योग ने मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित किया है। यह स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण है: प्रधानमंत्री
योग मानवता के लिए एक सौहार्दपूर्ण भविष्य का एक सपना है: प्रधानमंत्री मोदी
एक स्वस्थ शरीर और अनुशासित मन भयमुक्त संसार का आधार है: प्रधानमंत्री

आज यहां उपस्थित और दुनिया भर में योग के प्रशंसक साथियों, 

आज हम पहला अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मना रहे हैंा जब मैंने 27 सितंबर, 2014 को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में भाषण के दौरान वैश्विक समुदाय से अनुरोध किया था कि अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया जाए। उसके बाद जो उत्‍साह देखा गया वैसा मैंने बहुत कम देखा है।

देशों के समुदाय ने एकजुट होकर जवाब दिया। 11 दिसंबर, 2014 को 193 सदस्‍यों की संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने रिकॉर्ड 177 समर्थक देशों के साथ आमसहमति से इस प्रस्‍ताव का अनुमोदन कर दिया। वैसे UN के इतिहास में अपने आप में एक बहुत बड़ी घटना है। 
आज जब मैं यहां अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस पर खड़ा हूं तो दुनिया भर में योग दिवस मनाया जा रहा है। 
दुनिया भर में लाखों लोग इस आयोजन में भाग ले रहे हैं। सुदूर पूर्व में सूर्योदय से लेकर पश्चिम में सूर्यास्‍त तक लोग आज इस भव्‍य योग दिवस का आयोजन करेंगे।

भारत में, आज सुबह राजपथ पर, राज्‍यों में और जिला मुख्‍यालयों, समुदाय समूहों में और अपने घरों में भी लाखों लोगों ने सरल योगासन किए। योग दिवस पर अन्‍य देशों के हमारे भाइयों-बहनों में यह एकता की भावना हमारे दिलों और दिमागों को करीब लाई है। मुझे यहां इस अवसर पर स्‍मारक सिक्‍का और डाक टिकट जारी करते हुए बहुत खुशी हो रही है।

मैं समर्थन के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय का आभारी हूं। मैं पूरी विनम्रता से स्‍वीकार करता हूं कि यह समर्थन सिर्फ भारत के लिए ही नहीं है। यह समर्थन योग की महान परंपरा के लिए है। वह परंपरा जो व्‍यक्तियों और समाजों को आत्‍मएकता और एक दूसरे के साथ एकता की भावना की खोज करने में मदद करती है।

कहा जाता है कि योग जीवन का कायाकल्‍प करता है । जो लोग योगा से परिचित है उन्‍हें पता है कि योगा एक प्रकार से अगर हममें से कोई ऐसा नहीं होगा दुनिया में कोई इंसान ऐसा नहीं होगा जो ये न चाहता हो कि वो जीवन को जी-भर जीना चाहता है। हर कोई जीवन को जी-भरके जीना चाहता है और मैं विश्‍वास से कहता हूं कि योग ये जीवन को जी-भरके जीने की जड़ी-बूटी है। 

योग से पूरा फायदा उठाने के लिए, योग को सम्‍पूर्णता से समझने के लिए हमे समझना चाहिए कि योगी कौन है।

योगी वह व्‍यक्ति है जो सामंजस्‍य के साथ अपने आप में, अपने शरीर और अपने आसापास प्रकृति के साथ रहता है। योग का मतलब यही समांजस्‍य हासिल करना है।

उपनिषदों में योग का मतलब है शरीर के नियंत्रण के जरिए और स्थिर अभ्‍यास के जरिए भावना पर नियंत्रण के माध्‍यम से मानव चेतना का कायाकल्‍प। शरीर उस सर्वोच्‍च अवस्‍था को साक्षात बनाने का माध्‍यम है।

भगवद गीता दुनिया का गीत है जो योगशास्‍त्र को परिभाषित करती है। योगशास्त्र . गीता कहती है,  “योग कर्मेषु कौशलम्” – अर्थात योग कार्य की उत्‍कृष्‍टता है। समर्पण और निस्‍वार्थ कर्म ही योग है।

गीता यह भी कहती है  “योगस्य तथा कुरू कर्माणी” – योगी के विवेक से कर्म। 

इसलिए योग मानवता के लिए साकल्‍यवादी भविष्‍य के लिए दृष्टिकोण है। यह एक “अवस्था” है। जो दिमाग की अवस्‍था है, एक  “व्यवस्था”. कई लोगों को योग एक व्यवस्था के रूप में दिखता है, योग एक अवस्था है, योग कोई संस्था नहीं है। योग य़ह आस्था है और जब तक हम उसे उस रूप में नही पाते, जब तक हम उसे टुकड़ो में देखते हैं उसकी पूर्णता को पहचान नहीं पाते। 

योग के बहुत से लाभ हैं। जो सही ढंग से अनुशासन के साथ योग करते हैं। योग उन्‍हें -

हमारे शरीर की ताकत, कौशल और सामन्‍य भलाई, शांतिपूर्ण एवं तनावमुक्‍त जीवन की ओर ले  जाता है। कभी- कभार योगा की शक्ति को पहचानने में भी हम वैसी ही गलती कर देते हैं, जैसी हम अपने आप को पहचानने में करते हैं। जिस व्यक्ति ने वृक्ष नही देखा है, बीज से वृक्ष बनता है उसका ज्ञान नही है और उसे कोई बीज बता दे कि देखो कि इसमें ये व्‍यक्तिगत है कि इतना महान वृक्ष बन सकता है, तो वो विश्वास नही करेगा वो सैंकड़ो सवाल पूछेगा । लेकिन उसी छोटे से बीज का अगर उचित लालन-पालन हो खान-पान हो, ऊर्जा हो, पानी हो, प्रकृति का साथ हो तो वही बीज वटवृक्ष में रूपांतरित  हो जाता है| मनुष्य के भीतर भी परमात्मा ने सभी शक्तियां दी हुई है। मुझे दिया है और आपको नही दिया है, ऐसा नही है | मानव मात्र को यह सामर्थय दिया हुआ है लेकिन जो उसके लालन-पालन की कला जानता है, जो उसे विकसित करने का अवसर प्राप्त करता है, जो व्यव्स्था के तहत, आस्था के तहत, practice के तहत धीरे-धीरे विकसित करता है तो वो भी उत्कृष्ट जीवन की उंचाईयों को प्राप्त कर सकता है और परमात्मा ने जीव मात्र मे जहां है वहां से ऊपर उठने की सहज इच्छाशक्ति दी है और योग उस परिस्थिति को पैदा करने का एक माध्यम है और इसलिए जिसको ज्ञान नही है, अनुभव नही है उसको शक होता है कि क्या योगा से संभव हो सकता है लेकिन जिसने बीज से बने वृक्ष की कथा को समझा है, उसके लिए यह संभव है। यदि बीज वटवृक्ष में परिवर्तित हो सकता है तो नर भी नारायण की स्थिति प्राप्त कर सकता है। अहम् बर्ह्मास्मि। रामदेव जी कह रहे थे अहम् बर्ह्मास्मि। जल, चेतन सबकुछ को अपने में समाहित करने का सामर्थय तब प्राप्त होता है जब स्वयं का विस्तार करते हैं। योगा एक प्रकार से स्व से समस्ति की यात्रा है। योगा एक प्रकार से अहम् से व्यम की ओर जाने का मार्ग है और इसलिए जो अहम् से व्यम की ओर जाना चाहता है जो स्व से समस्ति की ओर जाना चाहता है, जो प्रकृति के साथ जीना सीखना चाहता है, योग उसको अंगुली पकड़ के ले जाता है, चलना तो उसको ही पड़ता है और उस अर्थ में इसके सामर्थय को अगर जानें। और आज खुशी की बात है, जब हमने 20वीं शताब्दी की समाप्ति से 21वीं शताब्दी में प्रवेश किया। उस पल को याद कीजिए। पूरे विश्व में सूरज की किरणें जहां जहां जाती थी, आनंद उत्सव बनाया था। जब सदी  बदली थी वो पल कैसा था आज दुबारा वो पल विश्व अनुभव कर रहा है। जहां- जहां सूरज की किरणे जा रहीं हैं। योग को अभिषिक्त करती जा रही है। पूर्व से पश्चिमी छोर तक ये यात्रा चल रही है। ये वैसा ही अवसर पैदा हुआ है जैसा 20वीं शताब्दी की समाप्ति से 21वीं शताब्दी में प्रवेश का पल था और विश्व ने जो अनुभूति की थी वो विश्व आज योगा के लिए कर रहा है। हर भारतीय के लिए, हर योगा प्रेमी के लिए, विश्व के हर कोने में बैठे व्यक्ति के लिए इससे बड़ा कोई गौरव नहीं हो सकता और उस गौरवगान में जब हम आगे बढ़ रहे हैं तब प्राण पर नियंत्रण स्‍वास्‍थ्‍य, लंबे और रोग मुक्‍त जीवन की ओर ले जाता है और जीवन की पूर्ण क्षमता हासिल कराता है।
इसलिए योग बदलती दुनिया का प्रतीक है। अतीत में योग को चुनिंदा संतों से संरक्षित रखा। आज यह पतंजलि के शब्‍दों में सबके लिए उपलब्‍ध है जो सार्वभौम है।

आप कल्पना कर सकते है कि श्री अरबिंदो के ज़माने में ये कहीं नज़र नहीं आता था कि योग जन सामान्य का विषय बनेगा, बहुत ही सीमित दायरे में था लेकिन योगी अरविन्द के दृष्टि थी और उन्होंने ये तब देखा था कि वो वक्त आएगा जब योग जनसामान्य के जीवन का हिस्सा बनेगा. वो कुछ परम्पराओं में या संतों तक सीमित नहीं रहेगा , वो जन जन तक पहुंचेगा . आज से करीब 75 साल पहले श्री अरविन्द ने जो देखा था वो आज हम अनुभव कर रहे हैं . और यही तो ऋषि मुनियों के सामर्थ्य का परिचायक होता है और ये ताकत आती है योग के समर्पण से , योग कि अनुभूति से और योगमय जीवन से आती है.

इस दिन मैं भारत की भावना की, हमारे लोगों की सामूहिक ऊर्जा के साथ अधिक बराबरी वाले संसार के सृजन की प्रतिज्ञा करता हूं ऐसा संसार जहां भय न हो और शांति हो। हम वसुधैव कुटुम्बकम की परिकल्‍पना को साकार करेंगे।

मैं सबके स्‍वास्‍थ्‍य और शांति - शांति पथ की कामना के साथ अपनी बात समाप्‍त करूंगा।

सर्वे भवंतु सुखिन्

सर्वे संतु निरामया

सर्वे भद्राणि पस्‍यंतु

मा कस्चित दुख भागभवेत

सब खुश रहें

सब निरोग रहें

सब शुभ देखें

कोई पीड़ा न झेले

आप सब को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बहुत-बहुत शुभकामनायें देता हूँ और ये दो दिवसीय सेमिनार... विश्‍व की हमसे अपेक्षाएं बहुत बढ़ जाएगी। अब यह हमारा दायित्‍व बनता है कि विश्‍व की अपेक्षाओं के अनुकूल योग के सही रूप को और समयानुकूल स्थिति में, हम जगत तक कैसे पहुंचाएं? दुनिया समझे उन शब्‍दों में, हम इसे कैसे पहुंचाएं? 

मैं कभी-कभी कहता हूं कि अच्‍छे-से-अच्‍छे मोबाइल फोन  की ब्रैंड हो लेकिन बहुत कम लोग होते हैं जिनको उसके यूजर-मैन्‍युअल  का अता-पता होता है। ज्‍यादातर तो लाल और हरे बटन  से ही उसका संबंध रहता है टेलीफोन कट  करना और टेलीफोन ऑन  करना और जिसको उसका ज्ञान होता है यूजर-मैन्‍युअल  का उस छोटी सी चीज से अपनी हथेली में सारी दुनिया को अपने हाथ में कर लेता है। परमात्‍मा ने हमें भी जो साफ्टवेयर  दिया है न हमें उसके यूजर-मैन्‍युअल  का पूरा पता ही नहीं है। हमें भी मालूम नहीं है कि परमात्‍मा ने हमें क्‍या-क्‍या दिया है? अगर हम योगा के माध्‍यम से उस यूजर-मैन्‍युअल  को पढ़ना सीख लें तो फिर उपयोग करना धीरे-धीरे आ ही जाएगा। 

मैं कभी-कभी सोचता हूं मेरी लिखाई तो अच्‍छी नहीं है लेकिन आपने देखा होगा कि एक शिक्षक जो कि अच्‍छी लिखाई  के प्रति बड़े आग्रही हैं। कक्षा में अपने विद्यार्थी को सिखाते हैं लेकिन कुछ बच्‍चे होते है जिनकी लिखाई  बहुत अच्‍छी तरह सुधरने लग जाती है और कुछ लोग होते है पेन  वैसे ही पकड़ते हैं बेहतरीन गुणता  का पेन भी होता है कागज भी बढि़या से बढि़या होता है शिक्षक  भी भरपूर मेहनत करता है वो भी ऐसे ही हाथ घुमाता है लेकिन लिखाई  अच्‍छे नहीं आती फर्क किया है जिसके लिखाई  उत्‍तरोत्‍तर ठीक होने लगती है और एक अवस्‍था ऐसी आ जाती है कि वो कितनी ही भीड़-भाड़ में क्‍यों न हो, कितनी ही जल्‍दी में क्‍यों न हो बुढ़ापे की ओर चल दिया हो, हाथ थोड़ा कांपने लगा हो तो भी लिखाई  अच्‍छी ही रहती है। उसको कोई चेतन प्रयास  नहीं करना पड़ता है। कोई जागरूक प्रयास नहीं करना पड़ता, वो सहज अवस्‍था होती है ...क्‍यों? उसने उसको आत्‍मसात कर दिया है। जिसकी लिखाई खराब है और वो चेतना  किसी विशेष व्‍यक्ति को चिठ्ठी लिखना चाहता है एक-दो लाईन तक तो ठीक कर लेता है फिर लुढ़क जाता है क्‍योंकि आत्‍मसात  नहीं किया है। 

