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कई लोगों के लिए परिवार ही पार्टी है, भाजपा के लिए पार्टी ही परिवार है: प्रधानमंत्री मोदी
भाजपा किसी एक व्यक्ति या एक परिवार की इच्छा के अनुसार निर्णय नहीं लेती: पीएम मोदी
जिन्होंने 10% आरक्षण के पक्ष में आधे-अधूरे मन से वोट दिया है, वे अब अदालतों का दरवाजा खटखटा रहे हैं: प्रधानमंत्री

नमस्कार,
भारत माता की...जय। भारत माता की...जय। भारत माता की...जय।

बारामती, गढ़चिरौली, हिंगोली, नांदेड़, नंदूरबार... सर्वकार्यकर्त्यांना माझा प्रेमपूर्वक नमस्कार। ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ इस मंत्र के साथ हम सब कार्यकर्ता आज संवाद कर रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आज का हमारा यह संवाद हम सबको अपने- अपने बूथ को मजबूत बनाने की प्रेरणा देगा। एक रोडमैप बनाकर बूथ के एक- एक परिवार से संपर्क के अपने संकल्प को मजबूती देगा। आइए, सबसे पहले चलते हैं बारामती।

कार्यकर्ता – नमस्कार
पीएम मोदी - नमस्कार

कार्यकर्ता - महाराष्ट्र के आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज के पदस्पर्श से पावन, संत श्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज, तुकाराम महाराज के पदस्पर्श से पावन ये पुण्यनगरी, बारामती लोकसभा चुनाव क्षेत्र से मैं दत्तात्रेय वसंत चौधरी प्रधानमंत्री से ये सवाल पूछना चाहता हूं कि बीजेपी और बाकी पार्टी में आप क्या अंतर देखते हैं। और दूसरा सवाल ये रहेगा कि हम किस तरह से लोगों के बीच में ये बात पहुंचाएं कि क्यों बीजेपी ही देश की आशा और आकांक्षा पर खरी उतर सकती है? धन्यवाद।

पीएम मोदी – दत्तात्रेय जी, ये बूथ के कार्यकर्ता हैं और कार्यकर्ता के संबंध में बात हो रही है तो मैं सबसे पहले शुरुआत करूंगा...देखिए, भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है, कार्यकर्ताओं द्वारा बनाई गई पार्टी है और देश के लिए समर्पित पार्टी है। पार्टी में कार्यकर्ताओं की आवाज और अर्ज उसी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अगर कोई पार्टी ऐसी है जो वास्तव में पूरी तरह से लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन करती है तो वह भारतीय जनता पार्टी है। लोकतंत्र हमारी रगों में है, हमारे संस्कारों में है और यही कारण है कि देश की जनता हमसे एक स्वाभाविक जुड़ाव महसूस करती है।

हमारी पार्टी में कोई भी निर्णय इस बात से नहीं होते हैं कि एक व्यक्ति या एक परिवार की इस विषय में क्या इच्छा है या क्या चाहता है, बल्कि हमारे यहां निर्णय इस बात से होते हैं कार्यकर्ता क्या चाहता है। और इसलिए कहा जाता है कि देश में ज्यादातर cases में परिवार ही पार्टी है लेकिन भाजपा में पार्टी ही हमारा परिवार है। देश में ज्यादातर पॉलिटिकल लीडर्स कांग्रेस गोत्र के हैं यानि वो कांग्रेस संस्कृति में ही पले-बढ़े हैं, संस्कारित हुए हैं। जब मैं कांग्रेसमुक्त भारत की बात करता हूं तो उसका मतलब यही है कि हम भारतीय राजनीति में से कांग्रेस कल्चर को खत्म करना चाहते हैं। जब मैं ये बात करता हूं तब मैं जरा बारामती के कार्यकर्ताओं से पूछना चाहता हूं...क्योंकि यहां पर कांग्रेस कल्चर किसी न किसी रूप में बहुत नीचे तक पहुंचा हुआ है... और इसलिए आपको भलीभांति पता है कि कांग्रेस कल्चर क्या होता है...लेकिन मैं बारामती के लोगों से सुनना चाहूंगा कि बताइए आपके हिसाब से कांग्रेस कल्चर का मतलब क्या है। बताएंगे बारामती के कोई? कोई बोलेंगे क्या? आपकी आवाज मुझे नहीं सुनाई दे रही है।

कार्यकर्ता - प्रधानमंत्री जी, पुणे जिले में बारामती लोकसभा क्षेत्र, आज तक इस क्षेत्र का जिन्होंने नेतृत्व किया है, यहां पे जातिवाद, पारिवारिक भ्रष्टाचार, ये इनका मकसद है और आज तक इन्होंने यही किया है। आपके माध्यम से ये खत्म हो रहा है, इसलिए ये सब एकजुट हो रहे हैं। और आपके खिलाफ, बीजेपी के खिलाफ ये एकजुट हुए हैं फिर भी आपको और भारतीय जनता पार्टी को कोई रोक नहीं सकता।

पीएम मोदी - अब आप देखिए, हममें से हर एक जानता है कि कांग्रेस कल्चर का मतलब है...कैसी-कैसी बुराइयों से भरा हुआ है। अगर इनमें से एक बुराई हमारे में आती है इसका मतलब कांग्रेस हमारे अंदर भी घुस रही है। आप सब लोग बारामती से हैं। सब जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने वहां के सर्वोच्च नेता के साथ कैसा-कैसा व्यवहार किया। मैं व्यक्तिगत रूप से उनका सम्मान करता हूं। उन्होंने कई वर्षों तक सार्वजनिक जीवन में रहते हुए जनता के लिए काम किया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होते हुए उनके साथ कांग्रेस ने बहुत ही अपमानजनक व्यवहार किया। हम भी गुजरात में थे, सुना करते थे...सही-गलत क्या था ये तो भगवान जाने...पर कहते हैं कि उनकी गलती सिर्फ इतनी सी थी कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए अपनी दावेदारी पेश की। सिर्फ इस बात के लिए उन्हें रातोंरात पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। ऐसा सिर्फ परिवारवादी पार्टी में हो सकता है। और सबसे मजेदार बात यही है कि वही पवार साहब जिनका कांग्रेस ने अपमान किया था, एक बार फिर से वे कांग्रेस के पाले में चले गए।

