मोजाम्बिक और भारत के मध्य सदियों पुराने व्यापारिक संबंध हैं: प्रधानमंत्री मोदी
अफ्रीका और हिंद महासागर हमारी विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक हैं। मोजाम्बिक दोनों के लिए महत्वपूर्ण है: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विस्तारित यूएन सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन करने के लिए मोजाम्बिक की सराहना की

महामहिम राष्‍ट्रपति श्री फिलिप न्‍यूसी,

मीडिया के सदस्यों,

मुझे राष्ट्रपति न्‍यूसी और भारत आये उनके शिष्‍टमंडल का स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है।

राष्ट्रपति न्‍यूसी ने इस वर्ष के शुरू में पद ग्रहण किया है। हम इससे बहुत खुश हैं कि यह भारत में एशिया की उनकी पहली यात्रा है।

उनकी यह यात्रा इसलिये भी विशेष है, क्‍योंकि इस वर्ष मोजाम्बिक की स्वतंत्रता की 40 वीं वर्षगांठ है और हमारे राजनयिक संबंधों की स्‍थापना की भी यह 40 वीं वर्षगांठ है।

अफ्रीका और हिंद महासागर हमारी विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक हैं और मोजाम्बिक दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण है।

मोजाम्बिक और भारत के बीच सदियों पुराने व्यापारिक संबंध हैं। मोजाम्बिक में रह रहे भारतीय मूल के 20,000 लोग हमारे दरमियान एक महत्‍वपूर्ण कड़ी हैं। हमारे औपनिवेशिक अनुभव और विकास अभिलाषाओं ने साझा दृष्टिकोण और साझा भागीदारी को आकार प्रदान किया है।

मोजाम्बिक प्राकृतिक गैस, कोयला और अन्‍य खनिजों का एक बड़ा और निकटवर्ती स्रोत बन सकता है, इसलिये यह हमारे विकास को आगे बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। कृषि क्षेत्र में भी यह व्‍यापक अवसर उपलब्‍ध करा सकता है।

मुझे खुशी है कि इन क्षेत्रों में हाल के वर्षो में भारतीय निवेश में काफी वृद्धि हुई है। अफ्रीका में होने वाले भारतीय निवेश का लगभग 25 प्रतिशत निवेश मोजाम्बिक में हो रहा है। पिछले पांच वर्षों के दौरान हमारे व्‍यापार में पांच गुना बढ़ोतरी हुई है।

हम कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन विकास सहित अनेक क्षेत्रों में मोजाम्बिक के विकास भागीदार बनने पर प्रसन्‍न हैं।

हम मोजाम्बिक के साथ अपने संबंधों को गहरा और मजबूत बनाना चाहते हैं और हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीका में अपने संबंधों को भी मजबूत बनाना चाहते हैं, इसलिये हम राष्ट्रपति न्‍यूसी की इस यात्रा से खुशी महसूस कर रहे हैं।

आज अपने विचार विमर्श में मैंने उन्‍हें एक क्षेत्रीय भागीदार के रूप में मोजाम्बिक के महत्‍व से अवगत कराया है। मैंने अपनी विकास भागीदारी के लिए मोजाम्बिक की प्राथमिकताओं के अनुसार अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया है।

हमने आर्थिक मेल-मिलाप और सहयोग के बारे में बातचीत की है। मैंने यह उम्‍मीद जाहिर की है कि मोजाम्बिक हाइड्रोकार्बन, खनिज और अवसंरचना क्षेत्रों सहित भारत के निवेश के लिए एक उत्साहजनक वातावरण जारी रखेगा। हमने मापुटो में भारतीय क्रेडिट लाइन द्वारा वित्त पोषित की जा रही बिजली आपूर्ति परियोजना को तेजी से लागू करने के तरीकों का पता लगाने पर भी सहमति व्‍यक्‍त की है।

मैंने उन्‍हें कृषि और खाद्य सुरक्षा में भारत के सहयोग और पूरी मदद देने का भी आश्वासन दिया। इसके बदले में, भारत भी मोजाम्बिक के कृषि क्षेत्र के विकास से लाभ उठा सकता है।

हमने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिया है। सतत विकास की ओर हमारे अपने-अपने प्रयासों का यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इस वर्ष यह इसलिये भी विशेष महत्‍व रखता है, क्‍योंकि इस वर्ष के अंत में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पेरिस में जलवायु परिवर्तन समझौते को अंतिम रूप दे रहा है। भारत ने पहले ही एक सौर पैनल असेम्‍बली संयंत्र स्थापित करने में मोजाम्बिक के साथ भागीदारी की है।

भारत और मोजाम्बिक की लंबी तटरेखाएं है, जो हिंद महासागर से जुड़ी हैं। मैंने समुद्री सुरक्षा और महासागर अर्थव्यवस्था में सहयोग को व्‍यापक करने के तरीकों के बारे में भी चर्चा की है।

हाल के वर्षों में हमारे सहयोग में मोजाम्बिक के लिए जहाज यात्राएं और हाइड्रोग्राफी सर्वेक्षण को भी शामिल किया गया है।

आज, हमने 2011 में एक रक्षा मंत्री के रूप में उनकी भारत की पिछली यात्रा के आधार पर रक्षा निर्माण में सहयोग के अन्य क्षेत्रों के बारे में विचार-विमर्श किया। हमने रक्षा सहयोग में संयुक्त कार्य दल की अगली बैठक जल्दी ही बुलाने के बारे में सहमति व्यक्त की।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्‍मीदवारी के लिए मोजाम्बिक के समर्थन की हम सराहना करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र के इस 70 वें वर्ष में, संयुक्त राष्ट्र में विशेष रूप से सुरक्षा परिषद में तत्‍काल जरूरी सुधारों पर जोर देने के लिए मैंने उनका समर्थन मांगा है।

