मैं अपनी बात शुरू करने से पहले, सबसे पहले श्री वसंत गोवारिकर जो हमारे देश के गणमान्य वैज्ञानिक थे और आज ही हमारे बीच नहीं रहे। मैं इसी धरती की संतान और भारत को विज्ञान जगत में आगे बढ़ाने में जिन्होंने बहुत अहम भूमिका निभाई थी ऐसे श्रीमान वसंत गोवारिकर जो को हृदय अंतःकरण पूर्वक श्रृद्धांजलि देता हूं।

देवियों और सज्जनों,

भारतीय विज्ञान कांग्रेस में शामिल होना एक बड़ा सम्मान है। मैं इस आयोजन के लिए मुम्बई विश्वविद्यालय का धन्यवाद करता हूं।

गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे विज्ञान कांग्रेस में शामिल होने का मौका मिला था। दस साल बाद दोबारा मिले इस अवसर से मुझे  खुशी हुई है।

मैं सौ साल पुरानी संस्था के समृद्ध इतिहास की प्रशंसा करता हूँ।

मैं वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कार्यों के लिए उनका आभारी हूं और मैं मानता हूं कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी, विकास और सुशासन के अमूल्य सहयोगी हैं।

मानव का स्वभाव दुनिया और ब्रह्माण्‍ड के बारे में जानने और समझने का है इसी वजह से मानव सभ्यता इतनी विकसित हुई है।

यह विश्वास के द्वारा संचालित एक खोज है जिसे हमारे वेदों में सत्य सर्वं प्रतिष्ठानां - सत्य में सबकुछ समाहित है के रूप में व्‍याख्‍या की गई है। ।

विज्ञान मानव मस्तिष्क की उपज हो सकता है लेकिन यह मानव जीवन को बेहतर बनाने की मानवीय भावनाओं द्वारा भी संचालित होता है।

हमारे साथ नोबल पुरस्कार विजेता मौजूद हैं, जिनके विज्ञान के क्षेत्र में कार्य ने जानलेवा बीमारियों से निपटने में नई उम्मीद जगाई है।

हमारे पास एक ऐसे व्यकित भी हैं जिनकी सामाज विज्ञान की समझ ने सबसे गरीब लोगों को आशा, अवसर और सम्मानजनक जीवन दिया है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी, गरीबी से निपटने और समृद्धि के विस्तार में सहायक है; भूख मिटाने और बेहतर पोषण; बीमारियों का खात्मा; स्वास्थ्य का स्तर सुधारने और बच्चों को जीवन देने के ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने; अपने प्रियजनों और दुनिया से जुड़ने; शिक्षा और जागरुकता के प्रसार; और हमें पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध कराता है जो हमारे पर्यावास को ज्यादा वहनीय बनाता है।

राष्ट्र की प्रगति और मानव का विकास विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े हुए हैं। हाल के वर्षों में चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रुप में उभरा है साथ ही उसने खुद को समानांतर रुप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी  दूसरे स्थान पर स्थापित किया है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी राष्ट्र की सीमाओं को लांघते हुए विश्व को एक सूत्र में पिरोता और शांति का प्रसार करता है।  यह विश्व की चुनौतियों से निपटने के सामूहिक प्रयासों में गरीब और अमीर देशों को साथ ला सकता है।

लेकिन हम जानते हैं कि यह असमानता बढ़ा सकता है, युद्धों को ज्यादा संहारक बना सकता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है। कभी कभी हमें जटिलताओं के बारे में बाद में पता चलता है जैसा कि हमने जलवायु परिवर्तन के साथ किया; कभी कभी ये हमारे अपने फैसलों का परिणाम होता है।

उदाहरण के तौर पर, सूचना प्रौद्योगिकी का विकास क्षमता और उत्पादकता बढ़ाने किया गया; यद्यपि इसके विभिन्न भटकाव सरलता से हमें पराजित कर सकते है। जैसा कई बार होता है कि हम किसी बैठक में हैं और मन में अपने संदेशों को पढ़ने का लालच रहता है!

इसलिए, जब भी हम विज्ञान और मानव विकास की बात करते हैं, हम इसे समानता, सिद्धांत और पहुंच जैसे राजनीतिक फैसलों  से अलग नहीं कर सकते।

मानव विकास का वृहद उद्देश्य है जो भारतीय वैज्ञानिक गतिविधियों की असली ताकत है और विज्ञान आधुनिक भारत के निर्माण में सहयोग करता है।

आजादी की शुरूआत के साथ प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में स्थापित किया था। हमारे वैज्ञानिकों ने मामूली संसाधनों के साथ भलि प्रकार देश की सेवा करने वाले अग्रणी अनुसंधान किए और अभूतपूर्व संस्थाओं का निर्माण किया।

तभी से हमारे वैज्ञानिकों ने कई क्षेत्रों में हमें विश्व में अग्रणी बनाए रखा है।

जब कभी विश्व ने हमारे लिए रास्ते बंद किए, हमारे वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय अभियान की भावना के साथ कार्य किया। जब भी विश्व ने हमसे सहयोग मांगा, हमारे वैज्ञानिकों ने खुलेपन से उनका स्वागत किया जो हमारे समाज में अंतर्निहित है।