योग को समझने के लिए, मैं मानता हूं जिस बालक ने बचपन में तुरंत इसको अपना  कर लिया अच्‍छे हस्‍तेलेखन  का कारण होगा उसके मन में जो चित्र बनता होगा उसकी आत्‍मा उसके साथ जुड़ती होगी, उसकी बुद्धि उसको आदेश देती होगी, उसका शरीर काम  करता होगा और वो परम्‍परा जीवनभर चलती होगी, वो योग का एक छोटा-सा रूप है और इसलिए मैं कहता हूं कि अभ्‍यास  से, प्रशिक्षण  से हम इन अवस्‍थाओं को प्राप्‍त कर सकते है और इन अवस्‍थाओं को प्राप्‍त करने के लिए अगर हम और ये बात सही है कि कोई बहुत बड़ी-बड़ी बातें बताता है तो फिर कठिनाई हो जाती है, फिर धीरे-धीरे विश्‍वास डूबने लग जाता है लेकिन छोटी-छोटी बातों से देखें तो पता चलता है यार ये तो मैं भी कर सकता हूं, ये तो दो कदम मैं भी चल सकता हूं। हमने विश्‍व के सामने योग का वो रूप लाना है कि भाई ठीक है आज नहीं लेकिन दो कदम चलो तो तुम पहुंच जाओगे। अगर ये हमने इसको बनाया तो मैं समझता हूं कि बहुत बड़ा लाभ होगा। 

भारत के सामने एक बहुत बड़ी जिम्‍मेवारी है, मैं बहुत जिम्‍मेवारी के साथ कहता हूं अगर योग को हम कमोडिटी  बना देंगे तो शायद योग का सबसे ज्‍यादा नुकसान हमारे ही हाथों हो जाएगा। योग एक कमोडिटी  नहीं है, योग वो ब्रैंड  नहीं है जो बिकाऊ हो सकती है। ये जीवन को जोड़ने वाला, जीवन को प्रकृति से जोड़ने वाला एक ऐसा महान उद्देशय है जिसको हमने चरितार्थ करना है और विश्‍व भारत की तरफ देखेगा और ये बात सही है आज से 50 साल पहले कभी भी हमने बाजार में बोर्ड  देखा था “शुद्ध घी की दुकान” देखा था 50 साल पहले शुद्ध घी की दुकान ऐसा बोर्ड नहीं होता था लेकिन आज होता है क्‍यों? क्‍योंकि बाजार में माल आ गया है। योगा के संबंद्ध में कभी ऐसा न आना चाहिए वो दिन अभी तो बचे हुए है लेकिन कभी वैसा दिन नहीं आना चाहिए कि हमारा ही योगा सच है बाकि तो तुम बे-फालतु में कान-नाक पकड़ करके डॉलर खर्च कर रहे हो। ये व्‍यापार नहीं है, व्‍यवस्‍था नहीं है, ये अवस्‍था है और इसलिए जगत के कल्‍याण के लिए, मानव के कल्‍याण के लिए, मानव के भाग्‍य को बदलने के लिए ये भारत की भूमि का योगदान है। उसमें संजोने-संवारने को काम भारत के बाहर के लोगों ने भी किया है उनका भी ऋण स्‍वीकार करना होगा। इसे हम हमारी बपौती बना करके न बैठे ये विश्‍व का है, मानवजात का है और मानवजात के लिए है। ये इस युग का नहीं अनेक युगों के लिए है और समय के अनुकूल उसमें परिवर्तन भी आने वाला है। 

जिन्‍होंने, जैसे हेगड़े जी बता रहे थे सोलर  विमान के अंदर योगा किया होगा तो हो सकता है जगह कम होगी तो उनको वो योगा सिखाया होगा कि भई तुम ऐसे नाक पकड़ों, ऐसे पैर करो, हाथ नहीं हिलता तो कोई नहीं ऐसे कर लो उन्‍होंने संशोधित  किया होगा। तो जहां जैसी आवश्‍यकता हो वैसे परिवर्तन करते हुए इसको और आधुनिक बनाना और अधिक वैज्ञानिक बनाना और विज्ञान की कसौटी पर कसता चला जाए तो विश्‍व कल्‍याण के इस काम को हम करते रहेंगे, करना होगा और उस जिम्‍मेवारी को हम निभाते रहेंगे। 

