मैं अपनी बात शुरू करने से पहले, सबसे पहले श्री वसंत गोवारिकर जो हमारे देश के गणमान्य वैज्ञानिक थे और आज ही हमारे बीच नहीं रहे। मैं इसी धरती की संतान और भारत को विज्ञान जगत में आगे बढ़ाने में जिन्होंने बहुत अहम भूमिका निभाई थी ऐसे श्रीमान वसंत गोवारिकर जो को हृदय अंतःकरण पूर्वक श्रृद्धांजलि देता हूं।

देवियों और सज्जनों,

भारतीय विज्ञान कांग्रेस में शामिल होना एक बड़ा सम्मान है। मैं इस आयोजन के लिए मुम्बई विश्वविद्यालय का धन्यवाद करता हूं।

गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे विज्ञान कांग्रेस में शामिल होने का मौका मिला था। दस साल बाद दोबारा मिले इस अवसर से मुझे  खुशी हुई है।

मैं सौ साल पुरानी संस्था के समृद्ध इतिहास की प्रशंसा करता हूँ।

मैं वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कार्यों के लिए उनका आभारी हूं और मैं मानता हूं कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी, विकास और सुशासन के अमूल्य सहयोगी हैं।

मानव का स्वभाव दुनिया और ब्रह्माण्‍ड के बारे में जानने और समझने का है इसी वजह से मानव सभ्यता इतनी विकसित हुई है।

यह विश्वास के द्वारा संचालित एक खोज है जिसे हमारे वेदों में सत्य सर्वं प्रतिष्ठानां - सत्य में सबकुछ समाहित है के रूप में व्‍याख्‍या की गई है। ।

विज्ञान मानव मस्तिष्क की उपज हो सकता है लेकिन यह मानव जीवन को बेहतर बनाने की मानवीय भावनाओं द्वारा भी संचालित होता है।

हमारे साथ नोबल पुरस्कार विजेता मौजूद हैं, जिनके विज्ञान के क्षेत्र में कार्य ने जानलेवा बीमारियों से निपटने में नई उम्मीद जगाई है।

हमारे पास एक ऐसे व्यकित भी हैं जिनकी सामाज विज्ञान की समझ ने सबसे गरीब लोगों को आशा, अवसर और सम्मानजनक जीवन दिया है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी, गरीबी से निपटने और समृद्धि के विस्तार में सहायक है; भूख मिटाने और बेहतर पोषण; बीमारियों का खात्मा; स्वास्थ्य का स्तर सुधारने और बच्चों को जीवन देने के ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने; अपने प्रियजनों और दुनिया से जुड़ने; शिक्षा और जागरुकता के प्रसार; और हमें पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध कराता है जो हमारे पर्यावास को ज्यादा वहनीय बनाता है।

राष्ट्र की प्रगति और मानव का विकास विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े हुए हैं। हाल के वर्षों में चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रुप में उभरा है साथ ही उसने खुद को समानांतर रुप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी  दूसरे स्थान पर स्थापित किया है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी राष्ट्र की सीमाओं को लांघते हुए विश्व को एक सूत्र में पिरोता और शांति का प्रसार करता है।  यह विश्व की चुनौतियों से निपटने के सामूहिक प्रयासों में गरीब और अमीर देशों को साथ ला सकता है।

लेकिन हम जानते हैं कि यह असमानता बढ़ा सकता है, युद्धों को ज्यादा संहारक बना सकता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है। कभी कभी हमें जटिलताओं के बारे में बाद में पता चलता है जैसा कि हमने जलवायु परिवर्तन के साथ किया; कभी कभी ये हमारे अपने फैसलों का परिणाम होता है।

उदाहरण के तौर पर, सूचना प्रौद्योगिकी का विकास क्षमता और उत्पादकता बढ़ाने किया गया; यद्यपि इसके विभिन्न भटकाव सरलता से हमें पराजित कर सकते है। जैसा कई बार होता है कि हम किसी बैठक में हैं और मन में अपने संदेशों को पढ़ने का लालच रहता है!

इसलिए, जब भी हम विज्ञान और मानव विकास की बात करते हैं, हम इसे समानता, सिद्धांत और पहुंच जैसे राजनीतिक फैसलों  से अलग नहीं कर सकते।

मानव विकास का वृहद उद्देश्य है जो भारतीय वैज्ञानिक गतिविधियों की असली ताकत है और विज्ञान आधुनिक भारत के निर्माण में सहयोग करता है।

आजादी की शुरूआत के साथ प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में स्थापित किया था। हमारे वैज्ञानिकों ने मामूली संसाधनों के साथ भलि प्रकार देश की सेवा करने वाले अग्रणी अनुसंधान किए और अभूतपूर्व संस्थाओं का निर्माण किया।

तभी से हमारे वैज्ञानिकों ने कई क्षेत्रों में हमें विश्व में अग्रणी बनाए रखा है।

जब कभी विश्व ने हमारे लिए रास्ते बंद किए, हमारे वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय अभियान की भावना के साथ कार्य किया। जब भी विश्व ने हमसे सहयोग मांगा, हमारे वैज्ञानिकों ने खुलेपन से उनका स्वागत किया जो हमारे समाज में अंतर्निहित है।

उन्होंने मावन विकास की सबसे गंभीर और दूभर चुनौतियों का निवारण किया है। उन्होंने भोजन जैसी आधारभूत आवश्यक्ताओं को पूरा करने के लिए दूसरों पर निर्भरता को समाप्त करने में हमारी मदद की है। उन्होंने हमारी सीमाओं को सुरक्षित बनाया है, औद्योगिक प्रगति में सहायता की और हमारे लोगों को सम्मानजनक और अवसरों से पूर्ण जीवन प्रदान किया है।

हमारे वैज्ञानिकों ने पहले ही प्रयास में मंगलयान को मंगल की कक्षा में स्थापित कर दिया। मैं राधा कृष्णन की टीम को बधाई देता हूं - हुदहुद तूफान के बार में वैज्ञानिकों के सटीक अनुमान से हजारों लोगों की जान बचाई जा सकी; हमारे परमाणु वैज्ञानिक ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता के लिए काम कर रहे हैं और उन्होंने कैंसर के इलाज और अनुसंधान के मामले में एशिया क्षेत्र में भारत को अग्रणी बना दिया है।

