26 फ़रवरी, 2012

सुरत

मारे यहाँ जितना महत्त्व शिक्षा का है उससे ज्यादा महत्व दीक्षा का है और शिक्षित व्यक्ति जब तक दीक्षित न हो तब तक शिक्षा अधूरी मानी जाती है. यदि शास्त्रों में देखें तो ‘तैत्तिरीय उपनिषद्’ में पहली बार इस प्रकार के दीक्षांत समारोह का उल्लेख है. परंतु हमारे यहाँ परंपरागत रूप से गुरुकुल की जो शिक्षा परंपरा थी उसमें विद्यार्थिओं की शिक्षा पूर्ण होने के बाद गुरुजन अनेक कसौटियों में से उन्हें पार करते थे, ऐसे अनेक सहज आयोजन किए जाते जिनमें से गुजरते-गुजरते, उसने जो भी कुछ सीखा हो उसका अमल नित्यक्रम के दौरान करके दिखाना पडता था, उसे तो इस बात का ज्ञान भी नहीं होता था कि वह जो कर रहा है उसकी कसौटी का कोई हिस्सा है. और इसका बहुत माइन्यूट ऑब्ज़र्वेशन होता था और उसके बाद ही वे डिग़्रीधारी बनते थे और उन्हें जीवन के अन्य आश्रम की ओर जाने की अनुमति मिलती थी.

मित्रों, विद्यार्थीकाल उत्तम समय होता है. एक ओर इस बात का आनंद होता है कि भाई, आज यहाँ से डिग़्रीधारी बन कर हम समाज में जा रहे हैं, लेकिन उसके साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी शुरू होती है. आप विद्यार्थी हों तब मित्रों के बीच, समाज के बीच खड़े हों और परिचय दें कि मैं फाइनल यीअर में पढ़ता हूँ तो लम्बे प्रश्न नहीं पूछे जाते. पढ़ रहे हो, बात पूरी हो जाती है. लेकिन जिस पल आप कहो कि अब मैं ग्रैजुएट हो गया हूँ तो तुरंत ही प्रश्न आता है कि तो अब क्या कर रहे हो? अब क्या करने वाले हो? क्या सोचा है? और नौकरी के मामले में तो यह चलता ही है; साथ ही छोकरी के मामले में भी शुरु हो जाता है और यदि लड़की हो तो लड़के के बारे में शुरु होता है. यह सहज बात है. पढ़ते हों तब तक कोई टेन्शन नहीं, कोई पूछे नहीं और इसलिए कुछ लोग क्या करते हैं कि कहीं और कोई मेल न हो तब तक सी.ए. में एन्ट्री ले लेते हैं, ताकि दूसरा बंदोबस्त न हो तब तक कहने को चलें कि, क्या कर रहे हो? सी.ए. कर रहा हूँ, अनएन्डिंग प्रोसेस है... मित्रों, जब हम विद्यार्थी हों तब जीवन में अनेक लोग होते हैं जो हमारा मार्गदर्शन करते हैं. एक प्रकार से प्रोटेक्टेड लाइफ होती है. परिवार में परिवारजन चिंता करते हैं, कुटुम्ब के साथ संबंधित बुज़ुर्ग चिंता करते हैं, शिक्षा संस्था का चपरासी भी कई बार हमें गाइड करता है कि नहीं-नहीं भाई, ऐसा नहीं करते... ऐसा होता है, आपने अनुभव किया होगा मित्रों, और हमे लगता है कि इस चपरासी को समझ में आता है और मुझे नहीं आया..! शिक्षकगण भी हमें गाइड करते हैं कि भाई, ऐसा करते हैं और ऐसा नहीं करते हैं. और इसके कारण हम निश्चिंत रहते हैं. कोई भी भूल हो तो कहीं कोई रोकने वाले, कोई टोकने वाले की व्यवस्था होती है और इसके कारण मुक्त भाव से कदम उठाने की हिम्मत आती है. लेकिन जिस पल इस व्यवस्था में से बाहर आते हैं तबसे प्रत्येक पल निर्णय खुद ही करना पडता है. आस-पास देखें तो कोई शिक्षक खड़े नहीं होते, समाज की हमारी ओर देखने की पूरी मानसिकता बदल जाती है और एक प्रकार से एक कसौटी काल का आरम्भ होता है. आज जो लोग पदवी प्राप्त कर रहे हैं वे सारे मित्र कसौटी काल में कदम रख रहे हैं. और जब कसौटी शुरू हो रही है उस वक्त प्रत्येक पल, बचपन से लेकर आज तक जहाँ कहीं भी शिक्षा प्राप्त की होगी, जिन-जिन गुरुजनों से जो कुछ सीखे होंगे उसकी पूरी कथा मन में कदम-कदम पर याद आती है. कुछ करने जाएँ वहीं खयाल आए कि हाँ यार, क्लास में साहब ने यह बात तो बताई थी..! कहीं इंटरव्यू देने जाएँ और कोई प्रश्न आए तो तुरंत ही विचार आए कि हाँ यार, साहब ने कहा तो था लेकिन आज याद नहीं आ रहा है. हर कदम पर यह कार्यकाल आपको याद आएगा मित्रों। आज जिनका दीक्षांत समारोह हो रहा है उन्हें तो समझना ही है, परंतु जो लोग भविष्य के दीक्षांत समारोह के स्वाभाविक दावेदार हैं वे लोग भी यहाँ बैठे हैं, उनको भी इसमें से प्रेरणा मिले कि हाँ भाई, जीवन की शुरूआत कठिन होती है. जीवन में हर कदम पर प्रत्येक कसौटी में से पार होना पडता है.