हम 2030 तक गरीबी के उन्मूलन पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ सतत विकास लक्ष्यों को अंतिम रूप देने का स्वागत करते हैं, और सितंबर में 2015 के बाद के विकास एजेंडा को अपनाने के लिए तत्पर हैं।

हमने इस वर्ष के अंत में पेरिस में एक प्रभावी जलवायु परिवर्तन समझौते पर जोर दिया है, जो ऊर्जा स्रोतों को साफ रखने के लिए साधन और प्रौद्योगिकी भी उपलब्‍ध कराता है। मैंने राष्‍ट्रपति न्‍यूसी को अक्‍तूबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले तीसरे भारत-अफ्रीका मंच सम्मेलन के बारे में जानकारी दी है। भारत और अफ्रीका के विकास लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के बारे में उल्लेखनीय समानताएं हैं।

हमने पहली बार भारत-अफ्रीका मंच सम्मेलन में शामिल होने के लिए 54 अफ्रीकी देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है। हम इस सम्मेलन में राष्ट्रपति न्‍यूसी के शामिल होने के लिए उत्‍सुक हैं।

अंत में, मैं अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को मोजाम्बिक में भारी सफल बनाने के लिए सरकार के व्‍यापक समर्थन की प्रशंसा करता हूं।

महामहिम, आपकी इस यात्रा में न केवल दो देशों के इन बहुत महत्वपूर्ण संबंधों पर नये सिरे से ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि अफ्रीका और भारत के बीच हिंद महासागर के पार एक पुल बनाने के रूप में भी कार्य किया है। मुझे विश्‍वास है कि आपका अनुभव और ज्ञान हमारे संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए शक्ति का एक स्रोत बनेगा।

राष्‍ट्रपति जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

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मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश में एनएच-34 के कानपुर-कबराई खंड के 4/6 लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड खंड के निर्माण को बीओटी (टोल) मोड पर 7145.14 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत से मंजूरी दी
July 01, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज राष्ट्रीय राजमार्ग (ओ) कार्यक्रम के अंतर्गत भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे के एक महत्वपूर्ण खंड के रूप में 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबराई एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड गलियारा है जिसमें भविष्य में छह लेन तक विस्तारित करने की व्यवस्था भी है। 7145.14 करोड़ रुपये की अनुमानित कुल पूंजी लागत वाली इस परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा बीओटी (टोल) मोड पर कार्यान्वित किया जाएगा, साथ ही एनएच-34 के मौजूदा कानपुर-कबराई खंड का संचालन और रखरखाव भी किया जाएगा।

यह परियोजना कानपुर और कबराई के बीच निर्बाध, उच्च गति की कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, साथ ही सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों तक आगे की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य प्रदेश के खनिज-समृद्ध, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों से जोड़ने वाला एक आधुनिक पहुंच नियंत्रित आर्थिक गलियारा बनेगा और इस प्रकार इसमें सुधार होगा।

80-100 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिज़ाइन किया गया यह कॉरिडोर कानपुर और कबराई के बीच यात्रा समय को 3.5 घंटे से घटाकर 1.5 घंटे (58 प्रतिशत) कर देगा, साथ ही सड़क सुरक्षा में सुधार करेगा, वाहन परिचालन लागत को कम करेगा और यात्री एवं माल यातायात की कुशल आवाजाही को सुगम बनाएगा। यह परियोजना एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और राज्य राजमार्ग एसएच-46, एसएच-91, एसएच-10बी और एसएच-42 के साथ रणनीतिक संपर्क भी प्रदान करेगी, जिससे क्षेत्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ एकीकरण मजबूत होगा। यह कॉरिडोर कबराई खनन क्षेत्र से संपर्क को और मजबूत करेगा, खनिजों, औद्योगिक वस्तुओं, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों की आवाजाही में सुधार करेगा, जिससे रसद दक्षता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, यह परियोजना 16 आर्थिक नोड से कनेक्टिविटी में सुधार करेगी, जिनमें उन्नाव, बंथर, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर और भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र, ट्रांस गंगा इंटीग्रेटेड टाउनशिप, ग्रोथ सेंटर जयपुर, कानपुर नगर नोड और बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड शामिल हैं। यह 9 सोशल नोड, अर्थात् फतेहपुर, महोबा, कानपुर जूलॉजिकल पार्क, बुद्ध पार्क, जेके मंदिर और जेके मंदिर से कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी। गार्डन, राधा कृष्ण मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोपेश्वर मंदिर और महोबा पर्यटक स्थल, और 10 लॉजिस्टिक नोड, जिनमें कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर, महोबा, कबरई, भरवा सुमेरपुर और बांदा रेलवे स्टेशन, साथ में कानपुर, चकेरी और खजुराहो हवाई अड्डे शामिल हैं।

कुल मिलाकर, पीएम गतिशक्ति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए, बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में रसद प्रतिस्पर्धात्मकता, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास में सुधार करना इसका लक्ष्‍य है।

इस परियोजना से निर्माण के दौरान प्रति लेन प्रति किलोमीटर लगभग 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2028 तक इसकी वार्षिक औसत दैनिक यातायात (एएडीटी) लगभग 18,069 यात्री कार इकाइयों (पीसीयू) तक पहुंचने का अनुमान है, जो इसके दीर्घकालिक आर्थिक, रसद और परिवहन महत्व को दर्शाता है। इस प्रकार प्रस्तावित परियोजना से लगभग 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।

कॉरिडोर का नक्शा: