उन्होंने 21,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.4 लाख से अधिक घरों का उद्घाटन एवं शिलान्यास
16,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की परियोजनाओं के जरिए इस क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी को व्यापक रूप से बढ़ावा
उन्होंने 800 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ‘मुख्यमंत्री मातृशक्ति योजना’ का शुभारंभ किया
“21वीं सदी के भारत के तेज विकास के लिए महिलाओं का तेज विकास और उनका सशक्तिकरण उतना ही जरूरी है”
“आज भारत महिलाओं की आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बना रहा है और निर्णय ले रहा है”
“वडोदरा संस्कार की नगरी है। यह शहर हर प्रकार से यहां आने वालों को संभालता है”
“हमने गुजरात में महिलाओं को निर्णय लेने की जगहों पर अधिक अवसर देने और उन्हें हर स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किए हैं”

भारत माता की - जय, भारत माता की - जय, गुजरात के लोकप्रिय मृदु एवं मक्कम हम सबके प्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई, संसद में मेरे साथी सीआर पाटिल, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी देवु सिंह, दर्शना बहन, गुजरात सरकार के सभी मंत्री, सांसद, विधायकगण, और वड़ोदरा के अलावा आणंद, छोटा उदयपुर, खेड़ा और पंचमहाल जिलों से भारी संख्या में यहां आए विशेषकर मेरी माताएं बहनें, और भाइयों।

आज का दिवस मेरे लिए मातृवंदना का दिवस है। आज प्रातः जन्मदात्री मां के आर्शीवाद लिए, उसके बाद जगत जन्नी मां काली के आर्शीवाद लिए और अभी मातृशक्ति के विराट रूप के दर्शन करके इस विराट मातृशक्ति के दर्शन किए, उनके आर्शीवाद लिए। आज मुझे पावागढ़ में मां काली के भक्तों के लिए अनेक आधुनिक सुविधाएं अर्पित करने को अवसर मिला। मैंने मां से देशवासियों की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की और आज़ादी के अमृतकाल में स्वर्णिम भारत के संकल्प की सिद्धि का मां से आशीर्वाद मांगा।

भाइयों और बहनों,

मुझे खुशी है कि संस्कार नगरी वडोदरा से आज जब करीब 21 हज़ार करोड़ रुपए के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। ये प्रोजेक्ट, गुजरात के विकास से भारत का विकास, इस प्रतिबद्धता को बल देने वाले हैं। गरीबों के घर, उच्च शिक्षा और बेहतर कनेक्टिविटी पर इतना बड़ा निवेश गुजरात के औद्योगिक विकास को विस्तार देगा, यहां के युवाओं के लिए रोजगार-स्वरोजगार इसके लिए अनगिनत अवसर निर्मित करेगा। इन प्रोजेक्ट्स में भी अधिकतर हमारी बहनों-बेटियों के स्वास्थ्य, पोषण और सशक्तिकरण से जुड़े हैं। आज यहां लाखों की संख्या में माताएं-बहनें हमें आशीर्वाद देने भी आई हैं। मैं गुजरात सरकार का, भूपेंद्र भाई का और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सी आर पाटिल का विशेष रूप से आभार व्यक्त करना चाहता हूं। क्योंकि मुझे वे आप सबके बीच में से ले आए हैं। और वहां से प्रवेश किया और यहां पहुंचते-पहुचंते 15-20 मिनट लग गए गाड़ी में। पैदल आता तो पता नहीं कितना समय चला जाता। इतना विशाल जनसागर, लेकिन मैं धन्यवाद इसलिए कर रहा हूं कि जब मैं सबके बीच से निकल रहा था तो मुझे आज उन सैंकड़ों चेहरों को भी प्रणाम करने का मौका मिला जिनके साथ मुझे कई वर्षों तक काम करने का अवसर मिला था। कुछ तो ऐसे वरिष्ठ कार्यकर्ता मुझे दिखाई दिए जिनकी उंगली पकड़कर के मैं कभी चला था। अनेक मातांए ऐसी मिली जिनका मैंने सर झुकाके प्रणाम किया, कभी न कभी उनके हाथ से मुझे रोटी खाने का सौभाग्य मिला था। आज मेरे लिए ऐसे सैंकड़ों लोगों का दर्शन करना, उनके आर्शीवाद लेना ये अपने आप में मेरे लिए धन्यभाग्य था और इसलिए मैं गुजरात प्रदेश का, भूपेंद्र भाई और सरकार का और आप सबका भी हृदय से धन्यवाद करता हूं। बीते 8 साल से डबल इंजन की सरकार, नारीशक्ति को भारत के सामर्थ्य की धुरी बनाने के लिए जो प्रयास कर रही है, आज गुजरात में मां कालिका के आशीर्वाद से उनको नई ताकत मिली है। मैं सभी बहनों को, सभी लाखों लाभार्थियों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

21वीं सदी के भारत के तेज विकास के लिए महिलाओं का तेज विकास, उनका सशक्तिकरण उतना ही जरूरी है। आज भारत, महिलाओं की आवश्यकताओं, उनकी आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बना रहा है, निर्णय ले रहा है। सेनाओं से लेकर खदानों तक, हमारी सरकार ने महिलाओं के लिए अपनी पसंदीदा काम करने के लिए सारे रास्ते खोल दिए हैं। उन मातांए उन दरवाजों पर दस्तक दें ये आज हमने स्थिति पैदा की है। हमने महिलाओं के जीवन चक्र के हर पड़ाव को ध्यान में रखते हुए अनेक नई योजनाएं बनाई हैं। महिलाओं का जीवन आसान बने, उनके जीवन से मुश्किलें कम हों, उन्हें आगे बढ़ने के ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलें, ये हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि मुझे माताओं-बहनों-बेटियों की इतनी सेवा करने का अवसर मिला है। वडोदरा और आसपास के क्षेत्रों से आईं माताओं-बहनों-बेटियों का मैं फिर से अभिनंदन करता हूं। ईस शहरने कभी मुझे भी संभाला था । मेरा भी लालनपालन किया था । वडोदरा मातृशक्ति के उत्सव के लिए एक उपयुक्त नगर है क्योंकि यह मां की तरह संस्कार देने वाला शहर है, वडोदरा संस्कार की नगरी है। ये शहर हर प्रकार से यहां आने वालों को संभालता है, सुख-दुख में साथ देता है और आगे बढ़ने के अवसर देता है। इस शहर ने बडौदा आये तब पूराना सब याद आ ही जाये भाई क्योंकि बडौदा ने मुझे जैसे माँ एक वच्चे को संभालती हो ऐसा अपनेपन का भाव । पूरी विकासयात्रा मे बडौदा के योगदान को मैं कभी भूल सकता नही । इस शहर ने, बडौदा आये तब पूराना सब याद आ ही जाये भाई क्योंकि बडौदा ने मुझे जैसे माँ एक वच्चे को संभालती हो ऐसा अपनेपन का भाव । पूरी विकासयात्रा मे बडौदा के योगदान को मैं कभी भूल सकता नही । यह नगर प्रेरणा का नगर है, इस नगर ने स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद, विनोबा भावे और बाबासाहेब आंबेडकर जैसे महापुरुषों को भी इस हमारी नगरी ने प्रेरित किया है। आप सबको भी याद होगा मुझे तो भलिभांति याद रहना स्वाभाविक है। कि बेलूर मठ के अध्यक्ष और मेरी किशोर अवस्था में जिन्होंने मुझे जीवन के बहुत से रास्तों का मार्गदर्शन किया, एक गुरुति की तरह मेरे जीवन को गढ़ने में बहुत बडी भूमिका निभाई। वैसे बेलूर मठ के, रामकृष्ण मिशन मठ के अध्यक्ष स्वामी आत्मस्थानंदजी की उपस्थिति में मुझे यहां वडोदरा में दिलाराम बंगलो रामकृष्ण मिशन को सौंपने का अवसर मिला था। हमारी पूरानी शास्त्री पोल, हमारा रावपूरा और हमारा आराधना सिनेमा के पास पंचमुखी हनुमान, कई सारी यादें और यही सब जगह कई सारे लोंगो को मिलना हुआ। पंचमहाल, कालोल, हालोल, गोधरा डभोई, छोटाउदेपूर। ओ हो हो गिन भी नहीं सकते, और पूराने सभी साथी, उनकी यादें भी ताजा हो जाय। और जब बडौदा की बात आये तो हरा चिवडा कैसे भूला पाये और अपनी भाखरवडी, आज भी जो लोग वडौदा को जानते है और वो बाहर मुझे मिल जाये, तो अपना हरा चिवडा और भाकरवडी को याद करता ही है ।