मैं चाहूंगा कि वीर नर्मद के नाम के साथ जुडी इस युनिवर्सिटी के जब हम सब विद्यार्थी हैं तो और कुछ कर सकें या न कर सकें मित्रों, लेकिन नर्मद का एक वाक्य जीवन में उतारें, ‘डगलुं भर्युं के ना हठवुं...’ (‘एक बार कदम बढ़ाने के बाद डगमगाना नहीं...’). और नर्मद की पुण्यतिथि पर जब हमें आशीर्वाद प्राप्त हो रहे हैं तब... मित्रों, समाज-जीवन में असमंजस में रहने वाले लोग न तो कभी कुछ पा सकते हैं, न ही कभी समाज को कुछ दे सकते हैं. जो लोग निर्णायक होते हैं, वे ही लोग निर्धारित मंज़िल को प्राप्त कर सकते हैं. जो लोग अनिर्णायक होते हैं, उनका काफ़ी सारा वक्त एक उलझन भरी अवस्था में ही रहता है. आपने कई लोग देखे होंगे, बस स्टेशन पर... चार बस खड़ी हों तो तय नहीं कर पाते कि इसमें जाएँ या उसमें. और तीन चली जाए उसके बाद आखिर में जो मिले उसमें चढ़ जाते हैं, तय ही नहीं कर पाते. और यह एक आम अनुभव होता है. बहुत सारे लोग बीमार हुए हों तो ऑपरेशन कराएँ या न कराएँ, इस डॉक्टर के पास या उस डॉक्टर के पास... और तब तक रोग इतना उग्र हो जाता है कि डॉक्टर के हाथ की बाज़ी ही नहीं रहती है. कारण? अनिर्णायकता. मित्रों, असमंजस से भरी जिंदगी और युवा के बीच कभी भी, कोई भी संबंध नहीं होना चाहिए. मैं युवा हूँ, इसका मतलब है कि मैं निर्णायक हूँ और अगर मैं निर्णायक नहीं हूँ, तो निश्चित रूप से मैं युवा नहीं हूँ. मैं अत्यंत भयभीत हूँ, मैं अत्यंत असुरक्षित हूँ, मुझे कदम बढ़ाने में डर लगता है कि कहीं मैं गिर न जाऊँ... अर्थात, मेरे मन का यौवन मैंने खो दिया है और इसलिए निर्णायक होना, दुविधा मुक्त जिंदगी होना युवा होने की पहली शर्त है मित्रों। और जो लोग निर्णायक होते हैं, वे साहसिक भी होते हैं. कश्मकश से भरा व्यक्ति इसलिए असमंजस में रहता है कि मूलतः उसमें साहस का अभाव होता है. वह भयभीत है कि कहीं कुछ हो जायेगा तो? कहीं कोई कुछ कहेगा तो? कहीं ऐसा होगा तो? मित्रों, बच्चों को कभी कोई कश्मकश नहीं होती, क्योंकि उनमें भय नहीं होता. जिसे भय हो, वह असमंजस में रहता है और इसलिए व्यक्ति के जीवन में अभय, मन की रचना में अभय, जीवन की प्रगति के लिए अनिवार्य होता है. जब तक व्यक्ति भयमुक्त मन:स्थिति में न हो, कैसे भी माहौल में भय स्पर्श न करता हो, अंधकार जैसा कुछ प्रतीत न होता हो, प्रत्येक पल प्रकाश दिखता हो, तब ही वह जिंदगी की राह निश्चित कर सकता है। और मित्रों, प्रकाश को देखने के लिए सूरज के उगने की प्रतीक्षा नहीं करनी पडती. मित्रों, सामर्थ्यवान लोग तारों के प्रकाश में भी रास्ता खोज लेते हैं. जिंदगी सुनहरे पलों का इंतजार करने के लिए नहीं होती है, मित्रों. अंधकार भरे जीवन में भी  सितारों की रोशनी से रौनक आ सकती है और मित्रों, घना अंधकार हो, बादल छाया वातावरण हो तो भी मेरे आदिवासी भाई को जुगनू के प्रकाश में जिंदगी की राह बनाते हुए देखा है. अगर एक जुगनू जिंदगी की राह दिखा सकता है तो मैं तो एक ऐसी समृद्ध जिंदगी जीने वाला मानव हूँ, मेरे जीवन में रुकावट क्यों? यदि ऐसी संकल्प शक्ति हो, तो जीवन बदला जा सकता है.

