26 फ़रवरी, 2012

सुरत

मारे यहाँ जितना महत्त्व शिक्षा का है उससे ज्यादा महत्व दीक्षा का है और शिक्षित व्यक्ति जब तक दीक्षित न हो तब तक शिक्षा अधूरी मानी जाती है. यदि शास्त्रों में देखें तो ‘तैत्तिरीय उपनिषद्’ में पहली बार इस प्रकार के दीक्षांत समारोह का उल्लेख है. परंतु हमारे यहाँ परंपरागत रूप से गुरुकुल की जो शिक्षा परंपरा थी उसमें विद्यार्थिओं की शिक्षा पूर्ण होने के बाद गुरुजन अनेक कसौटियों में से उन्हें पार करते थे, ऐसे अनेक सहज आयोजन किए जाते जिनमें से गुजरते-गुजरते, उसने जो भी कुछ सीखा हो उसका अमल नित्यक्रम के दौरान करके दिखाना पडता था, उसे तो इस बात का ज्ञान भी नहीं होता था कि वह जो कर रहा है उसकी कसौटी का कोई हिस्सा है. और इसका बहुत माइन्यूट ऑब्ज़र्वेशन होता था और उसके बाद ही वे डिग़्रीधारी बनते थे और उन्हें जीवन के अन्य आश्रम की ओर जाने की अनुमति मिलती थी.

मित्रों, विद्यार्थीकाल उत्तम समय होता है. एक ओर इस बात का आनंद होता है कि भाई, आज यहाँ से डिग़्रीधारी बन कर हम समाज में जा रहे हैं, लेकिन उसके साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी शुरू होती है. आप विद्यार्थी हों तब मित्रों के बीच, समाज के बीच खड़े हों और परिचय दें कि मैं फाइनल यीअर में पढ़ता हूँ तो लम्बे प्रश्न नहीं पूछे जाते. पढ़ रहे हो, बात पूरी हो जाती है. लेकिन जिस पल आप कहो कि अब मैं ग्रैजुएट हो गया हूँ तो तुरंत ही प्रश्न आता है कि तो अब क्या कर रहे हो? अब क्या करने वाले हो? क्या सोचा है? और नौकरी के मामले में तो यह चलता ही है; साथ ही छोकरी के मामले में भी शुरु हो जाता है और यदि लड़की हो तो लड़के के बारे में शुरु होता है. यह सहज बात है. पढ़ते हों तब तक कोई टेन्शन नहीं, कोई पूछे नहीं और इसलिए कुछ लोग क्या करते हैं कि कहीं और कोई मेल न हो तब तक सी.ए. में एन्ट्री ले लेते हैं, ताकि दूसरा बंदोबस्त न हो तब तक कहने को चलें कि, क्या कर रहे हो? सी.ए. कर रहा हूँ, अनएन्डिंग प्रोसेस है... मित्रों, जब हम विद्यार्थी हों तब जीवन में अनेक लोग होते हैं जो हमारा मार्गदर्शन करते हैं. एक प्रकार से प्रोटेक्टेड लाइफ होती है. परिवार में परिवारजन चिंता करते हैं, कुटुम्ब के साथ संबंधित बुज़ुर्ग चिंता करते हैं, शिक्षा संस्था का चपरासी भी कई बार हमें गाइड करता है कि नहीं-नहीं भाई, ऐसा नहीं करते... ऐसा होता है, आपने अनुभव किया होगा मित्रों, और हमे लगता है कि इस चपरासी को समझ में आता है और मुझे नहीं आया..! शिक्षकगण भी हमें गाइड करते हैं कि भाई, ऐसा करते हैं और ऐसा नहीं करते हैं. और इसके कारण हम निश्चिंत रहते हैं. कोई भी भूल हो तो कहीं कोई रोकने वाले, कोई टोकने वाले की व्यवस्था होती है और इसके कारण मुक्त भाव से कदम उठाने की हिम्मत आती है. लेकिन जिस पल इस व्यवस्था में से बाहर आते हैं तबसे प्रत्येक पल निर्णय खुद ही करना पडता है. आस-पास देखें तो कोई शिक्षक खड़े नहीं होते, समाज की हमारी ओर देखने की पूरी मानसिकता बदल जाती है और एक प्रकार से एक कसौटी काल का आरम्भ होता है. आज जो लोग पदवी प्राप्त कर रहे हैं वे सारे मित्र कसौटी काल में कदम रख रहे हैं. और जब कसौटी शुरू हो रही है उस वक्त प्रत्येक पल, बचपन से लेकर आज तक जहाँ कहीं भी शिक्षा प्राप्त की होगी, जिन-जिन गुरुजनों से जो कुछ सीखे होंगे उसकी पूरी कथा मन में कदम-कदम पर याद आती है. कुछ करने जाएँ वहीं खयाल आए कि हाँ यार, क्लास में साहब ने यह बात तो बताई थी..! कहीं इंटरव्यू देने जाएँ और कोई प्रश्न आए तो तुरंत ही विचार आए कि हाँ यार, साहब ने कहा तो था लेकिन आज याद नहीं आ रहा है. हर कदम पर यह कार्यकाल आपको याद आएगा मित्रों। आज जिनका दीक्षांत समारोह हो रहा है उन्हें तो समझना ही है, परंतु जो लोग भविष्य के दीक्षांत समारोह के स्वाभाविक दावेदार हैं वे लोग भी यहाँ बैठे हैं, उनको भी इसमें से प्रेरणा मिले कि हाँ भाई, जीवन की शुरूआत कठिन होती है. जीवन में हर कदम पर प्रत्येक कसौटी में से पार होना पडता है.

मैं चाहूंगा कि वीर नर्मद के नाम के साथ जुडी इस युनिवर्सिटी के जब हम सब विद्यार्थी हैं तो और कुछ कर सकें या न कर सकें मित्रों, लेकिन नर्मद का एक वाक्य जीवन में उतारें, ‘डगलुं भर्युं के ना हठवुं...’ (‘एक बार कदम बढ़ाने के बाद डगमगाना नहीं...’). और नर्मद की पुण्यतिथि पर जब हमें आशीर्वाद प्राप्त हो रहे हैं तब... मित्रों, समाज-जीवन में असमंजस में रहने वाले लोग न तो कभी कुछ पा सकते हैं, न ही कभी समाज को कुछ दे सकते हैं. जो लोग निर्णायक होते हैं, वे ही लोग निर्धारित मंज़िल को प्राप्त कर सकते हैं. जो लोग अनिर्णायक होते हैं, उनका काफ़ी सारा वक्त एक उलझन भरी अवस्था में ही रहता है. आपने कई लोग देखे होंगे, बस स्टेशन पर... चार बस खड़ी हों तो तय नहीं कर पाते कि इसमें जाएँ या उसमें. और तीन चली जाए उसके बाद आखिर में जो मिले उसमें चढ़ जाते हैं, तय ही नहीं कर पाते. और यह एक आम अनुभव होता है. बहुत सारे लोग बीमार हुए हों तो ऑपरेशन कराएँ या न कराएँ, इस डॉक्टर के पास या उस डॉक्टर के पास... और तब तक रोग इतना उग्र हो जाता है कि डॉक्टर के हाथ की बाज़ी ही नहीं रहती है. कारण? अनिर्णायकता. मित्रों, असमंजस से भरी जिंदगी और युवा के बीच कभी भी, कोई भी संबंध नहीं होना चाहिए. मैं युवा हूँ, इसका मतलब है कि मैं निर्णायक हूँ और अगर मैं निर्णायक नहीं हूँ, तो निश्चित रूप से मैं युवा नहीं हूँ. मैं अत्यंत भयभीत हूँ, मैं अत्यंत असुरक्षित हूँ, मुझे कदम बढ़ाने में डर लगता है कि कहीं मैं गिर न जाऊँ... अर्थात, मेरे मन का यौवन मैंने खो दिया है और इसलिए निर्णायक होना, दुविधा मुक्त जिंदगी होना युवा होने की पहली शर्त है मित्रों। और जो लोग निर्णायक होते हैं, वे साहसिक भी होते हैं. कश्मकश से भरा व्यक्ति इसलिए असमंजस में रहता है कि मूलतः उसमें साहस का अभाव होता है. वह भयभीत है कि कहीं कुछ हो जायेगा तो? कहीं कोई कुछ कहेगा तो? कहीं ऐसा होगा तो? मित्रों, बच्चों को कभी कोई कश्मकश नहीं होती, क्योंकि उनमें भय नहीं होता. जिसे भय हो, वह असमंजस में रहता है और इसलिए व्यक्ति के जीवन में अभय, मन की रचना में अभय, जीवन की प्रगति के लिए अनिवार्य होता है. जब तक व्यक्ति भयमुक्त मन:स्थिति में न हो, कैसे भी माहौल में भय स्पर्श न करता हो, अंधकार जैसा कुछ प्रतीत न होता हो, प्रत्येक पल प्रकाश दिखता हो, तब ही वह जिंदगी की राह निश्चित कर सकता है। और मित्रों, प्रकाश को देखने के लिए सूरज के उगने की प्रतीक्षा नहीं करनी पडती. मित्रों, सामर्थ्यवान लोग तारों के प्रकाश में भी रास्ता खोज लेते हैं. जिंदगी सुनहरे पलों का इंतजार करने के लिए नहीं होती है, मित्रों. अंधकार भरे जीवन में भी  सितारों की रोशनी से रौनक आ सकती है और मित्रों, घना अंधकार हो, बादल छाया वातावरण हो तो भी मेरे आदिवासी भाई को जुगनू के प्रकाश में जिंदगी की राह बनाते हुए देखा है. अगर एक जुगनू जिंदगी की राह दिखा सकता है तो मैं तो एक ऐसी समृद्ध जिंदगी जीने वाला मानव हूँ, मेरे जीवन में रुकावट क्यों? यदि ऐसी संकल्प शक्ति हो, तो जीवन बदला जा सकता है.

