प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज भूटान के प्रधानमंत्री (ल्‍योनचेन) महामहिम डॉ. लोतेय त्शेरिंग के साथ टेलीफोन पर बातचीत की।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने महामारी कोविड-19 के मद्देनजर क्षेत्रीय हालात के बारे में विचार विमर्श किया और इस रोग के प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए अपनी सरकारों द्वारा उठाए जा रहे कदमों से एक-दूसरे को अवगत कराया।

प्रधानमंत्री ने भूटान नरेश और ल्‍योनचेन डॉ. लोतेय त्शेरिंग द्वारा नेतृत्‍वकारी भूमिका निभाते हुए अपने देश में इस संक्रमण को फैलने से रोकने के तरीके की सराहना की।

ल्‍योनचेन डॉ. त्शेरिंग ने भारत जैसे विशाल और जटिल देश में महामारी से लड़ने से बावजूद क्षेत्रीय स्‍तर पर कोविड विरोधी समन्‍वयन को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रधानमंत्री का आभार प्रकट किया।

दोनों नेताओं ने सार्क सदस्‍य देशों के नेताओं के बीच 15 मार्च को सम्‍मत विशेष व्‍यवस्‍थाओं के कार्यान्‍वयन की दिशा में हो रही प्रगति पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की।

प्रधानमंत्री ने भारत और भूटान के कालातीत और विशेष प्रकार के संबंधों का उल्‍लेख करते हुए ल्‍योनचेन को भरोसा दिलाया कि भूटान के लिए इस महामारी के स्‍वास्‍थ्‍य और आर्थिक प्रभावों को कम करने में भारत उसे हरसंभव सहायता प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री ने महामहिम नरेश ल्‍योनचेन डॉ. त्‍शेरिंग और ड्रक युल की मैत्रीपूर्ण जनता की अच्‍छी सेहत और कल्‍याण के लिए शुभकामनाएं दीं।

 

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प्रधानमंत्री आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
April 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें उन्होंने आंतरिक ज्ञान को ब्रह्मांड का सच्चा सार बताते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की विरासत और संस्कृति ने हमेशा यह सिखाया है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही सदुपयोग ही किसी राष्ट्र की प्रगति के आधार हैं। उन्होंने बताया कि इसी मार्ग पर चलते हुए देश के युवा एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह ज्ञान, जो हमारे भीतर ही स्थित है और सामान्य ज्ञान से कहीं अधिक श्रेष्ठ है, महान और विद्वान व्यक्तियों द्वारा पूजनीय माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

"हमारी विरासत और संस्कृति हमें यही सिखाती आई है कि सच्चा ज्ञान और उसका सदुपयोग ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है। इसी मार्ग पर चलकर आज हमारे देश के युवा समृद्ध और सशक्त भारत को गढ़ने में जुटे हैं।

अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्।

तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥"

जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है और जो सामान्य या बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस समस्त संसार का असली सार है। श्रेष्ठ पुरूषों और ज्ञानियों द्वारा उसी आंतरिक ज्ञान की उपासना की जाती है।