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मंच पर विराजमान मंत्रिपरिषद के मेरे सभी साथी,

मंच पर उपस्थित सभी महानुभाव,

दुनिया के भिन्‍न-भिन्‍न देशों से आये हुए प्रतिनिधि बंधु,

मैं Department के सभी साथियों को बधाई देता हूं इस कार्यक्रम की रचना करने के लिए क्‍योंकि बहुत वर्षों से हम एक बात सुनते आये हैं और उसका हमारे मन पर प्रभाव भी बहुत रहा है। हर जगह पर हम सुनते थे एक शब्‍द, Brain Drain. और आलोचना भी होती रहती थी कि ये देश का क्‍या होगा Brain Drain का, ऐसी आलोचना होती थी। और आज से 15-20 साल पहले शायद यहां बैठे हुए लोगों ने बहुत सारी चिंता व्‍यक्‍त की होगी। वो एक Mind Set था हमारा, लेकिन आज Brain Drain से Brain Gain तक की यात्रा है यह हमारी यात्रा आई है। अब Brain Drain से बाहर निकल करके, उस सोच से बाहर निकल करके, Brain Gain के लिए हमारी क्‍या Strategy होनी चाहिए उसको हमने सोचना चाहिए।

और इसलिए कोशिश यह है कि अब वो... हम लोगों ने चिंता करने की जरूरत नहीं है पांच 50 लोग दुनिया में पहुंचेंगे तो यहां खाली हो जाएगा। यह बहुरत्‍ना वसुंधरा है, कोई कमी पड़ने वाली नहीं है, Talented Manpower की कभी कमी नहीं पड़ने वाली है। दूसरी बात है, भारत ने अपनी शक्ति और सामर्थ्‍य का लेखा-जोखा लेना चाहिए। और वो भी global prospective में लेना चाहिए। और आज अगर global prospective में देखें तो भारत की सबसे बड़ी शक्ति है भारत का human resource, हमारा Manpower. यह हमारी सबसे बड़ी ताकत है। और अगर ये हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है, तो हमारे विकास की यात्रा के केंद्र बिंदु में इस विचार को प्राथमिकता देनी चाहिए कि जिस देश के पास 65 percent population 35 से नीचे हो, और आने वाले दिनों में यह एवरेज और कम होने वाली है। भारत आने वाले दिनों में अधिक युवा होने वाला है। अगर यह हमारी संपत्ति है तो संपत्ति को ध्‍यान में रख करके, हमारी विकास यात्रा की Model को हमने तैयार करना चाहिए।

और अगर उसको तैयार करना है तो हमने Globally भी देखना चाहिए कि नहीं दुनिया की क्‍या स्थिति है। कितना ही Development किया होगा, Technology की नई-नई ऊंचाईयों को पार किया होगा, उसके बाद भी विश्‍व का बहुत एक हिस्‍सा ऐसा होगा, आने वाले दिनों में - जो Manpower के बिना एक प्रकार से Handicap हो सकता है। अभी जैसे त्रेहान जी बता रहे थे कि अगर हम Sport System खड़ी न करें तो दुनिया के कई देशों का Health Sector ही Collapse कर जाएगा। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हम लोगों के पास ये सामर्थ्‍य है। अब इसको Scientific ढंग से हम आगे कैसे बढ़ाएं?

भारत में व्‍यक्तिगत संबंधों के कारण कोई Middle east में चले गये होंगे, वहां कोई मजदूरी शुरू की होगी। कोई पांच लोग पहले गये होंगे, कोई 50 को ले गये होंगे। फिर एक जिले के ज्‍यादा लोग उसी देश में चले जाते होंगे वो परंपरा चली होगी। लेकिन इस बात को institutionalized करके इस सेक्‍टर में काम करने वाले सब लोगों का सहयोग ले करके, सरकार के सभी Department को भी coordinate करते हुए एक Road map बना करके उसमें सबका Involvement कैसे हो, हमारा destination क्‍या हो, हमारी way and means क्‍या हो, इन सारे विषयों में जब तक हम वैज्ञानिक तरीके से आगे नहीं बढ़ेंगे एक Perfect Mechanism खड़ा नहीं करेंगे, तो इतनी बड़ी संपदा होने के बावजूद भी उधर लोग workforce के लिए तरसते होंगे और इधर हम काम न देने के कारण तक परेशान रहते होंगे। और इसलिए समय रहते हम global requirement को ध्‍यान में रखते हुए अपनी कार्य योजना को करना चाहिए। उसी दिशा का यह महत्‍वपूर्ण एक प्रयास है कि जिसमें दुनिया के देश के लोगों से मिले, बैठे बात करें। सार्क देशों ने उसे विशेष रूप से उसमें योगदान दिया है। अब मिल बैठकर हम किसकी क्‍या आवश्‍यकता है, उसको सोचे, समझें और उसकी दिशा में हमारा जाने का प्रयास है।

एक तो हमें एक काम की प्रयास करना है - और मैं चाहूंगा उसमें राज्‍य सरकारें हो सकती हैं, Private कंपनियां, फिल्‍म में काम करने वाले लोग भी हो सकते हैं, भारत सरकार भी हो सकती है - सब मिल करके काम करें। हिंदुस्‍तान में भी हमारे पास, जो भी workforce है उसमें भी अलग-अलग इलाके की, अलग-अलग ताकत है। अलग-अलग विशेषताएं हैं। जो काम कर्नाटक की तरफ नौजवान कर सकता होगा, संभव है कि असम का नौजवान उस प्रकार से काम नहीं कर पाएगा। लेकिन जो काम असम का नौजवान कर पाएगा वो शायद कर्नाटक का नहीं कर पाएगा। तो भारत इतना विशाल है हमारे यहां जो मानव संपदा है उसकी शक्तियों में भी अनेक विविधताएं भरी पड़ी हुईं हैं।

