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प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूयॉर्क में राष्ट्रपति ओबामा से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की
सितंबर में पिछली यात्रा के बाद से हमारे द्विपक्षीय सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है: प्रधानमंत्री
मैंने सिलिकॉन वैली में अमेरिकी नवाचार और उद्यम की शक्ति का अनुभव किया: प्रधानमंत्री मोदी
युवा, प्रौद्योगिकी और नवाचार भारत-अमेरिका संबंधों के प्रेरक बल हैं: प्रधानमंत्री मोदी
मानवता की आकांक्षाओं को पूरा करने की क्षमता को प्रभावित किए बिना जलवायु परिवर्तन पर कोई समझौता नहीं करने के लिए हम प्रतिबद्ध: प्रधानमंत्री
ऊर्जा के क्षेत्र में हमारी असाधारण द्विपक्षीय साझेदारी स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता पर केंद्रित है: प्रधानमंत्री मोदी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता हेतु अमेरिका के समर्थन के लिए राष्ट्रपति ओबामा का आभार व्यक्त किया: प्रधानमंत्री
एशियाई प्रशांत आर्थिक समुदाय में भारत की प्रारंभिक सदस्यता के लिए अमेरिका के साथ काम करने के लिए तत्पर: प्रधानमंत्री मोदी
हमारी आर्थिक साझेदारी हमारे संबंधों का एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरक पहलू है: प्रधानमंत्री मोदी
यह बैठक और अमेरिका में मेरे कार्यक्रम हमारे संबंधों की विविधता एवं गंभीरता को दिखाता है: प्रधानमंत्री

राष्‍ट्रपति ओबामा,
मीडिया के प्रतिनिधिगण,

न्‍यूयॉर्क में राष्‍ट्रपति ओबामा से मुलाकात करना परम सौभाग्‍य की बात है। इस बैठक के आयोजन के लिए धन्‍यवाद।

मैं आपकी मित्रता और दोनों देशों के बीच संबंधों के प्रति आपके विजन और प्रतिबद्धता को बहुत अहमियत देता हूं।

हमने आपसी सहयोग और अंतरराष्‍ट्रीय भागीदारी में महत्‍वपूर्ण प्रगति हासिल की है।

सप्‍ताहांत में मैं सिलिकॉन वैली में था। मुझे उस नवाचार और उद्यम की ताकत का अनुभव हुआ, जिसने अमरीका की सफलता की बुनियाद रखी है।

मैंने हमारे संबंधों को गति देने वाले- युवा, प्रौद्योगिकी और नवाचार, तथा मानव प्रगति को आगे बढ़ाने में भारतीयों और अमरीकियों की सहज भागीदारियों का भी अवलोकन किया है।

कैलिफोर्निया हमें इस बात की भी याद दिलाता है कि भारत और अमरीका गति‍शील एशिया प्रशांत क्षेत्र का भाग हैं।

विश्‍व आज जिन समस्‍याओं का सामना कर रहा है और जो वैश्विक चुनौतियां हमारे सामने हैं, इनके बीच हमारी भागीदारी, हमारे लिए और विश्‍व के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने और प्रकृति के संरक्षण सहित सतत विकास के लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए हम नवाचार और प्रौद्योगिकी लागू कर सकते हैं।

राष्‍ट्रपति और मैं मानवता के विकास की महत्‍वाकांक्षाओं की हमारी योग्‍यता को प्रभावित किए बिना जलवायु परिवर्तन के लिए अटल प्रतिबद्धता रखते हैं। हम दोनों ने महत्‍वाकांक्षी राष्‍ट्रीय एजेंडे निर्धारित किए हैं।

भारत में, हमारे उपायों में सिर्फ वर्ष 2022 तक 175 जी डब्‍ल्‍यू नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ने की योजना ही शामिल नहीं है, बल्कि विकास की रणनीति भी शामिल है जो हमें ज्‍यादा टिकाऊ ऊर्जा सम्‍ममिश्रण के प्रति परिवर्तन में सक्षम बनाएगी।