मैं फिर एक बार इस सारे अभियान में विश्‍वभर का ऋणी हूं। विश्‍व की सभी सरकारों का ऋणी हूं, विश्‍व के सभी समाजों का ऋणी हूं और मैं सबका बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं। 

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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दमन ‘मिनी इंडिया’ का जीवंत उदाहरण बन गया है: पीएम मोदी
June 05, 2026
हेल्थकेयर, एविएशन, टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत दमन के लिए विकास को नई गति देने वाली पहल है, जो केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी: पीएम
आज जारी किए गए आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। FY 2025-26 में 7.7% और 31 मार्च को समाप्त तिमाही में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की गई है: पीएम
वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौतियों के बावजूद, 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत न केवल मजबूती से आगे बढ़ रहा है, बल्कि दुनिया से एक कदम आगे भी बना हुआ है: पीएम
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे सरकार के हेल्थकेयर पर फोकस को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। पहले भारत में अधिकांश डिलिवरी अस्पतालों के बाहर होती थीं, लेकिन आज देश में 90% से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही हैं: पीएम
मिशन इंद्रधनुष की बदौलत भारत में बच्चों के टीकाकरण का कवरेज 2014 से पहले के 60% से बढ़कर आज करीब 90% तक पहुंच गया है: पीएम

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के एडमिनिस्ट्रेटर प्रफुल्ल भाई पटेल, संसद में मेरी सहयोगी कलाबेन डेलकर, दमन Municipal Council की President दीपिका टंडेल जी, दमन जिला पंचायत के अध्यक्ष धर्म बाबू पटेल, सिलवासा Municipal Council के अध्यक्ष सोमनाथ देवरे जी, दादरा नगर हवेली जिला पंचायत के अध्यक्ष निशा भावसार जी, दीव Municipal Council के अध्यक्ष हरीश कपाड़िया जी, दीव जिला पंचायत के अध्यक्ष कोटिया रंजिताबेन और यहां इतनी विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाइयों-बहनों,

आप जैसे यहां इकट्ठे हुए हैं, वैसे ही लक्षद्वीप में भी बहुत बड़ी तादाद में लोग वीडियो के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं, क्योंकि आज लक्षद्वीप के विकास की भी एक नई शुरुआत, एक नए प्रकल्‍प, जो पूरे लक्षद्वीप के जीवन में एक क्रांतिकारी काम करने वाले हैं, उसके लिए भी कुछ योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।

साथियों,

कुछ साल पहले, जब मैं आपके बीच आया था, तो मैंने कहा था यह हमारा दमन तेजी से मिनी इंडिया बन रहा है और आज मैं देख रहा हूं, बाईं तरफ पूरा बंगाल है और दाहिने तरफ पूरा असम है। दमन मिनी इंडिया का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां की विविधता, अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का यहां निवास करना, पूरे भारत की सुंदर सी झलक आपके बीच आकर के मिल जाती है। आप सब इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने आए, मैं इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