हमारी उपलब्धियों पर हमें गर्व है लेकिन उन चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जिनका हम देश में सामना करते हैं।

हम उसी तरह की उम्मीदों और उत्साह के माहौल में हैं जैसा कि देश की स्वाधीनता के समय था।

इस समय देश में परिवर्तन के लिए सकारात्मक माहौल है; इसे बनाए रखने के लिए ऊर्जा और इसे हासिल करने के लिए विश्वास की जरूरत है।

लेकिन भारत के बारे में हमारे जो सपने हैं - खेती को ज्यादा व्यवहारिक और उत्पादक बनाना; ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वहनीय और उपयुक्त तकनीकी विकसित करने; पानी की हर बूंद का बेहतर इस्तेमाल; और समुद्रीय  संसाधनों की क्षमता के इस्तेमाल; अपनी जैव विविधता के संरक्षण; अपने पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए - विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर उतना ही नर्भर करते हैं जितना कि नीति और संसाधनों पर

गरीबों की पहुंच योग्य बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं और स्वास्‍थ्‍य उपकरणों के विकास; पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को वहनीय और ज्यादा कारगर बनाने के लिए;

प्रौद्योगिकी के प्रयोग से सभी के लिए घर और स्वच्छता के सपने को पूरा करने के लिए

हमारे शहरों को स्‍वच्‍छ और अधिक रहने योग्‍य बनाने के लिए हमें ही समाधान ढ़ढंना होगा

व्‍यर्थ को संपदा में बदलने और भविष्‍य के सतत ढांचा विकास के लिए संसाधन

मानव विकास के लिए इंटरनेट का उपयोग करना

भारत को प्रमुख विनिर्माण देश और ज्ञान तथा प्रौद्योगिकी आधारित उद्योग के लिए केन्‍द्र बनाना

मेरे लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की पहुंच सबसे गरीब, सबसे पिछड़े और सबसे असहाय लोगों तक होना है

यह राष्‍ट्रीय महत्‍व का उद्यम है जिसमें सरकार, उद्योग, राष्‍ट्रीय प्रयोगशालाओं, विश्‍वविद्यालयों और अनुसंधान संस्‍थानों को मिलकर कार्य करना होगा

अधिकतर विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर बातचीत बजट के प्रश्‍न तक ही सीमित होती है यह महत्‍वपूर्ण है और मुझे विश्‍वास है कि इसमें लगातार वृद्धि होगी

लेकिन हमारी उपलब्‍धियों ने यह दर्शा दिया है कि कई बार सफलता के लिए आवश्‍यकता, विजन और जोश अधिक महत्‍वपूर्ण होते हैं

और संसाधनों का हम कैसे उपयोग कर सकते है कि कैसे प्रभावी निर्धारण हो जिससे विज्ञान और प्रौद्योगिकी को हमारे लिए कारगर बनाया जा सके

हमारे विकास की चुनौतियां, स्वाभाविक रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमारी प्राथमिकताएं तय करेगी

हम कुछ महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में ध्‍यान दे रहे है लेकिन हमें अनुसंधान और विकास को कुछ पूर्व निर्धारित लक्ष्‍यों तक ही सीमीत नहीं रखने चाहिए

और अनुसंधान, विकास तथा नवाचार पर जितना ध्‍यान दिया जाता है उनता ही ध्‍यान आधारभूत अनुसंधान पर भी देना महत्‍वपूर्ण है

हमें यह भी मानना चाहिए कि विज्ञान सर्वव्‍यापी है लेकिन प्रौद्योगिकी स्‍थानीय हो सकती है

अगर हम पारंपरिक और स्‍थानीय ज्ञान, प्रणालियों और प्रौद्योगिकीयों को इसमें शामिल करें तो हम अधिक उचित, प्रभावी, वहन करने योग्‍य और सतत समाधान विकसित कर सकते है जो मानव विकास और प्रगति में बड़ा योगदान दे सकते हैं

सरकार को देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रमुख स्रोत के तौर पर विकसित करने के लिए भी कदम बढ़ाना चाहिए

जब मैं देश में रोजगार करने में आसानी की बात करता हूं तब मैं यह भी चाहता हूं कि देश में विकास और  अनुसंधान में भी आसानी पर उतना ही ध्‍यान दिया जाए

प्रस्‍तावित धनराशि स्‍वीकृत करने में अधिक समय ना लगाया जाए, बैठक- आवेदन पत्र की आवश्‍यकताएं अनुसंधान से अधिक जटिल नहीं होनी चाहिए, स्‍वीकृति की प्रक्रिया अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन के लिए बाधा नहीं बननी चाहिए, हमारे वैज्ञानिक विभागों को अनुसंधान गतिविधियों में अंतर्निहित अनिश्‍चिताओं के आधार पर धनराशि के बारे में फैसला लेने में लचीला होना चाहिए

मैं चाहता हूं कि हमारे वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं को सरकारी प्रक्रियाओं के बजाए, विज्ञान के रहस्‍यों को उजागर करना चाहिए।

हम चाहते हैं कि उनके शोधकार्य ही उनकी सफलता के प्रतिमान हों और वे सरकारी मंजूरी के मोहताज नहीं हों। हमें जैव तकनीकी, नैनो साइंस, कृषि एवं क्‍नीनिकल शोध के क्षेत्र में शोध एवं विकास संबंधी स्‍पष्‍ट नियामक नीतियां बनानी है। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी मजबूत बौद्धित सपंदा व्‍यवस्‍था लगातार प्रभावी रूप से काम करती रहे और निजी क्षेत्र के प्रोत्‍साहन एवं सामाजिक बेहतरी के बीच सहीं संतुलन बना रहे।