साथियों,

2014 में भी जब मैं जीवन में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहा था, राष्ट्रसेवा के दायित्व के लिए मुझे वड़ोदरा के नवनाथ और काशी विश्वनाथ दोनों का आशीर्वाद मिला, इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है? आज गुजरात की बहनों-बेटियों, उनके लिए मेरी दृष्टि से एक बहुत महत्वपूर्ण दिन है। स्वस्थ मातृत्व और स्वस्थ बचपन सुनिश्चित करने के लिए गुजरात सरकार ने आज 2 बड़ी योजनाएं शुरु की हैं। मैं भूपेंद्र भाई को बधाई देता हूं इस योजना के लिए, 800 करोड़ रुपए की मुख्यमंत्री मातृशक्ति योजना ये सुनिश्चित करेगी कि गर्भावस्था के दौरान और मातृत्व के शुरुआती दिनों में माता को पौष्टिक आहार मिले वहीं पोषण सुधा योजना का विस्तार भी अब गुजरात के सभी आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में किया गया है। अभी मुझे 1 करोड़ 36 लाख लाभार्थी बहन, सवा करोड़ से भी ज्यादा बहनें उनके लिए 118 करोड़ रुपए से अधिक वितरीत करने का अवसर मिला है। अब विचार करों सवा करोड़ कर्ता बधारे बहनों यानि लगभग सवा सौ करोड़ रुपया, माता का स्वास्थ्य सिर्फ माता के लिए नहीं बल्कि भावी पीढ़ियों को भी प्रभावित करता है। मातृत्व के पहले 1000 दिन, मां के साथ-साथ बच्चे के जीवन को भी तय करते हैं। क्च्चा और बच्चा दोनों की चिंता। कुपोषण और अनीमिया की समस्या, इस समय सबसे ज्यादा संकट होता है। 2 दशक पहले जब गुजरात ने मुझे सेवा का अवसर दिया तो कुपोषण यहां एक बहुत बड़ी चुनौती थी। तब से हमने एक के बाद एक इस दिशा में काम करना शुरु किया जिसके सार्थक परिणाम आज हमें देखने को मिल रहे हैं। आज से गुजरात की बहनों के लिए मुख्यमंत्री मातृशक्ति योजना शुरु हुई है। ईससे मातृत्व सुख प्राप्त करती बहनो को विशेष लाभ मिलेगा। ईस योजना के अंतर्गत दो किलो चना, एक किलो तुवर दाल, जो प्रोटिन के लिए बहुत जरूरी चीजे है। ईसलिए बहुत सोच समझकर ये पेकेज बनाया है। ईसके अलावा एक लीटर तेल। यह बहनो को मिलेगा। ईतना ही नही, कोरोना काल से मैंने एक काम शुरु किया । ईस देश के गरीब परिवारों के घर का चूला बंध न हो ईसलिए ईस देश के 80 करोड लोगों को मुफ्त अनाज। आज भी उनके घर पहुँच रहा है। दुनिया के लोग 80 करोड लोगों को दो साल तक अनाज, यह सुनकर ही उनको आश्चर्य होता है।

ये योजना कुपोषण और एनिमिया से माता को बच्चे को, नवजात बच्चे को बचाने में बडी मदद करती है। आज बडे पुण्य का काम किया है और नवजात शिशु की सेवा करने का सौभाग्य भूपेन्द्रभाई के नेतृत्व में गुजरात की सरकार कर रही है। हमारा छोटाउदेपूर, हमारा कवांट, यह सब हमारे आदिवासी क्षेत्र, सब हमारे जनजातीय परिवार। मेरा तो सौभाग्य रहा है उनके बीच काम करने का, और आदिवासी बहनें-बच्चे, उनकी समस्याओं को मैंने बहुत नजदीक से देखा है, अनुभव किया है। अनेक आदिवासी क्षेत्र में हमारी बहने सिकलसेल, उसकी बीमारी से पीडित हो और सिकलसेल से मुक्ति के लिए, हमने गुजरात में सिकलसेल सोसायटी बनाई। सिकलसेल की मुक्ति के लिए बडा अभियान चलाया है। ये सिकलसेल हमारी सरकार बनी उसके बाद नही आया है। सैंकडो साल से यह मुसीबत थी। अनेक सरकारे आई लेकिन उन्हों ने कुच भी नही किया। सिकलसेल की चिंता करने का हमने बीडा उठाया सभी जिलों में विशेष सेन्टर बनाये, लाखो आदिवासी भाईयों और बहनों की जांच करवाई उनके टेस्ट कराये। और ये सफल प्रोग्राम के लिए गुजरात ने प्रधानमंत्री सिविल सेवा पुरस्कार जो भारत सरकार देती है, वह अपनी गुजरात सरकार को मिला है।

