मंच पर विराजमान मंत्रिपरिषद के मेरे सभी साथी,

मंच पर उपस्थित सभी महानुभाव,

दुनिया के भिन्‍न-भिन्‍न देशों से आये हुए प्रतिनिधि बंधु,

मैं Department के सभी साथियों को बधाई देता हूं इस कार्यक्रम की रचना करने के लिए क्‍योंकि बहुत वर्षों से हम एक बात सुनते आये हैं और उसका हमारे मन पर प्रभाव भी बहुत रहा है। हर जगह पर हम सुनते थे एक शब्‍द, Brain Drain. और आलोचना भी होती रहती थी कि ये देश का क्‍या होगा Brain Drain का, ऐसी आलोचना होती थी। और आज से 15-20 साल पहले शायद यहां बैठे हुए लोगों ने बहुत सारी चिंता व्‍यक्‍त की होगी। वो एक Mind Set था हमारा, लेकिन आज Brain Drain से Brain Gain तक की यात्रा है यह हमारी यात्रा आई है। अब Brain Drain से बाहर निकल करके, उस सोच से बाहर निकल करके, Brain Gain के लिए हमारी क्‍या Strategy होनी चाहिए उसको हमने सोचना चाहिए।

और इसलिए कोशिश यह है कि अब वो... हम लोगों ने चिंता करने की जरूरत नहीं है पांच 50 लोग दुनिया में पहुंचेंगे तो यहां खाली हो जाएगा। यह बहुरत्‍ना वसुंधरा है, कोई कमी पड़ने वाली नहीं है, Talented Manpower की कभी कमी नहीं पड़ने वाली है। दूसरी बात है, भारत ने अपनी शक्ति और सामर्थ्‍य का लेखा-जोखा लेना चाहिए। और वो भी global prospective में लेना चाहिए। और आज अगर global prospective में देखें तो भारत की सबसे बड़ी शक्ति है भारत का human resource, हमारा Manpower. यह हमारी सबसे बड़ी ताकत है। और अगर ये हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है, तो हमारे विकास की यात्रा के केंद्र बिंदु में इस विचार को प्राथमिकता देनी चाहिए कि जिस देश के पास 65 percent population 35 से नीचे हो, और आने वाले दिनों में यह एवरेज और कम होने वाली है। भारत आने वाले दिनों में अधिक युवा होने वाला है। अगर यह हमारी संपत्ति है तो संपत्ति को ध्‍यान में रख करके, हमारी विकास यात्रा की Model को हमने तैयार करना चाहिए।

और अगर उसको तैयार करना है तो हमने Globally भी देखना चाहिए कि नहीं दुनिया की क्‍या स्थिति है। कितना ही Development किया होगा, Technology की नई-नई ऊंचाईयों को पार किया होगा, उसके बाद भी विश्‍व का बहुत एक हिस्‍सा ऐसा होगा, आने वाले दिनों में - जो Manpower के बिना एक प्रकार से Handicap हो सकता है। अभी जैसे त्रेहान जी बता रहे थे कि अगर हम Sport System खड़ी न करें तो दुनिया के कई देशों का Health Sector ही Collapse कर जाएगा। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम लोगों के पास ये सामर्थ्‍य है। अब इसको Scientific ढंग से हम आगे कैसे बढ़ाएं?

भारत में व्‍यक्तिगत संबंधों के कारण कोई Middle east में चले गये होंगे, वहां कोई मजदूरी शुरू की होगी। कोई पांच लोग पहले गये होंगे, कोई 50 को ले गये होंगे। फिर एक जिले के ज्‍यादा लोग उसी देश में चले जाते होंगे वो परंपरा चली होगी। लेकिन इस बात को institutionalized करके इस सेक्‍टर में काम करने वाले सब लोगों का सहयोग ले करके, सरकार के सभी Department को भी coordinate करते हुए एक Road map बना करके उसमें सबका Involvement कैसे हो, हमारा destination क्‍या हो, हमारी way and means क्‍या हो, इन सारे विषयों में जब तक हम वैज्ञानिक तरीके से आगे नहीं बढ़ेंगे एक Perfect Mechanism खड़ा नहीं करेंगे, तो इतनी बड़ी संपदा होने के बावजूद भी उधर लोग workforce के लिए तरसते होंगे और इधर हम काम न देने के कारण तक परेशान रहते होंगे। और इसलिए समय रहते हम global requirement को ध्‍यान में रखते हुए अपनी कार्य योजना को करना चाहिए। उसी दिशा का यह महत्‍वपूर्ण एक प्रयास है कि जिसमें दुनिया के देश के लोगों से मिले, बैठे बात करें। सार्क देशों ने उसे विशेष रूप से उसमें योगदान दिया है। अब मिल बैठकर हम किसकी क्‍या आवश्‍यकता है, उसको सोचे, समझें और उसकी दिशा में हमारा जाने का प्रयास है।

