Published By : Admin |
February 17, 2015 | 13:59 IST
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कार्डिनल जॉर्ज एलेंचेरी
मुख्य पादरी एन्ड्रयूज़ थाजत
मुख्य पादरी कुरियाकोस भरनीकुलांगरा
मुख्य पादरी अनिल कोउटू
श्री अरुण जेटली
डॉ. नजमा हेपतुल्ला
श्री पी जे कुरियन, उपाध्यक्ष, राज्यसभा
मॉनसेग्नर सेबास्टियन वाडाकुम्पडान
मैं केरल के दो महान संतों- सेंट कुरियाकोस एलियास चावरा और मदर यूफ्रेसिया को संत की उपाधि मिलने के अवसर पर आयोजित इस समारोह में भाग लेने पर आनंदित महसूस कर रहा हूं। पूरा देश उनके उत्कृष्ट पद को प्राप्त करने पर गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनके उन्नयन से पहले केरल की ही सेंट अल्फोन्सा ने इस पदवी को प्राप्त किया था।
सेंट कुरियाकोस एलियास चावरा और सेंट यूफ्रेसिया के जीवन और कार्य न केवल ईसाई समुदाय के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायक हैं। ये संत मानवता की बेहतरी के लिए निःस्वार्थ सेवा के जरिए ईश्वर को समर्पण की मिसाल हैं।
प्रार्थना में महारथ हासिल कर चुके सेंट चावरा एक समाज सुधारक भी थे। ऐसे समय में जब शिक्षा की सुविधा सीमित लोगों को ही सुलभ थी, उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया था कि हर चर्च में एक स्कूल होना चाहिए। इस तरह उन्होंने शिक्षा के द्वार समाज के सभी तबकों के लोगों के लिए खोल दिये थे।
केरल से बाहर निवास करने वाले कुछ ही लोगों को यह जानकारी है कि उन्होंने एक संस्कृत स्कूल भी खोला था। उन्होंने एक प्रिंटिंग प्रेस की भी शुरुआत की थी। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी उनका योगदान उल्लेखनीय था।
सेंट यूफ्रेसिया एक संत थीं, जिन्होंने अपना जीवन प्रार्थना और ईश्वर के प्रति श्रद्धा को समर्पित कर दिया था।
दोनों ही संतों ने अपना जीवन सहयोगियों की सेवा के जरिए ईश्वर को समर्पित कर दिया था। प्राचीन भारतीय कहावत हैः “आत्मानो मोक्षार्थम् जगत हितायाचा”- यह कहावत उनके जीवन को चरितार्थ करती है।
मित्रों,
अध्यात्मवाद भारत की विरासत में निहित है। हजारों साल पहले भारत एवं यूनान के संतों के बीच बौद्धिक एवं आध्यात्मिक आदान-प्रदान हुआ था। नये विचारों के प्रति भारत का खुलापन ऋग्वेद में स्पष्ट नजर आता है : आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः। यह दर्शन अनंत काल से हमारी बौद्धिक हस्तियों का मार्गदर्शन करता रहा है। भारत की मातृभूमि में अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक धाराओं का जन्म हुआ है। इनमें से कुछ धाराएं तो भारतीय सीमा के पार भी चली गई हैं।
सभी धर्मों के लोगों का स्वागत करने एवं उनका सम्मान करने की परंपरा भारत में उतनी ही पुरानी है, जितना खुद भारत का इतिहास है। जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा थाः हम न केवल सॉर्वभौमिक सहिष्णुता में विश्वास करते हैं, बल्कि हम यथार्थ के रूप में सभी धर्मों को स्वीकार करते हैं।
स्वामी विवेकानंद ने सौ साल पहले जो कहा था वह आज भी प्रासंगिक है और आगे भी सदा न केवल इस देश, बल्कि इस सरकार के लिए भी अथवा भारत में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार के लिए प्रासंगिक रहेगी। सभी धर्मों के लोगों के समान आदर का सिद्धांत हजारों साल से भारत की नैतिकता का एक हिस्सा रहा है और यह फिर कुछ इसी तरह से भारत के संविधान का अभिन्न अंग बन गया। हमारा संविधान शून्य में विकसित नहीं हुआ है। भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं में इसकी जड़ें समाई हुई हैं।
गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर ने हमें एक ऐसी भूमि का सपना देखने के लिए प्रेरित किया था, जहां मन में कोई भय न हो और सिर गर्व से ऊंचा रहे। यह आजादी का वह स्वर्ग है जिसका सृजन एवं संरक्षण करने के प्रति हम कटिबद्ध हैं। हम इसमें विश्वास रखते हैं : एकम सत विप्र बहुधा वदन्ति।
मित्रों,
अब मैं उस मुद्दे का जिक्र करना चाहता हूं जो समकालीन विश्व में शांति एवं सौहार्द के केन्द्र में है। विश्व में धार्मिक मसले पर विभाजन की भावना एवं शत्रुता बढ़ती जा रही है। यह वैश्विक चिंता का विषय बन गयी है। इस संदर्भ में सभी धर्मों के पारस्परिक सम्मान की प्राचीन भारतीय अवधारणा अब वैश्विक स्तर पर अपनी पैठ बनाने लगी है।
लम्बे समय से महसूस की जा रही इस जरूरत और पारस्परिक सम्मानीय रिश्तों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए ही 10 दिसम्बर, 2008 को हेग में ‘मानवाधिकारों में विश्वास’ पर अंतर-धार्मिक सम्मेलन आयोजित किया गया था। संयोगवश यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की 60वीं वर्षगांठ भी थी।
विश्व में हर प्रमुख धर्म-ईसाईयत, हिन्दुत्व, यहूदीवाद, बहाई, बौद्ध धर्म, इस्लाम व ताओवाद एवं स्वदेशी धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले धार्मिक नेताओं ने बैठक की, विचार-विमर्श किया और सार्वभौमिक घोषणा पत्र एवं धार्मिक अथवा आस्था की आजादी को अक्षुण्ण रखने का संकल्प व्यक्त किया।
अपने ऐतिहासिक घोषणा पत्र में उन्होंने यह परिभाषित किया कि आस्था की आजादी में क्या-क्या शामिल हैं और उन्हें कैसे अक्षुण्ण रखना है।
हमारा यह मानना है कि किसी धर्म अथवा आस्था को अपनाने, उसे बनाये रखने और उसका पालन करने की आजादी किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत पसंद है।
विश्व आज एक चौराहे पर है जिसे सही ढंग से पार नहीं किया गया तो वह हमें फिर से धार्मिक उन्माद, कट्टरता और खून-खराबे वाले अंधेरे दिनों में धकेल सकता है। सभी धर्मों का यह सदभावनापूर्ण मिलन कतई संभव नहीं था। हालांकि, विश्व तीसरे सहस्राब्दी में प्रवेश कर चुका है। लेकिन अब यह संभव हुआ है। यह दर्शाता है कि शेष विश्व भी प्राचीन भारत के पदचिन्हों पर चल पड़ा है।
भारत और मेरी सरकार की ओर से मैं यह घोषणा करता हूं कि मेरी सरकार उक्त घोषणाओं का अक्षरश: पालन करती है। मेरी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि पूरी धार्मिक स्वतंत्रता हो और हर किसी को अपनी पसंद के धर्म में बने रहने या किसी अन्य धर्म को बिना किसी दबाव या मजबूरी के अपनाने की पूरी आजादी हो। मेरी सरकार किसी भी धार्मिक समूह को, चाहे वह अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक वर्ग से संबंधित हो, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी के खिलाफ द्वेष फैलाने की मंजूरी नहीं देगी। मेरी सरकार ऐसी होगी जो सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान देगी।
भारत बुद्ध और गांधी की भूमि है। सभी धर्मों का सम्मान प्रत्येक भारतीय के डीएनए में अवश्य होनी चाहिए। किसी भी बहाने अन्य धर्म के खिलाफ हिंसा हमें मंजूर नहीं हो सकती और मैं ऐसी हिंसाओं की कड़ी निंदा करता हूं।
इस प्रतिबद्धता के साथ मैं सभी धार्मिक समूहों से अपील करता हूं कि वे प्राचीन राष्ट्र की सच्ची भावनाओं के अनुरूप संयम, एक-दूसरे के सम्मान और सहिष्णुता के साथ आगे बढ़ें। यह भावना हमारे संविधान में निहित है और यह हेग घोषणापत्र के अनुरूप है।
मित्रों
मेरे पास आधुनिक भारत के लिए एक दृष्टिकोण है। मैंने एक बड़ा मिशन हाथ में लिया है जिसके तहत इस दृष्टिकोण को यथार्थ में तब्दील करना है। मेरा मंत्र विकास है- 'सबका साथ, सबका विकास'।