गुजरात ने पौषण पर हमेशा ध्यान दिया है। अपने गुजरात में दूध संजीवनी, फोर्टिफाईड नमक, टेक होम राशन, पोषण संवाद ऐसे कई कार्यक्रम चलाए और देश को भी एक नई दिशा दिखाई। ऐसी योजनाओं की लाभार्थी बहनो की संख्या आज लगातार बढकर लगभग 58 लाख ऐसी बहनो के ये सभी योजना के लाभ मिल रहे है। दूध संजीवनी योजना से आदिवासी क्षेत्रों मे छ महिने से लेकर छ साल तक बच्चो की चिंता उनको फोर्टफाईड, उनको जरूरी अन्य चीजे। 20 लाख से अधिक गर्भवती माताए और धात्री माताए, दूध पिलानेवाली माताए, उनको तो डबल फोर्टिफाईड नमक, उसकी भी चिंता की गई। 14 लाख वच्चो को आंगणवाडी में फोर्टिफाईड आटे से बना आहार मिले ताकि अपने बच्चे तंदुरस्त बने, 15 से 18 साल तक की हमारी बेटीयाँ उनको अच्छा पोषण मिले उसके लिए पूर्णा योजना बनाई। उसके तहत 12 लाख से ज्यादा बेटीओं को आयर्न सप्लिमेन्ट, लोह तत्व की चिंता, टेक होम राशन ऐसी अनेक सेवाएँ पहोंचाई। कहने का मतलब यह है की उत्तम पोषण के लिए जितने भी उपाय किए जाए ऐसी अनेक योजना बना के उसके कल्याण के लिए काम किया। पोषण सुधा योजना इसी क्रम में एक बड़ा कदम है। 4-5 साल पहले दाहोद, वलसाड, महिसागर, छोटा उदयपुर और नर्मदा के आदिवासी क्षेत्रों के कुछ ब्लॉक में पोषण सुधा योजना शुरु की थी। बीते सालों में आदिवासी बहनों और बच्चों पर इसके सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए पाजिटिव रिजल्ट मिले उसके लिए सभी जनजातीय जिलों में इसका विस्तार किया गया। इससे हर महीने लगभग 1 लाख 36 हज़ार आदिवासी माताओं-बहनों को लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताओं को आंगनबाड़ी में एक वक्त गरम खाना, आयरन और कैल्शियम की गोलियां भी दी जाएंगी। हमने सिर्फ पोषण की योजना ही नहीं बनाई बल्कि सुविधाएं लाभार्थी बहनों-बच्चों तक ठीक से पहुंच रही है इसकी भी चिंता की है। गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मुझे टेक्नोलोजी का उपयोग करने का अवसर मिला। उस वक्त ममता पोर्टल शुरु किया और पिछले 8 साल में आंगणवाडी लगभग 12 लाख उपकरण दिये गये है। गुजरात में भी हजारों बहनो को उपकरण दिये गये है।

इसके तहत गुजरात सहित देशभर में लगभग साढ़े 11 करोड़ लाभार्थी बहनों-बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी रियल टाइम मॉनिटरिंग हो रहा है। ये जो पोषण सुधा योजना का विस्तार हुआ है, उसकी निगरानी के लिए मोबाइल ऐप बनाया गया है। गुजरात के सफल अनुभवों को विस्तार देते हुए ही देश में कुपोषण और एनीमिया की समस्या के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। पहली बार देश में अब सितंबर महीने को पोषण माह के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। जो गुजरात में सावन-भादो महिने होते है। इस अभियान से भी गुजरात की बहनों को बहुत अधिक मदद मिल रही है। पोषण का अर्थ सिर्फ खान पान ही नहीं, लेकिन उनके लिए योग्य माहौल भी बनाना पडे, जरूरी छोटी बडी सुविधा, स्वच्छ भारत अभियान, घर-घर शौचालय, ये भी माताएँ और बहनों के स्वास्थ्य में सुधार करने के साधन है। उज्जवला योजना, गेस कनेक्शन। घर में धूंआ होने से हमारी माता-बहनों के फेफडो में सेंकडो सिगारेट जितना धुंआ जाता था, उसे बचाने का काम किया है।

36 लाख से ज्यादा परिवारों को उज्जवला योजना के तहत गेस कनेक्शन दिया गया है। घर-घर नल से जल। हमारी माताओं के सर से मटके उतार ने का सौभाग्य भी हमारे तकदीर में आया है। हमने पाईप से पानी पहुँचा के उनकी चिंता की है। माताएँ बहनों की तकलीफ कम हो, प्रदुषित पानी से मुक्ति मिले और अगर पानी अच्छा मिले तो कई बीमारी से निजाद मिलती है। पीएम मातृ वंदना योजना के तहत गुजरात समेत पूरे देश में करोडों माताओं को लगभग 11 हजार करोड रूपये का खर्च किया जाता है। ईस योजना के तहत गुजरात में भी 9 लाख बहनों को ईसका लाभ मिलता ह। बहनों को गर्भावस्था के दौरान पोषण मिले उसके लिए करीब 400 करोड रुपये का खर्च किया जाता है, उसकी मदद की जाती है।

गुजरात में महिलाओं को हर स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए, निर्णय लेने की जगहों पर अधिक अवसर देने के लिए हमने प्रयास किया है। महिलाओं की प्रबंध क्षमता को समझते हुए ही गांव से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट्स में बहनों को नेतृत्व की भूमिका दी गई है। पानी समिति में गुजरात की बहनों ने जो प्रशंसनीय काम किया है, उसके कारण आज देश की बहनें जल जीवन मिशन को भी नेतृत्व दे रही हैं। गुजरात देश के उन राज्यों में है जहां पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए है। ग्रामीण बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए गुजरात में जब हम 50 साल हुए स्वर्ण जयंती मना रहे थे। उस समय हमने हमने मिशन मंगलम शुरु किया था और उसके तहत 12 साल में लगभग 2 लाख 60 हजार से ज्यादा सखी मंडल, स्वयं सहायता जूथ बन चूके है। 2.5 लाख से ज्यादा ग्रूप, उसमें 26 लाख से ज्यादा ग्रामीण बहने उसमें जूडी है। बडी संख्या में हमारी आदिवासी, दलित, पछात बहनें, हमारे गाँव की बहने जूडी है। ईन समूहों को सेंकडो हजारो करोड रूपये अलग अलग प्रोजेक्ट के तहत बेंको से मिले है। हमारा हमेंशा प्रयास रहा है की बहनें - बेटियां परिवारो की आर्थिक ताकत बढाएँ और अर्थव्यवस्था में भी उनकी सक्रिय साजेदारी हो।

