़कों की मेंटेनेंस भी एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। स्थानीय geographical conditions के अनुसार लंबे समय तक टिक सके, ऐसे मटीरियल की पहचान, उसका समाधान भी बहुत ज़रूरी है।

साथियों,

जल जीवन मिशन के तहत लगभग 4 करोड़ कनेक्शन देने का टारगेट हमने रखा है। इस टारगेट को हासिल करने के लिए आपको अपनी मेहनत और बढ़ानी होगी। मेरा हर राज्य सरकार से ये भी आग्रह है कि जो पाइपलाइन बिछ रही हैं, जो पानी आ रहा है, उसकी क्वालिटी पर भी हमें बहुत ध्यान देने की ज़रूरत है। गांव के स्तर पर लोगों में एक सेंस ऑफ ऑनरशिप आए, Water Governance को बल मिले, ये भी इस योजना का एक लक्ष्य है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हमें 2024 तक हर घर तक नल से जल पहुंचाना है।

साथियों,

गांवों की डिजिटल कनेक्टिविटी अब एक aspiration भर नहीं है, बल्कि आज की ज़रूरत है। ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से गांवों में सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, बल्कि ये गांवों में स्किल्ड युवाओं का एक बड़ा पूल तैयार करने में भी मदद करेगा। गांवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से सर्विस सेक्टर का विस्तार जब होगा तो देश का सामर्थ्य और ज्यादा बढ़ेगा। ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी में अगर कहीं कोई दिक्कतें आ रही हैं, तो उनकी पहचान और उनका समाधान हमें ढूंढना ही होगा। जिन-जिन गांवों में काम पूरा हो चुका है, वहां क्वालिटी और इसके प्रॉपर यूज़ के प्रति जागरूकता फैलाना भी उतना ही ज़रूरी है। शत-प्रतिशत पोस्ट ऑफिस को कोर बैंकिंग सिस्टम में लाने का फैसला भी एक बड़ा कदम है। जनधन योजना से फाइनेंशियल इंक्लूजन का जो अभियान हमने शुरु किया था, उसको सैचुरेशन तक पहुंचाने में इस कदम से बल मिलेगा।

साथियों,

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार हमारी मातृ शक्ति है, हमारी महिला शक्ति है। फाइनेंशियल इंक्लुज़न ने परिवारों में महिलाओं की आर्थिक फैसलों में अधिक भागीदारी सुनिश्चित की है। सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के माध्यम से महिलाओं की इस भागीदारी को और ज्यादा विस्तार दिए जाने की जरूरत है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा स्टार्ट-अप्स को कैसे लेकर जाएं, इसके लिए भी आपको अपने प्रयास बढ़ाने होंगे।

साथियों,

इस बजट में घोषित सभी कार्यक्रमों को हम समय सीमा के भीतर कैसे पूरा कर सकते हैं, सभी मंत्रालयों, सभी स्टेकहोल्डर्स का convergence कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं, इसको लेकर इस वेबिनार में विस्तृत चर्चा अपेक्षित है। मुझे विश्वास है कि 'Leaving no citizen behind' का लक्ष्य ऐसे ही प्रयासों से पूरा होगा।

मेरा ये भी आग्रह है कि इस प्रकार की समिट में हम सरकार की तरफ से ज्यादा कुछ बोलना नहीं चाहते हैं। हम आपको सुनना चाहते हैं, हम आपके अनुभवों को जानना चाहते हैं। हम हमारे गांव की क्षमता कैसे बढ़े, पहले तो गवर्नेंस की दृष्टि से, आप सोचिए कभी, क्या कभी गांव के अंदर जितनी सरकारी एजेंसियों का कोई न कोई रोल होता है, वो गांव को स्तर पर कभी दो-चार घंटे एक साथ बैठकर के उस गांव में साथ मिलकर के क्या कर सकते हैं, चर्चा की है। मैं लंबे अर्से तक राज्य में मुख्यमंत्री रहकर के आया हूं, मैं अनुभव करता हूं कि ये हमारी आदत नहीं है। एक दिन में एग्रीकल्चर वाला जाएगा, दूसरे दिन में इरिगेशन वाला जाएगा, तीसरे दिन हेल्थ वाला जाएगा, चौथे दिन एजुकेशन वाला जाएगा और एक-दूसरे को कोई पता नहीं होगा। क्या उस गांव में कोई दिन तय करके जितनी संबंधि‍त एजेंसी एक साथ बैठे, गांव के लोगों के साथ बैठे, गांव की elected body के साथ बैठे। बैठकर के आज हमारे गांव के लिए पैसे उतने समस्या नहीं हैं जितने की हमारे साइलो खत्म करना, convergence होना और उसका लाभ लेना।

