महामिलावटियों के लिए मोदी हटाओ का नारा तो बहाना था असल में इन्हें अपने भ्रष्टाचार के पाप को छुपाना था: प्रधानमंत्री मोदी
महामिलावटियों ने मोदी हटाओ के नाम से अभियान शुरु किया था, उसके बाद जैसे ही प्रधानमंत्री पद की बात आई तो सब अपना-अपना दावा लेकर अपनी-अपनी ढफली बजाने लगे: पीएम मोदी
बुआ हो या बबुआ या फिर कांग्रेस के नामदार, यूपी की समझदार जनता को ये लोग सिर्फ जाति में बांटकर देखते हैं, उन्हें लगता है कि वोटर उनकी जागीर है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय, भारत माता की जय।

आज मेरे पास समय की सीमा है। साथियो, सातवें चरण के मतदान में अब सिर्फ दो दिन बचे हैं। वहीं लोकसभा चुनाव परिणाम आने में सिर्फ सात दिन बचे हैं। 23 मई को ऐलान हो जाएगा, फिर एक बार… मोदी सरकार।

भाइयो-बहनो, वो महामिलावटी लोग जो महीने भर पहले तक मोदी हटाओ-मोदी हटाओ का राग आलाप रहे थे, वो आज बौखलाए हुए हैं। उनकी पराजय पर पूरे देश ने मोहर लगा दी है और उत्तर प्रदेश ने सबसे आगे बढ़ कर इनका गुणा गणित ही बिगाड़ा दिया है। इसलिए हर दिन उनकी गालियां बढ़ती जा रही हैं। भाइयो-बहनो, असल में देश इन महामिलावटी दलों की सच्चाई पहले दिन से जानता है। देश को पता है की मोदी हटाओ का नारा तो बहाना था असल में उन्हें अपने भ्रष्टाचार के पाप को छिपाना था इसलिए ये जैसे-तैसे कोशिश कर रहे हैं की देश में एक खिचड़ी सरकार बन जाए। ये देश में एक मजबूर सरकार चाहते थे जिसे वो अपनी जरूरत के हिसाब से ब्लैकमेल कर सकें। लेकिन ये नया भारत है, ये आतंकियों को घर में घुसकर मारता है और जो अपने घर को, अपने समाज को, अपने देश को कमजोर करना चाहते हैं, उन्हें अच्छी तरह पहचानता भी है, जानता भी है।

भाइयो-बहनो, यहां उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा ने जाति के आधार पर एक अवसरवादी गठबंधन करने की कोशिश की। लखनऊ में एसी कमरे में बैठकर ऊपर-ऊपर से तो डील हो गई लेकिन जमीन से कटे हुए ये नेता अपने कार्यकर्ताओं को ही भूल गए। नतीजा ये की सपा और बसपा के कार्यकर्ता आज भी एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं। दूसरी गलती सपा-बसपा ने ये सोच कर की, कि दोनों दलों को उनका वोट एक दूसरे को ट्रांसफर हो जाएगा। भाइयो-बहनो, इन लोगों ने कुछ जातियों को अपना गुलाम समझ लिया था। 2014 में पहली बार समझाने के बाद, 2017 में दूसरी बार समझाने के बाद अब 2019 में उत्तर प्रदेश इन दलों को थोड़ा ठीक से समझाने जा रहा है की जातियां आपकी गुलाम नहीं हैं। लोग ये अच्छी तरह समझते हैं की वोट दिया जाता है विकास के लिए, वोट दिया जाता है देश को आगे बढ़ाने के लिए।