सरल शब्दों में इसका मतलब सभी की थाली में भोजन, सभी बच्चों को स्कूल, हरेक के लिए रोजगार और सभी परिवारों के लिए शौचालय और बिजली के साथ एक आवास मुहैया कराना है। हम एकजुट होकर इस लक्ष्य को पा सकते हैं। एकजुटता हमें ताकत देगी। बंटने पर हम कमजोर होंगे। मैं यहां उपस्थित आप सभी और हर भारतीय से आग्रह करता हूं कि इस विशाल चुनौती से निपटने में मुझसे सहयोग करें।
सेंट चावरा व सेंट यूफ्रेसिया को दी गई संत की पदवी और उनके अच्छे कर्म हमें:
- हमारी आंतरिक शक्ति को बढ़ाने
- नि:स्वार्थ सेवा से समाज को सुधारने में इस बढ़ी हुई शक्ति का इस्तेमाल करने
- विकसित व आधुनिक भारत की हमारी सामूहिक परिकल्पना को पूरा करने
दमन ‘मिनी इंडिया’ का जीवंत उदाहरण बन गया है: पीएम मोदी
June 05, 2026
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हेल्थकेयर, एविएशन, टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत दमन के लिए विकास को नई गति देने वाली पहल है, जो केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी: पीएम
आज जारी किए गए आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। FY 2025-26 में 7.7% और 31 मार्च को समाप्त तिमाही में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की गई है: पीएम
वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौतियों के बावजूद, 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत न केवल मजबूती से आगे बढ़ रहा है, बल्कि दुनिया से एक कदम आगे भी बना हुआ है: पीएम
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे सरकार के हेल्थकेयर पर फोकस को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। पहले भारत में अधिकांश डिलिवरी अस्पतालों के बाहर होती थीं, लेकिन आज देश में 90% से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही हैं: पीएम
मिशन इंद्रधनुष की बदौलत भारत में बच्चों के टीकाकरण का कवरेज 2014 से पहले के 60% से बढ़कर आज करीब 90% तक पहुंच गया है: पीएम
भारत माता की जय!
भारत माता की जय!
दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के एडमिनिस्ट्रेटर प्रफुल्ल भाई पटेल, संसद में मेरी सहयोगी कलाबेन डेलकर, दमन Municipal Council की President दीपिका टंडेल जी, दमन जिला पंचायत के अध्यक्ष धर्म बाबू पटेल, सिलवासा Municipal Council के अध्यक्ष सोमनाथ देवरे जी, दादरा नगर हवेली जिला पंचायत के अध्यक्ष निशा भावसार जी, दीव Municipal Council के अध्यक्ष हरीश कपाड़िया जी, दीव जिला पंचायत के अध्यक्ष कोटिया रंजिताबेन और यहां इतनी विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाइयों-बहनों,
आप जैसे यहां इकट्ठे हुए हैं, वैसे ही लक्षद्वीप में भी बहुत बड़ी तादाद में लोग वीडियो के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं, क्योंकि आज लक्षद्वीप के विकास की भी एक नई शुरुआत, एक नए प्रकल्प, जो पूरे लक्षद्वीप के जीवन में एक क्रांतिकारी काम करने वाले हैं, उसके लिए भी कुछ योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।
साथियों,
कुछ साल पहले, जब मैं आपके बीच आया था, तो मैंने कहा था यह हमारा दमन तेजी से मिनी इंडिया बन रहा है और आज मैं देख रहा हूं, बाईं तरफ पूरा बंगाल है और दाहिने तरफ पूरा असम है। दमन मिनी इंडिया का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां की विविधता, अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का यहां निवास करना, पूरे भारत की सुंदर सी झलक आपके बीच आकर के मिल जाती है। आप सब इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने आए, मैं इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।
भाइयों-बहनों,