हमारा काम होगा कि हम इस प्रकार की शक्तियों का Mapping करें। अब देखा होगा हमने Sports - हमें मालूम है कि कुछ ही इलाके से Sportsmen मिलते हैं हमें, सब जगह से नहीं मिलते। इसका मतलब ये नहीं कि हर जगह खेल नहीं चल रहा है, स्‍कूल में तो खेल हर कोई खेलता है तो एक-एक भू-भाग विशेषता बनी होती है। आप देखें होंगे Mathematics में अच्‍छे Student कुछ ही इलाके होंगे जहां पर Best quality Mathematics Student मिलते होंगे, तो एक Traditional develop हुई होगी। हमने, हमारे पास जो ये मानव संपदा है उस मानव संपदा का किस भू-भाग में किस प्रकार का का स्‍वभाव है, जरूरी नहीं है एक प्रकार का होगा, अनेक प्रकार का होगा, उसमें Priority हम तय करेंगे, फिर फोकस वही करना चाहिए, ये जरूरी नहीं है कि हर प्रकार की Talent हर प्रकार के Scale हिंदुस्‍तान के हर कोने में develop हो - आवश्‍यक नहीं है। मान लीजिए हमने एक State को दो Skill के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण माना और उसी को Center for Excellence खड़ा किया। और हिंदुस्‍तान भर में जिसको उसमें रूचि हो उसको वहां ले गये और वहां जो लोग तैयार हों, उनको दुनिया में जहां जरूरी है Export किया, तो आप देखिए हम कितना Qualitative अपने काम को हम Improve कर सकते हैं। इसलिए एक महत्‍वपूर्ण काम है हमारा अपना Mapping.

दूसरा महत्‍वपूर्ण काम है Human Resource Development. जब तक हम हमारे Manpower को तैयार नहीं करते... मान लीजिए हमारे यहाँ एक Carpenter है, इस Carpenter को U.A.E में काम मिल रहा है। अगर कोई एक यहां छोटी सी भी Institute हो, Private हो, जैसे कोचिंग क्‍लासेस चलते हों। अगर कहीं पर एक कोचिंग क्‍लासेस चलाता है, Private अपना, कि वो 25-25 ऐसे युवकों को जिस देश में जाने वाला है वहां की Manner क्‍या होती है, खान-पान क्‍या होता है, वहां के 50 ऐसे वाक्‍य याद कर ले तो क्‍या अर्थ होता है। अगर आपने इसको इस प्रकार से भी Soft Skill Develop किया तो उसके बाद जो real strength है उसके प्‍लस Soft Skill हो गई तो उसका value addition कितना हो जाएगा? मान लीजिए आप उसको भेज रहे हैं लेकिन वो देश Technological Advance है, तो हमारी पुरानी पद्धति में उसको जो भी आता है.. हो सकता है, वो वहां मकान बनाने के लिए गया लेकिन Deign मिलेगी, ईमेल से आएगी Deign तो उसको फिर Computer Reading आता है या नहीं आता है, वो Deign को समझ सके.. उसको Value Addition कैसे हो? अगर हम उसकी दिशा में हम अगर थोड़ा भी करें...

आज दुनिया में हमारी नर्सिंग की मांग है। हमारी नर्सिंग रूटीन में हमारे यहां जो पढ़ाई होती है, वहां से जाती है पढ़ाई करती हैं, और बड़ी प्रतिष्‍ठा पाई हैं। लेकिन क्‍या हम भी रिसर्च कर सकते हैं कि और अधिक Value Addition क्‍या हो सकता ?है और कौन सी चीजें जोड़ी जा सकती है? उस दिशा हम प्रयास करें। मान लीजिए हम तय करें कि भाई इस प्रकार से जाने वालों के लिए हम Language class चलाएंगे। इन language class की हमें Double benefit हो सकते हैं। हिंदुस्‍तान में हमें अगर Tourism बढ़ाना है और हमारे पास इस प्रकार के language classes हैं, तो कुछ लोग विदेश जाएंगे, लेकिन जो यहां रहेंगे वो language जानते होंगे तो Tourist के समय जब जरूरत पड़ेंगी तो हमें वो काम आएगा। एक प्रकार से वो अनेक क्षेत्रों में काम आ सकता है।

मेरा कहने का तात्‍पर्य यह है कि जब तक हम within India हमारी जो ताकत है, उसको वैज्ञानिक तरीके से नापना, नाप करके उसको और अधिक Develop करना, यह एक आवश्‍यक काम मुझे लगता है।

दूसरा Globally भी हमने Target करना चाहिए। भारत को एक लाभ है - अंग्रेजी language का। लेकिन हमने पूरे दुनिया का हिसाब-किताब लगाया। एक उन देशों में कुछ चीजें अनिवार्य हैं, और ये उनके बस की ताकत नहीं है। किस देश में वो कौन सी चीजें हैं? और अगर हम उसको Target करके उनकी अनिवार्यता, उनकी मुसीबत जो है उसको अगर identify करते हैं और फिर हमारे यहां काम करते हैं, Immediate आपको मार्केट मिल सकता है। तुरंत उनको Requirement होगी अगर मान लीजिए कोई जगह पर पता है कि वहां Health Sector में उनके यहां Develop ही संभव नहीं है, आने वाले 25 साल तक संभव नहीं है, Ok, हम उस देश में Health Sector के लिए ही Focus करेंगे। देखिए एक दम से आपको काम मिलना शुरू हो जाता है।

इसलिए दुनिया के किस देश में अनिवार्यता है? और वहां पर सबसे ज्यादा deficiency हो, उस area में हम हमारे देश में तैयारी करके enter कर सकते हैं क्या? उनका भी भला होगा, हमारा भी भला होगा।

दूसरा part है कि वहां establish चीजें हैं लेकिन cost is a problem, work force is a problem. तो फिर हमारा काम रहता है कि हम उसको address करें और उसको address करने के लिए हम किस प्रकार की तैयारी करें? हम जितनी ज्यादा मात्रा में हमारे man power को value addition करके यहां से भेजेंगे और targeted काम के लिए भेजेंगे, हम बहुत बड़ा contribution global economy में भी कर सकते हैं। और of course भारत के नौजवानों को रोजगार मिलेगा तो भारत की economy को तो लाभ होना ही होना है और उसका फायदा होगा।

