योग ने मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित किया है। यह स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण है: प्रधानमंत्री
योग मानवता के लिए एक सौहार्दपूर्ण भविष्य का एक सपना है: प्रधानमंत्री मोदी
एक स्वस्थ शरीर और अनुशासित मन भयमुक्त संसार का आधार है: प्रधानमंत्री

आज यहां उपस्थित और दुनिया भर में योग के प्रशंसक साथियों, 

आज हम पहला अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मना रहे हैंा जब मैंने 27 सितंबर, 2014 को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में भाषण के दौरान वैश्विक समुदाय से अनुरोध किया था कि अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया जाए। उसके बाद जो उत्‍साह देखा गया वैसा मैंने बहुत कम देखा है।

देशों के समुदाय ने एकजुट होकर जवाब दिया। 11 दिसंबर, 2014 को 193 सदस्‍यों की संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने रिकॉर्ड 177 समर्थक देशों के साथ आमसहमति से इस प्रस्‍ताव का अनुमोदन कर दिया। वैसे UN के इतिहास में अपने आप में एक बहुत बड़ी घटना है। 
आज जब मैं यहां अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस पर खड़ा हूं तो दुनिया भर में योग दिवस मनाया जा रहा है। 
दुनिया भर में लाखों लोग इस आयोजन में भाग ले रहे हैं। सुदूर पूर्व में सूर्योदय से लेकर पश्चिम में सूर्यास्‍त तक लोग आज इस भव्‍य योग दिवस का आयोजन करेंगे।

भारत में, आज सुबह राजपथ पर, राज्‍यों में और जिला मुख्‍यालयों, समुदाय समूहों में और अपने घरों में भी लाखों लोगों ने सरल योगासन किए। योग दिवस पर अन्‍य देशों के हमारे भाइयों-बहनों में यह एकता की भावना हमारे दिलों और दिमागों को करीब लाई है। मुझे यहां इस अवसर पर स्‍मारक सिक्‍का और डाक टिकट जारी करते हुए बहुत खुशी हो रही है।

मैं समर्थन के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय का आभारी हूं। मैं पूरी विनम्रता से स्‍वीकार करता हूं कि यह समर्थन सिर्फ भारत के लिए ही नहीं है। यह समर्थन योग की महान परंपरा के लिए है। वह परंपरा जो व्‍यक्तियों और समाजों को आत्‍मएकता और एक दूसरे के साथ एकता की भावना की खोज करने में मदद करती है।

कहा जाता है कि योग जीवन का कायाकल्‍प करता है । जो लोग योगा से परिचित है उन्‍हें पता है कि योगा एक प्रकार से अगर हममें से कोई ऐसा नहीं होगा दुनिया में कोई इंसान ऐसा नहीं होगा जो ये न चाहता हो कि वो जीवन को जी-भर जीना चाहता है। हर कोई जीवन को जी-भरके जीना चाहता है और मैं विश्‍वास से कहता हूं कि योग ये जीवन को जी-भरके जीने की जड़ी-बूटी है। 

योग से पूरा फायदा उठाने के लिए, योग को सम्‍पूर्णता से समझने के लिए हमे समझना चाहिए कि योगी कौन है।

योगी वह व्‍यक्ति है जो सामंजस्‍य के साथ अपने आप में, अपने शरीर और अपने आसापास प्रकृति के साथ रहता है। योग का मतलब यही समांजस्‍य हासिल करना है।

उपनिषदों में योग का मतलब है शरीर के नियंत्रण के जरिए और स्थिर अभ्‍यास के जरिए भावना पर नियंत्रण के माध्‍यम से मानव चेतना का कायाकल्‍प। शरीर उस सर्वोच्‍च अवस्‍था को साक्षात बनाने का माध्‍यम है।

भगवद गीता दुनिया का गीत है जो योगशास्‍त्र को परिभाषित करती है। योगशास्त्र . गीता कहती है,  “योग कर्मेषु कौशलम्” – अर्थात योग कार्य की उत्‍कृष्‍टता है। समर्पण और निस्‍वार्थ कर्म ही योग है।

गीता यह भी कहती है  “योगस्य तथा कुरू कर्माणी” – योगी के विवेक से कर्म। 

इसलिए योग मानवता के लिए साकल्‍यवादी भविष्‍य के लिए दृष्टिकोण है। यह एक “अवस्था” है। जो दिमाग की अवस्‍था है, एक  “व्यवस्था”. कई लोगों को योग एक व्यवस्था के रूप में दिखता है, योग एक अवस्था है, योग कोई संस्था नहीं है। योग य़ह आस्था है और जब तक हम उसे उस रूप में नही पाते, जब तक हम उसे टुकड़ो में देखते हैं उसकी पूर्णता को पहचान नहीं पाते। 

