"यह वास्‍तव में एक महाकुंभ है, जो अभूतपूर्व ऊर्जा और जीवंतता का निर्माण कर रहा है"
"स्टार्ट-अप महाकुंभ में आने वाला कोई भी भारतीय भविष्य के यूनिकॉर्न और डेकाकॉर्न का साक्षी बनेगा"
"स्टार्टअप एक सामाजिक संस्कृति बन गया है और कोई भी सामाजिक संस्कृति को रोक नहीं सकता है"
"देश में 45 प्रतिशत से अधिक स्टार्ट-अप महिलाओं के नेतृत्व वाले हैं"
"मुझे विश्वास है कि वैश्विक अनुप्रयोगों के लिए भारतीय समाधान विश्‍व के कई देशों के लिए मददगार बनेंगे"

मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमान पीयूष गोयल जी, अनुप्रिया पटेल जी, सोम प्रकाश जी, अन्य महानुभाव और देश भर से हमारे साथ जुड़े हुए स्टार्ट अप इकोसिस्टम के सभी साथी, आप सबको स्टार्ट-अप महाकुंभ की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

स्टार्टअप लॉन्च तो बहुत लोग करते हैं और पॉलिटिक्स में तो ज्यादा, और बार-बार लॉन्च करना पड़ता है। आप में उनमें फर्क ये है कि आप लोग प्रयोगशील होते हैं, एक अगर लॉन्च नहीं हुआ तो तुरंत दूसरे पर चले जाते हैं। अब पीछे देर हो गई।

साथियों,

आज जब देश, 2047 के विकसित भारत के रोडमैप पर काम कर रहा है, ऐसे समय मुझे लगता है कि ये स्टार्ट अप महाकुंभ का बहुत महत्व है। बीते दशकों में हमने देखा है कि भारत ने कैसे IT और Software सेक्टर में अपनी छाप छोड़ी है। अब हम भारत में Innovation और Startup Culture का Trend लगातार बढ़ते हुए देख रहे हैं। और इसलिए, स्टार्टअप की दुनिया के आप सभी साथियों का इस महाकुंभ में होना बहुत मायने रखता है। और मैं बैठे-बैठे सोच रहा था कि ये स्टार्ट अप वाले सफल कैसे होते हैं, क्यों होते हैं, वो कौन सी उनके अंदर एक genius element है जिसके कारण ये सफल हो जाते हैं। तो मुझे एक विचार आया आप लोग तय करना मैं सही हूं कि गलत हूं। जो आपकी टीम है जिसने इसको आर्गेनाइज किया है। क्योंकि आम तौर पर सार्वजनिक जीवन में उद्योग जगत, व्यापार जगत में कोई भी निर्णय होता है तो उसका संबंध सरकार से होता ही है। और जब सरकार से होता है तो फिर थोड़ा 5 साल का टाइम टेबल रहता है। धीरे-धीरे पहुंच रही है इधर से शुरू हुई है। और इसलिए आमतौर पर जो व्यापारी मन होता है, वो सोचता है यार चुनाव का वर्ष है, अभी रहने दो, एक बार चुनाव हो जाए, नई सरकार बनेगी तब देखेंगे। ऐसा ही होता है ना? लेकिन आप लोग election declare हो चुका है। उसके बावजूद भी इतना बड़ा कार्यक्रम कर रहे हैं। इसका मतलब ये है कि आपको पता है अगले पांच साल क्या होने वाला है। और मैं समझता हूं आपके अंदर ये जो genius चीज पड़ी है ना वो ही स्टार्ट अप को सफल बनाती होगी।

यहां Investors, Incubators, Academicians, Researchers, Industry Members, यानि एक प्रकार से सच्चे अर्थ में ये महाकुंभ है। यहां Young Entrepreneurs भी हैं और Future Entrepreneurs भी हैं। और जैसे आपमें genius talent है ना मेरे में भी है। और इसे मैं पहचान सकता हूं इसमे Future Entrepreneurs मुझे दिखते हैं, मैं देख सकता हूं। ऐसे में ये Energy, ये Vibe, वाकई अद्भुत है। जब मैं Pods और Exhibition Stalls से गुजर रहा था, तो ये Vibe मैं फील कर रहा था। और दूर कुछ लोग नारे भी लगा रहे थे। और हर कोई अपने इनोवेशन को बड़े गर्व के साथ दिखा रहा था। और यहां आकर किसी भी भारतीय को लगेगा कि वो आज के स्टार्टअप को नहीं बल्कि कल के यूनिकॉर्न और डेकाकॉर्न को देख रहे हैं।

