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कार्डिनल जॉर्ज एलेंचेरी

मुख्‍य पादरी एन्‍ड्रयूज़ थाजत

मुख्‍य पादरी कुरियाकोस भरनीकुलांगरा

मुख्‍य पादरी अनिल कोउटू

श्री अरुण जेटली

डॉ. नजमा हेपतुल्‍ला

श्री पी जे कुरियन, उपाध्‍यक्ष, राज्‍यसभा

मॉनसेग्‍नर सेबास्टियन वाडाकुम्पडान

PM Modi at National Celebration of Elevation to Sainthood of Elias Chavara n Mother Euphrasia (1)

मैं केरल के दो महान संतों- सेंट कुरियाकोस एलियास चावरा और मदर यूफ्रेसिया को संत की उपाधि मिलने के अवसर पर आयोजित इस समारोह में भाग लेने पर आनंदित महसूस कर रहा हूं। पूरा देश उनके उत्कृष्‍ट पद को प्राप्‍त करने पर गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनके उन्‍नयन से पहले केरल की ही सेंट अल्‍फोन्‍सा ने इस पदवी को प्राप्‍त किया था।

सेंट कुरियाकोस एलियास चावरा और सेंट यूफ्रेसिया के जीवन और कार्य न केवल ईसाई समुदाय के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायक हैं। ये संत मानवता की बेहतरी के लिए निःस्वार्थ सेवा के जरिए ईश्वर को समर्पण की मिसाल हैं।

प्रार्थना में महारथ हासिल कर चुके सेंट चावरा एक समाज सुधारक भी थे। ऐसे समय में जब शिक्षा की सुविधा सीमित लोगों को ही सुलभ थी, उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया था कि हर चर्च में एक स्कूल होना चाहिए। इस तरह उन्होंने शिक्षा के द्वार समाज के सभी तबकों के लोगों के लिए खोल दिये थे।

केरल से बाहर निवास करने वाले कुछ ही लोगों को यह जानकारी है कि उन्होंने एक संस्कृत स्कूल भी खोला था। उन्होंने एक प्रिंटिंग प्रेस की भी शुरुआत की थी। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी उनका योगदान उल्लेखनीय था।

सेंट यूफ्रेसिया एक संत थीं, जिन्होंने अपना जीवन प्रार्थना और ईश्वर के प्रति श्रद्धा को समर्पित कर दिया था।

दोनों ही संतों ने अपना जीवन सहयोगियों की सेवा के जरिए ईश्वर को समर्पित कर दिया था। प्राचीन भारतीय कहावत हैः “आत्मानो मोक्षार्थम् जगत हितायाचा”- यह कहावत उनके जीवन को चरितार्थ करती है।

मित्रों,

अध्यात्मवाद भारत की विरासत में निहित है। हजारों साल पहले भारत एवं यूनान के संतों के बीच बौद्धिक एवं आध्यात्मिक आदान-प्रदान हुआ था। नये विचारों के प्रति भारत का खुलापन ऋग्वेद में स्पष्ट नजर आता है : आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः। यह दर्शन अनंत काल से हमारी बौद्धिक हस्तियों का मार्गदर्शन करता रहा है। भारत की मातृभूमि में अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक धाराओं का जन्म हुआ है। इनमें से कुछ धाराएं तो भारतीय सीमा के पार भी चली गई हैं।

सभी धर्मों के लोगों का स्वागत करने एवं उनका सम्मान करने की परंपरा भारत में उतनी ही पुरानी है, जितना खुद भारत का इतिहास है। जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा थाः हम न केवल सॉर्वभौमिक सहिष्णुता में विश्वास करते हैं, बल्कि हम यथार्थ के रूप में सभी धर्मों को स्वीकार करते हैं।

स्वामी विवेकानंद ने सौ साल पहले जो कहा था वह आज भी प्रासंगिक है और आगे भी सदा न केवल इस देश, बल्कि इस सरकार के लिए भी अथवा भारत में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार के लिए प्रासंगिक रहेगी। सभी धर्मों के लोगों के समान आदर का सिद्धांत हजारों साल से भारत की नैतिकता का एक हिस्सा रहा है और यह फिर कुछ इसी तरह से भारत के संविधान का अभिन्न अंग बन गया। हमारा संविधान शून्य में विकसित नहीं हुआ है। भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं में इसकी जड़ें समाई हुई हैं।

गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर ने हमें एक ऐसी भूमि का सपना देखने के लिए प्रेरित किया था, जहां मन में कोई भय न हो और सिर गर्व से ऊंचा रहे। यह आजादी का वह स्वर्ग है जिसका सृजन एवं संरक्षण करने के प्रति हम कटिबद्ध हैं। हम इसमें विश्वास रखते हैं : एकम सत विप्र बहुधा वदन्ति।

मित्रों,

अब मैं उस मुद्दे का जिक्र करना चाहता हूं जो समकालीन विश्व में शांति एवं सौहार्द के केन्द्र में है। विश्व में धार्मिक मसले पर विभाजन की भावना एवं शत्रुता बढ़ती जा रही है। यह वैश्विक चिंता का विषय बन गयी है। इस संदर्भ में सभी धर्मों के पारस्परिक सम्मान की प्राचीन भारतीय अवधारणा अब वैश्विक स्तर पर अपनी पैठ बनाने लगी है।

लम्बे समय से महसूस की जा रही इस जरूरत और पारस्परिक सम्मानीय रिश्तों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए ही 10 दिसम्बर, 2008 को हेग में ‘मानवाधिकारों में विश्वास’ पर अंतर-धार्मिक सम्मेलन आयोजित किया गया था। संयोगवश यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की 60वीं वर्षगांठ भी थी।

विश्व में हर प्रमुख धर्म-ईसाईयत, हिन्दुत्व, यहूदीवाद, बहाई, बौद्ध धर्म, इस्लाम व ताओवाद एवं स्वदेशी धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले धार्मिक नेताओं ने बैठक की, विचार-विमर्श किया और सार्वभौमिक घोषणा पत्र एवं धार्मिक अथवा आस्था की आजादी को अक्षुण्ण रखने का संकल्प व्यक्त किया।

अपने ऐतिहासिक घोषणा पत्र में उन्होंने यह परिभाषित किया कि आस्था की आजादी में क्या-क्या शामिल हैं और उन्हें कैसे अक्षुण्ण रखना है।

हमारा यह मानना है कि किसी धर्म अथवा आस्था को अपनाने, उसे बनाये रखने और उसका पालन करने की आजादी किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत पसंद है।

विश्‍व आज एक चौराहे पर है जिसे सही ढंग से पार नहीं किया गया तो वह ह‍में फिर से धार्मिक उन्‍माद, कट्टरता और खून-खराबे वाले अंधेरे दिनों में धकेल सकता है। सभी धर्मों का यह सदभावनापूर्ण मिलन कतई संभव नहीं था। हालांकि, विश्‍व तीसरे सहस्राब्‍दी में प्रवेश कर चुका है। लेकिन अब यह संभव हुआ है। यह दर्शाता है कि शेष विश्‍व भी प्राचीन भारत के पदचिन्‍हों पर चल पड़ा है।

भारत और मेरी सरकार की ओर से मैं यह घोषणा करता हूं कि मेरी सरकार उक्‍त घोषणाओं का अक्षरश: पालन करती है। मेरी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि पूरी धार्मिक स्‍वतंत्रता हो और हर किसी को अपनी पसंद के धर्म में बने रहने या किसी अन्‍य धर्म को बिना किसी दबाव या मजबूरी के अपनाने की पूरी आजादी हो। मेरी सरकार किसी भी धार्मिक समूह को, चाहे वह अल्‍पसंख्‍यक या बहुसंख्‍यक वर्ग से संबंधित हो, प्रत्‍यक्ष या परोक्ष रूप से किसी के खिलाफ द्वेष फैलाने की मंजूरी नहीं देगी। मेरी सरकार ऐसी होगी जो सभी धर्मों को समान रूप से सम्‍मान देगी।

भारत बुद्ध और गांधी की भूमि है। सभी धर्मों का सम्‍मान प्रत्‍येक भारतीय के डीएनए में अवश्‍य होनी चाहिए। किसी भी बहाने अन्‍य धर्म के खिलाफ हिंसा हमें मंजूर नहीं हो सकती और मैं ऐसी हिंसाओं की कड़ी निंदा करता हूं।

इस प्रतिबद्धता के साथ मैं सभी धार्मिक समूहों से अपील करता हूं कि वे प्राचीन राष्‍ट्र की सच्ची भावनाओं के अनुरूप संयम, एक-दूसरे के सम्‍मान और सहिष्‍णुता के साथ आगे बढ़ें। यह भावना हमारे संविधान में निहित है और यह हेग घोषणापत्र के अनुरूप है।