2014 केंद्र में सरकार बनते ही जनधन बैंक खाते की एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय योजना पर हमने काम किया इस योजना के तहत गुजरात में लाखों बहनों के बैंक खाते खुल चुके हैं, वो आज सभी माताओं-बहनों को काम आ रहे हैं। ऐसी गरीब माताओं को इतना बड़ा भयंकर कोरोना का बिमारी आई, सीधा उनके खाते में पैसा पहुंचाकर मेरी माताएं-बहनों की सम्मान से जीने की व्यवस्था की। मुद्रा योजना द्वारा, स्वरोज़गार द्वारा मुद्रा योजना, स्वरोजगार योजना के तहत बेंक से किसी प्रकार की गेरन्टी के बगैर पैसे देने की व्यवस्था की गई। और मुझे खुशी है की देश में मुद्रा योजना का लाभ लेने में देश की 70 प्रतिशत महिलाएँ है। सखी मंडल की मर्यादा केन्द्र सरकार ने जो 10 लाख रुपये की लोन थी उसे अभी बढाकर 20 लाख किया है जिससे वे अपने कारोबार को बढा सके। और जब मैं कहता हुं कि यह डबल ईंजन की सरकार है। ये डबल ईंजन की सरकार का लाभ है की चारो और तेज गति से विकास हो रहा है। आज ये कार्यक्रम में 1 लाख 40 हजार गरीबों को पक्के घर मिल रहे है । सोचिए लगभग 1.5 लाख परिवारों को रहने का पुक्का घर मिले। पहले कच्चे घरमें, झोपडी में, फूटपाथ पे रहते हो ऐसे 1.5 लाख परिवार है। उनमें भी अधिकतर मेरा ये नियम है की जो मकान मिले वो महिला के नाम पर हो। आज अगर ये मकानों की किमत देखें तो ये महिलाएँ लखपति बन गई। ईतना बडा काम हमने किया है। ये घरों के रुपसे 3,000 करोड से अधिक की संपत्ति बहनों के नाम हो गई है। कोई कल्पना कर सकता है की आज ये तुम्हारा बेटा बैठा है जिससे 3,000 करोड की संपति की मालकिन ये माताएँ – बहने बन गई गई है। ये वो बहने है जिनके नाम पर जिन्दगी में कभी भी कुछ भी नहीं था। एक मकान ना था , जमीन न थी, कुछ नहीं था । उनके नाम पर 3000 करोड़ की संपत्ति, यह बेटा उनका काम कर रहा है , मातृभक्ति से कर रहा हैं।

शहरी गरीबों और मिडिल क्लास के सपनों को भी पूरा किया। बीते सालों में गुजरात के शहरी गरीबों और मिडिल क्लास के घरों के निर्माण पर भी अभूतपूर्व काम हुआ है। अभी तक कुल स्वीकृत साढ़े 10 लाख से अधिक घरों में से शहरी गरीब परिवारों को करीब साढ़े 7 लाख घर मिल चुके हैं। गुजरात के लगभग साढ़े 4 लाख मिडिल क्लास परिवारों को भी घर बनाने के लिए मदद दी गई है। वड़ोदरा, आणंद, छोटा उदयपुर, खेड़ा, पंचमहाल, नर्मदा, दाहोद, ये मेरा मध्यगुजरात, उसके चारों जिलोमें रहती बहनों को ये सरकारी योजनाका लाभ मिला है।

केन्द्र सरकार ने शहरों में गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय लोगोंको उचित किराये पर रहने के लिए घर देने की योजना बनाई है। जिसमें आज गुजरात पूरे देशमें अग्रणी राज्य बना है। घर के साथ साथ जो ठेलेवाले होते है, चार पहियोवाले ठेले लेकर निकलते है उनको भी पीएम स्वनिधि योजना के तहत बेंक से लोन मिले। ये लोग पहले ऋण लेते थे और व्याज चूकाते थे। ये ठेलेवाले लोग, छोटे लोगोंको मदद करने का हमने बिडा उठाया है। पिछले 20 साल में गुजरात के विकास को सफलता मिले आधुनिकता मिले उस दिशा मैं हमनेकाम किया है। एक तरफ गुजरात का हर एक नागरिक हमारी बहने हमारा आदिवासी हमारे पिछड़े दलित भाइयों बहनों के समस्याओं का समाधान हो दूसरी तरफ कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर उसे औद्योगिक सामर्थ्य मिले क्योंकि हमें यही खड़ा नहीं रहना है हमें तेज गति से आगे बढ़ना है इसलिए उसका भी काम होना चाहिए रेल कनेक्टिविटी मैं उनके विस्तार में नहीं जाता भूपेंद्र भाई ने उसका जिक्र किया है रेल कनेक्टिविटी सतत हो उसके लिए 16000 करोड़ के प्रोजेक्ट आज गुजरात को मिले हैं साडे 300 किलोमीटर से अधिक न्यू पालनपुर न्यू मदार सेक्शन का लोकार्पण वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इस प्रोजेक्ट को भी गति मिली है। ये प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को उसका उपयोग औद्योगिकीकरण और व्यापार के कार्य को एक नई ताकत देने का माहौल बनाने में काम आएगा साबरमती बोटाद मार्ग का चौड़ीकरण, अहमदाबाद पिपावाव पोर्ट को जोड़ने वाला अलग-अलग छोटे-छोटे वैकल्पिक रूट तैयार किए गए हैं। जिसको लेकर हमारे बंदर निरंतर शुरू रहे गुजरात में जो कनेक्टिविटी का काम हुआ है। उसने लोगों का जीवन आसान बनाया है पीस ऑफ लिविंग कि मैं जो बात करता हूं उसमें ये भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है गुजरात में टूरिज्म बड़े और आपके बड़ौदा को तो बहुत बढ़िया है कोई मेहमान आते हैं तो एक दिन उनको कहीं ले जाना है तो कहां ले जाना चलो हमारे पावागढ़ जो नया बना है मां काली के पास जाए तीन-चार दिन के लिए मेहमान को कहीं ले जाना है तो चलो हमारा एकता नगर केवरिया लेकर जाए तीन-चार दिन मेहमानों को रखें और दुनिया से हम कितने आगे निकल गए हैं यह बताएं यह बड़ौदा वालों को तो उनकी पांचों उंगलियां की में है हमारा पालनपुर राधनपुर सेक्शन कच्छ को देश के बाकी हिस्सों के साथ कनेक्टिविटी देने का काम कर रहा है जिसकी वजह से कच्छ के किसानों को आज आज कच्छ के रण प्रदेश में भी खेती हो रही है कच्छ में चोर खेती हो रही है विदेशों में आप जा रहा है कच्छकी पैदावार विदेशों में जा रही है कृषि पैदावार या रेल कनेक्टिविटी के द्वारा भारत के कोने कोने तक पहुंचे उसके लिए या का आज किया है। बड़ौदा की आधुनिक कनेक्टिविटी उसके लिए विशेष ध्यान दिया गया है बड़ौदा को आधुनिक बस स्टेशन आप सभी को पता है पहला बस स्टेशन एयरपोर्ट से भी बढ़िया बना है। बना है कि नहीं? एयरपोर्ट से भी बढ़िया बना है कि नहीं? और आज पूरे हिंदुस्तान में उसकी चर्चा है सिर्फ इतना ही नहीं अपना गुजरात अहमदाबाद बडौदा एक्सप्रेस हाईवे लोग देखने जा रहे थे कि अहमदाबाद बडौदा एक्सप्रेस हाईवे कैसा बना है और अभी तो मुंबई दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे और यह जो अहमदाबाद बड़ौदा एक्सप्रेस हाईवे था उससे देखकर उसका विस्तार हो रहा है इतना ही नहीं आप तो हाई स्पीड रेलवे बड़ौदा से मुंबई बुलेट ट्रेन यह भी थोड़े चालू में हमारे सामने होगी आप विचार करो कि बड़ौदा को इतनी बड़ी ताकत मिलने वाली है हमारा छावनी रेलवे स्टेशन उसका भी नये स्वरूपमें विकास हो रहा है हमारा बड़ोदा एयरपोर्ट उसमें भी चाहो चलाली आ रही है और दो नए ग्रीन एयरपोर्ट की भी तैयारियां चल रही है स्मार्ट सिटी अमृत योजना मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना उसके द्वारा भी डबल एन चीन डबल बेनिफिट यह मेरे बड़ौदा को मिल रहा है बड़ौदा स्मार्ट बनने के लिए 1000 करोड़ रुपिया 25 प्रोजेक्ट बड़ौदा के लिए स्वीकृत हुए हैं और उसमें से तकरीबन 16 प्रोजेक्ट पूर्ण होने को है। अमृत योजना अंतर्गत महानगरपालिका को 100 करोड रूपए और मैं वडोदरा महानगरपालिका को अभिनंदन दे रहा हुं। अभी मेरी हिमाचल में देशभर के मुख्य सचिवों की मीटिंग चल रही थी। उसमें एक अधिकारीने विशेष रुप से आज वडोदरा ने 100 करोड रूपए के बोन्ड ईस्यु किए है और जो सफलता प्राप्त की है, उसके लिए हिमाचल में आकर उन्होंने अभिनंदन दिए थे। मैं आज यहां रुबरु आकर आपको वडोदरा महानगर निगम को अभिनंदन दे रहा हुं। आज हमारा सिंघ रोड, जल आपूर्ति योजना का लोकार्पण, हमारा महिसागर का पानी वडोदरा के दक्षिण विस्तार में और उससे हमारी माताओँ-बहनों के आशीष मुझे मिलेंगे, मिलेंगे और मिलेंगे ही।