मुझे कई बार दमन और दीव आने का अवसर मिला है। दादरा और नगर हवेली भी आता रहता हूं और जब मैं मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं था, तब तो बहुत बार आता था। लेकिन अब जब मैं यहां आता हूं और यहां के सुशासन को देखकर, गवर्नेंस मॉडल को देखकर बहुत अच्छा लगता है। हर बार मुझे लगता है कि पिछली बार के मुकाबले यह क्षेत्र विकास की राह पर मीलों आगे बढ़ गया है।
साथियों,
दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव ने दशकों से विकास के सपने देखे थे। जो सपने पहले देखे, वो पीढ़ियां तो चली गईं। लेकिन आज जो पीढ़ी है, वो अपनी आंखों के सामने देख रही है कि उनके मां-बाप, दादा-दादी जो सपने देखते थे, वो आज सपने पूरे होते हुए आप अपनी आंखों से देख रहे हैं। आज भी यहां कनेक्टिविटी, हेल्थ, एजूकेशन, टूरिज्म और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर इन से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है। विकास के यह काम दमन और पूरी यूनियन टेरिटरी के लिए यहां के लोगों के जीवन को आसान बनाएंगे। इनसे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे। इन कामों के पीछे प्रफुल्ल भाई पटेल की दृष्टि, उनकी और उनकी टीम की मेहनत साफ-साफ नजर आती है। मैं इसके लिए भी प्रफुल्ल भाई और उनकी पूरी टीम की सराहना करता हूं। मैं सभी को लक्षद्वीप के लोगों को, दादरा-नगर हवेली के लोगों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं, आप सबको बधाई देता हूं।
साथियों,
आज आपके बीच आया हूं, तो एक सुखद खबर आई है। मैं तो आज सुबह दिल्ली से निकल चुका था, लेकिन अभी जो आंकड़े सामने आए हैं, जो खबर आई है, वो सचमुच में प्रसन्नता करने वाली है और मैं भी चाहता हूं, यह खुशी आपके साथ भी बाटूं। आज जो आंकड़े आए हैं, उन आंकड़ों से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव कितनी मजबूत है। वर्ष 2025-26 में यानी जो फाइनेंशियल ईयर पिछला पूरा हुआ, वर्ष 2025-26 में भारत ने 7.7 परसेंट की ग्रोथ रेट हासिल की है, 7.7 और पिछला क्वार्टर जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ 7.8 परसेंट रही है, 7.8 और यह दुनिया में तेज गति से आगे बढ़ने वाली बडी इकोनॉमी है। हर भारतीय को गर्व हो, यह है उसकी गति। आज देश जिस रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल रहा है, आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का जो इतना विकास हो रहा है, गरीब कल्याण को लेकर इतने बड़े स्तर जो काम चल रहा है, इन सारे प्रयासों का परिणाम है कि आज देश बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है और हम सब जानते हैं, दुनिया संकटों में घिरी हुई है, सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था सवालिया निशानों के नीचे दबी पड़ी है, वैश्विक संकट के इस बुरे से बुरे दौर में भी 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयासों से भारत खुद को संभाल तो पा ही रहा है, लेकिन साथ-साथ सबसे आगे रहने में भी उसके प्रयास सफल होते जा रहे हैं। मैं देशवासियों को आर्थिक क्षेत्र की इस नई ऊंचाई को प्राप्त करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मैं देश को फिर आश्वस्त करता हूं कि देश दुनिया भर में चल रहे इन संकटों का सामना करते हुए Reform, Perform और Transform के रास्ते पर ऐसे ही दृढ़ संकल्प के साथ, तेज गति से आगे बढ़ता ही रहेगा, यह मेरी देशवासियों को गारंटी है।
साथियों,