अब आप सोचेंगे भई, नेशनल एजुकेशन पोलिसी और ग्रामीण विकास का क्या लेना देना। अब आप साचिए नेशनल एजुकेशन पोलिसी में एक विषय है कि भई आप स्थानीय जो हुनर है उससे बच्चों को परिचित करवाइए। आप स्थानीय इलाकें में टूर के लिए जाईये। क्या कभी हम सोच सकते हैं कि हमारे जो वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज की कल्पना है, हम उस ब्लॉक में जो स्कूल हैं उसको आइडेंटिफाइ करें। कहीं पर आठवी कक्षा के बच्चे, कहीं पर नौवी कक्षा के बच्चों का, कहीं दसवीं कक्षा के बच्चे। दो दिन के लिए एक रात वहां स्टे करना जो आखि‍री विलेज है, उसका टूर करें। विलेज को देखें, विलेज के पेड़-पौधों को देखें, वहां के लोगों के जीवन को देखें। वाइब्रेंसी आना शुरु हो जाएगा।

तहसील सेंटर पर रहने वाला बच्चा चालीस पचास सौ किलोमीटर जाकर के आखि‍री बॉर्डर विलेज जाएगा, अपनी बॉर्डर को देखेगा, अब है तो वो एजुकेशन का कार्यक्रम लेकिन हमारे वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज के लिए वो काम आ सकता है। तो हम ऐसी कुछ व्यवस्थाएं विकसित कर सकते हैं क्या?

अब हम तय करें कि तहसील लेवल की जितनी स्पर्धाएं होंगी। वो सरे कार्यक्रम हम बॉर्डर विलेज पर करेंगे, अपने आप वाइब्रेंसी आना शुरू हो जाएगा। उसी प्रकार से हम कभी सोचें कि हमारे गांव में ऐसे कितने लोग हैं जो कहीं न कहीं सरकार में काम करते हैं। कितने लोग हैं जो हमारे गांव के हैं लेकिन अब सरकार में से निवृत्त होकर के या तो गांव में रहते हैं या नजदीक ही कहीं नगर में रहते हैं। अगर ऐसी व्यवस्था है तो क्या कभी सरकार से जुड़े हुए या सरकार की पेंशन पर या सरकार की पे पर जिनका संबंध है, क्या साल में एक बार ये सब लोग इकट्ठे हो सकते हैं गांव में? चलो भई ये मेरा गांव है, मैं तो चला गया, नौकरी कर रहा हूं, शहर चला गया। लेकिन आइए अपन बैठते हैं, अपने गांव के लिए हम सरकार में रहे हैं, सरकार को जानते हैं, व्यवस्था करो, चलो मिलकर के काम करते हैं। यानी ये हुआ नई रणनीति, क्या कभी हमने सोचा है कि हम गांव का जन्मदिन तय करें और गांव का जन्मदिन मनाएंगे। गांव के लोग 10-15 दिन का उत्सव मनाकर के गांव की आवयकताओं की पूर्ति के लिए आगे आएंगे। गांव के साथ ये जुड़ाव वही गांव को समृद्ध करेगा जितना बजट से होगा, उससे भी ज्यादा ये सबके प्रयास से होगा।