उन्होंने मावन विकास की सबसे गंभीर और दूभर चुनौतियों का निवारण किया है। उन्होंने भोजन जैसी आधारभूत आवश्यक्ताओं को पूरा करने के लिए दूसरों पर निर्भरता को समाप्त करने में हमारी मदद की है। उन्होंने हमारी सीमाओं को सुरक्षित बनाया है, औद्योगिक प्रगति में सहायता की और हमारे लोगों को सम्मानजनक और अवसरों से पूर्ण जीवन प्रदान किया है।

हमारे वैज्ञानिकों ने पहले ही प्रयास में मंगलयान को मंगल की कक्षा में स्थापित कर दिया। मैं राधा कृष्णन की टीम को बधाई देता हूं - हुदहुद तूफान के बार में वैज्ञानिकों के सटीक अनुमान से हजारों लोगों की जान बचाई जा सकी; हमारे परमाणु वैज्ञानिक ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता के लिए काम कर रहे हैं और उन्होंने कैंसर के इलाज और अनुसंधान के मामले में एशिया क्षेत्र में भारत को अग्रणी बना दिया है।

हमारी उपलब्धियों पर हमें गर्व है लेकिन उन चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जिनका हम देश में सामना करते हैं।

हम उसी तरह की उम्मीदों और उत्साह के माहौल में हैं जैसा कि देश की स्वाधीनता के समय था।

इस समय देश में परिवर्तन के लिए सकारात्मक माहौल है; इसे बनाए रखने के लिए ऊर्जा और इसे हासिल करने के लिए विश्वास की जरूरत है।

लेकिन भारत के बारे में हमारे जो सपने हैं - खेती को ज्यादा व्यवहारिक और उत्पादक बनाना; ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वहनीय और उपयुक्त तकनीकी विकसित करने; पानी की हर बूंद का बेहतर इस्तेमाल; और समुद्रीय  संसाधनों की क्षमता के इस्तेमाल; अपनी जैव विविधता के संरक्षण; अपने पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए - विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर उतना ही नर्भर करते हैं जितना कि नीति और संसाधनों पर

गरीबों की पहुंच योग्य बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं और स्वास्‍थ्‍य उपकरणों के विकास; पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को वहनीय और ज्यादा कारगर बनाने के लिए;

प्रौद्योगिकी के प्रयोग से सभी के लिए घर और स्वच्छता के सपने को पूरा करने के लिए

हमारे शहरों को स्‍वच्‍छ और अधिक रहने योग्‍य बनाने के लिए हमें ही समाधान ढ़ढंना होगा

व्‍यर्थ को संपदा में बदलने और भविष्‍य के सतत ढांचा विकास के लिए संसाधन

मानव विकास के लिए इंटरनेट का उपयोग करना

भारत को प्रमुख विनिर्माण देश और ज्ञान तथा प्रौद्योगिकी आधारित उद्योग के लिए केन्‍द्र बनाना

मेरे लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की पहुंच सबसे गरीब, सबसे पिछड़े और सबसे असहाय लोगों तक होना है

यह राष्‍ट्रीय महत्‍व का उद्यम है जिसमें सरकार, उद्योग, राष्‍ट्रीय प्रयोगशालाओं, विश्‍वविद्यालयों और अनुसंधान संस्‍थानों को मिलकर कार्य करना होगा

अधिकतर विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर बातचीत बजट के प्रश्‍न तक ही सीमित होती है यह महत्‍वपूर्ण है और मुझे विश्‍वास है कि इसमें लगातार वृद्धि होगी

लेकिन हमारी उपलब्‍धियों ने यह दर्शा दिया है कि कई बार सफलता के लिए आवश्‍यकता, विजन और जोश अधिक महत्‍वपूर्ण होते हैं

और संसाधनों का हम कैसे उपयोग कर सकते है कि कैसे प्रभावी निर्धारण हो जिससे विज्ञान और प्रौद्योगिकी को हमारे लिए कारगर बनाया जा सके

हमारे विकास की चुनौतियां, स्वाभाविक रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमारी प्राथमिकताएं तय करेगी

हम कुछ महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में ध्‍यान दे रहे है लेकिन हमें अनुसंधान और विकास को कुछ पूर्व निर्धारित लक्ष्‍यों तक ही सीमीत नहीं रखने चाहिए

और अनुसंधान, विकास तथा नवाचार पर जितना ध्‍यान दिया जाता है उनता ही ध्‍यान आधारभूत अनुसंधान पर भी देना महत्‍वपूर्ण है

हमें यह भी मानना चाहिए कि विज्ञान सर्वव्‍यापी है लेकिन प्रौद्योगिकी स्‍थानीय हो सकती है

अगर हम पारंपरिक और स्‍थानीय ज्ञान, प्रणालियों और प्रौद्योगिकीयों को इसमें शामिल करें तो हम अधिक उचित, प्रभावी, वहन करने योग्‍य और सतत समाधान विकसित कर सकते है जो मानव विकास और प्रगति में बड़ा योगदान दे सकते हैं

सरकार को देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रमुख स्रोत के तौर पर विकसित करने के लिए भी कदम बढ़ाना चाहिए

जब मैं देश में रोजगार करने में आसानी की बात करता हूं तब मैं यह भी चाहता हूं कि देश में विकास और  अनुसंधान में भी आसानी पर उतना ही ध्‍यान दिया जाए

प्रस्‍तावित धनराशि स्‍वीकृत करने में अधिक समय ना लगाया जाए, बैठक- आवेदन पत्र की आवश्‍यकताएं अनुसंधान से अधिक जटिल नहीं होनी चाहिए, स्‍वीकृति की प्रक्रिया अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन के लिए बाधा नहीं बननी चाहिए, हमारे वैज्ञानिक विभागों को अनुसंधान गतिविधियों में अंतर्निहित अनिश्‍चिताओं के आधार पर धनराशि के बारे में फैसला लेने में लचीला होना चाहिए

मैं चाहता हूं कि हमारे वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं को सरकारी प्रक्रियाओं के बजाए, विज्ञान के रहस्‍यों को उजागर करना चाहिए।

हम चाहते हैं कि उनके शोधकार्य ही उनकी सफलता के प्रतिमान हों और वे सरकारी मंजूरी के मोहताज नहीं हों। हमें जैव तकनीकी, नैनो साइंस, कृषि एवं क्‍नीनिकल शोध के क्षेत्र में शोध एवं विकास संबंधी स्‍पष्‍ट नियामक नीतियां बनानी है। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी मजबूत बौद्धित सपंदा व्‍यवस्‍था लगातार प्रभावी रूप से काम करती रहे और निजी क्षेत्र के प्रोत्‍साहन एवं सामाजिक बेहतरी के बीच सहीं संतुलन बना रहे।

इसके अलावा, न केवल वैज्ञानिक विभागों, बल्‍कि प्रत्‍येक सरकारी विभाग में एक ऐसा अधिकारी होना चाहिए जो अपने क्षेत्र से संबंध कार्य में विज्ञान एवं तकनीकी पर अधिक ध्‍यान दे और ऐसी गतिविधियों के लिए  विभाग के बजट में से कुछ प्रतिशत धनराशि का आवंटन करें। हम यह अनुभव अतंरिक्ष तकनीकी के साथ शुरू कर चुके हैं

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी गतिविधियों में निवेश, कारपोरेट सामाजिक दायित्‍व के व्‍यय का भी एक हि‍स्‍सा बनाया जाना चाहिए जिसे प्रत्‍यक्ष अथवा किसी स्‍वायत धनराशि से पूरा किया जा सकता है। हमें विभिन्‍न क्षेत्रों में हो रहे विकासों, नवाचारों तथा विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए विभिन्‍न संख्‍याओं तथा क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने की मजबूत संस्‍कृति की आवश्‍यकता है। मेरा मानना है कि यह भारत में आदर्श से कहीं अधिक दूर है।

मैं हमारे मंत्रालयों से कहूंगा कि वे अनुसंधान के लिए धनराशि के अनुरोध पर सहायता करने और उनके संस्‍थानों के साथ सहयोग को आवश्‍यक बनाये

हमें देश में विश्‍वविद्यालय प्रणाली को अनुसंधान और विकास गतिविधियों में अग्रणी बनाना होगा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में हमारा विनिवेश केन्‍द्र सरकार के एजेंसियों तक ही सीमि‍त है और इसे अधिक क्षेत्रों में बढ़ाया जाना चाहिए

हमारे विश्‍वविद्यालय अत्‍यधिक नियमन के शिकंजे  और बोझि‍ल प्रक्रियाओं से मुक्‍त होने चाहिए। वहां पर अधिक अकादमि‍क स्‍वतंत्रता और स्‍वायतता होनी चाहिए और शिक्षण के समान ही अनुसंधान पर भी जोर दिया जाना चाहिए ।

इसके परिणाम स्‍वरूप विश्‍वविद्यालयों की उच्‍च अकादमिक और अनुसंधान स्‍तरों पर जिम्‍मेदारी बढ़ेगी, जिसमें संपूर्ण समकक्ष समीक्षा शामिल होगी

हमें हमारे उच्‍च शिक्षण क्षेत्रों को तेजी से विस्‍तार करना होगा हालांकि हमारे मौजूदा संस्‍थानों में फेकल्‍टी की कमी है

हमारे पास केंद्रीय संस्थाओं और एजेंसियों में काम करने वाले प्रख्यात वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की कमी नहीं है और मैं चाहता हूं कि वे प्रतिवर्ष किसी विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों में कुछ समय व्यतीत करे और पीएचडी के छात्रों को गाइड करें।

      हमारे उद्योग जगत को पहल करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाना है।

 भारत के फार्मास्यूटिकल उद्योग ने विश्व में अपनी पहचान बनाई है क्योंकि इसने शोध के क्षेत्र में काफी निवेश किया है। वस्तुत:  हमारी लंबी वैश्विक प्रतिस्पर्धा दूसरों की यह नकल करने पर निर्भर नहीं करेगी कि उन्होंने क्या किया है बल्कि यह सतत विकास एवं नवाचार की प्रक्रिया पर आधारित होगी।

शोध एवं विकास के क्षेत्र में न केवल व्यापारिक जगत में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रवृत्ति बढ़ रही है बल्कि यह विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं में शोध कार्यों और विद्धानों में भी दिख रही है। हमें इसका पूर्ण रूप से लाभ उठाना चाहिए। इसी वजह से मैंने अपने कूटनीतिक एजेंडें में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सबसे आगे रखा है।

      मैंने विश्व की अनेक देशों की यात्रा के दौरान वैज्ञानिकों से व्यक्तिगत रूप से स्वच्छ ऊर्जा, कृषि, जैव-तकनीकी, चिकित्सा, औषधि तथा स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्रों में सहयोग के बारे में जानकारी ली है।