योग के बहुत से लाभ हैं। जो सही ढंग से अनुशासन के साथ योग करते हैं। योग उन्‍हें -

हमारे शरीर की ताकत, कौशल और सामन्‍य भलाई, शांतिपूर्ण एवं तनावमुक्‍त जीवन की ओर ले  जाता है। कभी- कभार योगा की शक्ति को पहचानने में भी हम वैसी ही गलती कर देते हैं, जैसी हम अपने आप को पहचानने में करते हैं। जिस व्यक्ति ने वृक्ष नही देखा है, बीज से वृक्ष बनता है उसका ज्ञान नही है और उसे कोई बीज बता दे कि देखो कि इसमें ये व्‍यक्तिगत है कि इतना महान वृक्ष बन सकता है, तो वो विश्वास नही करेगा वो सैंकड़ो सवाल पूछेगा । लेकिन उसी छोटे से बीज का अगर उचित लालन-पालन हो खान-पान हो, ऊर्जा हो, पानी हो, प्रकृति का साथ हो तो वही बीज वटवृक्ष में रूपांतरित  हो जाता है| मनुष्य के भीतर भी परमात्मा ने सभी शक्तियां दी हुई है। मुझे दिया है और आपको नही दिया है, ऐसा नही है | मानव मात्र को यह सामर्थय दिया हुआ है लेकिन जो उसके लालन-पालन की कला जानता है, जो उसे विकसित करने का अवसर प्राप्त करता है, जो व्यव्स्था के तहत, आस्था के तहत, practice के तहत धीरे-धीरे विकसित करता है तो वो भी उत्कृष्ट जीवन की उंचाईयों को प्राप्त कर सकता है और परमात्मा ने जीव मात्र मे जहां है वहां से ऊपर उठने की सहज इच्छाशक्ति दी है और योग उस परिस्थिति को पैदा करने का एक माध्यम है और इसलिए जिसको ज्ञान नही है, अनुभव नही है उसको शक होता है कि क्या योगा से संभव हो सकता है लेकिन जिसने बीज से बने वृक्ष की कथा को समझा है, उसके लिए यह संभव है। यदि बीज वटवृक्ष में परिवर्तित हो सकता है तो नर भी नारायण की स्थिति प्राप्त कर सकता है। अहम् बर्ह्मास्मि। रामदेव जी कह रहे थे अहम् बर्ह्मास्मि। जल, चेतन सबकुछ को अपने में समाहित करने का सामर्थय तब प्राप्त होता है जब स्वयं का विस्तार करते हैं। योगा एक प्रकार से स्व से समस्ति की यात्रा है। योगा एक प्रकार से अहम् से व्यम की ओर जाने का मार्ग है और इसलिए जो अहम् से व्यम की ओर जाना चाहता है जो स्व से समस्ति की ओर जाना चाहता है, जो प्रकृति के साथ जीना सीखना चाहता है, योग उसको अंगुली पकड़ के ले जाता है, चलना तो उसको ही पड़ता है और उस अर्थ में इसके सामर्थय को अगर जानें। और आज खुशी की बात है, जब हमने 20वीं शताब्दी की समाप्ति से 21वीं शताब्दी में प्रवेश किया। उस पल को याद कीजिए। पूरे विश्व में सूरज की किरणें जहां जहां जाती थी, आनंद उत्सव बनाया था। जब सदी  बदली थी वो पल कैसा था आज दुबारा वो पल विश्व अनुभव कर रहा है। जहां- जहां सूरज की किरणे जा रहीं हैं। योग को अभिषिक्त करती जा रही है। पूर्व से पश्चिमी छोर तक ये यात्रा चल रही है। ये वैसा ही अवसर पैदा हुआ है जैसा 20वीं शताब्दी की समाप्ति से 21वीं शताब्दी में प्रवेश का पल था और विश्व ने जो अनुभूति की थी वो विश्व आज योगा के लिए कर रहा है। हर भारतीय के लिए, हर योगा प्रेमी के लिए, विश्व के हर कोने में बैठे व्यक्ति के लिए इससे बड़ा कोई गौरव नहीं हो सकता और उस गौरवगान में जब हम आगे बढ़ रहे हैं तब प्राण पर नियंत्रण स्‍वास्‍थ्‍य, लंबे और रोग मुक्‍त जीवन की ओर ले जाता है और जीवन की पूर्ण क्षमता हासिल कराता है।
इसलिए योग बदलती दुनिया का प्रतीक है। अतीत में योग को चुनिंदा संतों से संरक्षित रखा। आज यह पतंजलि के शब्‍दों में सबके लिए उपलब्‍ध है जो सार्वभौम है।

