प्रधानमंत्री ने 3050 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
" डबल इंजन सरकार गुजरात में तेजी से और समावेशी विकास की गौरवशाली परंपरा को ईमानदारी से आगे बढ़ा रही है"
"सरकार ने गरीबों के कल्याण और गरीबों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने पर अत्यधिक जोर दिया है"
" हर गरीब, चाहे कितना ही दुर्गम क्षेत्र में रहने वाला हर आदिवासी हो, स्वच्छ पानी का हकदार है"
"हम सरकार में रहने को सेवा के अवसर के रूप में देखते हैं"
"हम प्रतिबद्ध हैं कि पुरानी पीढ़ी के सामने आने वाली समस्याओं का सामना हमारी नई पीढ़ी को नहीं करना पड़े"

भारत माता की - जय, भारत माता की - जय, भारत माता की - जय, गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मृदु एव मक्कम श्री भूपेंद्र भाई पटेल, संसद में मेरे वरिष्ठ सहयोगी और नवसारी के ही सांसद और आप लोगों ने पिछले चुनाव में हिन्दुस्तान में सबसे ज्यादा वोट देकर के जिनको विजयी बनाया और देश में नवसारी का नाम रोशन किया ऐसे आप सबके प्रतिनिधि श्री सीआर पाटिल, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी बहन दर्शना जी, भारत सरकार के सभी मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण, राज्य सरकार के सभी मंत्रीगण और भारी संख्या में यहां आए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों!
आज गुजरात गौरव अभियान में मुझे एक बात का विशेष गौरव हो रहा है और वो गौरव इस बात का हो रहा है। कि मैंने इतने साल मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। लेकिन कभी भी आदिवासी क्षेत्र में इतना बड़ा कार्यक्रम मेरे नसीब नहीं हुआ था। आज मुझे गर्व इस बात का हो रहा है। कि गुजरात छोड़ने के बाद जिन-जिन लोगों ने गुजरात को संभालने का दायित्व निभाया। और आज भूपेंद्र भाई और सीआर की जोड़ी जिस उमंग और उत्साह के साथ नया विश्वास जगा रही है। उसी का परिणाम है कि आज मेरे सामने पांच लाख से भी अधिक लोग इतना बडा विशाल। मुझे गर्व इस बात का होता है कि जो मेरे कालखंड में मैं नहीं कर पाया था। वो आज मेरे साथी कर पा रहे हैं, और आपका प्यार बढ़ता ही जा रहा है। और इसलिए मुझे सर्वाति गर्व हो रहा है। नवसारी की इस पावन धरती से मैं उनाई माता मंदिर को शीश झुकाकर प्रणाम करता हूं! आदिवासी सामर्थ्य और संकल्पों की इस भूमि पर गुजरात गौरव अभियान का हिस्सा बनना ये भी मेरे लिए अपने आप में गौरवपूर्ण बात है। गुजरात का गौरव बीते 2 दशक में जो तेज़ विकास हुआ है, सबका विकास है और इस विकास से पैदा हुई नई आकांक्षाएं है। इसी गौरवशाली परंपरा को डबल इंजन की सरकार ईमानदारी से आगे बढ़ा रही है। आज मुझे 3 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण, शिलान्यास और भूमिपूजन करने का अवसर मिला है। मैं भूपेंद्र भाई का, राज्य सरकार का आभारी हूं। के ऐसे इस पवित्र कार्य में जुड़ने के लिए आपने मुझे निमंत्रित किया है। ये सारे प्रोजेक्ट्स नवसारी, तापी, सूरत, वलसाड सहित दक्षिण गुजरात के करोड़ों साथियों का जीवन आसान बनाएंगे। बिजली, पानी, सड़क,स्वास्थ्य, शिक्षा और हर प्रकार की कनेक्टिविटी, इसके ये प्रोजेक्ट्स और वो भी विशेष रूप से हमारे आदिवासी क्षेत्र में हो तब तो वो सुविधा, रोज़गार के नए अवसरों से जोड़ेंगे। इन सारी विकास योजनाओं के लिए मैं आज इस क्षेत्र मेरे सभी भाई-बहनों को और पूरे गुजरात को बहुत-बहुत बधाई देता हूं!