विश्व के समक्ष आज विशाल चुनौतियों का समाधान करने के लिए हमने सभी अग्रणी देशों के साथ उत्कृष्ठ सहयोग स्थापित किया है और मैंने अपने पड़ोसी देशों तथा अन्य विकासशील देशों को अपनी विशेषज्ञता की पेशकश की है।

      मैं अक्सर अपने देश के युवाओं के लिए कौशल विकास की बात करता हूं अगर हम अगली पीढी के विश्व स्तरीय वैज्ञानिकों, तकनीकविदों और प्रवर्तकों को तैयार कर सकें तो इससे हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा और हमारा वैश्विक नेतृत्व भी संभव हो सकेगा।

स्कूलों में विज्ञान और गणित की शिक्षा को अधिक प्रेरक तथा रचनात्मक बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा हमारे देश के बच्चों तथा युवाओं के साथ वैज्ञानिकों के प्रत्यक्ष सम्पर्क के लिए हमें इंटरनेट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए जिस प्रकार स्कूल जाना एक बुनियादी अधिकार है उसी तरह डिजिटल कनेक्टिविटी को भी बनाया जाना चाहिए।

मैं विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हजारों बच्चों तथा युवाओं को शामिल करने के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रयासों का स्वागत करता हूं।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि हमारे युवा छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाएं जीत रहे हैं और उनमें से 12 के नाम पर कुछ छोटे धूमकेतुओं का नाम भी रखा गया है।

हमारे देश के बच्चों को खेलों की तरह विज्ञान में भी अपने रोल मॉडल चुनने चाहिए। व्यापार और सिविल सेवाओं की तरह विज्ञान में भी अपना भविष्य चुनने वाले बच्चों पर उनके माता पिता को गर्व होना चाहिए, मगर इसके लिए विज्ञान की शक्ति तथा संभावनाओं को बेहतर तरीके से बताया जाना जरूरी है।

आईए, अब हम निकट भविष्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को गणतंत्र दिवस की परेड थीम बनाएं। जिस प्रकार हम अन्य क्षेत्रों में अर्जित सफलताओं पर जश्न मनाते हैं, उसी तरह वैज्ञानिक जगत की उपलब्धियों पर भी उत्सव मनाने की आवश्यकता है।

हमें उन युवा सहभागियों और प्रतियोगियों को समाज में विशेष पहचान देनी चाहिए जो विज्ञान प्रदर्शनियों में शीर्ष स्थान पाते हैं और सरकार की तरफ से भी उन्हें लगातार सहयोग देना चाहिए।

मैं अपने श्रेष्ठ युवा वैज्ञानिकों से व्यक्तिगत रूप से मिलना बेहद पसंद करूंगा। अंत में मुझे यह कहना है कि ज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित इस विश्व में भारत के लिए एक सुरक्षित, सतत और समृद्ध भविष्य या वैश्विक नेतृत्व के लिए हमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवाचर को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखने की आवश्यकता है।

मुझे पूरा भरोसा है कि हम यह कर सकते हैं।

हम प्राचीन समय से ही विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भारत की हमेशा उन्नतिशील परपंरा के उत्तराधिकारी हैं। गणित, चिकित्सा, धातुकर्म एवं खनन, गणना एवं वस्त्र, वास्तुकला तथा खगोल विज्ञान के क्षेत्र में विश्व की भारतीय सभ्यता की देन काफी समृद्ध रही है।

      पिछले 6 दशकों में विभिन्न कठिन परिस्थितियों में हमने जो सफलताएं हासिल की हैं हम उनसे प्रेरणा तथा विश्वास हासिल कर सकते हैं। कई संस्थानों की मजबूती विज्ञान के क्षेत्र में भारत की समृद्ध प्रतिभा तथा बारत के पांच प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों के रुप में है और जिनका हाल में ही सम्मान किया है।

      सबसे पहले हमें विज्ञान एवं वैज्ञानिकों के अपने गौरव को बरकरार रखना है। समाज में विज्ञान के प्रति लोगों की उत्सुकता को पुर्नजीवित करना है। हमारे बच्चों में वैज्ञानिक शिक्षा के प्रति प्रेम को फिर से जगाना है और देश के वैज्ञानिकों को कल्पना करने, सपने देखने तथा उन पर काम करने के लिए प्रेरित करना है।

      आपको मुझसे बेहतर सहारा देने वाला कल नहीं मिलेगा और इसके बदले मैं भारत को बदलने के लिए आपकी मदद चाहता हूं।

      आप सभी का धन्यवाद, सभी को शुभकामनाएं!!