आप कल्पना कर सकते है कि श्री अरबिंदो के ज़माने में ये कहीं नज़र नहीं आता था कि योग जन सामान्य का विषय बनेगा, बहुत ही सीमित दायरे में था लेकिन योगी अरविन्द के दृष्टि थी और उन्होंने ये तब देखा था कि वो वक्त आएगा जब योग जनसामान्य के जीवन का हिस्सा बनेगा. वो कुछ परम्पराओं में या संतों तक सीमित नहीं रहेगा , वो जन जन तक पहुंचेगा . आज से करीब 75 साल पहले श्री अरविन्द ने जो देखा था वो आज हम अनुभव कर रहे हैं . और यही तो ऋषि मुनियों के सामर्थ्य का परिचायक होता है और ये ताकत आती है योग के समर्पण से , योग कि अनुभूति से और योगमय जीवन से आती है.

इस दिन मैं भारत की भावना की, हमारे लोगों की सामूहिक ऊर्जा के साथ अधिक बराबरी वाले संसार के सृजन की प्रतिज्ञा करता हूं ऐसा संसार जहां भय न हो और शांति हो। हम वसुधैव कुटुम्बकम की परिकल्‍पना को साकार करेंगे।

मैं सबके स्‍वास्‍थ्‍य और शांति - शांति पथ की कामना के साथ अपनी बात समाप्‍त करूंगा।

सर्वे भवंतु सुखिन्

सर्वे संतु निरामया

सर्वे भद्राणि पस्‍यंतु

मा कस्चित दुख भागभवेत

सब खुश रहें

सब निरोग रहें

सब शुभ देखें

कोई पीड़ा न झेले

आप सब को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बहुत-बहुत शुभकामनायें देता हूँ और ये दो दिवसीय सेमिनार... विश्‍व की हमसे अपेक्षाएं बहुत बढ़ जाएगी। अब यह हमारा दायित्‍व बनता है कि विश्‍व की अपेक्षाओं के अनुकूल योग के सही रूप को और समयानुकूल स्थिति में, हम जगत तक कैसे पहुंचाएं? दुनिया समझे उन शब्‍दों में, हम इसे कैसे पहुंचाएं? 

मैं कभी-कभी कहता हूं कि अच्‍छे-से-अच्‍छे मोबाइल फोन  की ब्रैंड हो लेकिन बहुत कम लोग होते हैं जिनको उसके यूजर-मैन्‍युअल  का अता-पता होता है। ज्‍यादातर तो लाल और हरे बटन  से ही उसका संबंध रहता है टेलीफोन कट  करना और टेलीफोन ऑन  करना और जिसको उसका ज्ञान होता है यूजर-मैन्‍युअल  का उस छोटी सी चीज से अपनी हथेली में सारी दुनिया को अपने हाथ में कर लेता है। परमात्‍मा ने हमें भी जो साफ्टवेयर  दिया है न हमें उसके यूजर-मैन्‍युअल  का पूरा पता ही नहीं है। हमें भी मालूम नहीं है कि परमात्‍मा ने हमें क्‍या-क्‍या दिया है? अगर हम योगा के माध्‍यम से उस यूजर-मैन्‍युअल  को पढ़ना सीख लें तो फिर उपयोग करना धीरे-धीरे आ ही जाएगा। 