साथियों,

भारत आज अगर Global Startup Space के लिए नई उम्मीद, नई ताकत बनकर उभरा है, तो इसके पीछे एक सोचा-समझा विजन रहा है। भारत ने सही समय पर सही निर्णय लिए, सही समय पर स्टार्ट अप्स को लेकर काम शुरू किया। अब ये समिट तो आप लोगों ने बहुत बड़ी मात्रा में आर्गेनाइज की है। लेकिन जब ये शब्द का भी स्टार्ट अप नहीं हुआ था। उस समय मैंने एक समिट की थी। विज्ञान भवन में बड़ी मुश्किल से आधा सभागृह भरा था। पीछे भी जैसे सरकार करती है जगह हमने भर दी थी। ये अंदर की बात है, बाहर मत बताना। और उसमें देश में जो नए-नए कुछ नौजवान और मैंने स्टार्ट अप इंडिया, स्टैन्ड अप इंडिया इसको लॉन्च करने की इस दिशा में मेरा प्रयास था। और मैं चाहता था कि उसमें मैं एक आकर्षण पैदा करूं, यूथ में एक मेसेजिंग का, तो कुछ लोगों ने जो initiative लिए थे, उनको खोजा देश भर में। भई कोई कोने में कुछ कोई करता है तो जरा देखो। और मैंने 5-7 लोगों को बुलाया था कि जरा भई आप भी वहां भाषण कीजिए मेरी कोई सुनेगा नहीं। अब सुनते हैं। मैं उस समय की बात कर रहा हूं। तो मुझे बराबर याद है उस फंक्शन में एक बेटी ने अपना अनुभव सुनाया। शायद यहां बैठी भी हो मुझे मालूम नहीं है और उसने वो मूल बंगाली है और मां बाप ने काफी पढ़ा लिखा कर के उसको तैयार किया। उसने अपना अनुभव बताया। उसने कहा मैं, उसके माता-पिता भी पढ़े लिखे हैं। तो बोली मैं घर गई तो मेरी मां ने पूछा क्या कर रहे हो बेटा? काफी पढ़ लिख कर आई थी। तो उसने कहा कि मैं स्टार्ट अप शुरू करने जा रही हूं। तो उसकी मां ने कहा वो बंगाली थे- सर्वनाश, बोले सर्वनाश। यानि स्टार्ट अप यानि सर्वनाश। वहां से शुरू हुई ये यात्रा इसका एक सैंपल यहां नजर आ रहा है। देश ने Startup India अभियान के तहत Innovative Ideas को एक प्लेटफॉर्म दिया, उनको फंडिंग के सोर्स से कनेक्ट किया। एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में Incubators स्थापित करने का अभियान भी चलाया। हमने बिल्कुल उसका बाल वाटिका शुरू की अटल टैंकरिंग लैब। जैसे education में सबसे शुरू होता है ना केजी का। वैसे ही हमने शुरू किया और इससे फिर स्टेज आगे गया, Incubators centers बनते गए। टीयर-2, टीयर-3, शहरों के नौजवानों के लिए भी अपने Ideas को Incubate करने की सुविधा मिलने लगी। आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हमारा startup ecosystem सिर्फ बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। और अभी छोटी सी फिल्म में भी दिखाया गया। ये देश के 600 से अधिक जिलों तक पहुंच चुका है। इसका मतलब है ये एक सामाजिक कल्चर बन गया है। और जब कोई सामाजिक कल्चर बन जाए तो फिर उसको रूकने का कोई कारण ही नहीं होता है। वो नई-नई ऊंचाईयों को प्राप्त करता ही जाता है। भारत की स्टार्ट अप क्रांति का नेतृत्व आज देश के छोटे शहरों के युवा कर रहे हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि हमारे स्टार्ट अप्स सिर्फ Tech Space तक ही सीमित हैं। लेकिन मुझे खुशी है कि आज एग्रीकल्चर, टेक्सटाइल, मेडिसिन, ट्रांसपोर्ट, स्पेस even मैंने देखा है योगा में स्टार्ट अप शुरू हुए हैं। आयुर्वेद में स्टार्ट अप शुरू हुआ है। और एक दो नहीं मैं थोड़ा मैं रूचि लेता हूं तो देखता रहता हूं 300-300, 400-400 की संख्या में है। और हरेक में एक से बढ़कर एक कुछ कुछ नया है जी। कभी तो मुझे भी सोचना पड़ता है कि मैं योगा कर रहा हूं वो ठीक है कि स्टार्ट अप वाला कह रहा है वो योगा ठीक है।

साथियों,

स्पेस जैसे सेक्टर्स में जोकि हमनें अभी कुछ ही समय पहले ओपन अप किया। पहले तो सरकार में जैसे स्वभाव रहता है जंजीरे बांध देना और मेरी पूरी ताकत जंजीरे तोड़ने में लगी रहती है। स्पेस में 50 से अधिक सेक्टर्स में भारत के स्टार्ट-अप्स बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। और already हमारे start up space satellite launch करने लगे हैं जी इतने कम समय में।

साथियों,

भारत की युवा शक्ति का सामर्थ्य आज पूरी दुनिया देख रही है। इसी सामर्थ्य पर भरोसा करते हुए देश ने Startup Ecosystem निर्माण करने की तरफ अनेक कदम उठाए हैं। शुरुआत में इस प्रयास पर भरोसा करने वाले बहुत कम थे, जैसा मैंने प्रारंभ में कहा। हमारे यहां पढ़ाई का मतलब नौकरी और नौकरी का मतलब सिर्फ सरकारी नौकरी, यही सब था। मैं बड़ौदा में रहता था पहले और वहां महाराष्ट्रियन परिवारों से मेरा नाता जरा ज्यादा था तो एक गायकवाड स्टेट है। तो हमारे कुछ साथी बड़े मजाकिया स्वभाव से कहते थे। अगर बेटी बड़ी हुई, शादी तय करनी है तो घर में चर्चा क्या होती है? मुलगा फार छान आहे, यानि बेटा बहुत अच्छा है। फिर क्या सरकारी नौकरी आहे बस। तो बेटी शादी होने के लिए योग्य हो गया। आज पूरी सोच बदल गई है। कोई बिजनेस की बात करता था- तो पहले आइडिया की नहीं, दिमाग यहीं यार करना तो है लेकिन पैसे कहां से लाऊं। शुरूआत की चिंता उसकी पैसों से रहती थी। जिसके पास पैसा है, वही बिजनेस कर सकता है, ये हमारे यहाँ धारणा बन चुकी थी। ये startup ecosystem ने उस सायकी को तोड़ दिया है जी। और देश में जो revolution आता है ना ऐसी चीजों से आता है। देश के नौजवानों ने Job Seeker से ज्यादा Job Creator बनने का रास्ता चुना है। फिर जब देश ने Startup India अभियान शुरु किया है, तो देश के युवाओं ने दिखा दिया कि वो क्या कुछ कर सकते हैं। आज भारत, दुनिया का तीसरा बड़ा स्टार्ट अप इकोसिस्टम है। 2014 में जहां देश में कुछ सौ स्टार्ट अप्स भी नहीं थे, आज भारत में करीब सवा लाख रजिस्टर्ड स्टार्ट अप्स हैं। और इनसे करीब 12 लाख नौजवान सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। हमारे पास 110 से ज्यादा यूनिकॉर्न्स हैं। हमारे स्टार्ट अप्स ने लगभग 12 हज़ार पेटेंट्स फाइल किए हैं। और बहुत सारे स्टार्ट अप्स ऐसे हैं जो अभी तक वो पेटेंट के महत्व नहीं समझे हैं। मैं अभी भी मिलकर आया, मैंने पहला ही पूछा मैंने कहा पैटेंट हुआ क्या? नहीं बोले प्रोसेस में है। मेरा आप सबसे आग्रह है उस काम को साथ साथ चालू ही कर दीजिए। क्योंकि आज दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है पता नहीं कौन कहां हाथ मार ले। और देश ने कैसे इनकी हैंड होल्डिंग की है, उसका एक और उदाहरण है Gem पोर्टल। यहां पर उसकी भी व्यवस्था है आप देख सकते हैं। आज ये स्टार्ट अप्स सिर्फ Gem Portal पर ही करीब 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार कर चुके हैं। यानि सरकार ने एक प्लेटफार्म बनाया आप वहां पहुंचे और इतने कम समय में 20-22 साल की आयु के नौजवान 20 हजार करोड़ का कारोबार कर लें एक प्लेटफॉर्म पर ये बहुत बड़ी बात है जी। आप सभी इस बात के गवाह हैं कि आज का युवा अब, डॉक्टर, इंजीनियर के साथ-साथ, एक Innovator बनने का सपना, अपने स्टार्ट-अप का सपना भी देखने लगा है। ये मैं समझता हूं उसके पास जो टैलेंट है या जो उसकी ट्रेनिंग है स्टार्ट अप के माध्यम से वो एक नए क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। आज मैं देखता हूं कैसे युवा अपने स्टार्ट अप के दम पर अलग-अलग सेक्टर्स में छाए हुए हैं और मुझे तो पक्का विश्वास है कि 2029 का जब चुनाव आएगा ना। उस समय कम से कम 1000 स्टार्ट अप्स ऐसे होंगे जिसकी सेवाएं political पार्टियां लेती होंगी। वो ऐसे ऐसे चीजें लेकर के आएंगे और उसको भी लगेगा की हां यार इस तरीके से पहुंचना अच्छा है, ये सरल रास्ता है। यानि कहने का मेरा तात्पर्य है कि हर क्षेत्र में चाहे वो सेवा का क्षेत्र हो, communication का क्षेत्र हो, नौजवान नए ideas लेकर के आते हैं। कम से कम requirement के साथ वो परफार्म करने लग जाते हैं। और मैं मानता हूं इसी ने इसकी ताकत बहुत बढ़ाई है। मैंने देखा आज जो traditional खानपान की चीजें हैं। उसमें बिजनेस में आगे बढ़ रहा है, कोई मेडिकल के equipment इस प्रकार से बना रहे हैं कि बड़े आसानी से आप अपना देख सकते हैं। यानि कोई सोशल मीडिया के Global Giants से मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है। यही सपने हैं, यही स्पिरिट है, यही शक्ति है, इसलिए लोग कहते हैं मैं इसे करूंगा। एक तरह से मैं कह सकता हूं कि कुछ वर्ष पहले देश ने पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर जो स्टार्ट अप लॉन्च किया था, वो सफलता की नई ऊंचाईयों को छू रहा है।

