आज के बदलते हुए समय में, Illness से बचाव के साथ-साथ Wellness पर हमारा फोकस होना जरूरी है, यही शक्ति हमें योग से मिलती है, यही भावना योग की है, पुरातन भारतीय दर्शन की है: प्रधानमंत्री मोदी
अब मुझे आधुनिक योग की यात्रा शहरों से गांवों की तरफ ले जानी है, गरीब और आदिवासी के घर तक ले जानी है: पीएम मोदी
योग अनुशासन है, समर्पण हैं, और इसका पालन पूरे जीवन भर करना होता है, योग आयु, रंग, जाति, संप्रदाय, मत, पंथ, अमीरी-गरीबी, प्रांत, सरहद के भेद से परे है, योग सबका है और सब योग के हैं: प्रधानमंत्री

मंच पर विराजमान राज्‍यपाल, द्रोपदी जी, मुख्‍यमंत्रीजी, केंद्र सरकार और राज्‍य सरकार के मंत्री और झारखंड के मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनों।

आप सभी को, पूरे देश और दुनिया को अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

आज इस प्रभात तारा मैदान से सभी देशवासियों को सुप्रभातम। और आज ये प्रभात तारा मैदान विश्‍व के नक्‍शे पर जरूर चमक रहा है। ये गौरव आज झारखंड को मिला है।

आज देश और दुनिया के अनेक हिस्‍सों में लाखों लोग योग दिवस मनाने के लिए अलग-अलग जगह पर जमा हैं, मैं उन सभी का धन्‍यवाद करता हूँ।

योग के दुनियाभर में प्रसार में मीडिया के हमारे साथी, सोशल मीडिया से जुड़े लोग जिस तरह की अहम भूमिका निभा रहे हैं, वो भी बहुत महत्‍वपूर्ण है, मैं उनका भी आभार व्‍यक्‍त करता हूँ।

साथियो, झारखंड में योग दिवस के लिए आना अपने-आप में बहुत सुखद अनुभव है। आप लोग बहुत सुबह ही अपने घरों से निकलकर दूर-दूर से यहाँ आए हैं, मैं आप सभी का आभारी हूँ। बहुत से लोगों के मन में आज ये सवाल है कि मैं पांचवाँ योग दिवस मनाने के लिए आज आपके साथ योग करने के लिए राँची ही क्‍यों आया हूँ।

भाइयो और बहनों, राँची से मेरा लगाव तो है ही, लेकिन आज मेरे लिए राँची आने की तीन और बड़ी वजह हैं। पहला- जैसाकि झारखंड के नाम में ही ये वन प्रदेश है, प्रकृति के बहुत करीब है और योग और प्रकृति का तालमेल इंसान को एक अलग ही एहसास कराता है। दूसरी बड़ी वजह यहाँ आने की ये थी कि राँची और स्‍वास्‍थ्‍य का रिश्‍ता अब इतिहास में दर्ज है। पिछले साल 23 सितम्‍बर को पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय की जन्‍म-जयंती नि‍मित्‍त यहां राँची से ही हमने आयुष्‍मान भारत योजना की शुरूआत की थी। आज दुनिया की सबसे बड़ी Health Care Scheme, प्रधानमंत्री जन-आरोग्‍य योजना बहुत कम समय में गरीबों के लिए बहुत बड़ा संबल बनी है। भारतीयों को आयुष्‍मान बनाने में योग का जो महत्‍व है, उसे भी हम भली-भाँति जानते हैं, समझते हैं; इसलिए भी आज राँची आना मेरे लिए विशेष है।

भाइयो और बहनों, अब योग के अभियान को मुझे और हम सबको मिल करके एक अलग स्‍तर पर ले जाना है और यही राँची आने की मेरी तीसरी और सबसे बड़ी वजह वो भी है।

