“इस वर्ष का बजट शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और उद्योगोन्मुख बनाकर उसकी बुनियाद को मजबूत करता है”
“नई शिक्षा नीति के अंग के रूप में शिक्षा और निपुणता, दोनों पर समान जोर दिया जा रहा है”
“वर्चुअल प्रयोगशालायें और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय जैसे भविष्यगामी पहलें हमारी शिक्षा, कौशल और ज्ञान-विज्ञान के पूरे परिप्रेक्ष्य को बदल देंगी”
“केंद्र सरकार देश के युवाओं को ‘कक्षा से बाहर का अनुभव’ देने के लिये इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप प्रदान करने पर ध्यान दे रही है”
“नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोमोशन स्कीम” के तहत लगभग 50 लाख युवाओं के लिये वजीफे का प्रावधान किया गया है”
“सरकार, उद्योग 4.0 के एआई, रोबोटिक्स, आईओटी और ड्रोन जैसे सेक्टरों के लिये कुशल श्रमशक्ति बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है”

साथियों,

Skill और Eduction, ये अमृतकाल में देश के दो सबसे महत्वपूर्ण Tools हैं। विकसित भारत के विज़न को लेकर देश की अमृतयात्रा का नेतृत्व हमारे युवा ही कर रहे हैं। इसलिए, अमृतकाल के प्रथम बजट में युवाओं को, और उनके भविष्य को सबसे ज्यादा अहमियत दी गई है। हमारा एजुकेशन सिस्टम practical हो, industry oriented हो, ये बजट इसकी नींव मजबूत कर रहा है। वर्षों से हमारा education sector, rigidity का शिकार रहा। हमने इसको बदलने का प्रयास किया है। हमने education और skilling को युवाओं के aptitude और आने वाले समय की डिमांड के हिसाब से reorient किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी लर्निंग और स्किलिंग, दोनों पर समान जोर दिया गया है। मुझे खुशी है कि इस प्रयास में हमें टीचर्स का बहुत सपोर्ट मिला। इससे हमें अपने बच्चों को अतीत के बोझ से मुक्त करने का बहुत हौसला मिला है। इसने सरकार को एजुकेशन और स्किलिंग सेक्टर में और रिफॉर्म करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

साथियों,

नई टेक्नॉलॉजी, नई तरह के classroom के निर्माण में भी मदद कर रही है। कोविड के दौरान ये हमने अनुभव भी किया है। इसलिए आज सरकार ऐसे tools पर फोकस कर रही है, जिससे 'anywhere access of knowledge' सुनिश्चित हो सके। आज हमारे e-learning platform SWAYAM में 3 करोड़ मेंबर हैं। Virtual Labs और नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी में भी knowledge का बहुत बड़ा माध्यम बनने की संभावना है। DTH channels के माध्यम से स्टूडेंट्स को भी स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई का अवसर मिल रहा है। आज देश में ऐसे अनेक डिजिटल और टेक्नॉलॉजी आधारित Initiative चल रहे हैं। इन सारे Initiatives को National Digital University से और बल मिलेगा। ऐसे Futuristic कदम हमारी शिक्षा, हमारी स्किल और हमारे ज्ञान-विज्ञान के पूरे स्पेस को बदलने वाले हैं। अब हमारे टीचर्स की भूमिका सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहेगी। अब हमारे टीचर्स के लिए पूरा देश, पूरी दुनिया ही एक क्लासरूम की भांति होगा। ये टीचर्स के लिए अवसरों के नए द्वार खोलने वाला है। हमारे Educational institutions के लिए भी अब देशभर से टीचिंग मटीरियल की अनेक प्रकार की विविधताएँ, अनेक प्रकार की विशेषताएं, स्थानीय टच ऐसी अनेक बातें उपलब्ध होने वाली हैं। और सबसे बड़ी बात, इससे गांव और शहर के स्कूलों के बीच जो खाई होती थी, वो दूर होगी, सबको बराबरी के अवसर मिलेंगे।

साथियों,

हमने देखा है कई देश 'on the job' learning पर विशेष बल देते हैं। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने अपने युवाओं को 'outside the classroom exposure' देने के लिए internships और apprenticeships पर फोकस किया है। आज National Internship Portal पर लगभग 75 हज़ार Employers हैं। ये Internships की लगभग 25 लाख requirements post कर चुके हैं। इससे हमारे युवाओं और इंडस्ट्री दोनों को बहुत लाभ हो रहा है। मैं इंडस्ट्री और शिक्षा से जुड़े संस्थानों से आग्रह करुंगा कि इस पोर्टल का अधिक से अधिक उपयोग करें। देश में इंटर्नशिप के कल्चर का हमें और विस्तार करना है।