एक तो हमें एक काम की प्रयास करना है - और मैं चाहूंगा उसमें राज्‍य सरकारें हो सकती हैं, Private कंपनियां, फिल्‍म में काम करने वाले लोग भी हो सकते हैं, भारत सरकार भी हो सकती है - सब मिल करके काम करें। हिंदुस्‍तान में भी हमारे पास, जो भी workforce है उसमें भी अलग-अलग इलाके की, अलग-अलग ताकत है। अलग-अलग विशेषताएं हैं। जो काम कर्नाटक की तरफ नौजवान कर सकता होगा, संभव है कि असम का नौजवान उस प्रकार से काम नहीं कर पाएगा। लेकिन जो काम असम का नौजवान कर पाएगा वो शायद कर्नाटक का नहीं कर पाएगा। तो भारत इतना विशाल है हमारे यहां जो मानव संपदा है उसकी शक्तियों में भी अनेक विविधताएं भरी पड़ी हुईं हैं।

हमारा काम होगा कि हम इस प्रकार की शक्तियों का Mapping करें। अब देखा होगा हमने Sports - हमें मालूम है कि कुछ ही इलाके से Sportsmen मिलते हैं हमें, सब जगह से नहीं मिलते। इसका मतलब ये नहीं कि हर जगह खेल नहीं चल रहा है, स्‍कूल में तो खेल हर कोई खेलता है तो एक-एक भू-भाग विशेषता बनी होती है। आप देखें होंगे Mathematics में अच्‍छे Student कुछ ही इलाके होंगे जहां पर Best quality Mathematics Student मिलते होंगे, तो एक Traditional develop हुई होगी। हमने, हमारे पास जो ये मानव संपदा है उस मानव संपदा का किस भू-भाग में किस प्रकार का का स्‍वभाव है, जरूरी नहीं है एक प्रकार का होगा, अनेक प्रकार का होगा, उसमें Priority हम तय करेंगे, फिर फोकस वही करना चाहिए, ये जरूरी नहीं है कि हर प्रकार की Talent हर प्रकार के Scale हिंदुस्‍तान के हर कोने में develop हो - आवश्‍यक नहीं है। मान लीजिए हमने एक State को दो Skill के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण माना और उसी को Center for Excellence खड़ा किया। और हिंदुस्‍तान भर में जिसको उसमें रूचि हो उसको वहां ले गये और वहां जो लोग तैयार हों, उनको दुनिया में जहां जरूरी है Export किया, तो आप देखिए हम कितना Qualitative अपने काम को हम Improve कर सकते हैं। इसलिए एक महत्‍वपूर्ण काम है हमारा अपना Mapping.

दूसरा महत्‍वपूर्ण काम है Human Resource Development. जब तक हम हमारे Manpower को तैयार नहीं करते... मान लीजिए हमारे यहाँ एक Carpenter है, इस Carpenter को U.A.E में काम मिल रहा है। अगर कोई एक यहां छोटी सी भी Institute हो, Private हो, जैसे कोचिंग क्‍लासेस चलते हों। अगर कहीं पर एक कोचिंग क्‍लासेस चलाता है, Private अपना, कि वो 25-25 ऐसे युवकों को जिस देश में जाने वाला है वहां की Manner क्‍या होती है, खान-पान क्‍या होता है, वहां के 50 ऐसे वाक्‍य याद कर ले तो क्‍या अर्थ होता है। अगर आपने इसको इस प्रकार से भी Soft Skill Develop किया तो उसके बाद जो real strength है उसके प्‍लस Soft Skill हो गई तो उसका value addition कितना हो जाएगा? मान लीजिए आप उसको भेज रहे हैं लेकिन वो देश Technological Advance है, तो हमारी पुरानी पद्धति में उसको जो भी आता है.. हो सकता है, वो वहां मकान बनाने के लिए गया लेकिन Deign मिलेगी, ईमेल से आएगी Deign तो उसको फिर Computer Reading आता है या नहीं आता है, वो Deign को समझ सके.. उसको Value Addition कैसे हो? अगर हम उसकी दिशा में हम अगर थोड़ा भी करें...

आज दुनिया में हमारी नर्सिंग की मांग है। हमारी नर्सिंग रूटीन में हमारे यहां जो पढ़ाई होती है, वहां से जाती है पढ़ाई करती हैं, और बड़ी प्रतिष्‍ठा पाई हैं। लेकिन क्‍या हम भी रिसर्च कर सकते हैं कि और अधिक Value Addition क्‍या हो सकता ?है और कौन सी चीजें जोड़ी जा सकती है? उस दिशा हम प्रयास करें। मान लीजिए हम तय करें कि भाई इस प्रकार से जाने वालों के लिए हम Language class चलाएंगे। इन language class की हमें Double benefit हो सकते हैं। हिंदुस्‍तान में हमें अगर Tourism बढ़ाना है और हमारे पास इस प्रकार के language classes हैं, तो कुछ लोग विदेश जाएंगे, लेकिन जो यहां रहेंगे वो language जानते होंगे तो Tourist के समय जब जरूरत पड़ेंगी तो हमें वो काम आएगा। एक प्रकार से वो अनेक क्षेत्रों में काम आ सकता है।

मेरा कहने का तात्‍पर्य यह है कि जब तक हम within India हमारी जो ताकत है, उसको वैज्ञानिक तरीके से नापना, नाप करके उसको और अधिक Develop करना, यह एक आवश्‍यक काम मुझे लगता है।