साथियो, योग हमारे देश में हमेशा से रहा है, हमारी संस्‍कृति का अभिन्‍न हिस्‍सा रहा है। यहाँ झारखंड में भी जो ‘छऊ नृत्‍य’ होता है, उसमें आसनों और मुद्राओं को व्‍यक्‍त किया जाता है। लेकिन ये भी सच हे कि आधुनिक योग की जो यात्रा है, वो देश के ग्रामीण और आदिवासी अँचल में अभी उस तरह नहीं पहुँची है, जैसी पहुँचनी चाहिए थी। अब मुझे और हम सब को मिल करके आधुनिक योग की यात्रा शहरों से गाँवों की तरफ, जंगलों की तरफ, दूर-सुदूर आखिरी इंसान तक ले जानी है। गरीब और आदिवासी के घर तक योग को पहुँचाना है। मुझे योग को गरीब और आदिवासी के जीवन का भी अभिन्‍न हिस्‍सा बनाना है क्‍योंकि ये गरीब ही है जो बीमारी की वजह से सबसे ज्‍यादा कष्‍ट पाता है। ये बीमारी है जो गरीब को और गरीब बना देती है। इसलिए ऐसे समय में जब देश में गरीबी कम होने की रफ्तार बढ़ी है, योग उन लोगों के लिए भी एक बड़ा माध्‍यम है जो गरीबी से बाहर निकल रहे हैं। उनके जीवन में योग की स्‍थापना का मतलब है उन्‍हें बीमारी और गरीबी के चंगुल से बचाना।

साथियो, सिर्फ सुविधाओं से जीवन आसान बनाना काफी नहीं है। दवाईयाँ और सर्जरी का ही समाधान पर्याप्‍त नहीं है। आज के बदलते हुए समय में illness से बचाव के साथ-साथ wellness पर हमारा अधिक फोकस होना जरूरी है। यही शक्ति हमें योग से मिलती है। यही भावना योग की है, पुरातन भारतीय दर्शन की भी है। योग सिर्फ तभी नहीं होता जब हम आधा घंटा जमीन या मेज पर, या दरी पर होते हैं; योग अनुशासन है, समर्पण है, और इसका पालन पूरे जीवनभर करना होता है। योग- आयु, रंग, जाति, सम्‍प्रदाय, मत, पंथ, अमीरी, गरीबी, प्रांत, सरहद के भेद, सीमा के भेद, इन सबसे परे है। योग सबका है और सब योग के हैं।

साथियो, बीते पाँच वर्षों में योग को Health और Wellness के साथ जोड़कर हमारी सरकार ने इसे Preventive Health Care का मजबूत स्‍तंभ बनाने का प्रयास किया है। आज हम ये कह सकते हैं कि भारत में योग के प्रति जागरूकता हर कोने तक, हर वर्ग तक पहुँची है- ड्राइंगरूम से बोर्डरूमतक, शहरों के parks से लेकर sports complex तक, गली-कूचों से wellness centre तक; आज चारों तरफ योग को अनुभव किया जा सकता है।

भाइयो और बहनों, तब मुझे और संतोष मिलता है, जब मैं देखता हूँ कि युवा पीढ़ी हमारी इस पुरातन पद्धति को आधुनिकता के साथ जोड़ रही है, प्रचारित और प्रसारित कर रही है। युवाओं के innovative और creative ideas से योग पहले से कहीं अधिक लोकप्रिय हो गया है, जीवंत हो गया है।

साथियो, आज के इस अवसर पर Prime Minister’s Award for Promotion & Development of Yoga, उसकी घोषणा की गई, हमारे मंत्रीश्री ने की। एक ज्‍यूरी ने इसको निर्णय किया है और पूरी दुनिया में मशक्‍कत करके इन लोगों को खोजा गया है।

जिन साथियों को ये पुरस्‍कार मिला है, मैं उनकी तपस्‍या और योग के प्रति उनके समर्पण की सराहना करता हूँ।