आज हमारे लिए विकास जितना जरूरी है, उतना ही अहम है हमारे विकास का मॉडल सस्टेनेबल हो। आज वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के दिन हमारे यहां यूनियन टेरिटरी स्टेट इस संकल्प को साकार कर रहा है। आज एक ओर यहां हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं को लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। साथ ही यहां करीब एक लाख एक पेड़ मां के नाम, एक लाख पौधे भी लगाए जा रहे हैं। मुझे गर्व है कि एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिसने सरकारी इमारतों में शत प्रतिशत, 100 परसेंट सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की उपलब्धि हासिल की है। आज दीव में दिन में जितनी बिजली की डिमांड होती है, वो सोलर पॉवर से ही पूरी हो रही है और हमें तो इसे और आगे लेकर के जाना है। घरों में भी सोलर ऊर्जा से बिजली मिले, यही नहीं अतिरिक्त बिजली से परिवार की आय भी हो, इसके लिए रूफटॉप सोलर प्लांट्स लगाने की पहल शुरू हुई है। मैं इन उपलब्धियों के लिए भी आप सबकी सराहना करता हूँ।
साथियों,
साथ-साथ मुझे यह भी बताया गया है, दमन के लोग इन दिनों यहाँ स्वच्छता अभियान भी चला रहे हैं। यह दिखाता है कि स्वच्छता किस तरह दमन के जनजीवन में संस्कार बन चुका है और यह संस्कार स्वच्छता में नजर आ रहे हैं। मैं इस जनभागीदारी के आपके प्रयासों के लिए दमन के लोगों का अभिनंदन करता हूँ।
साथियों,
दादरा नगर हवेली, दमन और दीव, यह संघ शासित प्रदेश होने के साथ ही भारत की पहचान और विरासत भी हैं। इसलिए, इसके विकास के लिए हमारे लक्ष्य भी साधारण नहीं हैं। मुझे याद है, जब मैं पिछले साल सिलवासा आया था, तब मैंने आपको सिंगापुर का उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि एक समय सिंगापुर मछुआरों का छोटा सा गांव था। लेकिन, सिंगापुर के लोगों ने एक सपना देखा, वहां के लोगों ने बड़ा लक्ष्य तय किया और आज वही सिंगापुर दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नस हब बन चुका है। आज दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव भी वही सपना देख रहे हैं। ये नमो एयरपोर्ट, दमणगंगा नदी पर बनने वाला आइकॉनिक ब्रिज, ‘बीच फ्रंट’ उस पर बनने वाला कन्वेंशन सेंटर, ऐसे सभी इनफ्रास्ट्रक्चर के जरिए हम भविष्य के बड़े संकल्पों की नींव रख रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए आप लोगों की आवाजाही आसान होगी। यहाँ बिज़नेस के लिए नई संभावनाएं बनेंगी। दमन के दोनों किनारों पर विकास की गति और तेज होगी।
साथियों,
यहाँ hospitality economy से जुड़े अवसर बढ़ेंगे और साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर जैसी सुविधा से व्यापार, लॉजिस्टिक्स को भी नई गति मिलेगी।
साथियों,
इस क्षेत्र में ब्लू इकॉनमी के लिए हमने जो विज़न तैयार किया है, वो विज़न भी हाइटेक इनफ्रास्ट्रक्चर की ताकत से ही साकार होगा। इसीलिए, लक्षद्वीप के कलपेनी और कदमत द्वीपों में भी आज ही आधुनिक पोर्ट्स की आधारशिला रखी जा रही है। यह सभी प्रयास ब्लू इकॉनमी में देश की ताकत को बढ़ाएँगे और जैसा मैंने कहा यह लक्षद्वीप का भाग्य बदलने वाले initiative हैं।
साथियों,
भाजपा की सरकार में, एनडीए की हमारी सरकार में हमारे लिए विकास की पहली कसौटी है- गरीब, वंचित, आदिवासी और मिडिल क्लास के जीवन में बदलाव! इसके लिए, हेल्थ सेक्टर हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। बीते वर्षों में देश हेल्थ केयर के लिए होलिस्टिक विजन लेकर आगे बढ़ा। हमने इलाज से जुड़ी हर चिंता का समाधान किया है। आज गरीब से गरीब के पास भी आयुष्मान कार्ड की सुविधा है। उनके पास 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का भरोसा है। बीमारी की समय से जांच हो सके, इसके लिए, प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था है। जन औषधि केन्द्रों के जरिए सस्ती दवाइयाँ भी मिल रही हैं। ये सुविधाएं और बेहतर हों, और आधुनिक हों, इसके लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए आज स्वास्थ्य सेवाओं को टेक्नॉलॉजी से जोड़ा जा रहा है।
साथियों,