साथियों,

स्टार्ट अप्स को, देश के डिजिटल इंडिया अभियान से जो मदद मिली है, और मैं मानता हूं कि यूनिवसिर्टिज को इसे केस स्टडी के रूप में स्टडी करना चाहिए। वो अपने आप में एक बहुत बड़ी inspiration है। हमारे फिन-टेक स्टार्ट-अप्स को UPI से बड़ी मदद मिली है। भारत में ऐसे Innovative Products और Services तैयार हुई हैं, जिससे देश के हर कोने में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार हुआ है। और साथियों आपको अंदाजा नहीं है कि हम जहां हैं, हम रोजमर्रा की जिंदगी है तो हमें पता नहीं चलता है। लेकिन मैं जी-20 समिट के समय देखता था हमने यहां एक बूथ लगाया था, जहां पर अभी आपका exhibition लगा है वहां जी-20 समिट में। और वहां यूपीआई कैसे काम करता है। हम एक एक हजार रुपया देते थे ताकि उनको ट्रायल रंग करने के लिए काम आए। हरेक एंबेसी अपने टॉप मोस्ट लीडर को वहां ले जाने का आग्रह रखती थी कि जरा वहां देखिए एक बार। यानि वहां लाइन लगी रहती थी बड़े-बड़े नेताओं की कि यूपीआई है क्या? काम कैसे करता है? और उनके लिए बड़ा अजूबा था। हमारे यहां गांव में सब्जी वाला भी बड़े आराम से कर लेता है।

साथियों,

इससे Financial Inclusion को बल मिला है, Rural और Urban Divide को देश कम कर पाया है। और दुनिया में शुरू में इसकी चिंता थी! जब digital progress होने लगा तो haves and have not वाली theory इसके साथ जुड़ गई थी। सोशल डिवाइड की बात हो रही थी। भारत ने technology को democritised कर दिया है। और इसलिए haves and have not वाली theory मेरे यहां चल नहीं सकती है। मेरे यहां सबके लिए सब कुछ है। आज एग्रीकल्चर हो, एजुकेशन हो, हेल्थ हो, इनमें स्टार्टअप्स के लिए नई संभावनाएं बन रही हैं। मुझे इस बात की भी खुशी है कि हमारे 45 परसेंट से ज्यादा स्टार्टअप्स, इसका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, नारीशक्ति कर रही है। इस स्टार्ट अप का कोई अंदाजा नहीं लगा सकता जी। ये पूरा additional benefit है देश को। हमारी बेटियां, Cutting-Edge Innovation से देश को समृद्धि की ओर ले जा रही हैं।

साथियों,

Innovation का ये Culture, विकसित भारत के निर्माण के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए भी बहुत जरूरी है। और मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कहता हूं, विश्व के बेहतर भविष्य की बात मैं कर रहा हूं। और मेरी ताकत पर नहीं आपके सामर्थ्य पर मेरा भरोसा है। भारत ने अपना ये विजन अपनी G-20 Presidency के दौरान भी स्पष्ट किया है। इसी premises में जी-20 समिट हुई। विश्व के सभी बड़े नेता कोविड के बाहर दुनिया को कहां ले जाना इसके लिए बैठे थे। और इसी मंडप में मेरे देश का यंग माइंड बैठा है, जो 2047 तक जाने का रास्ता तय करने वाला है। भारत ने Startup-20 के तहत, दुनिया भर के स्टार्ट अप इकोसिस्टम को एक साथ लाने का प्रयास किया है। इसी भारत मंडपम् में G20 के Delhi Declaration में पहली बार Startups को न सिर्फ Include किया गया, बल्कि उन्हें "Natural Engines Of Growth" भी माना गया। मैं जरूर कहूंगा की आप जी-20 का ये document जरूर देखें। यानि किस लेवल पर हम चीज को ले गए हैं। अब हम AI Technology से जुड़े एक नए युग में हैं। और आज दुनिया इस बात को मानकर चलती है कि एआई मतलब इंडिया का अपरहैंड रहने वाला है। ये दुनिया मान कर चल रही है। अब हमारा काम है मौका नहीं छोड़ना है। और मैं काफी मदद ले रहा हूं, एआई की आजकल। क्योंकि मुझे मालूम है मुझे election campaign में language की सीमाएं आती हैं तो मैं एआई की मदद तमिल में भी मेरी बात पहुंचा रहा हूं, तेलुगू में पहुंचा रहा हूं, उड़िया में पहुंचा रहा हूं। तो आप जैसे नौजवान ये काम करते हैं तो मेरा भी काम हो जाता है। पहले मैं देख रहा था कोई मुझे मिला था तो एक जमाना था, पहले ऑटोग्राफ मांगते थे, धीरे-धीरे फोटोग्राफ मांगने लगे, अब सेल्‍फी मांगने लगे हैं। अब तीनों मांग रहे हैं- सेल्‍फी चाहिए, ऑटोग्राफ चाहिए, फोटोग्राफ चाहिए। अब करें क्‍या। तो मैंने एआई वाली मदद ले ली, मैंने अपने नमो ऐप पर एक व्‍यवस्‍था खड़ी कर दी, अगर मैं यहां से गुजर रहा हूं और कहीं पर एक कोने पर आपका आधा चेहरा भी आ गया तो ये एआई की मदद से आप निकाल सकते हैं, मोदी के साथ मैं खड़ा हूं। आप लोग नमो ऐप पर जाएंगे तो फोटो बूथ है वहां से फोटो मिल जाएगी आपकी। जरूर आया होगा मैं यहां से गुजरा हूं तो।

