जिस नॉर्थ ईस्ट में हिंसा की वजह से हजारों लोग अपने ही देश में शरणार्थी बने हुए थे, अब यहां उन लोगों को पूरे सम्मान और मर्यादा के साथ बसने की नई सुविधाएं दी जा रही हैं: प्रधानमंत्री मोदी
हमने नॉर्थ ईस्ट के अलग-अलग क्षेत्रों के भावनात्मक पहलू को समझा, उनकी उम्मीदों को समझा, यहां रह रहे लोगों से बहुत अपनत्व के साथ, उन्हें अपना मानते हुए संवाद कायम किया: पीएम मोदी
विकास के चौतरफा हो रहे कार्यों ने ‘अलगाव’ को ‘लगाव’ में बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय....

भारत माता की जय....

भारत माता की जय....

मंच पर विराजमान असम के राज्‍यपाल, संसद में मेरे साथी, विभिन्‍न बोर्ड और संगठनों से जुड़े नेतागण यहां उपस्थित NDFB के विभिन्‍न गुटों के साथीगण, यहां आए सम्‍मानीय महानुभव और विशाल संख्‍या में हमें आशीर्वाद देने के लिए आए हुए मेरे प्‍यारे भाईयो और बहनों।

मैं असम बहुत बार आया हूं। यहां पर भी आया हूं। इस पूरे क्षेत्र में मेरा यहां आना-जाना कई वर्षों से रहा, कई दशकों से रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी बार-बार आपके दर्शन के लिए आता रहा हूं। लेकिन आज जो उत्साह, जो उमंग मैं आपके चेहरे पर देख रहा हूं, वो यहां के 'आरोनाई' और 'डोखोना' के रंगारंग माहौल से भी अधिक संतोष देने वाला है।

सार्वजनिक जीवन में, राजनीतिक जीवन में बहुत रैलियां देखी हैं, बहुत रैलियों को संबोधित किया है लेकिन जीवन में कभी भी इतना विशाल जनसागर देखने का सौभाग्‍य नहीं मिला था। जो लोग राजनीतिक जीवन के पंडित हैं, वो जरूर इसके विषय में कभी न कभी कहेंगे कि आजादी के बाद की हिंदुस्‍तान की सबसे बड़ी कोई Political Rally हुई तो आज ये विक्रम आपने प्रस्‍थापित कर दिया है, ये आपके कारण हुआ है। मैं हैलीकाप्‍टर से देख रहा था, हैलीकाप्‍टर से भी कहीं नजर पहुंचाओ लोग ही लोग दिख रहे थे। मैं तो देख रहा था उस ब्रिज पर कितने लोग खड़े हैं कहीं कोई गिर जाएगा तो मुझे दुख होगा इतने लोग खड़े हैं।

भार्इयो और बहनों आप इतनी बड़ी तादाद में जब आशीर्वाद देने आए हैं, इतनी बड़ी तादाद में यहां की माताएं-बहनें आशीर्वाद देने आई हैं। तो मेरा विश्‍वास थोड़ा और बढ़ गया है। कभी-कभी लोग कहते हैं डंडा मारने की बाते करते हैं लेकिन जिस मोदी को इतनी बड़ी मात्रा में माताओं-बहनों का सुरक्षा कवच मिला हो उस पर कितने ही डंडे गिर जाए उसको कुछ नहीं होता। मैं आप सबको नमन करता हूं। माताओं-बहनों, मेरे भाईयो-बहनों, मेरे नौजवानों, मैं आज दिल की गहराई से आपको गले लगाने आया हूं, असम के मेरे प्‍यारे भाईयो-बहनों को एक नया विश्‍वास देने के लिए आया हूं। कल पूरे देश ने देखा है किस प्रकार से गांव-गांव आपने मोटर साइकिल पर रैलियां निकाली, पूरे क्षेत्र में दीप-दीए जलाकर के दिवाली मनाई। शायद दिवाली के समय भी इतने दीए जलते होंगे कि नहीं जलते होंगे वो मुझे आश्‍चर्य होता है। मैं कल देख रहा था सोशल मीडिया में भी चारों तरफ आपने जो दीए जलाए उसके दृश्‍य टीवी में, सोशल मीडिया में भरपूर नजर आ रहे थे। सारा हिंदुस्‍तान आप ही की चर्चा कर रहा था। भाईयो-बहनों, ये कोई हजारों, लाखों दीए जलाने की घटना नहीं है बल्कि देश के इस महत्‍वपूर्ण भू-भाग में एक नई रोशनी, नए उजाले की शुरुआत हुई है।

भाईयो-बहनों, आज का दिन उन हज़ारों शहीदों को याद करने का है, जिन्होंने देश के लिए अपने कर्तव्य पथ पर जीवन बलिदान किया। आज का दिन बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा जी, रूपनाथ ब्रह्मा जी, जैसे यहां के सक्षम नेतृत्‍व के योगदान को याद करने का है, उनको नमन करने का है। आज का दिन, इस समझौते के लिए बहुत सकारात्मक भूमिका निभाने वाले All Bodo Students Union (ABSU), National Democratic Front of Bodoland (NDFB) से जुड़े तमाम युवा साथियों, BTC के चीफ श्री हगरामा माहीलारे और असम सरकार की प्रतिबद्धता आप सब न सिर्फ मेरी त‍रफ से अभिनंदन के अधिकारी हैं लेकिन पूरे हिंदुस्‍तान की तरफ से अभिनंदन के अधिकारी हैं। आज 130 करोड़ हिंदुस्‍तानी आपको बधाई दे रहे हैं। आपका  अभिनंदन कर रहे हैं, आपका धन्‍यवाद कर रहे हैं।

साथियों, आज का दिन आप सभी बोडो साथियों का इस पूरे क्षेत्र, हर समाज और यहां के गुरुओं, बौद्धिकजनों, कला, साहित्‍यकारों के प्रयासों को celebrate करने का ये अवसर है। गौरवगान करने का अवसर है। आप सभी के सहयोग से ही स्‍थायी शांति का, permanent peace का ये रास्‍ता निकल पाया है। आज का दिन असम सहित पूरे नॉर्थ-ईस्ट के लिए 21वीं सदी में एक नई शुरुआत, एक नए सवेरे का, एक नई प्रेरणा को Welcome करने का अवसर है। आज का दिन संकल्‍प लेने का है कि विकास और विश्‍वास की मुख्‍यधारा को मजबूत करना है। अब हिंसा के अंधकार को इस धरती पर लौटने नहीं देना है। अब इस धरती पर किसी भी मां के बेटे का, किसी भी मां के बेटी का, किसी भी बहन के भाई का, किसी भी भाई की बहन का खून नहीं गिरेगा, हिंसा नहीं होगी। आज मुझे वो माताएं भी आशीर्वाद दे रही हैं। वो बहनें भी मुझे आशीर्वाद दे रही हैं जिनका बेटा जंगलों में कंधे में बंदूक उठाकर भटकता रहता था। कभी मौत के साए में जीता था। आज वो अपनी मां की गोद में अपना सर रखकर के चैन की नींद सो पा रहा है। मुझे उस मां के आशीर्वाद मिल रहे हैं, उस बहन के आशीर्वाद मिल रहे हैं। कल्‍पना कीजिए इतने दशकों तक दिन रात गोलियां चलती रही थी। आज उस जिंदगी से मुक्ति का रास्‍ता खुल गया है। मैं न्यू इंडिया के नए संकल्पों में आप सभी का, शांतिप्रिय असम का, शांति और विकास प्रिय नॉर्थ-ईस्ट का दिल की गहराइयों से स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं।