मित्रों, कई बार समाज-जीवन में हम जब काम करते हों तब आपको ऐसा लगता होगा कि मेरे पिताजी ने फीस भरी थी इसलिए मैं ग्रैजुएट हुआ हूँ, उसके कारण आज पदवी प्राप्त कर रहा हूँ, ऐसा नहीं है दोस्तों. मैं देर रात तक पढ़ता था इसलिए अब पदवीधारी बना हूँ, ऐसा नहीं है. परीक्षा के दिनों में अच्छी से अच्छी फिल्म भी मैंने छोड़ दी थी इसलिए पास हुआ हूँ, ऐसा है? ऐसा नहीं होता. अनेक लोगों ने मेरी जिंदगी बनाने के लिए कुछ न कुछ योगदान दिया है. जब कभी कॉलेज में उब जाता था और कॅम्पस के बाहर जाकर किसी पेड़ की छाया में छोटी-सी केतली लेकर जो चाय बनाने वाला बैठता था, मैं उसकी चाय पीकर ताज़गी का अनुभव करता था और फिर से क्लास रूम में चला आता था. आज पदवी लेते समय उसे भी याद करना, उसे भी ज़रा याद करना कि कभी एक सामान्य गली में जीने वाले आदमी ने आपकी पसंद की चाय बनाकर आपको ताज़गी दी थी. मित्रों, कभी परीक्षा में दौड़ते हुए जाते होंगे, बस छूट गई होगी, देर हो गई होगी और आपने ड्राइवर को विनती की होगी कि साहब, ज़रा दबाना भाई, जल्दी चलाना, मुझे परीक्षा के लिए पहुँचना है और ड्राइवर ने रिस्क लेकर शायद आपको पहुँचाया होगा. मित्रों, आज उन्हें भी याद करना. मित्रों, आप जिस कुर्सी पर बैठकर, जिस बेंच पर बैठकर पढ़े होंगे उस बेंच को साफ करने के लिए किसी चपरासी ने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी होगी, उस चपरासी को भी ज़रा याद करना. मित्रों, कितने लोगों का योगदान होता है, कितने लोगों के प्रयत्नों के परिणामस्वरूप मैं जिंदगी में कुछ प्राप्त कर सकता हूँ, इसका अर्थ यह हुआ कि समग्र समाज का मुझ पर ऋण होता है. इस समाज के ऋण चुकाने का समय मेरे पदवी प्राप्त करने के बाद शुरु होता है. जीवन की प्रत्येक पल को मैं इस समाज का ऋण चुकाता रहूँगा. इस समाज का मुझ पर जो ऋण है, मैं आजीवन कभी उसे भूलूँगा नहीं. इस कर्तव्य के पालन को मैं निभाऊँगा. यह अगर जीवन का भाव होगा तो हम जीवन में एक संतोष की अनुभूति कर सकेंगे.

मित्रों, इस पदवीदान समारोह में से बिदा हो रहे हो तब यदि आपको ऐसा लगे कि अब आप विद्यार्थी नहीं रहे तो आप समझ लेना कि आप जीवन की ओर नहीं, मृत्यु की ओर प्रयाण कर रहे हो. मित्रों, मैं बहुत ही जिम्मेदारी भरी बात कर रहा हूँ. यहाँ से निकलते ही यदि आपने ऐसा मान लिया कि आपका विद्यार्थी काल समाप्त हो गया तो इसका मतलब यह हुआ कि आपका जीवन काल समाप्त हो गया और आपका मृत्यु काल प्रारंभ हो गया है. मित्रों, विद्यार्थी जीवनपर्यंत जीवित रहना चाहिए. जीवन के अंत तक विद्यार्थी जिन्दा रहना चाहिए. हमारे भीतर यदि विद्यार्थी जीवित नहीं है तो जीवन की विकास यात्रा असंभव है, जीवन में ठहराव आ जाता है. और कोई भी युवा ऐसा नहीं हो सकता कि जिसके जीवन में ठहराव आए, जीवन में निरंतर विकास यात्रा हो और इसके लिए अनिवार्य है कि प्रत्येक पल मैं विद्यार्थी रहूँ. प्रत्येक पल को जानने की मेरी कोशिश रहे, मेरी जिज्ञासा रहे. प्रत्येक पल मुझ में कुछ सीखने की मनोवृत्ति रहे. और जीवन के मूलभूत तत्त्वों को जीवन के साथ बांधना पड़ता है, उन्हें अपने जीवन का डी.एन.ए. बनाना पड़ता है. विद्यार्थी अवस्था, मन की विद्यार्थी अवस्था हमारा अपना डी.एन.ए. होना चाहिए. और अगर ऐसा हो तो ही जीवन में प्रगति की सम्भावना रहती है.