साथियों,

इसलिए भारत के यंग इन्‍वेस्‍टर्स के लिए और ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स के लिए एआई एक ऐसा क्षेत्र अनगिनत नए अवसर लेकर आया है। नेशनल क्‍वांटम मिशन, इंडिया एआई मिशन, और सेमिकंडक्‍टर मिशन; ये सारे अभियान भारत के युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेंगे। अभी कुछ महीने पहले मुझे अमेरिका की संसद को संबोधित करने के लिए उन्‍होंने बुलाया था, तो मैंने वहां एआई की चर्चा की। तो मैंने कहा, एआई दुनिया का भविष्‍य तय करने के लिए सामर्थ्‍यवान बनता जा रहा है। तो जितनी वहां समझ थी उतने हिसाब से तालियां बजीं। फिर मैंने कहा कि मेरा एआई का मतलब है अमेरिका-इंडिया तो पूरा सभागृह खड़ा हो गया।

साथियो,

लेकिन ये तो मैंने वहां पॉलिटिकल संदर्भ में कहा, लेकिन आज मैं जरूर मानता हूं कि एआई का सामर्थ्‍य, इसका नेतृत्‍व भारत के हाथ में ही रहेगा और रहना भी चाहिए। इंडियन सॉल्‍यूशंस फॉर ग्‍लोबल एप्‍लीकेशसं की भावना मुझे पक्‍का विश्‍वास है, बहुत बड़ी मदद करेगी। भारत के युवा इनोवेटर जिन प्रॉब्लम्‍स का सॉल्‍यूशन ढूंढेंगे, वो दुनिया के अनेक देशों की मदद करेगा। मैं पिछले दिनों कुछ एक प्रयोग करता रहता हूं। मैं दुनिया के कई देशों के साथ हमारे देश के बच्‍चों के हेकेथॉन करवाता हूं। तीस-चालीस घंटे ये बच्‍चे ऑनलाइन जुड़ करके हेकेथॉन करते हैं, मिक्‍स टीम बनती है, जैसे मानो सिंगापुर-इंडिया है तो सिंगापुर के बच्‍चे, इंडिया के बच्‍चे साथ में प्रॉब्‍लम सॉल्‍व करते हैं। मैंने देखा है कि भारत के बच्‍चों के साथ हेकेथॉन करने के लिए दुनिया में बहुत बड़ा आकर्षण पैदा हुआ है। फिर मैं उनको कहता हूँ कि यार तुम जमोगे नहीं उनके साथ, बोले साहब जमेंगे नहीं तो सीखेंगे तो। दरअसल, भारत में जो इनोवेश Tried और Tested होगा वो दुनिया की हर ज्‍योग्राफी और डेमाग्राफी में सक्‍सेसफुल होगा, क्‍योंकि हमारे यहां सब नमूने हैं। यहां रेगिस्‍तान भी मिलेगा, यहाँ बाढ़ वाला इलाका भी मिलेगा, यहां पर मीडियम पानी वाला भी है, यानी हर प्रकार की चीज आपको एक ही जगह पर सब मौजूद है। और इसलिए यहां जो सक्‍सेस हुआ, वो दुनिया में कहीं पर भी सक्‍सेस हो सकता है।

साथियों,

भारत लगातार इस विषय में फॉर्वर्ड प्लानिंग करते हुए चल रहा है। देश ने हज़ारों करोड़ रुपयों के नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाने का निर्णय लिया है। थोड़े समय पहले इसका निर्णय लिया गया आपने देखा होगा। और अंतरिम जो बजट हमने रखा था, हमारे देश में कुछ चीजों की चर्चा करने के लिए लोगों को फुरसत नहीं है क्‍योंकि फालतू चीजों में उनका टाइम बंट जाता है। इस अंतरिम बजट में, क्‍योंकि पूरा बजट तो अभी जब मैं दोबारा आऊंगा तब आएगा। इस अंतरिम बजट में बहुत बड़ा निर्णय हुआ है। मैं चाहता हूं कि देश के हर नौजवान को पता होना चाहिए। Research और innovation के लिए एक लाख करोड़ रुपए के फंड की घोषणा की गई है। इससे ‘sun-rise technology areas’ में लंबे समय तक चलने वाले रिसर्च प्रोजेक्ट्स में मदद मिलेगी। भारत ने डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन के लिए बेहतरीन कानून भी बनाया है। स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने के लिए जो भी कदम ज़रूरी है, वो सारे उठाए जा रहे हैं। अब देश फंडिंग का एक बेहतर मैकेनिज्म बनाने का भी प्रयास कर रहा है।

साथियों,

आज जो स्टार्ट-अप्स सफल हो रहे हैं, उन पर एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। आपको ये तो ध्यान रखना है कि आपके आइडिया पर किसी ने भरोसा किया है तभी आप यहां पहुंचे हैं। इसलिए आपको भी एक नए आइडिया को सपोर्ट करना चाहिए। कोई तो था, जिसने आपका हा‍थ पकड़ा था, आप भी किसी का हाथ पकड़िए। क्या आप किसी Educational Institutions में युवाओं को प्रेरित करने के लिए Mentor के रूप में जा नहीं सकते? मान लीजिए आपने दस tinkering lab ले लिए। जाएंगे, उन बच्‍चों से बातें करेंगे, आपके आइडियाज, उनके आइडियाज, ये चर्चा करेंगे। Incubation centre पर जाएंगे। एक घंटा दीजिए, आधा घंटा दीजिए, मैं रुपये-पैसे देने की बात नहीं कर रहा हूं। देश की नई पीढ़ी से मिलिए दोस्‍तो, मजा आ जाएगा। आप कॉलेजों में, यूनिवर्सिटीज में Students से मिल करके उन्‍हें गाइड कर सकते हैं क्योंकि आपके पास कहने के लिए एक सक्‍सेस स्‍टोरी है। उसको सुनने के लिए युवा मन तैयार है। आपने खुद को साबित किया है, अब आपको दूसरे नौजवानों को दिशा दिखानी है। देश हर कदम पर आपके साथ है। मैं यहां दो और भी बात कहना चाहता हूं। ये जो मैं सरकार में काम करता हूं, थोड़ा अंदर की बात बताता हूं, मीडिया में नहीं जानी चाहिए। मैंने सरकार में एक बार कहा आ करके, नया-नया यहां आया था दिल्‍ली। यहां के कल्‍चर का ज्‍यादा पता नहीं था मुझे। मैं बाहर का व्‍यक्ति था। मैंने सरकार से कहा, ऐसा करो भाई तुम्‍हारे यहां ऐसे problem department में हैं जो लंबे समय से अटके पड़े हैं, लटके पड़े हैं। तुम लोग कोशिश कर रहे हो लेकिन solution नहीं आ रहा है। ऐसे identify करो। और मैं देश के नौजवानों को एक problem दूंगा, उनको कहूंगा हेकेथॉन करो और इसका मुझे solution दो। तो खैर, हमारे बाबू लोग तो बहुत पढ़े-लिखे रहते हैं, बोले साहब कोई जरूरत नहीं है, हमारा बीस-बीस साल का अनुभव है। अरे- मैंने कहा यार भई क्‍या जाता है। शुरू में मुझे बहुत resistance था क्‍योंकि कोई मानने के ही तैयार नहीं था कि हमारे यहां कोई अटका हुआ है, हमारे यहां कोई लटका हआ है, हमारे यहां रुका हुआ है; कोई मान ही नहीं रहा था; सब कह रहे थे साहब बहुत बढ़िया चल रहा है।

