परिवारवाद और परिवारवादी पार्टियां, देश के लोकतंत्र और देश के युवा, दोनों की सबसे बड़ी दुश्मन हैं: पीएम मोदी
भाजपा ने पिछले 8 सालों में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ देश की सेवा की है: पीएम मोदी
21वीं सदी का नया भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के सपनों को लेकर आगे बढ़ रहा है: हैदराबाद में पीएम मोदी


पट्टुदलकी पौरुषानिकी मारुपेरैन तेलंगाणा प्रजलकु नमस्कारमुलु
(दृढ़ संकल्प एवं पौरुष के लिए ख्यात तेलंगाना की जनता को मेरा नमष्कार।)

इतनी बड़ी संख्या में आप सब एयरपोर्ट पर आए हैं।

आपका ये प्यार, तेलंगाना का ये स्नेह, ये मेरी बहुत बड़ी ताकत है।

मैं जब भी तेलंगाना आता हूँ, मुझे लगता है कि तेलंगाना के स्नेह का ऋण मेरे ऊपर और ज्यादा बढ़ गया है।

मैं आप सबका इस अपनेपन के लिए धन्यवाद देता हूँ, आभार व्यक्त करता हूँ।

विशेष रूप से भाजपा कार्यकर्ता के रूप में आप जो श्रम कर रहे हैं;

आप जिस तरह गर्मी, धूप और हर मौसम में पसीना बहा रहे हैं;

तमाम चुनौतियों के साथ साथ जिस तरह आप अत्याचार और शोषण के खिलाफ जूझ रहे हैं उसे पूरा देश देख रहा है।

हमारे जिन कार्यकर्ताओं ने तेलंगाना की सेवा और विकास के संकल्प के साथ अपना बलिदान दिया है, मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।


साथियों,

भारतीय जनता पार्टी का एक एक कार्यकर्ता सरदार पटेल के पदचिन्हों में आस्था रखता है।

हमारे लिए भारत की एकता और अखंडता सर्वोपरि है।

हमारे लिए माँ भारती की सेवा सर्वोपरि है।

भारत को तोड़ने का मंसूबा रखने वाले, जुल्म की बदौलत तेलंगाना पर हुकूमत का सपना देखने वाले आज़ादी के समय भी थे।

लेकिन वो सोच न तब कामयाब हुई थी, न आज कामयाब होगी।

भाजपा की लड़ाई इसी सोच के खिलाफ है।

वो तेलंगाना को तुष्टीकरण का हब बनाने में लगे हैं।

हम तेलंगाना को टेक्नोलॉजी का हब बनाना चाहते हैं।

वो तेलंगाना को परिवारवाद के जरिए चलाना चाहते हैं।

हम 21वीं सदी की सोच के साथ तेलंगाना को विकास की ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं।

साथियों,

दशकों तक चले तेलंगाना आंदोलन में हजारों लोगों ने अपना बलिदान दिया था।

ये बलिदान तेलंगाना के भविष्य़ के लिए थे।

ये बलिदान, तेलंगाना की आन-बान-शान के लिए था।

तेलंगाना आंदोलन इसलिए नहीं चला था कि कोई एक परिवार तेलंगाना के विकास के सपनों को लगातार कुचलता रहे।

तेलंगाना आंदोलन इसलिए नहीं चला था कि कोई एक परिवार साम-दाम-दंड-भेद ये रास्ता अपना करके तेलंगाना को तबाह करने में नई-नई साजिश करते रहें।

साथियों,

परिवारवादी पार्टियां भारत की केवल एक सियासी समस्या नहीं हैं।

परिवारवाद और परिवारवादी पार्टियां, देश के लोकतंत्र और देश के युवा, दोनों की सबसे बड़ी दुश्मन हैं।

देश ने देखा है, तेलंगाना के लोग देख रहे हैं कि एक परिवार को समर्पित पार्टियां जब सत्ता में आती हैं तो कैसे उस परिवार के सदस्य भ्रष्टाचार, उसका सबसे बड़ा चेहरा बन जाते हैं।

तेलंगाना के लोग देख रहे हैं कि परिवारवादी पार्टियां किस तरह सिर्फ अपना विकास करती हैं, अपने परिवार के सदस्यों की तिजोरियां भरती हैं।

इन परिवारवादी पार्टियों को गरीब के दर्द की, गरीब की तकलीफों की, न उनको कोई चिंता नहीं होती है, न परवाह होती है।

इनकी राजनीति सिर्फ इस बात पर केंद्रित होती है कि एक परिवार लगातार किसी भी तरह सत्ता पर कब्जा करके लूट सके तो लूटता रहे।