हम नई रणनीति के साथ, अब जैसे हमारे कृषि‍ विज्ञान केंद्र है, क्या हम तय कर सकते हैं, भई हमारे गांव में दो सौ किसान हैं, चलो इस बार 50 किसान प्राकृतिक कृषि‍ की तरफ हम ले जाएंगे। कभी हम सोच सकते हैं क्या? हमारे यहां जो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज हैं, उसमें ज्यादातर ग्रामीण परिवेश के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। क्या कभी rural development का पूरा चित्र हमने इन यूनिवर्सिटीज में जाकर के उन बच्चों के सामने रखा है, जो वेकेशन में अपने गांव जाते हैं, गांव के लोगों के साथ बैठते हैं। थोड़े पढ़े-लिखे हैं तो सरकार की योजनाओं को जानेंगे, समझेंगे, अपने गांव के लिए करेंगे। यानी हम कुछ नई रणनीति पर सोच सकते हैं क्या? और हमें पता होना चाहिए कि आज भारत में ज्यादातर राज्यों में output से ज्यादा outcome पर बल देने की आवश्यकता है। आज गांव में काफी मात्रा में धन जाता है। उन पैसों का सही समय पर अगर उपयोग हो, तो हम गांव की स्थि‍ति बदल सकते हैं।

हम गांव के अंदर एक प्राकर से विलेज सेक्रेटेरिएट, और जब मैं विलेज सेक्रेटेरिएट कहूंगा तो हम सोचेंगे कि एक बिल्डिंग होना चाहिए। सबके लिए बैठने के लिए चैम्बर, वो मैं नहीं कह रहा हूं। भले ही हम कोई जहां आज बैठते हैं, ऐसी ही कोई छोटी जगह पर बैठेंगे लेकिन साथ मिलकर के एजुकेशन के लिए कुछ हम प्लान कर सकते हैं। उसी प्रकार से आपने देखा होगा। भारत सरकार ने एस्पीरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स का एक कार्यक्रम हाथ लिया। इतना अद्भुत अनुभव आ रहा है कि डिस्ट्रिकट के बीच में एक कॉम्पीटीशन शुरू हुई है। हर डिस्ट्रिकट को लग रहा है कि मेरे राज्य में मैं पीछे नहीं रहूंगा। कई डिस्ट्रिकट को लग रहा है कि मैं नेशनल एवरेज से भी आगे निकलना चाहता हूं। क्या आप अपनी तहसील में आठ या दस पैरामीटर तय करें। उन आठ या दस पैरामीटर की कॉम्पीटीशन हर तीन महीने में से कॉम्पीटीशन का रिजल्ट आए कि भई इस कामों में कौन सा गांव आगे निकल गया? कौन सा गांव आगे बढ़ रहा है? आज हम क्या करते हैं, बेस्ट विलेज का स्टेट लेवल का अवार्ड देते हैं, बेस्ट विलेज का नेशनल लेवल का अवार्ड देते हैं। आवश्यकता ये है कि गांव में ही तहसील लेवल के जो अगर पचास, सौ, डेढ़ सौ, दो सौ, गांव हैं उनके बीच ही कॉम्पीटीशन करें, उनके पैरामीटर तय करें कि भई ये दस विषय हैं, चलिए 2022 में इन दस विषयों की कॉम्पीटीशन। देखते हैं इन दस विषयों में कौन आगे निकलता है। आप देखि‍ए, बदलाव शुरू हो जाएगा और जब इस प्रकार से ब्लॉक लेवल पर मान्यता मिलेगी, तो बदलाव शुरू होगा और इसलिए मैं कहता हूं कि budget is not a issue. आज हमें आउटकम और धरती पर परिवर्तन इस पर प्रयास करना चाहिए।