इसके अलावा, न केवल वैज्ञानिक विभागों, बल्‍कि प्रत्‍येक सरकारी विभाग में एक ऐसा अधिकारी होना चाहिए जो अपने क्षेत्र से संबंध कार्य में विज्ञान एवं तकनीकी पर अधिक ध्‍यान दे और ऐसी गतिविधियों के लिए  विभाग के बजट में से कुछ प्रतिशत धनराशि का आवंटन करें। हम यह अनुभव अतंरिक्ष तकनीकी के साथ शुरू कर चुके हैं

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी गतिविधियों में निवेश, कारपोरेट सामाजिक दायित्‍व के व्‍यय का भी एक हि‍स्‍सा बनाया जाना चाहिए जिसे प्रत्‍यक्ष अथवा किसी स्‍वायत धनराशि से पूरा किया जा सकता है। हमें विभिन्‍न क्षेत्रों में हो रहे विकासों, नवाचारों तथा विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए विभिन्‍न संख्‍याओं तथा क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने की मजबूत संस्‍कृति की आवश्‍यकता है। मेरा मानना है कि यह भारत में आदर्श से कहीं अधिक दूर है।

मैं हमारे मंत्रालयों से कहूंगा कि वे अनुसंधान के लिए धनराशि के अनुरोध पर सहायता करने और उनके संस्‍थानों के साथ सहयोग को आवश्‍यक बनाये

हमें देश में विश्‍वविद्यालय प्रणाली को अनुसंधान और विकास गतिविधियों में अग्रणी बनाना होगा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में हमारा विनिवेश केन्‍द्र सरकार के एजेंसियों तक ही सीमि‍त है और इसे अधिक क्षेत्रों में बढ़ाया जाना चाहिए

हमारे विश्‍वविद्यालय अत्‍यधिक नियमन के शिकंजे  और बोझि‍ल प्रक्रियाओं से मुक्‍त होने चाहिए। वहां पर अधिक अकादमि‍क स्‍वतंत्रता और स्‍वायतता होनी चाहिए और शिक्षण के समान ही अनुसंधान पर भी जोर दिया जाना चाहिए ।

इसके परिणाम स्‍वरूप विश्‍वविद्यालयों की उच्‍च अकादमिक और अनुसंधान स्‍तरों पर जिम्‍मेदारी बढ़ेगी, जिसमें संपूर्ण समकक्ष समीक्षा शामिल होगी

हमें हमारे उच्‍च शिक्षण क्षेत्रों को तेजी से विस्‍तार करना होगा हालांकि हमारे मौजूदा संस्‍थानों में फेकल्‍टी की कमी है

हमारे पास केंद्रीय संस्थाओं और एजेंसियों में काम करने वाले प्रख्यात वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की कमी नहीं है और मैं चाहता हूं कि वे प्रतिवर्ष किसी विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों में कुछ समय व्यतीत करे और पीएचडी के छात्रों को गाइड करें।

      हमारे उद्योग जगत को पहल करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाना है।

 भारत के फार्मास्यूटिकल उद्योग ने विश्व में अपनी पहचान बनाई है क्योंकि इसने शोध के क्षेत्र में काफी निवेश किया है। वस्तुत:  हमारी लंबी वैश्विक प्रतिस्पर्धा दूसरों की यह नकल करने पर निर्भर नहीं करेगी कि उन्होंने क्या किया है बल्कि यह सतत विकास एवं नवाचार की प्रक्रिया पर आधारित होगी।

शोध एवं विकास के क्षेत्र में न केवल व्यापारिक जगत में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रवृत्ति बढ़ रही है बल्कि यह विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं में शोध कार्यों और विद्धानों में भी दिख रही है। हमें इसका पूर्ण रूप से लाभ उठाना चाहिए। इसी वजह से मैंने अपने कूटनीतिक एजेंडें में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सबसे आगे रखा है।

      मैंने विश्व की अनेक देशों की यात्रा के दौरान वैज्ञानिकों से व्यक्तिगत रूप से स्वच्छ ऊर्जा, कृषि, जैव-तकनीकी, चिकित्सा, औषधि तथा स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्रों में सहयोग के बारे में जानकारी ली है।

विश्व के समक्ष आज विशाल चुनौतियों का समाधान करने के लिए हमने सभी अग्रणी देशों के साथ उत्कृष्ठ सहयोग स्थापित किया है और मैंने अपने पड़ोसी देशों तथा अन्य विकासशील देशों को अपनी विशेषज्ञता की पेशकश की है।

      मैं अक्सर अपने देश के युवाओं के लिए कौशल विकास की बात करता हूं अगर हम अगली पीढी के विश्व स्तरीय वैज्ञानिकों, तकनीकविदों और प्रवर्तकों को तैयार कर सकें तो इससे हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा और हमारा वैश्विक नेतृत्व भी संभव हो सकेगा।

स्कूलों में विज्ञान और गणित की शिक्षा को अधिक प्रेरक तथा रचनात्मक बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा हमारे देश के बच्चों तथा युवाओं के साथ वैज्ञानिकों के प्रत्यक्ष सम्पर्क के लिए हमें इंटरनेट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए जिस प्रकार स्कूल जाना एक बुनियादी अधिकार है उसी तरह डिजिटल कनेक्टिविटी को भी बनाया जाना चाहिए।

मैं विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हजारों बच्चों तथा युवाओं को शामिल करने के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रयासों का स्वागत करता हूं।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि हमारे युवा छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाएं जीत रहे हैं और उनमें से 12 के नाम पर कुछ छोटे धूमकेतुओं का नाम भी रखा गया है।

हमारे देश के बच्चों को खेलों की तरह विज्ञान में भी अपने रोल मॉडल चुनने चाहिए। व्यापार और सिविल सेवाओं की तरह विज्ञान में भी अपना भविष्य चुनने वाले बच्चों पर उनके माता पिता को गर्व होना चाहिए, मगर इसके लिए विज्ञान की शक्ति तथा संभावनाओं को बेहतर तरीके से बताया जाना जरूरी है।

आईए, अब हम निकट भविष्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को गणतंत्र दिवस की परेड थीम बनाएं। जिस प्रकार हम अन्य क्षेत्रों में अर्जित सफलताओं पर जश्न मनाते हैं, उसी तरह वैज्ञानिक जगत की उपलब्धियों पर भी उत्सव मनाने की आवश्यकता है।