मित्रों

मेरे पास आधुनिक भारत के लिए एक दृष्टिकोण है। मैंने एक बड़ा मिशन हाथ में लिया है जिसके तहत इस दृष्टिकोण को यथार्थ में तब्दील करना है। मेरा मंत्र विकास है- 'सबका साथ, सबका विकास'।

सरल शब्‍दों में इसका मतलब सभी की थाली में भोजन, सभी बच्‍चों को स्‍कूल, हरेक के लिए रोजगार और सभी परिवारों के लिए शौचालय और बिजली के साथ एक आवास मुहैया कराना है। हम एकजुट होकर इस लक्ष्‍य को पा सकते हैं। एकजुटता हमें ताकत देगी। बंटने पर हम कमजोर होंगे। मैं यहां उपस्थित आप सभी और हर भारतीय से आग्रह करता हूं कि इस विशाल चुनौती से निपटने में मुझसे सहयोग करें।

सेंट चावरा व सेंट यूफ्रेसिया को दी गई संत की पदवी‍ और उनके अच्‍छे कर्म हमें:

- हमारी आंतरिक शक्ति को बढ़ाने

- नि:स्‍वार्थ सेवा से समाज को सुधारने में इस बढ़ी हुई शक्ति का इस्‍तेमाल करने

- विकसित व आधुनिक भारत की हमारी सामूहिक परिकल्‍पना को पूरा करने

के लिए प्रेरित करें।

धन्यवाद

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सभी के लिए जीवन की गरिमा सुनिश्चित करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है : पीएम मोदी
October 05, 2022
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प्रधानमंत्री ने एम्स बिलासपुर राष्ट्र को समर्पित किया
प्रधानमंत्री ने बंदला में सरकारी हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री ने नालागढ़ में मेडिकल डिवाइस पार्क की आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री ने 1690 करोड़ रुपये से अधिक लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग को चार लेन का बनाने की परियोजना की आधारशिला रखी
"मुझे निरंतर हिमाचल प्रदेश की विकास यात्रा का सहयात्री बनने का अवसर मिला है"
"हमारी सरकार निश्चित रूप से उस परियोजना का लोकार्पण करती है, जिसका हम शिलान्यास करते हैं"
"राष्ट्र रक्षा में हमेशा से हिमाचल का बड़ा योगदान रहा है, और अब बिलासपुर में नए एम्स के उद्घाटन के साथ, यह 'जीवन रक्षा' में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है"
"सभी के लिए जीवन की गरिमा सुनिश्चित करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है"
"माताओं बहनों बेटियों का सुख, सुविधा, सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य डबल इंजन सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है"
"मेड इन इंडिया 5जी सेवाएं शुरू हो गई हैं, और जल्द ही हिमाचल में लाभ उपलब्ध होंगे"

जै माता नैणा देविया री, जै बजिए बाबे री।

बिलासपुरा आल्यो...अऊं धन्य ओइ गया, आज्ज...मिंजो.....दशैरे रे, इस पावन मौके पर, माता नैणा देविया रे, आशीर्वादा ने, तुहाँ सारयां रे दर्शना रा सौभाग्य मिल्या! तुहाँ सारयां जो, मेरी राम-राम। कने एम्स री बड़ी-बड़ी बदाई।

हिमाचल के राज्यपाल श्री राजेंद्र आर्लेकर जी, हिमाचल के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान जयराम ठाकुर जी, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम सबके मार्गदर्शक और इसी धरती की संतान, श्रीमान जेपी नड्डा जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी और हमारे सांसद श्री अनुराग ठाकुर जी, हिमाचल भाजपा के अध्यक्ष और संसद में मेरे साथी सुरेश कश्यप जी, संसद में मेरे साथी किशन कपूर जी, बहन इंदु गोस्वामी जी, डॉ सिकंदर कुमार जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद और विधायकगण, और भारी संख्या में हम सबको आशीर्वाद देने के लिए पधारे हुए मेरे प्‍यारे भाइयों और बहनों ! आप सभी को, संपूर्ण देशवासियों को विजयादशमी के अवसर पर अनंत-अनंत शुभकामनाएं।

ये पावन पर्व, हर बुराई से पार पाते हुए, अमृतकाल के लिए जिन पंच प्राणों का संकल्प देश ने लिया है, उन पर चलने के लिए नई ऊर्जा देगा। मेरा सौभाग्य है कि विजयादशमी पर हिमाचल प्रदेश के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और इंफ्रास्ट्रक्चर के हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स, इसका उपहार देने का अवसर मिला है। और ये भी देखिए संयोग, विजयादशमी हो और विजय का रणसिंहा फूंकने का अवसर मिले, ये भविष्‍य के हर विजय का आगाज ले करके आया है। बिलासपुर को तो शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का डबल गिफ्ट मिला है। कहलूरा री... बंदले धारा ऊप्पर, हाइड्रो कालेज ... कने थल्ले एम्स... हुण एथी री पहचान हूणी !

भाइयों और बहनों,

यहां विकास योजनाओं को आपको सौंपने के बाद, जैसा जयराम जी ने बताया, एक और सांस्कृतिक विरासत का साक्षी बनने जा रहा हूं और बहुत वर्षों बाद मुझे एक बार फिर कुल्लू दशहरे का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिलेगा। सैकड़ों देवी-देवताओं के साथ भगवान रघुनाथ जी की यात्रा में शामिल होकर मैं देश के लिए भी आशीर्वाद भी मांगूंगा। और आज जब यहां बिलासपुर आया हूं तो पुरानी यादें ताजा होना बहुत स्‍वाभाविक है। वो भी एक वक्‍त था, यहां पैदल टहलते थे। कभी मैं, धूमल जी, नड्डा जी, पैदल यहां बाजार से निकल पड़ते थे। हम एक बहुत बड़ा रथयात्रा का कार्यक्रम लेकर भी यहां बिलासपुर की गलियों से गुजरे थे। और तब स्वर्ण जयंती रथयात्रा यहां से होकर और वो भी मेन मार्केट से निकली थी और वहां जनसभा हुई थी। और अनेक बार मेरा यहां आना हुआ, आप लोगों के बीच रहना हुआ है।

हिमाचल की इस भूमि पर काम करते हुए मुझे निरंतर हिमाचल की विकास यात्रा का सहयात्री बनने का अवसर मिला है। और मैं अभी सुन रहा था, अनुराग जी बड़े जोर-जोर से बोल रहे थे, ये मोदी जी ने किया, ये मोदी जी ने किया, ये मोदी जी ने कहा। हमारे नड्डा जी भी कह रहे थे, ये मोदी जी ने किया, ये मोदी जी ने किया और हमारे मुख्‍यमंत्री जयराम जी भी कह रहे थे, मोदी जी ने किया, मोदी जी ने किया। लेकिन मैं सच्‍चाई बता दूं, सच्‍चाई बता दूं किसने किया, बता दूं? ये जो कुछ भी हो रहा है ना, वो आपने किया है। आपके कारण हुआ है। अगर आप दिल्‍ली में सिर्फ मोदी जी को आशीर्वाद देते और हिमाचल में मोदी जी के साथियों को आशीर्वाद न देते तो ये सारे कामों में वो अड़ंगे डाल देते। ये तो जयराम जी और उनकी टीम है कि जो काम दिल्‍ली से मैं लेकर आता हूं, उसको तेजी गति से ये लोग दौड़ाते हैं, इसलिए हो रहा है। और ये अगर एम्‍स बना है तो आपके एक वोट की ताकत है, अगर टनल बना है तो आपके एक वोट की ताकत है, हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बना है तो ये आपके वोट की ताकत है, अगर मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहा है तो ये भी आपके एक वोट की ताकत है। और इसलिए आज मैं हिमाचल की अपेक्षाओं को ध्‍यान में रखते हुए एक के बाद एक विकास के काम कर रहा हूं।

विकास को लेकर हमने देश में लंबे समय तक एक विकृत सोच को हावी होते देखा है। ये सोच क्या थी? अच्छी सड़कें होंगी तो कुछ राज्यों और कुछ बड़े शहरों में होंगी, दिल्‍ली के आसपास होंगी। अच्छे शिक्षण संस्थान होंगे, तो बहुत बड़े-बड़े शहरों में होंगे। अच्छे अस्पताल होंगे वो तो दिल्‍ली में ही हो सकता है, बाहर हो ही नहीं सकता है। उद्योग-धंधे लगेंगे तो भी बड़ी-बड़ी जगह पर लगेंगे, और विशेषकर देश के पहाड़ी प्रदेशों में मूल सुविधाएं तक सबसे अंत में, कई-कई बरसों के इंतज़ार के बाद पहुंचती थीं। उस पुरानी सोच का नतीजा ये हुआ कि इससे देश में विकास का एक बड़ा असंतुलन पैदा हो गया। इस वजह से देश का एक बड़ा हिस्‍सा, वहां के लोग असुविधा में, अभाव में रहे।