साथियों, नॉर्थ-ईस्ट में शांति और विकास का नया अध्‍याय जुड़ना बहुत ऐतिहासिक है। ऐसे समय में और ये बहुत ही सुखद संयोग है कि जब देश महात्‍मा गांधी जी का 150वां जयंती वर्ष मना रहा हो तब इस ऐतिहासिक घटना की घटना की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। और ये सिर्फ हिंदुस्‍तान की नहीं दुनिया के लिए हिंसा का रास्‍ता छोड़ करके अंहिसा का रास्‍ता चुनने के लिए  एक प्रेरणा स्‍थल आज बनी है। महात्‍मा गांधी कहते थे कि अहिंसा के मार्ग पर चलकर हमें जो भी प्राप्‍त होता है वो सभी को स्वीकार होता है। अब असम में अनेक साथियों ने शांति और अहिंसा का मार्ग स्वीकार करने के साथ ही, लोकतंत्र को स्वीकार किया है, भारत के संविधान को सर आखों पर बिठाया है।

साथियों, मुझे बताया गया है कि आज जब कोकराझार में इस ऐतिहासिक शांति समझौते को सेलिब्रेट करने के लिए हम जुटे हैं, तब गोलाघाट में श्रीमंत शंकरदेव संघ का वार्षिक सम्मेलन भी चल रहा है।

मोई मोहापुरुख श्रीमंतो होंकोर देवोलोई गोभीर प्रोनिपात जासिसु।

मोई लोगोत ओधिबेखोन खोनोरु होफोलता कामना कोरिलों !!

(मैं महापुरुष शंकरदेव की जी को नमन करता हूं। मैं अधिवेशन की सफलता की कामना करता हूं।)

भाईयो और बहनों श्रीमंत शंकरदेव जी ने असम की भाषा और साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ पूरे भारत को, पूरे भारत को, पूरे विश्व को आदर्श जीवन जीने का मार्ग दिखाया।

ये शंकरदेव जी ही थे, जिन्होंने असम सहित पूरे विश्व को कहा कि-

सत्य शौच अहिंसा शिखिबे समदम।

सुख दुख शीत उष्ण आत हैब सम ।।

यानि सत्य, शौच, अहिंसा, शम, दम आदि की शिक्षा प्राप्त करो। सुख, दुख, गर्मी, सर्दी को सहने के लिए खुद को तैयार करो। उनके इन विचारों में व्यक्ति के खुद के विकास के साथ ही समाज के विकास का भी संदेश निहित है। आज दशकों बाद इस पूरे क्षेत्र में व्यक्ति के विकास का, समाज के विकास का यही मार्ग सशक्त हुआ है।

भाईयो और बहनों मैं बोडो लैंड मूवमेंट का हिस्सा रहे सभी लोगों का राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने पर बहुत-बहुत स्वागत करता हूं। पाँच दशक बाद पूरे सौहार्द के साथ बोडो लैंड मूवमेंट से जुड़े हर साथी की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को सम्मान मिला है। हर पक्ष ने मिलकर स्‍थायी शांति के लिए समृद्धि और विकास के लिए हिंसा के सिलसिले पर पूर्णविराम लगाया है। मैं देश को ये भी जानकारी देना चाहता हूं क्‍योंकि मेरे प्‍यारे भाईयो और बहनों ये पूरा हिंदुस्‍तान इस अवसर को देख रहा है। सारे टीवी चैनल आज अपने कैमरा आप पर लगाए बैठे हैं। क्‍योंकि आपने एक नया इतिहास रचा है। हिंदुस्‍तान में एक नया विश्‍वास पैदा किया है। शांति के रास्‍ते को एक ताकत दी है आप लोगों ने।

भाईयो और बहनो, मैं आप सबको अभिनंदन देना चाहता हूं कि अब इस आंदोलन से जुड़ी प्रत्येक मांग समाप्त हो गई है। अब उसे पूर्णविराम मिल चुका है। 1993 में जो समझौता हुआ था, 2003 में जो समझौता हुआ था, उसके बाद पूरी तरह शांति स्थापित नहीं हो पाई थी। अब केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो आंदोलन से जुड़े संगठनों ने जिस ऐतिहासिक अकॉर्ड पर सहमति जताई है, जिस पर साइन किया है, उसके बाद अब कोई मांग नहीं बची है और अब विकास ही पहली प्राथमिकता है और आखिरी भी वही है।

साथियों, मुझ पर भरोसा करना मैं आपका, आपके दुख-दर्द, आपके आशा-अरमान, आपकी आंकाक्षाएं, आपके बच्‍चों का उज्‍ज्‍वल भविष्‍य मुझसे जो सकेगा उसको करने में, मैं कभी पीछे नहीं हटूंगा। क्‍योंकि मैं जानता हूं बंदूक छोड़ करके, बम और पिस्‍तौल का रास्‍ता छोड़ करके जब आप लौट कर आए हैं, कैसी परिस्थितियों में आप आए होंगे ये मैं जानता हूं। अंदाज लगा सकता हूं और इसलिए इस शांति के रास्‍ते पर एक कांटा भी अगर आपको चुभ न जाए इसकी चिंता मैं करूंगा। क्‍योंकि ये शांति का रास्‍ता एक प्रेम का आदर का रास्‍ता, ये अहिंसा का रास्‍ता आप देखना पूरा आसाम आपके दिलों को जीत लेगा। पूरा हिंदुस्‍तान आपके दिलों को जीत लेगा। क्‍योंकि आपने रास्‍ता सही चुना है।

साथियों, इस अकॉर्ड का लाभ बोडो जनजाति के साथियों के साथ ही दूसरे समाज के लोगों को भी होगा। क्योंकि इस समझौते के तहत बोडो टैरिटोरियल काउंसिल के अधिकारों का दायरा बढ़ाया गया है, अधिक सशक्त किया गया है। इस समझौते में सभी की जीत हुई है और सबसे बड़ी बात है शांति की जीत हुई है, मानवता की जीत हुई है। अभी आपने खड़े होकर के, ताली बजा करके मेरा सम्‍मान किया, मैं चाहता हूं कि आप खड़े होकर के एक बार फिर ताली बजाएं, मेरे लिए नहीं, शांति के लिए मेरे लिए नहीं, शांति के लिए मैं आप सबका बहुत आभारी हूं।       

अकॉर्ड के तहत BTAD में आने वाले क्षेत्र की सीमा तय करने के लिए कमीशन भी बनाया जाएगा। इस क्षेत्र को 1500 करोड़ रुपए का स्पेशल डेवलपमेंट पैकेज मिलेगा, जिसका बहुत बड़ा लाभ कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदालगुड़ि जैसे जिलों को भी मिलेगा। इसका सीधा मतलब कि है बोडो जनजाति के हर अधिकार का बोडो संस्‍कृति का विकास सुनिश्चित होगा, संरक्षण सुनिश्चित होगा। इस समझौते के बाद इस क्षेत्र में राजनीतिक, आर्थिक, शै‍क्षणिक हर प्रकार की प्रगति होने वाली है।

मेरे भाईयो और बहनों, अब सरकार का प्रयास है कि असम अकॉर्ड की धारा-6 को भी जल्द से जल्द लागू किया जाए। मैं असम के लोगों को आश्वस्त करता हूं कि इस मामले से जुड़ी कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार और त्वरित गति से कार्रवाई करेगी। हम लटकाने-भटकाने वाले लोग नहीं हैं। हम जिम्‍मेवारी लेने वाले स्‍वभाव के लोग हैं। इसलिए अनेक सालों से आसाम की जो बात लटकी पड़ी थी, अटकी पड़ी थी, भटका दी गई थी उसको भी हम पूरा करके रहेंगे।    

साथियों, आज जब बोडो क्षेत्र में, नई उम्मीदों, नए सपनों, नए हौसले का संचार हुआ है, तो आप सभी की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। मुझे पूरा विश्वास है कि Bodo Territorial Council अब यहां के हर समाज को साथ लेकर, कोई भेदभाव नहीं, सबको साथ लेकर विकास का एक नया मॉडल विकसित करेगी। मुझे ये जानकर भी प्रसन्‍नता हुई है कि असम सरकार ने बोडो भाषा और संस्‍कृति को लेकर कुछ बड़े फैसले लिए हैं और बड़ी योजनाएं भी बनाई हैं। मैं राज्‍य सरकार को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन देता हूं। बोडो टेरिटोरियल काउंसिल, असम सरकार और केंद्र सरकार, अब तीनों साथ मिलकर, सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास को एक नया आयाम देंगे। भाईयो-बहनों इससे असम भी सशक्त होगा और एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना भी और मजबूत होगी।

साथियों, 21वीं सदी का भारत अब ये दृढ़ निश्चय कर चुका है कि अब हमें अतीत की समस्याओं में उलझकर नहीं रहना है। आज देश मुश्किल से मुश्किल चुनौतियों का समाधान चाहता है। देश के सामने कितनी ही चुनौतियां रही हैं जिन्हें कभी राजनीतिक वजहों से, कभी सामाजिक वजहों से, नजरअंदाज किया जाता रहा है। इन चुनौतियों ने देश के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों में हिंसा, अस्थिरता, अविश्‍वास को बढ़ावा दिया है।

दशकों से देश में ऐसे ही चल रहा था।  नॉर्थ ईस्ट का विषय तो ऐसा माना जाता था जिसे कोई हाथ लगाने के लिए भी तैयार नहीं था। आंदोलन हो रहे हैं, होने दो, ब्लॉकेड हो रहे हैं, होने दो, हिंसा हो रही है, किसी तरह काबू में कर लो, बस यही अप्रोच नॉर्थ ईस्ट के विषय में था। मैं मानता हूं कि इस अप्रोच ने उत्‍तर-पूर्व के हमारे कुछ भाई-बहनों को इतना दूर कर दिया था, .... इतना दूर कर दिया था कि उनका संविधान और लोकतंत्र में विश्‍वास खोने लगा था। बीते दशकों में नॉर्थ ईस्ट में हजारों निर्दोष मारे गए, हजारों सुरक्षाकर्मी शहीद हुए, लाखों बेघर हुए, लाखों कभी ये देख ही नहीं पाए कि विकास का मतलब क्या होता है। ये सच्चाई, पहले की सरकारें भी जानती थीं, समझती थीं, स्वीकार भी करती थीं लेकिन इस स्थिति में बदलाव कैसे हो, इस बारे में बहुत मेहनत कभी नहीं की गई। इतने बड़े झंझट में कौन हाथ लगाए, जैसे चल रहा है चलने दो, यही सोचकर लोग रह जाते थे।

भाइयों और बहनों, जब राष्ट्रहित ही सर्वोपरि हो तो फिर परिस्थितियों को ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता था। नॉर्थ ईस्ट का पूरा विषय संवेदनशील था इसलिए हमने नई अप्रोच के साथ काम करना शुरू किया। हमनें नॉर्थ ईस्ट के अलग-अलग क्षेत्रों के भावनात्‍मक पहलू को समझा, उनकी उम्‍मीदों को समझा। यहां रह  रहे लोगों से बहुत अपनत्‍व के साथ, उन्‍हें अपना मानते हुए संवाद कायम किया। हमने विश्‍वास पैदा किया। उन्‍हें पराया नहीं माना, न आपको पराया माना, न आपके नेताओं को पराया माना, अपना माना। आज इसी का नतीजा है कि जिस नॉर्थ ईस्ट में औसतन हर साल एक हजार से ज्यादा लोग उग्रवाद की वजह से अपनी जान गंवाते थे, अब यहां लगभग पूरी तरह शांति है और उग्रवाद समाप्ति की ओर है।

जिस नॉर्थ ईस्ट में लगभग हर क्षेत्र में Armed Forces Special Power Act लगा हुआ था, अब हमारे आने के बाद यहां त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश का ज्यादातर हिस्सा AFSPA से मुक्त हो चुका है। जिस नॉर्थ ईस्ट में उद्यमी निवेश के लिए तैयार नहीं होता था, Investment के लिए नहीं होता था। अब यहां निवेश होना शुरू हुआ है, नये उद्यम शुरू हुए हैं।

जिस नॉर्थ ईस्ट में उद्यमी निवेश के लिए तैयार नहीं होते थे, अब यहां निवेश होना शुरू हुआ है, नए उद्यम शुरू हुए हैं। जिस नॉर्थ ईस्ट में अपने-अपने होमलैंड को लेकर लड़ाइयां होती थीं, अब यहां एक भारत-श्रेष्ट भारत की भावना मजबूत हुई है। जिस नॉर्थ ईस्ट में हिंसा की वजह से हजारों लोग अपने ही देश में शरणार्थी बने हुए थे, अब यहां उन लोगों को पूरे सम्मान और मर्यादा के साथ बसने की नई सुविधाएं दी जा रही हैं। जिस नॉर्थ ईस्ट में देश के बाकी हिस्से के लोग जाने से डरते थे, अब उसी को अपना Next Tourist Destination बनाने लगे हैं।

साथियों,ये परिवर्तन कैसे आया? क्या सिर्फ एक दिन में आया? जी नहीं। ये पाँच साल के अथक परिश्रम का नतीजा है। पहले नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को Recipient के तौर पर देखा जाता था। आज उनको विकास के ग्रोथ इंजन के रूप में देखा जा रहा है। पहले नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को दिल्‍ली से बहुत दूर समझा जाता था। पहले नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को दिल्ली से बहुत दूर समझा जाता था, आज दिल्ली आपके दरवाजे पर आकर के आपके सुख दुख को ढूंढ रही है। और मुझे ही देखिए..... मुझे अपने बोडो साथियों से, असम के लोगों से बात करनी थी तो मैंने दिल्‍ली से बैठ कर संदेश नहीं भेजा बल्कि आपके बीच आकर आपकी आंखों में आंखे मिलाकर के, आपके आशीर्वाद लेकर के आज मैं आपसे जुड़ रहा हूं। अपनी सरकार के मंत्रियों के लिए तो बाकायदा मैंने रोस्टर बनाकर हमने ये सुनिश्चित किया है कि हर 10-15 दिन में केंद्र सरकार का कोई न कोई मंत्री नॉर्थ ईस्ट अवश्य जाए। रात को रूकेगा, लोगो को मिलेगा, समस्‍याओं का समाधान करेगा। यहां आकर कर करेगा ये हमनें करके दिखाया। हमारे साथियों ने प्रयास किया कि वो ज्यादा से ज्यादा समय यहां बिताएं, ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलें, उनकी समस्याएं समझें, सुलझाएं। मैं और मेरी सरकार निरंतर आपके बीच आकर, आपकी समस्याओं को जान रहे हैं, सीधे आपसे फीडबैक लेकर केंद्र सरकार की जरूरी नीतियां बना रहे हैं।

साथियों, 13वें वित्त आयोग के दौरान नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों को मिलाकर 90 हजार करोड़ रुपए से भी कम मिलते थे। चौदहवें वित्त आयोग में हमारे आने के बाद ये बढ़कर लगभग 3 लाख करोड़ रुपए मिलना तय हुआ है। कहां 90 हजार और कहां 3 लाख करोड़ रुपया।

पिछले तीन-चार वर्षों में नॉर्थ ईस्ट में 3000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बनाई गई हैं। नए नेशनल हाईवे स्वीकृत किए गए हैं। नॉर्थ ईस्ट के पूरे रेल नेटवर्क को ब्रॉडगेज में बदला जा चुका है। पूर्वोत्तर में नए एयरपोर्ट्स का निर्माण और पुराने एयरपोर्ट्स के मॉर्डनाइजेशन का काम भी तेजी से चल रहा है।

नॉर्थ ईस्ट में इतनी नदियां है, इतना व्‍यापक जल संसाधन है, नॉर्थ ईस्ट में इतनी नदियां हैं, इतना व्यापक जल संसाधन है, लेकिन 2014 तक यहां केवल एक वॉटर-वे था... एक। पानी से भरी हुई 365 दिन बहने वाली नदिया कोई देखने वाला नहीं था। अब यहां एक दर्जन से ज्यादा वॉटर-वे पर काम हो रहा है। पूर्वोत्‍तर के यूथ ऑफ एजूकेशन, स्किल और स्पोर्ट्स के नए संस्थानों से मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया है। इसके अलावा, नॉर्थ ईस्ट के students के लिए दिल्ली और बेंगलुरू में नए हॉस्टल्स बनाने का भी काम हुआ है।

साथियों, रेलवे स्‍टेशन हों, नए रेलवे रूट हों, नए एयरपोर्ट हों, नए वाटर-वे हों, या फिर Internet connectivity आज जितना काम नॉर्थ ईस्ट में हो रहा है। उतना पहले कभी नहीं हुआ। हम दशकों पुराने लटके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के साथ ही, नए प्रोजेक्ट्स को भी तेज गति से पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। तेजी से पूरे होते ये प्रोजेक्ट्स नॉर्थ ईस्ट में कनेक्टिविटी सुधारेंगे, टूरिज्म सेक्टर मजबूत करेंगे और रोजगार के लाखों नए अवसर भी बनाएंगे। अभी पिछले ही महीने, नॉर्थ ईस्ट के आठ राज्यों में चलने वाली गैस ग्रिड परियोजना के लिए करीब-करीब 9 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

साथियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर सिर्फ सीमेंट और कंक्रीट का जंगल नहीं होता। इसका मानवीय प्रभाव है और इससे लोगों को ऐसा लगता है कि कोई उनकी परवाह करता है। जब बोगीबील पुल जैसे दशकों से लटके अनेक प्रोजेक्ट पूरे होने से लाखों लोगों को कनेक्टिविटी मिलती है, तब उनका सरकार पर विश्वास बढ़ता है। भरोसा बढ़ता है, यही वजह है कि विकास के चौतरफा हो रहे कार्यों ने अलगाव को लगाव में बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है अब अलगाव नहीं, सिर्फ लगाव और जब लगाव होता है। जब लगाव होता है, जब प्रगति सभी के लिए समान रूप से पहुंचने लगती है, तो लोग एक साथ काम करने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। जब लोग एक साथ काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं, तो बड़े से बड़े मुद्दे भी हल हो जाते हैं।

साथियों, ऐसा ही एक मुद्दा है ब्रू-रियांग जनजातियों के पुनर्वास का। कुछ दिन पहले ही त्रिपुरा और मिज़ोरम के बीच अधर में जीने के लिए मजबूर ब्रू-रियांग जनजातियों के पुनर्वास का ऐतिहासिक समझौता हुआ है। करीब ढाई दशक बाद हुए इस समझौते से हज़ारों परिवारों को अब अपना स्थाई घर, स्थाई पता मिलना निश्चित हुआ है। ब्रू-रियांग जनजातीय समाज के इन साथियों को ठीक से बसाने के लिए सरकार द्वारा एक विशेष पैकेज दिया जाएगा।