इसके लिए, ये लोग समाज को बांटने की साजिशें रचतें हैं, जनता के विकास में उनकी कोई रूची नहीं होती है। पिछड़ेपन, समाज पीछे रहे उसी में उनका भला देखते हैं।

साथियों,

परिवारवाद की वजह से देश के युवाओं को, देश की प्रतिभाओं को राजनीति में आने का अवसर भी नहीं मिलता।

परिवारवाद उनके हर सपनों को कुचलता है, उनके लिए हर दरवाजे बंद करता है।

इसलिए, आज 21वीं सदी के भारत के लिए परिवारवाद से मुक्ति, परिवारवादी पार्टियों से मुक्ति एक संकल्प भी है, और एक नैतिक आंदोलन भी है।

जहां जहां परिवारवादी पार्टियां हटी हैं, वहां वहां विकास के रास्ते भी खुले हैं।

अब इस अभियान को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी तेलंगाना के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों की है, तेलंगाना की जनता की है।


साथियों,

एक ओर भाजपा की लड़ाई तेलंगाना के भविष्य के लिए है, तो दूसरी ओर ये लड़ाई तेलंगाना के सम्मान, स्वाभिमान और पहचान की भी है।

और, यहाँ एयरपोर्ट से बाहर आते ही तेलंगाना की जो हवा मैं महसूस कर रहा हूं, ये जो मैं दृश्य देख रहा हूं, ये तपती धूप में आपलोगों का उमंग देखता हूं, मैं इसके आधार पर कह सकता हूं कि हमारा संघर्ष रंग ला रहा है।

पिछले दिनों अलग-अलग चुनावों में भाजपा की जीत इस बात का स्पष्ट संकेत है कि तेलंगाना में अब लोगों ने मन बना लिया है। तेलंगाना में अब बदलाव पक्का है। तेलंगाना में अब भाजपा तय है।


साथियों,

भाजपा ने पिछले 8 सालों में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ देश की निरंतर सेवा की है।

गरीब, पिछड़ा, दलित, आदिवासी, हमारी माताएं-बहनें, हमारे अंत्योदय के सारे साथी, भारतीय जनता पार्टी के लिए उनका उत्कर्ष ये हमारी आस्था है।

देश का सम्मान देश के गरीब, मजदूर और किसान के सम्मान से जुड़ा है।

आज गरीब से गरीब व्यक्ति भी सपने देख सकता है, स्वाभिमान से जीवन जीने का प्रयास कर सकता है।

हमने हर गरीब को शौचालय देने का वायदा किया, उसे पूरा किया।

हमने गरीबों को देश की आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प लिया, जनधन योजना खातों के जरिए उसे पूरा किया।

हमने गरीब माताओं बहनों को धुएं से आजादी देने की बात कही, उनके नाम पर उन्हें पक्का घर देने की बात कही।

पूरे देश में आज करोड़ों गरीबों का ये सपना साकार हो रहा है।

आज किसानों को उनके खातों में और खास कर मेरे छोटे किसान भाई-बहनों को सम्मान निधि मिल कर, उन्हें एक नई ताकत मिल रही है।

मुद्रा योजना और स्वनिधि योजना जैसे प्रयासों से लाखों करोड़ों युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बन रहे हैं।

तेलंगाना के गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी और महिलाओं को भी इन योजनाओं के लाभ का पूरा अधिकार है।

लेकिन दुर्भाग्य से यहां इन योजनाओं के नाम बदलकर इन पर भी सियासत हो रही है।

आप सियासत करिए, जनता के दिलों से न नाम हमारा हटा सकते हैं, न हमारा नाम मिटा सकते हैं। क्योंकि हम गरीबों के लिए जीने वाले लोग हैं, जी जान से गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित लोगों की हमारी परंपरा है।

साथियों,

जब योजनाएं प्रचार और परिवार के भ्रष्टाचार का शिकार होने लगें तो उससे सबसे ज्यादा नुकसान हमारे गरीब का होता है। हमारे दलित, पीड़ित, शोषित और वंचित का होता है।

भाजपा के कार्यकर्ताओं का दायित्व है कि इस सच्चाई को तेलंगाना के हर एक नागरिक तक लेकर जाएं।

भाइयों और बहनों,

हम सब जानते हैं कि तेलंगाना का सामर्थ्य क्या है, यहां कितनी संभावनाएं हैं!