भाइयों और बहनों,

8 साल पहले आपने अनेक-अनेक आर्शीवाद देकर के बहुत सारी उम्मीदों के साथ मुझे राष्ट्र सेवा की अपनी भूमिका को विस्तार देने के लिए आपने मुझे दिल्ली भेजा था। बीते 8 सालों में हमने विकास के सपने और आकांक्षाओं से करोड़ों नए लोगों, अनेकों नए क्षेत्रों को जोड़ने में सफलता प्राप्त की है। हमारा गरीब, हमारा दलित, वंचित, पिछड़ा, आदिवासी, महिलाएं ये सभी अपना पूरा जीवन मूल ज़रूरतों को पूरा करने में ही बिता देते थे, ऐसे कालखंड थे। आज़ादी के इस लंबे कालखंड तक जिन्होंने सबसे अधिक सरकार चलाई, उन्होंने विकास को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया। जिस क्षेत्र, जिन वर्गों को इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत थी, वहां उन्होंने विकास किया ही नहीं क्योंकि ये काम करने के लिए जरा मेहनत ज्यादा पड़ती है। पक्की सड़कों से जो सबसे अधिक वंचित थे, वो गांव थे, हमारे आदिवासी क्षेत्र के। जिन गरीब परिवारों को 8 साल में पक्का आवास मिला, बिजली मिली, शौचालय मिला और गैस कनेक्शन मिले, उनमें से अधिकतर मेरे आदिवासी भाई-बहन, मेरे दलित भाई-बहन, मेरे पिछड़े परिवार के लोग थे। शुद्ध पीने के पानी से वंचित सबसे अधिक हमारे गांव थे, हमारे गरीब थे, हमारे आदिवासी बहन-भाई थे। टीकाकरण का अभियान चलता था, तो गांव, गरीब और आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंचने में बरसों लग जाते थे। शहर में तो पहुंच जाता था। टीवी में अखबारों में जय-जयकार भी हो जाता था। लेकिन दूर सुदूर जंगल रह जाते थे। जरा, मुझे गुजरात के भाईयों बताईए आपका वेकसीन हो गया ? टीकाकरण हो गया, हाथ उपर करीए, सबको मुफ्त में हुआ कि नहीं हुआ? पैसे देने पड़े? दूर-सुदूर जंगलों की चिंता ये हम सबके संस्कारों में है।

साथियों,

बैंकिंग सेवाओं का सबसे अधिक अभाव भी गांव और आदिवासी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा था। बीते 8 वर्षों में

सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर चलते हुए हमारी सरकार ने गरीब को मूलभूत सुविधाएं देने पर, गरीब के कल्याण पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।

साथियों,

गरीब को सशक्त करने के लिए अब हमारी सरकार ने शत-प्रतिशत सशक्तिकरण अभियान शुरू किया है। कोई भी गरीब, कोई भी आदिवासी किसी योजना के लाभ से छूटे नहीं, जो योजना उसके लिए बनाई गई है, उसका लाभ उसे जरूर मिले, अब दिशा में हमारी सरकार तेज गति से काम कर रही है।

साथियों,

यहां मंच पर आने से पहले और मुझे यहां आने में जरा विलंब भी हुआ क्योंकि मैं कुछ देर पहले इसी हमारे क्षेत्र के आदिवासी भाई-बहनों से उनके सुख दुख की बातें सुन रहा था। उनके साथ पूछताछ कर रहा था। सरकार की योजना के संबंध में जो लाभार्थी हैं उनकों उससे क्या लाभ मिला, मैं समझने का प्रयास कर रहा था। जब जनता जर्नादन से इस तरह संपर्क होता है। तो विकास के लिए समर्थन उतना ही बढ़ता है। गुजरात की डबल इंजन की सरकार, शत-प्रतिशत सशक्तिकरण के अभियान में पूरी ताकत से जुटी है। मैं भूपेंद्र भाई, सी आर पाटिल और उनकी पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