साथियों, आज देश में हमारी सरकार की ईमानदार कोशिशों की वजह से ये भावना विकसित हुई है कि सबके साथ में ही देश का हित है। इसी भावना से, कुछ दिन पहले ही गुवाहाटी में 8 अलग-अलग गुटों के लगभग साढ़े 6 सौ कैडर्स उन्‍होंने हिंसा का रास्‍ता छोड़ करके शांति का रास्ता चुना है। इन कैडर्स ने आधुनिक हथियार, बड़ी मात्रा में विस्फोटक और गोलियों के साथ अपने आपको सरेंडर कर दिया। अहिंसा को सरेंडर कर दिया। अब इन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत rehabilitate किया जा रहा है।

साथियों, पिछले साल ही नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा और सरकार के बीच एक समझौता हुआ और मैं समझता हूं कि समझौता भी बहुत महत्वपूर्ण कदम था। NLFT पर 1997 से ही प्रतिबंध लगा हुआ था। बरसों तक ये संगठन हिंसा का मार्ग अपनाता रहा था। हमारी सरकार ने वर्ष 2015 में NLFT से बातचीत करना शुरू की थी। उनको विश्‍वास में लेने का प्रयास किया। बीच में कुछ लोगों को रखकर के मदद ली। इसके कुछ समय बाद ये लोग भी जो बम-बंदूक, पिस्‍तौल में ही विश्‍वास रखते थे... सब कुछ छोड़ दिया और हिंसा फैलानी बंद कर दी थी। निरंतर प्रयास के बाद पिछले साल 10 अगस्त को हुए समझौते के बाद ये संगठन हथियार छोड़ने और भारत के संविधान का पालन करने के लिए तैयार हो गया, मुख्‍यधारा में आ गए। इस समझौते के बाद NLFT के दर्जनों कैडर्स ने आत्मसमर्पण कर दिया था।

भाइयों और बहनों, वोट के लिए, राजनीतिक हित के लिए मुद्दों को, मुश्किलों को बनाए रखने और उनको टालते रहने का एक बड़ा नुकसान असम और नॉर्थ ईस्ट को हुआ है, देश को हुआ है।

साथियों, रोडे अटकाने की, रूकावट डालने की असुविधा पैदा करने की इस राजनीति के माध्‍यम से देश के विरूद्ध काम करने वाली एक मानसिकता पैदा की जा रही है। जो विचार, जो प्रवत्ति, जो राजनीति ऐसी मानसिकता को प्रोत्‍साहित करती है। ऐसे लोग न तो भारत को जानते हैं, और न ही असम को समझते हैं। असम का भारत से जुड़ाव दिल से है, आत्मा से है। असम श्रीमंत शंकरदेव जी की संस्‍कारों को जीता है। श्रीमंत शंकरदेव जी जी कहते हैं-

कोटि-कोटि जन्मांतरे जाहार, कोटि-कोटि जन्मांतरे जाहार

आसे महा पुण्य राशि, सि सि कदाचित मनुष्य होवय, भारत वरिषे आसि !!

यानि जिस व्यक्ति ने अनेक जन्मों से निरंतर पुण्य कमाया है, वही व्यक्ति इस भारत देश में जन्म लेता है। ये भावना असम के कोने-कोने में, असम के कण-कण में, असम के जन-जन में है। इसी भावना के चलते भारत के स्वतंत्रता संघर्ष से लेकर भारत के नवनिर्माण में असम ने अपना खून और पसीना बहाया है। ये भूमि आज़ादी के लिए त्याग-तपस्या करने वालों की भूमि है। मैं आज असम के हर साथी को ये आश्वस्त करने आया हूं, कि असम विरोधी, देश विरोधी हर मानसिकता को, इसके समर्थकों को, देश न बर्दाश्त करेगा, न कभी देश माफ करेगा।

साथियों, यही ताकतें हैं जो पूरी ताकत से असम और नॉर्थ ईस्ट में भी अफवाहें फैला रही हैं कि सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट - CAA से यहां, बाहर के लोग आ जाएंगे, बाहर से लोग आकर बस जाएंगे। मैं असम के लोगों को आश्वस्त करता हूं कि ऐसा भी कुछ भी नहीं होगा।

भाइयों और बहनों, मैंने असम में लंबे समय तक यहां के लोगों के बीच में एक सामान्य भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में काम किया है। छोटे-छोटे इलाकों में मैंने दौरा किया हुआ हैं और अपने प्रवास के दौरान जब अपने साथियों के साथ बैठता था, चलते जाते, तो हमेशा भारत रत्न भूपेन हज़ारिका जी के लोकप्रिय गीत की पंक्तियां मैं यहां के साथियों से अक्सर सुनता था। और भूपेन हज़ारिका मेरा कुछ विशेष लगाव भी है उनके साथ। उसका कारण है कि मेरा जन्‍म गुजरात में हुआ। और भूपेन हज़ारिका भारत रत्‍न भूपेन हज़ारिका मेरे गुजरात के दामाद हैं। इसका भी हमें गर्व है। और उनके बेटे, उनके बच्‍चे आज भी गुजराती बोलते हैं और इसलिए गर्व होता है। और जब मैं सुनता था कि.... 

गोटई जीबोन बिसारिलेउ, अलेख दिवख राती,

अहम देहर दरे नेपाऊं, इमान रहाल माटी ।।

असम जैसा प्रदेश, असम जैसी माटी, यहां के लोगों जितना अपनापन मिलना वाकई अपने आप में बड़े भाग्य की बात है। मुझे पता है कि यहां के अलग-अलग समाज के लोग, संस्कृति, भाषा-भूषा, खान-पान कितने समृद्ध हैं। आपकी Aspirations, आपके सुख-दुख, हर बात की भी मुझे पूरी जानकारी है। जिस प्रकार आपने सारे भ्रम समाप्त कर, सारी मांगे समाप्त कर, बोडो समाज से जुड़े साथी साथ आए हैं, मुझे उम्मीद है कि अन्य लोगों के भी सारे भ्रम बहुत जल्द खत्म हो जाएंगे।

