रोजगार का सृजन भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत रोजगार पर विश्वसनीय और समयबद्ध आंकड़ों की कमी से जूझ रहा है। इसकी वजह से नीति निर्माताओं और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को अलग-अलग समय पर रोजगार पैदा करने की सीमा का आकलन करने में मुश्किल आ रही है। श्रम ब्यूरो सहित कुछ एजेंसियों द्वारा कुछ आंकड़ों को एकत्र और प्रकाशित किया जाता है लेकिन इनके कवरेज का क्षेत्र बहुत छोटा है। श्रम ब्यूरो अपने आंकड़े में केवल कुछ क्षेत्रों को शामिल करता है। साथ ही सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली उत्तरदाताओं के अद्यतन पैनल पर आधारित नहीं होती है। इसका परिणाम यह होता है कि सही आंकड़ों के अभाव में ही नीति बनाई जाती है और विश्लेषण किए जाते हैं।

रोजगार पर समयबद्ध और विश्वसनीय आंकड़ों के महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय सहित इससे संबंधित एजेंसियों को इस मसले को सुलझाने के लिए निर्देश दिया है ताकि देश के सांख्यिकीय ढांचे के अंतराल को भरा जा सके। तदनुसार नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढिया, श्रम सचिव सुश्री सथियावती और सांख्यिकी सचिव डॉ टी.सी.ए. अनंत की अध्यक्षता की एक कार्यबल का गठन किया गया है। नीति आयोग के प्रोफेसर पुलक घोष और श्री मनीष सभरवाल (सदस्य आरबीआई बोर्ड) को सदस्यों में शामिल हैं। कार्यबल ऐसे समाधान सुझाएगा जिसे समयबद्ध तरीके से कार्यान्वित किया जा सके। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया है कि यह कार्य शीघ्र ही आगे बढ़ाया जाए ताकि रोजगार संबंधी नीतियों को विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर प्रभावी तरीक से तैयार की जा सकें।

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