कई क्षेत्र ऐसे हैं। जैसे हम कहें tourism. अब tourism कहने के मतलब ऐसा नहीं होता कि सिर्फ tourist destination होता है। Tourism कहने के बाद उसके पीछे अनेक चीजें हैं। Even food habits का होगा, soft skill का होगा, language का होगा, guide का होगा, even आपके cab के drivers होंगे तो उनकी training होंगी, पचासों चीजें होंगी। हमें अपना tourism बढ़ाना है तो हमारे देश में भी, हमारी service को कैसे हम qualitatively improve करें? Qualitatively improve करने के लिए कौन-कौन से हमारे पहलू हो? तो, हमारे यहां अपने देश की आवश्यकता के लिए भी उस प्रकार की नई पचासों institutions विकसित हो सकती हैं और ये public private partnership के model पर हो सकती हैं और करनी भी चाहिए। हम उसमें बहुत बड़ी मात्रा में role कर सकते हैं।

अभी मैं जर्मनी गया था। तो जर्मनी की चांसलर एजेंला मार्केल के साथ ऐसे ही बात हो रही थी, लंच के समय पर जब हम मिले तो और guest अभी set हो रहे थे, meeting शुरू होना बाकी था। उन्होंने बातों ही बातों में, जब उनको पता चला कि मैं vegetarian हूं तो उन्होंने विषय निकाला। उन्होंने कहा कि मैं खुद Indian कढ़ी बनाती हूं, बोले मैं सीखी हूं। लेकिन फिर भी मुझे अभी perfect नहीं आती है। और कभी-कभी ingredient के संबंध में मुझे problem रहता है। ये जब मैंने सुना, तो तुरंत मुझे मेरे देश के service sector की तरफ ध्यान गया। इसका मतलब कि दुनिया में आजकल holistic health care की तरफ जब योगा ने एक ध्यान लिया है वैसे ही एक हवा चल पड़ी है vegetarianism की। लेकिन उनको मालूम नहीं है कि vegetarianism में भी इतना development हो चुका है। क्या हम इस दिशा में service देने का तय करें। हमारे जितने यहां बड़े-बड़े होटल वाले हैं, वे अगर दुनिया के लोगों को इस प्रकार से सिखाने का काम करें, special classes करें, even tourist के लिए भी package बनाएं। 3 दिन cooking class, 3 दिन field visit. आप देखिए service के कितने पहलू हो सकते हैं, कितने प्रकार से उसको पढ़ाया जा सकता है, हमने कितने नए innovative हैं क्योंकि हमारे पास विपुल मात्रा में मानव संपदा है। कुछ चीजें ऐसी हैं कि हम उन सेवाओं को दें ताकि हमारी अपनी product भी साथ-साथ चलती जाए। कभी-कभार ऐसा होता है कि भई आप ये लेंगे तो साथ में ये मिलेगा, तो साथ में ये भी जोड़ा जा सकता है। इसलिए हम सिर्फ IT के द्वारा सेवा करें, ये जो limited हमारी सोच बनी है, उसमें से हमने बाहर आना चाहिए, इसका दायरा बढ़ाना चाहिए। और सिर्फ बहुत ऊंचे पढ़े-लिखे लोग दुनिया को जरूरत, ऐसा नहीं है, अनेक प्रकार के लोगों की दुनिया को जरूरत है और ये आवश्यकता बढ़ने वाली है। और इसलिए हमने हमारे सेवा के layers, multiple layers सेवा के हमने दायरे पर सोचना होगा। वो अगर हम करते हैं तो बहुत लाभ पाएंगे, देशा की सेवा करेंगे, दुनिया की भी सेवा करेंगे।

कुछ तो हम लोगों ने पुराने जमाने में जो नियम बनाएं हैं, उस भय से बनाए हुए हैं - कहीं दुनिया आ जाएगी, खा जाएगी। आत्मविश्वास का अभाव रहा क्योंकि बहुत सालों तक हम गुलाम रहे। हमें उस मानसिकता से बाहर आना पड़ेगा। मुझे अभी भी समझ में नहीं आ रहा है कि arbitration हमारे देश में क्यों न हो? Global arbitration हमारे देश में क्यों न हो? Arbitration के लिए आज भी हमें London क्यों जाना पड़े? क्या हमारे पास उस प्रकार के chartered accountant, उस प्रकार के lawyer नहीं है क्या? हैं! लेकिन हमने कानून ऐसे बना के रखे हैं कि हमारा ही.. हां और कुछ लोगों को डर लगता है, नहीं-नहीं ये यहां मत शुरू करो, ये सब दुनिया भर के बढे-बढे बुद्धिमान वकील आ जाएंगे, तो हमारा काम नहीं चलेगा। ऐसा नहीं होने वाला है ये।

जो सोच किसे जमाने में थी कि technology आएगी तो job चली जाएगी, computer आएगा तो job चली जाएगी। आज हम देख रहे हैं कि technology के कारण job का global scope पैदा हो गया है। वक्त बदल चुका है। हमने स्थितियों को visualise करना चाहिए और हमें भयभीत रहने की जरूरत नहीं, इतना बड़ा, सवा सौ करोड़ का देश है। हम दुनिया से दबकर क्यों जीना चाहिए? हम अपनी ताकत खड़ी करें, दुनिया में हम अपना अस्तित्व दिखा सकते हैं, इस मिजाज से हमारी योजना और रचनाएं होनी चाहिए।