भाईयों-बहनों, यह वर्ष स्वामी विवेकानंदजी की 150 वीं जयंती का वर्ष है. और 150 वीं जयंती का वर्ष जब मना रहे हैं तब गुजरात ने, राज्य सरकार ने इसे ‘युवा शक्ति वर्ष’ के रूप में मनाने का निश्चय किया है और युवा शक्ति यानि सिर्फ निबंध स्पर्धाएँ या वक्तृत्व स्पर्धाएँ हो, वहीं तक सीमित नहीं है. एक फोकस किया है, कौशल वर्धन पर. हुनर... मित्रों, जीवन में ज्ञान के साथ हुनर की भी उतनी ही आवश्यकता होती है और अगर हुनर न हो तो ज्ञान कई बार गड्ढे में बेकार पड़ा रह जाता है. इस घटना का मैंने कई बार उल्लेख किया है, आज फिर से करना चाहता हूँ. एक बार दादा धर्माधिकारी, जो विनोबाजी के साथी थे, गाँधीजी की विचारधारा के एक अनुयायी थे. उनके कई पुस्तक पढ़ने लायक हैं. दादा धर्माधिकारी ने एक जगह लिखा है कि एक बार एक युवक मुझसे मिलने आया और उसने मुझसे कहा कि, “दादा, कुछ नौकरी का कर दो...”, तो दादा ने उसे पूछा, “भाई, तुझे क्या आता है?”, तो उस युवक ने जवाब दिया, “मैं ग्रैजुएट हूँ” उन्होंने कहा कि ठीक है, लेकिन तुम्हें आता क्या है?” तो उसने फिर से कहा, “मैं ग्रैजुएट हूँ”, और फिर अपनी बैग में से सर्टिफिकेट दिखाए, तो उन्होंने कहा, ”यह सब तो ठीक है, तुम ग्रैजुएट हो लेकिन तुम्हें आता क्या है?” फिर से उसने कहा, “साहब, मैं ग्रैजुएट हूँ”. दादा ने कहा, “भाई, वो सब तो ठीक है, लेकिन मुझे बताओ कि तुम ड्राइविंग करना जानते हो?” तो बोला कि नहीं, “तुम टाइपिंग जानते हो”, तो बोला कि नहीं, “तुम खाना बनाना जानते हो, तैरना जानते हो?”, “नहीं, लेकिन मैं ग्रैजुएट हूँ, मेरे पास सर्टिफिकेट है.” मित्रों, डिग्री के साथ-साथ जीवन कौशल अनिवार्य होता है और इस बात को ध्यान में रखते हुए, गुजरात में स्वामी विवेकानंदजी की 150 वीं जयंती के अवसर पर पूरे राज्य में कौशल वर्धन के लिए एक बड़ा अभियान हम चलाने वाले हैं. हर किसी में कोई न कोई एक्स्ट्रा टैलन्ट हो, कोई न कोई एक्स्ट्रा कौशल हो, कोई न कोई हुनर उसे आता हो, उसे आत्मनिर्भरता से जीने का सामर्थ्य मिले. मित्रों, भारत एक भाग्यशाली देश है और हम सब एक ऐसे युग में हैं कि जिस वक्त हिंदुस्तान दुनिया का सबसे युवा देश है. इस देश के 65% लोग 35 से कम उम्र के हैं. जिस देश के पास इतनी बड़ी युवा शक्ति हो, उसके सपने कितने युवा हो सकते हैं, कितने तेजस्वी हो सकते हैं..! ऐसे युवा सपनों, युवा तेजस्वी सपनों के साथ हमारी भारतमाता विश्वगुरु बने; स्वामी विवेकानंदजी के इस स्वप्न को साकार करने का युग हमारे जीवन काल में आया है. और अगर ऐसी भावनाएँ युवाओं के मन में प्रकट कर सकें तो इतना बड़ा देश, 120 करोड़ की जनसंख्या, 65% नौजवानों से भरा देश, मित्रों, उनके कौशल के द्वारा, उनकी क्षमता के द्वारा, उनकी बुद्धि के द्वारा वह विश्व विजेता बन सके ऐसा सामर्थ्य रखता है. और, विवेकानंदजी का यह स्वप्न था कि “मैं मेरी आँखों के सामने देख सकता हूँ, यह भारतमाता एक न एक दिन जगदगुरु के स्थान पर बिराजमान होगी”. मित्रों, विवेकानंदजी का स्वप्न, 150 साल बीत चुके हैं, उसे पूर्ण करने की जिम्मेदारी हमारे सिर पर है. एक युवा के रूप में संकल्प ले करके हम निकलें तो भारत माता को जगदगुरु के स्थान पर बिराजमान कर सकते हैं.