भाइयो-बहनो, इन लोगों ने जाति के नाम पर सिर्फ सत्ता हासिल की और फिर सत्ता का उपयोग अपने लिए बंगले बनाने में, अपने रिश्तेदारों को करोड़पति, अरबपति बनाने में किया है। बुआ हो या बबुआ हो, इन लोगों ने गरीब से खुद को इतना दूर कर लिया है, अपने आस-पास इन लोगों ने पैसे की, बाहुबल की, अपने दरबारियों की इतनी ऊंची दीवार खड़ी कर ली है की इन्हें गरीबों का सुख-दुख नजर नहीं आता। भाइयो-बहनो, इऩ महामिलावटी लोगों से अलग मैं बहुत ईमानदारी से प्रयास कर रहा हूं की गरीब की जिंदगी आसान हो। दशकों से उसे जिन सुविधाओं का इंतजार था, मैं उसे वो मुहैया कराने में जुटा हूं। गरीब को पक्का घर मिले, घर में बिजली का कनेक्शन हो, गैस का कनेक्शन हो, शौचालय हो, बैंक में खाता हो, उसके बच्चे का समय पर टीकाकरण हो, उसे सस्ता इलाज मिले, उसे सस्ता राशन मिले, उसके घर तक सड़क पहुंचे, इन लक्ष्यों पर हम काम कर रहे हैं। साथियो, मैं उन किसान परिवारों के बैंक खाते में सीधी मदद देने में भी जुटा हूं, जिनको खेती से जुड़े छोटे-छोटे खर्च के लिए कर्ज लेना पड़ता था।

साथियो, एक तरफ आपका ये सेवक देश की बेटियों को सशक्त करने में जुटा है। वहीं ये महामिलावटी वोट के लिए बेटियों का अपमान करते हैं। मुस्लिम बहन-बेटियों को तीन तलाक के नर्क से मुक्ति दिलाने का बीड़ा भी हमारी सरकार ने उठाया लेकिन इन महामिलावटी लोगों ने मिलकर मुस्लिम बहन-बेटियों को इंसाफ मिलने में रोड़े अटकाए। सरकार चाहती है कि मुस्लिम महिलाओं को उनकी भावनाओं के मुताबिक उनकी आस्था के दायरे में ही तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार मिले, लेकिन ये महामिलावटी दल ऐसा भी होने नहीं दे रहे। इन लोगों का रवैया क्या है ये महामिलावट वाले उम्मीदवार में भी नजर आता है। सपा-बसपा ने यहां से ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया है जो बलात्कार के आरोप में भगोड़ा है। समाजवादी पार्टी का इतिहास यूपी के लोग जानते हैं लेकिन बहन जी क्या आप ऐसे उम्मीदवारों के लिए वोट मांगेंगी।

भाइयो-बहनो, सपा के समय में यूपी में बेटियों की क्या स्थिति थी ये सब जानते हैं। लेकिन बहन जी महिला सुरक्षा को लेकर आपका बर्ताव भी अब सवालों के घेरे में है। कुछ दिन पहले राजस्थान के अलवर में एक दलित बेटी के साथ गैंगरेप किया गया था। वहां बहन जी के समर्थन से कांग्रेस की सरकार चल रही है। कांग्रेस की सरकार ने चुनाव को देखते हुए उस दलित बेटी के साथ हुए उस राक्षसी अपराध को छिपाने की कोशिश की। बहन जी सब जानती हैं लेकिन कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेने के बजाए वो मोदी को गालियां देने में जुटी है। दलित बिटिया के साथ बहन जी का ये रवैया बताता है की ये महामिलावटी अपने स्वार्थ के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। भाइयो-बहनो, महिला हितों, महिला सुरक्षा के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। आजादी के इतिहास में पहली बार रेप केस में फांसी सजा का प्रावधान इसी चौकीदार ने किया है। मैं यहां की महिलाओं को, पूरे पूर्वांचल की महिलाओं को विशेष आग्रह करूंगा की वो ऐसे महिला विरोधी दलों के खिलाफ पूरी ताकत के साथ मतदान करें। महिलाओं की गरिमा, उनकी मर्यादा, उनके हितों के लिए मतदान करें। कमल के निशान पर बटन दबाने का मतलब है, बलात्कारियों को फांसी की सजा। कमल के निशान पर बटन दबाने का मतलब है, घर-घर शौचालय, घर में पानी की सुविधा।