साथियो, इस वर्ष के अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस का विषय है ‘Yoga for Heart Care’. Heart Care आज पूरे विश्‍व के लिए एक चुनौती बन चुका है। भारत में तो बीते दो-ढाई दशकों में Heart से जुड़ी बीमारियों में कई गुना बढ़ोत्‍तरी हुई है।दुखद बात ये है कि बहुत ही कम उम्र के युवाओं में भी heart की समस्‍या अब बढ़ रही है। ऐसे में Heart care awareness के साथ-साथ योग को भी Prevention or treatment का हिस्‍सा बनाना जरूरी है।

मैं यहाँ के स्‍थानीय योग आश्रमों से भी आग्रह करूँगा कि योग के प्रसार में और आगे बढ़ें। चाहे देवघर का रिख्‍या पीठयोग आश्रम हो, राँची का योगदा सत्‍संग सखा मठ या अन्‍य संस्‍थान; वो भी इस वर्ष Heart care awareness को theme बनाकर आयोजन करें।

और साथियो, जब उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य होता है तो जीवन की नई ऊँचाइयों को पाने का एक जज्‍बा भी होता है। थके हुए शरीर से, टूटे हुए मन से, न सपने सजाए जा सकते हैं, न अरमानों को साकार किया जा सकता है। जब हम उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य की बात करते हैं, कुछ बातें पानी, पोषण, पर्यावरण, परिश्रम- ये चार चीजें- पीने का शुद्ध पानी मिले, आवश्‍यकता के अनुसार पोषण प्राप्‍त हो, पर्यावरण स्‍वच्‍छता- वायु पर्यावरण हो, कुछ भी हो, पानी का, कोई भी और परिश्रम जीवन का हिस्‍सा हो- तो उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ये चार 'प' परिणाम देते हैं।

Friends, I thank people across the world for joining the Yoga Day celebrations. Worldover the first raysof the sun being welcomed by dedicated yoga practionersis a beautiful sight. I urgeyou all to embrace yoga and make it an integral part of your daily routine. Yoga is ancient and modern. It is constant and evolving. For centuries the essence of yoga has remained the same- Healthy body, stable mind, spirit of oneness. Yoga provides a perfect blend of Gyan or knowledge, Karma or work and Bhakti or devotion. Yoga will make every individual better in thoughts, action and spirit.

Friends, the importance of practicing yoga is greater than perhaps ever before. We live in a time when diseases related to lifestyle and stress are increasing. This come with the fast routines and pressures at the work place. It pains me to read about bright young men and women being affected by substance abuse, alcoholism, diabetes and such other evils.

Yogaoffers a solutionfor these problems. Yoga also furthers unity among people and in our society this can heal several challenges,that our world faces.

Friends, peace, harmony have also being associated with yoga. On the occasion of the 5th International Yoga Day, let our mottobe Yoga for Peace, Harmony and Progress. शांति, सदभाव और समृद्धि के लिए योग।

 

भाइयो और बहनों, अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस की शुरूआत के बाद हमने अनेक प्रभावी कदम उठाए, जिनका लाभ भी देखने को मिल रहा है। भविष्‍य को देखते हुए हमें योग को हर व्‍यक्ति के जीवन का हिस्‍सा बनाने के लिए, स्‍वभाव बनाने के लिए निरंतर काम करना है। इसके लिए योग से जुड़े साधकों, शिक्षकों और संगठनों की भूमिका बढ़ने वाली है। योग को करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्‍सा बनाने के लिए manpower को तैयार करना भी, human resource development भी बहुत जरूरी है। ये तभी संभव है जब हम योग से जुड़े standards और institutions को विकसित करें। और इसलिए हमारी सरकार इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियो, आज हमारे योग को दुनिया अपना रही है तो हमें योग से जुड़ी रिसर्च पर भी जोर देना होगा। जैसे हमारे फोन का software लगातार update होता रहता है, वैसे ही हमें योग के बारे में जानकारी दुनिया को देते रहना है। इसके लिए जरूरी है कि हम योग को किसी दायरे में बांधकर न रखें। योग को medical, physiotherapy, artificial intelligence,; इनसे भी जोड़ना होगा। इतना ही नहीं, हमें योग से जुड़ी private enterprise spirit को भी प्रोत्‍साहित करना पड़ेगा, तभी हम योग का विस्‍तार कर पाएंगे।