आज जब बहुत लंबे समय के बाद चिखली आया हुं, तब स्वाभाविक है कि सारी यादें ताजा हो। कितने सारे सालों का मेरा आपके साथ रिश्ता। और जिस तरह उन दिनों हमारे पास कोई यातायात का साधन नहीं था। यहाँ आयें, बस में से उतरकर कंधे पर थेला लटाकर आते हो, और यहां अनेक परिवार, अनेक गाँव, मुझे याद नहीं आता कि, मैं इतने सालों तक आपके बीच में रहा, और कभी भी मुझे भूखा रहने की नौबत आई हो। यह प्यार, यह आर्शिवाद यह मेरी शक्ति है। आदिवासी भाईयों के बीच काम करने का अवसर मिला। उससे ज्यादा उनके पास से मुझे सिखने का अवसर मिला। सुघडता, स्वच्छता, अनुशासन, हम डांग के जिले में जाते हो, या आदिवासी विस्तार में जाते हो, सुबह हो, शाम हो, या रात होने की तैयारी हो। सब एक लाइन में ही चलते है। एक-दूसरे के पीछे ही चलते है। और ऐसे ही नहीं यह बहुत ही समझदारी पूर्वक उनकी जीवन रचना है। आज आदिवासी समाज एक सामुदायिक जीवन, आदर्शो को आत्मसात करने वाला, पर्यावरण की रक्षण करनेवाला ऐसा अपना यह समाज है। यहाँ सबने कहा कि, आज की यह 3 हजार करोड की योजनाएँ, मुझे याद है कि एक जमाना था।

गुजरात में भूतकाल में एक ऐसे मुख्यमंत्री थे इस विस्तार के, आदिवासी विस्तार के उनके खुद के गाँव में पानी की टंकी नहीं थी। हेन्डपंप लगाए, तो वह भी बारह महीनें में सूख जाता था। उसके वायसर में काट लग जाती थी, यह सबको पता है। गुजरात में जिम्मेवारी ली, और उनके गाँव में टंकी बनाई। एक जमाना ऐसा था कि, गुजरात में गुजरात के एक मुख्यमंत्री ने जामनगर में एक टंकी बनाई थी पानी की । उस पानी की टंकी का उदघाटन किया था। और गुजरात के अखबारों में पहले पन्ने पर बडी-बडी तसवीरें छपी थी, कि मुख्यमंत्री ने पानी की टंकी का उदघाटन किया। ऐसे दिन गुजरात ने देखे हैं। आज मुझे गर्व होता है, कि मैं आदिवासी विस्तार में 3 हजार करोड रुपियें के कामों का उदघाटन कर रहा हुं। और अपने यहाँ तो कोई भी काम करो, तो कितने लोग शुरु हो जाते है, कि चुनाव आए, तो काम हो रहा है, चुनाव आए, तो काम हो रहा है। हमारे कार्यकाल में एक सप्ताह कोई ऐसा ढुंढ के लाऐं, य़ह मेरी चुनौती है।