दूसरा Globally भी हमने Target करना चाहिए। भारत को एक लाभ है - अंग्रेजी language का। लेकिन हमने पूरे दुनिया का हिसाब-किताब लगाया। एक उन देशों में कुछ चीजें अनिवार्य हैं, और ये उनके बस की ताकत नहीं है। किस देश में वो कौन सी चीजें हैं? और अगर हम उसको Target करके उनकी अनिवार्यता, उनकी मुसीबत जो है उसको अगर identify करते हैं और फिर हमारे यहां काम करते हैं, Immediate आपको मार्केट मिल सकता है। तुरंत उनको Requirement होगी अगर मान लीजिए कोई जगह पर पता है कि वहां Health Sector में उनके यहां Develop ही संभव नहीं है, आने वाले 25 साल तक संभव नहीं है, Ok, हम उस देश में Health Sector के लिए ही Focus करेंगे। देखिए एक दम से आपको काम मिलना शुरू हो जाता है।

इसलिए दुनिया के किस देश में अनिवार्यता है? और वहां पर सबसे ज्यादा deficiency हो, उस area में हम हमारे देश में तैयारी करके enter कर सकते हैं क्या? उनका भी भला होगा, हमारा भी भला होगा।

दूसरा part है कि वहां establish चीजें हैं लेकिन cost is a problem, work force is a problem. तो फिर हमारा काम रहता है कि हम उसको address करें और उसको address करने के लिए हम किस प्रकार की तैयारी करें? हम जितनी ज्यादा मात्रा में हमारे man power को value addition करके यहां से भेजेंगे और targeted काम के लिए भेजेंगे, हम बहुत बड़ा contribution global economy में भी कर सकते हैं। और of course भारत के नौजवानों को रोजगार मिलेगा तो भारत की economy को तो लाभ होना ही होना है और उसका फायदा होगा।

कई क्षेत्र ऐसे हैं। जैसे हम कहें tourism. अब tourism कहने के मतलब ऐसा नहीं होता कि सिर्फ tourist destination होता है। Tourism कहने के बाद उसके पीछे अनेक चीजें हैं। Even food habits का होगा, soft skill का होगा, language का होगा, guide का होगा, even आपके cab के drivers होंगे तो उनकी training होंगी, पचासों चीजें होंगी। हमें अपना tourism बढ़ाना है तो हमारे देश में भी, हमारी service को कैसे हम qualitatively improve करें? Qualitatively improve करने के लिए कौन-कौन से हमारे पहलू हो? तो, हमारे यहां अपने देश की आवश्यकता के लिए भी उस प्रकार की नई पचासों institutions विकसित हो सकती हैं और ये public private partnership के model पर हो सकती हैं और करनी भी चाहिए। हम उसमें बहुत बड़ी मात्रा में role कर सकते हैं।

अभी मैं जर्मनी गया था। तो जर्मनी की चांसलर एजेंला मार्केल के साथ ऐसे ही बात हो रही थी, लंच के समय पर जब हम मिले तो और guest अभी set हो रहे थे, meeting शुरू होना बाकी था। उन्होंने बातों ही बातों में, जब उनको पता चला कि मैं vegetarian हूं तो उन्होंने विषय निकाला। उन्होंने कहा कि मैं खुद Indian कढ़ी बनाती हूं, बोले मैं सीखी हूं। लेकिन फिर भी मुझे अभी perfect नहीं आती है। और कभी-कभी ingredient के संबंध में मुझे problem रहता है। ये जब मैंने सुना, तो तुरंत मुझे मेरे देश के service sector की तरफ ध्यान गया। इसका मतलब कि दुनिया में आजकल holistic health care की तरफ जब योगा ने एक ध्यान लिया है वैसे ही एक हवा चल पड़ी है vegetarianism की। लेकिन उनको मालूम नहीं है कि vegetarianism में भी इतना development हो चुका है। क्या हम इस दिशा में service देने का तय करें। हमारे जितने यहां बड़े-बड़े होटल वाले हैं, वे अगर दुनिया के लोगों को इस प्रकार से सिखाने का काम करें, special classes करें, even tourist के लिए भी package बनाएं। 3 दिन cooking class, 3 दिन field visit. आप देखिए service के कितने पहलू हो सकते हैं, कितने प्रकार से उसको पढ़ाया जा सकता है, हमने कितने नए innovative हैं क्योंकि हमारे पास विपुल मात्रा में मानव संपदा है। कुछ चीजें ऐसी हैं कि हम उन सेवाओं को दें ताकि हमारी अपनी product भी साथ-साथ चलती जाए। कभी-कभार ऐसा होता है कि भई आप ये लेंगे तो साथ में ये मिलेगा, तो साथ में ये भी जोड़ा जा सकता है। इसलिए हम सिर्फ IT के द्वारा सेवा करें, ये जो limited हमारी सोच बनी है, उसमें से हमने बाहर आना चाहिए, इसका दायरा बढ़ाना चाहिए। और सिर्फ बहुत ऊंचे पढ़े-लिखे लोग दुनिया को जरूरत, ऐसा नहीं है, अनेक प्रकार के लोगों की दुनिया को जरूरत है और ये आवश्यकता बढ़ने वाली है। और इसलिए हमने हमारे सेवा के layers, multiple layers सेवा के हमने दायरे पर सोचना होगा। वो अगर हम करते हैं तो बहुत लाभ पाएंगे, देशा की सेवा करेंगे, दुनिया की भी सेवा करेंगे।