पिछले 8 वर्षों में देश अब उस पुरानी सोच को पीछे छोड़कर, नई सोच, आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। अब देखिए, लंबे समय तक, और मैं तो जब यहां आता था, मैं लगातार देखता था, यहां एक यूनिवर्सिटी से ही गुज़ारा होता था। और इलाज हो या फिर मेडिकल की पढ़ाई, IGMC शिमला और टाटा मेडिकल कॉलेज पर ही निर्भरता थी। गंभीर बीमारियों का इलाज हो या फिर शिक्षा या रोज़गार, चंडीगढ़ और दिल्ली जाना तब हिमाचल के लिए मजबूरी बन गया था। लेकिन बीते आठ वर्षों में हमारी डबल इंजन की सरकार ने हिमाचल की विकास गाथा को नए आयाम पर पहुंचा दिया है। आज हिमाचल में सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी है, आईआईटी भी है, ट्रिपल आईटी भी है, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी हैं। देश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य का सबसे बड़ा संस्थान, एम्स भी अब बिलासपुर और हिमाचल की जनता की आन-बान-शान बढ़ा रहा है।

बिलासपुर एम्स एक और बदलाव का भी प्रतीक है और एम्‍स के अंदर भी ये ग्रीन एम्‍स के नाम से जाना जाएगा, पूरी तरह पर्यावरण प्रेमी एम्‍स, प्रकृति प्रेमी एम्‍स। अभी हमारे सभी साथियों ने बताया पहले सरकारें शिलान्यास का पत्थर लगाती थीं और चुनाव निकलने के बाद भूल जाती थीं। आज भी हिमाचल में जाओगे, हमारे धूमल जी ने एक बार कार्यक्रम किया था, कहां-कहां पत्‍थर पड़े हैं ढूंढने का, और ढेर सारे ऐसे कार्यक्रम जहां पत्‍थर पड़े थे, काम नहीं हुआ था।

मुझे याद है मैं एक बार रेलवे का रिव्‍यू कर रहा था, आपके ऊना के पास एक रेलवे लाइन बिछानी थी। 35 साल पहले निर्णय हुआ था, 35 साल पहले। पार्लियामेंट में घोषणा हुई थी, लेकिन फिर फाइल बंद। हिमाचल को कौन पूछेगा भाई। लेकिन ये तो हिमाचल का बेटा है और हिमाचल को भूल नहीं सकता। लेकिन हमारी सरकार की पहचान है कि जिस प्रोजेक्ट का शिलान्यास करती है, उसका लोकार्पण भी करती है। अटकना, लटकना, भटकना, वो जमाना चला गया दोस्‍तों !

साथियों,

राष्ट्ररक्षा में हमेशा से हिमाचल का बहुत बड़ा योगदान रहा है, जो हिमाचल पूरे देश में राष्‍ट्र रक्षा के वीरों के लिए जाना जाता है वो हिमाचल अब इस एम्‍स के बाद जीवन रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। साल 2014 तक हिमाचल में सिर्फ 3 मेडिकल कॉलेज थे, जिसमें 2 सरकारी थे। पिछले 8 सालों में 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज हिमाचल में बने हैं। 2014 तक अंडर और पोस्टग्रेजुएट मिलाकर सिर्फ 500 विद्यार्थी पढ़ सकते थे, आज ये संख्या 1200 से अधिक, यानि दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी है। एम्स में हर साल अनेक नए डॉक्टर बनेंगे, नर्सिंग से जुड़े युवा यहां ट्रेनिंग पाएंगे। और मुझे जयराम जी की टीम को, जयराम जी को, भारत सरकार के आरोग्‍य मंत्री और आरोग्‍य मंत्रालय को विशेष रूप से बधाई देनी है। जब नड्डा जी आरोग्‍य मंत्री थे, उस समय हमने निर्णय किया तो नड्डा जी के जिम्‍मे बहुत बड़ा दायित्‍व आ गया, मैं शिलान्‍यास भी कर गया। इसी कालखंड में कोरोना की भयंकर महामारी आई और हम जानते हैं हिमाचल के लोग तो हिमाचल में कोई भी कंस्‍ट्रक्‍शन का काम करता है तो कितना मुश्किल होता है, एक-एक चीज पहाड़ पर लाना, कितना दिक्‍कत भरा होता है। जो काम नीचे एक घंटे में होता है, उसको यहां पहाड़ों में करने के लिए एक दिन लग जाता है। उसके बावजूद भी, कोरोना की कठिनाई के बावजूद भी भारत सरकार का आरोग्‍य मंत्रालय और जयराम जी के राज्‍य सरकार की टीम ने मिल करके जो काम किया, आज एम्‍स मौजूद है, एम्‍स काम करने लग गया है।

मेडिकल कॉलेज ही नहीं, हम एक और दिशा में आगे बढ़े, दवाओं और जीवन रक्षक टीकों के निर्माता के रूप में भी हिमाचल की भूमिका का बहुत अधिक विस्तार किया जा रहा है। बल्क ड्रग्स पार्क के लिए देश के सिर्फ तीन राज्‍यों को चुना गया है, और उसमें से एक कौन सा राज्‍य है भाई, कौन सा राज्‍य है? हिमाचल है, आपको गर्व हो रहा है‍ कि नहीं हो रहा है? ये आपके बच्‍चों के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य का शिलान्‍यास है कि नहीं है? ये आपके बच्‍चों के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य की गारंटी है कि नहीं है? हम काम बड़ी मजबूती से करते हैं और आज की पीढ़ी के लिए भी करते हैं, आने वाली पीढ़ी के लिए भी करते हैं।

उसी प्रकार से मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए 4 राज्यों को चुना गया है, जहां आज मेडिकल में टेक्‍नोलॉजी का भरपूर उपयोग हो रहा है। विशिष्‍ट प्रकार के औजारों की जरूरत पड़ती है, उसको बनाने के लिए देश में चार राज्‍य चुने गए हैं। इतना बड़ा हिन्‍दुस्‍तान, इतनी बड़ी जनसंख्‍या, हिमाचल तो मेरा छोटा सा राज्‍य है, लेकिन ये वीरों की धरती है और मैंने यहां की रोटी खाई है, मुझे कर्ज भी चुकाना है। और इसलिए चौथा मेडिकल डिवाइस पार्क कहां बन रहा है, ये चौथा मेडिकल डिवाइस पार्क कहां बन रहा है- आपके हिमाचल में बन रहा है दोस्तों। दुनिया भर के बड़े-बड़े लोग यहां आएंगे। नालागढ़ में ये मेडिकल डिवाइस पार्क का शिलान्यास इसी का हिस्सा है। इस डिवाइस पार्क के निर्माण के लिए हज़ारों करोड़ रुपए का निवेश यहां होगा। इससे जुड़े अनेक छोटे और लघु उद्योग आस-पास विकसित होंगे। इससे यहां के हज़ारों युवाओं को रोज़गार के अवसर मिलेंगे।

साथियों,

हिमाचल का एक पक्ष और है, जिसमें यहां विकास की अनंत संभावनाएं छिपी हुई हैं। ये पक्ष है मेडिकल टूरिज्म का। यहां की आबो-हवा, यहां का मौसम, यहां का वातावरण, यहां की जड़ी-बूटियां, यहां का अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयुक्त वातावरण। आज भारत मेडिकल टूरिज्म को लेकर दुनिया का एक बहुत बड़ा आकर्षण केंद्र बन रहा है। जब देश और दुनिया के लोग हिन्‍दुस्‍तान में मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए आना चाहेंगे तो यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इतना बढ़िया है कि वे यहां आएंगे, एक प्रकार से उनके लिए आरोग्‍य का लाभ भी होगा और पर्यटन का भी लाभ होने वाला है। हिमाचल के तो दोनों हाथ में लड्डू हैं।

साथियों,

केंद्र सरकार का प्रयास है कि गरीब और मध्यम वर्ग का इलाज, उस पर खर्च कम से कम हो, ये इलाज भी बेहतर मिले और इसके लिए उसको दूर तक जाना भी न पड़े। इसलिए आज एम्स मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों में क्रिटिकल केयर सुविधाओं और गांवों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाने पर एक seamless connectivity पर हम काम कर रहे हैं। उस पर बल दिया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत हिमाचल के अधिकतर परिवारों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