मित्रों, कई बार समाज-जीवन में हम जब काम करते हों तब आपको ऐसा लगता होगा कि मेरे पिताजी ने फीस भरी थी इसलिए मैं ग्रैजुएट हुआ हूँ, उसके कारण आज पदवी प्राप्त कर रहा हूँ, ऐसा नहीं है दोस्तों. मैं देर रात तक पढ़ता था इसलिए अब पदवीधारी बना हूँ, ऐसा नहीं है. परीक्षा के दिनों में अच्छी से अच्छी फिल्म भी मैंने छोड़ दी थी इसलिए पास हुआ हूँ, ऐसा है? ऐसा नहीं होता. अनेक लोगों ने मेरी जिंदगी बनाने के लिए कुछ न कुछ योगदान दिया है. जब कभी कॉलेज में उब जाता था और कॅम्पस के बाहर जाकर किसी पेड़ की छाया में छोटी-सी केतली लेकर जो चाय बनाने वाला बैठता था, मैं उसकी चाय पीकर ताज़गी का अनुभव करता था और फिर से क्लास रूम में चला आता था. आज पदवी लेते समय उसे भी याद करना, उसे भी ज़रा याद करना कि कभी एक सामान्य गली में जीने वाले आदमी ने आपकी पसंद की चाय बनाकर आपको ताज़गी दी थी. मित्रों, कभी परीक्षा में दौड़ते हुए जाते होंगे, बस छूट गई होगी, देर हो गई होगी और आपने ड्राइवर को विनती की होगी कि साहब, ज़रा दबाना भाई, जल्दी चलाना, मुझे परीक्षा के लिए पहुँचना है और ड्राइवर ने रिस्क लेकर शायद आपको पहुँचाया होगा. मित्रों, आज उन्हें भी याद करना. मित्रों, आप जिस कुर्सी पर बैठकर, जिस बेंच पर बैठकर पढ़े होंगे उस बेंच को साफ करने के लिए किसी चपरासी ने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी होगी, उस चपरासी को भी ज़रा याद करना. मित्रों, कितने लोगों का योगदान होता है, कितने लोगों के प्रयत्नों के परिणामस्वरूप मैं जिंदगी में कुछ प्राप्त कर सकता हूँ, इसका अर्थ यह हुआ कि समग्र समाज का मुझ पर ऋण होता है. इस समाज के ऋण चुकाने का समय मेरे पदवी प्राप्त करने के बाद शुरु होता है. जीवन की प्रत्येक पल को मैं इस समाज का ऋण चुकाता रहूँगा. इस समाज का मुझ पर जो ऋण है, मैं आजीवन कभी उसे भूलूँगा नहीं. इस कर्तव्य के पालन को मैं निभाऊँगा. यह अगर जीवन का भाव होगा तो हम जीवन में एक संतोष की अनुभूति कर सकेंगे.