हम चाहते हैं कि तेलंगाना तेजी से विकास की रफ्तार पकड़े।

साथियों,

21वीं सदी का नया भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के सपनों को लेकर आगे बढ़ रहा है।

हमारे स्टार्टअप्स आज पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ रहे हैं।

आज हम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप ecosystem हैं।

अभी कुछ दिन पहले ही, भारत का सौंवां यूनिकॉर्न हमारे सामने आया है।

आज हम एक बार फिर से दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं में एक हैं।

हमारी इस ग्रोथ स्टोरी में सबसे बड़ी भूमिका टेक्नोलॉजी की है, टेक्नोलॉजी को नेतृत्व दे रहे हैं हमारे युवा-नौजवान साथी।

और, बात जब टेक्नोलॉजी की होती है तो तेलंगाना और तेलंगाना के युवाओं की क्षमताओं के बिना ये बात पूरी नहीं होती।

इस क्षमता के पूरे इस्तेमाल के लिए तेलंगाना को एक progressive और ईमानदार सरकार की जरूरत है।

ये सरकार केवल भाजपा ही दे सकती है।

साथियों,

आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के इस युग में, मैं तेलंगाना के लोगों को एक और बात से सतर्क करना चाहता हूं।

आज के इस युग में अभी भी, 21वीं सदी में भी जो लोग अंधविश्वास के गुलाम बने हुए हैं, वो अपने अंधविश्वास में किसी का भी नुकसान कर सकते हैं।

ये अंधविश्वासी लोग तेलंगाना के सामर्थ्य के साथ कभी न्याय नहीं कर सकते।

साथियों,

मुझे याद है जब मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था, तो वहां भी कुछ शहरों की पहचान बना दी गई थी कि उस शहर में कोई मुख्यमंत्री जा नहीं सकता है। अगर वहां जाएगा तो उसकी कुर्सी चली जाएगी।

भाइयों-बहनों,

मैं डंके की चोट पर वहीं पर जाता था, बार-बार जाता था। मैं विज्ञान में विश्वास करता हूं, मैं टेक्नोलॉजी में विश्वास करता हूं।

भाइयों-बहनों,

मैं तो आज तेलंगाना की इस धरती से उत्तर प्रदेश के हमारे मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी को भी बधाई देता हूं। वो तो संत परंपरा से हैं, सन्यासी परंपरा से हैं। उनके कपड़े और भेषभूषा देखकर के कोई भी बात मान लेगा। जब उनके सामने आया कि फलानी जगह पर नहीं जाना है, ढिकानी जगह पर नहीं जाना चाहिए। योगी जी ने कहा, मैं विज्ञान में विश्वास करता हूं, वे चले गए और दोबारा जीतकर मुख्यमंत्री बने। अंधविश्वास को इस प्रकार से तवज्जो देने वाले लोग, उसके भविष्य को कभी संवार नहीं सकते हैं।

भाइयों-बहनों,

ऐसे अंधविश्वासी लोगों से हमारे तेलंगाना को हमें बचाना है। मैं आप सभी भाजपा कार्यकर्ताओं से कहूंगा- हमें पूरी मेहनत करनी है।

हमें तेलंगाना की जनता की सेवा में कोई कोर कसर नहीं छोड़नी है।

मुझे पूरा विश्वास है कि भाजपा का हर एक कार्यकर्ता इसी उत्साह और समर्पण के साथ आगे भी काम करता रहेगा।

तेलंगाना तेजी से विकास के रास्ते पर चलेगा,

तुष्टिकरण की राजनीति से मुक्त होगा,

परिवारवादी पार्टी के चंगुल से मुक्त होगा,

भाइयों-बहनों, मैं 2013 उस समय भूल नहीं सकता, मैं तो गुजरात का कार्यकर्ता था, पूरा देश न मुझे जानता था, लेकिन हैदराबाद ने एक ऐसा इतिहास रचा था। जिसने पूरे हिंदुस्तान की सोच में परिवर्तन लाया था। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं, हिंदुस्तान के सार्वजनिक जीवन में वो पहली घटना थी और हैदराबाद तेलंगाना के लोगों ने करके दिखाया था। जब मैं हैदराबाद आया तो मेरा भाषण सुनने के लिए टिकट रखी गई थी। पैसे देकर आइए सुनने के लिए और मैं देख रहा था, तेलंगाना के लोगों ने टिकट खर्च करके इतनी प्रेम वर्षा की थी, इतनी प्रेम वर्षा की थी, और वही एक टर्निंग प्वाइंट था कि आज मुझे देश की सेवा करने का मौका मिला है। यही हैदराबाद, यही तेलंगाना अब नया इतिहास बना करके तेलंगाना में झंडा गाड़ने वाला है।