हमें उन युवा सहभागियों और प्रतियोगियों को समाज में विशेष पहचान देनी चाहिए जो विज्ञान प्रदर्शनियों में शीर्ष स्थान पाते हैं और सरकार की तरफ से भी उन्हें लगातार सहयोग देना चाहिए।

मैं अपने श्रेष्ठ युवा वैज्ञानिकों से व्यक्तिगत रूप से मिलना बेहद पसंद करूंगा। अंत में मुझे यह कहना है कि ज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित इस विश्व में भारत के लिए एक सुरक्षित, सतत और समृद्ध भविष्य या वैश्विक नेतृत्व के लिए हमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवाचर को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखने की आवश्यकता है।

मुझे पूरा भरोसा है कि हम यह कर सकते हैं।

हम प्राचीन समय से ही विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भारत की हमेशा उन्नतिशील परपंरा के उत्तराधिकारी हैं। गणित, चिकित्सा, धातुकर्म एवं खनन, गणना एवं वस्त्र, वास्तुकला तथा खगोल विज्ञान के क्षेत्र में विश्व की भारतीय सभ्यता की देन काफी समृद्ध रही है।

      पिछले 6 दशकों में विभिन्न कठिन परिस्थितियों में हमने जो सफलताएं हासिल की हैं हम उनसे प्रेरणा तथा विश्वास हासिल कर सकते हैं। कई संस्थानों की मजबूती विज्ञान के क्षेत्र में भारत की समृद्ध प्रतिभा तथा बारत के पांच प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों के रुप में है और जिनका हाल में ही सम्मान किया है।

      सबसे पहले हमें विज्ञान एवं वैज्ञानिकों के अपने गौरव को बरकरार रखना है। समाज में विज्ञान के प्रति लोगों की उत्सुकता को पुर्नजीवित करना है। हमारे बच्चों में वैज्ञानिक शिक्षा के प्रति प्रेम को फिर से जगाना है और देश के वैज्ञानिकों को कल्पना करने, सपने देखने तथा उन पर काम करने के लिए प्रेरित करना है।

      आपको मुझसे बेहतर सहारा देने वाला कल नहीं मिलेगा और इसके बदले मैं भारत को बदलने के लिए आपकी मदद चाहता हूं।

      आप सभी का धन्यवाद, सभी को शुभकामनाएं!!

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TMC की गुंडागर्दी के दिन अब खत्म होने जा रहे हैं: कोलकाता में पीएम मोदी
March 14, 2026
TMC की गुंडागर्दी के दिन खत्म होने वाले हैं। TMC सरकार के जाने का काउंटडाउन शुरू हो गया है: कोलकाता रैली में पीएम मोदी
घुसपैठ की वजह से बंगाल की ‘रोटी, बेटी और माटी’ खतरे में है। लोकल लोगों की नौकरियां छीनी जा रही हैं, हमारी बेटियों की सुरक्षा खतरे में है और गैर-कानूनी कब्जे हो रहे हैं: पीएम मोदी
मैं बंगाल की माताओं और बहनों को भरोसा दिलाता हूं कि BJP सरकार में महिलाएं सुरक्षित रहेंगी और अपराधी सलाखों के पीछे होंगे: पीएम मोदी का पश्चिम बंगाल से वादा
पहले कांग्रेस, फिर कम्युनिस्ट और अब TMC; वे एक के बाद एक आते रहे, अपनी जेबें भरते रहे जबकि बंगाल में विकास का काम रुका रहा: पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी

भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...

ये बेटी कब से चित्र लेकर खड़ी है कोई कलेक्ट कर लीजिए ताकि वो बेटी आराम से बैठ सके। जरा एसपीजी के लोग इसे कलेक्ट कर लीजिए। धन्यवाद बेटा... बहुत बढ़िया चित्र बनाया आपने...

भारत माता की... भारत माता की...

आमार प्रियो पोश्चिम बोंगोबाशी, भाई ओ बोनेरा, आमार अंतोरेर अंतोस्थल थेके… आपनादेर शोबाइके सश्रोद्धो प्रोणाम।

बंगाल की ये ऐतिहासिक धरती....ये ब्रिगेड परेड ग्राउंड का ऐतिहासिक मैदान.....और, बांग्ला मानुष का ये ऐतिहासिक जन-सैलाब... जहां जहां मेरी नजर पहुंच रही हो लोग ही लोग नजर आ रहे हैं। ये अद्भुत दृश्य है। ये.आपका उत्साह...ये आपका जोश...बंगाल क्या सोच रहा है....बंगाल के मन में क्या चल रहा है....अगर किसी को ये देखना है, तो जरा ये तस्वीरें देख ले!

ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास साक्षी है....जब-जब बंगाल देश को दिशा देता है...ये ब्रिगेड मैदान बंगाल की आवाज़ बनता है। इस मैदान से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उठी आवाज. और वो आवाज हिंदुस्तान में एक क्रांति बन गई थी। और उसका नतीजा क्या हुआ...अंग्रेजों के अत्याचार और लूट का खात्मा हुआ! आज एक बार फिर...ब्रिगेड ग्राउंड से नए बंगाल की क्रांति का बिगुल बज गया है। बंगाल में बदलाव अब दीवारों पर भी लिख चुका है... और बंगाल के लोगों के दिलों में भी छप चुका है। अब बंगाल से निर्मम सरकार का अंत होकर रहेगा... अब बंगाल से महाजंगलराज का खात्मा होगा। इसीलिए, बंगाल के हर कोने से आवाज उठ रही है... चाइ बीजेपी शॉरकार चाइ बीजेपी शॉरकार पाल्टानो दोरकार, चाइ बीजेपी शॉरकार

साथियों,

कल TMC ने इस रैली में आने वाले आप सभी लोगों को चोर कहकर गाली दी है। असली चोर कौन है, ये बंगाल की प्रबुद्ध जनता जानती है। अपनी कुर्सी जाते हुए देखकर... यहां की निर्मम सरकार बौखला गई है।

साथियों,

आज भी इस विशाल सभा को रोकने के लिए निर्मम सरकार ने सारे हथियार निकाल लिए आपलोगों को आने से रोकने के लिए ब्रिज बंद करवा दिए, गाड़ियां रुकवा दी, ट्रैफिक जाम करवाया, भाजपा के झंडे उखड़वा दिए, पोस्टर फड़वा दिए। लेकिन निर्मम सरकार साफ-साफ देख लो आज के जनसैलाब को रोक नहीं पाई हो। बंगाल में महाजंगलराज लाने वालों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। वो दिन दूर नहीं जब बंगाल में फिर से कानून का राज होगा...जो कानून तोड़ेगा... जो अत्याचार करेगा...TMC के किसी अत्याचारी को छोड़ा नहीं जाएगा। चुन-चुन के हिसाब लिया जाएगा।

भाइयों बहनों,

यहां की निर्मम सरकार चाहे अब जितना जोर लगा ले...परिवर्तन की इस आंधी को अब निर्मम सरकार रोक नहीं पाएगी... भाजपा के साथ...एनडीए के साथ...महिषासुरमर्दिनी का आशीर्वाद है। श्री रामकृष्ण परमहंस...स्वामी विवेकानंद....नेताजी सुभाष चंद्र बोस....ऋषि बंकिम चंद्र, गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर....ईश्वर चंद विद्यासागर...बाघा जतिन और खुदीराम बोस...डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी.....लोकमाता रानी रॉशमोनी...ऐसी सभी महान विभूतियों ने जिस बंगाल की परिकल्पना की थी....भारतीय जनता पार्टी की सरकार...उस बंगाल का निर्माण करेगी, नवनिर्माण करेगी।

साथियों,

बंगाल का विकास नेक नीयत से होगा, सही नीतियों से होगा। बंगाल में अभी हमारी सरकार नहीं है। लेकिन फिर भी, केंद्र सरकार के जरिए बीजेपी दिन-रात बंगाल के विकास में लगी हुई है। आज भी, मैंने 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया है। अभी-अभी 18 हजार करोड़.. कितना... कितना.. 18 हजार करोड़... कितना... कितना... कितना... चार दिन पहले ही, कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल के लिए मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। ये सभी प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगे। इसका फायदा यहां के सामान्य मानवी, किसान, व्यापारी और स्टूडेंट्स को मिलेगा।

भाइयो और बहनों,

यहां की निर्मम सरकार ने बंगाल के युवाओं को पलायन का अभिशाप दिया है। आप सब जानते हैं.... बंगाल के युवा प्रतिभा और हुनर में सबसे आगे हैं। बंगाल के युवा मेहनत करने में सबसे आगे हैं। बंगाल एक समय पर पूरे भारत के विकास को गति देता था... बंगाल व्यापार और उद्योगों में सबसे आगे था। लेकिन, आज हालात क्या हैं? यहाँ का युवा ना डिग्री ले पा रहा है... और ना ही उसे रोजगार मिल रहा है! आपके बेटे-बेटियों को काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है।

साथियों,

पहले कांग्रेस, फिर कम्युनिस्ट और अब TMC…. ये लोग एक के बाद एक आते रहे.... अपनी जेबें भरते रहे.... और बंगाल में विकास के काम ठप्प पड़े रहे। इनफ्रास्ट्रक्चर के मामले में हमारा बंगाल पीछे होता चला गया। उद्योग धंधे बंद होते चले गए। यहाँ टीएमसी सरकार में नौकरियां खुलेआम बेची जा रही हैं। भर्तियों में घोटाले हो रहे हैं। अब समय आ गया है.... अब समय आ गया है.... ये हालात बदलें, बंगाल के युवाओं को बंगाल में काम मिले! ये नौजवान बंगाल के विकास का नेतृत्व करें! एई शोप्नो आपनार, आर एई शोप्नो पूरोन कोरा.... मोदीर गारंटी! मोदीर गारंटी!

साथियों,

TMC सरकार का एक ही एजेंडा है.... ये टीएमसी वाले न खुद काम करेंगे, न करने देंगे! जब तक इनको अपना कटमनी नहीं मिल जाता.... ये किसी भी योजना को गाँव-गरीब तक नहीं पहुँचने देते! इसीलिए, TMC सरकार केंद्र की योजनाओं को रोककर रखती है। आप देखिए.... हम कारीगरों और कामगारों को आगे बढ़ाने के लिए पीएम-विश्वकर्मा योजना चला रहे हैं। हमारे कुम्हार, लोहार, बढ़ई... ऐसे हुनरमंद लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। लेकिन, निर्मम सरकार ने बंगाल में योजना पर ब्रेक लगा रखा है। मुझे बताइए भाइयों, मेरे इन विश्वकर्मा भाइयों को भारत सरकार के पैसे पहुंचने चाहिए कि नहीं पहुंचने चाहिए, उनको मदद मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए , उनका भविष्य उज्ज्वल होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए.. केंद्र सरकार पैसे दे रही है, बंगाल को कुछ नहीं करना है लेकिन उसके बावजूद भी ये विश्वकर्मा समाज के छोटे-छोटे भाई-बहनों को उससे वंचित रखा जाता है।

साथियों,

देशवासियों को मुफ्त बिजली देने के लिए हमने पीएम-सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की है। केंद्र की भाजपा सरकार इसके लिए हर लाभार्थी को 75 से 80 हजार रुपए देती है। आपको, बंगाल के मेरे भाई-बहनों को, हर परिवार को मोदी सरकार 75 से 80 हजार रुपए रुपये देती है। जो लाभार्थी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़ता है, उसके घर का बिजली बिल जीरो हो जाता है...लेकिन बंगाल सरकार इसे भी लागू नहीं होने दे रही। आप मुझे बताइए आपका बिजली बिल जीरो होना चाहिए कि नहीं। बिजली बिल जीरो करने के लिए मोदी की मदद मिलनी चाहिए कि नहीं चाहिए। जो इसे रोकते हैं वो आपके दुश्मन हैं कि नहीं हैं… बंगाल के दुश्मन हैं कि नहीं हैं… हर परिवार के दुश्मन हैं कि नहीं है।

साथियों,

बंगाल के विकास में चाय बागानों और उनमें काम करने वाले श्रमिकों की बड़ी भूमिका है। लेकिन चाय बागानों के श्रमिकों को PM चाह श्रमिक प्रोत्साहन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। मुझे बताइए.. चाय बागान के मेरे श्रमिकों को ये लाभ मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए… उनको मदद मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए। केंद्र सरकार की इस योजना में बंगाल सरकार रोड़े अटका रही है।

साथियों,

आप सबने देश भर में पीएम-आवास योजना की सफलता के बारे में सुना है! दुनिया के लोग भी जब सुनते हैं ना तो अचरज करते हैं। जो लोग बंगाल से बाहर रह रहे हैं… ऐसे हर गरीब परिवार को पक्का घर मिल रहा है। लेकिन यहां क्या हुआ? योजना का नाम बदल दिया गया। लाभार्थियों की सूची में गड़बड़ की। और जिन गरीबों को घर मिलना चाहिए था, वे आज भी इंतजार कर रहे हैं। ईमानदारी से, ट्रांसपैरेंसी से बंगाल के गरीबों को पक्का घर मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए….ये टीएमसी सरकार मिलने देगी क्या… ये निर्मम सरकार मिलने देगी क्या… ये सरकार जानी चाहिए कि नहीं जानी चाहिए… गरीबों को घर मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए

साथियों,

इतना ही नहीं, यही हाल जल जीवन मिशन का भी है। बंगाल में लोग पूछ रहे हैं...जब देश के बाकी हिस्सों में हर घर जल पहुंच सकता है, तो बंगाल में क्यों नहीं? भाइयों बहनों, केवल बिजली, पानी, सड़क और घर इसकी ही बात नहीं है....ये टीएमसी की सरकार...अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से आयुष्मान योजना को लागू नहीं कर रही है। देश के करोड़ों लोग इस योजना के तहत पाँच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का लाभ उठा रहे हैं। मुझे बताइए, गरीबों को बीमारी में पांच लाख रुपये तक की मदद पहुंचनी चाहिए कि नहीं पहुंचनी चाहिए.. मोदी दे रहा है मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए… ये टीएमसी सरकार बीमार लोगों का दुश्मन है कि नहीं है.. अत्याचारी है कि नहीं है… लेकिन बंगाल के गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये वाली आयुष्मान योजना से भी, उस अधिकार से वंचित रखा गया है।

साथियों,

आज बंगाल के किसान की हालत भी किसी से छिपी नहीं है. मुझे बताया गया है कि दो-तीन दिन पहले ही चंद्रकोना में हमारे एक आलू किसान ने खुदकुशी कर ली है। आत्महत्या कर ली है। पश्चिमी मिदनापुर से हुगली और बर्धवान तक....किसानों से झूठ वायदे और सरकारी खरीद में घोटाला ही ये टीएमसी सरकार की पहचान बन गया है। TMC के कट, कमीशन और करप्शन के कारण.... गंदी राजनीति के लिए किसानों की जिंदगी से, गरीबों और मध्यम वर्ग की जिंदगी से माताओं और बहनों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसीलिए....TMC जाएगी.... तो हर गरीब को पक्का घर मिलेगा। गरीब को पक्का घर मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए… मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए.. ये मोदी की गारंटी है। हर गरीब परिवार को बता देना कि जैसे ही टीएमसी की सरकार जाएगी गरीबों का पक्का घर बनना शुरू हो जाएगा। TMC जाएगी.... तो हर घर साफ जल पहुंचेगा। TMC जाएगी.... तो हर गरीब को मुफ्त इलाज मिलेगा। TMC जाएगी.... तो कारीगरों को नए अवसर मिलेंगे। TMC जाएगी.... तभी बंगाल में सुशासन आएगा।

साथियों,

हमारे बंगाल ने आज़ादी के बाद विभाजन सहा! विभाजन की आग देखी.... मजहबी दंगे देखे.... बाद के दशकों में अस्थिरता देखी.... घुसपैठ का दौर देखा... रक्तपात सहा! इस सबकी सबसे बड़ी भुक्तभोगी अगर कोई थीं, तो बंगाल की माताएं, बहनें, बेटियां, बंगाल की महिलाएं थीं। लेफ्ट की सरकार में अपहरण, हत्या, बलात्कार का वो दौर कोई नहीं भूल सकता। इसलिए बंगाल के आप लोग... लेफ्ट को हटाकर बढ़ी आशा के साथ TMC को लेकर आए! आपने TMC पर भरोसा किया! लेकिन, TMC ने लेफ्ट के गुंडों और माफियाओं को ही अपनी पार्टी में भर्ती कर लिया। आज बंगाल में अपराधियों को खुली छूट है। आए दिन बहन-बेटियों के खिलाफ दिल दहलाने वाले अपराध होते हैं। बंगाल का कोई इलाका ऐसी घटनाओं से अछूता नहीं है। आप याद करिए.... कॉलेज परिसर में दुष्कर्म की घटना.... नाबालिग बेटियों से दुष्कर्म के मामले.... TMC कार्यालय में महिला से बलात्कार.... 7-8 साल की बच्चियों से बलात्कार के खौफनाक कुकृत्य.... कहीं आदिवासी बेटी के साथ दुष्कर्म.... ऐसे ज़्यादातर मामलों में अपराधी कोई न कोई कोई न कोई TMC का नेता होता है... या TMC से जुड़ा होता है!