क्या गांव के अंदर एक मिजाज नहीं बन सकता कि हमारे गांव में कोई भी बालक कुपोषि‍त नहीं होगा। मैं बताता हूं कि सरकार के बजट की वो परवाह करेंगे नहीं, एक बार उनके दिल में बैठ गया ना, गांव के लोग किसी भी बच्चे को कुपोषि‍त नहीं रहने देंगे। आज भी हमारे यहां ये संस्कार है। हम अगर ये कहें कि हमारे गांव में एक भी ड्रॉपआउट नहीं होगा, आप देखि‍ए गांव के लोग जुड़ेगे। हमने तो ये देखा है, कई गांव के नेता ऐसे हैं, पंच हैं, सरपंच हैं लेकिन कभी गांव के स्कूल में गए ही नहीं हैं। और गए तो कब गए? झंडा वंदन के दिन चले गए, बाकी कभी जाना ही नहीं। ये हम आदत कैसे बनाएं? ये मेरा गांव है, ये मेरे गांव की व्यवस्थाएं हैं, मुझे उस गांव में जाना है और ये लीडरशि‍प सरकार की सभी इकाईयों ने देनी चाहिए। अगर हम ये लीडरशि‍प नहीं देंगे और हम सिर्फ कह देंगे कि हमने चेक काट दिया, हमने पैसे भेज दिए, काम हो जाएगा, परिवर्तन नहीं आएगा। और आजादी के जब 75 साल मना रहे हैं और महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी हुई कुछ बातें हैं, क्या हम उसको साकार नहीं कर सकते? स्वच्छता, भारत की आत्मा गांव में रहती है, ऐसा महात्मा गांधी कह के गए हैं, क्या हम इसको पूरा नहीं कर सकते हैं?

साथि‍यों,

राज्य सरकार, केंद्र सरकार, स्थानीय स्वराज की संस्थाएं मिलकर के और हमारे सभी डिपार्टमेंट साइलो खत्म करके अगर ये काम तय करें, मुझे पक्का विश्वास है हम उत्तम से उत्तम परिणाम ला सकते हैं। आजादी के 75 साल हमें भी देश को कुछ देना चाहिए, इस मिजाज के साथ हम काम करें। आप आज पूरा दिन भी चर्चा करने वाले हो, बजट को गांव के जीवन में बदलाव लाने में कैसे optimum utilisation of each and every penny, ये हम कैसे कर सकें, अगर ये हम कर लेंगे तो आप देखि‍ए कोई भी नागरिक पीछे नहीं छूटेगा। हमारा सपना पूरा होगा। मेरी आप सबको बहुत शुभकामना है!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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Text of PM’s address at the Krishnaguru Eknaam Akhand Kirtan for World Peace
February 03, 2023
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“Krishnaguru ji propagated ancient Indian traditions of knowledge, service and humanity”
“Eknaam Akhanda Kirtan is making the world familiar with the heritage and spiritual consciousness of the Northeast”
“There has been an ancient tradition of organizing such events on a period of 12 years”
“Priority for the deprived is key guiding force for us today”
“50 tourist destination will be developed through special campaign”
“Gamosa’s attraction and demand have increased in the country in last 8-9 years”
“In order to make the income of women a means of their empowerment, ‘Mahila Samman Saving Certificate’ scheme has also been started”
“The life force of the country's welfare schemes are social energy and public participation”
“Coarse grains have now been given a new identity - Shri Anna”

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय जयते परम कृष्णगुरु ईश्वर !.

कृष्णगुरू सेवाश्रम में जुटे आप सभी संतों-मनीषियों और भक्तों को मेरा सादर प्रणाम। कृष्णगुरू एकनाम अखंड कीर्तन का ये आयोजन पिछले एक महीने से चल रहा है। मुझे खुशी है कि ज्ञान, सेवा और मानवता की जिस प्राचीन भारतीय परंपरा को कृष्णगुरु जी ने आगे बढ़ाया, वो आज भी निरंतर गतिमान है। गुरूकृष्ण प्रेमानंद प्रभु जी और उनके सहयोग के आशीर्वाद से और कृष्णगुरू के भक्तों के प्रयास से इस आयोजन में वो दिव्यता साफ दिखाई दे रही है। मेरी इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर असम आकर आप सबके साथ इस कार्यक्रम में शामिल होऊं! मैंने कृष्णगुरु जी की पावन तपोस्थली पर आने का पहले भी कई बार प्रयास किया है। लेकिन शायद मेरे प्रयासों में कोई कमी रह गई कि चाहकर के भी मैं अब तक वहां नहीं आ पाया। मेरी कामना है कि कृष्णगुरु का आशीर्वाद मुझे ये अवसर दे कि मैं आने वाले समय में वहाँ आकर आप सभी को नमन करूँ, आपके दर्शन करूं।