मैं कभी-कभी सोचता हूं मेरी लिखाई तो अच्‍छी नहीं है लेकिन आपने देखा होगा कि एक शिक्षक जो कि अच्‍छी लिखाई  के प्रति बड़े आग्रही हैं। कक्षा में अपने विद्यार्थी को सिखाते हैं लेकिन कुछ बच्‍चे होते है जिनकी लिखाई  बहुत अच्‍छी तरह सुधरने लग जाती है और कुछ लोग होते है पेन  वैसे ही पकड़ते हैं बेहतरीन गुणता  का पेन भी होता है कागज भी बढि़या से बढि़या होता है शिक्षक  भी भरपूर मेहनत करता है वो भी ऐसे ही हाथ घुमाता है लेकिन लिखाई  अच्‍छे नहीं आती फर्क किया है जिसके लिखाई  उत्‍तरोत्‍तर ठीक होने लगती है और एक अवस्‍था ऐसी आ जाती है कि वो कितनी ही भीड़-भाड़ में क्‍यों न हो, कितनी ही जल्‍दी में क्‍यों न हो बुढ़ापे की ओर चल दिया हो, हाथ थोड़ा कांपने लगा हो तो भी लिखाई  अच्‍छी ही रहती है। उसको कोई चेतन प्रयास  नहीं करना पड़ता है। कोई जागरूक प्रयास नहीं करना पड़ता, वो सहज अवस्‍था होती है ...क्‍यों? उसने उसको आत्‍मसात कर दिया है। जिसकी लिखाई खराब है और वो चेतना  किसी विशेष व्‍यक्ति को चिठ्ठी लिखना चाहता है एक-दो लाईन तक तो ठीक कर लेता है फिर लुढ़क जाता है क्‍योंकि आत्‍मसात  नहीं किया है। 

योग को समझने के लिए, मैं मानता हूं जिस बालक ने बचपन में तुरंत इसको अपना  कर लिया अच्‍छे हस्‍तेलेखन  का कारण होगा उसके मन में जो चित्र बनता होगा उसकी आत्‍मा उसके साथ जुड़ती होगी, उसकी बुद्धि उसको आदेश देती होगी, उसका शरीर काम  करता होगा और वो परम्‍परा जीवनभर चलती होगी, वो योग का एक छोटा-सा रूप है और इसलिए मैं कहता हूं कि अभ्‍यास  से, प्रशिक्षण  से हम इन अवस्‍थाओं को प्राप्‍त कर सकते है और इन अवस्‍थाओं को प्राप्‍त करने के लिए अगर हम और ये बात सही है कि कोई बहुत बड़ी-बड़ी बातें बताता है तो फिर कठिनाई हो जाती है, फिर धीरे-धीरे विश्‍वास डूबने लग जाता है लेकिन छोटी-छोटी बातों से देखें तो पता चलता है यार ये तो मैं भी कर सकता हूं, ये तो दो कदम मैं भी चल सकता हूं। हमने विश्‍व के सामने योग का वो रूप लाना है कि भाई ठीक है आज नहीं लेकिन दो कदम चलो तो तुम पहुंच जाओगे। अगर ये हमने इसको बनाया तो मैं समझता हूं कि बहुत बड़ा लाभ होगा। 

भारत के सामने एक बहुत बड़ी जिम्‍मेवारी है, मैं बहुत जिम्‍मेवारी के साथ कहता हूं अगर योग को हम कमोडिटी  बना देंगे तो शायद योग का सबसे ज्‍यादा नुकसान हमारे ही हाथों हो जाएगा। योग एक कमोडिटी  नहीं है, योग वो ब्रैंड  नहीं है जो बिकाऊ हो सकती है। ये जीवन को जोड़ने वाला, जीवन को प्रकृति से जोड़ने वाला एक ऐसा महान उद्देशय है जिसको हमने चरितार्थ करना है और विश्‍व भारत की तरफ देखेगा और ये बात सही है आज से 50 साल पहले कभी भी हमने बाजार में बोर्ड  देखा था “शुद्ध घी की दुकान” देखा था 50 साल पहले शुद्ध घी की दुकान ऐसा बोर्ड नहीं होता था लेकिन आज होता है क्‍यों? क्‍योंकि बाजार में माल आ गया है। योगा के संबंद्ध में कभी ऐसा न आना चाहिए वो दिन अभी तो बचे हुए है लेकिन कभी वैसा दिन नहीं आना चाहिए कि हमारा ही योगा सच है बाकि तो तुम बे-फालतु में कान-नाक पकड़ करके डॉलर खर्च कर रहे हो। ये व्‍यापार नहीं है, व्‍यवस्‍था नहीं है, ये अवस्‍था है और इसलिए जगत के कल्‍याण के लिए, मानव के कल्‍याण के लिए, मानव के भाग्‍य को बदलने के लिए ये भारत की भूमि का योगदान है। उसमें संजोने-संवारने को काम भारत के बाहर के लोगों ने भी किया है उनका भी ऋण स्‍वीकार करना होगा। इसे हम हमारी बपौती बना करके न बैठे ये विश्‍व का है, मानवजात का है और मानवजात के लिए है। ये इस युग का नहीं अनेक युगों के लिए है और समय के अनुकूल उसमें परिवर्तन भी आने वाला है। 