अरे मैंने कहा, भई बढ़िया चल रहा है तभी तो value addition होगा। अगर नहीं होगा तो वो देखेगा कि क्‍या बढ़िया है, जाने दो ना बाहर। खैर, बड़ी मुश्किल से सब डिपार्टमेंट ने मुझे..मैं बहुत पीछे पड़ गया तो निकाल-निकाल करके दिया कि साहब ये एक समस्‍या है। तो टोटल लगाया तो कुल 400 निकलीं। अब वो तो शायद मुझे लगता है .1 पर्सेंट भी नहीं बताया होगा। मैंने देश के नौजवानों का हेकेथॉन किया और उनको ये समस्‍याएं दे दीं। मैंने कहा- इसका solution लेकर आओ। आप हैरान हो जाएंगे जी कि इतने बढ़िया solutions दिए उन्‍होंने, way out दिए उन्‍होंने और कई 70-80 पर्सेंट आइडियाज उन बच्‍चों के सरकार ने adopt कर लिए। फिर स्थिति ये बनी कि हमारे डिपार्टमेंट मुझे पूछने लगे, साहब इस साल हेकेथॉन कब होगा। उनको लगा कि भाई अब solution तो यहीं पर मिलेगा।

यानी कहने का तात्‍पर्य है कि इनके पास जो मिलते हैं बच्‍चे बैठते हैं, बहुत चीजें निकाल कर लाते हैं। और ये 18, 20, 22 साल के नौजवान हैं जी। मैं कहूंगा, ये जो हमारे बिजनेस के जो सीआईआई है, फिक्‍की है, एसोचैम है, मैं उनको कहता हूं कि वो अपनी-अपनी इंडस्‍ट्री की problem identify करें। Problem identify करके वे ये स्‍टार्टअप का हेकेथॉन करें। और उनको problem दें। मैं पक्‍का मानता हूं ये बहुत बढ़िया solution लाकर देंगे आपको। उसी प्रकार से मैं MSMEs के लोगों को कहूंगा कि आप अपने problems निकालिए, technical hurdles होंगे, समय बहुत ज्‍यादा होगा, smoothness नहीं होगी manufacturing में, defective production होता होगा, बहुत सी चीजें होंगी। आप देश के students के पास जाइए, उनका हेकेथॉन आप करिए। MSMEs के लोग खुद और सरकार को कहीं पर मत रखिए। हम ये दो एरिया में अगर मेहनत शुरू करें तो देश का young talent हमें बहुत सारी समस्‍याओं का समाधान देंगे और हमारी young talent को इसमें से आइडिया मिलेगा कि हां, ये भी क्षेत्र हैं जहां मैं काम कर सकता हूं। हमें इस स्थिति में जाना चाहिए और मैं मानता हूं कि र्स्‍टाटअप महाकुंभ में से कुछ actionable point निकलने चाहिए। उन actionable point को हम ले करके आगे चलें। और मैं आपको वादा करता हूं, अभी एक, डेढ़-दो महीने मैं जरा और काम में व्‍यस्‍त हूं, लेकिन इसके बाद मैं आपके लिए available हूं। मैं यही चाहूंगा कि आप आगे बढ़ें, नए स्टार्ट अप बनाएं, खुद की भी मदद करें, दूसरों की मदद करें। आप इनोवेशन जारी रखें, इनोवेटर्स को अपना सहयोग जारी रखें। आपकी Aspirations ही भारत की Aspirations हैं।

भारत को 11वें नंबर से 5वें नंबर की इकॉनॉमिक बना दिया और इसमें बहुत बड़ी भूमिका मेरे देश के नौजवान की है, आपकी है। अब भारत को, और मैंने दुनिया, हिन्‍दुस्‍तान को गारंटी दी है कि मेरे तीसरे टर्म में मैं देश को दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनॉमी बना करके रहूंगा। और ये जंप जो है उसमें स्टार्ट-अप्स की बड़ी भूमिका होगी, मैं देख सकता हूं ये।

साथियों,

मुझे अच्‍छा लगा, आप सबसे गप्‍पे-गोष्‍ठी करने का। आप सब नौजवानों से, आपका उत्‍साह, उमंग, मेरे में भी एक नई ऊर्जा भर देता है।

बहुत-बहुत शुभकामनाएं !

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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21वीं सदी के इस दशक में भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है: ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी
February 13, 2026
Amid numerous disruptions, this decade has been one of unprecedented development for India, marked by strong delivery and by efforts that have strengthened our democracy: PM
In this decade of the 21st century, India is riding the Reform Express: PM
We have made the Budget not only outlay-focused but also outcome-centric: PM
Over the past decade, we have regarded technology and innovation as the core drivers of growth: PM
Today, we are entering into trade deals with the world because today's India is confident and ready to compete globally: PM

आप सभी का इस ग्लोबल बिजनेस समिट में, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं। हम यहां A Decade Of Disruption, A Century Of Change, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। विनीत जी का भाषण सुनने के बाद मुझे लगता है कि मेरा काम बहुत सरल हो गया है। लेकिन एक छोटी request करूं, इतना सारा आपको पता है, तो कभी ET में तो दिखना चाहिए।