साथियों,
मैं आपके परिश्रम की जितनी तारीफ करूं उतनी कम है। आपके जज्बे की जितनी तारीफ करूं उतनी कम है। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है, न आप झुकने वाले हैं। न आप थकने वाले हैं। आप जूझने वाले भी हैं, जीतने वाले भी हैं।

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प्रधानमंत्री ने PRAGATI की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की
May 27, 2026
प्रधानमंत्री ने रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़ी सात अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा में शामिल कुल 30,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली परियोजनाएं 9 राज्यों में फैली हुई हैं
प्रधानमंत्री ने केन-बेतवा लिंक परियोजना और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की भी समीक्षा की
प्रधानमंत्री ने कहा-केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को दूसरे राज्यों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करना चाहिए, ताकि वे राज्यों के बीच पानी से जुड़े मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझा सकें
प्रधानमंत्री ने राज्यों से ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और गोबरधन संयंत्र शामिल हैं
प्रधानमंत्री ने शहरी इलाकों में मिशन-मोड पर रूफटॉप सोलर कवरेज बढ़ाने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री की सलाह पर अमल करते हुए, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसकी शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा से हुई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को सहज रूप से एकीकृत करके 'सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज सुबह 'सेवा तीर्थ' में प्रगति (PRAGATI) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। प्रगति एक आईसीटी-सक्षम, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म है।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने कुल लगभग ₹30,000 करोड़ की लागत वाली रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़े सात महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं। आर्थिक विकास और जन कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समय-सीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और मुद्दों के समय पर समाधान पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए की गई। प्रधानमंत्री ने 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' और 'स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0' की भी समीक्षा की।

बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर को अपनाने की गति तेज करने की जरूरत पर जोर दिया, जिसमें शहरों, आवासीय समूहों और सार्वजनिक संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली की लागत कम करने, ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने और घरों व समुदायों के स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में चलाया जाना चाहिए।

सड़क और बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, इस बात पर जोर दिया गया कि वधावन बंदरगाह को 'बंदरगाह-आधारित, बहु-माध्यम विकास' के एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां एक भविष्य के लिए तैयार लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से परिवहन के हर प्रमुख माध्यम को इस तरह से जोड़ा जाए। इस परियोजना को केवल एक बंदरगाह के रूप में नहीं, बल्कि एक 'राष्ट्रीय प्रवेश द्वार' के रूप में देखा जाना चाहिए, जो तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्गों, समर्पित माल ढुलाई गलियारों, हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी, राजमार्गों और हवाई अड्डों से जुड़ा हो।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया और इस बात को रेखांकित किया कि इस मिशन को केवल बुनियादी ढांचा तैयार करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नियमित निगरानी, ​​नागरिकों की भागीदारी और विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल के माध्यम से इसके ठोस परिणाम भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने राज्यों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित बुनियादी ढांचे, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और 'गोबर-धन' (GOBARdhan) संयंत्र शामिल हैं, के निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना को अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श के रूप में काम करना चाहिए, ताकि वे भी आपसी सहयोग, समय पर मंज़ूरी, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और 'मिशन-मोड' में काम करके राज्यों के बीच जल-संबंधी विवादों को सुलझा सकें। राज्यों को ऐसे ही अन्य अवसरों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जहां नदी जोड़ो, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और कुशल सिंचाई जैसे कार्यों को एक एकीकृत तरीके से अपनाया जा सके, ताकि भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सार्वजनिक परियोजनाओं को लागू करने में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि नागरिकों को जरूरी सुविधाओं और विकास के लाभों तक समय पर पहुंचने से भी वंचित होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर देरी का लोगों के जीवन, क्षेत्रीय विकास और सार्वजनिक संसाधनों पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को लंबित मुद्दों को सुलझाने, रुकावटों को दूर करने और काम को तेजी से पूरा करने के लिए ज्यादा सक्रिय और समय-सीमा के भीतर काम करने का तरीका अपनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि नहर नेटवर्क का नए तरीकों से इस्तेमाल करने के तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए, जिसमें साफ बिजली बनाने के लिए नहरों के किनारे और उनके ऊपर सोलर पैनल लगाना भी शामिल है। इससे जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने, वाष्पीकरण से होने वाले नुकसान को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा बनाने और जल बुनियादी ढांचे से अतिरिक्त आर्थिक लाभ पैदा करने में मदद मिलेगी।

बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की एक प्रणाली भी शुरू कर दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्य और जिला स्तरों पर नियमित निगरानी, ​​कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों का त्वरित समाधान और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस पहल के एक हिस्से के रूप में, सबसे पहले राज्य स्तर पर समीक्षा के लिए 'स्वच्छ भारत मिशन' को चुना गया है।