उसी प्रकार से finance का sector, हम देख रहे हैं अब via मॉरिशस आइए, via सिंगापुर आइए, हमें डर लगता है कहीं अपने यहां कर लिया तो? क्यों न करें हम? ये हम अपनी ताकत को मॉरिशस, सिंगापुर या मलेशिया को क्यों divert करें? हम अपने कानूनों और नियमों को इस प्रकार से बनाएं ताकि इन चीजों को हम भी हजम कर सकें और अपनी व्यवस्थाओं को विकसित कर सकें। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। और आने वाले दिनों में देखेंगे आप, हम उन व्यवस्थाओं को विकसित करना चाहते हैं कि जो globally भारत को.. हां कुछ हमने उसकी सीमाएं भी बांधनी पड़ती हैं। जैसे intellectual property right, अब हम global parameter के intellectual property right की दिशा में काम नहीं करेंगे तो दुनिया हमारे साथ नाता नहीं जोड़ेगी।

हम जानते हैं हमारी entertainment industry बहुत बड़ी ताकत रखती है। सिर्फ हिंदुस्तान में फिल्म बनाने की ताकत रखती है, ऐसा नहीं है। लेकिन intellectual property right में उनको भरोसा दुनिया को हम दे दें, मुझे विश्वास है हम globally एक बहुत बड़ा destination बन सकते हैं, उनके अपने creative work के लिए। भारत में creative work के लिए इतनी बड़ी संभावनाएं पड़ी हैं - दुनिया में कोई कार बनाए, कार की manufacturing वाला होगा वहां लेकिन कार में अंदर की seat की design क्या हो? वो बनाने की ताकत हिंदुस्तानी में है। और वो ही कार ज्यादा तब बिकेगी, इसलिए नहीं कि तुम्हारा मशीन कैसा है, सीट कैसी है, इसके आधार पर कार बिकती है कि भई बैठना कितना comfortable है, उतरना कितना comfortable है और उस काम को करने वाले भी लोग होते हैं। Service! Creative services! इसके लिए हमारे पास इतनी संभावनाएं हैं और हम उसका लाभ उठा सकते हैं।

आज योगा और IT - दो क्षेत्र ऐसे हैं, जिन्‍होंने दुनिया में हिंदुस्तान को भी पुहंचाया है और इसके माध्यम से हिंदुस्तान भी पहुंचा है। लेकिन एक विशेषता है, ये दोनों पहुंचे हैं क्योंकि वहां सरकार नहीं है... बड़ी देर लगी आपको, ये इसलिए पहुंचे हैं क्योंकि हम नहीं हैं वहां। क्योंकि सरकार का mind set ऐसा बना हुआ है वहां, सालों से, ये हिंदुस्तान के 20, 22, 24 साल के नौजवान हैं, जिन्होंने दुनिया में भारत के IT माध्यम से पहचान खड़ी की है, ताकत के रूप में पहचान बना दी है। उसी प्रकार से दुनिया का मानव जो कि stress के कारण परेशान है, frustration से जी रहा है, बहुत कुछ पाने के बाद भी संतोष अनुभव नहीं कर रहा है तो वो ढूंढ़ता-ढूढ़ता आया, वो योग उठाकर ले गया। कोई आकर के ले गया, कोई जाकर के दे आया, ये दो route से हमारा हुआ है।

हम इसको और अधिक scientific बनाकर के एक बहुत ही, यानी भारत की अपनी सोच के रूप में, हम ऐसे किन-किन क्षेत्रों में.. मान लीजिए संगीत, दुनिया को, दुनिया को, मैं मानता हूं संगीत के माध्यम से हम बहुत कुछ दे सकते हैं। दुनिया को अभी तक ये भी पता नहीं है कि तन डोले इसलिए संगीत होता है कि मन डोले इसके लिए संगीत होना चाहिए। ज्यादातर परिचय यही है कि संगीत यानी तन डोले, संगीत से मन डोलना चाहिए और ये ताकत हिंदुस्तान में है! ये ताकत हिंदुस्तान में है! ये देश है कि किस प्रहर में कौन सा राग हो, किस बीमारी में कौन सा राग हो, बालक अवस्था हो तो कौन सा राग हो, निवृत्त अवस्था हो तो कौन सा राग हो। यहां तक जहां वैज्ञानिक काम हुआ हो, क्या दुनिया को हम ये सेवा नहीं दे सकते हैं? फिर से एक बार गुरु-शिष्य परंपरा revive हो और मान लीजिए हिंदुस्तान में एक हजार अच्छे सितारवादक हैं। और दुनिया के एक हजार शिष्य उनके यहां आ जाएं, उनके यहां रहें, सितार सीखें, साल भर का अपना गुरु-दक्षिणा दें और वापिस चले जाएं। क्या भारत का, संगीत की दुनिया में जिसने साधना की है, उसको कभी भूखे रहने की नौबत आएगी क्या? कभी नहीं आएगी और जो यहां से सीखकर गया, वो सिर्फ सितार ही सीखकर जाएगा कि पूरा हिंदुस्तान लेकर के जाएगा? हिंदुस्तान अपने आप पहुंत जाएगा कि नहीं जाएगा?

हमारी service sector की ताकत ये है कि विश्व में हमें अपने आप को पहुंचाने का एक बहुत बड़ा अवसर हमारे सामने आया है। सिर्फ विश्व की सेवा करेंगे, ऐसा नहीं, विश्व को अपना बनाने की ताकत हमने पाई है.. और समय-समय पर इस देश ने किया है। मैं अभी फ्रांस गया था। फ्रांस में मैं युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के लिए गया था। प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी हुई। सेवा कैसी हमारे लोग कर सकते हैं, इसका एक उत्तम उदाहरण है। एक सौ साल हो गए हैं, प्रथम विश्व युद्ध में करीब 14 लाख हिंदुस्तान के जवानों ने किसी और के लिए लड़ाई लड़ी थी, अपने लिए नहीं, हमारी जमीन को बढ़ाने के लिए नहीं, हम मर रहे थे इसलिए बचने के लिए नहीं, किसी और के लिए। और करीब-करीब 75 हजार लोगों ने शहादत थी। मैं मानता हूं कि दुनिया समझे किसी भी प्रकार की सेवा यानी अपना जीवन आहूत कर देने तक की सेवा देना, इस देश ने करके दिखाया है। अगर उसने किसी की रक्षा के लिए अपनी जान देकर के दिखाया है तो जीवन बचाने के लिए हमारे डॉक्टरों ने दुनिया में जाकर के अपने करतब दिखाए हैं।