हमारी सरकार इन आवश्‍यकताओं को समझते हुए अनेक क्षेत्रों में काम कर रही है।

मैं आपको अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य के कामना के साथ एक बार फिर अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस की अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूँ। और मैं आशा करूँगा कि आप सभी, यहाँ जितने प्रयोग हम योगा के करने वाले हैं, ज्‍यादा न करें, इतना ही, लेकिन लगातार उसका duration बढ़ाते जाएँ; आप देखना अद्भुत लाभ आपके जीवन में होगा।

मैं फिर से एक बार आपको उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य के लिए शांति, सद्भाव और समन्‍वय वाली जिंदगी के लिए बहुत-बहुत शुभकमानाएँ देता हूँ।

आइए अब हम योगाभ्‍यास शुरू करते हैं।

मैं झारखंड सरकार को भी बधाई देता हूँ कि बहुत ही कम समय में इतना बड़ा उन्‍होंने आयोजन किया। पहले से इन्‍हें कोई पता नहीं था; दो सप्‍ताह पहले ही, नई सरकार बनने के बाद राँची में इतना बड़ा कार्यक्रम करने का विचार आया। लेकिन इतने कम समय में झारखंड-वासियों ने जो कमाल करके दिखाया है, मैं आपको, सरकार को भी बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

धन्‍यवाद।

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भारत-इटली संयुक्त घोषणा
May 20, 2026

इटली गणराज्य की मंत्रिपरिषद की अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 19-20 मई 2026 को इटली की आधिकारिक यात्रा की। यह यात्रा जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा और 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी की भारत यात्रा के बाद हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया।

राजनीतिक संवाद

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की शानदार प्रगति का स्वागत किया और बहुपक्षीय आयोजनों के इतर बैठकों समेत नेताओं की वार्षिक बैठकें आयोजित करने के साथ-साथ नियमित मंत्रिस्तरीय और संस्थागत-स्तरीय बैठकें करने पर सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने नवंबर 2024 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अपनी बैठक में दोनों नेताओं द्वारा अपनाई गई 'संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029' के विभिन्न स्तंभों में हासिल की गई ठोस प्रगति की सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की समीक्षा और विशेष रणनीतिक साझेदारी को रणनीतिक दिशा देने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक तंत्र (मैकेनिज्म) स्थापित करने पर सहमति जताई।

आर्थिक सहयोग और निवेश

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक और औद्योगिक सहयोग की बढ़ती गतिशीलता पर संतोष व्यक्त किया, जिसके तहत पिछले वर्ष से अब तक तीन उच्च स्तरीय व्यापार मंच (बिजनेस फोरम) आयोजित किए जा चुके हैं। भारत के तीव्र एवं सतत आर्थिक विकास से पैदा होने वाले अवसरों और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ताओं के सफल समापन के आधार पर, दोनों पक्षों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य की फिर से पुष्टि की।

दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय निवेश में हुई वृद्धि का स्वागत किया और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए उद्योगों को औद्योगिक और तकनीकी साझेदारियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विशेष रूप से वस्त्र, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों (क्लीन टेक), सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, महत्वपूर्ण कच्चे माल, इस्पात, बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे में अधिक निवेश की संभावनाओं का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने उद्योगों को दोनों देशों में लागू नीतिगत प्रोत्साहनों और योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, जो व्यापारिक संबंधों और उत्पादन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास करती हैं।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने शेयर बाजारों, निवेश कोषों, वेंचर कैपिटल, बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई।

उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं के मजबूत एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए लघु एवं मध्यम उद्योगों के बीच औद्योगिक साझेदारी को सुगम बनाने पर सहमत व्यक्त की। दोनों नेताओं ने आने वाले महीनों में आपसी हित के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय मिशनों को प्रोत्साहित किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'क्रिटिकल मिनरल्स' यानि महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सतत विकास और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं पर विशेष ध्यान देते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने चक्रीय अर्थव्यवस्था की पहलों के एक अभिन्न अंग के रूप में, ई-कचरे और खनन अवशेषों जैसे असामान्य स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कृषि और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में संबंधित मंत्रालयों और संस्थानों के बीच सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।

कनेक्टिविटी

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) पर सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इसे वैश्विक व्यापार, संपर्क और समृद्धि को नया स्वरूप देने वाली परिवर्तनकारी पहल बताया। परियोजना पर प्रारंभिक चर्चाओं की सराहना करते हुए दोनों नेताओं ने 2026 में आयोजित होने वाली पहली आईएमईसी मंत्रीस्तरीय बैठक में ठोस कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने नौवहन और बंदरगाहों पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया और अपने संबंधित मंत्रालयों/विभागों को जल्द से जल्द इस समझौता ज्ञापन को लागू करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने का निर्देश दिया।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता

दोनों प्रधानमंत्रियों ने पुनः पुष्टि की कि नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत-इटली साझेदारी के प्रमुख प्रेरक हैं।

उन्होंने भारत में स्थित “INNOVIT India” नामक नवाचार केंद्र की स्थापना की घोषणा की जिसका उद्देश्य दोनों देशों के नवाचार तंत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करना, स्टार्टअप कार्यक्रमों, बाजार पहुंच, संयुक्त अनुसंधान, विश्वविद्यालय सहयोग और प्रतिभा गतिशीलता को बढ़ावा देना है। यह फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, कृषि तकनीक, ऊर्जा, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में कार्य करेगा। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 में दिल्ली में आयोजित भारतीय और इतालवी विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान केंद्रों के बीच उद्घाटन 'विज्ञान और नवाचार संवाद' का स्वागत किया और इस वर्ष के अंत में इटली में इसके अगले संस्करण के आयोजन की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने एक खुले, स्वतंत्र, सुरक्षित, स्थिर, सुलभ और शांतिपूर्ण आईसीटी वातावरण के महत्व पर जोर दिया, जो नवाचार और आर्थिक विकास के लिए एक सक्षम कारक है। प्रधानमंत्री मोदी ने 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में इटली की रचनात्मक भागीदारी के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने मानव-केंद्रित, सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वे तीसरे देशों सहित इस क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हुए।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया।

2025–2027 वैज्ञानिक सहयोग कार्यकारी कार्यक्रम के आधार पर दोनों देशों ने संयुक्त परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और सतत ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्रों में शोधकर्ताओं की आवाजाही को सुगम बनाने का समर्थन किया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन के जारी क्रियान्वयन और अनुसंधान परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए संयुक्त प्रस्ताव आमंत्रण शुरू किए जाने का भी स्वागत किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारतीय शिक्षा जगत और ट्राएस्टे स्थित 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स' (आईसीटीपी) के बीच लंबे समय से चले आ रहे वैज्ञानिक सहयोग को स्वीकार किया और भारतीय वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इटली के ट्राइएस्टे स्थित एलेट्रा सिंक्रोट्रोन केंद्र के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। यह भारतीय शोधकर्ताओं के लिए एलेट्रा की सिंक्रोट्रोन रेडिएशन सुविधा तक पहुंच से संबंधित गतिविधियों के समर्थन हेतु किया गया है।

अंतरिक्ष

इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी (एएसआई) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच चल रहे सहयोग की सराहना करते हुए, दोनों नेताओं ने पृथ्वी अवलोकन (अर्थ ऑब्जर्वेशन), हेलियोफिज़िक्स और अंतरिक्ष अन्वेषण पर साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई जिसमें केंद्रित विषयगत जुड़ाव शामिल है। साथ ही अंतरिक्ष तक पहुंच और अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के संरक्षण पर सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी। उन्होंने अपने संबंधित अंतरिक्ष उद्योग प्रतिनिधिमंडलों की हालिया पारस्परिक यात्राओं पर संतोष जताया और तीसरे देशों में भी विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के माध्यम से वाणिज्यिक सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई।