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सनमको जोतो कोगे जोहार!
नोमोस्कार!
मैं रंकिणी की मिट्टी को प्रणाम करता हूं। हमारा जमशेदपुर केवल एक शहर मात्र नहीं है। ये हमारा जमशेदपुर विविधताओं से भरा मिनी हिंदुस्तान है। इसीलिए, जमशेदपुर का आशीर्वाद मिलना, ऐसा लगता है जैसे पूरा देश दे रहा है। (यहां एक बेटी एक बढ़िया चित्र बना करके ले आई है वहां एक नौजवान भी कोई चित्र वगैरह ले करके आए हैं। जरा एसपीजी उनसे ले लें चित्र। ये बच्चे बड़े उत्साह से देखिए वो दूसरा एक नौजवान भी ले आया है। हां कलेक्ट कर लीजिए भाई। अच्छा आप अपना नाम लिख देना, मैं आपको चिट्ठी लिखूंगा। पीछे अपना नाम लिख देना। अपना नाम पता आराम से लिखो बेटा, आराम से लिखो, फिर ये मेरे एसपीजी के जो साथी है ना उनको दे देना। उधर भी जो बेटा है, बेटे आप भी अपना नाम पता लिख देना मैं चिट्ठी लिखूंगा आपको।) भारत माता की, भारत माता की। आपका उत्साह बता रहा है कि जमशेदपुर में 4 जून को क्या परिणाम आने वाला है।

साथियों,

मैं बहुत सालों तक भारतीय जनता पार्टी के संगठन का काम करता था। और कोई मुझे कहे कि चुनावी रैली है सुबह 10-11 बजे रख लो तो मैं हाथ जोड़कर कहता था नहीं जी 11 बजे कौन आएगा ऐसा करो एक बजे-दो बजे रख लो। मैं जानता हूं 10-11 बजे इतनी बड़ी रैली करना लोहे के चने चबाने वाला काम होता है लेकिन आज सुबह-सुबह जमशेदपुर में इतनी बड़ी जन मेदिनी यह अपने आप में जनजागृति का एक नया पर्व मैं देख रहा हूं, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

साथियों,

लोकसभा चुनाव देश के भविष्य को सशक्त बनाना, मजबूत बनाना वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों का भी उज्जवल भविष्य निश्चित करने का ये चुनाव है। मेरे प्यारे भाई-बहन ये देश का भविष्य कैसे तय होगा। मैं आपसे पूछता हूं, चुनाव में देश की अर्थव्यवस्था पर बात होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। जरा पूरी ताकत से मुझे बताइए जमशेदपुर के लोग पूरा देश आपको सुनेगा। चुनाव में देश की अर्थव्यवस्था की चर्चा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। चुनाव में उद्योगों लघु उद्योगों की बात होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। साथियों, चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा की बात होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। चुनाव में कृषि और वन उपज की बात होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए चुनाव में युवाओं के लिए बनते नए अवसरों की बात होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए चुनाव में हाईवेज, एक्सप्रेसवेज, इंफ्रास्ट्रक्चर पर बात होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। लेकिन कांग्रेस और झामुमो वालों को इन सबसे कोई मतलब नहीं है। इन्हें विकास का क-ख-ग-घ भी मालूम नहीं। इनका तरीका क्या है? झूठ बोलो जोर से बोलो, बार-बार बोलो, इधर भी बोलो उधर भी बोलो, खड़े खड़े बोलो, नाच नाच के बोलो, झूठ ही बोलो और इनके मुद्दे क्या है गरीब की संपत्ति का एक्सरे करेंगे, उसे छीनेंगे। एससी, एसटी, ओबीसी का आरक्षण छीनेंगे। मोदी जी को रोज नई-नई गालियां देंगे। इससे ज्यादा आगे यह सोच ही नहीं सकते क्या। इंडी अलायंस वाले आपसे झूठ बोलते हैं। इनकी सच्चाई पूरा देश जान गया है। इसलिए पूरा हिंदुस्तान कह रहा है फिर एक बार, फिर एक बार, फिर एक बार, फिर एक बार।

साथियों,

साथियों झारखंड जैसा राज्य खनिज संपदा में इतना अमीर है, इतना अमीर है, आप कल्पना नहीं कर सकते, लेकिन फिर भी यहां इतनी गरीबी क्यों है। दुर्भाग्य देखिए, आज झारखंड शब्द आपके कान पर पड़ेगा। झारखंड का नाम सुनते ही कौन सा दृश्य सामने आता है। एक ही दृश्य सामने आता है नोटों के ढेर। झारखंड सुनते ही नोटों के पहाड़ देखने को मिलते हैं। याद करो हर पल, कौन झारखंड अच्छा-अच्छा वो नोटों के ढेर पकड़े गए थे वो। वो अफसर जेल में है वो, वो मुख्यमंत्री जेल में सड़ रहे हैं वो। भाइयों बहनों, सामान्य मानवी को गरीब रखकर कांग्रेस और झामुमो वालों ने अपने घरों में काली कमाई का अंबार लगा रखा है।