साथियों,

यहां निर्मम सरकार खुलेआम बलात्कारियों को संरक्षण देती है। अपराधियों को बचाने की पूरी कोशिश की जाती है। आप मुझे बताइए.. अपराधियों को बचाया जाता कि नहीं बचाया जाता… बलात्कारियों को बचाया जाता कि नहीं बचाया जाता.. संदेशखाली की वो तस्वीरें, और TMC सरकार का रवैया...आर.जी. कर अस्पताल की उस बेटी के साथ हुई दरिंदगी...बंगाल के लोग भूले नहीं हैं....TMC कैसे खुलेआम अपराधियों के साथ खड़ी नज़र आती थी।

साथियों,

इसी मानसिकता का परिणाम है... आज महिलाओं के खिलाफ एसिड अटैक… एसिड अटैक जैसे घिनौने अपराध इतने ज्यादा पश्चिम बंगाल में हो रहे हैं। जो बंगाल एक समय देश का सबसे प्रगतिशील राज्य होता था...आज वहाँ शाम होते ही माएं बेटियों को फोन करके कहती हैं....बाड़ी फिरे ऐशो शोन्धे नामार आगे। शक्ति की पूजा करने वाले बंगाल को ऐसे हालात मंजूर नहीं होंगे। मैं बंगाल की मेरी माताओं बहनों को भरोसा दिलाता हूँ....आप भाजपा को बीजेपी को अपना आशीर्वाद दीजिये। बीजेपी सरकार में महिलाएं सुरक्षित होंगी...और अपराधी जेल में होंगे। और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

TMC सरकार गुंडों और अपराधियों की बैसाखी पर चलती है। रंगबाजी और कटमनी... ये TMC की कमाई का जरिया है। ये लोग जानते हैं.... जिस दिन बंगाल के लोग खुलकर सामने आ गए...TMC की विदाई पक्की है। और मैं ये दृश्य देखकर कह सकता हूं कि अब टीएमसी को बचाने वाला कोई नहीं बचा है इसीलिए, ये बंगाल के आप लोगों को डरा-धमकाकर रखना चाहते हैं। इसके लिए TMC वाले माफिया गिरोहों को पालते हैं। ये कट्टरपंथियों को संरक्षण देते हैं। और ऐसे गिरोहों की ताकत बढ़ाने के लिए घुसपैठियों को बुलाते हैं.... घुसपैठियों को

साथियों,

ये TMC 'माँ, माटी, मानुष' के नारे पे सत्ता में आई थी..... आज वही माँ रो रही है… माटी को लूटा जा रहा है.... और, बंगाली मानुष बंगाल छोड़ने पर मजबूर हो रहा है। घुसपैठियों की वजह से आज बंगाल की ‘रोटी, बेटी, माटी’ उस पर सबसे बड़ा खतरा आ गया है। ये लोग बंगाल के लोगों का रोजगार छीन रहे हैं। हमारी बहन बेटियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। और, बंगाल के लोगों की ज़मीनों पर, बंगाल की माटी पर इन घुसपैठियों को कब्जा दिलवाया जा रहा है। इसका परिणाम आज सबके सामने है। बीते दशकों में बंगाल के ज़्यादातर इलाकों में डेमोग्राफी बदल गई है। बंगाली हिंदुओं को जानबूझकर अल्पसंख्यक बनाया जा रहा है। तुष्टीकरण का ऐसा खुला खेल.... जब शरणार्थी हिंदुओं को नागरिकता देने की बात होती है, तो पूरी TMC उसका विरोध करती है। वो हिन्दू... जिन्होंने कभी विभाजन का समर्थन नहीं किया था! जिन्होंने हमेशा अविभाजित बंगाल को, भारत को अपनी मातृभूमि माना! TMC वाले उन्हें नागरिकता देने का विरोध करते हैं। क्योंकि, उनके लिए उनका वोट बैंक ही सबसे प्रमुख है। वो हिंदुओं को वो अपना वोटबैंक नहीं समझते! उनसे उनके आपराधिक गिरोह नहीं बढ़ते! इसीलिए, ये लोग SIR का भी विरोध करते हैं। ताकि, घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से हट ना जाएं...वोटर लिस्ट शुद्ध ना हो जाए! ये तो ऐसे लोग है … जिनकी मृत्यु हो जाए उनके नाम तक निकालने को तैयार नहीं हैं ।

भाइयों बहनों,

डेमोग्राफी के इस खतरनाक बदलाव ने आज बंगाल को असुरक्षित बना दिया है। और अब तो, यहां खुलेआम धमकी दी जा रही है! कहा जा रहा है कि एक खास कम्यूनिटी वाले मिलकर आप लोगों को खत्म कर देंगे! संवैधानिक कुर्सी पर बैठकर ऐसी धमकी !!! करोड़ों बंगाली लोगों को खत्म करने की बात !!!....आपके मुंह में शोभा नहीं देती है मैं पूछना चाहता हूँ…वो कौन लोग हैं, जो TMC सरकार के इशारों पर करोड़ों लोगों को खत्म कर देंगे?

साथियों,

धमकाने-डराने की इस राजनीति को...TMC ने इसे अपना हथियार बना लिया है। चुनाव में वोटरों को धमकी... सरकार के नीतियों के आलोचकों को धमकी... मीडिया को धमकी... विपक्ष को धमकी... ये बंगाल में खौफ का कैसा माहौल बनाकर रखना चाहते हैं... ये पूरे देश को जानना चाहिए... ये लोग कहते हैं... तृणमूल को जिसका वोट नहीं, TMC को जिसका वोट नहीं, तो वो बंगाली नहीं! तृणमूल को वोट नहीं, तो सरकार योजना का लाभ नहीं! तृणमूल को वोट नहीं, तो घरों में बिजली पानी नहीं! TMC सिंडीकेट के जरिए नहीं जाओगे, तो कोई सप्लाइ नहीं! लेकिन साथियों, मैं TMC को याद दिलाना चाहता हूँ... TMC की गुंडागर्दी के दिन अब खत्म होने जा रहे हैं। TMC सरकार के जाने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। यहां बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद एक तरफ हम, सबका साथ, सबका विकास ये मंत्र लेकर चलेंगे, दूसरी तरफ सबका हिसाब लिया जाएगा। टीएमसी के वे गुंडे, TMC के ये गुंडे जो आपको डराते हैं...बीजेपी सरकार में उनके डर भरे दिन शुरू होना तय है। बीजेपी सरकार में खौफ हर अपराधी को होगा... खौफ हर घुसपैठिए को होगा...खौफ तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों को होगा...क्योंकि, कानून अपना काम करेगा! कानून का राज आएगा ऐसे लोगों को मुंह छिपाने की जगह नहीं मिलेगी। ऐसे अपराधियों की सिर्फ एक ही जगह होगी- एक ही जगह होगी जेल। जेल। जेल।