मित्रों, इस पदवीदान समारोह में से बिदा हो रहे हो तब यदि आपको ऐसा लगे कि अब आप विद्यार्थी नहीं रहे तो आप समझ लेना कि आप जीवन की ओर नहीं, मृत्यु की ओर प्रयाण कर रहे हो. मित्रों, मैं बहुत ही जिम्मेदारी भरी बात कर रहा हूँ. यहाँ से निकलते ही यदि आपने ऐसा मान लिया कि आपका विद्यार्थी काल समाप्त हो गया तो इसका मतलब यह हुआ कि आपका जीवन काल समाप्त हो गया और आपका मृत्यु काल प्रारंभ हो गया है. मित्रों, विद्यार्थी जीवनपर्यंत जीवित रहना चाहिए. जीवन के अंत तक विद्यार्थी जिन्दा रहना चाहिए. हमारे भीतर यदि विद्यार्थी जीवित नहीं है तो जीवन की विकास यात्रा असंभव है, जीवन में ठहराव आ जाता है. और कोई भी युवा ऐसा नहीं हो सकता कि जिसके जीवन में ठहराव आए, जीवन में निरंतर विकास यात्रा हो और इसके लिए अनिवार्य है कि प्रत्येक पल मैं विद्यार्थी रहूँ. प्रत्येक पल को जानने की मेरी कोशिश रहे, मेरी जिज्ञासा रहे. प्रत्येक पल मुझ में कुछ सीखने की मनोवृत्ति रहे. और जीवन के मूलभूत तत्त्वों को जीवन के साथ बांधना पड़ता है, उन्हें अपने जीवन का डी.एन.ए. बनाना पड़ता है. विद्यार्थी अवस्था, मन की विद्यार्थी अवस्था हमारा अपना डी.एन.ए. होना चाहिए. और अगर ऐसा हो तो ही जीवन में प्रगति की सम्भावना रहती है.

भाईयों-बहनों, यह वर्ष स्वामी विवेकानंदजी की 150 वीं जयंती का वर्ष है. और 150 वीं जयंती का वर्ष जब मना रहे हैं तब गुजरात ने, राज्य सरकार ने इसे ‘युवा शक्ति वर्ष’ के रूप में मनाने का निश्चय किया है और युवा शक्ति यानि सिर्फ निबंध स्पर्धाएँ या वक्तृत्व स्पर्धाएँ हो, वहीं तक सीमित नहीं है. एक फोकस किया है, कौशल वर्धन पर. हुनर... मित्रों, जीवन में ज्ञान के साथ हुनर की भी उतनी ही आवश्यकता होती है और अगर हुनर न हो तो ज्ञान कई बार गड्ढे में बेकार पड़ा रह जाता है. इस घटना का मैंने कई बार उल्लेख किया है, आज फिर से करना चाहता हूँ. एक बार दादा धर्माधिकारी, जो विनोबाजी के साथी थे, गाँधीजी की विचारधारा के एक अनुयायी थे. उनके कई पुस्तक पढ़ने लायक हैं. दादा धर्माधिकारी ने एक जगह लिखा है कि एक बार एक युवक मुझसे मिलने आया और उसने मुझसे कहा कि, “दादा, कुछ नौकरी का कर दो...”, तो दादा ने उसे पूछा, “भाई, तुझे क्या आता है?”, तो उस युवक ने जवाब दिया, “मैं ग्रैजुएट हूँ” उन्होंने कहा कि ठीक है, लेकिन तुम्हें आता क्या है?” तो उसने फिर से कहा, “मैं ग्रैजुएट हूँ”, और फिर अपनी बैग में से सर्टिफिकेट दिखाए, तो उन्होंने कहा, ”यह सब तो ठीक है, तुम ग्रैजुएट हो लेकिन तुम्हें आता क्या है?” फिर से उसने कहा, “साहब, मैं ग्रैजुएट हूँ”. दादा ने कहा, “भाई, वो सब तो ठीक है, लेकिन मुझे बताओ कि तुम ड्राइविंग करना जानते हो?” तो बोला कि नहीं, “तुम टाइपिंग जानते हो”, तो बोला कि नहीं, “तुम खाना बनाना जानते हो, तैरना जानते हो?”, “नहीं, लेकिन मैं ग्रैजुएट हूँ, मेरे पास सर्टिफिकेट है.” मित्रों, डिग्री के साथ-साथ जीवन कौशल अनिवार्य होता है और इस बात को ध्यान में रखते हुए, गुजरात में स्वामी विवेकानंदजी की 150 वीं जयंती के अवसर पर पूरे राज्य में कौशल वर्धन के लिए एक बड़ा अभियान हम चलाने वाले हैं. हर किसी में कोई न कोई एक्स्ट्रा टैलन्ट हो, कोई न कोई एक्स्ट्रा कौशल हो, कोई न कोई हुनर उसे आता हो, उसे आत्मनिर्भरता से जीने का सामर्थ्य मिले. मित्रों, भारत एक भाग्यशाली देश है और हम सब एक ऐसे युग में हैं कि जिस वक्त हिंदुस्तान दुनिया का सबसे युवा देश है. इस देश के 65% लोग 35 से कम उम्र के हैं. जिस देश के पास इतनी बड़ी युवा शक्ति हो, उसके सपने कितने युवा हो सकते हैं, कितने तेजस्वी हो सकते हैं..! ऐसे युवा सपनों, युवा तेजस्वी सपनों के साथ हमारी भारतमाता विश्वगुरु बने; स्वामी विवेकानंदजी के इस स्वप्न को साकार करने का युग हमारे जीवन काल में आया है. और अगर ऐसी भावनाएँ युवाओं के मन में प्रकट कर सकें तो इतना बड़ा देश, 120 करोड़ की जनसंख्या, 65% नौजवानों से भरा देश, मित्रों, उनके कौशल के द्वारा, उनकी क्षमता के द्वारा, उनकी बुद्धि के द्वारा वह विश्व विजेता बन सके ऐसा सामर्थ्य रखता है. और, विवेकानंदजी का यह स्वप्न था कि “मैं मेरी आँखों के सामने देख सकता हूँ, यह भारतमाता एक न एक दिन जगदगुरु के स्थान पर बिराजमान होगी”. मित्रों, विवेकानंदजी का स्वप्न, 150 साल बीत चुके हैं, उसे पूर्ण करने की जिम्मेदारी हमारे सिर पर है. एक युवा के रूप में संकल्प ले करके हम निकलें तो भारत माता को जगदगुरु के स्थान पर बिराजमान कर सकते हैं.