मित्रों, गुजरात में शिक्षा की जो मुहिम चलाई है, इसके सुफल देखने को मिल रहे हैं. कन्या शिक्षा का अभियान चलाया, प्रवेशोत्सव चलाया. जिन दिनों मैंने काम की शुरुआत की थी, 7-8 साल पहले, तब लोगों को अंदाज़ा नहीं था कि यह सब क्या चल रहा है. मित्रों, आज स्थिति ऐसी है कि उच्च शिक्षा के लिए इतने बड़े पैमाने पर लोग जा रहे हैं. वंचित, दलित, आदिवासी सभी बड़ी मात्रा में जा रहे हैं. और, इसलिए इस बजट में 100 करोड़ रुपयों जैसी बड़ी राशि सिर्फ दूरवर्ती इलाकों के बच्चे जो पढ़-लिखकर आगे आए हैं, उनके लिए हॉस्टल बनाने के लिए तय की है. गुजरात के बजट में 100 करोड़ जितनी बड़ी राशि का आवंटन सिर्फ हॉस्टल बनाने के लिए किया है, ताकि आंतरिक क्षेत्रों के लोगों को पढ़ने की सुविधा मिले, उन्हें रहने के लिए कहीं जगह मिले, ऐसा एक बड़ा अभियान उठाया है. मित्रों, गुजरात का विकास जिस प्रकार से हो रहा है उसके अनुरूप मानव-शक्ति का विकास हो इस विषय पर हमने ध्यान केंद्रित किया है. 2001 में जब गुजरात की जनता ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी थी तब इस राज्य में सिर्फ 11 युनिवर्सिटी थीं. भाईयों-बहनों, आज 41 युनिवर्सिटी हैं. पिछली सदी में जितनी कॉलेज थीं, उससे ज्यादा युनिवर्सिटी हैं और उन युनिवर्सिटीयों ने भी विश्व कक्षा की युनिवर्सिटी की दिशा में कदम बढ़ाये हैं और उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं.

 

ज जो नौजवान मित्र जीवन की एक नई राह पर कदम रखने जा रहे हैं उन्हें मैं हार्दिक अभिनंदन देता हूँ, शुभकामनाएँ देता हूँ.

 

न्यवाद..!

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दमन ‘मिनी इंडिया’ का जीवंत उदाहरण बन गया है: पीएम मोदी
June 05, 2026
हेल्थकेयर, एविएशन, टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत दमन के लिए विकास को नई गति देने वाली पहल है, जो केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी: पीएम
आज जारी किए गए आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। FY 2025-26 में 7.7% और 31 मार्च को समाप्त तिमाही में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की गई है: पीएम
वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौतियों के बावजूद, 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत न केवल मजबूती से आगे बढ़ रहा है, बल्कि दुनिया से एक कदम आगे भी बना हुआ है: पीएम
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे सरकार के हेल्थकेयर पर फोकस को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। पहले भारत में अधिकांश डिलिवरी अस्पतालों के बाहर होती थीं, लेकिन आज देश में 90% से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही हैं: पीएम
मिशन इंद्रधनुष की बदौलत भारत में बच्चों के टीकाकरण का कवरेज 2014 से पहले के 60% से बढ़कर आज करीब 90% तक पहुंच गया है: पीएम

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के एडमिनिस्ट्रेटर प्रफुल्ल भाई पटेल, संसद में मेरी सहयोगी कलाबेन डेलकर, दमन Municipal Council की President दीपिका टंडेल जी, दमन जिला पंचायत के अध्यक्ष धर्म बाबू पटेल, सिलवासा Municipal Council के अध्यक्ष सोमनाथ देवरे जी, दादरा नगर हवेली जिला पंचायत के अध्यक्ष निशा भावसार जी, दीव Municipal Council के अध्यक्ष हरीश कपाड़िया जी, दीव जिला पंचायत के अध्यक्ष कोटिया रंजिताबेन और यहां इतनी विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाइयों-बहनों,

आप जैसे यहां इकट्ठे हुए हैं, वैसे ही लक्षद्वीप में भी बहुत बड़ी तादाद में लोग वीडियो के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं, क्योंकि आज लक्षद्वीप के विकास की भी एक नई शुरुआत, एक नए प्रकल्‍प, जो पूरे लक्षद्वीप के जीवन में एक क्रांतिकारी काम करने वाले हैं, उसके लिए भी कुछ योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।

साथियों,

कुछ साल पहले, जब मैं आपके बीच आया था, तो मैंने कहा था यह हमारा दमन तेजी से मिनी इंडिया बन रहा है और आज मैं देख रहा हूं, बाईं तरफ पूरा बंगाल है और दाहिने तरफ पूरा असम है। दमन मिनी इंडिया का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां की विविधता, अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का यहां निवास करना, पूरे भारत की सुंदर सी झलक आपके बीच आकर के मिल जाती है। आप सब इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने आए, मैं इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