जिन्‍होंने, जैसे हेगड़े जी बता रहे थे सोलर  विमान के अंदर योगा किया होगा तो हो सकता है जगह कम होगी तो उनको वो योगा सिखाया होगा कि भई तुम ऐसे नाक पकड़ों, ऐसे पैर करो, हाथ नहीं हिलता तो कोई नहीं ऐसे कर लो उन्‍होंने संशोधित  किया होगा। तो जहां जैसी आवश्‍यकता हो वैसे परिवर्तन करते हुए इसको और आधुनिक बनाना और अधिक वैज्ञानिक बनाना और विज्ञान की कसौटी पर कसता चला जाए तो विश्‍व कल्‍याण के इस काम को हम करते रहेंगे, करना होगा और उस जिम्‍मेवारी को हम निभाते रहेंगे। 

मैं फिर एक बार इस सारे अभियान में विश्‍वभर का ऋणी हूं। विश्‍व की सभी सरकारों का ऋणी हूं, विश्‍व के सभी समाजों का ऋणी हूं और मैं सबका बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं। 

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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UPI भारत की फिनटेक स्टोरी का एक बड़ा चैंपियन: मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में पीएम मोदी
September 08, 2026
India is taking its fintech journey to new heights, with innovation and inclusion at its core: PM
India's growth gives the world renewed confidence: PM
UPI is a major champion of India's FinTech story: PM
Technologies like Agentic AI, tokenisation and quantum are opening new possibilities in the financial sector: PM
प्रधानमंत्री ने फिनटेक सेक्टर से साइबर सिक्योरिटी, एथिकल डेटा प्रोटेक्शन, इनोवेशन और कंज्यूमर प्रोटेक्शन इंडेक्स पर ध्यान देने का आग्रह किया।

आरबीआई के गर्वनर श्री संजय मल्होत्रा जी, ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के चेयरमैन क्रिस गोपाल कृष्णन जी, फिनटेक वर्ल्ड के सभी innovators, leaders and investors, देवियों और सज्जनों।

Global Fintech Fest में देश विदेश से आए सभी Guests और Delegates का मैं अभिनंदन करता हूं। मुझे खुशी है कि आज यहां एक और हैट्रिक लगी है। एक हैट्रिक तो 2024 में तीसरी बार सरकार बनने से लगी थी, और एक हैट्रिक आप सभी के बीच आने से जुड़ी है। Global Fintech Fest में लगातार ये मेरा Third year है। ये हैट्रिक बताती है कि विकसित भारत के लिए आप कितने महत्वपूर्ण हैं, आपका काम कितना महत्वपूर्ण है।

साथियों,

हर बार जब मैं यहां आता हूं, तो मुझे पहले से ज्यादा युवा दिखाई देते हैं, पहले से ज्यादा एनर्जी अनुभव होती है। मुझे possibilities का दायरा expand होता दिखता है। ये साफ साफ लगता है कि risk taking capacity बढ़ रही है, ड्रीम्स और बोल्ड हो रहे हैं। और इसलिए, विकसित भारत के फ्यूचर को लेकर मेरा विश्वास और मजबूत हो रहा है।

साथियों,

Fintech की इस एनर्जी के बीच ही मुंबई में सांस्कृतिक ऊर्जा भी इन दिनों चरम पर है। कुछ ही दिनों में महाराष्ट्र सहित पूरे देश में गणेशोत्सव शुरू होने जा रहा है। हमारे यहां हर शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश को याद किया जाता है। मैं गणपति बप्पा को नमन करते हुए, आप सभी को Global Fintech Fest 2026 के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

दुनिया के हालात क्या हैं, ये आप सब भलीभांति जानते हैं। दुनिया Conflicts और अन-सर्टेनिटी के दौर से गुजर रही है। Energy और कमोडिटीज़ की सप्लाई चेन्स पर दबाव है, Trade को लेकर भी तनाव है। और ये स्थितियां कई महीनों से बनी हुई हैं। इसमें भी अप्रैल से जून का क्वार्टर सबसे चैलेंजिंग रहा है। और इसमें भी जब भारत, Seven point eight percent से ग्रो करता है, तो दुनिया को एक नया भरोसा मिलता है। और ये जो विश्वास है, वो मैं यहां आप सभी के चेहरों पर भी साफ-साफ देख रहा हूं।