मित्रों, गुजरात में शिक्षा की जो मुहिम चलाई है, इसके सुफल देखने को मिल रहे हैं. कन्या शिक्षा का अभियान चलाया, प्रवेशोत्सव चलाया. जिन दिनों मैंने काम की शुरुआत की थी, 7-8 साल पहले, तब लोगों को अंदाज़ा नहीं था कि यह सब क्या चल रहा है. मित्रों, आज स्थिति ऐसी है कि उच्च शिक्षा के लिए इतने बड़े पैमाने पर लोग जा रहे हैं. वंचित, दलित, आदिवासी सभी बड़ी मात्रा में जा रहे हैं. और, इसलिए इस बजट में 100 करोड़ रुपयों जैसी बड़ी राशि सिर्फ दूरवर्ती इलाकों के बच्चे जो पढ़-लिखकर आगे आए हैं, उनके लिए हॉस्टल बनाने के लिए तय की है. गुजरात के बजट में 100 करोड़ जितनी बड़ी राशि का आवंटन सिर्फ हॉस्टल बनाने के लिए किया है, ताकि आंतरिक क्षेत्रों के लोगों को पढ़ने की सुविधा मिले, उन्हें रहने के लिए कहीं जगह मिले, ऐसा एक बड़ा अभियान उठाया है. मित्रों, गुजरात का विकास जिस प्रकार से हो रहा है उसके अनुरूप मानव-शक्ति का विकास हो इस विषय पर हमने ध्यान केंद्रित किया है. 2001 में जब गुजरात की जनता ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी थी तब इस राज्य में सिर्फ 11 युनिवर्सिटी थीं. भाईयों-बहनों, आज 41 युनिवर्सिटी हैं. पिछली सदी में जितनी कॉलेज थीं, उससे ज्यादा युनिवर्सिटी हैं और उन युनिवर्सिटीयों ने भी विश्व कक्षा की युनिवर्सिटी की दिशा में कदम बढ़ाये हैं और उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं.

 

ज जो नौजवान मित्र जीवन की एक नई राह पर कदम रखने जा रहे हैं उन्हें मैं हार्दिक अभिनंदन देता हूँ, शुभकामनाएँ देता हूँ.

 

न्यवाद..!

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केम छो।

गुजरात के मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के अन्य मंत्रिगण, सांसद और विधायकगण, Excellencies, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

2026 के आरंभ के बाद ये मेरा गुजरात का पहला दौरा है। और सुखद इसलिए भी है क्योंकि 2026 की मेरी यात्रा सोमनाथ दादा के चरणों में सर झुकाकर के हुई है। और अब मैं राजकोट में इस शानदार कार्यक्रम में हिस्सा ले रहा हूं। यानी विकास भी, विरासत भी, ये मंत्र हर तरफ गूंज रहा है। मैं देश और दुनियाभर से यहां पधारे आप सभी साथियों का वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट में स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

जब भी वाइब्रेंट गुजरात समिट का मंच सजता है, तो मुझे सिर्फ एक समिट नहीं दिखती, मुझे 21वीं सदी के आधुनिक भारत की वो यात्रा नजर आती है, जो एक सपने से शुरू हुई और आज एक अटूट भरोसे तक पहुंच चुकी है। दो दशकों में वाइब्रेंट गुजरात की ये यात्रा एक ग्लोबल बेंचमार्क बन गई है। अभी तक इसके 10 एडिशन हो चुके हैं, और हर एडिशन के साथ इस समिट की पहचान और भूमिका दोनों मजबूत होती रही है।

साथियों,

मैं वाइब्रेंट गुजरात समिट के विजन के साथ पहले दिन से जुड़ा रहा हूं। शुरूआती दौर में हमारा मकसद था कि गुजरात के सामर्थ्य से दुनिया परिचित हो, लोग यहां आएं और यहां निवेश करें, और इससे भारत को फायदा हो, दुनियाभर के निवेशकों को भी फायदा हो। लेकिन आज ये समिट इंवेस्टमेंट से भी आगे बढ़कर ग्लोबल ग्रोथ, इंटरनेशनल कॉरपोरेशन और पार्टनरशिप का एक मजबूत प्लेटफॉर्म बन गई है। बीते सालों में ग्लोबल पार्टनर्स की संख्या लगातार बढ़ती गई है, और समय के साथ ये समिट इंक्लूजन का भी बहुत बड़ा उदाहरण बन गई है। यहां कॉर्पोरेट ग्रुप्स के साथ-साथ, को-ऑपरेटिव्स, MSMEs, स्टार्ट-अप्स, मल्टीलेटरल और बाय-लेटरल संगठन, इंटरनेशनल फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स, सभी एक साथ संवाद करते हैं, चर्चा करते हैं, गुजरात के विकास के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं।

साथियों,

बीते दो दशकों में वाइब्रेंट गुजरात समिट ने लगातार कुछ नया, कुछ विशेष किया है। वाइब्रेंट गुजरात की ये रीजनल समिट भी इसका एक उदाहरण बन गई है। इसका फोकस गुजरात के अलग-अलग हिस्सों के Untapped potential को performance में बदलने का है। जैसे किसी क्षेत्र में Coastal line का सामर्थ्य है., तो कहीं एक लंबी Tribal Belt है, कहीं Industrial Clusters का एक बड़ा इकोसिस्टम है, तो कहीं, खेती और पशुपालन की समृद्ध परंपरा है। यानी गुजरात के अलग-अलग रीजन्स की अपनी ताकत है। वाइब्रेंट गुजरात की रीजनल समिट, गुजरात की इन्हीं रीजनल संभावनाओं पर फोकस करते हुए आगे बढ़ रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। बीते वर्षों में भारत ने बहुत तेज प्रगति भी की है। और इसमें गुजरात की, आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका रही है। भारत दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनॉमी बनने की तरफ तेज गति से आगे बढ़ रहा है। और जो आंकड़े आ रहे हैं, उससे ये साफ है कि भारत से दुनिया की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। भारत दुनिया की fastest growing large economy है, इंफ्लेशन काबू में है, एग्रीकल्चर प्रोडक्शन में भारत नए रिकॉर्ड बना रहा है, भारत मिल्क प्रोडक्शन में नंबर वन है, जेनरिक मेडिसिन प्रोडक्शन के मामले में भारत नंबर वन है, दुनिया में जो देश सबसे ज्यादा वैक्सीन्स बनाता है, उस देश का नाम भारत है।