साथियों, बीते 5 वर्ष में भारत के इतिहास और वर्तमान में असम के योगदान को पूरे देश में पहुंचाने का काम हुआ है। पहली बार राष्ट्रीय मीडिया में असम सहित पूरे नॉर्थ ईस्ट की कला-संस्कृति, यहां के युवा टैलेंट, यहां के Sporting Culture को पूरे देश और दुनिया में प्रमोट किया गया है। आपका स्नेह, आपका आशीर्वाद, मुझे निरंतर आपके हित में काम के लिए प्रेरित करता रहेगा। ये आशीर्वाद कभी बेकार नहीं जाएंगे क्‍योंकि आपके आशीर्वाद की ताकत तो बहुत बड़ी है। आप अपने सामर्थ्य पर विश्वास रखें, अपने इस साथी पर विश्वास रखें और मां कामाख्या की कृपा पर विश्वास रखें। मां कामाख्या की आस्था और आशीर्वाद हमें विकास की नई ऊंचाइयों की ले जाएगा।

साथियों, गीता में भगवान कृष्ण ने, पांडवों से कहा था और बहुत बड़ी महत्‍वपूर्ण बात और वो भी युद्ध की भूमि में कहा था, हाथ में शस्‍त्र थे, शस्‍त्र और अस्‍त्र चल रहे थे। उस युद्ध की भूमि से भगवान श्री कृष्ण ने कहा था, गीता में कहा है कि-

निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव।।

यानि किसी भी प्राणी से वैर न रखने वाला व्यक्ति ही मेरा है।

सोचिए, महाभारत के उस ऐतिहासिक युद्ध में भी भगवान कृष्ण का यही संदेश था- किसी से बैर मत करो, किसी से दुश्मनी मत करो।

देश में बैर-भाव की थोड़ी सी भी भावना लिए व्यक्ति से मैं यही कहूंगा कि बैर की भावना छोड़िए, दुश्मनी की भावना छोड़िए।

आप विकास की मुख्यधारा में आइए, सबके साथ से, सबका विकास करिए। हिंसा से न कभी कुछ हासिल हुआ है, न कभी आगे भी हासिल होने की संभावना है।

साथियों, एक बार फिर बोडो साथियों को, असम और नॉर्थ ईस्ट को मैं आज बहुत बहुत बधाई देता हूं। और शुभकामनाओं के साथ फिर एक बार ये विशाल जन सागर, ये दृश्य जीवन में मैं नहीं जानता हूं की देखने को मिलेगा या नहीं मिलेगा, ये संभव ही नहीं लगता है। शायद हिंदुस्तान के किसी राजनेता को ऐसा आशीर्वाद प्राप्‍त करने का सौभाग्‍य न पहले मिलेगा न भविष्‍य में मिलेगा कि नहीं मिलेगा मैं कह नहीं सकता। मैं अपने आपको बहुत बड़ा भाग्‍यवान मानता हूँ। आप इतना प्यार इतना आशीर्वाद बरसा रहे है।

यही आशीर्वाद यही प्रेम मेरी प्रेरणा है। यही मुझे देश के लिए आपके लिए दिन रात कुछ न कुछ करते रहने की ताकत देता है। मैं आप लोगो का जितना आभार व्‍यक्‍त करूं, आप लोगो का जितना अभिनन्दन करू, उतना कम है। अब फिर एक बार अहिंसा का रास्ता चुनने के लिए शस्‍त्रों को छोड़ने के लिए, ये जो नौजवान आगे आएं हैं। आप विश्वास रखें आपके नए जीवन की शुरुआत हो चुकी है। पूरे देश के आशीर्वाद आप पर है। 130 करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद आप पर है। और मैं North East  में, नक्सल इलाके में, जम्मू कश्मीर  में अभी भी जिनका बंदूक में, गन में पिस्तौल में अभी भी भरोसा है, उनको मैं कहता हूँ आइये मेरे बोड़ो के नौजवानो से कुछ सीखिए। मेरे बोड़ो के नौजवानो से प्रेरणा लीजिये लौट आइये, वापिस लौट आइये, मुख्य धारा में आइए, जीवन जी कर के जिंदगी का जश्न मनाइए इसी एक अपेक्षा के साथ फिर एक बार इस धरती को प्रणाम करते हुए, इस धरती के लिए जीने वाले ऐसे महापुरुषों को प्रणाम करते हुए आप सबको वंदन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं, मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!!

भारत माता की जय....

पूरी ताकत से बोलिए, 130 करोड़ देशवासियों के दिलों को छू जाए ऐसी आवाज निकालिए.... 

भारत माता की जय....

भारत माता की जय....

भारत माता की जय....

भारत माता की जय....

भारत माता की जय....

महात्‍मा गांधी अमर रहे, अमर रहे

महात्‍मा गांधी अमर रहे, अमर रहे

महात्‍मा गांधी अमर रहे, अमर रहे

बहुत-बहुत धन्‍यवाद आपका।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
IIT Delhi tops India in QS Rankings 2027; 52 Indian institutions feature

Media Coverage

IIT Delhi tops India in QS Rankings 2027; 52 Indian institutions feature
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of Prime Minister addresses the Indian Community in Paris
June 18, 2026

नमस्ते!

बों जू!

ऐसा लग रहा है, आप सब छुट्टी के मूड में हैं।

साथियों,

ये पेरिस शहर, Lights का शहर है, रंगों का शहर है, यहां Art है, Ideas हैं, और innovation की प्रेरणा भी है। इस शहर को भारत के अलग-अलग राज्यों से आए आप सभी लोग और भी खूबसूरत बना देते हैं। नए नए रंगों से भर देते हैं।

कोई तमिल है, कोई पंजाबी है, कोई गुजराती है, तो कोई मराठी है, और कोई बंगाली है। भारत के हर कोने का प्रतिनिधित्व यहां दिखाई देता है।

साथियों,

मैं जब 14 जून को नीस पहुंचा था तो सबसे पहले भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में शामिल हुआ था। आज जब मैं फ्रांस से वापसी की तैयारी में हूं तो लग रहा है जैसे भारत कनेक्ट्स कार्यक्रम में आ गया हूं।

फ्रांस में रहने वाले आप लोगों ने 21वीं सदी के भारत-फ्रांस रिश्तों को जिस तरह कनेक्ट किया है, वो हमारी Strategic Partnership की बहुत बड़ी ताकत बन रही है। मैं आप सभी के लिए भारत से 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। इस आत्मीय स्वागत के लिए, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज मैं ऐसे समय में फ्रांस आया हूं जब कुछ ही दिन पहले हमारी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप निरंतर 12 साल तक देश की सेवा करना मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है जिसने एक चायवाले को यहां तक पहुंचा दिया।

साथियों,

बीते 12 वर्ष, 140 करोड़ भारतीयों के अद्भुत सामर्थ्य के रहे हैं। 12 साल के इस कालखंड में भारत का GDP दोगुना हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हुई है। Universities की संख्या भी दोगुनी हो गई है। Highway Construction की स्पीड तीन गुना बढ़ गई। और Metro Network, चार गुणा बड़ा हो गया है।