साथियों,

कांग्रेस, झामुमो और RJD जैसी पार्टियों ने हमारे झारखंड को हर मौके पर लूटा है। कांग्रेस तो भ्रष्टाचार की जननी ही रही है। कांग्रेस ने 2जी घोटाला किया, कोयला घोटाला किया, अनगिनत घोटालों में कांग्रेस ने लूट के रिकॉर्ड बनाए। आप आरजेडी को देखिए, नौकरी के बदले गरीब से, जो बेचारा दो टाइम की रोटी के लिए नौकरी तलाशता था ऐसे गरीब की जमीन लिखवा ली। गरीब से जमीन छीन भी ली और बदले में नौकरी का वादा किया। झामुमो ने यही गुण, वही आदतें, वही चरित्र कांग्रेस से और आरजेडी से सीखा है। झामुमो ने झारखंड में जमीन घोटाला किया और इन लोगों ने किसकी जमीनें हड़पी। हमारे गरीब आदिवासियों की जमीनें हड़पी, सेना की जमीन तक हड़पने की कोशिश की। सेना की जमीन हड़पना मतलब चोरी करने की आदत कितनी भयंकर होगी इसका यह उदाहरण है। मैं आपसे पूछता हूं इनके घरों से जो नोटों के पहाड़ बरामद हुए हैं वो पैसे किसके हैं, वो पैसे किसके हैं, पैसे किसके हैं, वो पैसे किसके हैं? आपका है कि नहीं है। इसके मालिक आप हैं कि नहीं हैं। ये आपके बच्चों का हक का पैसा है कि नहीं है। यह आपका पैसा है। भोले भाले मेरे आदिवासी भाई बहनों का पैसा है। दलितों का पिछड़ा का पैसा है जो इन लोगों ने लूटा है। आप मुझे बताइए, क्या यह लोग अपनी इस काली कमाई में से एक भी रुपया आपके बच्चों को देते क्या? और ये लूट करते हैं ना तो क्या कहते हैं अरे भाई अरबों-खरबों लूट लेंगे और वकील को क्या है अरे जो चाहिए दे देंगे, अदालत से निकल जाएंगे और फिर तो मौज ही मौज है। यानी वकील के लिए भी आपका चोरी का पैसा। ये खेल है इनका, लेकिन मोदी इन बेईमानों के ठिकानों से पैसा बरामद करवा रहा है। लेकिन मेरे झारखंड के भाई-बहन ये जो नोटों के पहाड़ में पकड़ रहा हूं ना। मैं आपको गारंटी देता हूं मैं सरकार की तिजोरी में ले जाने के लिए नहीं कर रहा हूं। मैं ये खोजूंगा ये पैसे किसके थे, उसको उनको क्यों देना पड़ा, कैसे दिया था और अगर यह पक्का हो जाएगा हां इन्हीं के पैसे हैं। ये सारे पहाड़ के पहाड़ के रुपए है ना, मैं उन सब गरीबों को लौटा दूंगा। यह पैसा आपका है। मोदी इसके लिए कानूनी सलाह ले रहा है, मैं रास्ते खोज रहा हूं कि जो गरीब का पैसा है, जिसके हक का पैसा गया है वह पैसा उसको वापस कैसे मिले।

साथियों,

पूरी दुनिया जानती है कि देश की प्रगति के लिए उद्योग जरूरी है जमशेदपुर का तो नाम ही जमशेद जी टाटा के नाम पर है। लेकिन कांग्रेस पार्टी उद्यम करने वालों को देश का दुश्मन मानती है। उसके नेता खुलेआम कहते हैं जो कारोबारी हमें पैसा नहीं देते हम उन पर हमला करते हैं। यानी कांग्रेस और झामुमो जैसे दलों को देश के उद्योगों से मतलब नहीं है उन्हें अपने भ्रष्टाचार और वसूली से मतलब है। भाइयों-बहनों, मैं आज एक गंभीर विषय को स्पर्श करना चाहता हूं क्योंकि मैं आज उद्योग की धरती पर खड़ा हूं और मेरे आदिवासी भाई बहनों के बीच खड़ा हूं। मैं जरा कांग्रेस को उनके साथियों को, जहां जहां उनकी सरकारें है चाहे तमिलनाडु में हो, केरल में हो, कर्नाटका में हो, तेलंगाना में हो, पश्चिम बंगाल में हो, हिमाचल में हो, मैं उन मुख्यमंत्रियों को चुनौती देता हूं और जरा समझ लें मेरी चुनौती को। ये मेरा पॉलिटिकल स्टेटमेंट नहीं है यह मेरा चुनावी स्टेटमेंट नहीं है। मैं बड़ी गंभीरता से एक विषय को छेड़ना चाहता हूं और जो मीडिया वाले अपने आप को बड़ा खैर खा मानते हैं, अपने आप को न्यूट्रल मानते हैं वह जरा इनके मुख्यमंत्रियों को जाकर के सवाल पूछे। ये उनके शहजादे आए दिन उद्योगों का विरोध करते हैं उद्योगपतियों का विरोध करते हैं निवेश का विरोध करते हैं। आने वाले दिनों में कौन उद्योगपति उनके राज्य में जाकर के पूंजी निवेश करेगा। उन राज्यों के नौजवानों का क्या होगा। ये महाराष्ट्र में जो लोग चुनाव लड़ने के लिए हमारे सामने है क्या वे शहजादे की इस भाषा को मान्य करते हैं क्या। सारे निवेशक जो मुझे मिलने आते हैं वह कहते हैं साहब हम इन राज्यों में नहीं जाएंगे क्योंकि वहां तो हमारे विरोधी विचारधारा है निवेश की विरोध की विचारधारा है, उद्योगपतियों को गालियां दी जाती है। मैं उन राज्यों के नौजवानों को पूछता हूं जो शहजादे की भाषा को सुनकर के कौन उद्योगपति उन राज्यों में आएगा। वो 50 बार सोचेगा कि शहजादे की नीतियां हैं तो उनके मुख्यमंत्री भी वैसा ही करेंगे। हमारा उद्योग पैसे तो लग जाएंगे बर्बाद हो जाएगा। और फिर चिल्लाना मत कि हमारे यहां से उद्योग चले गए, फलाने राज्य में गए, ढिकने राज्य में गए। ये आपके शहजादे की भाषा के कारण आज दुनिया से इतने उद्योग का आ रहे हैं, आपके राज्य में आने को कोई तैयार नहीं है। निवेश करने को तैयार नहीं है और मुझे मेरे लिए हिंदुस्तान के किसी भी कोने का नौजवान मेरा अपना है। मैं उसके अधिकारों को कोई छीन ले यह मुझे स्वीकार्य नहीं है। और इसलिए कांग्रेस के, इंडिया अलायंस के, टीएमसी के, ये जितने मुख्यमंत्री है वो स्पष्ट करें ये जो शहजादे की भाषा है, उद्योगकारों के खिलाफ जो बोला जा रहा है, उद्योगों के खिलाफ बोला जा रहा है, निवेश के खिलाफ बोला जा रहा है। देश के नौजवानों की जिंदगी तबाह करने की भाषा बोली जा रही है। क्या ये सारे मुख्यमंत्री उससे सहमत हैं कि विरोध में हैं। कोई निवेशक उनके यहां नहीं आएगा। और फिर दूसरे राज्यों में चले जाएंगे और आप रोते बैठोगे और आपके राज्य के नौजवानों को पलायन करके उन राज्यों में जाना पड़ेगा जहां उद्योग लग रहे हैं।