मुझे सरकार के अंदर लगभग 22-23 वर्ष हो गये। एक सप्ताह तो ढुंढ लाएं कि, जिस सप्ताह में विकास का कोई काम न हुआ हो। ऐसा एक भी सप्ताह नही मिलेगा। परंतु कितने गलती ढूंढनेवालों को ऐसा लगता है कि चुनाव है, इसलिए यह हो रहा है। इसलिए मुझे यह कहना पड रहा है कि, 2018 में य़ह विस्तार को पानी देने के लिए इतनी बडी योजना लेकर जब मैं आया था यहाँ, तब यहाँ कितने लोगों ने कहा कि, थोडे समय के बाद 2019 के चुनाव आनेवाले है। इसलिए मोदी साहब यहाँ आकर आम-ईमली दिखा रहे है। आज मुझे गर्व हो रहा है कि, वह लोग झूठे निकले। और आज पानी पहुँचा दिया। किसी को गले नहीं उतरता था, भाई गिरते हुए पानी को सिर पर चढाने की बात। सी.आर. ने भी कि, भूपेन्द्रभाई ने भी की। तीन-चार फूट का ढाल होता है, यह तो 200 मालें का ऊंचा पहाड चढना है। और तल में से पानी निकालकर पहाड की चोटी पर ले जाना। और वह भी जो चुनाव जीतने के लिए करना हो तो, कोई 200-300 वोट के लिए इतनी महेनत न करें। वह तो दूसरी किसी चीजों पर करेगा। हमें चुनाव जीतने के लिए नहीं, हम तो इस देश के लोगों का भला करने के लिए निकले हैं। चुनाव तो लोग हमें जीताते है। लोगों के आर्शिवाद से हम बैठते है। ऐर-ऐस्टोल प्रोजेक्ट ईन्जीनियरींग कि दुनिया में, सुरेन्द्रनगर जिले में ढांकी का काम और मैं तो एन्जीनियरींग युनिवर्सिटी और कोलेजों को टेक्निकल विधार्थीयों को कहुँगा। ढांकी में हमने जो नर्मदा का पानी चढाया है, उसी तरह हमनें यहाँ जिस तरह पानी चढाया है, इसका ईन्जीनियरींग कोलेज के विधार्थीयों को अभ्यास करना चाहिए। प्रोफेसर्स को आना चाहिए, किस तरह पहाडों में उतार-चढाव, उतार-चढाव और हिसाब-किताब, इतने उपर जायेंगे फिर पानी में इतना प्रेसर आएगा। फिर यहाँ पंप लगाएंगे तो पानी इतने ऊपर जायेगा। यह एक बडा काम हुआ है। और अपने यहाँ, मैं यहाँ धरमपुर के अनेक विस्तारों में रहा हूं। सापुतारा में रहा हूँ। हंमेशा के लिए अनुभव किया, बारीश खूब गिरे, लेकिन पानी हमारे नसीब में नहीं था, पानी बह जाता था।

हमने पहली बार निर्णय लिया कि, हमारे जंगलो में ऊँची पहाडीयों पर रहते, दूर-दूर रहते हमारे आदिवासी भाईयों हो, कि जंगल विस्तार में रहते अन्य समाज के भाई हो। उन्हें पानी मिलने का हक है। पीने का शुद्ध पानी प्राप्त करने का हक है। और उनके लिए हमने यह इतना बडा अभियान चलाया। यह चुनाव के लिए अभियान नहीं है। और हम कहते थे कि, जिसका शिलान्यास हम करते है, उसका लोकार्पण भी हम ही करते है। और आज मेरा सौभाग्य है, कि यह काम भी मेरे नसीब में आया है। यह कमिटमेन्ट है, लोगों के लिए जीना, लोगों के लिए जलना, राजकीय उतार-चढाव के अंदर समय बर्बाद करने वाले हम नहीं हैं। हम सत्ता में बैठना सिर्फ और सिर्फ सेवा करने का एक अवसर समझते है। जनता-जर्नादन का अच्छा करने का सोचते है। कोविड की आफत पूरे दुनिया में आई। परंतु इतने सारे वैक्सीनेशन के डोज देनेवाला एकमात्र देश हो तो वह हिन्दुस्तान है। 200 करोड डोज। आज सांडलपोर, खेरगाम, रुमला, मांडवी। पानी आता है तो कितनी बडीं ताकत आती है भाईयों, और आज कितने सारे शिलान्यास के काम हुए है। 11 लाख से ज्यादा लोगों को अनेक मुसीबतों में से मुक्ति मिले ऐसा काम आज किया है। हमारा जेसिंगपुरा हो कि, हमारा नारणपुरा हो, कि सोनगढ हो, यह पानी सप्लाई कि जो योजनाएँ, उसका जो उपयोग उसका जो भूमिपूजन हुआ है इसलिए क्योंकि, इस विस्तार के भी 14 लाख से ज्यादा लोगों के जीवन को पानीदार बनाना है। दोस्तों, जल जीवन मिशन अंतर्गत अपने यहाँ गुजरात में तो आपको याद होगा, जो लोग 20 वर्ष के हुए होंगे उनको ज्यादा पता नहीं होगा, 25 वर्ष वालों को भी ज्यादा पता नहीं होगा।