साथियों,

21वीं सदी का बीता दशक अभूतपूर्व डिसरप्शन का रहा है। ग्लोबल Pandemic, ग्लोब के अलग-अलग हिस्सों में तनाव, युद्ध और ग्लोब के संतुलन को हिला देने वाले Supply Chain Breakdowns, दुनिया ने एक दशक के भीतर काफी कुछ देख लिया। लेकिन साथियों, कहते हैं, संकट के समय ही किसी देश के सामर्थ्य पता चलता है और मुझे बहुत गर्व है, अनेक Disruptions के बीच भी भारत के लिए यह दशक, अभूतपूर्व डेवलपमेंट का रहा है, शानदार डिलीवरी का रहा है और डेमोक्रेसी को मजबूत करने वाला रहा है। जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तो भारत ग्यारहवें नंबर की अर्थव्यवस्था था। इतनी उथल-पुथल में पूरी आशंका थी कि भारत और नीचे चला जाएगा, लेकिन आज भारत, बहुत तेजी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। और आप जिस Century Of Change की बात कर रहे हैं, उसका बहुत बड़ा आधार और यह मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, इसका बहुत बड़ा आधार भारत ही होने जा रहा है। आज भारत, दुनिया की ग्रोथ में 16 परसेंट से ज्यादा योगदान दे रहा है। और मुझे विश्वास है, इस सेंचुरी के हर आने वाले साल में हमारा योगदान और भी बढ़ता रहेगा, निरंतर बढ़ता रहेगा। मैं वह मदान की तरह astrologer के रूप में नहीं आया हूं। भारत, दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव करेगा, दुनिया की ग्रोथ का नया इंजन बनेगा।

साथियों,

दुनिया में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था बनी थी, एक नए वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। लेकिन सात दशक के बाद, वो व्यवस्था टूट रही है। दुनिया आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है। आखिर यह क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि तब जो व्यवस्था बनी थी, उसकी नींव One Size Fits All, इसी सोच पर टिकी थी। तब ये माना गया कि World Economy Core में होगी, Supply Chains मजबूत और विश्वसनीय हो जाएगी। इस व्यवस्था में नेशन्स को केवल कंट्रीब्यूटर्स के रूप में ही देखा गया। लेकिन आज, इस मॉडल को चुनौती मिल रही है। यह अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। आज हर देश को यह पता चल रहा है कि उसे अपनी रज़ीलियन्स खुद बनानी होगी।

साथियों,

आज दुनिया जिसकी चर्चा कर रही है। उसको भारत ने 2015 में, आज से 10 साल से पहले, 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। दस साल पहले जब नीति आयोग बना, तो उसके फाउंडिंग डॉक्यूमेंट में ही भारत ने अपना विजन क्लीयर कर दिया था और विजन यह कि भारत किसी दूसरे देश से कोई सिंगल डेवलपमेंट मॉडल इंपोर्ट नहीं करेगा। हम भारत के विकास के लिए भारतीय अप्रोच को लेकर ही चलेंगे। इस नीति ने भारत को अपने हिसाब से, अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से, अपने हित में फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया और यह एक बड़ा कारण है कि डिसरप्शन के दशक में भी भारत की इकोनॉमी कमजोर नहीं पड़ी, निरंतर मजबूत होती गई।

साथियों,

आज 21वीं सदी के इस दशक में भारत Reform Express पर सवार है और इस Reform Express की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम इसे compulsion में नहीं, बल्कि conviction के साथ, Reform के कमिटमेंट के साथ गति दे रहे हैं। यहां तो बहुत बड़ी-बड़ी संख्या में बड़े-बड़े expert बैठे हैं, अर्थजगत के दिग्गज बैठे हैं। आपने भी 2014 से पहले का दौर देखा है। जब तक हालात मजबूर न कर दें, जब तक कोई संकट न आ जाए, जब कोई और रास्ता न बचे, तब मजबूरन रिफॉर्म्स किए जाते थे। आप याद करिए, 1991 का रिफॉर्म्स भी तब हुआ, जब देश पर दिवालिया होने का खतरा आ गया था। जब देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था। पहले की सरकारों का यही तरीका था, वो reforms compulsion में ही किया करती थीं। जब 26/11 का आतंकी हमला हुआ, कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई, तो NIA का गठन किया गया। जब पावर सेक्टर बर्बाद हो गया, ग्रिड फेल होने लगे, तब मजबूरी में कांग्रेस को पावर सेक्टर में याद आई।

साथियों,

ऐसी एक लंबी सूची है, जो याद दिलाती है कि जब compulsion में, मजबूरी में reform होता है, तो न सही नतीजे मिलते हैं, न देश को सही परिणाम मिलते हैं।

साथियों,

आज मुझे गर्व है कि बीते 11 वर्षों में हमने पूरे conviction के साथ रिफॉर्म किए हैं और यह रिफॉर्म Policy में हुए हैं, Process में हुए, Delivery में हुए और इतना ही नहीं, Mindset में भी reform हुआ है। क्योंकि साथियों, अगर पॉलिसी बदले, लेकिन प्रोसेस वही रहे, माइंडसेट वही रहे, डिलीवरी ठीक से ना हो, तो रिफॉर्म्स सिर्फ और सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाता है। इसलिए हमने पूरे सिस्टम को बदलने के लिए ईमानदारी से कोशिश की है।

साथियों,

मैं प्रोसेस की बात करूं, तो एक साधारण लेकिन बहुत जरूरी प्रोसेस है, कैबिनेट नोट्स का। यहां कई लोगों को अंदाजा होगा कि पहले की सरकारों में एक कैबिनेट नोट बनने में ही कुछ महीने लग जाते थे, महीने। अब इस स्पीड से देश का विकास कैसे होता? इसलिए हमने इस process को बदला। हमने डिसीजन मेकिंग को time-bound और technology-driven बनाया। हमने यह तय कर दिया कि इस अफसर की टेबल पर यह कैबिनेट नोट इतने घंटे से ज्यादा रहेगा ही नहीं। या तो रिजेक्ट करो या निर्णय लो और इसका नतीजा आज देश देख रहा है।

साथियों,

मैं आपको रेलवे ओवर ब्रिज के अप्रूवल का भी उदाहरण दूंगा। पहले R.O.B का एक डिजाइन अप्रूव कराने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, कई सारी क्लीयरेंस की ज़रूरत थीं, कई जगह चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं और यह मैं प्राइवेट के लिए नहीं कह रहा हूं, सरकार को। हमने इसको भी बदला और आज देखिए कितनी तेजी से रोड और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। विनीत जी ने बहुत विस्तार से इस बात को बताया।

साथियों,

एक बड़ा Interesting उदाहरण बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का है। अब बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की security से जुड़ा हुआ होता है। आप कल्पना कर सकते हैं, एक समय था, जब बॉर्डर एरियाज़ में एक साधारण सी सड़क बनाने के लिए भी कुछ परमिशन दिल्ली से लेनी पड़ती थी। जिला स्तर पर निर्णय लेने के यानी इसके सामने एक प्रकार से उसका कोई अधिकारी ही नहीं थे, दीवार ही दीवार थीं, वो निर्णय नहीं कर सकता था और इसलिए तो दशकों बाद भी हमारे देश में बॉर्डर इंफ्रा इतना बेहाल रहा। 2014 के बाद हमने इस प्रोसेस में भी रिफॉर्म किया, हमने स्थानीय प्रशासन को Empower किया और आज हम देश के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से डेवलप होते देख रहे हैं।