भाइयों-बहनों,

मुझे कई बार दमन और दीव आने का अवसर मिला है। दादरा और नगर हवेली भी आता रहता हूं और जब मैं मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं था, तब तो बहुत बार आता था। लेकिन अब जब मैं यहां आता हूं और यहां के सुशासन को देखकर, गवर्नेंस मॉडल को देखकर बहुत अच्छा लगता है। हर बार मुझे लगता है कि पिछली बार के मुकाबले यह क्षेत्र विकास की राह पर मीलों आगे बढ़ गया है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव ने दशकों से विकास के सपने देखे थे। जो सपने पहले देखे, वो पीढ़ियां तो चली गईं। लेकिन आज जो पीढ़ी है, वो अपनी आंखों के सामने देख रही है कि उनके मां-बाप, दादा-दादी जो सपने देखते थे, वो आज सपने पूरे होते हुए आप अपनी आंखों से देख रहे हैं। आज भी यहां कनेक्टिविटी, हेल्थ, एजूकेशन, टूरिज्‍म और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर इन से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है। विकास के यह काम दमन और पूरी यूनियन टेरिटरी के लिए यहां के लोगों के जीवन को आसान बनाएंगे। इनसे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे। इन कामों के पीछे प्रफुल्ल भाई पटेल की दृष्टि, उनकी और उनकी टीम की मेहनत साफ-साफ नजर आती है। मैं इसके लिए भी प्रफुल्ल भाई और उनकी पूरी टीम की सराहना करता हूं। मैं सभी को लक्षद्वीप के लोगों को, दादरा-नगर हवेली के लोगों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं, आप सबको बधाई देता हूं।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक सुखद खबर आई है। मैं तो आज सुबह दिल्ली से निकल चुका था, लेकिन अभी जो आंकड़े सामने आए हैं, जो खबर आई है, वो सचमुच में प्रसन्नता करने वाली है और मैं भी चाहता हूं, यह खुशी आपके साथ भी बाटूं। आज जो आंकड़े आए हैं, उन आंकड़ों से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव कितनी मजबूत है। वर्ष 2025-26 में यानी जो फाइनेंशियल ईयर पिछला पूरा हुआ, वर्ष 2025-26 में भारत ने 7.7 परसेंट की ग्रोथ रेट हासिल की है, 7.7 और पिछला क्वार्टर जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ 7.8 परसेंट रही है, 7.8 और यह दुनिया में तेज गति से आगे बढ़ने वाली बडी इकोनॉमी है। हर भारतीय को गर्व हो, यह है उसकी गति। आज देश जिस रिफॉर्म एक्‍सप्रेस पर चल रहा है, आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का जो इतना विकास हो रहा है, गरीब कल्‍याण को लेकर इतने बड़े स्‍तर जो काम चल रहा है, इन सारे प्रयासों का परिणाम है कि आज देश बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है और हम सब जानते हैं, दुनिया संकटों में घिरी हुई है, सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था सवालिया निशानों के नीचे दबी पड़ी है, वैश्विक संकट के इस बुरे से बुरे दौर में भी 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयासों से भारत खुद को संभाल तो पा ही रहा है, लेकिन साथ-साथ सबसे आगे रहने में भी उसके प्रयास सफल होते जा रहे हैं। मैं देशवासियों को आर्थिक क्षेत्र की इस नई ऊंचाई को प्राप्त करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मैं देश को फिर आश्‍वस्‍त करता हूं कि देश दुनिया भर में चल रहे इन संकटों का सामना करते हुए Reform, Perform और Transform के रास्ते पर ऐसे ही दृढ़ संकल्प के साथ, तेज गति से आगे बढ़ता ही रहेगा, यह मेरी देशवासियों को गारंटी है।

साथियों,

आज हमारे लिए विकास जितना जरूरी है, उतना ही अहम है हमारे विकास का मॉडल सस्टेनेबल हो। आज वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के दिन हमारे यहां यूनियन टेरिटरी स्टेट इस संकल्प को साकार कर रहा है। आज एक ओर यहां हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं को लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। साथ ही यहां करीब एक लाख एक पेड़ मां के नाम, एक लाख पौधे भी लगाए जा रहे हैं। मुझे गर्व है कि एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिसने सरकारी इमारतों में शत प्रतिशत, 100 परसेंट सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की उपलब्धि हासिल की है। आज दीव में दिन में जितनी बिजली की डिमांड होती है, वो सोलर पॉवर से ही पूरी हो रही है और हमें तो इसे और आगे लेकर के जाना है। घरों में भी सोलर ऊर्जा से बिजली मिले, यही नहीं अतिरिक्त बिजली से परिवार की आय भी हो, इसके लिए रूफटॉप सोलर प्लांट्स लगाने की पहल शुरू हुई है। मैं इन उपलब्धियों के लिए भी आप सबकी सराहना करता हूँ।

साथियों,

साथ-साथ मुझे यह भी बताया गया है, दमन के लोग इन दिनों यहाँ स्वच्छता अभियान भी चला रहे हैं। यह दिखाता है कि स्वच्छता किस तरह दमन के जनजीवन में संस्कार बन चुका है और यह संस्कार स्वच्छता में नजर आ रहे हैं। मैं इस जनभागीदारी के आपके प्रयासों के लिए दमन के लोगों का अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