हमारी पार्टी वह है जो भारत के लोकतंत्र की सुरक्षा में हमेशा सबसे आगे रही है। आपातकाल का विरोध करने में हमारे लाखों कार्यकर्ता सबसे आगे थे। आज भी हमारे बहुत सारे कार्यकर्ता राजनीतिक हिंसा के शिकार हो रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी हमारे कार्यकर्ता लोगों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। अब आप देखिए कि पश्चिम बंगाल में वहां की सरकार ने लोकतांत्रिक तरीकों से चुनाव नहीं होने दिए क्योंकि वो जानते थे कि अगर स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव होते तो उन्हें बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ता। वे तानाशाही के रास्ते पर चलते रहे लेकिन हम लोकशाही के लिए प्रतिबद्ध हैं और हमेशा उसी रास्ते पर चलेंगे।

आइए, अब चलते हैं गढ़चिरौली ।

पीएम मोदी – गढ़चिरौली नमस्कार।

कार्यकर्ता – नमस्कार मोदी जी। मैं नरेंद्र कुमार। मेरा आपसे एक सवाल है। सर आपकी सरकार आने के बाद माओवाद और नक्सलवाद का खौफ हमारे क्षेत्र में कम हो गया लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि मीडिया इसकी बिल्कुल चर्चा ही नहीं करता। हमारे कार्यकर्ता भी इस बारे में ज्यादा बात नहीं करते। आप इसे कैसे देखते हैं सर जी। नमस्कार।

पीएम मोदी – मुझे अच्छा लगा कि हमारे कार्यकर्ता देश में क्या हो और कैसे बदलाव आ रहा है उसे अच्छी तरह पहचान रहे हैं। एक समय था जब पूर्व प्रधानमंत्री ने खुद कहा था कि माओवाद देश पर हावी हो रहा है। और आज आपने सही कहा है कि देश भर में नक्सलवाद-माओवाद का खौफ कम हो रहा है। देखिए, कोई भी क्षेत्र स्वयं को माओवाद प्रभावित इलाका कहलाना पसंद नहीं करता है। स्थानीय लोगों की मानसिकता पर इसका बहुत ही विपरीत प्रभाव पड़ता है। लेकिन आपको यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता होगी कि आज माओवाद पीछे चला गया है, डरता है, भाग रहा है और विकासवाद आगे आ बढ़ रहा है। हिम्मत के साथ, योजना के साथ आगे बढ़ रहा है।

माओवादी अपनी हिंसा के मार्ग से लोगों को विकास से वंचित रखने का काम करते, फिर चाहे वो सड़क हो, स्कूल हो या बिजली हो। हमने ना सिर्फ इनकी हिंसा को उनकी ही भाषा में मुंहतोड़ जवाब दिया बल्कि लोगों को विकास से वंचित रखने के उनके मंसूबों को भी नाकाम कर दिया। इन क्षेत्रों के गरीब लोगों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक सशक्तिकरण पर लगातार बल दिया जा रहा है। और जब भी माओवादियों के खिलाफ लड़ाई की बात उठती है तो मैं सबसे पहले अपने सुरक्षा बल के बहादुर जवानों को नमन करता हूं क्योंकि जनता-जनार्दन की शांति और कुशलता बरकरार रखने के लिए वे सदा ही चौकन्ने रहते हैं। उनके साहसिक प्रयासों और हमारी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के चलते पिछले चार-साढ़े चार वर्षों में माओवादी हिंसा में आई गिरावट को देखकर आज हर भारतीय के मन में एक नया विश्वास, नई आशा पैदा हुई है।

भौगोलिक तौर पर भी माओवादी हिंसा का प्रभाव काफी हद तक कम हो गया है। माओवाद प्रभावित जिलों की संख्या अब पहले के 126 से घटकर सिर्फ 90 रह गई है। इतना ही नहीं पहले के 36 सबसे प्रभावित यानि खूंखार माने जाते थे, वो भी अब घटकर के 30 पर आए हैं। माओवाद प्रभावित जिलों में करीब साढ़े चार हजार किलोमीटर से अधिक सड़क का निर्माण किया जा चुका है। पहले शायद कोई सोच सकता था कि इन इलाकों में भी इस स्केल और स्पीड से काम हो सकता है।

कनेक्टिविटी का दायरा बढ़ाने के लिए करीब 2,400 मोबाइल टॉवर्स स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा चार हजार और टॉवर्स स्थापित करने को मंजूरी दी जा चुकी है। जब हमने कार्यभार संभाला था तब माओवादी हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से 11 में एक भी केंद्रीय विद्यालय नहीं था, वहां आज आठ नए केंद्रीय विद्यालय और पांच नए जवाहर नवोदय विद्यालय बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन दे रहे हैं। माओवाद से प्रभावित इलाकों में बैंकों की पहुंच सीमित थी। माओवादी हिंसा से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में बड़ी संख्या में बैंकों के ब्रांच और एटीएम खोलने की पहल की गई है। आज देश देख रहा है कि माओवाद को हराने की हमारी जो व्यूह रचना है वो कामयाब हो रही है।
आइए, गढ़चिरौली से हम चलते हैं हिंगोली की तरफ।

पीएम मोदी – हिंगोली नमस्ते।

कार्यकर्ता – प्रधानमंत्री जी मेरा आपको नमस्कार।
पीएम मोदी – नमस्कार।
जगदेव राव पवार (बूथ प्रमुख, हिंगोली) – सर, मेरा प्रश्न है...पिछले चार सालों में आम नागरिकों का रिश्ता बदला है। कई सरकारी प्रक्रिया सरल हुई है। आप भी ईज ऑफ लिविंग के बारे में बात करते हैं। नागरिकों के लिए इसका क्या अर्थ है?