साथियों,

बीते दशक में भारत के जिस Reform ने दुनिया में हलचल मचा दी है, वो है UPI, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम। यह सिर्फ एक App नहीं है, यह policy, process और delivery के एक शानदार कन्वर्जेंस का प्रमाण है। जो लोग कभी बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े बेनिफिट्स के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, UPI देश के ऐसे नागरिकों को सर्व कर रहा है। यह जो डिजिटल इंडिया है, डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जनधन आधार मोबाइल की ट्रिनिटी है, यह रिफॉर्म किसी compulsion से नहीं हुआ, यह हमारा कन्विक्शन था। और कन्विक्शन यह था कि जिन लोगों तक पहले की सरकारें कभी नहीं पहुंची, हमें ऐसे नागरिकों का इंक्लूजन करना है। जिसे कोई नहीं पूछता, उसे मोदी पूजता है। और इसलिए यह रिफॉर्म्स किए गए हैं और आज भी हमारी सरकार इसी सोच के साथ चल रही है।

साथियों,

भारत का यह जो नया मिज़ाज है, वो हमारे बजट में भी रिफ्लेक्ट होता है। पहले जब बजट की चर्चा होती थी, तो फोकस सिर्फ Outlay पर होता था। कितना पैसा आवंटित हुआ, क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और उस दिन टीवी देखेंगे, तो पूरी टीवी एक ही यानी इनके लिए, बजट मतलब इंकम टैक्‍स ऊपर गया कि नीचे गया, इसके आगे उनको देश दिखता ही नहीं है। और होता क्‍या था, कितनी नई ट्रेनें घोषित हुईं, यही चलता रहता था, उन घोषणाओं का बाद में क्या हुआ, कोई पूछने वाला ही नहीं था। और इसलिए हमने बजट को Outlay के साथ-साथ Outcome सेंट्रिक बनाया।

साथियों,

बजट में एक और बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले Off-Budget Borrowing पर बहुत अधिक चर्चा होती थी। लेकिन अब Off-Budget Reforms की चर्चा होती है। बजट से बाहर, नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म्स हुए, प्लानिंग कमीशन की जगह नीति आयोग बनाया, आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया।

साथियों,

बजट में घोषित हों, या बजट से बाहर, रिफॉर्म एक्सप्रेस लगातार गति पकड़ रही है। अगर मैं पिछले एक साल की ही बात करूं तो हमने Ports & Maritime सेक्टर में Reform किया, शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के लिए अनेक Initiative लिए, जन-विश्वास एक्ट के तहत रिफॉर्म्स को और आगे बढ़ाया, Energy Security के लिए Shanti Act बनाया, लेबर कानूनों से जुड़े रिफॉर्म्स को लागू किया, भारतीय न्याय संहिता लेकर आए, वक्फ कानून में Reform किया गया है, गांव में रोजगार के लिए नया G RAM G कानून बनाया, ऐसे अनेक Reforms साल भर होते रहे हैं।

साथियों,

इस साल के बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और आगे बढ़ाया है। वैसे तो बजट के बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन मैं दो Important फैक्टर्स की बात करूंगा। Capex और Technology, बीते वर्षों की भांति इस बजट में भी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। और आप जानते हैं कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर effect कितना बड़ा होता है। इससे देश की कैपेसिटी और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। अनेकों सेक्टर्स में बहुत बड़ी संख्या में जॉब क्रिएशन भी होती है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन्स का निर्माण और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ऐसे बजट अनाउंसमेंट्स, सही मायने में युवाओं पर, देश के फ्यूचर पर, यह इन्वेस्टमेंट हैं।

साथियों,

बीते दशक में हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रोथ का कोर ड्राइवर माना है। इसी सोच के साथ, देश में स्टार्टअप कल्चर, हैकाथॉन कल्चर, उसको हमने प्रमोट किया। आज देश में, दो लाख से अधिक स्टार्टअप, रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और यह डायवर्स सेक्टर्स में काम कर रहे हैं। हमने युवाओं को प्रोत्साहित किया, देश में रिस्क टेकिंग कल्चर को पुरस्कृत करने का भाव जगाया और परिणाम हमारे सामने है। इस साल का बजट, हमारी इसी प्राथमिकता को और मजबूत करता है। विशेष तौर पर बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे सेक्टर के लिए, इस बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

साथियों,

आज जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ी है, तो हम राज्यों को भी उतना ही ज्यादा सशक्त कर रहे हैं। मैं एक और आंकड़ा आपको देना चाहता हूं। 2004 से 2014, 10 साल, इस दरमियान राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तौर पर 18 लाख करोड़ रुपए के आसपास ही मिले थे, 2004 से 2014 तक। जबकि 2014 से लेकर 2025 तक, राज्यों को 84 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। अगर मैं इस साल बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ का आंकड़ा और जोड़ दूं, तो हमारी सरकार में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के करीब-करीब 100 लाख करोड़ रुपए मिलने तय हुए हैं। यह राशि केंद्र सरकार की तरफ से अलग-अलग राज्य सरकारों को मिली है, ताकि वो अपने यहां विकास के कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

साथियों,

आजकल आप लोग भारत के FTA’s यानि फ्री ट्रेड डील्स पर काफी चर्चा कर रहे हैं और मैं यहां enter हुआ, वहीं से शुरू हो गए लोग। दुनियाभर में इसका एनालिसिस हो रहा है। लेकिन मैं आज इसका एक और इंटरेस्टिंग एंगल आपको बताता हूं, मीडिया को जो चाहिए, वो तो इसमें नहीं होगा शायद, लेकिन हो सकता है कि कुछ काम में आ जाए। और मैं पक्का मानता हूं, जो बात मैं कहने जा रहा हूं, आपने भी इसके बारे में विचार नहीं किया होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आज इतने सारे विकसित देशों के साथ फ्री-फ्री ट्रेड डील्स हो रहे हैं, क्या यही काम 2014 से पहले क्यों नहीं हो पाए? देश वही, युवा शक्ति वही, सरकारी सिस्टम वही, तो बदला क्या? बदलाव, सरकार के विजन में आया है, नीति और नीयत में बदलाव आया है, भारत के सामर्थ्य में बदलाव आया है।