कुछ तो हम लोगों ने पुराने जमाने में जो नियम बनाएं हैं, उस भय से बनाए हुए हैं - कहीं दुनिया आ जाएगी, खा जाएगी। आत्मविश्वास का अभाव रहा क्योंकि बहुत सालों तक हम गुलाम रहे। हमें उस मानसिकता से बाहर आना पड़ेगा। मुझे अभी भी समझ में नहीं आ रहा है कि arbitration हमारे देश में क्यों न हो? Global arbitration हमारे देश में क्यों न हो? Arbitration के लिए आज भी हमें London क्यों जाना पड़े? क्या हमारे पास उस प्रकार के chartered accountant, उस प्रकार के lawyer नहीं है क्या? हैं! लेकिन हमने कानून ऐसे बना के रखे हैं कि हमारा ही.. हां और कुछ लोगों को डर लगता है, नहीं-नहीं ये यहां मत शुरू करो, ये सब दुनिया भर के बढे-बढे बुद्धिमान वकील आ जाएंगे, तो हमारा काम नहीं चलेगा। ऐसा नहीं होने वाला है ये।

जो सोच किसे जमाने में थी कि technology आएगी तो job चली जाएगी, computer आएगा तो job चली जाएगी। आज हम देख रहे हैं कि technology के कारण job का global scope पैदा हो गया है। वक्त बदल चुका है। हमने स्थितियों को visualise करना चाहिए और हमें भयभीत रहने की जरूरत नहीं, इतना बड़ा, सवा सौ करोड़ का देश है। हम दुनिया से दबकर क्यों जीना चाहिए? हम अपनी ताकत खड़ी करें, दुनिया में हम अपना अस्तित्व दिखा सकते हैं, इस मिजाज से हमारी योजना और रचनाएं होनी चाहिए।

उसी प्रकार से finance का sector, हम देख रहे हैं अब via मॉरिशस आइए, via सिंगापुर आइए, हमें डर लगता है कहीं अपने यहां कर लिया तो? क्यों न करें हम? ये हम अपनी ताकत को मॉरिशस, सिंगापुर या मलेशिया को क्यों divert करें? हम अपने कानूनों और नियमों को इस प्रकार से बनाएं ताकि इन चीजों को हम भी हजम कर सकें और अपनी व्यवस्थाओं को विकसित कर सकें। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। और आने वाले दिनों में देखेंगे आप, हम उन व्यवस्थाओं को विकसित करना चाहते हैं कि जो globally भारत को.. हां कुछ हमने उसकी सीमाएं भी बांधनी पड़ती हैं। जैसे intellectual property right, अब हम global parameter के intellectual property right की दिशा में काम नहीं करेंगे तो दुनिया हमारे साथ नाता नहीं जोड़ेगी।

हम जानते हैं हमारी entertainment industry बहुत बड़ी ताकत रखती है। सिर्फ हिंदुस्तान में फिल्म बनाने की ताकत रखती है, ऐसा नहीं है। लेकिन intellectual property right में उनको भरोसा दुनिया को हम दे दें, मुझे विश्वास है हम globally एक बहुत बड़ा destination बन सकते हैं, उनके अपने creative work के लिए। भारत में creative work के लिए इतनी बड़ी संभावनाएं पड़ी हैं - दुनिया में कोई कार बनाए, कार की manufacturing वाला होगा वहां लेकिन कार में अंदर की seat की design क्या हो? वो बनाने की ताकत हिंदुस्तानी में है। और वो ही कार ज्यादा तब बिकेगी, इसलिए नहीं कि तुम्हारा मशीन कैसा है, सीट कैसी है, इसके आधार पर कार बिकती है कि भई बैठना कितना comfortable है, उतरना कितना comfortable है और उस काम को करने वाले भी लोग होते हैं। Service! Creative services! इसके लिए हमारे पास इतनी संभावनाएं हैं और हम उसका लाभ उठा सकते हैं।

आज योगा और IT - दो क्षेत्र ऐसे हैं, जिन्‍होंने दुनिया में हिंदुस्तान को भी पुहंचाया है और इसके माध्यम से हिंदुस्तान भी पहुंचा है। लेकिन एक विशेषता है, ये दोनों पहुंचे हैं क्योंकि वहां सरकार नहीं है... बड़ी देर लगी आपको, ये इसलिए पहुंचे हैं क्योंकि हम नहीं हैं वहां। क्योंकि सरकार का mind set ऐसा बना हुआ है वहां, सालों से, ये हिंदुस्तान के 20, 22, 24 साल के नौजवान हैं, जिन्होंने दुनिया में भारत के IT माध्यम से पहचान खड़ी की है, ताकत के रूप में पहचान बना दी है। उसी प्रकार से दुनिया का मानव जो कि stress के कारण परेशान है, frustration से जी रहा है, बहुत कुछ पाने के बाद भी संतोष अनुभव नहीं कर रहा है तो वो ढूंढ़ता-ढूढ़ता आया, वो योग उठाकर ले गया। कोई आकर के ले गया, कोई जाकर के दे आया, ये दो route से हमारा हुआ है।

हम इसको और अधिक scientific बनाकर के एक बहुत ही, यानी भारत की अपनी सोच के रूप में, हम ऐसे किन-किन क्षेत्रों में.. मान लीजिए संगीत, दुनिया को, दुनिया को, मैं मानता हूं संगीत के माध्यम से हम बहुत कुछ दे सकते हैं। दुनिया को अभी तक ये भी पता नहीं है कि तन डोले इसलिए संगीत होता है कि मन डोले इसके लिए संगीत होना चाहिए। ज्यादातर परिचय यही है कि संगीत यानी तन डोले, संगीत से मन डोलना चाहिए और ये ताकत हिंदुस्तान में है! ये ताकत हिंदुस्तान में है! ये देश है कि किस प्रहर में कौन सा राग हो, किस बीमारी में कौन सा राग हो, बालक अवस्था हो तो कौन सा राग हो, निवृत्त अवस्था हो तो कौन सा राग हो। यहां तक जहां वैज्ञानिक काम हुआ हो, क्या दुनिया को हम ये सेवा नहीं दे सकते हैं? फिर से एक बार गुरु-शिष्य परंपरा revive हो और मान लीजिए हिंदुस्तान में एक हजार अच्छे सितारवादक हैं। और दुनिया के एक हजार शिष्य उनके यहां आ जाएं, उनके यहां रहें, सितार सीखें, साल भर का अपना गुरु-दक्षिणा दें और वापिस चले जाएं। क्या भारत का, संगीत की दुनिया में जिसने साधना की है, उसको कभी भूखे रहने की नौबत आएगी क्या? कभी नहीं आएगी और जो यहां से सीखकर गया, वो सिर्फ सितार ही सीखकर जाएगा कि पूरा हिंदुस्तान लेकर के जाएगा? हिंदुस्तान अपने आप पहुंत जाएगा कि नहीं जाएगा?

हमारी service sector की ताकत ये है कि विश्व में हमें अपने आप को पहुंचाने का एक बहुत बड़ा अवसर हमारे सामने आया है। सिर्फ विश्व की सेवा करेंगे, ऐसा नहीं, विश्व को अपना बनाने की ताकत हमने पाई है.. और समय-समय पर इस देश ने किया है। मैं अभी फ्रांस गया था। फ्रांस में मैं युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के लिए गया था। प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी हुई। सेवा कैसी हमारे लोग कर सकते हैं, इसका एक उत्तम उदाहरण है। एक सौ साल हो गए हैं, प्रथम विश्व युद्ध में करीब 14 लाख हिंदुस्तान के जवानों ने किसी और के लिए लड़ाई लड़ी थी, अपने लिए नहीं, हमारी जमीन को बढ़ाने के लिए नहीं, हम मर रहे थे इसलिए बचने के लिए नहीं, किसी और के लिए। और करीब-करीब 75 हजार लोगों ने शहादत थी। मैं मानता हूं कि दुनिया समझे किसी भी प्रकार की सेवा यानी अपना जीवन आहूत कर देने तक की सेवा देना, इस देश ने करके दिखाया है। अगर उसने किसी की रक्षा के लिए अपनी जान देकर के दिखाया है तो जीवन बचाने के लिए हमारे डॉक्टरों ने दुनिया में जाकर के अपने करतब दिखाए हैं।

और इसलिए मैं कहता हूं कि हम इस क्षेत्र को सीमित न मानें। ये बहुत बड़ी मानवता की सेवा है। ये बहुत बड़ी देश की सेवा है। उसको हमारी ताकत को जल्दी पहचाने, हम अपनी ताकत को ढूंढे, उसको हम globally requirement के अनुसार value addition करें, दुनिया की requirement का हम mapping करें, और हम कर सकते हैं। 2025 में किस देश की किसकी जरूरत पड़ेगी, ये हम कर सकते हैं। आज इतनी सारी चीजें हो सकती हैं और उस प्रकार से हम तैयारी करें।

मुझे विश्वास है सेवा के क्षेत्र में हम इन कामों को करेंगे तो जरूर ही भारत अपनी एक जगह बना सकता है। सरकार में जो नियमों को बदलना होगा, उसको भी बदलते हुए इन कामों को करना चाहिए। मैं फिर एक बार.. सबने मिलकर के इस बात को आगे बढ़ाया है और भी इसको बल दिया जाए। सरकार में भी इस बदले हुए brain drain के जमाने को छोड़कर के brain gain की दिशा में हम अपनी योजनाएं को केंद्रित करें। इस अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।

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हमारी सरकार भारत में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध: पीएम मोदी
August 27, 2026
खेलो इंडिया देशभर में खेल प्रतिभाओं को निखारने का एक शानदार मंच बन गया है; यह युवा खिलाड़ियों को अपने सपनों को साकार करने के अवसर और समर्थन प्रदान कर रहा है: प्रधानमंत्री
जब मैं खेलों की बात करता हूं, तो यह सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है; यह विकसित भारत के निर्माण में, भारत की खेलशक्ति और युवाशक्ति को एक साथ जोड़ने का अभियान है: प्रधानमंत्री
अन्य देश उन खेलों में पदक जीत रहे हैं जिनमें भारत भाग भी नहीं लेता; हमें इन खेलों में भी महारत हासिल करनी होगी: प्रधानमंत्री
खेल हमें केवल चैंपियन बनना ही नहीं सिखाता, बल्कि खेल हमें एक बेहतर प्रतिस्पर्धी बनना भी सिखाता है; उठना, गिरना और गिरकर फिर से उठने जज्बा हमारे भीतर लाता हैः प्रधानमंत्री
स्क्रीन से ज्यादा खेल केंद्रों की अहमियत है, प्लेस्टेशन से ज्यादा खेल के मैदानों की अहमियत है: प्रधानमंत्री