साथियो, मैं यहां आने के लिए रास्ते में था तो पता चला की बहन जी ने पश्चिम बंगाल को लेकर मुझ पर निशाना साधा है, चुनाव आयोग को भी आड़े हाथों लिया है। मैं तो सोच रहा था की जिस तरह ममता दीदी वहां पर, यूपी, बिहार, पूर्वांचल के लोगों पर निशाना साध रही है, उन्हें बाहरी बताकर अपनी राजनीति कर रही है। बहन मायावती इस पर ममता दीदी को जरूर कुछ खरी-खोटी सुनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि उनको आपकी चिंता नहीं है, उनको तो कुर्सी का खेल खेलना है।

साथयो, यहां यूपी में सभा के बाद मैं आज फिर एक बार बंगाल जाने वाला हूं। बंगाल की मुख्यमंत्री, लोकतंत्र के द्वारा चुनी हुई मुख्यमंत्री, भारत के लोकतंत्र, 130 करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद से मोदी जो प्रधानमंत्री चुना गया है उसको बंगाल की मुख्यमंत्री अपना प्रधानमंत्री नहीं मानती। वो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को तो प्रधानमंत्री मानती है लेकिन हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री नहीं मानती है। और भाइयो-बहनो, आज जब मैं बंगाल जा रहा हूं तो देश वासियों को विश्वास दिलाता हूं मुझे याद है कुछ महीने पहले जब पश्चिमी मेदिनीपुर में मेरी रैली थी तो किस तरह की अराजकता वहां के टीएमसी द्वारा फैलाई गई थी। इसके बाद बंगाल में ठाकुरनगर में मेरी जनसभा थी तो ये हालत कर दी गई थी की मुझे अपना संबोधन बीच में छोड़कर मंच से हट जाना पड़ा था। कुछ दिन पहले कूचबिहार में मेरी रैली के लिए जहां पर मंच बनना था, वहीं पर दीदी ने अपनी पार्टी का बड़ा सा मंच बनवा दिया था। ये सब सत्ता के नशे में लोकतंत्र विरोधी मानसिकता में दीदी आप करती रही हो। दीदी का रवैया मैं बहुत दिन से देख रहा हूं, अब पूरा देश भी देख रहा है। आज शाम को कोलकाता में दमदम में भी मेरी रैली है। देखते हैं दीदी ये रैली होने देती है या नहीं, उसका चले तो वहां हमारे हेलिकॉप्टर को उतरने भी नहीं देगी।

 

साथियो, टीएमसी के गुडों की ये दादागिरी परसों रात भी देखने को मिली। परसों कोलकता में भाई अमित शाह के रोड शो के दौरान टीएमसी के गुंडों ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ती को तोड़ दिया। ऐसा करने वालों को कठोर से कठोर सजा देनी चाहिए। वहीं मैं ये भी कहना चाहूंगा की ईश्वरचंद्र विद्यासागर जी के विजन के लिए समर्पित हमारी सरकार उसी जगह पर पंचधातु की एक मूर्ती की स्थापना करेगी और टीएमसी के गुंडों को जवाब देगी। ईश्वरचंद्र विद्यासागर मात्र बंगाल की नहीं बल्कि भारत की महान विभूति हैं। वो महान समाज सुधारक, शिक्षाशास्त्री ही नहीं बल्कि दलितों और गरीबों के संरक्षक भी थे। महिलाओं के अधिकारों के लिए उन्होंने उस दौर में आवाज उठाई थी, उन्होंने मानवता की सेवा के लिए जो किया है उसके हम सभी ऋणी हैं। हमारी सरकार देश की ऐसी ही विभूतियों की प्रेरणा से देश को नई ऊंचाई पर ले जाने का काम कर रही है। भाजपा सरकार के तो मूल में बंगाल की संस्कृति, भक्ति है। वेद से विवेकानंद तक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से लेकर डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी तक हमारे चिंतन-मनन को बंगाल की ऊर्जा ने ही प्रभावित किया है।                 