इस योजना के तहत अभी तक देशभर में 3 करोड़ 60 लाख गरीब मरीज़ों का मुफ्त इलाज हो चुका है, और इसमें से डेढ़ लाख तो लाभार्थी ये मेरे हिमाचल के मेरे परिवारजन हैं। देश में इन सभी साथियों के इलाज पर सरकार अब तक 45 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है। अगर आयुष्मान भारत योजना ना होती तो इसका करीब दोगुना यानि लगभग 90 हज़ार करोड़ रुपए ये जो मरीज लोग थे, उन परिवारों को अपनी जेब से देना पड़ता। यानि इतनी बड़ी बचत भी गरीब और मध्‍यम वर्ग के परिवार को बेहतरीन इलाज के साथ मिली है।

साथियों,

मेरे लिए एक और संतोष की बात है। सरकार की इस प्रकार की योजनाओँ का सबसे अधिक लाभ हमारी माताओं को, बहनों को, बेटियों को मिला है। और हम तो जानते हैं, हमारी मां-बहनों का स्‍वभाव होता है, कितनी ही तकलीफ हो, शरीर में कितनी ही पीड़ा होती हो, लेकिन वो परिवार में किसी को बताती नहीं हैं। वो सहन करती भी हैं, काम भी करती हैं, पूरे परिवार को संभालती भी हैं, क्‍योंकि उसके मन में रहता है कि अगर बीमारी का पता परिवार के लोगों को लगेगा, बच्‍चों को लगेगा तो वो कर्ज कर-करके भी मेरा उपचार कराएंगे, और मां सोचती है, अरे बीमारी में ही थोड़ा समय निकाल दूंगी, लेकिेन बच्‍चों पर कर्ज नहीं होने दूंगी, मैं अस्‍पताल जाकर खर्च नहीं करूंगी। इन माताओं की चिंता कौन करेगा? क्‍या मेरी माताएं इस प्रकार की यातनाएं चुपचाप सहती रहें। ये बेटा किस काम का है, और उसी भावना से आयुष्‍मान भारत योजना का जन्‍म हुआ है। ताकि मेरी माताओं-बहनों को बीमारी से गुजारा न करना पड़े। जीवन में इस मजबूरी से जीना न पड़े। आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभ लेने वाली माताएं-बहनें 50 प्रतिशत से ज्‍यादा हैं। हमारी माताएं-बहनें और बेटियां हैं।

साथियों,

चाहे शौचालय बनाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान हो, मुफ्त गैस कनेक्शन देने के लिए उज्ज्वला योजना हो, मुफ्त सैनेटेरी नैपकिन देने का अभियान हो, मातृवंदना योजना के तहत हर गर्भवती महिला को पोषक आहार के लिए हज़ारों रुपए की मदद हो, या फिर अब हर घर जल पहुंचाने का हमारा अभियान हो, ये सारा मेरी माताओं-बहनों को सशक्‍त करने वाले काम हम एक के बाद एक करते चले जा रहे हैं। माताओं-बहनों-बेटियों का सुख, सुविधा, सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य डबल इंजन की सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है।

केंद्र सरकार ने जो भी योजनाएं बनाई हैं, उनको जयराम जी और उनकी पूरी टीम ने, उनकी सरकार ने बहुत तेज गति से और बड़ी स्पिरिट के सा‍थ उसको ज़मीन पर उतारा है और उनका दायरा भी बढ़ाया है। हर घर नल से जल पहुंचाने का काम यहां कितना तेज़ी से हुआ है, ये हम सभी के सामने है। पिछले 7 दशकों में जितने नल कनेक्शन हिमाचल में दिए गए हैं, उससे दोगुने से भी अधिक सिर्फ बीते 3 साल में दे चुके हैं हम, मिल चुके हैं लोगों को। इन तीन वर्षों में साढ़े 8 लाख से अधिक नए परिवारों को पाइप के पानी की सुविधा मिली है।

भाइयों और बहनों,

जयराम जी और उनकी टीम की एक और मामले में देश बहुत अधिक प्रशंसा कर रहा है। ये प्रशंसा सामाजिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के प्रयासों को विस्तार देने के लिए हो रही है। आज हिमाचल का शायद ही कोई परिवार ऐसा हो, जहां किसी ना किसी सदस्य को पेंशन की सुविधा न मिलती हो। विशेष रूप से जो साथी बेसहारा हैं, जिनको गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया है, ऐसे परिवारों को पेंशन और इलाज के खर्च से जुड़ी सहायता के प्रयास सराहनीय है। हिमाचल प्रदेश के हजारों परिवारों को वन-रैंक वन-पेंशन लागू होने से भी बड़ा लाभ हुआ है।