मैं आपको कुछ और फैक्ट्स दूंगा, उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि भारत किस स्पीड और कितने बड़े स्केल पर काम कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारत का Defence Export 35 गुणा यानि Thirty Five Times बढ़ गया है।

औऱ एक फैक्ट सुनिए भारत में मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स में, 100 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। 100 times. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile phone manufacturer है। इसी गति, इसी प्रगति का नतीजा है कि आज भारत दुनिया की Fastest Growing Major Economy है।

साथियों,

आज भारत की कहानी सिर्फ Economic Progress की कहानी नहीं है। सिर्फ यहाँ अटक नहीं जाती है। ये Social Transformation की भी कहानी है।

पिछले 12 साल में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यानि एक ऐसी प्रगति जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। फ्रांस में जितने घर हैं, उससे भी अधिक पक्के घर बीते 12 वर्ष में हमने जरूरतमंदों के लिए बनाए हैं।

अब हर परिवार के पास, गरीब से गरीब क्यों न हो, Bank Account है। Financial Inclusion एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बना है।

साथियों,

इन 12 वर्षों की उपलब्धियों में, एक उपलब्धि ऐसी भी है जिसे किसी आंकड़े से, या अंकों से, नहीं मापा जा सकता। वह है 140 करोड़ भारतीयों का आत्मविश्वास।

आज का भारत और आज के भारत का युवा बहुत बड़े सपने देख रहा है। भारत का किसान नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की महिलाएं नए नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। इसलिए ये सिर्फ Achievements के 12 साल नहीं हैं, ये भारत की एस्पिरेशन्स को नई बुलंदी देने का कालखंड रहा है।

साथियों,

एक समय था जब दूर-दराज के गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना वाकई बहुत मुश्किल भरा था। आज उन्हीं गांवों में बिजली भी है, इंटरनेट भी है, और डिजिटल सेवाओं की पूरी दुनिया भी है। आज एक क्लिक पर, कभी भी, कहीं भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

आज मोबाइल फोन, भारत के नागरिकों को अनेक सुविधाओं से कनेक्ट कर रहा है। हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे dairy farmers, हमारी महिलाएं, हमारे स्टूडेंट्स, सभी टेक्नोलॉजी के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं, और अपने लिए नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

आपने 125 करोड़ से अधिक Aadhaar IDs के बारे में सुना है। लेकिन आज भारत सिर्फ पहचान को डिजिटल नहीं बना रहा। आज करीब 90 करोड़ भारतीयों की Unique Digital Health IDs बनाई जा चुकी हैं। जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और accessible बन गए हैं। इससे हेल्थकेयर डिलीवरी और अधिक आसान और efficient हो रही है।

साथियों,

इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश चीजें कुछ वर्ष पहले तक कल्पना जैसी लगती थीं। कौन सोच सकता था कि गांव-गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा ? कौन सोच सकता था कि दूर-सुदूर के गांवों में भी QR code जीवन का हिस्सा बन जायेगा ? गांव में कोई बहन, ड्रोन से खेती करने में मदद करेगी, ये भी असंभव लगता था।

लेकिन आज यह सब, भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का सामान्य हिस्सा बनता जा रहा है। और आपको गर्व होगा साथियों, यही नए भारत की पहचान है।

जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो कभी नामुमकिन लगता था, वो आज मुमकिन हुआ है, औऱ ये करने के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्या है? किसकी वजह से ये सब संभव हुआ है? यह मोदी के कारण नहीं, वो ताकत है- भारत का लोकतंत्र, भारत की डेमोक्रेसी। इस डेमोक्रेसी में सबका साथ है, सबका विकास है।

साथियों,

आज से 50 या 100 साल बाद जब भारत के इस कालखंड की समीक्षा होगी, तो ये बात उभरकर सामने आएगी कि इस कालखंड को भारत की Aspirations ने ड्राइव किया। यह भारत के एस्पिरेशन्स का नया युग है।

जहां बिजली पहुंची है, वहां लोग सिर्फ बिजली नहीं चाहते, वे Smart Living चाहते हैं। जहां ट्रेन पहुंची है, वहां लोग High-Speed Connectivity चाहते हैं। जहां हाईवे बने हैं, वहां लोग World-Class Expressways चाहते हैं। जहां इंटरनेट पहुंचा है, वहां लोग AI और Digital Innovation में नेतृत्व चाहते हैं।

यानि आज भारत के लोग अपने जीवन को भी Next Level पर ले जाना चाहते हैं, और भारत को भी Next Level पर ले जाना उनका मकसद है, उनका संकल्प है, उनके सपने है।

और साथियों,

यही Aspirations आज भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मैं आपको भारत की Space Journey का उदाहरण दूंगा।

भारत ने चंद्रयान को चंद्रमा के South Pole पर उतारा। दुनिया ने इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन भारत इसे अपनी मंजिल मानकर रुका नहीं। आज देश गगनयान की तैयारी कर रहा है। भारत अंतरिक्ष में अपना Space Station बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हमारे Space Startups Global Space Economy में अपनी जगह बनाने के लिए पुरजोश काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

Green Energy के क्षेत्र में भी भारत की यही एस्पिरेशंस दिखाई देती है। Solar Power में भारत की उपलब्धियों की दुनिया भर में लगातार चर्चा हो रही हैं। लेकिन भारत अगली छलांग की तैयारी कर रहा है।

Green Hydrogen में बड़े निवेश हो रहे हैं। Advanced Nuclear Energy पर तेजी से काम हो रहा है। आपने भारत के Fast Breeder nuclear Reactor से जुड़ी प्रोग्रेस के बारे में भी सुना ज़रूर होगा। ये भारत के न्यूक्लियर एनर्जी लैंडस्केप में क्रांतिकारी परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अचीवमेंट हमारे सीसेन्टिस्टों ने किया है।

साथियों,

आज का भारत भविष्य का पूरा Ecosystem बना रहा है। भारत एक साथ हर उस क्षेत्र में निवेश कर रहा है, जो आने वाले दशकों की दिशा तय करेगा।

अभी आपने कुछ दिन पहले ही देखा है नीस में भारत इनोवेट्स का एक आयोजन किया। ये इवेंट भारत के डीप टेक सामर्थ्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक और माध्यम था। इसमें भारत के 120 Deep-Tech Startups उपस्थित थे। Bharat Innovates में करीब एक हजार चार सौ B2B Meetings हुईं है। कई Startups के लिए Investment Commitments आगे बढ़ीं, Commercial Orders के लिए रास्ते खुले। French और European Universities तथा Incubators के साथ Engagements बढ़ रही हैं।