रक्षा

दोनों प्रधानमंत्रियों ने मंत्रिस्तरीय आदान-प्रदान, सेनाओं के बीच संबंधों, बंदरगाह दौरों सहित रक्षा सहयोग मजबूत होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया, जो तकनीकी सहयोग, सह-उत्पादन और सह-विकास परियोजनाओं के लिए साझेदारी को बढ़ावा देगा। इनमें हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री हथियार प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली शामिल हैं। उन्होंने औद्योगिक मजबूती के माध्यम से महत्वपूर्ण अवसंरचना और उससे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा के महत्व को भी स्वीकार किया।

दोनों पक्ष संयुक्त रक्षा समिति और सैन्य सहयोग समूह के काम के पूरक के रूप में एक वार्षिक उच्च स्तरीय सैन्य संरचित संवाद स्थापित करने की व्यवहार्यता की जांच करने और संयुक्त अभ्यास तथा अंतर-बल पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा सहयोग, समन्वय और समुद्री क्षेत्र में सूचनाओं तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने के उद्देश्य से समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू करने पर सहमति व्यक्त की।

सुरक्षा

दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकवादियों, आतंकवादी समूहों और उनके सहयोगियों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध व्यवस्था में सूचीबद्ध लोग शामिल हैं, के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने सभी देशों से वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के दिशानिर्देशों के अनुरूप, आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने, आतंकवादी नेटवर्क को रोकने और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए काम जारी रखने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र, एफएटीएफ और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए भारत और इटली के बीच स्थायी टास्क फोर्स की पहली बैठक तथा आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की आगामी बैठक का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने इटली की 'गार्डिया डी फिनान्ज़ा' और भारत के 'प्रवर्तन निदेशालय' (ईडी) के बीच एक समझौता ज्ञापन के संपन्न होने का स्वागत किया और वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक संरक्षण पर समझौते तथा पुलिस सहयोग को मजबूत करने पर समझौते के शीघ्र संपन्न होने की उम्मीद जताई। उन्होंने प्रत्यर्पण संधि और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि समेत अन्य समझौतों पर चल रही चर्चाओं का भी स्वागत किया।

प्रवासन और गतिशीलता

दोनों नेताओं ने विशेष रूप से एसटीईएम क्षेत्रों में छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल कामगारों की आवाजाही बढ़ाने तथा श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति जताई। इसमें भारत से इटली जाने वाली नर्सों की आवाजाही को सुगम बनाने संबंधी विशेष संयुक्त आशय घोषणा भी शामिल है। इस संदर्भ में उन्होंने संबंधित एजेंसियों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते (एसएसए) पर जारी चर्चाओं का स्वागत किया।

उन्होंने "आईसीआई- इटली कॉल्स इंडिया: ए यूनिवर्सिटी-एंटरप्राइज टैलेंट ब्रिज" पहल की शुरुआत का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य इतालवी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत भारतीय छात्रों की प्रतिभा को मार्गदर्शन, उपयुक्त अवसरों से जोड़ने और इतालवी उद्यमों में योग्य एकीकरण के ठोस रास्ते उपलब्ध कराकर बढ़ावा देना है।

उन्होंने सुरक्षित और कानूनी प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए अनियमित प्रवासन, श्रम शोषण और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ने के लिए सहयोग को मजबूत करने की संभावना पर भी चर्चा की।

संस्कृति और शैक्षिक आदान-प्रदान

दोनों नेताओं ने संस्कृति को द्विपक्षीय संवाद के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में रेखांकित किया और लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में इटली की भागीदारी के संबंध में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने 2026 में वेनिस कला बिएनले (वेनिस आर्ट बिएनले) में भारतीय राष्ट्रीय पवेलियन की सराहना की। दोनों नेताओं ने 2027 को “भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाने की मंशा व्यक्त की। इसके तहत विभिन्न पहलों का व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और भारत तथा इटली के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर एक बड़े प्रदर्शनी आयोजन का मार्ग प्रशस्त होगा, जिसे दोनों देशों के संस्कृति मंत्रालय संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे।