और इसलिए मैं कहता हूं कि हम इस क्षेत्र को सीमित न मानें। ये बहुत बड़ी मानवता की सेवा है। ये बहुत बड़ी देश की सेवा है। उसको हमारी ताकत को जल्दी पहचाने, हम अपनी ताकत को ढूंढे, उसको हम globally requirement के अनुसार value addition करें, दुनिया की requirement का हम mapping करें, और हम कर सकते हैं। 2025 में किस देश की किसकी जरूरत पड़ेगी, ये हम कर सकते हैं। आज इतनी सारी चीजें हो सकती हैं और उस प्रकार से हम तैयारी करें।

मुझे विश्वास है सेवा के क्षेत्र में हम इन कामों को करेंगे तो जरूर ही भारत अपनी एक जगह बना सकता है। सरकार में जो नियमों को बदलना होगा, उसको भी बदलते हुए इन कामों को करना चाहिए। मैं फिर एक बार.. सबने मिलकर के इस बात को आगे बढ़ाया है और भी इसको बल दिया जाए। सरकार में भी इस बदले हुए brain drain के जमाने को छोड़कर के brain gain की दिशा में हम अपनी योजनाएं को केंद्रित करें। इस अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।

Pariksha Pe Charcha with PM Modi
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On May 2 Didi will get certificate of Bengal ex-chief minister by the people of the state: PM Modi
April 17, 2021
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People from all corners of India are seen in Asansol. But the misgovernance of Bengal governments affected Asansol: PM Modi
PM Modi says on May 2, which is the day of assembly election results, Didi will be given the certificate of Bengal ex-chief minister by the people of the state
In Asansol, PM Modi says Mamata Banerjee has skipped several meetings called by the Centre to discuss many key issues
PM Modi promises to implement all the welfare schemes of the central government in West Bengal if BJP is elected to power in the state

 

नमोष्कार !

मां कल्याणेश्वरी और घाघर बूढ़ी चंडी...आज मेरे लिए अवसर है इस पवित्र धरती को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करने का। बांग्ला नव वर्ष शुरू होने के बाद आज बंगाल में मेरी ये पहली सभा है। नव वर्ष में बंगाल में बीजेपी की डबल इंजन की सरकार बनने जा रही है।

चार दोफार मोतोदान, टीएमसी होलो खान-खान !

(चार दौर का मतदान, टीएमसी खंड-खंड हो गई)। 

बाकी चार दोफार मोतोदान, दीदी-भाइपो टिकिट कटान ! 

(बाकी चार बार का मतदान, दीदी भाइपो का पत्ता साफ)।

पांचवें चरण के मतदान में भी कमल के फूल पर बटन दबा करके भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए आज सुबह से बहुत बड़ी तादाद में लोग निकले हैं। बहुत भारी मतदान हो रहा है। मैं अब तक मतदान करने वाले सभी मतदाताओं का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं और उनका धन्यवाद करता हूं।  

साथियो

आसनसोल हो, दुर्गापुर हो, इस पूरे क्षेत्र में बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता बहुत पहले से है हमेशा से है। द्वारकानाथ टैगोर जी, राजेन मुखर्जी, बीरेंद्रनाथ मुखर्जी जैसे अनेक व्यक्तित्वों ने इस क्षेत्र की संपदा को देश की आत्मनिर्भरता के संकल्प के रूप में आगे बढ़ाया।

साइकिल से लेकर रेल तक, पेपर से लेकर स्टील तक, एल्यूमिनियम से लेकर ग्लास तक, ऐसे अनेक कारखानों में, यहां की फैक्ट्रियों में काम करने के लिए पूरे देश से लोग यहां आते हैं। आसनसोल एक प्रकार से लघु भारत है, हिन्दुस्तान का हर व्यक्ति यहां मिल जाएगा। लेकिन बंगाल में जो सरकारें रहीं, उनके कुशासन ने आसनसोल को कहां से कहां पहुंचा दिया। जहां लोग चाकरी के लिए आते थे, आज यहां से पलायन कर रहे हैं। मां-माटी-मानुष की बात करने वाली दीदी ने, यहां हर तरफ माफिया राज फैला दिया है। आसनसोल की प्राकृतिक संपदा को लूटने के लिए कोयला माफिया, नदियों की बालू को लूटने के लिए अवैध खनन माफिया, सरकारी जमीन पर कब्जे के लिए भू-माफिया।

साथियो

यहां सालनपुर, बाराबनी, जमुरिया रानीगंज, उखड़ा, बल्लालपुर से लेकर बांकुड़ा बॉर्डर तक अवैध कोयला खनन का साम्राज्य फैला हुआ है। यहां के कोयला, रेत और दूसरे खनिजों का काला माल कहां तक पहुंचता है, किस-किस तक पहुंचता है, ये हर कोई जानता है। बंगाल के ट्रक वालों को, ट्रांसपोर्ट से जुड़े साथियों को, यहां के उद्यमियों को जो भाइपो टैक्स देना पड़ता है, वो भी बंगाल के लोग भली-भांति जानते हैं। 

साथियो

इस चुनाव में आपका एक वोट सिर्फ टीएमसी को साफ करेगा, इतना ही नहीं है बल्कि आपका एक वोट यहां से माफिया राज को भी साफ करेगा। आपको पता है आपके वोट की ताकत क्या है? आपका एक वोट पूरे माफिया राज को यहां साफ कर देगा। ये ताकत है आपके वोट की।  