साथियों,

बंगाल की निर्मम सरकार में आज सबसे ज्यादा प्रताड़ित यहाँ का दलित, आदिवासी और हमारे गरीब भाई-बहन हैं। आदिवासी समाज के साथ कैसा अन्याय होता है... ये किसी से छिपा नहीं है। लेकिन, अब तो TMC सरकार ने सभी सीमाएं लांघ दी हैं। आप देखिए...अभी कुछ दिन पहले हमारे देश की महामहिम राष्ट्रपति... आदिवासी समाज की बेटी… आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी बंगाल आईं थीं। उन्हें संथाल आदिवासी परंपरा के पावन उत्सव में शामिल होना था। लेकिन अहंकार में डूबी इस निर्मम सरकार ने न केवल उस कार्यक्रम का बहिष्कार किया, बल्कि उसे पूरी तरह बदइंतजामी के हवाले कर दिया। क्योंकि, एक आदिवासी बेटी इतने बड़े पद पर है.... TMC वालों को उनका सम्मान मंजूर नहीं हुआ! द्रौपदी मुर्मू जी, जो हमेशा अपनी सरलता के लिए जानी जाती हैं.... उन्हें खुद बड़े दुखी मन से खेद व्यक्त करना पड़ा! भारत के राष्ट्रपति को अपनी तकलीफ बतानी पड़ी! TMC वालों को ये याद रखना पड़ेगा...उन्होंने केवल द्रौपदी मुर्मू जी का अपमान नहीं किया है। उन्होंने करोड़ों आदिवासियों का अपमान किया है। उन्होंने करोड़ों महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने देश के सर्वोच्च पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। इन्होंने भारत के संविधान का अपमान किया है। इन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान किया है और इसका जवाब बंगाल के लोगों से टीएमसी को मिलने वाला है। निर्मम सरकार को मिलने वाला है।

साथियों,

TMC सरकार ने बंगाल को पूरी तरह से अराजकता के हवाले कर दिया है। संवैधानिक व्यवस्था पर आए हर दिन हमले करने के वो रास्ते खोजते रहते हैं, हमले करते रहते हैं। पिछले कुछ महीनों में आपने देखा है....जब भी चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाता है, मतदाता सूची की शुद्धि की कोशिश करता है, तब टीएमसी उसके खिलाफ हमला करने लगती है। जो संस्था स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है, उसी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जाते हैं। ऐसा ही व्यवहार देश की सेना को लेकर दिखाई देता है। जब 2019 में भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंकवादी ठिकानों पर निर्णायक कार्रवाई की, तब TMC ने देश की वायुसेना से कार्रवाई का सबूत मांगा।

साथियों,

यहां राज्य सरकार...पुलिस को स्वतंत्र रूप से जांच करने नहीं देती। जब राष्ट्रीय एजेंसियां TMC सरकार के भ्रष्टाचार या गंभीर अपराधों की जांच करना चाहती हैं, तो उन्हें भी रोकने की कोशिश होती है। अब जरा सोचिए, न्याय के लिए लोग आखिर कहां जाएंगे? साथियों, तृणमूल वाले यही अराजकता दिल्ली तक फैलाने की कोशिश करते हैं। आपने संसद में भी देखा है… सदन के भीतर कैसे कागज फाड़े जाते हैं, कैसे बहस को रोका जाता है, कैसे सदन की कार्यवाही को बाधित किया जाता है। देश...TMC की शर्मनाक हरकतें देखकर हैरान होता है। साथियों,बंगाल के प्रबुद्ध लोग अब इस अराजकतावादी सरकार के खिलाफ संकल्प ले चुके हैं। इस अराजक सरकार को उखाड़ फेंकने का काम इसी धरती के लोग करने वाले हैं।

साथियों,

आज यहां जो जनसैलाब उमड़ा है...ये पश्चिम बंगाल की जागती हुई चेतना है। यह उस बदलाव की आहट है, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग की पहाड़ियों से लेकर सुंदरबन के द्वीपों तक, उत्तर बंगाल के चाय बागानों से लेकर कोलकाता की गलियों तक, आज हर जगह पर एक ही चर्चा है। बदलाव चाहिए... और ये बदलाव अब होकर रहेगा। साथियों, बंगाल की आत्मा कभी हार मानने वाली नहीं है। बंगाल… का नौजवान कभी हार मानने वाला नहीं है। बंगाल की बेटियां कभी हार मानने वाली नहीं है। बंगाल का किसान कभी हार मानने वाला नहीं है। जब-जब इस भूमि के सामने चुनौतियाँ आई हैं, तब-तब यहाँ की जनता ने साहस के साथ उनका सामना किया है। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने भी हमें यही संदेश दिया है। उन्होंने कहा था...

“बिपोदे मोरे रोक्खा करो ए नोहे मोर प्रार्थना,
बिपोदे आमि ना जेनो कोरि भॉय।”

आज भी वही समय है। कुछ लोग आपको डराने की कोशिश करेंगे। कुछ लोग कहेंगे कि बदलाव संभव नहीं है। लेकिन याद रखिए, और याद जरूर रखें.. जब जनता ठान लेती है, तो कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती। और बंगाल की जनता ने जब भी ठाना है, इतिहास बदल कर दिखाया है। आज मुझे इस ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में वही आत्मविश्वास, मेरी आंखों के सामने दिखाई दे रहा है। याद रखिए...इस बार चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं... इस बार चुनाव बंगाल की आत्मा को बचाने का है। इस बार चुनाव व्यवस्था बदलने का है। इस बार चुनाव कट-मनी से छुटकारे का है। इस बार चुनाव डर से मुक्ति का है। मैं आने वाले परिवर्तन के लिए मेरे बंगाल के भाइयों बहनों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे साथ बोलिए, मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए..

पाल्टानो दोरकार, चाइ बीजेपी शॉरकार!

पाल्टानो दोरकार, चाइ बीजेपी शॉरकार!

पश्चिम बोंगेर जॉनोगोनेर जॉय होक!

जय हिंद।

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

वंदे.. वंदे... वंदे... वंदे.. मातरम्!