साथियों,

कृष्णगुरु जी ने विश्व शांति के लिए हर 12 वर्ष में 1 मास के अखंड नामजप और कीर्तन का अनुष्ठान शुरू किया था। हमारे देश में तो 12 वर्ष की अवधि पर इस तरह के आयोजनों की प्राचीन परंपरा रही है। और इन आयोजनों का मुख्य भाव रहा है- कर्तव्य I ये समारोह, व्यक्ति में, समाज में, कर्तव्य बोध को पुनर्जीवित करते थे। इन आयोजनों में पूरे देश के लोग एक साथ एकत्रित होते थे। पिछले 12 वर्षों में जो कुछ भी बीते समय में हुआ है, उसकी समीक्षा होती थी, वर्तमान का मूल्यांकन होता था, और भविष्य की रूपरेखा तय की जाती थी। हर 12 वर्ष पर कुम्भ की परंपरा भी इसका एक सशक्त उदाहरण रहा है। 2019 में ही असम के लोगों ने ब्रह्मपुत्र नदी में पुष्करम समारोह का सफल आयोजन किया था। अब फिर से ब्रह्मपुत्र नदी पर ये आयोजन 12वें साल में ही होगा। तमिलनाडु के कुंभकोणम में महामाहम पर्व भी 12 वर्ष में मनाया जाता है। भगवान बाहुबली का महा-मस्तकाभिषेक ये भी 12 साल पर ही होता है। ये भी संयोग है कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर खिलने वाला नील कुरुंजी पुष्प भी हर 12 साल में ही उगता है। 12 वर्ष पर हो रहा कृष्णगुरु एकनाम अखंड कीर्तन भी ऐसी ही सशक्त परंपरा का सृजन कर रहा है। ये कीर्तन, पूर्वोत्तर की विरासत से, यहाँ की आध्यात्मिक चेतना से विश्व को परिचित करा रहा है। मैं आप सभी को इस आयोजन के लिए अनेकों-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ।

साथियों,

कृष्णगुरु जी की विलक्षण प्रतिभा, उनका आध्यात्मिक बोध, उनसे जुड़ी हैरान कर देने वाली घटनाएं, हम सभी को निरंतर प्रेरणा देती हैं। उन्होंने हमें सिखाया है कि कोई भी काम, कोई भी व्यक्ति ना छोटा होता है ना बड़ा होता है। बीते 8-9 वर्षों में देश ने इसी भावना से, सबके साथ से सबके विकास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया है। आज विकास की दौड़ में जो जितना पीछे है, देश के लिए वो उतनी ही पहली प्राथमिकता है। यानि जो वंचित है, उसे देश आज वरीयता दे रहा है, वंचितों को वरीयता। असम हो, हमारा नॉर्थ ईस्ट हो, वो भी दशकों तक विकास के कनेक्टिविटी से वंचित रहा था। आज देश असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को वरीयता दे रहा है, प्राथमिकता दे रहा है।