भाइयों बहनों,

ये कांग्रेस की भाषा, ये शहजादे की भाषा पूरी तरह नक्सली भाषा है, माओवादी भाषा है। और नक्सली भी तो बिना रंगदारी लिए किसी कारोबारी को काम नहीं करने देते। आज मोदी ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है इसलिए आज रंगदारी की जिम्मेदारी कांग्रेस और झामुमो ने उठा ली है। आप मुझे बताइए, ये नए नए तरीके से रंगदारी करना, नए-नए तरीके से लूट चलाना नोटों के पहाड़ इकट्ठा करना ऐसे कांग्रेस झामुमो को एक भी वोट मिलना चाहिए क्या। जरा पूरी ताकत से, इन लोगों को एक भी वोट मिलना चाहिए क्या। हर बूथ में से इनका सफाया होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए।

साथियों,

कांग्रेस जैसे दलों ने कभी आपकी परवाह नहीं की। इन लोगों ने 60 साल तक ‘गरीबी हटाओ’ का झूठा नारा दिया। ये मोदी है जो गरीब मां का बेटा है, गरीबी का दर्द क्या होता है वो जानता है, जी करके आया है। और इसलिए मैं 10 साल से लगा हूं और अब तक 25 करोड़ गरीबों को गरीबी से बाहर निकाल करके लाया हूं। कांग्रेस ने गरीबों को बैंकों में दरवाजे तक नहीं जाने दिया। मोदी ने 52 करोड़ देशवासियों के जनधन खाते खोले, बैंक के दरवाजे खोल दिए। हमारे देश में करोड़ों गरीबों को सर पर छत भी नसीब नहीं थी। मोदी ने 4 करोड़ गरीबों को पक्का घर बना कर के दिया है। 4 करोड़ पक्का घर आजादी के इतिहास की बहुत बड़ी घटना है। कांग्रेस सरकार में देश के 18000 गांव 18वीं शताब्दी में जीते थे, बिजली नहीं थी भाइयों। देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाने का काम ये आपकी गरीब मां के बेटे ने किया है। कांग्रेस ने देश के करोड़ों घर को साफ पानी से भी वंचित रखा, ये मोदी है जो हर घर नल से जल पहुंचाने में जुटा है।

साथियों,

कांग्रेस-झामुमो-आरजेडी के शासन में जमशेदपुर जैसे शहरों की दशकों तक उपेक्षा हुई। कुछ समय पहले तक रांची से जमशेदपुर पहुंचने में 6 घंटे लगते थे। हमने रोड इनफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया। आज ये सफर आधे से भी कम समय में पूरा हो जाता है। हमने NH-33 को फोरलेन करवाया है। आज इस क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी के लिए, रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए तेजी से काम चल रहा है। हमारी सरकार धालधुनगढ़ में एयरपोर्ट भी बनाना चाहती है। लेकिन, झारखंड सरकार इसमें रोड़े अटका रही है।

साथियों,

परिवारवादी पार्टियां देश को अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी समझती हैं। आपने न्यूज़ में देखा होगा। कांग्रेस के शहजादे वायनाड से भागकर चुनाव लड़ने रायबरेली गए हैं। वो सबको कहते घूम रहे हैं, ये मेरी मम्मी की सीट है! अरे कोई बच्चा स्कूल में पढ़ने जाता है ना तो भी यह नहीं कहता है कि मेरे पप्पा का स्कूल है। भले पप्पा वहां पढ़े हों। ये कहते मेरी मम्मी की सीट है। आठ साल का बच्चा भी ऐसा नहीं बोलता है जी। उनकी माता जी भी वहां गई प्रचार करने के लिए और रायबरेली में जाकर कहा कि वह अपना बेटा उनको सौंप रहे हैं। रायबरेली में उनको 50-50 साल साल से इस परिवार की सेवा करने वाला एक भी कार्यकर्ता नहीं मिला जिनको वो रायबरेली में पसंद करना चाहते हों। यह प्रॉपर्टी का भाव और भाइयों बहनों रायबरेली वाले पूछते हैं कि बेटे को रायबरेली देने आई हो लेकिन रायबरेली में जब कोविड के कारण लोग परेशान थे क्या एक बार भी रायबरेली आने का मौका नहीं मिला। क्या आपने रायबरेली में आकर के कोविड के समय भी क्या एक बार भी पूछा है कि आपका हाल क्या है और आज कह रही हो कि आप अपने बेटे को रायबरेली सुपुर्द कर दो। आप कल्पना करिए हमारे लोकतन्त्र का मंदिर, हमारी संसद, ये परिवारवादी लोग संसदीय सीटों का वसीयतनामा लिख रहे हैं। ये वही लोग हैं जो आपकी विरासत पर टैक्स लगाने की बात करते हैं! यानी, जीवन भर कमाएंगे आप, लेकिन आपकी कमाई आपके बच्चों को नहीं मिलेगी! उसे हड़पेगी कांग्रेस! लेकिन, संसद की सीट इन्हें अपनी खानदानी जायदाद लगती है। खुद रिटायर हो रहे हैं, तो पार्टी के कार्यकर्ता को मौका नहीं मिलेगा। सीट बेटे को मिलेगी! (बेटी आप तस्वीर लेकर आई हो थक जाओगी ऐसे खड़े खड़े। जरा यह तस्वीर भी एसपीजी वाले उन बेटी से ले लेना। अपना नाम पता लिख देना बेटा, नाम पता लिख देना।) ऐसी परिवारवादी पार्टियों से हमें झारखंड को बचाकर रखना है।

साथियों,

परिवारवादी इंडी गठबंधन वालों ने सबसे ज्यादा नुकसान दलित, पिछड़ा और आदिवासी समाज का किया है। खरसांवा और गुआ गोलीकांड को कौन भूल सकता है? कांग्रेस सरकार ने आम लोगों का, आदिवासी युवाओं का सामूहिक नरसंहार किया था। कांग्रेस को आदिवासी समाज से नफरत रही है। आज़ादी की लड़ाई में हमारे आदिवासी समाज ने कितने बलिदान दिये! लेकिन, कांग्रेस ने किसका इतिहास पढ़ाया? केवल एक परिवार का! जब बीजेपी सत्ता में आई, तो हमने आदिवासी गौरव के लिए दिन-रात काम किया है। हमने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस मनाने की शुरुआत की। आज हम देश भर में आदिवासी सेनानियों के म्यूज़ियम बना रहे हैं। हमने पहली बार एक आदिवासी महिला द्रोपदी मुर्मु जी को देश की राष्ट्रपति बनाया है। और मैं याद दिलाउंगा, कांग्रेस ने द्रोपदी मुर्मु को भी चुनाव हरवाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी! और ये झामुमो वाले उसी कांग्रेस के साथ खड़े हैं।

साथियों,

आज देश जान चुका है, संविधान को खतरा इंडी गठबंधन वालों से है। बाबा साहेब आंबेडकर धर्म के आधार पर आरक्षण के खिलाफ थे। लेकिन ये इंडी वाले संविधान बदलकर दलित, पिछड़ा और आदिवासी का आरक्षण बंद करना चाहते हैं। अब ये पूरा का पूरा आरक्षण मुस्लिमों को देने की बात कर रहे हैं। कुछ राज्यों में इन्होंने इसकी शुरुआत भी कर दी है। मोदी इन्हें 23 अप्रैल से चुनौती दे रहा है कि लिखित में दें कि SC-ST-OBC का आरक्षण छीनकर उसे मुसलमानों को नहीं देंगे। लेकिन आज 25 दिन हो रहे हैं कांग्रेस और इंडी वालों ने चुप्पी साध रखी है। अपने पाप की तैयारी कर रहे हैं।

साथियों,

25 मई को आपका एक वोट झारखंड और देश के भाग्य का फैसला करेगा। बीजेपी ने जमशेदपुर से श्री विद्युत बरन महतो को ज़िम्मेदारी सौंपी है। आप इनके लिए कमल का बटन दबाएंगे। और जब आप इनको कमल का बटन दबा कर के वोट देंगे ना वो वोट सीधा सीधा मोदी के खाते में जाएगा। आपका वोट सीधा मोदी को मिलेगा, मोदी को मजबूती मिलेगी। आप ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिलेंगे ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे? 10 बजे के पहले ज्यादा मतदान हो कोशिश करेंगे? पहले मतदान फिर जलपान यह यह करके दिखाएंगे। अच्छा मेरा एक काम करेंगे। जरा दोनों हाथ ऊपर करके सबके सब बताओ तो मैं बोलूं। मेरा एक काम करेंगे, मेरा एक काम करेंगे। यहां से जाकर ज्यादा से ज्यादा घरों में जाइए, ज्यादा से ज्यादा परिवारों से मिलिए और मिलकर के कहिए कि मोदी जी जमशेदपुर आए थे और मोदी जी ने परिवार के सबको प्रणाम कहा है। मेरा प्रणाम कह देंगे। मेरा प्रणाम कह देंगे। एक और काम करेंगे। हमारे यहां हर गांव में ग्राम देवता का मंदिर होता है छोटा सा भी मंदिर होता है आप जाकर के वहां जरूर प्रणाम करना, मेरी तरफ से माथा टेकना और कहना देश के उज्जवल भविष्य के लिए परमात्मा हम सबको आशीर्वाद दे।
मेरे साथ बोलिए भारत माता की,

भारत माता की,

भारत माता की।

बहुत बहुत धन्यवाद।