भाईओँ-बहनों हमारे वडोदरा की पहचान यानी शिक्षा के क्षेत्र में बडा नाम, हमारी एम एस युनिवर्सिटी का डंका बज रहा हो। और अब तो शिक्षा, सायन्स, कोर्ट उनमें भी हम आगे बढ रहे है। गत साल शिक्षा, स्किल डेवलपमेन्ट हब के लिए वडोदरा की पहचान बनी। ट्रीपल आईटी, स्वर्णिम गुजरात स्पोर्ट्स युनिवर्सिटी , सेन्ट्रल युनिवर्सिटी, ये सब गुजरात के आंगन में वडोदरा में। मेरे वडोदरा का सीना फुले वह स्वाभाविक है। आपको आनंद होगा ये देश की पहली,देश की पहली रेल युनिवर्सिटी , ये भी वडोदरा में, और अब गतिशक्ति युनिवर्सिटी के तौर पर उसका विस्तार भी वडोदरा की भूमि पर हो रहा है। और उसमें पढकर निकलनेवाले लोग, आसपास के सब विस्तारों के लोगों को लाभ मिलनेवाला है। देशभर के लोगों को लाभ मिलनेवाला है। और हमारा आणंद हो, छोटा उदेपुर हो या मध्य गुजरात के दूसरे जिलें हो। खेडा हो या पंचमहाल हो या दाहोद हो या ईसतरफ हमारा भरूच हो या नर्मदा हो, ईन सब को लाभ मिलनेवाला है। और नर्मदा में बिरसा मुंडा ट्राईबल युनिवर्सिटी, गोधरा में गोविंद गुरू युनिवर्सिटी, इसने तो देशभर में आकर्षण जमाया है।

भाईओ,बहनों, वडोदरा देश की सबसे पुरानी , ये वडोदरा देश का सही मायनों में कोस्मोपोलिटन सिटी कहा जा सके ऐसा शहर है। यहां देश का कोई कोना ऐसा नहीं होगा के जहां के लोग यहां न रहते हो, यहां काम न करते हो, यहां पढते ना हो, शायद ही ऐसा देखने को मिले। और जब हमारे वडोदरा का गरबा हो ओ हो पूरा देश , और वडोदरा में मेईक ईन ईन्डिया, इसका बेझ , मजबूत बेझ आज वडोदरा में खडा हुआ है और उसकी भूमिक बहुत बडी है विकास की यात्रा में, वडोदरा एक सर्विस सेक्टर का हब भी बन रहा है, यहां से टेकनोलोजी से जुडनेवालों का विस्तार हो रहा है, यहां हमारे बोम्बार्डियर कंपनी की मेट्रो दुनिया में जा रही है, दुनिया में, हमारे वडोदरा का सीना चौडा होगा की नहीं होगा बोलो भाईओँ। मेट्रो दुनिया में जाए तो बोले कहां बनी है तो कहेंगे वडोदरा में बनी है। मेट्रो ओस्ट्रेलिया में चल रही हो, कहां से आई तो कहेंगे वडोदरा से आई, भारत से आई, गुजरात सरकार सहकार और परोपकार ये इसकी विशेषता रही है। यह इसकी मूल ताकत रही है। और डबल एन्जिन की सरकार के प्रयासों से सामाजिक संगठनों की ताकत से, जनभागीदारी से , सिविल सोसायटी की मदद से, विकास की नई नई योजनाएं गुजरात के पब्लिक लाईफ को सशक्त करे, गुजरात के सामान्य जीवन को सशक्त करें, और गुजरात की आनेवाली पीढी के लिए, उत्तम गुजरात का निर्माण करें, ऐसी उत्तम भूमिका के साथ गुजरात विकास की नई उंचाईओं पर जा रहा है। और आप सब के आशीर्वाद हमें रोज नया करने की ताकत देते है। आप के आशीष हमें देश को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए हरदम प्रेरणा दे रहे हैं। आपके आशीर्वाद हमारे लिए इतना बडा सामर्थ्य है की इस देश के सपने साकार करने के लिए हम कोई पीछेहठ नहीं करते और इसतरह काम पर लगे हुए हैं तब फिर एकबार मेरा आज मातृवंदना दिन और आज इतनी बडी संख्या में माताओं बहनों के दर्शन करने का अवसर मिला, माताओँ बहनों का आशीर्वाद मिलने का मौका मिला, गुजरात के जीवन में एकसाथ लाखों बहनें आकर आशीर्वाद दें इससे सुंदर अवसर कौन सा हो सकता है? आप सब को माताओँ मेरा शत शत प्रणाम, मेरे शत शत नमन, आपके आशीर्वाद मातृशक्ति की सेवा के लिए, मां भारती की सेवा करने के लिए हमें सामर्थ्य दें वही अपेक्षा के साथ आप सब के आशीर्वाद हम सब पर बने रहें, बहुत बहुत शुभकामनाएँ, बहुत बहुत धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री मोदी का ‘IANS’ के साथ इंटरव्यू
May 27, 2024

पहले तो मैं आपकी टीम को बधाई देता हूं भाई, कि इतने कम समय में आपलोगों ने अच्छी जगह बनाई है और एक प्रकार से ग्रासरूट लेवल की जो बारीक-बारीक जानकारियां हैं। वह शायद आपके माध्यम से जल्दी पहुंचती है। तो आपकी पूरी टीम बधाई की पात्र है।

Q1 - आजकल राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को पाकिस्तान से इतना endorsement क्यों मिल रहा है ? 370 ख़त्म करने के समय से लेकर आज तक हर मौक़े पर पाकिस्तान से उनके पक्ष में आवाज़ें आती हैं ?