पीएम मोदी – जगदेव राव नमस्कार। ऐसा कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि किसी परियोजना का फीता काटना और फिर उसे अपने भाग्य पर छोड़ देना, ये हमारे सिस्टम का एक हिस्सा ही बन गया था। एक तरीके से कहा जाए तो पीपल फ्रेंडली व्यवस्था के निर्माण से लोगों के जीवन को आसान बनाना ईज ऑफ लिविंग है। एक ऐसी व्यवस्था जिसमें ‘पीपल फर्स्ट’ के नजरिए से हर प्रोसेस डिजाइन है। सामान्य व्यक्ति को केंद्र में रखते हुए नीतियों का निर्माण हो और ऐसे निर्णय लिए जाएं जिनसे लोगों के जीवन में आसानी आए, यही ईज ऑफ लिविंग है। मैंने लोगों को सरकारों से जद्दोजहद करते हुए बहुत करीब से देखा है। छोटी-छोटी चीजों को सरकार से करवाने के लिए परेशान होते हुए देखा है।

हमने आने के बाद चार प्रिंसिपल काम करना शुरू किया। एक, जितनी चीजों को नागरिकों के विश्वास पर छोड़ा सकता है, सरकार उसमें से निकल जाए। टेक्नोलॉजी की मदद से जहां-जहां ह्यूमन इंटरवेंशन खत्म कर सकते हैं, वहां करना...सिटिजन सेंट्रिक सर्विसेस से संबंधित इन्फ्रास्ट्रक्चर का छोटे शहरों और गांवों तक में विस्तार करना...पूरे गवर्नेंस के तंत्र को जनता के प्रति संवेदनशील बनाना, जवाबदेह बनाना। अपने डॉक्यूमेंट्स को एटेस्ट कराने के लिए कितने चक्कर काटने पड़ते थे। देश के नागरिकों पर अविश्वास का एक माहौल था। और इसलिए हमने आने के कुछ हफ्तों के भीतर ही इस नियम को समाप्त कर दिया। सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त बना दिया। आज सिस्टम मान्य लोगों पर विश्वास करता है।

इसके कई उदाहरण आप देख सकते हैं। ट्रेनों में अब यात्रा करने के लिए ई-टिकट खरीदना पर्याप्त है। जब कोई पुलिसवाला आपसे ड्राइविंग लाइसेंस, ऑटो इंश्योरेंस या कोई अन्य दस्तावेज दिखाने को कहता है तो अब आप उसे अपने मोबाइल में रखे डॉक्यूमेंट्स की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी भी दिखा सकते हैं। डॉक्यूमेंट्स को साथ में लेकर घूमने की जरूरत नहीं है। हम अपने साथ-साथ प्रक्रियाओं को भी 21वीं सदी की तरफ लेकर जा रहे हैं। हमारे बुजुर्गों को पेंशन पाने के लिए, अपने जीवित होने का प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए धक्के खाने पड़ते थे वो सब कम हो गया। अब उन्हें जीवन प्रमाण पोर्टल पर आधार लिंक्ड डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है।

अब अधिकांश प्रक्रिया हमने ऑनलाइन कर दी है जो सरल भी है और संवेदनशील भी है। अब स्कॉलरशिप का लाभ लेने के लिए छात्रों को किसी को खर्चा पानी देने की आवश्यकता तो नहीं है। ऑनलाइन अप्लाई और डीबीटी से स्कॉलरशिप सीधे बैंक खाते में जमा हो जाती है। आपको याद होगा कि पहले गैस कनेक्शन हो या बिजली कनेक्शन...काफी दिन लग जाते थे। अब ये काम ऑनलाइन बहुत कम समय में हो रहा है। आपमें से कई लोगों ने इसको स्वयं अनुभव किया होगा कि अब इनकम टैक्स रिफंड्स कुछ ही दिनों में मिल जाते हैं, जहां पहले महीने लग जाते थे। और अब तो हम एक दिन में इनकम टैक्स रिफंड मिले, उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

भीम ऐप के माध्यम से डिजिटल लेनदेन को बहुत ही सरल बना दिया गया है। इसी तरह से यदि आप उमंग ऐप डाउनलोड करते हैं तो 300 से अधिक सरकारी सर्विस आपको अपने मोबाइल पर मिल जाती है। आपको याद होगा कि पहले पासपोर्ट बनवाना भी एक प्रकार से चुनौतीपूर्ण कार्य हुआ करता था, क्योंकि उस वक्त देश में बहुत कम पासपोर्ट केंद्र हुआ करते थे। मैं खुद ऐसे लोगों को जानता हूं जो दूसरे शहरों में सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करते थे और कुछ दिनों के लिए किसी और के घर में रहते थे क्योंकि उनके शहर में पासपोर्ट कार्यालय ही नहीं था। ऐसा क्यों है कि आजादी के 60 साल बाद भी देश में केवल 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे। केवल साढ़े चार वर्ष में ही हमने उस संख्या को 77 से 300 के पार पहुंचा दिया है। गांव-गांव तक कॉमन सर्विस सेंटर्स के माध्यम से सरकारी सेवाओं को पहुंचाने का काम भी बहुत बड़े स्तर पर किया गया है। आज देश में ढाई लाख से ज्यादा CSCs काम कर रहे हैं। इसी तरह का एक और कदम है जो मैंने उठाया...और वो है सरकारी नौकरियों के लिए interviews का समाप्त होना। एक तरह से कहा जाए तो इंटरव्यू से भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा था। हमने इसे समाप्त कर दिया। अब योग्यता के आधार पर ही नौकरियां दी जाती हैं।

चलिए अब नांदेड़ की तरफ चलना है साथियो।

पीएम मोदी – नांदेड़ नमस्कार।

कार्यकर्ता – नमस्कार। नमस्कार। नमस्कार।

पीएम मोदी - नांदेड़ सचखंड श्री हजूर साहब की भूमि है। नांदेड़ वही पुण्यभूमि है जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी शहीद हुए थे। मैं श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को नमन करता हूं। और अब आप अपनी बात शुरू कीजिए।

कार्यकर्ता – नमस्कार। मैं साइलू लालू मुत्तनवार, महाराष्ट्र नांदेड़ लोकसभा क्षेत्र से हूं। मेरा बूथ क्रमांक 108 है। सर जी मैं आपसे एक प्रश्न पूछता हूं। सर आप कांग्रेस के अटकने, लटकने और भटकने की बात काफी करते हैं। आप बताते हैं कि हमारी सरकार ने बहुत सी लंबित परियोजनाओं को पूरा कर लिया है। आप इसका कुछ उदहरण दे सकते हैं कि हमने किन-किन लंबित योजनाओं को पूरा किया है। धन्यवाद।

पीएएम मोदी – देखिए पिछले साढ़े चार वर्षों में आपने देखा होगा कि सरकार के काम करने के तरीके में पूरी तरह से बदलाव आया है। अब परियोजनाएं न केवल शुरू होती हैं बल्कि समयबद्ध तरीके से पूरी भी होती हैं। जो योजनाएं हमने शुरू की हैं उन्हें तो हम पूरा करते ही हैं पर जो पहले से लटकी चली आ रही हैं उनको भी हम पूरा कर रहे हैं। चार दशकों से हमारे सैनिक वन रैंक वन पेंशन-OROP की मांग कर रहे थे। आप सोच सकते हैं, चार दशकों तक ये मामला ऐसे ही लटका रहा...फाइलों में बंद पड़ा रहा। हमने इस मसले को सुलझाया और OROP के सपने को साकार किया।

असम के लोग दशकों से बोगीबील ब्रिज का इंतजार कर रहे थे। आप सोच सकते हैं, देशवासियों को एक पुल के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ा। हमने चार साल के भीतर ही असम के लोगों को बीगीबील ब्रिज दे दिया। असम की गैसक्रैकर परियोजना जो पूर्वोत्तर में सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक थी...आप सोचिए, तीन दशक पहले इसकी कल्पना की गई थी। इतना समय बीत गया लेकिन इसका काम पूरा नहीं हो सका था। लेकिन हमने इस परियोजना को पूरा करने का बीड़ा उठाया और 2016 में इसका काम पूरा भी कर लिया।

हरियाणा के लोगों ने लगभग एक दशक तक कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे का इंतजार किया और हमने चार साल के भीतर इसका काम पूरा किया। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए दशकों से प्लानिंग ही चल रही थी, काम कुछ नहीं हो रहा था और हमने उसको भी पूरा किया। जबसे हमारी सरकार आई है, हमने फर्टिलाइजर के आयात पर निर्भरता को दूर करने के लिए कई फर्टिलाइजर प्लांट्स को फिर से शुरू किया है।

देश के 18 हजार गांव आजादी से अंधकार में जी रहे थे, उन्हें अंधकार में से बाहर निकालने का सौभाग्य हमें मिला। देश के करोड़ों घर आजादी से अंधकार में जी रहे थे, उन्हें अंधेरे में से बाहर निकालने का सौभाग्य भी हमें ही मिला। देश में लाखों-करोड़ों किसानों को लाभान्वित करने वाली सिंचाई योजनाएं अटकी पड़ी थीं। इन्हें शुरू कर किसानों का जीवन बेहतर बनाने का सौभाग्य हमें ही प्राप्त हुआ। आजादी से देश में पिछड़े जिलों के नाम से कई जिले छूटे पड़े थे। हमने ना सिर्फ उनका नाम बदलकर आकांक्षी जिले रखा बल्कि यह कार्यक्रम मिशन मोड में चलाया है।

अब मैं आप ही के राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं की बात करता हूं। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे एक ऐसी परियोजना है जो इन दो शहरों के बीच स्थित क्षेत्रों का रूप बदल देगी। इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर केवल 12 घंटे रह जाएगा। इसे एक लाख करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, मैन्युफैक्चरिंग के हब के तौर पर विकसित हो रहा है। पूरी दुनिया इस मैन्युफैक्चरिंग हब में स्थान पाना चाहती है। और पहले से ही ऐसे कुछ मेगा ग्रीनफील्ड प्रोजक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। मुंबई अहमदाबाद हाईस्पीड कॉरिडोर काफी बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजना है। इस परियोजना से इस क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा।

कुछ दिन पहले मुझे कल्याण में ठाणे-भिवंडी-कल्याण कॉरिडोर पर मुंबई मेट्रो लाइन-5 और दहिसर-मीरा-भायंदर मेट्रो लाइन-9 का शिलान्यास करने का अवसर मिला। सालों के इंतजार के बाद इसका काम शुरू हो चुका है। पिछले चार वर्षों में हमने मेट्रो परियोजनाओं में तेजी से काम किया है। मुंबई, पुणे, नागपुर शहरों में मेट्रो से वहां के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। मैं प्रगति के माध्यम से हर महीने परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करता हूं और परियोजनाओं में अगर कोई समस्या सामने आती है तो वहीं तुरंत के तुरंत उसका हल निकाला जाता है। बीते साढ़े चार वर्षों में प्रगति के माध्यम से 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं की समीक्षा की जा चुकी है। अब ना केवल हम अपनी परियोजनाओं की शुरुआत अच्छी तरह करते हैं बल्कि हम यह भी सुनिश्चित करते हैं कि परियोजनाएं समय पे पूरी हों।

आइए अब चलते हैं नंदूरबार।

पीएम मोदी – नंदूरबार नमस्ते।

सुनीता सुभाष शिंदे (बूथ प्रमुख, नंदूरबार) - माननीय प्रधानमंत्री जी को मेरा सादर प्रमाण। माननीय प्रधानमंत्री जी से मैं ये सवाल पूछना चाहती हूं कि गरीबों को आपने सवर्णों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है। ये ऐतिहासिक कदम आपने उठाया है। लेकिन कांग्रेस के एक नेता ने कहा है कि इस मुद्दे को मैं अदालत में चुनौती दूंगा। ऐसे गरीबों के विरुद्ध कांग्रेस का कैसे हम पर्दाफाश कर सकते हैं, इसका कृपया मार्गदर्शन करें।

पीएम मोदी – आपका प्रश्न महत्वपूर्ण है। इसके पहले कि मैं इसका जवाब दूं, पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी। साथियो, सैकड़ों वर्षों के कालखंड में हमारी सामाजिक व्यवस्था में ऐसे बदलाव हुए जिनकी वजह से कुछ वर्गों के साथ बहुत ज्यादा अन्याय होना शुरू हो गया। जाति की वजह से उनका अपमान किया गया, उनका शोषण किया गया। समय के साथ वो हर प्रकार से पिछड़ते चले गए। और इसलिए संविधान बनाते समय ये सवाल उठा तो बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की अगुआई में हमारे संविधान निर्माताओं ने ये फैसला किया कि समाज के उस शोषित और वंचित वर्ग के लिए ऐसी व्यवस्था की जाए जहां वो अवसरों के लिए दूसरे लोगों के साथ मुकाबला कर सकें। ये व्यवस्था आरक्षण थी और इसके पीछे की पूरी सोच ही अवसरों की समानता थी।

आजादी के बाद के दशकों में आरक्षण की इस व्यवस्था ने करोड़ों लोगों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार किया, उन्हें आगे बढ़ाने में मदद की। आज भी आरक्षण की ये व्यवस्था मेरे दलित, मेरे पिछड़े भाई-बहनों, मेरे आदिवासी भाई- बहनों उनको अवसरों की समानता दे रही है। संविधान द्वारा बनाई यह व्यवस्था चट्टान की तरह उनके साथ है और हमेशा रहेगी। साथियो, इस व्यवस्था को बनाए रखने के साथ ही बीते काफी समय से ये मांग भी की जा रही थी कि जो सामान्य वर्ग के गरीब हैं उन्हें भी अवसरों की समानता मिले।

उन गरीबों के साथ भी न्याय हो। जब हमारी सरकार ने संविधान संशोधन का कदम उठाया तो ये हैरान रह गए। आधे-अधूरे मन से इनको संसद में इसका समर्थन करना पड़ा। अब ये पिछले दरवाजे से सरकार के इस पवित्र काम को जिसका संसद में उनको भी समर्थन करना पड़, उस फैसले को अदालत में चुनौती देने का प्रयास कर रहे हैं। इन्होंने अपने लोग इस काम में लगा दिए हैं। गरीबों के लिए की गई इस ऐतिहासिक शुरुआत के खिलाफ ये कोर्ट में जा रहे हैं। उन्होंने खुद सकारात्मक पहले करने में तो कभी इंटरेस्ट नहीं दिखाया लेकिन नकारात्मकता का माहौल बनाने में यहां भी ये बाज नहीं आ रहे हैं।

मैं आपको ये भी बता देता हूं कि आरक्षण का जो प्रावधान किया गया है ये बिल्कुल अलग से किया गया है। पहले से जिन वर्गों को आरक्षण दिया गया है, उनके हक पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा। उल्टा हम देश में उच्च शिक्षा के सभी शिक्षण संस्थान की सीटों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर रहे हैं और ये इसी सेशन से लागू हो जाएगा। यानि अब सामान्य वर्ग के बच्चे भी आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रीमियर संस्थानों में आसानी से पहुंच पाएंगे और बाकी बच्चों की संभावनाओं पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। रही बात अफवाह की तो अफवाह फैलाने वालों का काम ही यही होता है। लेकिन अगर हम हमारी बात ज्यादा लोगों को पहुंचाते हैं तो फिर अफवाह टिकती नहीं है, अफवाह पहुंच ही नहीं सकती है। और मैं आपको स्पष्ट कर दूं...मैं चाहता हूं कि आप और इस कार्यक्रम से जुड़े मेरे लाखों कार्यकर्ता ये साफ जान लें कि ये आरक्षण किसी भी आरक्षण को खत्म करने या कम करने के लिए नहीं दिया गया है।

ये आरक्षण देश में आरक्षण की एक नई कैटेगरी है। इस आरक्षण से हर गरीब का फायदा होगा और इससे किसी का कोई नुकसान होने वाला नहीं है। ये मेरे देश के गरीबों को दिया गया आरक्षण है। मैं आपको फिर विश्वास दिलाता हूं कि दलित, पिछड़े, आदिवासी और वंचितों को जो संविधान में आरक्षण की सुविधा है, उस पर किसी तरह की कोई आंच नहीं आएगी। जब तक देश में मोदी है, किसी दलित को, आदिवासी को, ओबीसी को दिया जा रहा आरक्षण, किसी पिछड़ा को दिया जा रहा आरक्षण, किसी आदिवासी को दिया जा रहा आरक्षण कोई छीन नहीं सकता।

मैं आपको और अपने लाखों कार्यकर्ताओं को ये भी स्पष्ट कर रहा हूं कि चुनावी साल है। ऐसे में आपको सतर्क रहना है, सजग रहना है कि इस तरह की अफवाह समाज में ना फैले। मुझे विश्वास है कि विरोधी पूरी तरह से भ्रम फैलाने में जुटे हैं। सत्य के आधार पर पब्लिक के बीच में जाने का उनका हौसला ही नहीं है। उनकी जमीन कच्ची है। दलित, आदिवासी और पिछड़े बहन-भाइयों के बीच जाकर जो लोग झूठ बोलने में जुटे हैं, उनको निरुत्तर करना, उनके असली चेहरों को लोगों के सामने लाना, ये बीजेपी के आप सभी कार्यकर्ताओं का काम है। और इस प्रचार का, अपप्रचार का पूरी शक्ति से सामना करेंगे, करना है और यही बात एक-एक नागरिक तक हमें पहुंचानी है। और अभी जो कोर्ट-कचहरी के माध्यम से गरीबों के हकों पर अड़ंगा लगा रहे हैं ये बात भी उनको जाकर के बतानी है कि कांग्रेस पार्लियामेंट में तो वोट देती है लेकिन बाहर अब सुप्रीम कोर्ट में जाकर के खेल खेलना शुरू कर रही है। ‘सबका साथ सबका विकास’ की तरह यह बहुत बड़ा कदम है। इसको इसी भावना से लोगों तक हमें पहुंचाना है।

साथियो, मेरा बूथ सबसे मजबूत यह सिर्फ एक संवाद का नाम नहीं है बल्कि एक भावना है एक संकल्प है जिससे हमारी पार्टी मजबूत बनती है। मुझे पिछले दिनों में केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र के कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करने का मौका मिला है और मैंने देखा है कि कार्यकर्ता किसी भी राज्य का हो, उसकी भाषा चाहे कोई भी हो, उसके राज्य में भाजपा की सरकार हो या ना हो, उसकी भारत माता के प्रति भक्ति, देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा, सुशासन के लिए संघर्ष करने की भावना, हर जगह समान है, प्रमुख है। यही तो चीजें हैं जिससे भाजपा कार्यकर्ता की पहचान होती है। साथियो, आप सबसे बातें करना, आपके सुझाव और प्रश्न सुनना मुझे बहुत ही आनंद देता है। अगली बार फिर मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

 

 

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Text of PM’s address at the Krishnaguru Eknaam Akhand Kirtan for World Peace
February 03, 2023
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“Krishnaguru ji propagated ancient Indian traditions of knowledge, service and humanity”
“Eknaam Akhanda Kirtan is making the world familiar with the heritage and spiritual consciousness of the Northeast”
“There has been an ancient tradition of organizing such events on a period of 12 years”
“Priority for the deprived is key guiding force for us today”
“50 tourist destination will be developed through special campaign”
“Gamosa’s attraction and demand have increased in the country in last 8-9 years”
“In order to make the income of women a means of their empowerment, ‘Mahila Samman Saving Certificate’ scheme has also been started”
“The life force of the country's welfare schemes are social energy and public participation”
“Coarse grains have now been given a new identity - Shri Anna”

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय जयते परम कृष्णगुरु ईश्वर !.

कृष्णगुरू सेवाश्रम में जुटे आप सभी संतों-मनीषियों और भक्तों को मेरा सादर प्रणाम। कृष्णगुरू एकनाम अखंड कीर्तन का ये आयोजन पिछले एक महीने से चल रहा है। मुझे खुशी है कि ज्ञान, सेवा और मानवता की जिस प्राचीन भारतीय परंपरा को कृष्णगुरु जी ने आगे बढ़ाया, वो आज भी निरंतर गतिमान है। गुरूकृष्ण प्रेमानंद प्रभु जी और उनके सहयोग के आशीर्वाद से और कृष्णगुरू के भक्तों के प्रयास से इस आयोजन में वो दिव्यता साफ दिखाई दे रही है। मेरी इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर असम आकर आप सबके साथ इस कार्यक्रम में शामिल होऊं! मैंने कृष्णगुरु जी की पावन तपोस्थली पर आने का पहले भी कई बार प्रयास किया है। लेकिन शायद मेरे प्रयासों में कोई कमी रह गई कि चाहकर के भी मैं अब तक वहां नहीं आ पाया। मेरी कामना है कि कृष्णगुरु का आशीर्वाद मुझे ये अवसर दे कि मैं आने वाले समय में वहाँ आकर आप सभी को नमन करूँ, आपके दर्शन करूं।

साथियों,

कृष्णगुरु जी ने विश्व शांति के लिए हर 12 वर्ष में 1 मास के अखंड नामजप और कीर्तन का अनुष्ठान शुरू किया था। हमारे देश में तो 12 वर्ष की अवधि पर इस तरह के आयोजनों की प्राचीन परंपरा रही है। और इन आयोजनों का मुख्य भाव रहा है- कर्तव्य I ये समारोह, व्यक्ति में, समाज में, कर्तव्य बोध को पुनर्जीवित करते थे। इन आयोजनों में पूरे देश के लोग एक साथ एकत्रित होते थे। पिछले 12 वर्षों में जो कुछ भी बीते समय में हुआ है, उसकी समीक्षा होती थी, वर्तमान का मूल्यांकन होता था, और भविष्य की रूपरेखा तय की जाती थी। हर 12 वर्ष पर कुम्भ की परंपरा भी इसका एक सशक्त उदाहरण रहा है। 2019 में ही असम के लोगों ने ब्रह्मपुत्र नदी में पुष्करम समारोह का सफल आयोजन किया था। अब फिर से ब्रह्मपुत्र नदी पर ये आयोजन 12वें साल में ही होगा। तमिलनाडु के कुंभकोणम में महामाहम पर्व भी 12 वर्ष में मनाया जाता है। भगवान बाहुबली का महा-मस्तकाभिषेक ये भी 12 साल पर ही होता है। ये भी संयोग है कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर खिलने वाला नील कुरुंजी पुष्प भी हर 12 साल में ही उगता है। 12 वर्ष पर हो रहा कृष्णगुरु एकनाम अखंड कीर्तन भी ऐसी ही सशक्त परंपरा का सृजन कर रहा है। ये कीर्तन, पूर्वोत्तर की विरासत से, यहाँ की आध्यात्मिक चेतना से विश्व को परिचित करा रहा है। मैं आप सभी को इस आयोजन के लिए अनेकों-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ।

साथियों,

कृष्णगुरु जी की विलक्षण प्रतिभा, उनका आध्यात्मिक बोध, उनसे जुड़ी हैरान कर देने वाली घटनाएं, हम सभी को निरंतर प्रेरणा देती हैं। उन्होंने हमें सिखाया है कि कोई भी काम, कोई भी व्यक्ति ना छोटा होता है ना बड़ा होता है। बीते 8-9 वर्षों में देश ने इसी भावना से, सबके साथ से सबके विकास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया है। आज विकास की दौड़ में जो जितना पीछे है, देश के लिए वो उतनी ही पहली प्राथमिकता है। यानि जो वंचित है, उसे देश आज वरीयता दे रहा है, वंचितों को वरीयता। असम हो, हमारा नॉर्थ ईस्ट हो, वो भी दशकों तक विकास के कनेक्टिविटी से वंचित रहा था। आज देश असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को वरीयता दे रहा है, प्राथमिकता दे रहा है।

इस बार के बजट में भी देश के इन प्रयासों की, और हमारे भविष्य की मजबूत झलक दिखाई दी है। पूर्वोत्तर की इकॉनमी और प्रगति में पर्यटन की एक बड़ी भूमिका है। इस बार के बजट में पर्यटन से जुड़े अवसरों को बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को विशेष अभियान चलाकर विकसित किया जाएगा। इनके लिए आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा, वर्चुअल connectivity को बेहतर किया जाएगा, टूरिस्ट सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा। पूर्वोत्तर और असम को इन विकास कार्यों का बड़ा लाभ मिलेगा। वैसे आज इस आयोजन में जुटे आप सभी संतों-विद्वानों को मैं एक और जानकारी देना चाहता हूं। आप सबने भी गंगा विलास क्रूज़ के बारे में सुना होगा। गंगा विलास क्रूज़ दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज़ है। इस पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी सफर कर रहे हैं। बनारस से बिहार में पटना, बक्सर, मुंगेर होते हुये ये क्रूज़ बंगाल में कोलकाता से आगे तक की यात्रा करते हुए बांग्लादेश पहुंच चुका है। कुछ समय बाद ये क्रूज असम पहुँचने वाला है। इसमें सवार पर्यटक इन जगहों को नदियों के जरिए विस्तार से जान रहे हैं, वहाँ की संस्कृति को जी रहे हैं। और हम तो जानते है भारत की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी अहमियत, सबसे बड़ा मूल्यवान खजाना हमारे नदी, तटों पर ही है क्योंकि हमारी पूरी संस्कृति की विकास यात्रा नदी, तटों से जुड़ी हुई है। मुझे विश्वास है, असमिया संस्कृति और खूबसूरती भी गंगा विलास के जरिए दुनिया तक एक नए तरीके से पहुंचेगी।

साथियों,

कृष्णगुरु सेवाश्रम, विभिन्न संस्थाओं के जरिए पारंपरिक शिल्प और कौशल से जुड़े लोगों के कल्याण के लिए भी काम करता है। बीते वर्षों में पूर्वोत्तर के पारंपरिक कौशल को नई पहचान देकर ग्लोबल मार्केट में जोड़ने की दिशा में देश ने ऐतिहासिक काम किए हैं। आज असम की आर्ट, असम के लोगों के स्किल, यहाँ के बैम्बू प्रॉडक्ट्स के बारे में पूरे देश और दुनिया में लोग जान रहे हैं, उन्हें पसंद कर रहे हैं। आपको ये भी याद होगा कि पहले बैम्बू को पेड़ों की कैटेगरी में रखकर इसके काटने पर कानूनी रोक लग गई थी। हमने इस कानून को बदला, गुलामी के कालखंड का कानून था। बैम्बू को घास की कैटेगरी में रखकर पारंपरिक रोजगार के लिए सभी रास्ते खोल दिये। अब इस तरह के पारंपरिक कौशल विकास के लिए, इन प्रॉडक्ट्स की क्वालिटी और पहुँच बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। इस तरह के उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए बजट में हर राज्य में यूनिटी मॉल-एकता मॉल बनाने की भी घोषणा इस बजट में की गई है। यानी, असम के किसान, असम के कारीगर, असम के युवा जो प्रॉडक्ट्स बनाएँगे, यूनिटी मॉल-एकता मॉल में उनका विशेष डिस्प्ले होगा ताकि उसकी ज्यादा बिक्री हो सके। यही नहीं, दूसरे राज्यों की राजधानी या बड़े पर्यटन स्थलों में भी जो यूनिटी मॉल बनेंगे, उसमें भी असम के प्रॉडक्ट्स रखे जाएंगे। पर्यटक जब यूनिटी मॉल जाएंगे, तो असम के उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा।