दादरा नगर हवेली, दमन और दीव, यह संघ शासित प्रदेश होने के साथ ही भारत की पहचान और विरासत भी हैं। इसलिए, इसके विकास के लिए हमारे लक्ष्य भी साधारण नहीं हैं। मुझे याद है, जब मैं पिछले साल सिलवासा आया था, तब मैंने आपको सिंगापुर का उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि एक समय सिंगापुर मछुआरों का छोटा सा गांव था। लेकिन, सिंगापुर के लोगों ने एक सपना देखा, वहां के लोगों ने बड़ा लक्ष्य तय किया और आज वही सिंगापुर दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नस हब बन चुका है। आज दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव भी वही सपना देख रहे हैं। ये नमो एयरपोर्ट, दमणगंगा नदी पर बनने वाला आइकॉनिक ब्रिज, ‘बीच फ्रंट’ उस पर बनने वाला कन्वेंशन सेंटर, ऐसे सभी इनफ्रास्ट्रक्चर के जरिए हम भविष्य के बड़े संकल्पों की नींव रख रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए आप लोगों की आवाजाही आसान होगी। यहाँ बिज़नेस के लिए नई संभावनाएं बनेंगी। दमन के दोनों किनारों पर विकास की गति और तेज होगी।

साथियों,

यहाँ hospitality economy से जुड़े अवसर बढ़ेंगे और साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर जैसी सुविधा से व्यापार, लॉजिस्टिक्स को भी नई गति मिलेगी।

साथियों,

इस क्षेत्र में ब्लू इकॉनमी के लिए हमने जो विज़न तैयार किया है, वो विज़न भी हाइटेक इनफ्रास्ट्रक्चर की ताकत से ही साकार होगा। इसीलिए, लक्षद्वीप के कलपेनी और कदमत द्वीपों में भी आज ही आधुनिक पोर्ट्स की आधारशिला रखी जा रही है। यह सभी प्रयास ब्लू इकॉनमी में देश की ताकत को बढ़ाएँगे और जैसा मैंने कहा यह लक्षद्वीप का भाग्‍य बदलने वाले initiative हैं।

साथियों,

भाजपा की सरकार में, एनडीए की हमारी सरकार में हमारे लिए विकास की पहली कसौटी है- गरीब, वंचित, आदिवासी और मिडिल क्लास के जीवन में बदलाव! इसके लिए, हेल्थ सेक्टर हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। बीते वर्षों में देश हेल्थ केयर के लिए होलिस्टिक विजन लेकर आगे बढ़ा। हमने इलाज से जुड़ी हर चिंता का समाधान किया है। आज गरीब से गरीब के पास भी आयुष्मान कार्ड की सुविधा है। उनके पास 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का भरोसा है। बीमारी की समय से जांच हो सके, इसके लिए, प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था है। जन औषधि केन्द्रों के जरिए सस्ती दवाइयाँ भी मिल रही हैं। ये सुविधाएं और बेहतर हों, और आधुनिक हों, इसके लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए आज स्वास्थ्य सेवाओं को टेक्नॉलॉजी से जोड़ा जा रहा है।

साथियों,

आयुष्मान कार्ड और जन औषधि केंद्रों से ही गरीब और मध्यम वर्ग के करीब सवा दो लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं।

भाइयों-बहनों,

केंद्र सरकार की नीतियों का बहुत लाभ इस क्षेत्र के लोगों को भी हुआ है। एक समय यहां इलाज की अच्छी सुविधाओं का भी अभाव था। यहाँ मेडिकल कॉलेज तक नहीं था। लेकिन, अब मेडिकल कॉलेज भी है और उसमें post-graduation की पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सिलवासा का नमो हॉस्पिटल पिछले साल से हजारों लोगों की सेवा कर रहा है। आज दमन में भी नमो हॉस्पिटल का लोकार्पण हुआ है। इस क्षेत्र के लोगों को भी अब और बेहतर हेल्थ केयर का लाभ मिलेगा।

साथियों,

हमारी सरकार कैसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चल रही है, इसका एक प्रमाण नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के नतीजों में भी मिलता है। एक समय भारत में ज़्यादातर बच्चों की डिलिवरी अस्पताल में नहीं होती थी। आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही है, जिसके कारण माता मृत्यु या नवजात की मृत्यु में बहुत बड़ी रुकावट आई है। मिशन इंद्रधनुष की वजह से बच्चों के टीकाकरण के क्षेत्र में भी भारत ने अच्छी प्रगति की है। 2014 से पहले केवल 60 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हो पाता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले 30 प्रतिशत से भी कम परिवार स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े हुए थे। आज आयुष्मान भारत, उन आंकड़ों को भी बदल दिया है। अब 60 प्रतिशत से अधिक परिवारों को ये सुरक्षा मिल रही है।

साथियों,

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के इन प्रयासों का लाभ अगर किसी को सबसे ज्यादा मिला है, तो वो मेरे देश की नारी शक्ति है।

साथियों,

पहले इस क्षेत्र के युवाओं को हायर एजुकेशन के लिए भी बाहर जाना पड़ता था। लेकिन, आज यहाँ नेशनल लेवल के, एक नहीं कई इंस्टीट्यूट बन चुके हैं। पिछले वर्षों में यहां स्कूलों की नई बिल्डिंग्स बनी हैं, स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम भी बने हैं। 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों को इनका लाभ मिल रहा है। मुझे खुशी है कि केंद्र शासित प्रदेश धीरे-धीरे एजुकेशन के क्षेत्र में आगे आ रहा है। स्वामी विवेकानंद एजुकेशन हब जैसे कई निर्माण यहाँ हो रहे हैं।