उससे बडें है उनको पता होगा। उन सबने कैसे दिन निकाले है। अपने बाप-दादा ने कैसे दिन निकाले है। लेकिन अपने बाप-दादा को जिस मुसीबत में जीना प़डा था, मुझे नई पीढी को ऐसी कोई मुसीबत में जीने नहीं देना। उनको सुख का जीवन मिले, प्रगतिभरा जीवन मिले। अपने भूतकाल में पानी की मांग उठे तो ज्यादा से ज्यादा क्या करे, विधायक आकर हेन्डपंप लगाए और उसका उदघाटन करे। और छ महिने में तो हेन्डपंप में से हवा आए, लेकिन पानी ना आए। ऐसा ही हो रहा है ना ? चलाते, चलाते थक जाएं लेकिन पानी नहीं निकले। आज हम नल से जल दे रहे हैं। मुझे याद है, पूरे उमरगाम से अंबाजी इतना बडा हमारा आदिवासी बेल्ट, और इसमें उच्चवर्ग के समाज भी रहे, ओबीसी समाज भी रहे, आदिवासी समाज भी रहे। और यहाँ भी तेजस्वी बच्चे पैदा हो, यहां भी ओजस्वी पुत्र-पुत्रीयाँ हो, परंतु एक भी विज्ञान की स्कुल नहीं थी भाईयों। और कक्षा बारह की विज्ञान की स्कुल ना हो। और मेडिकल और ईन्जीनियरींग कोलेज का भाषण करें, उससे कोई भला हो भाई ? यह मुझे याद है, 2001 में आने के बाद मैंने पहला काम किया। यहाँ पर विज्ञान की स्कुलें बनाई। तो मेरे आदिवासी बच्चे ईन्जीनियर बने, डोक्टर बने। और आज मुझे गर्व है, विज्ञान के स्कुलों से शुरु किया हुआ काम, आज मेडिकल और ईन्जीनियरींग कोलेज बन रही है। आज आदिवासी विस्तार में युनिवर्सिटीयां बन रही है। गोविंदगुरु के नाम से युनिवर्सिटी, बिरसा मुंडा के नाम से युनिवर्सिटी, आदिवासी विस्तार में युनिवर्सिटी।