भाइयों-बहनों,

मुझे कई बार दमन और दीव आने का अवसर मिला है। दादरा और नगर हवेली भी आता रहता हूं और जब मैं मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं था, तब तो बहुत बार आता था। लेकिन अब जब मैं यहां आता हूं और यहां के सुशासन को देखकर, गवर्नेंस मॉडल को देखकर बहुत अच्छा लगता है। हर बार मुझे लगता है कि पिछली बार के मुकाबले यह क्षेत्र विकास की राह पर मीलों आगे बढ़ गया है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव ने दशकों से विकास के सपने देखे थे। जो सपने पहले देखे, वो पीढ़ियां तो चली गईं। लेकिन आज जो पीढ़ी है, वो अपनी आंखों के सामने देख रही है कि उनके मां-बाप, दादा-दादी जो सपने देखते थे, वो आज सपने पूरे होते हुए आप अपनी आंखों से देख रहे हैं। आज भी यहां कनेक्टिविटी, हेल्थ, एजूकेशन, टूरिज्‍म और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर इन से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है। विकास के यह काम दमन और पूरी यूनियन टेरिटरी के लिए यहां के लोगों के जीवन को आसान बनाएंगे। इनसे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे। इन कामों के पीछे प्रफुल्ल भाई पटेल की दृष्टि, उनकी और उनकी टीम की मेहनत साफ-साफ नजर आती है। मैं इसके लिए भी प्रफुल्ल भाई और उनकी पूरी टीम की सराहना करता हूं। मैं सभी को लक्षद्वीप के लोगों को, दादरा-नगर हवेली के लोगों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं, आप सबको बधाई देता हूं।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक सुखद खबर आई है। मैं तो आज सुबह दिल्ली से निकल चुका था, लेकिन अभी जो आंकड़े सामने आए हैं, जो खबर आई है, वो सचमुच में प्रसन्नता करने वाली है और मैं भी चाहता हूं, यह खुशी आपके साथ भी बाटूं। आज जो आंकड़े आए हैं, उन आंकड़ों से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव कितनी मजबूत है। वर्ष 2025-26 में यानी जो फाइनेंशियल ईयर पिछला पूरा हुआ, वर्ष 2025-26 में भारत ने 7.7 परसेंट की ग्रोथ रेट हासिल की है, 7.7 और पिछला क्वार्टर जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ 7.8 परसेंट रही है, 7.8 और यह दुनिया में तेज गति से आगे बढ़ने वाली बडी इकोनॉमी है। हर भारतीय को गर्व हो, यह है उसकी गति। आज देश जिस रिफॉर्म एक्‍सप्रेस पर चल रहा है, आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का जो इतना विकास हो रहा है, गरीब कल्‍याण को लेकर इतने बड़े स्‍तर जो काम चल रहा है, इन सारे प्रयासों का परिणाम है कि आज देश बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है और हम सब जानते हैं, दुनिया संकटों में घिरी हुई है, सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था सवालिया निशानों के नीचे दबी पड़ी है, वैश्विक संकट के इस बुरे से बुरे दौर में भी 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयासों से भारत खुद को संभाल तो पा ही रहा है, लेकिन साथ-साथ सबसे आगे रहने में भी उसके प्रयास सफल होते जा रहे हैं। मैं देशवासियों को आर्थिक क्षेत्र की इस नई ऊंचाई को प्राप्त करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मैं देश को फिर आश्‍वस्‍त करता हूं कि देश दुनिया भर में चल रहे इन संकटों का सामना करते हुए Reform, Perform और Transform के रास्ते पर ऐसे ही दृढ़ संकल्प के साथ, तेज गति से आगे बढ़ता ही रहेगा, यह मेरी देशवासियों को गारंटी है।

साथियों,

आज हमारे लिए विकास जितना जरूरी है, उतना ही अहम है हमारे विकास का मॉडल सस्टेनेबल हो। आज वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के दिन हमारे यहां यूनियन टेरिटरी स्टेट इस संकल्प को साकार कर रहा है। आज एक ओर यहां हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं को लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। साथ ही यहां करीब एक लाख एक पेड़ मां के नाम, एक लाख पौधे भी लगाए जा रहे हैं। मुझे गर्व है कि एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिसने सरकारी इमारतों में शत प्रतिशत, 100 परसेंट सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की उपलब्धि हासिल की है। आज दीव में दिन में जितनी बिजली की डिमांड होती है, वो सोलर पॉवर से ही पूरी हो रही है और हमें तो इसे और आगे लेकर के जाना है। घरों में भी सोलर ऊर्जा से बिजली मिले, यही नहीं अतिरिक्त बिजली से परिवार की आय भी हो, इसके लिए रूफटॉप सोलर प्लांट्स लगाने की पहल शुरू हुई है। मैं इन उपलब्धियों के लिए भी आप सबकी सराहना करता हूँ।

साथियों,

साथ-साथ मुझे यह भी बताया गया है, दमन के लोग इन दिनों यहाँ स्वच्छता अभियान भी चला रहे हैं। यह दिखाता है कि स्वच्छता किस तरह दमन के जनजीवन में संस्कार बन चुका है और यह संस्कार स्वच्छता में नजर आ रहे हैं। मैं इस जनभागीदारी के आपके प्रयासों के लिए दमन के लोगों का अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

दादरा नगर हवेली, दमन और दीव, यह संघ शासित प्रदेश होने के साथ ही भारत की पहचान और विरासत भी हैं। इसलिए, इसके विकास के लिए हमारे लक्ष्य भी साधारण नहीं हैं। मुझे याद है, जब मैं पिछले साल सिलवासा आया था, तब मैंने आपको सिंगापुर का उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि एक समय सिंगापुर मछुआरों का छोटा सा गांव था। लेकिन, सिंगापुर के लोगों ने एक सपना देखा, वहां के लोगों ने बड़ा लक्ष्य तय किया और आज वही सिंगापुर दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नस हब बन चुका है। आज दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव भी वही सपना देख रहे हैं। ये नमो एयरपोर्ट, दमणगंगा नदी पर बनने वाला आइकॉनिक ब्रिज, ‘बीच फ्रंट’ उस पर बनने वाला कन्वेंशन सेंटर, ऐसे सभी इनफ्रास्ट्रक्चर के जरिए हम भविष्य के बड़े संकल्पों की नींव रख रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए आप लोगों की आवाजाही आसान होगी। यहाँ बिज़नेस के लिए नई संभावनाएं बनेंगी। दमन के दोनों किनारों पर विकास की गति और तेज होगी।