भाइयों-बहनों,

इस शिक्षा क्रांति में हमारी बेटियाँ पीछे न रहें, ये भी हमारा संकल्प है। इसके लिए कई बड़े प्रयास किए जा रहे हैं। सरस्वती साइकिल स्कीम, सरस्वती विद्या योजना, यहां की बेटियों को बहुत मदद कर रही है।

साथियों,

आज भारत की कोशिश है कि देश के युवाओं को डिग्री के साथ ही सही दिशा भी मिले। उन्हें ऐसा एक्सपोजर मिले, जो लोकल टैलेंट को ग्लोबल अवसरों से जोड़े। डिजाइन, लॉ, इंजीनियरिंग, मेडिकल एजुकेशन, आईटी, ड्रोन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हमारी आज की तैयारी भारत की वर्कफोर्स को मजबूत बनाएगी। इसलिए प्रोफेशनल संस्थानों का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।

साथियों,

आज NIFT के अठारहवें campus की आधारशिला रखी गई है। ये संस्थान यहां के युवाओं को ग्लोबल एक्सपोजर से जोड़ेगा। आई.टी.आई. दमन में ड्रोन टेक्नीशियन जैसे नए कोर्सेस भी शुरू हुए हैं। पीएम विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, इनसे जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का लाभ भी युवाओं को मिल रहा है।

साथियों,

देश में खेलों को भी नई सोच के साथ आगे बढ़ाया गया। हमारे खेल अब केवल बड़े शहरों या बड़े स्टेडियमों तक सीमित नहीं हैं। खेलो इंडिया जैसे प्रयासों ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का नया मंच दिया है। इससे छोटे-छोटे क्षेत्रों में नेशनल लेवल पर खेल के जगत में हमारे बच्चे आगे आ रहे हैं और इसका भी लाभ इस क्षेत्र को हुआ है। दीव आज beach sports का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। घोघला बीच पर हुए Beach Games ने भी देश का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींचा है। आज यहां आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार काम हो रहा है। खानवेल में फुटबॉल सेंटर और दमन में वॉलीबॉल ट्रेनिंग सेंटर यहां खेल संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं।

साथियों,

आज देश का बहुत बड़ा फोकस टूरिज्म पर भी है। हमारा प्रयास है कि टूरिज्म से स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिले। छोटे-छोटे स्थानों को भी बड़े-बड़े अवसरों से जोड़ा जा सके। ‘देखो अपना देश’ जैसे प्रयास ने लोगों को देश की विविधता के बारे में जानने के लिए प्रेरित किया है। आज भारत में हैरिटेज टूरिज्म, ‘बीच टूरिज्म’, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, इन सेक्टर्स को नई ऊर्जा मिल रही है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में तो पर्यटन भी इतनी असीम संभावनाओं वाला एक क्षेत्र है। इस क्षेत्र को प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत वरदान मिला है। इसीलिए पर्यटन को लेकर देश ने जिन नीतियों पर काम किया है, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव को उसका बड़ा लाभ मिल रहा है। 2021 में यहां करीब 6 लाख टूरिस्ट आए थे। 2025 में ये संख्या बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही वर्षों में टूरिज्म फुटफॉल में करीब 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। यह बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सुविधाओं, साफ-सुथरे ‘बीच’ की वजह से संभव हुआ है। दमन नाइट मार्केट, रामसेतु सी-फ्रंट, नमोपथ सी-फ्रंट, नानी दमन फोर्ट, गंगेश्वर टेंपल कॉम्प्लेक्स, ऐसे अनेक स्थान आज इस पूरे क्षेत्र की नई पहचान बना रहे हैं।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, इसके सपनों को पूरा करने के लिए हमें यहाँ की औद्योगिक ताकत को भी बढ़ाना है। यह भी गर्व की बात है कि इस यूनियन टेरिटरी ने man-made fibre के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। दादरा और नगर हवेली को National Man-Made Fibre Capital के रूप में पहचाना जाता है। प्लास्टिक एक्सपोर्ट में भी ये क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार ने यहां इंडस्ट्रीज और MSMEs को सपोर्ट देने के लिए भी लगातार प्रयास किए हैं। यहां MSMEs और अन्य इंडस्ट्रीज को करोड़ों रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश के लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में ये क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनेगा।

साथियों,

जब विकास के विजन के साथ संवेदनशील गवर्नेंस जुड़ता है, तो परिवर्तन तेज गति से जमीन पर उतरता है। दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में हमारे इन प्रयासों का प्रभाव देखकर संतोष होता है। मुझे इस धरती के लोगों पर पूरा विश्वास है। यहां के युवा, यहां की माताएं-बहनें, यहां के किसान, कारीगर, श्रमिक और उद्यमी, आने वाले वर्षों में इस विकास यात्रा को और आगे ले जाएंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ, आपके सपनों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर विकास परियोजनाओं के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।