भाईयों, प्रगति करना हो, विकास करना हो तो दूर-सुदूर जंगलों में भी जाना पडता है। और यह काम हमने लिया है। लाखों लोगो का जीवन बदलने का हमारा आयोजन है। स़डक हो, घर तक ओप्टीकल फाईबर पहुँचाने कि बात हो। आज नवसारी और डांग जिले में सबसे ज्यादा उसका लाभ मिल रहा है। मुझे डांग जिलें को खास बधाई देनी है, और दक्षिण गुजरात को भी बधाई देनी है। डांग जिलें ने ओर्गेनिक खेती का जो बीडा उठाया है, नेचरल फार्मिंग में डांग जिले ने जो कमाल किया है। उसके लिए मैं बधाई देता हूँ। आज नवसारी में 500 करोड रुपये से भी ज्यादा किमत का होस्पिटल और मेडिकल कोलेज, 10 लाख से ज्य़ादा लोगों को इसका लाभ मिलने वाला है। आदिवासी भाईयों-बहनों का भविष्य उज्जवल बने, आदिवासी बच्चें को अब डोक्टर बनना हो, ओबीसी माता-पिता के पुत्र को, पिछडें वर्ग के माता-पिता के पुत्र को डोक्टर बनना हो, हडपति समाज के पुत्र को डोक्टर बनना हो, तो उसको अंग्रेजी पढने की जरुरत नहीं है। उसकी मातृभाषा में भी पढाकर हम डोक्टर बनाएंगे। भाईयों जब मैं गुजरात में था, तब हमने वनबंधु योजना शुरु की थी। आज वनबंधु कल्याण योजना का चौथा चरण हमारे भूपेन्द्रभाई के नेतृत्व में चल रहा है। और 14 हजार करोड रुपिया, भाईयों विकास कैसे आगे पहुंचता है उसका यह उदाहरण है। यह काम भूपेन्द्रभाई सरकार के नेतृत्व में हो रहा है। भाईयो-बहनों अनेक क्षेत्र ऐसे है। हमारे आदिवासी छोटे-छोटे भाईयों-बहनों, मुझे याद है मैंने यहाँ वाडी प्रोजेक्ट शुरु किया था। वलसाड के बगल में। इस वाडी प्रोजेक्ट को देखने के लिए, हमारे अब्दुल कलाम जी भारत के राष्ट्रपति थे।

उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया नहीं था, और यहाँ आकर वाडी विस्तार में पूरा एक दिन बिताया था। और वाडी प्रोजेक्ट क्या है ? उसका अध्ययन कर मुझे आकर कहा था कि, मोदीजी आप सचमुच में गाँव के लोगों की जिंदगी बदलनें का मूल काम कर रहे हो। और वाडी प्रोजेक्ट मेरे आदिवासियों कि आधा एकर जमीन, खड्डे-टेकरे वाली जमीन हो, एकदम छोटी जमीन हो, कुछ उगता ना हो, सभी हमारी आदिवासी बहनें मेहनत करती हो। और हमारे आदिवासी भाई तो शाम को जरा मौज में हो, और फिर भी वाडी के अंदर आज काजु की खेती करता हो मेरा आदिवासी। यह काम यहाँ हुआ है। भाईयो-बहनों, विकास सर्वांगी हो, विकास सर्वस्पर्शी हो, विकास सर्वदूर हो, विकास सभी क्षेत्रों को छुने वाला हो। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। और ऐसे अनेक काम आज गुजरात कि धरती पर हो रहे है। तब फिर से एकबार आप सबने इतनी बडी संख्या में आकर आर्शिवाद दिया, यह द्रश्य भाईयों आपके लिए काम करने की मुझे ताकत देता है। यह माता-बहनों का आर्शिवाद ही, आपके लिए दोडने की ताकत देता है। और इस ताकत के बदोलत ही हमें गुजरात को भी आगे ले जाना है, और हिन्दुस्तान को भी आगे ले जाना है। फिर से एकबार आप सबके आर्शिवाद के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। बडी संख्या में आकर आर्शिवाद दिया, उसके लिए धन्यवाद। मैं राज्य सरकार को भी बधाई देता हुँ कि,ऐसे प्रोगेसिव काम, समयबध्ध काम और समाज के अंतिम छोर तक रहनेवाले के पास पहुंचने काम उनके द्वारा हो रहा है। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामना। भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