जवाब – देखिए, चुनाव भारत का है और भारत का लोकतंत्र बहुत ही मैच्योर है, तंदरुस्त परंपराएं हैं और भारत के मतदाता भी बाहर की किसी भी हरकतों से प्रभावित होने वाले मतदाता नहीं हैं। मैं नहीं जानता हूं कि कुछ ही लोग हैं जिनको हमारे साथ दुश्मनी रखने वाले लोग क्यों पसंद करते हैं, कुछ ही लोग हैं जिनके समर्थन में आवाज वहां से क्यों उठती है। अब ये बहुत बड़ी जांच पड़ताल का यह गंभीर विषय है। मुझे नहीं लगता है कि मुझे जिस पद पर मैं बैठा हूं वहां से ऐसे विषयों पर कोई कमेंट करना चाहिए लेकिन आपकी चिंता मैं समझ सकता हूं।

 

Q 2 - आप ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम तेज करने की बात कही है अगली सरकार जब आएगी तो आप क्या करने जा रहे हैं ? क्या जनता से लूटा हुआ पैसा जनता तक किसी योजना या विशेष नीति के जरिए वापस पहुंचेगा ?

जवाब – आपका सवाल बहुत ही रिलिवेंट है क्योंकि आप देखिए हिंदुस्तान का मानस क्या है, भारत के लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं। दीमक की तरह भ्रष्टाचार देश की सारी व्यवस्थाओं को खोखला कर रहा है। भ्रष्टाचार के लिए आवाज भी बहुत उठती है। जब मैं 2013-14 में चुनाव के समय भाषण करता था और मैं भ्रष्टाचार की बातें बताता था तो लोग अपना रोष व्यक्त करते थे। लोग चाहते थे कि हां कुछ होना चाहिए। अब हमने आकर सिस्टमैटिकली उन चीजों को करने पर बल दिया कि सिस्टम में ऐसे कौन से दोष हैं अगर देश पॉलिसी ड्रिवन है ब्लैक एंड व्हाइट में चीजें उपलब्ध हैं कि भई ये कर सकते हो ये नहीं कर सकते हो। ये आपकी लिमिट है इस लिमिट के बाहर जाना है तो आप नहीं कर सकते हो कोई और करेगा मैंने उस पर बल दिया। ये बात सही है..लेकिन ग्रे एरिया मिनिमल हो जाता है जब ब्लैक एंड व्हाइट में पॉलिसी होती है और उसके कारण डिसक्रिमिनेशन के लिए कोई संभावना नहीं होती है, तो हमने एक तो पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस पर बल दिया। दूसरा हमने स्कीम्स के सैचुरेशन पर बल दिया कि भई 100% जो स्कीम जिसके लिए है उन लाभार्थियों को 100% ...जब 100% है तो लोगों को पता है मुझे मिलने ही वाला है तो वो करप्शन के लिए कोई जगह ढूंढेगा नहीं। करप्शन करने वाले भी कर नहीं सकते क्योंकि वो कैसे-कैसे कहेंगे, हां हो सकता है कि किसी को जनवरी में मिलने वाला मार्च में मिले या अप्रैल में मिले ये हो सकता है लेकिन उसको पता है कि मिलेगा और मेरे हिसाब से सैचुरेशन करप्शन फ्री गवर्नेंस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सोशल जस्टिस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सेकुलरिज्म की गारंटी देता है। ऐसे त्रिविध फायदे वाली हमारी दूसरी स्कीम, तीसरा मेरा प्रयास रहा कि मैक्सिमम टेक्नोलॉजी का उपयोग करना। टेक्नोलॉजी में भी..क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन होते हैं, ट्रांसपेरेंसी रहती है। अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में 38 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हमने। अगर राजीव गांधी के जमाने की बात करें कि एक रुपया जाता है 15 पैसा पहुंचता है तो 38 लाख करोड़ तो हो सकता है 25-30 लाख करोड़ रुपया ऐसे ही गबन हो जाते तो हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। जहां तक करप्शन का सवाल है देश में पहले क्या आवाज उठती थी कि भई करप्शन तो हुआ लेकिन उन्होंने किसी छोटे आदमी को सूली पर चढ़ा दिया। सामान्य रूप से मीडिया में भी चर्चा होती थी कि बड़े-बड़े मगरमच्छ तो छूट जाते हैं, छोटे-छोटे लोगों को पकड़कर आप चीजें निपटा देते हो। फिर एक कालखंड ऐसा आया कि हमें पूछा जाता था 19 के पहले कि आप तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे क्यों कदम नहीं उठाते हो, क्यों अरेस्ट नहीं करते हो, क्यों लोगों को ये नहीं करते हो। हम कहते थे भई ये हमारा काम नहीं है, ये स्वतंत्र एजेंसी कर रही है और हम बदइरादे से कुछ नहीं करेंगे। जो भी होगा हमारी सूचना यही है जीरो टोलरेंस दूसरा तथ्यों के आधार पर ये एक्शन होना चाहिए, परसेप्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए। तथ्य जुटाने में मेहनत करनी पड़ती है। अब अफसरों ने मेहनत भी की अब मगरमच्छ पकड़े जाने लगे हैं तो हमें सवाल पूछा जा रहा है कि मगरमच्छों को क्यों पकड़ते हो। ये समझ में नहीं आता है कि ये कौन सा गैंग है, खान मार्केट गैंग जो कुछ लोगों को बचाने के लिए इस प्रकार के नैरेटिव गढ़ती है। पहले आप ही कहते थे छोटों को पकड़ते हो बड़े छूट जाते हैं। जब सिस्टम ईमानदारी से काम करने लगा, बड़े लोग पकड़े जाने लगे तब आप चिल्लाने लगे हो। दूसरा पकड़ने का काम एक इंडिपेंडेंट एजेंसी करती है। उसको जेल में रखना कि बाहर रखना, उसके ऊपर केस ठीक है या नहीं है ये न्यायालय तय करता है उसमें मोदी का कोई रोल नहीं है, इलेक्टेड बॉडी का कोई रोल नहीं है लेकिन आजकल मैं हैरान हूं। दूसरा जो देश के लिए चिंता का विषय है वो भ्रष्ट लोगों का महिमामंडन है। हमारे देश में कभी भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए लोग या किसी को आरोप भी लगा तो लोग 100 कदम दूर रहते थे। आजकल तो भ्रष्ट लोगों को कंधे पर बिठाकर नाचने की फैशन हो गई है। तीसरा प्रॉब्लम है जो लोग कल तक जिन बातों की वकालत करते थे आज अगर वही चीजें हो रही हैं तो वो उसका विरोध कर रहे हैं। पहले तो वही लोग कहते थे सोनिया जी को जेल में बंद कर दो, फलाने को जेल में बंद कर दो और अब वही लोग चिल्लाते हैं। इसलिए मैं मानता हूं आप जैसे मीडिया का काम है कि लोगों से पूछे कि बताइए छोटे लोग जेल जाने चाहिए या मगरमच्छ जेल जाने चाहिए। पूछो जरा पब्लिक को क्या ओपिनियन है, ओपिनियन बनाइए आप लोग।

 

Q3- नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सबने गरीबी हटाने की बात तो की लेकिन आपने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया, इसे लेकर कैसे रणनीति तैयार करते हैं चाहे वो पीएम स्वनिधि योजना हो, पीएम मुद्रा योजना बनाना हो या विश्वकर्मा योजना हो मतलब एकदम ग्रासरूट लेवल से काम किया ?