दोनों नेताओं ने संस्थाओं, विशेषज्ञों और रचनात्मक उद्योगों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाने के लिए एक इटली-भारत सांस्कृतिक मंच के संगठन को प्रोत्साहित किया। दोनों नेताओं ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल भारतीय और इतालवी स्थलों के बीच ट्विनिंग कार्यक्रम (ट्विनिंग प्रोग्राम) की शुरुआत की सराहना की, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन में सहयोग को मजबूत करना है।

दोनों नेता दोनों देशों के बीच फिल्म और ऑडियो-विजुअल सहयोग को और विकसित करने पर सहमत हुए, जो उनके उद्योगों की ताकत और नवीन क्षमताओं तथा द्विपक्षीय सह-उत्पादन समझौते द्वारा प्रदान किए गए कानूनी ढांचे पर आधारित है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च शिक्षा में सहयोग को मजबूत करने की अपनी मंशा दोहराई और उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान पर भारत-इटली रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के विश्वविद्यालयों और उत्कृष्ट संस्थानों को भारत की नई शिक्षा नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने का निमंत्रण दिया।

भारत-यूरोपीय संघ संबंध

नेताओं ने 27 जनवरी 2026 को भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में सहमति व्यक्त किए गए नए संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडे और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के सफल समापन का स्वागत किया। यह समझौता बाजार पहुंच बढ़ाने, व्यापार बाधाओं को कम करने और विविधीकृत मूल्य श्रृंखलाओं तथा नए बाजार अवसरों के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा और मजबूती को सुदृढ़ कर संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

उन्होंने व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आर्थिक सुरक्षा में सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद को मजबूत करने के समर्थन की पुनर्पुष्टि की। नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी का स्वागत किया और गतिशीलता सहयोग में हुई प्रगति की सराहना की, जिसमें व्यापक गतिशीलता ढांचे पर समझौता ज्ञापन भी शामिल है।

बहुपक्षीय सहयोग

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रतिनिधिक और वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने के लिए उसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने बहुपक्षवाद की रक्षा करने और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र और जी20 सहित अन्य वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने के महत्व पर जोर दिया।

अफ्रीका को दोनों देशों द्वारा दी जाने वाली रणनीतिक प्राथमिकता को स्वीकार करते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अफ्रीका में भारत की विकास साझेदारी और इटली की 'मैट्टेई योजना' के अनुरूप डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कनेक्टिविटी तथा बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अफ्रीकी भागीदारों के साथ त्रिपक्षीय पहलों में मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।

नेताओं ने यूएनसीएलओएस सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप, एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुनपुष्टि की। उन्होंने भारत-प्रशांत महासागर पहल के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग स्तंभ में अपनी निरंतर साझेदारी की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व की स्थिति और उसके क्षेत्र तथा विश्व पर पड़ने वाले प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने 8 अप्रैल 2026 को घोषित युद्धविराम का स्वागत किया और पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक आपूर्ति के सामान्य प्रवाह को फिर से शुरू करने का भी आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने यूक्रेन में जारी युद्ध पर चिंता व्यक्त की, जो लगातार अत्यधिक मानवीय पीड़ा और नकारात्मक वैश्विक परिणामों का कारण बन रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति जताई।

निष्कर्ष

भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रभावशाली वृद्धि और गहराते संबंधों को रेखांकित करते हुए दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तारित करने तथा प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर उच्चस्तरीय निकट परामर्श जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की सरकार और वहां की जनता द्वारा गर्मजोशी से भरे स्वागत करने तथा शानदार आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया और प्रधानमंत्री मेलोनी को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।