यह अभ्‍यास हम अपनी संस्‍कृति और परंपरा की भावना से ही नहीं, बल्कि इस ग्रह के भविष्‍य के लिए हमारी प्रतिबद्धता की वजह से भी कर रहे हैं।

ऊर्जा के क्षेत्र में हमारी विलक्षण द्विपक्षीय भागीदारी स्‍वच्‍छ और नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा की दक्षता पर केंद्रित है।

स्‍वच्‍छ ऊर्जा के किफायती स्रोतों के विकास के लिए वैश्विक सार्वजनिक भागीदारी कायम करने के मेरे आह्वान के प्रति राष्‍ट्रपति ओबामा की सकारात्‍मक प्रतिक्रिया के लिए मैं उनका आभार व्‍यक्‍त करता हूं, जिससे हम दुनियाभर में स्‍वच्‍छ ऊर्जा को तेजी से स्‍वीकार कराने में सक्षम बनेंगे।

उस लक्ष्‍य को आगे बढ़ाने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। साथ ही ऐसी व्‍यवस्‍थाएं तैयार करना भी उतना ही महत्‍वपूर्ण है, जिससे उनके किफायती होने के साथ-साथ उनकी पहुंच भी बेहद जरूरतमंद लोगों तक कायम करना सुनिश्चित हो सके।

हम जलवायु परिवर्तन से निपटने के सकारात्‍मक एजेंडे के साथ पेरिस में समग्र और ठोस निष्‍कर्षों की प्राप्ति का इंतजार करेंगे, जो विकासशील देशों, विशेषकर गरीब देशों और छोटे द्वीप राष्‍ट्रों के लिए वित्‍त और प्रौद्योगिकी की पहुंच कायम करने पर भी ध्‍यान केंद्रित करते हैं।

सुधार के बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की  स्‍थाई सदस्‍यता के लिए अमरीका के समर्थन के वास्‍ते मैं राष्‍ट्रपति ओबामा का आभार व्‍यक्‍त करता हूं। मैंने सुधार प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने में भी अमरीका से सहायता मांगी है।

अंतरराष्‍ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍थाओं में हमारी लक्षित समय सीमा के भीतर भारत की सदस्‍यता के लिए निरंतर अमरीकी समर्थन मिलने की भी मैं सराहना करता हूं।

हमारी भागीदारी रणनीतिक और सुरक्षा से संबंधित हमारी व्‍यापक चिंताओं को हल करती है।

रक्षा व्‍यापार और प्रशिक्षण सहित हमारे रक्षा सहयोग का दायरा व्‍यापक हो रहा है। मौजूदा आतंकवाद का खतरा बढ़ रहा है और नया आतंकवाद पनप रहा है, ऐसे में हमें आतंकवाद और कट्टरवाद से लड़ने के लिए अपना सहयोग और बढ़ाना होगा। हमने हाल ही में साइबर सुरक्षा संवाद को सफलतापूवर्क संपन्‍न किया है।

अफगान जनता को आतंकवाद से निपटने और शांतिपूर्ण स्थिर और समृद्ध भावी राष्‍ट्र बनाने में सहायता देने के लिए हमने अपने विचार-विमर्श और सहयोग को और सशक्‍त बनाने पर सहमति व्‍यक्‍त की है।

मैं एशिया, प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्रों पर हमारे संयुक्‍त सामरिक विजन को आकार देने की दिशा में हुई प्रगति और जापान जैसे हमारे क्षेत्रीय भागीदार के साथ संयुक्‍त संपर्क का भी स्‍वागत करता हूं। इससे समुद्री सुरक्षा सहयोग और मजबूत होगा।

क्षेत्र में सामरिक संपर्क और बढ़ाने के लिए,  मैं एशिया प्रशांत आर्थिक समुदाय में  भारत की जल्‍द सदस्‍यता के लिए अमरीका के साथ काम करने की प्र‍तीक्षा कर रहा हूं। 

हमारी आर्थिक भागीदारी हमारे संबंधों की प्रमुख संचालक है। न्‍यूयॉर्क और सेन होजे में प्रमुख उद्योगपतियों के साथ मेरी बैठकें बहुत अच्‍छी रहीं। भारत के प्रति उनके भरोसे से मैं बहुत प्रसन्‍न हूं और उनके रचनात्‍मक फीडबैक और सुझावों को अहमियत देता हूं।

हम द्विपक्षीय निवेश संधि और ‘टोटलाइजेशन अग्रीमेंट’ सहित आर्थिक सहयोग के सशक्‍त द्विपक्षीय ढांचे की दिशा में भी कार्य करते रहेंगे।

अमरीका में यह बैठक और मेरे संपर्कों ने हमारे संबंधों की अभूतपूर्व गहराई और विविधता को प्रदर्शित किया है।

हमारी कुछ तात्‍कालिक प्राथमिकताओं और साथ ही हमारी व्‍यापक रणनीतिक भागीदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में हमारी आज की बैठक बहुत फलदायी रही।

धन्‍यवाद

दान
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संयुक्त राष्ट्र महासभा का 74वां सम्मेलन-बहस भारत उत्तर का अधिकार
September 28, 2019
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माननीय अध्यक्ष जी,

मैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बयान के संदर्भ में भारत के जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहती हूं।

2. इस सम्मानित सदन के पटल पर बोला गया एक एक शब्द, यह समझा जाता है कि उसका ऐतिहासिक महत्व होता है। परंतु, आज हमने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से जो कुछ भी सुना है, वह दोगलेपन का कटु चित्र है। हमारे और उनके; अमीर और गरीब; विकसित और विकासशील; मुस्लिम और अन्य को लेकर जिस तरह बातें कही गईं, वे संयुक्त राष्ट्र को विभाजित करने वाली कहानी का हिस्सा हैं। मतभेदों को धार देने और नफरत बढ़ाने वाले इस भाषण को संक्षेप में ‘‘घृणायुक्त भाषण’’ कहा जा सकता है।

3. महासभा ने अभिव्यक्ति के अवसर का ऐसा दुरुपयोग बल्कि उसके साथ दुर्व्यवहार की स्थिति पहले शायद ही कभी देखी हो। ‘‘तबाही’’, ‘‘खून खराबा’’, ‘‘जातीय श्रेष्ठता’’, ‘‘बंदूक उठाना’’ और ‘‘अंतिम दम तक लड़ना’’ ये सभी ऐसे शब्द हैं, जो 21वीं सदी के विजन को नहीं बल्कि मध्ययुगीन मानसिकता को व्यक्त करते हैं।

4. प्रधानमंत्री इमरान खान की परमाणु विनाश की धमकी छिछलेपन का परिचय देती है, उसमें कोई राजनयिक कौशल नहीं है।

5 वे एक ऐसे देश के प्रधानमंत्री हैं, जिसका आतंकवाद के समूचे उद्योग पर आधिपत्य है, उनके द्वारा आतंकवाद को उचित ठहराना निर्लज्जतापूर्ण और फसादी बयान लगता है।

6. एक ऐसा व्यक्ति, जो कभी जेंटलमैन गेम कहे जाने वाले क्रिकेट का खिलाड़ी रहा हो, उनका आज का भाषण भोंडेपन की सभी सीमाएं पार करते हुए डर्रा आदम खेल की बंदूकों की याद दिलाने वाला है।

7. अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों को इस बात की जांच करने के लिए आमंत्रित किया है कि पाकिस्तान में कोई उग्रवादी संगठन नहीं है, दुनिया उम्मीद करती है कि वह अपने वादे को निभाएंगे।

8. यहां कुछ सवाल हैं जिनका उत्तर पाकिस्तान को देना चाहिए, यदि वह प्रस्तावित जांच का अग्रदूत है।

 क्या पाकिस्तान इस बात की पुष्टि करता है कि उसके यहां संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध 25 उग्रवादी गुट हैं और संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्दिष्ट 130 आतंकवादी वहां पनाह पाए हुए हैं?