नमस्कार।

आप सभी ने इतने शानदार तरीके से खेलो इंडिया संवाद का ये कार्यक्रम आयोजित किया है। मैं आप सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं टेक्नोलॉजी के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी, सभी मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के अनेक मंत्री, संसद में मेरे सहयोगी, My Bharat के लाखों-लाख वॉलिंटियर्स का भी बहुत हृदय से अभिनंदन करता हूं। आज इस कार्यक्रम में देशभर के एथलीट्स और स्पोर्ट्स जगत के महानुभाव भी हम सबके साथ शामिल हुए हैं।

आप सबको पता है साथियों,

दो दिन बाद, 29 अगस्त को नेशनल स्पोर्ट्स डे भी है। मैं आप सभी को, देशभर के युवाओं को और खेल जगत से जुड़े सभी साथियों को खेल दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं। ये दिन माँ भारती की एक महान संतान, मेजर ध्यानचंद जी को, उनको याद करने का भी अवसर होता है। 100 वर्ष पहले भारतीय सेना की हॉकी टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर टूर पर गई थी और उस टीम में ध्यानचंद जी भी थे। वो टूर भारत और न्यूजीलैंड के, स्पोर्ट्स रिलेशंस के 100 वर्ष पूरे होने का आधार है। कुछ दिन पहले मैं न्यूजीलैंड की यात्रा पर गया था। तब भी मैंने न्यूजीलैंड में उन्हें याद किया था। मेजर ध्यानचंद जी ने जिन रिश्तों की नींव रखी थी, आज भारत उन रिश्तों की समृद्धि के लिए निरंतर काम कर रहा है।

साथियों,

मैंने इस 15 अगस्त को लाल किले से भारत का स्पोर्ट्स विजन देश के सामने रखा है। जब मैं स्पोर्ट्स की बात करता हूं, तो ये केवल मेडल जीतने तक सीमित नहीं है, ये विकसित भारत के निर्माण में भारत की खेलशक्ति और भारत की युवाशक्ति को एक साथ जोड़ने का अभियान है। मैं हमेशा कहता आया हूं - जो खेले, वो खिले। और खेल में खिलना सिर्फ मैदान पर जीतना नहीं है, खेल में खिलना मतलब व्यक्तित्व का खिलना, परिवार का खिलना और देश का गौरव बढ़ाना।

साथियों,

जब कोई खिलाड़ी सफल होता है, तो वो सफलता केवल उसकी नहीं होती, उसकी सफलता से उसके परिवार की पहचान बनती है, प्रतिष्ठा बढ़ती है। जिस स्कूल और कॉलेज में वो पढ़ा, उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती है। उसके जिले और राज्य की पहचान और मजबूत होती है। यानि दुनिया उस खिलाड़ी के नाम से उस शहर या राज्य को पहचानने लगती है। और जब ऐसी अनेक सफलताओं को लेकर कोई क्षेत्र Global Sports Map पर चमकता है, तो दुनिया का उस शहर को देखने का नजरिया भी बदल जाता है। आज के इस कार्यक्रम में देश के जिन सैकड़ों जिलों के खिलाड़ी जुड़े हुए हैं, हर जिले में दुनिया के Sports Map पर चमकने की ताकत है। इस ताकत को समझते हुए ही हमें इस संवाद कार्यक्रम को आगे बढ़ाना है।

साथियों,

इस बार लाल किले से मैंने खेलों से जुड़ी एक बहुत बड़ी चुनौती की तरफ भी देश का ध्यान दिलाया है। ये चुनौती ओलंपिक्स से जुड़ी है। एक कड़वी सच्चाई ये है कि ओलंपिक्स में जितने अलग-अलग स्पोर्ट्स होते हैं, भारत की टीमें उसमें से आधे स्पोर्ट्स में हिस्सा ही नहीं लेती हैं। यानि मेडल टैली के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए तो हम कंपीट ही नहीं करते और दशकों से ऐसा ही चला आ रहा है। 2012 के ओलंपिक्स में, उस समय भारत ने सिर्फ, 2012 में सिर्फ 13 खेलों में हिस्सा लिया था। 20 से ज्यादा खेलों में तो भारत की भागीदारी ही नहीं थी। और इन 20 से ज्यादा खेलों में कई सारे खेल ऐसे हैं, जिनका नाम तक देश में लोगों ने शायद ही सुना हो। दुनिया के दूसरे देश उन खेलों में मेडल जीतते हैं और हम उनमें हिस्सा ही नहीं लेते। हमें मेडल टैली बढ़ाने के लिए इन खेलों में भी महारथ हासिल करनी ही होगी। अब जैसे, सर्फिंग और स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग, हमारे पास इतनी बड़ी कोस्टलाइन है, इतना बड़ा पहाड़ी क्षेत्र है, जहां इस प्रकार के स्पोर्ट्स के लिए एक स्वाभाविक रूचि हो सकती है। हमारे पास वॉटर स्पोर्ट्स से लेकर विंटर स्पोर्ट्स तक के लिए डेमोग्राफी भी है और जियोग्राफी भी है। लेकिन फिर भी हम ऐसे खेलों में दुनिया में कहीं दिखते ही नहीं हैं। इसलिए, हमें अलग-अलग जिलों में ऐसी संभावनाओं को तलाशना होगा जहां किसी एक खास स्पोर्ट्स का इकोसिस्टम विकसित हो सके, और इसमें आज के इस कार्यक्रम की बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