साथियों,

भारत पर इस बढ़ते भरोसे का एक और उदाहरण हमारी सॉवरीन रेटिंग्स भी है। हाल में ही, जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की सॉवरीन रेटिंग्स को A-कैटेगरी में अपग्रेड किया है। अपग्रेड करना तो खुशी की बात है, लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि ये सौभाग्य तीन दशक के बाद आया है, तीस साल के बाद। ये दिखाता है कि भारत के ग्रोथ मोमेंटम, हमारी मैक्रो-इकोनॉमिक स्टेबिलिटी, और जो स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स बीते वर्षों में किए हैं, उन सब को लेकर दुनिया कितनी आश्वस्त है। और मैं फिर कहूंगा कि भारत की ये रिफॉर्म एक्सप्रेस और तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ेगी।

साथियों,

भारत की फिनटेक स्टोरी अद्भुत रही है। और इसका एक बड़ा चैंपियन है- हमारा UPI. मैंने पिछले साल भी इसकी चर्चा की थी। लेकिन ये इतनी बड़ी ट्रांसफॉर्मेशन है कि जब भी फिनटेक की चर्चा होगी, तो वो UPI के बिना अधूरी ही होगी।

साथियों,

अभी कुछ ही दिन पहले, 25 अगस्त को UPI ने अपने 10 साल पूरे किए हैं। 10 वर्ष पहले जब मैं कहता था कि आपका बैंक आपकी फिंगर टिप्स पर होगा, तो कुछ लोगों को ये असंभव लगता था और मैं well informed लोगों की बात कर रहा हूं, चेहरा याद कर लीजिए। मैं उन करोड़ों भारतीयों की बात नहीं कर रहा हूँ, जिनके तब बैंक अकाउंट भी नए-नए खुले थे। उनकी तो अनेक पीढ़ियों ने बैंक का दरवाज़ा तक नहीं देखा था। लेकिन आज 10 वर्ष बाद देखिए, वही करोड़ों लोग, जो पीढ़ियों से बैंकिंग सिस्टम से बाहर थे, वे भारत में फिनटेक ग्रोथ के बड़े ड्राइवर बन गए हैं।

साथियों,

आज अकेले अगस्त महीने में ही UPI से Twenty-Four Hundred करोड़ से ज्यादा Transactions हुए हैं। यानी हम यहां जितनी देर से बैठे हैं, सिर्फ 10 मिनट में ही, औसतन 50 लाख से ज्यादा UPI Transactions देशभर में हो चुके होंगे। यही Impact है जिसके कारण फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, उन्होंने कहा था कि UPI केवल एक Tech Story नहीं है, ये एक सिविलाइजेशनल स्टोरी है।

और साथियों,

UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कुछ वर्ष पहले यहां कोई कहता कि विदेश में भी भारत के बैंक अकाउंट से पेमेंट कर देगा, तो शायद ही कोई विश्वास करता। लेकिन आज, यह एक हकीकत है। भारत का UPI अब दुनिया के 11 देशों में लाइव है। ये अद्भुत आंकड़े हैं, जो हमें बताते हैं कि हमने कितना लंबा सफर तय किया है। लेकिन अब सवाल ये है कि क्या हम इस सफर से संतुष्ट हो जाएं? क्या भारत में फिनटेक की सफलता को ही फाइनल मान लिया जाए?

साथियों,

पॉलिसी और गवर्नेंस से जुड़े इकोसिस्टम में मुझे अब 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं। और जिन्होंने भी मुझे इन वर्षों में देखा है, वो जानते हैं, मोदी एक पड़ाव पर पहुंचकर, जश्न मनाकर संतुष्ट होने वालों में से नहीं है। जब एक लक्ष्य प्राप्त होता है, तो मैं उससे भी बड़े लक्ष्य की तैयारी में जुट जाता हूं।

साथियों,

आज हमारा UPI कई देशों में पहुंचा है। लेकिन ये फर्स्ट स्टेप है। अब उन देशों के पेमेंट सिस्टम्स के साथ जुड़ना हमारा अगला लक्ष्य होना चाहिए। सिंगापुर के साथ हम ये कर चुके हैं। इससे भारत और सिंगापुर के बीच ट्रांजेक्शन वैसे ही हो पा रहे हैं, जैसे एक ही शहर के दो मोहल्लों के बीच होता है। यही कनेक्शन हमें, अन्य देशों, अन्य बाज़ारों में भी built करना है, इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ना होगा। जहाँ भी भारतीय बड़ी संख्या में रहते हैं, जहाँ भी भारत, बड़े पैमाने पर trade करता है, दुनिया का जो भी देश हमारे साथ चलने को तैयार है, हमें उन सबको जोड़ने के लिए काम करना होगा।