साथियों,

हिमाचल अवसरों का प्रदेश है। और मैं जयराम जी को और एक बधाई देता हूं। वैक्‍सीनेशन का काम तो पूरे देश में चल रहा है, लेकिन आपकी जिंदगी की सुरक्षा के लिए हिमाचल देश का वो पहला प्रदेश है, जिसने शत-प्रतिशत वैक्‍सीनेशन का काम पूरा कर लिया है। होती है, चलती है, वाला मामला नहीं, ठान लिया है तो करके रहना है।

यहां बिजली पैदा होती है हाइड्रो से, फल-सब्ज़ी के लिए उपजाऊ ज़मीन है और रोज़गार के अनंत अवसर देने वाला पर्यटन यहां पर है। इन अवसरों के सामने बेहतर कनेक्टिविटी का अभाव सबसे बड़ी रुकावट थी। 2014 के बाद से हिमाचल प्रदेश में बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास हो रहा है। आज हिमाचल की सड़कों को चौड़ा करने का काम भी चारों तरफ चल रहा है। हिमाचल में इस समय कनेक्टिविटी के कामों पर लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। पिंजौर से नालागढ़ हाईवे के फोरलेन का काम जब पूरा हो जाएगा, तब औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ और बद्दी को तो लाभ होगा ही, चंडीगढ़ और अम्बाला से बिलासपुर, मण्डी और मनाली की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी सुविधा बढ़ने वाली है। यही नहीं, हिमाचल के लोगों को घुमावदार रास्तों से मुक्ति दिलाने के लिए सुरंगों का जाल भी बिछाया जा रहा है।

साथियों,

डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर भी हिमाचल में अभूतपूर्व काम हुआ है। पिछले 8 वर्षों में मेड इन इंडिया मोबाइल फोन सस्ते भी हुए और गांव-गांव में नेटवर्क भी पहुंचा है। बेहतर 4G कनेक्टिविटी के कारण हिमाचल प्रदेश डिजिटल लेनदेन में भी बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। डिजिटल इंडिया का सबसे अधिक लाभ सबसे अधिक किसी को हो रहा है तो मेरे हिमाचल के भाइयों-बहनों को हो रहा है, मेरे हिमाचल के नागरिकों को हो रहा है। वरना बिल भरने से लेकर बैंक से जुड़े काम हों, एडमिशन हो, एप्लीकेशन हो, ऐसे हर छोटे-छोटे काम के लिए पहाड़ से नीचे उतर करके दफ्तरों में जाना, एक-एक दिन लगता था, कभी रात को रुकना पड़ता था। अब तो देश में पहली बार मेड इन इंडिया 5G सेवाएं भी शुरू हो चुकी हैं, जिसका लाभ हिमाचल को भी बहुत जल्दी मिलने वाला है।

भारत ने ड्रोन को लेकर जो नियम बनाये, बदले हैं, उसके बाद और मैं हिमाचल को इसके लिए भी बधाई देता हूं, देश में सबसे पहला राज्‍य हिमाचल है, जिसने राज्‍य की ड्रोन पॉलिसी बनाई है। अब ड्रोन से ट्रांसपोर्टेशन के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ने वाला है। और इसमें किन्‍नौर तक के हमारे अगर आलू भी हैं, तो हम वहां से ड्रोन से उठा करके बड़ी मंडी में तुरंत ला सकते हैं। हमारे फल खराब हो जाते थे, ड्रोन से उठा करके ला सकते हैं। अनेक प्रकार के लाभ आने वाले दिनों में होने वाले हैं। इसी प्रकार का विकास, जिससे हर नागरिक की सुविधा बढ़े, हर नागरिक समृद्धि से जुड़े, इसके लिए हम प्रयासरत हैं। यही विकसित भारत, विकसित हिमाचल प्रदेश के संकल्प को सिद्ध करेगा।

मुझे खुशी है विजयादशमी के पावन पर्व पर विजय नाद करने का अवसर मिला और मुझे रणसिंहा फूंक करके विजय का आगाज करने का अवसर‍ मिला और यह सब आप सबके इतने आशीर्वाद के बीच करने का अवसर मिला। मैं फिर एक बार एम्‍स सहित सभी विकास परियोजनाओं के लिए आप लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। दोनों मुट्ठी बंद करके मेरे साथ बोलिए-

भारत माता की–जय। पूरी ताकत से आवाज चाहिए-

भारत माता की–जय

भारत माता की–जय

भारत माता की–जय

बहुत-बहुत धन्यवाद!