Student Exchanges, Joint Research, और Innovation Support के नए रास्ते बने। इसलिए Bharat Innovates सिर्फ एक Summit नहीं रहा। यह Innovation Diplomacy का एक नया मॉडल बना है।

और आज ही पेरिस में VivaTech इवेंट के जरिए, इस यात्रा को हमने और आगे बढ़ाया। नीस में हमने Ideas को Capital से जोड़ा और पेरिस में Indian Innovation को Global Scale से जोड़ा। आज दुनिया देख रही है भारत केवल भविष्य के लिए तैयार नहीं हो रहा है। भारत भविष्य को आकार दे रहा है।

साथियों,

एक समय था, जब देशों के बीच रिश्ते केवल व्यापार से तय होते थे। आज व्यापार के साथ-साथ Trust यानि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

हर देश Reliable Supply Chains चाहता है। हर देश Stable Partnerships चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। और ऐसे समय में, भारत विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है।

एवियां में G7 बैठक के दौरान मैंने trust based partnerships बनाने पर ज़ोर दिया। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ equal पार्टनर्स के रूप में आगे बढ़ने का आह्वान किया। भारत का G7 समिट में संदेश था Global Governance तभी प्रभावी होगी जब वह Inclusive होगी। Global Growth तभी Sustainable होगी जब वह शेयर्ड होगी। और Global Technology तभी मानवता के लिए उपयोगी होगी जब वह Trusted होगी।

साथियों,

भारत और दुनिया के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा नज़र आ रही है। फ्रांस के साथ भारत का ट्रेड लगतार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। यूरोपियन यूनियन हो, यूनाइटेड किंगडम हो दुनिया के हर देश, हर रीजन के साथ भारत समझौते कर रहा है।

अगले महीने से भारत और UK के बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी लागू हो जाएगा। यह एग्रीमेंट भारत के farmers, workers और innovators को अनेक नए अवसर प्रदान करेगा।

साथियों,

आज दुनिया Uncertainty और Disruption के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

इस वर्ष हमने भारत और फ्रांस के संबंधों को Special Global Strategic Partnership का दर्जा दिया था। नीस में मेरे मित्र President Macron और मैंने हमारे संबंधों को force for global good बनाने पर चर्चा की। Defence से लेकर space और नुक्लियर तक AI और क्रिटीकल मिनरल्स से लेकर high speed railway तक, हर क्षेत्र में हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

साथियों,

Solar energy हो, या AI के क्षेत्र में सहयोग हो, भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो पूरी मानवता के हित में हैं। पिछले वर्ष पेरिस में और इस वर्ष दिल्ली में हमने AI Summit को Co-chair किया।

अब हम साथ मिलकर अगले वर्ष “तृष्णा” satellite को लॉन्च करने जा रहें हैं। यह “तृष्णा” satellite जो विश्व में फूड और वाटर सिक्युरिटी सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

और साथियों,

यह सभी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट पहलो में आप सभी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। ये आप हैं जो भारत और यूरोप के बीच सबसे मजबूत सेतु हैं। आप दोनों समाजों को समझते हैं। दोनों बाजारों को समझते हैं। आने वाले समय में Talent, Trade, Technology, Tourism और Investment के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में आपकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली हैं।

साथियों,

भारत और फ्रांस के रिश्तों को साझा इतिहास, साझा मूल्यों और साझा विश्वास ने आगे बढ़ाया है। विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृतियां आज भी हमें जोड़ती हैं।

मुझे पहले नव शापेल में श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, पिछले वर्ष प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मार्सेय के वॉर मेमोरियल जाने का अवसर भी मिला। ये हमारी साझा विरासत है।

फ्रांस, भारतीयों के योगदान को संजोता भी है और सराहता भी है। भारतीय मूल की नूर इनायत खान हों, जिन्होंने फ्रांस की Resistance के लिए अपना जीवन बलिदान किया, या महाराजा रणजीत सिंह के साथ काम करने वाले जनरल जां फ्रांस्वा अलार हों ये सभी भारत और फ्रांस की साझा विरासत के प्रतीक हैं।

भारत के राज्य पुडुचेरी में भी फ्रेंच विरासत की झलक दिखाई देती है। वहां का Architecture, वहां की कला-संस्कृति और खान-पान सभी में हमारे संबंधों की महेक है।

साथियों,

इस समय फ्रांस समेत पूरी दुनिया में International Yoga Day की तैयारी भी चल रही है। इस अवसर पर मैं, फ्रांस में योग को आगे बढ़ाने वाले श्रीमान महेश घाट्राड्याल जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। मैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, शार्लोत शोपां जी को भी प्रणाम करता हूं। जिन्होंने सौ वर्ष की आयु में भी, योग के माध्यम से फ़्रांस को भारत की विरासत से जोड़ा है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है: Yoga does not add years to life, it adds life to years.

साथियों,

मैं फ्रेद नेग्री जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धापूर्वक याद करता हूं। भारतीय विरासत को संरक्षित करने में उनका योगदान अतुल्य रहा है।

साथियों,

भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, और वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी, चप्पे-चप्पे पर दिखती है। लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज़ सिर चढ़कर बोलता है।

खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ़्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से शुरू की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जाने से पहले, आप सभी के लिए कुछ और अच्छी खबरें भी लेकर के आया हूँ। वो आपके लिए हैं। पिछले वर्ष, मार्सेय में कॉन्सुलेट खोला गया, इससे काफी अधिक सुविधा मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले, Indian Nationals के लिए French Airports पर Visa-free Transit की व्यवस्था शुरू हो गई है।

Students और Professionals की Mobility बढ़ाना हो, या Educational Qualifications की Mutual Recognition की बात हो, या फिर French Universities के भारत में Campus खोलना हो, इन सभी पर हम मिलकर आगे बढ़ रहें हैं।

अब फ्रांस में UPI के उपयोग का दायरा भी और बढ़ने जा रहा है। यानि भारत-फ्रांस कनेक्ट भी Instant और आपसी Payment भी Instant!

साथियों,

इन सभी पहलों से, हम भारत और फ़्रांस को और करीब ला रहें हैं। और मैं फिर कहूंगा इस साझेदारी की नींव, इस रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप सब मेरे देशवासी हैं।

आज जब भारत तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो मैं आप सभी से भारत के साथ और गहराई से जुडने का आग्रह करूंगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई शक्ति मिलेगी, और आपको अपनी पुरखों की धरती की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी के प्रेम आपके उत्साह और इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत माता की जय!

बहुत बहुत धन्यवाद।