भाइयो-बहनो 

आज आपसे शिकायत करना चाहता हूं...करूं ?...आपके खिलाफ है शिकायत...करूं ?...बुरा तो नहीं मानोंगे न...लेकिन मेरी शिकायत जरा देखिए…मैं यहां दोबार आया हूं.... लोकसभा के चुनाव में....जब मुझे प्रधानमंत्री बनना था और आप से वोट मांगने आया था। बाबुल जी के लिए वोट मांगने आया था। लेकिन पहले जब आया, तब तो मेरे लिए वोट मांगा था, फिर भी एक चौथाई भी लोग नहीं थे सभा में। लेकिन आज चारों तरफ...मैंने ऐसी सभा पहली बार देखी है। अब बताइए, मेरी शिकायत मिठी है कि कड़वी है। आज आपने ऐसा दम दिखा दिया है। ऐसी ताकत दिखा दिए...मैं जहां देख सकता हूं...मुझे लोग ही लोग दिखते हैं...बाकी कुछ दिखता ही नहीं है। क्या कमाल कर दिया है आप लोगों ने। लेकिन आगे का काम बहुत महत्वपूर्ण है। और वो है वोट देने के लिए जाना, वोट देने के लिए औरों को ले जाना। करोंगे...पक्का करोंगे...सब लोग करोंगे...देखिए तभी यहां से ये माफिया राज समाप्त होगा। ये माफियाशाही तभी समाप्त होगी।

और भाइयो-बहनो

मैं बंगाल जहां भी गया हूं यही माहौल है। और उधर क्या है?

दीदी, ओ दीदी, 

देखिए दीदी...ओ दीदी...2 मई में अब सिर्फ आधा महीना बचा है। आधा चुनाव हो चुका है। सिर्फ कुछ दिन और। कोयला धुले, मोयला जाय ना !

भाइयो और बहनो, 

सोनार बांग्ला के संकल्प के साथ बीजेपी सरकार यहां आपकी हर मुश्किल कम करने के लिए काम करेगी। बंगाल में कानून व्यवस्था का राज स्थापित किया जाएगा। कानून के राज में यहां नए उद्योग लगेंगे, बंगाल में निवेश बढ़ेगा। बीजेपी सरकार में हर कोई अपना काम करेगा। आपके जीवन में टीएमसी के तोलाबाजों की जो घुसपैठ हुई है, उसे जीरो किया जाएगा, उसे दूर किया जाएगा। पुलिस अपनी जिम्मेवारी निभाएगी, अपना काम करेगी, राज्य सरकार के अलग-अलग विभाग अपने जनसेवा का दायित्व निभाएंगे, अपना काम पूरा करेंगेप्रशासन अपनी जिम्मेवारियों को निभाते हुए जनता जनार्दन की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए दिन-रात काम करेगा। और सरकार अपनी जिम्मेवारियों को पूरा करने के लिए काम करेगी। और बीजेपी कार्यकर्ता...मैं आपको विश्वास दिलाता हूं आपकी सेवा में हरदम खड़ा रहेगा। और इसमें जो भी खेला करने की कोशिश करेगा, उस पर कानून के तहत उतनी ही सख्त कार्रवाई भी होगी।

भाइयो और बहनो,

दीदी ने बीते दस सालों में विकास के नाम पर आपके साथ विश्वासघात किया है। विकास के हर काम में, हर काम के आगे दीदी दीवार बनकर खड़ी हो गई हैं। केंद्र सरकार ने 5 लाख रुपए के मुफ्त इलाज की सुविधा दी, तो दीदी दीवार बन गईं। केंद्र सरकार ने शरणार्थियों की मदद के लिए कानून बनाया, तो दीदी इसका भी विरोध करने लगीं। केंद्र सरकार ने मुस्लिम बहनों को तीन तलाक से मुक्ति के लिए कानून बनाया, तो दीदी फिर आगबबूला हो गईं। केंद्र सरकार ने किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने वाले कानून बनाए, तो दीदी विरोध में उतर आईं। केंद्र सरकार ने किसानों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करने शुरू किए, तो दीदी ने इससे भी किसानों को वंचित रख दिया। 

साथियो

बंगाल को विकास रोकने वाली नहीं, डबल इंजन की सरकार चाहिए। बंगाल की बीजेपी सरकार, आपका लाभ कराने वाली हर उस योजना को लागू करेगी, जिन्हें दीदी की सरकार ने रोका हुआ है। पहली ही कैबिनेट में पीएम किसान सम्मान निधि पर बड़ा फैसला लिया जाएगा। बंगाल के हर किसान के खाते में 18 हजार रुपए सीधे ट्रांसफर हो, जिसको दीदी ने रोकने की कोशिश की। 2 मई के बाद नई सरकार बनने के बाद दीदी नहीं रोक पाएंगी। क्योंकि सरकार आपने बनाई है...आपके लिए बनाई है...और वो आपके लिए काम करेगी।

भाइयो और बहनो

आप मुझे बताइए... दीदी को अगर आप लोगों के दु:ख-दर्द की परवाह होती, तो क्या वो आपकी भलाई के...आपके हित वाले कामों को रोकने का काम कभी करती क्या ? ये रुकावटे डालती क्या ? दीवार बनती क्या ? दीदी को अगर आपकी तकलीफ की चिंता होती, तो क्या वो तोलाबाजी होने देतीं क्या ? जरा इधर से जवाब दीजिए तोलाबाजी होने देतीं क्या ?  सिंडिकेट को आगे बढ़ाती क्या ? कटमनी वसूलने देतीं क्या ?

साथियो

दीदी, अपने अहंकार में दीदी इतनी बड़ी हो गई हैं कि हर कोई उन्हें अपने आगे छोटा दिखता है। केंद्र सरकार ने अनेक बार अनेक विषयों पर बात करने के लिए बैठकें बुलाई हैं, लेकिन दीदी कोई न कोई कारण बताकर इन बैठकों में नहीं आतीं। जैसे कोरोना पर पिछली दो बैठकों में बाकी मुख्यमंत्री आए, लेकिन दीदी नहीं आईं। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बाकी मुख्यमंत्री आए, लेकिन दीदी नहीं आईं। मां गंगा की सफाई के लिए देश में इतना बड़ा अभियान शुरू हुआ, लेकिन दीदी उससे जुड़ी जो बैठक होती है, उसमें भी नहीं आईं। एक-दो बार न आने का तो समझ में आता है साथियों, लेकिन दीदी ने यही तरीका बना लिया है। दीदी बंगाल के लोगों के लिए कुछ देर का समय नहीं निकाल पातीं। ये उन्हें समय की बर्बादी लगता है। और जब दीदी के तोलाबाज, कोरोना के दौरान भेजे गए राशन को लूटते हैं, तो वो उन्हें खुली छूट देती हैं। 

केंद्रीय टीमें चाहे सहयोग के लिए आएं या फिर करप्शन की जांच के लिए, दीदी उनको रोकने के लिए पूरे संसाधन लगा देती हैं। दीदी केंद्रीय वाहिनी ही नहीं, सेना तक को बदनाम करती हैं, राजनीति के लिए झूठे आरोप लगाती हैं। दीदी, खुद को देश के संविधान से ऊपर समझती हैं। दीदी चोखे ओहोन्कारेर पोरदा। (दीदी की आंखों पर अहंकार का पर्दा चढ़ा हुआ है।)

भाइयो और बहनो,

दीदी की राजनीति सिर्फ विरोध और गतिरोध तक सीमित नहीं है। बल्कि दीदी की राजनीति, प्रतिशोध की खतरनाक सीमा को भी पार कर गई है। बीते 10 साल में बीजेपी के अनेकों कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है। अभी मेरी... यहां ऊपर आने से पहले... कई पीड़ित परिवारों से बात हुई है। दीदी की वजह से न जाने कितनी माताओं ने अपने बेटों को खोया है, न जाने कितनी बहनें आज भी अपने भाई का इंतजार कर रही हैं। दीदी की निर्ममता, उनकी असंवेदनशीलता हमें कुछ दिन पहले ही फिर एकबार दिखाई दी है, सुनाई दी है।

साथियो

कूचबिहार में जो हुआ, उस पर कल एक ऑडियो टेप आपने सुना होगा। ऑडियो टेप सुना क्या आपने ? 5 लोगों की दुखद मृत्यु के बाद दीदी किस तरह राजनीति कर रही हैं, ये इस ऑडियो टेप के अंदर साफ-साफ खुल गया है, सामने आता है। इस ऑडियो टेप में कूचबिहार के टीएमसी नेता को कहा जा रहा है कि मारे गए लोगों के शवों के साथ रैली निकालो। दीदी, वोटबैंक के लिए कहां तक जाएंगी आप ? सच्चाई ये है कि दीदी ने कूचबिहार में मारे गए लोगों की मृत्यु से भी अपना सियासी फायदा करने की सोची। शवों पर राजनीति करने की दीदी को बहुत पुरानी आदत है।

साथियो

दीदी ने बंगाल में ये हाल बना दिया है। जनता ने भी जब उनके विरोध की कोशिश की, तो उसको कुचल दिया गया है। बंगाल की जनता के अधिकार, दीदी के लिए कोई मायने नहीं रखते। 2018 के पंचायत चुनाव पश्चिम बंगाल कभी नहीं भूल सकता। बर्धमान से लेकर बांकुरा, बीरभूमि, मुर्शीदाबाद के लोगों को आज भी याद है कैसे उनके अधिकारों को छीना गया।

आप सोचिए

बंगाल में 20 हजार से ज्यादा पंचायतों में सीधे दीदी के तोलाबाजों को निर्वाचित कर दिया गया। दीदी ने इतना आतंक फैलाया कि एक तिहाई से भी ज्यादा पंचायतों में कैंडिडेट पर्चा तक नहीं भर पाए। हमले के डर से WhatsApp तक पर नॉमिनेशन फाइल करने पड़े। जीत के बाद भी जनप्रतिनिधियों को पड़ोसी राज्यों में शरण लेनी पड़ी। लोकतंत्र के इस अपमान से, लोकतंत्र को इस तरह कमजोर किए जाने से सुप्रीम कोर्ट तक ने नाराजगी जताई। लेकिन दीदी ने लोकतंत्र का सम्मान नहीं किया, लोकतंत्र की परवाह नहीं की।

साथियो

बंगाल और भारत के लिए रोबी ठाकुर का आदर्श है - चित्तो जेथा, भॉय- शुन्नो। हृदय जहां भय मुक्त रहे। लेकिन दीदी का प्रयास रहता है- चित्तो जेथा भॉया-क्रांतो। हृदय जहां भयाक्रांत रहे। दीदी को इस बार के चुनाव में छप्पा वोट नहीं करने दिया जा रहा, तो वो और बौखला गई हैं। दीदी को गुंडागिरी-मस्तानगिरी का खैला नहीं करने दिया जा रहा है, तो दीदी बौखला गई हैं। दीदी द्वारा हर पैंतरा आजमाया जा रहा है ताकि बंगाल के लोगों को वोट देने से रोका जाए। टीएमसी द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं, चुनाव आयोग पर दबाव बनाया जा रहा है। दिल्ली से लेकर बंगाल तक दीदी ने मोदी के खिलाफ मोर्चा खुलवा दिया है।

दीदी, ओ दीदी, ओ आदरणीय दीदी

आप जितनी चाहे साजिशें कर लीजिए, जितनी चाहे कोशिशें कर लीजिए। इस बार आपकी साजिश बंगाल के लोग खुद ही नाकाम कर रहे हैं। इस बार बंगाल के लोगों ने ही आपके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बंगाल के लोगों ने आप पर अभूतपूर्व विश्वास किया था। अब वो आपको हमेशा-हमेशा के लिए एक ऐसा सॉर्टिफिकेट देने वाली है बंगाल की जनता इस चुनाव में, जो आप जीवन भर घर में लटका कर रख सकती हो। कौन सा सॉर्टिफेकट जनता देने वाली है, जो 2 मई को आने वाला है ? वो सॉर्टिफिकेट आने वाला है भूतपूर्व मुख्यमंत्री। यानि दीदी, ये बंगाल की जनता आपको आजीवन एक सॉर्टिफिकेट देने वाली है भूतपूर्व मुख्यमंत्री...लेकर घुमते रहना। 