क्या पाकिस्तान यह स्वीकार करता है कि वह दुनिया में एकमात्र ऐसी सरकार है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित अलकायदा और दाऐश की सूची में शामिल एक व्यक्ति को पेंशन दे रहा है?

क्या पाकिस्तान इस बारे में स्पष्टीकरण देगा कि न्यूयॉर्क में उसे अपना प्रमुख बैंक, द हबीब बैंक इसलिए बंद करना पड़ा कि आतंकवाद को धन मुहैया कराने के लिए उस पर करोड़ों डॉलर जुर्माना लगाया गया?

क्या पाकिस्तान इस बात से इन्कार कर सकता है कि वित्तीय कार्रवाई कार्यदल ने उसे 27 मानदंडों में से 20 से अधिक का उल्लंघन करने के लिए नोटिस जारी किया? और

क्या प्रधानमंत्री इमरान खान न्यूयॉर्क से इस बात से इन्कार कर सकते हैं कि वे ओसामा बिन लादेन के मुक्त रूप से रक्षक रहे हैं?

  9. आतंकवाद और नफरत फैलाने वाले भाषणों के बाद, पाकिस्तान खुद को मानवाधिकारों के बड़े हिमायती के रूप में पेश करने का बड़ा दांव खेल रहा है।

10. यह एक ऐसा देश है जहां अल्‍पसंख्‍य समुदाय का प्रतिशत वर्ष 1947 के 23 फीसदी से घटकर अब सिर्फ तीन प्रतिशत रह गया है और जहां  ईसाई, सिख, अहमदिया, हिंदू, शिया, पश्तून, सिंधियों और बलूचियों को ईश निंदा कानूनों, उत्पीड़न और घृणित प्रताणना से  गुजरने  तथा उन्‍हें धर्मातंरण के लिए विवश किया जाता है।

11. मानवाधिकारों की वकालत करने का उसका नया शौक लुप्‍तप्राय हो रहे पहाड़ी बकरों मारखोर के शिकार में ट्राफी जीतने की कोशिश जैसा है।

12.  प्रधान मंत्री इमरान खान और कर्नल नियाज़ी, नरसंहार आज की लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍थाओं का हिस्‍सा नहीं है। हम आपसे अनुरोध करेंगे कि आप इतिहास की अपनी कम समझ को व्‍यापक बनाएं और

1971 में अपने ही लोगों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा किए गए भीषण नरसंहार और इसमें लेफ्टिनेंट जनरल ए के के नियाज़ी द्वारा निभाई गई भूमिका को न भूलें। बंगलादेश की माननीय प्रधानमंत्री द्वारा आम सभा में आज दोपहर इस बात का जिक्र किया जाना इसका एक ठोस प्रमाण है।

अध्‍यक्ष महोदय,

13. जम्‍मू कश्‍मीर में विकास तथा भारत के साथ उसके विलय की प्रक्रिया को  बाधित कर रहे एक पुराने तथा अस्‍थाई प्रावधान को खत्‍म किए जाने के संबंध में पाकिस्तान की जहर बुझी प्रतिक्रिया इस बात का प्रतीक है कि जो टकराव में यकीन रखते हैं वे कभी शांति को पंसद नहीं कर सकते ।

14. एक तरफ जहां पाकिस्‍तान बड़े स्‍तर पर आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है वहीं दूसरी ओर वह नफरत भरे बयान देने के मामले में निचले स्‍तर पर उतर गया है जबकि भारत जम्‍मू कश्‍मीर को विकास की मुख्‍य धारा से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

15 भारत के बहुरंगी लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था तथा संपन्न और विविधता वाले बहुलवाद और सहिष्णुता की सदियों पुरानी विरासत के साथ. जम्मू और कश्मीर और लद्दाख को जोड़ने की कभी न बदलने वाली प्रक्रिया जारी है। 

16. भारत के लोग नहीं चाहते कि कोई दूसरा उनकी तरफ से बोले खासकर ऐसे लोग तो बिल्‍कुल नहीं जिन्‍होंने आतंवाद का पूरा उद्योग खोल रखा है।