साथियों,

यहाँ hospitality economy से जुड़े अवसर बढ़ेंगे और साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर जैसी सुविधा से व्यापार, लॉजिस्टिक्स को भी नई गति मिलेगी।

साथियों,

इस क्षेत्र में ब्लू इकॉनमी के लिए हमने जो विज़न तैयार किया है, वो विज़न भी हाइटेक इनफ्रास्ट्रक्चर की ताकत से ही साकार होगा। इसीलिए, लक्षद्वीप के कलपेनी और कदमत द्वीपों में भी आज ही आधुनिक पोर्ट्स की आधारशिला रखी जा रही है। यह सभी प्रयास ब्लू इकॉनमी में देश की ताकत को बढ़ाएँगे और जैसा मैंने कहा यह लक्षद्वीप का भाग्‍य बदलने वाले initiative हैं।

साथियों,

भाजपा की सरकार में, एनडीए की हमारी सरकार में हमारे लिए विकास की पहली कसौटी है- गरीब, वंचित, आदिवासी और मिडिल क्लास के जीवन में बदलाव! इसके लिए, हेल्थ सेक्टर हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। बीते वर्षों में देश हेल्थ केयर के लिए होलिस्टिक विजन लेकर आगे बढ़ा। हमने इलाज से जुड़ी हर चिंता का समाधान किया है। आज गरीब से गरीब के पास भी आयुष्मान कार्ड की सुविधा है। उनके पास 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का भरोसा है। बीमारी की समय से जांच हो सके, इसके लिए, प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था है। जन औषधि केन्द्रों के जरिए सस्ती दवाइयाँ भी मिल रही हैं। ये सुविधाएं और बेहतर हों, और आधुनिक हों, इसके लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए आज स्वास्थ्य सेवाओं को टेक्नॉलॉजी से जोड़ा जा रहा है।

साथियों,

आयुष्मान कार्ड और जन औषधि केंद्रों से ही गरीब और मध्यम वर्ग के करीब सवा दो लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं।

भाइयों-बहनों,

केंद्र सरकार की नीतियों का बहुत लाभ इस क्षेत्र के लोगों को भी हुआ है। एक समय यहां इलाज की अच्छी सुविधाओं का भी अभाव था। यहाँ मेडिकल कॉलेज तक नहीं था। लेकिन, अब मेडिकल कॉलेज भी है और उसमें post-graduation की पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सिलवासा का नमो हॉस्पिटल पिछले साल से हजारों लोगों की सेवा कर रहा है। आज दमन में भी नमो हॉस्पिटल का लोकार्पण हुआ है। इस क्षेत्र के लोगों को भी अब और बेहतर हेल्थ केयर का लाभ मिलेगा।

साथियों,

हमारी सरकार कैसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चल रही है, इसका एक प्रमाण नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के नतीजों में भी मिलता है। एक समय भारत में ज़्यादातर बच्चों की डिलिवरी अस्पताल में नहीं होती थी। आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही है, जिसके कारण माता मृत्यु या नवजात की मृत्यु में बहुत बड़ी रुकावट आई है। मिशन इंद्रधनुष की वजह से बच्चों के टीकाकरण के क्षेत्र में भी भारत ने अच्छी प्रगति की है। 2014 से पहले केवल 60 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हो पाता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले 30 प्रतिशत से भी कम परिवार स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े हुए थे। आज आयुष्मान भारत, उन आंकड़ों को भी बदल दिया है। अब 60 प्रतिशत से अधिक परिवारों को ये सुरक्षा मिल रही है।

साथियों,

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के इन प्रयासों का लाभ अगर किसी को सबसे ज्यादा मिला है, तो वो मेरे देश की नारी शक्ति है।

साथियों,

पहले इस क्षेत्र के युवाओं को हायर एजुकेशन के लिए भी बाहर जाना पड़ता था। लेकिन, आज यहाँ नेशनल लेवल के, एक नहीं कई इंस्टीट्यूट बन चुके हैं। पिछले वर्षों में यहां स्कूलों की नई बिल्डिंग्स बनी हैं, स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम भी बने हैं। 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों को इनका लाभ मिल रहा है। मुझे खुशी है कि केंद्र शासित प्रदेश धीरे-धीरे एजुकेशन के क्षेत्र में आगे आ रहा है। स्वामी विवेकानंद एजुकेशन हब जैसे कई निर्माण यहाँ हो रहे हैं।