भाइयो-बहनो

बंगाल के लोग, बंगाल के लोगों से आपकी नफरत भी महसूस कर रहे हैं। दीदी के करीबी, शिड्यूल्ड कास्ट के मेरे भाइयों और बहनों को भिखारी कहते हैं, दीदी चुप रहती हैं। दीदी के करीबी बीजेपी को वोट देने वालों को बंगाल से बाहर फेंकने की धमकी देते हैं, दीदी चुप रहती हैं। किसी की दुखद मृत्यु पर दीदी की संवेदना भी वोटबैंक का फिल्टर लगाकर ही प्रकट होती है।

दीदी

पश्चिम बंगाल आपकी दुर्नीति से परेशान है, इतना ही नहीं है, बल्कि बंगाल को आपकी नीयत पर भी शक है। इसलिए पश्चिम बंगाल के कोने-कोने से एक ही आवाज़ सुनाई दे रही है-   

कीच्छू नेइ तृनोमूल, एबार भोट पॉद्दोफूले। (कुछ नहीं अब तृणमूल में, इस बार वोट कमल-फूल में।)

भाइयो और बहनो,

10 साल तक दीदी ने बंगाल को भेदभाव और पक्षपात वाली सरकार दी है। हालात तो ये है कि स्पोर्ट्स क्लबों, खिलाड़ियों तक की मदद में भी दीदी ने भेदभाव किया। जो स्पोर्ट्स क्लब दीदी का गुणगान करे, उनके गीत गाए, उन्हें पैसा। जो खेल पर अपना ध्यान दे, बंगाल का नाम रोशन करे, वो स्पोर्ट्स क्लब यहां पैसे के लिए तरसते हैं। दीदी की इसी दुर्नीति की वजह से बुज़ुर्गों को मिलने वाला ‘भाता’ तक सभी लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। गांव की सड़क को भी दीदी की सरकार ने राजनीति का शिकार बना दिया। मनरेगा की मज़दूरी हो या फिर आपदा की राहत हो, दीदी की सरकार ने सबमें भेदभाव किया, पक्षपात किया। आपको तीन साल पहले की रामनवमी याद है? आसनसोल-रानीगंज के दंगे कौन भूल सकता है! इन दंगों में सैकड़ों लोगों की जीवन भर की मेहनत राख हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों का हुआ, पटरी पर दुकान लगाने वाले और छोटे व्यापारियों का हुआ। 

दंगाइयों का साथ किसने दिया? - दीदी ने।

तुष्टिकरण की नीति किसने पनपाई? – दीदी ने।

किसके कारण पुलिस दंगाइयों के पक्ष में खड़ी रही? –  दीदी के।

एक ही जवाब है न...एक ही जवाब है न...हर कोई कह रहा है दीदी के कारण...दीदी के कारण...।

भाइयो और बहनो,

जो विकास पर विरोध को, विश्वास पर प्रतिशोध को, सुशासन पर राजनीति को, प्राथमिकता देती है, ऐसी सरकार पश्चिम बंगाल का भला नहीं कर सकती। इसलिए बंगाल को आशोल पोरिबोरतोन चाहिए। आशोल पोरिबोरतोन बंगाल में सबका साथसबका विकाससबका विश्वास के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल के युवाओं को रोजगार के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल में कानून के राज के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल की भलाई के लिए।

साथियो

दीदी के राज में महिलाओं के साथ जो अत्याचार हुआ है, उसकी चर्चा तक दीदी ने नहीं होने दी है। राज्य सरकार के आंकड़े छिपाकर, महिलाओं पर अत्याचार की खबरों को दबाकर दीदी ने सबसे बड़ा खेला, बंगाल की महिलाओं के साथ ही किया है। मैं आज विशेष रूप से बंगाल की बहन-बेटियों को एक बात के लिए आश्वस्त करता हूं। बीजेपी की सरकार हर वर्ग, हर मत-मज़हब को उसकी बेटी की सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करेगी। दीदी की सरकार ने यहां रेप जैसे संगीन अपराध के दोषियों को जल्द से जल्द सजा सुनाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट पर अड़ंगा डाला, उसको रोक दिया। देश भर में ऐसी एक हजार अदालतें खोली जा रही हैं लेकिन दीदी ने बेटियों को न्याय दिलाने वाली ऐसी एक भी अदालत खोलने नहीं दी। बीजेपी सरकार में फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी तेजी से निर्माण किया जाएगा। गरीब, दलित, आदिवासी बेटियों को यहां से दूसरे राज्यों में भेजने का जो अवैध काम किया जाता है, उस पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

साथियो,

सोनार बांग्ला का यही संकल्प बंगाल बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में रखा है। बंगाल में Ease of Living, Ease of Doing Business का माहौल बनाया जाएगा। यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर पर, रोड, रेल, एयर, इंटरनेट, हर प्रकार की कनेक्टिविटी को डबल इंजन सरकार, डबल स्पीड के साथ आधुनिक बनाएगी। इस क्षेत्र को आर्सेनिक युक्त ज़हरीले पानी से मुक्ति मिले, इसके लिए पाइप से हर घर जल के प्रकल्प को तेज़ी से यहां लागू किया जाएगा। दीदी ने जो कुछ भी लाभ आप तक पहुंचने से रोका है, वो तेज़ी से मिलेगा। डबल इंजन की सरकार में डबल बेनिफिट और डायरेक्ट बेनिफिट मिलेगा। 

एबार शोंघात नॉय, शॉहोजोगिता होबे!

एबार बिरोध नॉय, बिकाश होबे!

एबार मोने भय नॉय, पेटे भात होबे!

एबार शिक्खा होबे, शिल्पो होबे, कोर्मो-शोंस्थान होबे! 

आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए...मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। दोनों हाथ ऊपर करके मेरे साथ बोलिए 

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

बहुत-बहुत धन्यवाद !