आयुष्मान कार्ड और जन औषधि केंद्रों से ही गरीब और मध्यम वर्ग के करीब सवा दो लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं।
भाइयों-बहनों,
केंद्र सरकार की नीतियों का बहुत लाभ इस क्षेत्र के लोगों को भी हुआ है। एक समय यहां इलाज की अच्छी सुविधाओं का भी अभाव था। यहाँ मेडिकल कॉलेज तक नहीं था। लेकिन, अब मेडिकल कॉलेज भी है और उसमें post-graduation की पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सिलवासा का नमो हॉस्पिटल पिछले साल से हजारों लोगों की सेवा कर रहा है। आज दमन में भी नमो हॉस्पिटल का लोकार्पण हुआ है। इस क्षेत्र के लोगों को भी अब और बेहतर हेल्थ केयर का लाभ मिलेगा।
साथियों,
हमारी सरकार कैसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चल रही है, इसका एक प्रमाण नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के नतीजों में भी मिलता है। एक समय भारत में ज़्यादातर बच्चों की डिलिवरी अस्पताल में नहीं होती थी। आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही है, जिसके कारण माता मृत्यु या नवजात की मृत्यु में बहुत बड़ी रुकावट आई है। मिशन इंद्रधनुष की वजह से बच्चों के टीकाकरण के क्षेत्र में भी भारत ने अच्छी प्रगति की है। 2014 से पहले केवल 60 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हो पाता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले 30 प्रतिशत से भी कम परिवार स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े हुए थे। आज आयुष्मान भारत, उन आंकड़ों को भी बदल दिया है। अब 60 प्रतिशत से अधिक परिवारों को ये सुरक्षा मिल रही है।
साथियों,
स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के इन प्रयासों का लाभ अगर किसी को सबसे ज्यादा मिला है, तो वो मेरे देश की नारी शक्ति है।
साथियों,
पहले इस क्षेत्र के युवाओं को हायर एजुकेशन के लिए भी बाहर जाना पड़ता था। लेकिन, आज यहाँ नेशनल लेवल के, एक नहीं कई इंस्टीट्यूट बन चुके हैं। पिछले वर्षों में यहां स्कूलों की नई बिल्डिंग्स बनी हैं, स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम भी बने हैं। 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों को इनका लाभ मिल रहा है। मुझे खुशी है कि केंद्र शासित प्रदेश धीरे-धीरे एजुकेशन के क्षेत्र में आगे आ रहा है। स्वामी विवेकानंद एजुकेशन हब जैसे कई निर्माण यहाँ हो रहे हैं।
भाइयों-बहनों,
इस शिक्षा क्रांति में हमारी बेटियाँ पीछे न रहें, ये भी हमारा संकल्प है। इसके लिए कई बड़े प्रयास किए जा रहे हैं। सरस्वती साइकिल स्कीम, सरस्वती विद्या योजना, यहां की बेटियों को बहुत मदद कर रही है।
साथियों,
आज भारत की कोशिश है कि देश के युवाओं को डिग्री के साथ ही सही दिशा भी मिले। उन्हें ऐसा एक्सपोजर मिले, जो लोकल टैलेंट को ग्लोबल अवसरों से जोड़े। डिजाइन, लॉ, इंजीनियरिंग, मेडिकल एजुकेशन, आईटी, ड्रोन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हमारी आज की तैयारी भारत की वर्कफोर्स को मजबूत बनाएगी। इसलिए प्रोफेशनल संस्थानों का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।
साथियों,
आज NIFT के अठारहवें campus की आधारशिला रखी गई है। ये संस्थान यहां के युवाओं को ग्लोबल एक्सपोजर से जोड़ेगा। आई.टी.आई. दमन में ड्रोन टेक्नीशियन जैसे नए कोर्सेस भी शुरू हुए हैं। पीएम विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, इनसे जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का लाभ भी युवाओं को मिल रहा है।
साथियों,