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परिणामों की सूची: 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा
July 02, 2026
Sl. No.OutcomeDescription
1. India-Japan Joint Declaration on Economic Security Promotes project-based collaboration for enhancing joint resilience in key sectors including semiconductors, critical minerals, information and communication technology including AI, clean energy and pharmaceuticals. India-Japan Fact Sheet 2.0 captures growing India-Japan G2G and B2B engagement in this crucial area.
2. India-Japan Joint Statement on Cooperation in the Field of Artificial Intelligence Elevates the India-Japan relationship to a strategic research and development partnership in the AI domain. Building on the India-Japan AI Initiative, the Joint Statement provides a roadmap for greater cooperation across the entire AI technology stack in pursuit of the shared vision of safe, secure, trusted, inclusive, and human-centric AI.
3 Joint Statement on Energy Resilience (between MoPNG and METI, Japan) Strengthens cooperation in strategic stockpiling and reserve mechanisms for crude oil and petroleum products. Promotes collaboration in joint investments across the maritime energy transport value chain.
4. Celebrating the 75th Anniversary of India-Japan Diplomatic Relations Outlines a series of commemorative events to celebrate 2027, the 75th anniversary of establishment of diplomatic relations, as the India-Japan Year of Shared Horizons
5. Memorandum of Cooperation for India-Japan Cooperative Biogas for Growth (CBG) Initiative Promotes cooperation towards the goal of establishing 1,000 biogas and organic fertilizer plants all across India, leveraging the extensive network of dairy cooperatives.
6. Memorandum of Cooperation in the Field of Batteries Promotes cooperation in battery-related projects and expands business opportunities with an aim of building a trusted, resilient and sustainable battery supply chain.
7. Memorandum of Cooperation in the Field of Pharmaceuticals and Medical Devices Sector Strengthens pharma supply chains, including in Active Pharmaceutical Ingredients (APIs) and Key Starting Materials (KSMs), through promotion of bilateral investment and business linkages, technical collaboration and industry-academia collaboration.
8. Memorandum of Cooperation in the Field of Geology and Mineral Exploration Strengthens cooperation in upstream critical minerals exploration through exchange of technical expertise.
9. Memorandum of Cooperation between IndiaAI Mission and Ministry of Economy, Trade and Industry (METI), Japan Promotes institutional cooperation between IndiaAI Mission and Japan’s GENIAC initiative – through B2B matchmaking, webinars on AI policies and challenges and support for joint projects through access to computing resources
10. Memorandum of Cooperation on Next Generation Mobility Partnership (NGMP) Establishes a framework for operationalizing the Next Generation Mobility Partnership (NGMP) which was announced at the 15th Annual Summit in August 2025. The NGMP would accelerate private sector-led cooperation and investment in mobility sectors including rail, automotive and road infrastructure, aviation, shipbuilding and ports, logistics, and urban development, positioning India as a hub for “Make in India for the World” exports to third countries.
11. Memorandum of Understanding between India’s Centre for Cellular and Molecular Platforms (C-CAMP) and RIKEN, Japan Establishes a framework for academic, translational research and start-up oriented innovation in deep-tech and life sciences, covering healthcare, agriculture and environment.
12. Memorandum of Understanding between National Center for Biological Sciences-Tata Institute of Fundamental Research and RIKEN, Japan Creates a framework for cooperation in basic biological and neuroscience research between the two leading research institutions
13. Memorandum of Understanding between IIT Bombay, BharatGen Technology Foundation and National Institute of Informatics, Japan Furthers collaboration on large language models (LLMs), with a focus on developing LLMs for enhanced scientific reasoning, through joint research exchanges
14. Memorandum of Understanding between SarvamAI and Preferred Network on LLM Development Creates a framework for cooperation across the full AI technology stack, including foundation models.
15. Memorandum of Understanding Between National Internet Exchange of India (NIXI) and Japan Network Information Center (JPNIC) Promotes cooperation in National Internet Registry operations, IPv6 adoption, internet security improvements, capacity building, student/professional exchanges and exchange of views on internet governance at regional and global forums.
16. Exchange of Letters Between International Financial Services Centres Authority (IFSCA) and Financial Services Agency, Japan (JFSA) Establishes a framework for cooperation in development, regulation and supervision of financial services as well as information exchange on financial-market trends and best practices, particularly in FinTech and RegTech.