जवाब – देखिए हमारे देश में जो नैरेटिव गढ़ने वाले लोग हैं उन्होंने देश का इतना नुकसान किया। पहले चीजें बाहर से आती थी तो कहते थे देखिए देश को बेच रहे हैं सब बाहर से लाते हैं। आज जब देश में बन रहा है तो कहते हैं देखिए ग्लोबलाइजेशन का जमाना है और आप लोग अपने ही देश की बातें करते हैं। मैं समझ नहीं पाता हूं कि देश को इस प्रकार से गुमराह करने वाले इन ऐलिमेंट्स से देश को कैसे बचाया जाए। दूसरी बात है अगर अमेरिका में कोई कहता है Be American By American उसपर तो हम सीना तानकर गर्व करते हैं लेकिन मोदी कहता है वोकल फॉर लोकल तो लोगों को लगता है कि ये ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ है। तो इस प्रकार से लोगों को गुमराह करने वाली ये प्रवृत्ति चलती है। जहां तक भारत जैसा देश जिसके पास मैनपावर है, स्किल्ड मैनपावर है। अब मैं ऐसी तो गलती नहीं कर सकता कि गेहूं एक्सपोर्ट करूं और ब्रेड इम्पोर्ट करूं..मैं तो चाहूंगा मेरे देश में ही गेहूं का आटा निकले, मेरे देश में ही गेहूं का ब्रेड बने। मेरे देश के लोगों को रोजगार मिले तो मेरा आत्मनिर्भर भारत का जो मिशन है उसके पीछे मेरी पहली जो प्राथमिकता है कि मेरे देश के टैलेंट को अवसर मिले। मेरे देश के युवाओं को रोजगार मिले, मेरे देश का धन बाहर न जाए, मेरे देश में जो प्राकृतिक संसाधन हैं उनका वैल्यू एडिशन हो, मेरे देश के अंदर किसान जो काम करता है उसकी जो प्रोडक्ट है उसका वैल्यू एडिशन हो वो ग्लोबल मार्केट को कैप्चर करे और इसलिए मैंने विदेश विभाग को भी कहा है कि भई आपकी सफलता को मैं तीन आधारों से देखूंगा एक भारत से कितना सामान आप..जिस देश में हैं वहां पर खरीदा जाता है, दूसरा उस देश में बेस्ट टेक्नोलॉजी कौन सी है जो अभीतक भारत में नहीं है। वो टेक्नोलॉजी भारत में कैसे आ सकती है और तीसरा उस देश में से कितने टूरिस्ट भारत भेजते हो आप, ये मेरा क्राइटेरिया रहेगा...तो मेरे हर चीज में सेंटर में मेरा नेशन, सेंटर में मेरा भारत और नेशन फर्स्ट इस मिजाज से हम काम करते हैं।

 

Q 4 - एक तरफ आप विश्वकर्माओं के बारे में सोचते हैं, नाई, लोहार, सुनार, मोची की जरूरतों को समझते हैं उनसे मिलते हैं तो वहीं दूसरी तरफ गेमर्स से मिलते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बात करते हैं, इन्फ्लुएंसर्स से आप मिलते हैं इनकी अहमियत को भी सबके सामने रखते हैं, इतना डाइवर्सीफाई तरीके से कैसे सोच पाते हैं?

जवाब- आप देखिए, भारत विविधताओं से भरा हुआ है और कोई देश एक पिलर पर बड़ा नहीं हो सकता है। मैंने एक मिशन लिया। हर डिस्ट्रिक्ट का वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पर बल दिया, क्यों? भारत इतना विविधता भरा देश है, हर डिस्ट्रिक्ट के पास अपनी अलग ताकत है। मैं चाहता हूं कि इसको हम लोगों के सामने लाएं और आज मैं कभी विदेश जाता हूं तो मुझे चीजें कौन सी ले जाऊंगा। वो उलझन नहीं होती है। मैं सिर्फ वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट का कैटलॉग देखता हूं। तो मुझे लगता है यूरोप जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। अफ्रीका जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। और हर एक को लगता है एक देश में। यह एक पहलू है दूसरा हमने जी 20 समिट हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्से में की है। क्यों? दुनिया को पता चले कि दिल्ली, यही हिंदुस्तान नहीं है। अब आप ताजमहल देखें तो टूरिज्म पूरा नहीं होता जी मेरे देश का। मेरे देश में इतना पोटेंशियल है, मेरे देश को जानिए और समझिए और इस बार हमने जी-20 का उपयोग भारत को विश्व के अंदर भारत की पहचान बनाने के लिए किया। दुनिया की भारत के प्रति क्यूरियोसिटी बढ़े, इसमें हमने बड़ी सफलता पाई है, क्योंकि दुनिया के करीब एक लाख नीति निर्धारक ऐसे लोग जी-20 समूह की 200 से ज्यादा मीटिंग में आए। वह अलग-अलग जगह पर गए। उन्होंने इन जगहों को देखा, सुना भी नहीं था, देखा वो अपने देश के साथ कोरिलिरेट करने लगे। वो वहां जाकर बातें करने लगे। मैं देख रहा हूं जी20 के कारण लोग आजकल काफी टूरिस्टों को यहां भेज रहे हैं। जिसके कारण हमारे देश का टूरिज्म को बढ़ावा मिला।

इसी तरह आपने देखा होगा कि मैंने स्टार्टअप वालों के साथ मीटिंग की थी, मैं वार्कशॉप करता था। आज से मैं 7-8 साल पहले, 10 साल पहले शुरू- शुरू में यानी मैं 14 में आया। उसके 15-16 के भीतर-भीतर मैंने जो नए स्टार्टअप की दुनिया शुरू हुई, उनकी मैंने ऐसे वर्कशॉप की है तो मैं अलग-अलग कभी मैंने स्पोर्ट्स पर्सन्स के की, कभी मैंने कोचों के साथ की कि इतना ही नहीं मैंने फिल्म दुनिया वालों के साथ भी ऐसी मीटिंग की।

मैं जानता हूं कि वह बिरादरी हमारे विचारों से काफी दूर है। मेरी सरकार से भी दूर है, लेकिन मेरा काम था उनकी समस्याओं को समझो क्योंकि बॉलीवुड अगर ग्लोबल मार्केट में मुझे उपयोगी होता है, अगर मेरी तेलुगू फिल्में दुनिया में पॉपुलर हो सकती है, मेरी तमिल फिल्म दुनिया पॉपुलर हो सकती है। मुझे तो ग्लोबल मार्केट लेना था मेरे देश की हर चीज का। आज यूट्यूब की दुनिया पैदा हुई तो मैंने उनको बुलाया। आप देश की क्या मदद कर सकते हैं। इंफ्लुएंसर को बुलाया, क्रिएटिव वर्ल्ड, गेमिंम अब देखिए दुनिया का इतना बड़ा गेमिंग मार्केट। भारत के लोग इन्वेस्ट कर रहे हैं, पैसा लगा रहे हैं और गेमिंग की दुनिया में कमाई कोई और करता है तो मैंने सारे गेमिंग के एक्सपर्ट को बुलाया। पहले उनकी समस्याएं समझी। मैंने देश को कहा, मेरी सरकार को मुझे गेमिंग में भारतीय लीडरशिप पक्की करनी है।

