Your Excellency प्रधानमंत्री डॉक्टर नवीन चंद्र रामगुलाम जी,

श्रीमती वीणा राम गुलाम जी,

उप प्रधानमंत्री पॉल बेरांजे जी,

मॉरीशस के सभी सम्मानित मंत्रीगण,

उपस्थित गणमान्य बंधु भगिनी,

आप सब को नमस्कार, बोंजूर!

सबसे पहले मैं प्रधानमंत्री जी के भावपूर्ण और प्रेरणादायक विचारों के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ । मॉरीशस में मिले गरिमामय स्वागत और आतिथ्य सत्कार के लिए, मैं प्रधानमंत्री, मॉरीशस सरकार और यहाँ के लोगों का आभारी हूँ। किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री के लिए मॉरीशस यात्रा हमेशा बहुत खास होती है। यह केवल एक राजनयिक दौरा नहीं होता, बल्कि अपने परिवार से मिलने का एक अवसर होता है। इसी आत्मीयता का एहसास मुझे उस पल से महसूस हो रहा है, जबसे आज मैंने मॉरीशस की धरती पर कदम रखा है। सब जगह एक अपनापन है। कहीं प्रोटोकॉल की बाधाएं नहीं हैं। मेरे लिए ये सौभाग्य की बात है कि एक बार फिर मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहा हूँ। इस मौके पर, 140 करोड़ भारतवासीयों की ओर से, आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ।

प्रधानमंत्री जी,

मॉरीशस के लोगों ने आपको चौथी बार देश का प्रधानमंत्री चुना है। पिछले वर्ष भारत के लोगों ने मुझे लगातार तीसरी बार सेवा करने का अवसर दिया है। और, मैं इसको सुखद संयोग मानता हूँ कि इस कार्यकाल में आप जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता के साथ मिलकर काम करने का मौका मिला है। हमें भारत और मॉरीशस संबंधों को नयी ऊंचाई दिलाने का सौभाग्य मिला है। भारत और मॉरीशस पार्टनरशिप केवल हमारे ऐतिहासिक संबंधों तक सीमित नहीं है। ये साझा मूल्यों, आपसी विश्वास और उज्जवल भविष्य के एक समान दृष्टिकोण पर आधारित है। हमारे संबंधों को आपने हमेशा नेतृत्व प्रदान किया है। और, इसी नेतृत्व के बल पर हमारी साझेदारी हर क्षेत्र में निरंतर मजबूत हो रही है। भारत को इस बात का गर्व है कि वह मॉरीशस का विश्वसनीय साथी है, और उसकी विकास यात्रा में अभिन्न सहयोगी है। हम मिलकर महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, जो मॉरीशस के कोने-कोने में विकास की अमिट छाप छोड़ रहे हैं। क्षमता निर्माण और human resource development में आपसी सहयोग के परिणाम government और private sector में देखे जा रहे हैं। हर चुनौतीपूर्ण समय में, चाहे प्राकृतिक आपदा हो या कोविड महामारी, हम एक परिवार की तरह एक साथ खड़े रहे हैं। आज हमारे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों ने एक व्यापक साझेदारी का रूप लिया है।

Friends,

मॉरीशस हमारा निकट मेरीटाइम पड़ोसी है, और हिन्द महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार है। पिछले बार, मेरी मॉरिशस यात्रा के दौरा, मैंने विजन SAGAR रखा था। इसके केंद्र में क्षेत्रीय विकास, सुरक्षा, और समृद्धि है। हमारा मानना है ग्लोबल साउथ के देशों को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। इसी सोच के साथ, हमने अपनी G20 अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखा। और, हमने मॉरीशस को अपने विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया।

जैसा मैंने पहले भी कहा है, अगर विश्व में कोई एक देश है जिसका भारत पर पूरा हक़ है, उस देश का नाम है मॉरीशस। हमारे संबंधों की कोई सीमा नहीं हैं। हमारे संबंधों को लेकर हमारी आशाओं और आकांक्षाओं की कोई limit नहीं है। आने वाले समय में हम मिलकर हमारे लोगों के विकास, पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए काम करते रहेंगे। इसी विश्वास के साथ, आइये, हम सब मिलकर, प्रधानमंत्री डॉ नवीनचंद्र रामगुलाम और श्रीमती वीणा जी के अच्छे स्वास्थ्य, मॉरीशस के लोगों की निरंतर प्रगति और समृद्धि, और, भारत-मॉरीशस की घनिष्ठ मित्रता के लिए शुभकामनाएं व्यक्त करें।

 

जय हिन्द!

वीव मॉरीस !

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Prime Minister shares Sanskrit Subhashitam highlighting complete devotion in the service of nation and humanity
February 11, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, shared a Sanskrit Subhashitam highlighting complete devotion in the service of nation and humanity.

"यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"

The Subhashitam conveys, "To the nation, whose greatness is sung by the Himalayas, whose glory flows with the rivers to the ocean, and to whom the directions bow like mighty arms, we offer our entire being in dedication."

Shri Modi stated that the pioneer of Antyodaya, Pandit Deendayal Upadhyaya, also dedicated his life with this very spirit to empower every individual in the country.

The Prime Minister wrote on X;

“सर्वस्व समर्पण उस चेतना की अभिव्यक्ति है, जिसमें राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि होती है। अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसी भावना से देश के जन-जन को सशक्त बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"