इस बार के बजट में भी देश के इन प्रयासों की, और हमारे भविष्य की मजबूत झलक दिखाई दी है। पूर्वोत्तर की इकॉनमी और प्रगति में पर्यटन की एक बड़ी भूमिका है। इस बार के बजट में पर्यटन से जुड़े अवसरों को बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को विशेष अभियान चलाकर विकसित किया जाएगा। इनके लिए आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा, वर्चुअल connectivity को बेहतर किया जाएगा, टूरिस्ट सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा। पूर्वोत्तर और असम को इन विकास कार्यों का बड़ा लाभ मिलेगा। वैसे आज इस आयोजन में जुटे आप सभी संतों-विद्वानों को मैं एक और जानकारी देना चाहता हूं। आप सबने भी गंगा विलास क्रूज़ के बारे में सुना होगा। गंगा विलास क्रूज़ दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज़ है। इस पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी सफर कर रहे हैं। बनारस से बिहार में पटना, बक्सर, मुंगेर होते हुये ये क्रूज़ बंगाल में कोलकाता से आगे तक की यात्रा करते हुए बांग्लादेश पहुंच चुका है। कुछ समय बाद ये क्रूज असम पहुँचने वाला है। इसमें सवार पर्यटक इन जगहों को नदियों के जरिए विस्तार से जान रहे हैं, वहाँ की संस्कृति को जी रहे हैं। और हम तो जानते है भारत की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी अहमियत, सबसे बड़ा मूल्यवान खजाना हमारे नदी, तटों पर ही है क्योंकि हमारी पूरी संस्कृति की विकास यात्रा नदी, तटों से जुड़ी हुई है। मुझे विश्वास है, असमिया संस्कृति और खूबसूरती भी गंगा विलास के जरिए दुनिया तक एक नए तरीके से पहुंचेगी।

साथियों,

कृष्णगुरु सेवाश्रम, विभिन्न संस्थाओं के जरिए पारंपरिक शिल्प और कौशल से जुड़े लोगों के कल्याण के लिए भी काम करता है। बीते वर्षों में पूर्वोत्तर के पारंपरिक कौशल को नई पहचान देकर ग्लोबल मार्केट में जोड़ने की दिशा में देश ने ऐतिहासिक काम किए हैं। आज असम की आर्ट, असम के लोगों के स्किल, यहाँ के बैम्बू प्रॉडक्ट्स के बारे में पूरे देश और दुनिया में लोग जान रहे हैं, उन्हें पसंद कर रहे हैं। आपको ये भी याद होगा कि पहले बैम्बू को पेड़ों की कैटेगरी में रखकर इसके काटने पर कानूनी रोक लग गई थी। हमने इस कानून को बदला, गुलामी के कालखंड का कानून था। बैम्बू को घास की कैटेगरी में रखकर पारंपरिक रोजगार के लिए सभी रास्ते खोल दिये। अब इस तरह के पारंपरिक कौशल विकास के लिए, इन प्रॉडक्ट्स की क्वालिटी और पहुँच बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। इस तरह के उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए बजट में हर राज्य में यूनिटी मॉल-एकता मॉल बनाने की भी घोषणा इस बजट में की गई है। यानी, असम के किसान, असम के कारीगर, असम के युवा जो प्रॉडक्ट्स बनाएँगे, यूनिटी मॉल-एकता मॉल में उनका विशेष डिस्प्ले होगा ताकि उसकी ज्यादा बिक्री हो सके। यही नहीं, दूसरे राज्यों की राजधानी या बड़े पर्यटन स्थलों में भी जो यूनिटी मॉल बनेंगे, उसमें भी असम के प्रॉडक्ट्स रखे जाएंगे। पर्यटक जब यूनिटी मॉल जाएंगे, तो असम के उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा।

साथियों,

जब असम के शिल्प की बात होती है तो यहाँ के ये 'गोमोशा' का भी ये ‘गोमोशा’ इसका भी ज़िक्र अपने आप हो जाता है। मुझे खुद 'गोमोशा' पहनना बहुत अच्छा लगता है। हर खूबसूरत गोमोशा के पीछे असम की महिलाओं, हमारी माताओं-बहनों की मेहनत होती है। बीते 8-9 वर्षों में देश में गोमोशा को लेकर आकर्षण बढ़ा है, तो उसकी मांग भी बढ़ी है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स सामने आए हैं। इन ग्रुप्स में हजारों-लाखों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। अब ये ग्रुप्स और आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बनेंगे। इसके लिए इस साल के बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आय उनके सशक्तिकरण का माध्यम बने, इसके लिए 'महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट' योजना भी शुरू की गई है। महिलाओं को सेविंग पर विशेष रूप से ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा। साथ ही, पीएम आवास योजना का बजट भी बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, ताकि हर परिवार को जो गरीब है, जिसके पास पक्का घर नहीं है, उसका पक्का घर मिल सके। ये घर भी अधिकांश महिलाओं के ही नाम पर बनाए जाते हैं। उसका मालिकी हक महिलाओं का होता है। इस बजट में ऐसे अनेक प्रावधान हैं, जिनसे असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं को व्यापक लाभ होगा, उनके लिए नए अवसर बनेंगे।