साथियों,

जब असम के शिल्प की बात होती है तो यहाँ के ये 'गोमोशा' का भी ये ‘गोमोशा’ इसका भी ज़िक्र अपने आप हो जाता है। मुझे खुद 'गोमोशा' पहनना बहुत अच्छा लगता है। हर खूबसूरत गोमोशा के पीछे असम की महिलाओं, हमारी माताओं-बहनों की मेहनत होती है। बीते 8-9 वर्षों में देश में गोमोशा को लेकर आकर्षण बढ़ा है, तो उसकी मांग भी बढ़ी है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स सामने आए हैं। इन ग्रुप्स में हजारों-लाखों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। अब ये ग्रुप्स और आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बनेंगे। इसके लिए इस साल के बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आय उनके सशक्तिकरण का माध्यम बने, इसके लिए 'महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट' योजना भी शुरू की गई है। महिलाओं को सेविंग पर विशेष रूप से ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा। साथ ही, पीएम आवास योजना का बजट भी बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, ताकि हर परिवार को जो गरीब है, जिसके पास पक्का घर नहीं है, उसका पक्का घर मिल सके। ये घर भी अधिकांश महिलाओं के ही नाम पर बनाए जाते हैं। उसका मालिकी हक महिलाओं का होता है। इस बजट में ऐसे अनेक प्रावधान हैं, जिनसे असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं को व्यापक लाभ होगा, उनके लिए नए अवसर बनेंगे।

साथियों,

कृष्णगुरू कहा करते थे- नित्य भक्ति के कार्यों में विश्वास के साथ अपनी आत्मा की सेवा करें। अपनी आत्मा की सेवा में, समाज की सेवा, समाज के विकास के इस मंत्र में बड़ी शक्ति समाई हुई है। मुझे खुशी है कि कृष्णगुरु सेवाश्रम समाज से जुड़े लगभग हर आयाम में इस मंत्र के साथ काम कर रहा है। आपके द्वारा चलाये जा रहे ये सेवायज्ञ देश की बड़ी ताकत बन रहे हैं। देश के विकास के लिए सरकार अनेकों योजनाएं चलाती है। लेकिन देश की कल्याणकारी योजनाओं की प्राणवायु, समाज की शक्ति और जन भागीदारी ही है। हमने देखा है कि कैसे देश ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और फिर जनभागीदारी ने उसे सफल बना दिया। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता के पीछे भी सबसे बड़ी वजह जनभागीदारी ही है। देश को सशक्त करने वाली इस तरह की अनेकों योजनाओं को आगे बढ़ाने में कृष्णगुरु सेवाश्रम की भूमिका बहुत अहम है। जैसे कि सेवाश्रम महिलाओं और युवाओं के लिए कई सामाजिक कार्य करता है। आप बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ और पोषण जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की भी ज़िम्मेदारी ले सकते हैं। 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसे अभियानों से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने से सेवाश्रम की प्रेरणा बहुत अहम है। योग हो, आयुर्वेद हो, इनके प्रचार-प्रसार में आपकी और ज्यादा सहभागिता, समाज शक्ति को मजबूत करेगी।

साथियों,

आप जानते हैं कि हमारे यहां पारंपरिक तौर पर हाथ से, किसी औजार की मदद से काम करने वाले कारीगरों को, हुनरमंदों को विश्वकर्मा कहा जाता है। देश ने अब पहली बार इन पारंपरिक कारीगरों के कौशल को बढ़ाने का संकल्प लिया है। इनके लिए पीएम-विश्वकर्मा कौशल सम्मान यानि पीएम विकास योजना शुरू की जा रही है और इस बजट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। कृष्णगुरु सेवाश्रम, विश्वकर्मा साथियों में इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाकर भी उनका हित कर सकता है।

साथियों,

2023 में भारत की पहल पर पूरा विश्व मिलेट ईयर भी मना रहा है। मिलेट यानी, मोटे अनाजों को, जिसको हम आमतौर पर मोटा अनाज कहते है नाम अलग-अलग होते है लेकिन मोटा अनाज कहते हैं। मोटे अनाजों को अब एक नई पहचान दी गई है। ये पहचान है- श्री अन्न। यानि अन्न में जो सर्वश्रेष्ठ है, वो हुआ श्री अन्न। कृष्णगुरु सेवाश्रम और सभी धार्मिक संस्थाएं श्री-अन्न के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। आश्रम में जो प्रसाद बँटता है, मेरा आग्रह है कि वो प्रसाद श्री अन्न से बनाया जाए। ऐसे ही, आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास को युवापीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अभियान चल रहा है। इस दिशा में सेवाश्रम प्रकाशन द्वारा, असम और पूर्वोत्तर के क्रांतिकारियों के बारे में बहुत कुछ किया जा सकता है। मुझे विश्वास है, 12 वर्षों बाद जब ये अखंड कीर्तन होगा, तो आपके और देश के इन साझा प्रयासों से हम और अधिक सशक्त भारत के दर्शन कर रहे होंगे। और इसी कामना के साथ सभी संतों को प्रणाम करता हूं, सभी पुण्य आत्माओं को प्रणाम करता हूं और आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!