साथियों,

ये इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि विदेशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। और दुनिया में सबसे अधिक भारतीय ही विदेश से पैसा भेजते हैं। लेकिन आज उस पैसे का एक हिस्सा, ट्रांजैक्शन कॉस्ट में चला जाता है। UPI, भारतीयों को इसमें भी बचत दिला सकता है, और पैसा तेज़ी से भारतीय परिवारों के पास पहुंच सकता है।

साथियों,

आज आप भारत में कार्ड से पेमेंट कैसे करते हैं? यह सिस्टम उन स्टैंडर्ड्स पर चलता है, जो कहीं और डिज़ाइन किए गए थे। हमने उन स्टैंडर्ड्स और Rules को अपनाया,जो दूसरों ने बनाया था। उस समय, हमारे पास अपना कोई विकल्प नहीं था। लेकिन अब हमारे पास अपना विकल्प है, अब हम अपने खुद के Rules और स्टैंडर्ड बना सकते हैं, और उन्हें दुनिया के साथ जोड़ सकते हैं। मुझे आप सभी पर पूरा भरोसा है कि आप ये कर सकते हैं।

साथियों,

टेक्नॉलॉजी, इंक्लूजन का सबसे प्रभावी टूल है। और UPI ने ये करके दिखाया है। जब फिनटेक की बात आती है, तो इसका यूनीक फीचर ही वहां पहुंचने का होना चाहिए, जहां ट्रेडिशनल मॉडल नहीं पहुंच पाए। जहां पारंपरिक बैंक नहीं पहुंच पाए, जहां बैंक ब्रांच नहीं पहुंच पाई, UPI ने बैंकिंग व्यवस्था को उस स्थान, उस व्यक्ति तक पहुंचा दिया है।

साथियों,

आज फिनटेक बाज़ार का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ पेमेंट्स का है। लेकिन अब हमें, यहां से Next level पर जाना है, तेज़ी से जाना है। अब फिनटेक मार्केट में, पेमेंट्स के साथ-साथ, क्रेडिट ट्रांजैक्शन्स का हिस्सा भी बढ़ना चाहिए, इंश्योरेंस का हिस्सा बढ़ना चाहिए, सेविंग्स, इन्वेस्टमेंट्स और पेंशन का हिस्सा बढ़ना चाहिए।

साथियों,

मैं समझता हूं फिनटेक देश की उस ताकत को उभार सकता है, जो अभी ट्रेडिशनल फाइनेंशियल मॉडल्स की रीच से बाहर है, या उस प्रकार से एड्रेस नहीं हो पा रही है। विकसित भारत के लिए, इस ताकत का उभार बहुत ज़रूरी है।

साथियों,

इसका इंपैक्ट क्या होता है, ये हम अभी पीएम स्वनिधि की सफलता से देख ही रहे हैं। हमारे स्ट्रीट वेंडर्स शहरों की रीढ़ हैं। लेकिन ये देश के बैंकिंग सिस्टम से, फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम से बाहर थे। पीएम स्वनिधि ने, देश के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को फॉर्मल सिस्टम से जोड़ा। और अब इन साथियों के पास भी स्वनिधि क्रेडिट कार्ड है, यानी इनके पास, एक फॉर्मल क्रेडिट एक्सेस का टूल है। और studies बताती हैं, कि स्वनिधि के इन बेनिफिशरीज की एवरेज एनुअल इनकम ट्वेंटी परसेंट से ज्यादा बढ़ी है। यही नहीं, इससे इन परिवारों की हाउसिंग, न्यूट्रिशन, हेल्थकेयर एक्सेस और बच्चों की एजुकेशन, इनमें भी बहुत सुधार हुआ है। इसलिए सरकार ने इस स्कीम को 2030 तक बढ़ाने का फैसला भी लिया है।