जब हम 2036 ओलंपिक्स की तैयारी की बात करते हैं, तो हमारा फोकस ये होना चाहिए कि हमें आज से ही वो खिलाड़ी तैयार करने हैं जो 2036 में अलग-अलग स्पोर्ट्स के लिए क्वालीफाई और कंपीट करेंगे। और इसलिए, लाल किले से मैंने 5 साल की उम्र से 15 साल की उम्र के खिलाड़ियों की पहचान करने के लिए एक बड़े टैलेंट हंट अभियान का ऐलान किया है। और इसमें भी हमें केवल ये नहीं देखना है कि किस बच्चे की किस खेल में रुचि है, बल्कि ये भी देखना है कि कौन सा बच्चा किस खेल के लिए फिट है। हमें उस हिसाब से ही उस बच्चे को ट्रेनिंग देनी होगी। और मैं आप सभी को भरोसा देता हूं, इसके लिए सरकार की तरफ से जो भी सपोर्ट चाहिए, सरकार उसमें आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी।

साथियों,

हमारी सरकार भारत में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज से लेकर आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर्स तक देश में एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसमें प्रतिभा को पहचानने से लेकर उसे दुनिया के मंच तक पहुंचाने तक हर स्तर पर सहयोग मिले। हम दुनिया के दूसरे देशों के साथ भी Sports Science, Training, Coaching और अनुभव साझा करने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

Sports को लेकर सरकार कितनी गंभीर है, ये आयोजन भी इसका उदाहरण है। खेलो इंडिया संवाद सिर्फ खेल की बात करने का कार्यक्रम नहीं है। ये एक ऐसे संवाद का मंच है जिसका एक-एक विचार देश के स्पोर्ट्स विजन को एक नई दिशा दे सकता है। और इसके साथ जो युवा संवाद हो रहा है, वो कार्यक्रम आपके Ideas और Aspirations को देश के सपनों से जोड़ने का बहुत बड़ा माध्यम है। इस कार्यक्रम में स्पोर्ट्स इकोसिस्टम, टैलेंट डेवलपमेंट, गवर्नेंस और विकसित भारत को लेकर युवा क्या सोचते हैं, उनके सुझाव क्या हैं, इन बातों को सुना जाएगा और policy process में शामिल किया जाएगा। इसलिए, आप सबसे कहूंगा कि जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके, इस मंच का सार्थक उपयोग कीजिए, नए Ideas आने दीजिए, युवा शक्ति के ये नए Ideas ही विकसित भारत की सिद्धि की ताकत बनेंगे।

साथियों,

हम अक्सर सुनते हैं, एक स्वस्थ समाज के लिए, एक अच्छी पारिवारिक व्यवस्था के लिए, एक बेहतर कार्यसंस्कृति के लिए स्पोर्ट्स-पर्सन स्पिरिट बहुत जरूरी होती है और ये स्पोर्ट्स-पर्सन स्पिरिट खेल के मैदान में गए बिना सीखनी बहुत मुश्किल होती है। खेल हमें केवल चैंपियन बनना ही नहीं सिखाता, बल्कि खेल हमें एक बेहतर कंपीटिटर बनना भी सिखाता है। उठना, गिरना, गिरकर फिर से उठना, स्पोर्ट्स ये ज़ज्बा हमारे भीतर लाता है।

साथियों,

खेलों से जीवन कैसे बदलता है, इसका एक बड़ा उदाहरण हमारे पैरा एथलीट्स हैं। पैरा एथलीट्स को जब कोई मैदान में देखता है, तो जीवन के बारे में सोचने का नज़रिया बदल ही जाता है। और जब वो कुछ अचीव करता है, तो उस एथलीट के साथ ही उसके पूरे परिवार को नई ज़िंदगी मिल जाती है। वो मां-बाप, भाई-बहन, जो अपने उस बच्चे को शुरुआती दिनों में संघर्ष करते देखते हैं, उनके लिए उस दिव्यांग खिलाड़ी की सफलता, उनके सपनों को, उनके हौसलों को भी एक नई ऊंचाई दे देती है।