भाइयो-बहनो, 21वीं सदी में देश को एक बुलंद हौसले वाली, पूर्ण बहुमत वाली सरकार चाहिए। मजबूत सरकार ही जय जवान-जय किसान के नारे को साकार कर सकती है। मजबूत सरकार से ही एक विकसित भारत का सपना सच हो सकता है। मजबूत सरकार ही पूर्वांचल और पूर्वी भारत का विकास कर सकती है। यही कारण है की इस पूरे क्षेत्र को हमने विशेष प्राथमिकता दी है। रेल हो, रोड हो, गंगा जी पर बना जल मार्ग हो, इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प हो रहा है। इससे यहां उद्योगों के लिए, उद्यमों के लिए रोजगार के नए अवसर बनने वाले हैं। साथियो, इस बार घोसी को पिछली बार का रिकॉर्ड तोड़ना है, एक-एक बूथ पर कमल खिलाना है। आपका हर वोट सीधा-सीधा मोदी के खाते में जाएगा। आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

भारत माता की… जय, भारत माता की… जय, भारत माता की… जय, बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

 

 

 

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पीएम नरेन्द्र मोदी ने भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की
July 28, 2026
चर्चा किए गए क्षेत्र: वित्त और अर्थव्यवस्था, वाणिज्य और उद्योग, और प्रौद्योगिकी
न प्रधानमंत्री ने सरकार के भीतर क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों प्रकार की कार्यगत बाधाओं को खत्म करने की आवश्यकता पर बल दिया
प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा घरेलू क्षमताओं के विकास के महत्व पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में युवा नवोन्मेषकों और उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया
प्रधानमंत्री ने भ्रामक जानकारी का मुकाबला करने के लिए रणनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय जनसंपर्क और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार को सदैव युवा, गतिशील और दूरदर्शी बने रहना चाहिए तथा नई चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप फुर्ती और नवाचार के साथ निरंतर स्वयं को ढालते रहना चाहिए
सचिवों ने प्रमुख पहलों, उभरते अवसरों और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों पर अपने अनुभव और विचार साझा किए

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर केन्द्र सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग, तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भावी कार्य योजना की समीक्षा की। यह बैठक विकसित भारत के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को और तेज़ करने पर केंद्रित रही।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मंत्रालयों और विभागों के बीच मजबूत टीम भावना विकसित करने पर विशेष बल देते हुए अधिकारियों से साझा उद्देश्य की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने सरकार के भीतर क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर दोनों प्रकार की कार्यगत बाधाओं को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और एकीकृत एवं प्रभावी परिणाम सुनिश्चित कर सकें।

जन-केंद्रित सुशासन का महत्व बतलाते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत के नागरिक ही सदैव शासन व्यवस्था के केंद्र में रहने चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि हर निर्णय और नीति आम-नागरिक के हितों और आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जहां बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय निवेश कर रहा है, वहीं स्वदेशी तकनीकों को विकसित करने को भी समान प्राथमिकता दिया जाना चाहिए। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता और घरेलू क्षमताओं के निर्माण के महत्व पर विशेष बल दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा का सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत को नवाचार, विविधता और क्षमता निर्माण में तेजी लाकर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना होगा।

सुधारों को सिरफ एक चलन या फैशनेबल शब्द न मानकर प्रभावी शासन के लिए एक निरंतर आवश्यकता बतलाते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यप्रणालियों में सुधार लाने, कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने तथा संस्थागत दक्षता को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ डिजिटल प्रणालियों और अवसंरचना को सुरक्षित रखने के लिए साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने उभरते साइबर खतरों के प्रति निरंतर सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में युवा नवोन्मेषकों और उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया और इस दिशा में इसे एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन रणनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय संवाद और जनसंपर्क के महत्व पर भी बल दिया, जहां देश महत्वपूर्ण पहल कर रहा है, जिससे इन प्रयासों से जुड़ी भ्रामक जानकारी और बेबुनियाद आशंकाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कार्यबल को उभरते और भविष्य के उद्योगों द्वारा आवश्यक कौशल से सुसज्जित करने के लिए नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की योजना उद्योग जगत के साथ साझेदारी में बनानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को सदैव युवा, गतिशील और दूरदर्शी बने रहना चाहिए तथा नई चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप फुर्ती एवं नवाचार के साथ निरंतर स्वयं को ढालते रहना चाहिए।

बैठक में सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित प्रगति, प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों एवं विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।