भाइयों-बहनों,

इस शिक्षा क्रांति में हमारी बेटियाँ पीछे न रहें, ये भी हमारा संकल्प है। इसके लिए कई बड़े प्रयास किए जा रहे हैं। सरस्वती साइकिल स्कीम, सरस्वती विद्या योजना, यहां की बेटियों को बहुत मदद कर रही है।

साथियों,

आज भारत की कोशिश है कि देश के युवाओं को डिग्री के साथ ही सही दिशा भी मिले। उन्हें ऐसा एक्सपोजर मिले, जो लोकल टैलेंट को ग्लोबल अवसरों से जोड़े। डिजाइन, लॉ, इंजीनियरिंग, मेडिकल एजुकेशन, आईटी, ड्रोन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हमारी आज की तैयारी भारत की वर्कफोर्स को मजबूत बनाएगी। इसलिए प्रोफेशनल संस्थानों का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।

साथियों,

आज NIFT के अठारहवें campus की आधारशिला रखी गई है। ये संस्थान यहां के युवाओं को ग्लोबल एक्सपोजर से जोड़ेगा। आई.टी.आई. दमन में ड्रोन टेक्नीशियन जैसे नए कोर्सेस भी शुरू हुए हैं। पीएम विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, इनसे जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का लाभ भी युवाओं को मिल रहा है।

साथियों,

देश में खेलों को भी नई सोच के साथ आगे बढ़ाया गया। हमारे खेल अब केवल बड़े शहरों या बड़े स्टेडियमों तक सीमित नहीं हैं। खेलो इंडिया जैसे प्रयासों ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का नया मंच दिया है। इससे छोटे-छोटे क्षेत्रों में नेशनल लेवल पर खेल के जगत में हमारे बच्चे आगे आ रहे हैं और इसका भी लाभ इस क्षेत्र को हुआ है। दीव आज beach sports का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। घोघला बीच पर हुए Beach Games ने भी देश का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींचा है। आज यहां आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार काम हो रहा है। खानवेल में फुटबॉल सेंटर और दमन में वॉलीबॉल ट्रेनिंग सेंटर यहां खेल संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं।

साथियों,

आज देश का बहुत बड़ा फोकस टूरिज्म पर भी है। हमारा प्रयास है कि टूरिज्म से स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिले। छोटे-छोटे स्थानों को भी बड़े-बड़े अवसरों से जोड़ा जा सके। ‘देखो अपना देश’ जैसे प्रयास ने लोगों को देश की विविधता के बारे में जानने के लिए प्रेरित किया है। आज भारत में हैरिटेज टूरिज्म, ‘बीच टूरिज्म’, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, इन सेक्टर्स को नई ऊर्जा मिल रही है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में तो पर्यटन भी इतनी असीम संभावनाओं वाला एक क्षेत्र है। इस क्षेत्र को प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत वरदान मिला है। इसीलिए पर्यटन को लेकर देश ने जिन नीतियों पर काम किया है, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव को उसका बड़ा लाभ मिल रहा है। 2021 में यहां करीब 6 लाख टूरिस्ट आए थे। 2025 में ये संख्या बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही वर्षों में टूरिज्म फुटफॉल में करीब 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। यह बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सुविधाओं, साफ-सुथरे ‘बीच’ की वजह से संभव हुआ है। दमन नाइट मार्केट, रामसेतु सी-फ्रंट, नमोपथ सी-फ्रंट, नानी दमन फोर्ट, गंगेश्वर टेंपल कॉम्प्लेक्स, ऐसे अनेक स्थान आज इस पूरे क्षेत्र की नई पहचान बना रहे हैं।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, इसके सपनों को पूरा करने के लिए हमें यहाँ की औद्योगिक ताकत को भी बढ़ाना है। यह भी गर्व की बात है कि इस यूनियन टेरिटरी ने man-made fibre के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। दादरा और नगर हवेली को National Man-Made Fibre Capital के रूप में पहचाना जाता है। प्लास्टिक एक्सपोर्ट में भी ये क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार ने यहां इंडस्ट्रीज और MSMEs को सपोर्ट देने के लिए भी लगातार प्रयास किए हैं। यहां MSMEs और अन्य इंडस्ट्रीज को करोड़ों रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश के लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में ये क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनेगा।

साथियों,

जब विकास के विजन के साथ संवेदनशील गवर्नेंस जुड़ता है, तो परिवर्तन तेज गति से जमीन पर उतरता है। दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में हमारे इन प्रयासों का प्रभाव देखकर संतोष होता है। मुझे इस धरती के लोगों पर पूरा विश्वास है। यहां के युवा, यहां की माताएं-बहनें, यहां के किसान, कारीगर, श्रमिक और उद्यमी, आने वाले वर्षों में इस विकास यात्रा को और आगे ले जाएंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ, आपके सपनों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर विकास परियोजनाओं के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।