साथियों,

कृष्णगुरू कहा करते थे- नित्य भक्ति के कार्यों में विश्वास के साथ अपनी आत्मा की सेवा करें। अपनी आत्मा की सेवा में, समाज की सेवा, समाज के विकास के इस मंत्र में बड़ी शक्ति समाई हुई है। मुझे खुशी है कि कृष्णगुरु सेवाश्रम समाज से जुड़े लगभग हर आयाम में इस मंत्र के साथ काम कर रहा है। आपके द्वारा चलाये जा रहे ये सेवायज्ञ देश की बड़ी ताकत बन रहे हैं। देश के विकास के लिए सरकार अनेकों योजनाएं चलाती है। लेकिन देश की कल्याणकारी योजनाओं की प्राणवायु, समाज की शक्ति और जन भागीदारी ही है। हमने देखा है कि कैसे देश ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और फिर जनभागीदारी ने उसे सफल बना दिया। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता के पीछे भी सबसे बड़ी वजह जनभागीदारी ही है। देश को सशक्त करने वाली इस तरह की अनेकों योजनाओं को आगे बढ़ाने में कृष्णगुरु सेवाश्रम की भूमिका बहुत अहम है। जैसे कि सेवाश्रम महिलाओं और युवाओं के लिए कई सामाजिक कार्य करता है। आप बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ और पोषण जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की भी ज़िम्मेदारी ले सकते हैं। 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसे अभियानों से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने से सेवाश्रम की प्रेरणा बहुत अहम है। योग हो, आयुर्वेद हो, इनके प्रचार-प्रसार में आपकी और ज्यादा सहभागिता, समाज शक्ति को मजबूत करेगी।

साथियों,

आप जानते हैं कि हमारे यहां पारंपरिक तौर पर हाथ से, किसी औजार की मदद से काम करने वाले कारीगरों को, हुनरमंदों को विश्वकर्मा कहा जाता है। देश ने अब पहली बार इन पारंपरिक कारीगरों के कौशल को बढ़ाने का संकल्प लिया है। इनके लिए पीएम-विश्वकर्मा कौशल सम्मान यानि पीएम विकास योजना शुरू की जा रही है और इस बजट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। कृष्णगुरु सेवाश्रम, विश्वकर्मा साथियों में इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाकर भी उनका हित कर सकता है।

साथियों,

2023 में भारत की पहल पर पूरा विश्व मिलेट ईयर भी मना रहा है। मिलेट यानी, मोटे अनाजों को, जिसको हम आमतौर पर मोटा अनाज कहते है नाम अलग-अलग होते है लेकिन मोटा अनाज कहते हैं। मोटे अनाजों को अब एक नई पहचान दी गई है। ये पहचान है- श्री अन्न। यानि अन्न में जो सर्वश्रेष्ठ है, वो हुआ श्री अन्न। कृष्णगुरु सेवाश्रम और सभी धार्मिक संस्थाएं श्री-अन्न के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। आश्रम में जो प्रसाद बँटता है, मेरा आग्रह है कि वो प्रसाद श्री अन्न से बनाया जाए। ऐसे ही, आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास को युवापीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अभियान चल रहा है। इस दिशा में सेवाश्रम प्रकाशन द्वारा, असम और पूर्वोत्तर के क्रांतिकारियों के बारे में बहुत कुछ किया जा सकता है। मुझे विश्वास है, 12 वर्षों बाद जब ये अखंड कीर्तन होगा, तो आपके और देश के इन साझा प्रयासों से हम और अधिक सशक्त भारत के दर्शन कर रहे होंगे। और इसी कामना के साथ सभी संतों को प्रणाम करता हूं, सभी पुण्य आत्माओं को प्रणाम करता हूं और आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!