देश में खेलों को भी नई सोच के साथ आगे बढ़ाया गया। हमारे खेल अब केवल बड़े शहरों या बड़े स्टेडियमों तक सीमित नहीं हैं। खेलो इंडिया जैसे प्रयासों ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का नया मंच दिया है। इससे छोटे-छोटे क्षेत्रों में नेशनल लेवल पर खेल के जगत में हमारे बच्चे आगे आ रहे हैं और इसका भी लाभ इस क्षेत्र को हुआ है। दीव आज beach sports का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। घोघला बीच पर हुए Beach Games ने भी देश का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींचा है। आज यहां आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार काम हो रहा है। खानवेल में फुटबॉल सेंटर और दमन में वॉलीबॉल ट्रेनिंग सेंटर यहां खेल संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं।
साथियों,
आज देश का बहुत बड़ा फोकस टूरिज्म पर भी है। हमारा प्रयास है कि टूरिज्म से स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिले। छोटे-छोटे स्थानों को भी बड़े-बड़े अवसरों से जोड़ा जा सके। ‘देखो अपना देश’ जैसे प्रयास ने लोगों को देश की विविधता के बारे में जानने के लिए प्रेरित किया है। आज भारत में हैरिटेज टूरिज्म, ‘बीच टूरिज्म’, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, इन सेक्टर्स को नई ऊर्जा मिल रही है।
साथियों,
दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में तो पर्यटन भी इतनी असीम संभावनाओं वाला एक क्षेत्र है। इस क्षेत्र को प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत वरदान मिला है। इसीलिए पर्यटन को लेकर देश ने जिन नीतियों पर काम किया है, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव को उसका बड़ा लाभ मिल रहा है। 2021 में यहां करीब 6 लाख टूरिस्ट आए थे। 2025 में ये संख्या बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही वर्षों में टूरिज्म फुटफॉल में करीब 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। यह बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सुविधाओं, साफ-सुथरे ‘बीच’ की वजह से संभव हुआ है। दमन नाइट मार्केट, रामसेतु सी-फ्रंट, नमोपथ सी-फ्रंट, नानी दमन फोर्ट, गंगेश्वर टेंपल कॉम्प्लेक्स, ऐसे अनेक स्थान आज इस पूरे क्षेत्र की नई पहचान बना रहे हैं।
साथियों,
दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, इसके सपनों को पूरा करने के लिए हमें यहाँ की औद्योगिक ताकत को भी बढ़ाना है। यह भी गर्व की बात है कि इस यूनियन टेरिटरी ने man-made fibre के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। दादरा और नगर हवेली को National Man-Made Fibre Capital के रूप में पहचाना जाता है। प्लास्टिक एक्सपोर्ट में भी ये क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार ने यहां इंडस्ट्रीज और MSMEs को सपोर्ट देने के लिए भी लगातार प्रयास किए हैं। यहां MSMEs और अन्य इंडस्ट्रीज को करोड़ों रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश के लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में ये क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनेगा।
साथियों,
जब विकास के विजन के साथ संवेदनशील गवर्नेंस जुड़ता है, तो परिवर्तन तेज गति से जमीन पर उतरता है। दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में हमारे इन प्रयासों का प्रभाव देखकर संतोष होता है। मुझे इस धरती के लोगों पर पूरा विश्वास है। यहां के युवा, यहां की माताएं-बहनें, यहां के किसान, कारीगर, श्रमिक और उद्यमी, आने वाले वर्षों में इस विकास यात्रा को और आगे ले जाएंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ, आपके सपनों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर विकास परियोजनाओं के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!