साथियों,

मेरा ये मानना है apprenticeships हमारे युवाओं को future ready बनाने में मदद करती है। हम भारत में apprenticeships को भी बढ़ावा दे रहे हैं। इससे हमारी इंडस्ट्री को भी उचित स्किल से जुड़ी वर्कफोर्स की पहचान करने में भी आसानी होगी। इसलिए इस बजट में करीब 50 लाख युवाओं के लिए National Apprenticeship Promotion Scheme के तहत stipend का प्रावधान किया गया है। यानि हम apprenticeships के लिए वातावरण भी बना रहे हैं और पेमेंट्स में भी इंडस्ट्री को मदद दे रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इंडस्ट्री इसका भरपूर लाभ उठाएगी।

साथियों,

आज भारत को दुनिया मैन्युफेक्चरिंग हब के रूप में देख रही है। इसलिए आज भारत में निवेश को लेकर दुनिया में उत्साह है। ऐसे में स्किल्ड वर्कफोर्स आज बहुत काम आती है। इसलिए इस बजट में स्किलिंग पर बीते वर्षों के फोकस को हमने आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 आने वाले वर्षों में लाखों युवाओं को skill, reskill और upskill करेगी। इस योजना से आदिवासियों, दिव्यांगों और महिला की ज़रूरतों के अनुसार tailor-made programs बनाए जा रहे हैं। साथ ही इसमें Industry 4.0 जैसे AI, Robotics, IoT, Drones, जैसे अनेक सेक्टर्स के लिए भी मैनपावर का निर्माण किया जा रहा है। इससे इंटरनेशनल इंवेस्टर्स के लिए भारत में काम करना और आसान होगा। भारत में इन्वेस्टर्स को re-skilling पर ज्यादा ऊर्जा और संसाधन नहीं खर्च करने पड़ेंगे। इस बजट में पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना का भी ऐलान किया गया है। इससे हमारे पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्पियों, कलाकारों के स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जाएगा। पीएम विश्वकर्मा योजना, इन कारीगरों को नया मार्केट भी दिलाने में मदद करेगी और इससे उनके उत्पादों के बेहतर दाम भी मिलेंगे।

साथियों,

भारत में एजुकेशन सेक्टर में तेजी से बदलाव लाने के लिए academia और industry की भूमिका और पार्टनर्शिप बहुत बड़ी है। इससे मार्केट की ज़रूरत के हिसाब से रिसर्च संभव हो पाएगी और रिसर्च के लिए इंडस्ट्री से पर्याप्त फंडिंग भी मिल पाएगी। इस बजट में AI के लिए जिन 3 Centres of Excellence की बात की गई है, उनमें industry academia partnership मजबूत होगी। ये भी तय किया गया है कि ICMR Labs को मेडिकल कॉलेज और private sector R&D teams के लिए उपलब्ध किया जाए। मुझे पूरा भरोसा है कि देश में R&D इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए उठाए गए ऐसे हर कदम का प्राइवेट सेक्टर ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाएगा।

साथियों,

बजट में जो निर्णय लिए गए हैं, उनसे हमारी whole of government approach भी स्पष्ट होती है। हमारे लिए education और skilling सिर्फ इनसे जुड़े मंत्रालय या विभाग तक सीमित नहीं है। हर सेक्टर में इनके लिए संभावनाएं हैं। ये सेक्टर हमारी इकॉनॉमी के बढ़ते साइज़ के साथ बढ़ते जा रहे हैं। मेरा skilling और education से जुड़े stakeholders से आग्रह है कि अलग-अलग सेक्टर्स में आ रही इन opportunities को स्टडी करें। इससे हमें इन नए सेक्टर्स के लिए ज़रूरी वर्कफोर्स तैयार करने में आसानी होगी। अब जैसे आप भारत के तेज़ी से बढ़ते सिविल एविएशन सेक्टर से जुड़ी खबरों को देख सुन रहे हैं। ये दिखाता है कि भारत की ट्रैवल और टूरिज्म इंडस्ट्री का कितना विस्तार हो रहा है। ये रोजगार के बहुत बड़े माध्यम हैं। इसलिए हमारे skilling centres और educational institutions को इसके लिए भी capacities तैयार करनी होगी। मैं चाहूँगा, जो युवा 'स्किल इंडिया मिशन' के तहत प्रशिक्षित हुये हैं, हम उनका भी अपडेटेड डेटाबेस तैयार करें। क्योंकि, कई ऐसे युवा होंगे, जिनके स्किल्स को अपग्रेड करने की जरूरत होगी। डिजिटल टेक्नालजी और AI के आने के बाद हमारा ये प्रशिक्षित वर्कफोर्स पीछे न छूट जाए, हमें इसके लिए अभी से काम करना होगा।

साथियों,

मुझे पूरा विश्वास है कि यहां fruitful discussions होंगे, बेहतर सुझाव आयेंगे, बेहतर समाधान निकलेंगे और एक नए संकल्प के साथ, नए उर्जा के साथ हमारी युवा पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए इन महत्वपूर्ण क्षेत्र को आपके विचारों से समृद्ध कीजिए, आपके संकल्प से आगे बढाइए। सरकार कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ चलने के लिए तैयार है। मेरी आप सब को इस वेबिनार की सफलता के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं हैं। धन्यवाद !

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August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।