साथियों,

पीएम स्वनिधि को ये सफलता हासिल ही नहीं होती, अगर UPI ही नहीं होता। इस स्कीम की सफलता में UPI की एक बहुत बड़ी भूमिका है। इसी अनुभव से सीखते हुए हमें फिनटेक की ताकत से इकोनॉमिक एक्टिविटीज को और बढ़ाना है। मैं आपको कैपिटल और क्रेडिट की दुनिया से एक उदाहरण देता हूँ। एक बहन है, जो एक छोटी दुकान चलाती है। उसको हर दिन डिजिटल पेमेंट मिलता है। अब उसकी इनकम और खर्च में एक क्लीयर पैटर्न दिखता है। उसका बिजनेस काफी अच्छा चल रहा है। वो उस लेवल से आगे बढ़ चुकी है, जहां कम कैपिटपल भी काफी था। अब उसे अपने बिजनेस को स्केल-अप करने के लिए, सामान चाहिए, इक्विपमेंट्स चाहिए, और इसके लिए थोड़े ज्यादा पैसे की जरूरत है। ये बहुत बड़ा क्रेडिट नहीं है। और उस बहन का बिजनेस अभी भी इतना छोटा है, कि ट्रेडिशनल क्रेडिट मॉडल, उसको एफिशियंट सर्विस नहीं दे सकते। इस प्रकार के बिजनेस हैं, जिनकी ज़रूरतों को फिनटेक, एनालाइज, एंटिसिपेट और एड्रेस कर सकते हैं। और ऐसे बिजनेसेज की संख्या बहुत बड़ी है।

साथियों,

टेक्नॉलॉजी हमें ऐसे बिजनेसेज की इकोनॉमिक एक्टिविटीज को स्टडी करने और उनके लिए क्यूरेटेड मॉडल डिजायन करने में बहुत काम आ सकती है। मेरा मानना है कि फिनटेक का नेक्स्ट चैप्टर, यहीं लिखा जाएगा। हमने पेमेंट्स में स्पीड और स्केल दिखाई है। अब, हमें नॉन-पेमेंट्स ट्रांजैक्शन्स का शेयर बढ़ाने में मदद करनी होगी। जैसे कोई डिलिवरी पार्टनर है, या अपना कोई छोटा-मोटा काम करने वाला व्यक्ति है, वो हर महीने कमाता है, लेकिन उसे सेविंग्स और पेंशन प्रोडक्ट्स जैसी सर्विसेज़ तक एक्सेस चाहिए। ऐसे लोगों की ज़रूरतों को फिनटेक एड्रेस कर सकता है। ऐसे ही फिनटेक, इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स और अन्य फाइनांशियल सर्विसेज तक भी एक्सेस आसान बना सकता है। ये सब भी उतने ही सरल, सहज और सुलभ हो सकते हैं, जितना आसान, आज क्यूआर कोड से पेमेंट करना है।

साथियों,

21वीं सदी का पहला क्वार्टर खत्म हो चुका है। अब हम साल 2026 में हैं। अब दूसरा क्वार्टर हमारे लिए और भी नई संभावनाएं लेकर आया है। Agentic AI, Tokenisation, Quantum, ऐसी Technologies फाइनेंशियल सेक्टर में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। अब हमारे सामने चुनौती है, इन संभावनाओं को वास्तविक Impact में कैसे बदलें। और इसके लिए, मैं चाहता हूँ, हमारी फिनटेक कंपनियाँ साथ मिलकर कुछ tasks अपने लिए सेट करें। और इसके लिए मैं कुछ सुझाव भी आपके बीच रखना चाहता हूं। पहला- हमें भारत में cyber security को टॉप नॉच बनाना है। दूसरा- हमारी इंडस्ट्री के पास अपने इथिकल डेटा प्रोटेक्शन स्टैंडर्ड्स होने चाहिए। तीसरा- हमें एक मजबूत, फिनटेक रेगुलेटर इंडस्ट्री इनोवेशन इकोसिस्टम बनाना है। और चौथा, हमारे पास एक, फिनटेक कंज्यूमर प्रोटेक्शन इंडेक्स होना चाहिए। जिसके आधार पर हर कंपनी की पारदर्शी रेटिंग हो सके। अगर हम इन कसौटियों पर खुद को कसेंगे, तो भारत का Fintech Sector असंख्य possibilities का गेटवे बन सकता है। हमारे पास अनुभव भी है, उसे जमीन पर उतारने का तरीका भी है। इसलिए हमें तेजी से काम करना है।

साथियों,

डिजिटल इंडिया की सक्सेस स्टोरी अब एक नए अध्याय के लिए तैयार है। हमारी फिनटेक सक्सेस स्टोरी की अब तक की सफलता, स्केल है, स्कोप है, सिक्योर सिस्टम्स हैं, डेमोक्रटाइजेशन ऑफ टेक्नॉलॉजी है, और जनता का ट्रस्ट है। इन्हीं कोर वैल्यूज को ध्यान में रखते हुए, Fintech Sector को, नेक्स्ट जेनरेशन इनोवेशन पर फोकस करना है। इसी आग्रह के साथ, आप सभी को एक बार फिर से बहुत-बहुत शुभकामनाए। बहुत-बहुत धन्यवाद।