इतना बड़ा फ्यूचर मार्केट है, अब तो ओलंपिक में गेमिंग आया है तो मैं उसमें जोड़ना चाहता हूं। ऐसे सभी विषयों में एक साथ काम करने के पक्ष में मैं हूं। उसी प्रकार से देश की जो मूलभूत व्यवस्थाएं हैं, आप उसको नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। हमें गांव का एक मोची होगा, सोनार होगा, कपड़े सिलने वाला होगा। वो भी मेरे देश की बहुत बड़ी शक्ति है। मुझे उसको भी उतना ही तवज्जो देना होगा। और इसलिए मेरी सरकार का इंटीग्रेटेड अप्रोच होता है। कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच होता है, होलिस्टिक अप्रोच होता है।

 

Q 5 - डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया उसका विपक्ष ने मजाक भी उड़ाया था, आज ये आपकी सरकार की खास पहचान बन गए हैं और दुनिया भी इस बात का संज्ञान ले रही है, इसका एक उदहारण यूपीआई भी है।

जवाब – यह बात सही है कि हमारे देश में जो डिजिटल इंडिया मूवमेंट मैंने शुरू किया तो शुरू में आरोप क्या लगाए इन्होंने? उन्होंने लगाई कि ये जो सर्विस प्रोवाइडर हैं, उनकी भलाई के लिए हो रहा है। इनको समझ नहीं आया कि यह क्षेत्र कितना बड़ा है और 21वीं सदी एक टेक्नॉलॉजी ड्रिवन सेंचुरी है। टेक्नोलॉजी आईटी ड्रिवन है। आईटी इन्फोर्स बाय एआई। बहुत बड़े प्रभावी क्षेत्र बदलते जा रहे हैं। हमें फ्यूचरस्टीक चीजों को देखना चाहिए। आज अगर यूपीआई न होता तो कोई मुझे बताए कोविड की लड़ाई हम कैसे लड़ते? दुनिया के समृद्ध देश भी अपने लोगों को पैसे होने के बावजूद भी नहीं दे पाए। हम आराम से दे सकते हैं। आज हम 11 करोड़ किसानों को 30 सेकंड के अंदर पैसा भेज सकते हैं। अब यूपीआई अब इतनी यूजर फ्रेंडली है तो क्योंकि यह टैलेंट हमारे देश के नौजवानों में है। वो ऐसे प्रोडक्ट बना करके देते हैं कि कोई भी कॉमन मैन इसका उपयोग कर सकता है। आज मैंने ऐसे कितने लोग देखे हैं जो अपना सोशल मीडिया अनुभव कर रहे हैं। हमने छह मित्रों ने तय किया कि छह महीने तक जेब में 1 पैसा नहीं रखेंगे। अब देखते हैं क्या होता है। छह महीने पहले बिना पैसे पूरी दुनिया में हम अपना काम, कारोबार करके आ गए। हमें कोई तकलीफ नहीं हुई तो हर कसौटी पर खरा उतर रहा है। तो यूपीआई ने एक प्रकार से फिनटेक की दुनिया में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है और इसके कारण इन दिनों भारत के साथ जुड़े हुए कई देश यूपीआई से जुड़ने को तैयार हैं क्योंकि अब फिनटेक का युग है। फिनटेक में भारत अब लीड कर रहा है और इसलिए दुर्भाग्य तो इस बात का है कि जब मैं इस विषय को चर्चा कर रहा था तब देश के बड़े-बड़े विद्वान जो पार्लियामेंट में बैठे हैं वह इसका मखौल उड़ाते थे, मजाक उड़ाते थे, उनको भारत के पोटेंशियल का अंदाजा नहीं था और टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य का भी अंदाज नहीं था।

 

Q 6 - देश के युवा भारत का इतिहास लिखेंगे ऐसा आप कई बार बोल चुके हैं, फर्स्ट टाइम वोटर्स का पीएम मोदी से कनेक्ट के पीछे का क्या कारण है?

एक मैं उनके एस्पिरेशन को समझ पाता हूं। जो पुरानी सोच है कि वह घर में अपने पहले पांच थे तो अब 7 में जाएगा सात से नौ, ऐसा नहीं है। वह पांच से भी सीधा 100 पर जाना चाहता है। आज का यूथ हर, क्षेत्र में वह बड़ा जंप लगाना चाहता है। हमें वह लॉन्चिंग पैड क्रिएट करना चाहिए, ताकि हमारे यूथ के एस्पिरेशन को हम फुलफिल कर सकें। इसलिए यूथ को समझना चाहिए। मैं परीक्षा पर चर्चा करता हूं और मैंने देखा है कि मुझे लाखों युवकों से ऐसी बात करने का मौका मिलता है जो परीक्षा पर चर्चा की चर्चा चल रही है। लेकिन वह मेरे साथ 10 साल के बाद की बात करता है। मतलब वह एक नई जनरेशन है। अगर सरकार और सरकार की लीडरशिप इस नई जनरेशन के एस्पिरेशन को समझने में विफल हो गई तो बहुत बड़ी गैप हो जाएगी। आपने देखा होगा कोविड में मैं बार-बार चिंतित था कि मेरे यह फर्स्ट टाइम वोटर जो अभी हैं, वह कोविड के समय में 14-15 साल के थे अगर यह चार दीवारों में फंसे रहेंगे तो इनका बचपन मर जाएगा। उनकी जवानी आएगी नहीं। वह बचपन से सीधे बुढ़ापे में चला जाएगा। यह गैप कौन भरेगा? तो मैं उसके लिए चिंतित था। मैं उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात करता था। मैं उनको समझाता था का आप यह करिए। और इसलिए हमने डेटा एकदम सस्ता कर दिया। उस समय मेरा डेटा सस्ता करने के पीछे लॉजिक था। वह ईजिली इंटरनेट का उपयोग करते हुए नई दुनिया की तरफ मुड़े और वह हुआ। उसका हमें बेनिफिट हुआ है। भारत ने कोविड की मुसीबतों को अवसर में पलटने में बहुत बड़ा रोल किया है और आज जो डिजिटल रिवॉल्यूशन आया है, फिनटेक का जो रिवॉल्यूशन आया है, वह हमने आपत्ति को अवसर में पलटा उसके कारण आया है तो मैं टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को समझता हूं। मैं टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना चाहता हूं।

प्रधानमंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपने हमें समय दिया।

नमस्कार भैया, मेरी भी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आप भी बहुत प्रगति करें और देश को सही जानकारियां देते रहें।