साथियों,

आप ज़रा सोचिए, फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी जब थी, तब कौन हमारे साथ डील करता? गांव में भी गरीब की बेटी को कोई रईस के परिवार वाला शादी करता है क्या? वो उसको छोटा मानता है, हमारा भी यही हाल था भाई दुनिया में। जब देश पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा था, चारों तरफ घोटाले और घपले थे, तब कौन भारत पर भरोसा कर पाता? 2014 से पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बेस बहुत कमजोर था और जिसके कारण, पहले की सरकारें भी डरती थी, एक तो कोई आता नहीं था और जरा सा भी कोई कोशिश करें, तो यह लोग भी डरते थे और डर यह था कि अगर विकसित देशों के साथ डील हो गई, तो वो हमारे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, वो यहां अपने प्रोडक्ट डंप करने लगेंगे, हताशा-निराशा के उस माहौल में 2014 से पहले यूपीए सरकार सिर्फ चार देशों के साथ ही कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट कर पाई थी। जबकि, बीते दशक में भारत ने जो ट्रेड डील्स की हैं, उनमें दुनिया के 38 कंट्री कवर होते हैं, 38 कंट्री। और यह दुनिया के अलग-अलग रीजन्स में हैं। आज हम इसलिए दुनिया के साथ ट्रेड डील्स कर रहे हैं क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज का भारत, दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए तैयार है। बीते 11 वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम देश में विकसित किया है। इसलिए, आज भारत समर्थ है, सशक्त है और इसलिए दुनिया भी हम पर भरोसा करती है। यही बदलाव हमारी Trade Policy में आए Paradigm Shift का आधार बने और यही Paradigm Shift विकसित भारत की हमारी यात्रा का अनिवार्य स्तंभ बना है।

साथियों,

आज हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ देश के हर नागरिक को विकास में सहभागी बनाते हुए कार्य कर रही है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया, हम उसके विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले की सरकारों ने दिव्यांग जनों के लिए सिर्फ घोषणाएं कीं, हम भी उसी रास्ते को जारी रख सकते थे, लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। आप में से शायद जो बातें मैं बता रहा हूं, आप जिस लेवल के लोग हैं, शायद उसमें फिट नहीं बैठती होगी। हमारे दिव्यांग जनों के लिए जैसे हमारे यहां Language में बिखराव है ना, Sign Language का भी वही हाल था जी। तमिलनाडु में जाओ तो एक Sign Language, उत्तर प्रदेश में जाओ तो दूसरी, गुजरात में जाओ तो तीसरी, असम में जाओ तो चौथी, अगर यहां का दिव्‍यांग असम गया, तो बेचारा समझ ही नहीं पाता था। अब यह कोई बड़ा काम तो नहीं था। अगर संवेदनशील सरकार होती है ना, तो उसको यह काम छोटा नहीं लगता है। और देश ने पहली बार Indian Sign Language को institutionalise किया, common किया, व्यवस्था बनाई है। ऐसे ही, देश की Transgender community कब से अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी। हमने उनके लिए भी कानून बनाकर उन्हें सम्मान से जीने का कवच दिया है। बीते दशक में ही देश की करोड़ों बहनों को तीन-तलाक की कुरीति से मुक्ति मिली, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का हुआ।

साथियों,

आज सरकारी मशीनरी की सोच भी बदली है, उसमें संवेदनशीलता आई है। सोच का अंतर क्या होता है, यह हम जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज देने वाली स्कीम में भी देखते हैं। विपक्ष के कुछ लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं और कुछ अखबारों में जरा छपता भी ज्यादा है। कोई मजाक उड़ाता है कि जब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल ही गए हैं, तो उनको मुफ्त राशन क्यों मिलता है? अजीबोगरीब सवाल है। अगर आप बीमार हैं, अस्पताल में गए और अस्पताल से आपको छुट्टी मिली, तो भी डॉक्टर कहता है कि सात दिन तक यह-यह संभालना, पंद्रह दिन तक यह-यह संभालना, कहता है कि नहीं कहता है? गरीबी से बाहर निकले हैं, लेकिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि निकले हैं, तो फिर अनाज क्यों देते हो? ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग, यह नहीं सोचते कि सिर्फ गरीबी से बाहर निकालना काफी नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति नियो मिडिल क्लास में आया है, वो फिर गरीबी के चंगुल में न फंस जाए, यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है। इसलिए उसे आज अनाज मुफ्त की सुविधा मिल रही है, यह आवश्यक है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, इससे गरीब और नियो मिडिल क्लास को बहुत बड़ा संबल मिला है।

साथियों,

सोच का एक और फर्क हम अपने आसपास भी देखते हैं। कुछ लोग हैं, जो कहते हैं कि ये मोदी 2047 की बात क्यों करता है? 2047 में विकसित भारत बनेगा, नहीं बनेगा, किसने देखा? हम रहें या ना रहें, उससे हमारा लेना देना क्या है? अब देखिए, यह सोच है और यह बड़े-बड़े लोगों की सोच है, यह कोई मैं अपने शब्द नहीं बता रहा हूं।

साथियों,

जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, लाठियां खाईं, कालापानी की सज़ाएं पड़ी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए, अगर वो भी यही सोचते कि आजादी पता नहीं कब मिले, हम क्यों आज आजादी के लिए लाठी खाएं, तो सोचिए, क्या उस सोच के साथ देश कभी आजाद हो पाता क्या? जब राष्ट्र प्रथम का भाव हो, जब देश हित सर्वोपरि हो, तो हर निर्णय देश के लिए होता है, हर नीति देश के लिए बनती है। हमारी सोच स्पष्ट है, विजन साफ है, हमें देश को विकसित बनाने के लिए निरंतर काम करना है। 2047 तक हम रहें न रहें, लेकिन यह देश रहेगा, इस देश की संतानें रहेंगी। इसलिए हमें और इसलिए हमें अपना आज खपाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित रहे, उज्ज्वल रहे। मैं आज अपनी आज बो रहा हूं क्योंकि कल की पीढ़ी को फल खाने को मौका मिले।

साथियों,

दुनिया को अब डिसरप्शन के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा। समय के साथ इनके नेचर में बदलाव आएगा, लेकिन यह तय है कि अब व्यवस्थाएं बहुत तेजी से बदलेंगी। AI से जो Disruption हो रहे हैं, वो तो आप देख ही रहे हैं। आने वाले समय में AI और भी क्रांतिकारी बदलाव लेकर आने वाली है, भारत इसके लिए भी तैयार है। कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। दुनिया के अनेक देश, दुनियाभर के टेक लीडर्स, इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। सभी के साथ मिलकर, हम एक बेहतर विश्व बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इसी भरोसे के साथ, एक बार फिर इस Summit के लिए आप सभी को बहुत सारी मेरी शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

वंदे मातरम!