साथियों,

मैं खुद ऐसे प्लेयर्स से हमेशा इंस्पायर होता रहा हूं, अब जैसे आपने सबने नाम जो सुने हैं, आर्चरी में हमारी एक बेटी, एक कमाल की खिलाड़ी हैं, नाम जानते हो आप?, शीतल। जब पैरालंपिक में उन्होंने मेडल जीता, तो पूरा जम्मू-कश्मीर, पूरा हिन्दुस्तान गर्व से भर उठा। ऐसे ही हमारी एक और बेटी अवनि लेखरा हैं, जिन्होंने दो-दो बार पैरालंपिक के मेडल जीते। मैं जब भी बेटी अवनि से मिलता हूं, बहुत गर्व महसूस करता हूं। सुमित अंतिल हो, नितेश कुमार हो और अभी-अभी तो आपने नाम सुना होगा, हमारे झंडू कुमार। ऐसे हमारे पैरा-एथलीट्स हैं, ऐसे हर साथी, हमें भी प्रेरित करते हैं।

साथियों,

स्पोर्ट्स, एक बेहतर जीवन की गारंटी है। स्पोर्ट्स हमें बेहतर जीवन जीने के लिए फिट बनाता है, हमारी क्वालिटी ऑफ लाइफ को बेहतर करता है। हम सभी फौजा सिंह जी के बारे में जानते हैं। पिछले वर्ष 100 वर्ष से ज्यादा की आयु में फौजा सिंह जी का निधन हुआ है। खेल के प्रति प्यार हो, फिटनेस हो, ये कैसे जीवन पर्यंत चलता है, फौजा सिंह जी इसकी मिसाल थे। उनका जीवन इस बात की बहुत बड़ी प्रेरणा है कि कैसे स्पोर्ट्स और क्वालिटी ऑफ लाइफ आपस में जुड़े हुए हैं।

साथियों,

स्पोर्ट्स का एक और बहुत बड़ा फायदा होता है, जो असली खिलाड़ी होते हैं, उनमें ड्रग्स, नशे से दूर रहने की इच्छाशक्ति भी पैदा हो जाती है। आज जब नशे की इतनी बड़ी चुनौती युवाओं के सामने है, तो स्पोर्ट्स इसमें भी बहुत सार्थक भूमिका निभाता है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि आज भारत में स्पोर्ट्स एक बेहतरीन प्रोफेशन के तौर पर उभरा है। समाज में Sports को लेकर नज़रिया बदला है। आज आप देखिए, हमारे देश में लोग ट्रायाथलोन में हिस्सा ले रहे हैं, 5K और 10K Races दौड़ रहे हैं। यार-दोस्त मिलकर हाय-रॉक्स जैसे चैलेंजेस को पूरा कर रहे हैं। कोई पहली बार शीर्षासन करने की खुशी मना रहा है, तो कोई दोस्तों और फैमिली के साथ मिलकर पिकलबॉल और बैडमिंटन खेल रहा है। ये छोटी-छोटी चीजें हैं, लेकिन अगर इसको एक बड़े नजरिए से देखें, तो इसमें बहुत बड़ा चेंज नज़र आएगा। चेंज ये कि स्पोर्ट्स अब हमारी जिंदगी का हिस्सा बन रहा है। अगर पढ़ाई और करियर का टाइमटेबल बन रहा है, तो दिन भर के रूटीन में स्पोर्ट्स को भी जगह मिल रही है। और यही चेंज है, यही परिवर्तन है, जिसके कारण भारत के स्पोर्ट्स फ्यूचर पर भरोसा भी बढ़ रहा है।

साथियों,

देश में स्पोर्ट्स कल्चर तभी बनता है, जब सामान्य मानवी इससे जुड़े। जब स्कूल्स, स्पोर्ट्स के पीरियड को, को-करिकुलर नहीं, जीवन का हिस्सा मानें। जब ऐसा होता है, तो इससे टैलेंट पूल भी बढ़ता है और स्पोर्ट्स को करियर मानने वाले बच्चों को, उनकी फैमिली का सपोर्ट भी मिलता है। और इसलिए ही मैं कहता हूं, स्क्रीन से ज्यादा, स्पोर्ट्स सेंटर्स की अहमियत है। प्ले-स्टेशन से ज्यादा, प्लेग्राउंड की अहमियत है। और ये तभी होगा, जब आप सब युवा साथी इस अप्रोच को आगे बढ़ाएंगे।

साथियों,

मुझे भारत की युवाशक्ति के सामर्थ्य औऱ उसकी सफलता पर बहुत भरोसा है। मैं देश के हर युवा से कहना चाहता हूं, खेल के मैदान में हो या समाज के बीच, आपकी भागीदारी ही भारत की शक्ति है। आपको खेल से प्यार है, तो इससे जुड़ने के अनेक माध्यम बन रहे हैं। अब नए- नए स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स आ गए हैं, नई टेक्नोलॉजी आ गई है। ट्रेनिंग और कोचिंग के तरीके बदल गए हैं। खेलों के आयोजन की, उसकी प्रतिस्पर्धा की, उसकी विधाओं की जरूरतें बदल गई हैं। इक्विपमेंट डिजाइन है, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी है, Sports Medicine है, Nutrition है, Psychology, Analytics, ऐसे अनेक क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर बन रहे हैं। आपको ये अवसर छोड़ना नहीं है। इसलिए, इस संवाद में खुलकर अपने ideas सामने रखिए। युवा शक्ति की ये भागीदारी विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है। एक बार फिर आप सभी युवा साथियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।

वंदे मातरम्।