साथियों,

भारत की ग्रोथ से जुड़ी फैक्ट शीट, Reform, Perform & Transform के मंत्र की सक्सेस स्टोरी है। बीते 11 वर्षो में भारत, दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल डेटा कंज्यूमर बना है, हमारा यूपीआई, दुनिया का नंबर वन रियल टाइम डिजिटल ट्रांजेक्शन प्लेटफॉर्म बना है। कभी हम 10 में से 9 मोबाइल बाहर से मंगाते थे। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफेक्चरर है। आज भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट अप इकोसिस्टम है। सोलर पावर जेनरेशन के मामले में भी टॉप तीन देशों में से भारत एक हैं। हम तीसरे बड़े एविएशन मार्केट हैं, और मेट्रो के मामले में भी हम दुनिया में टॉप थ्री नेटवर्क में शामिल हो गए हैं।

साथियों,

आज हर ग्लोबल एक्सपर्ट, ग्लोबल संस्थाएं, भारत को लेकर bullish हैं। IMF, भारत को ग्लोबल ग्रोथ का इंजन बताता है। S&P, Eighteen ईयर्स के बाद, भारत की रेटिंग अपग्रेड करती है। फिट्च रेटिंग्स भारत की मेक्रो स्टेबिलिटी और फिस्कल क्रेडिबिलिटी की प्रशंसा करती हैं। भारत पर दुनिया का ये भरोसा इसलिए है, क्योंकि ग्रेट ग्लोबल अन-सर्टेनिटी के बीच, भारत में हम एक अभूतपूर्व सर्टेनिटी का दौर देख रहे हैं। आज भारत में पॉलिटिकल स्टेबिलिटी है, पॉलिसी में कंटीन्यूटी है। भारत में नियो-मिडिल क्लास का दायरा बढ़ रहा है, उसकी परचेजिंग पावर बढ़ रही है, और इन फैक्टर्स ने भारत को असीम संभावनाओं का देश बना दिया है। मैंने लाल किले से कहा था - यही समय है, सही समय है। देश और दुनिया के हर निवेशक के पास इन संभावनाओं का लाभ उठाने का यही समय है, सही समय है। और वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट भी, आप सभी इंवेस्टर्स को यही संदेश दे रही है- सौराष्ट्र-कच्छ में निवेश का- यही समय है, सही समय है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, सौराष्ट्र और कच्छ, ये गुजरात के वो क्षेत्र हैं, जो हमें सिखाते हैं कि चुनौती चाहे कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, अगर ईमानदारी से, मेहनत से डटे रहा जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। ये वही कच्छ है, जिसने इस सदी की शुरुआत में भीषण भूकंप झेला था, ये वही सौराष्ट्र है जहां वर्षों तक सूखा पड़ता था। पीने के पानी के लिए माताओं-बहनों को कई-कई किलोमीटर चलकर जाना पड़ता था। बिजली का कोई ठिकाना नहीं था, हर तरफ मुश्किलें ही मुश्किलें थीं।

साथियों,

आज जो 20-25 साल के नौजवान हैं, उन्होंने उस दौर की सिर्फ कहानियां सुनी हैं। सच्चाई ये थी कि लोग कच्छ में, सौराष्ट्र में लंबे वक्त तक रहने के लिए तैयार नहीं होते थे। उस कालखंड में लगता था कि ये स्थितियां कभी भी नहीं बदलेंगी। लेकिन इतिहास साक्षी है, समय बदलता है और जरूर बदलता है। सौराष्ट्र-कच्छ के लोगों ने अपने परिश्रम से अपना भाग्य बदल दिया है।

साथियों,

आज सौराष्ट्र और कच्छ, सिर्फ अवसरों का ही क्षेत्र नहीं है, बल्कि ये क्षेत्र भारत की ग्रोथ का ‘एंकर रीजन’ बन चुका है। ये रीजन आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने वाला बहुत बड़ा सेंटर बन रहा है। भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में, सौराष्ट्र और कच्छ की बहुत बड़ी भूमिका है। और ये भूमिका Market-Driven है। और यही बात Investors के लिए सबसे बड़ा भरोसा बनती है। यहीं राजकोट में ही, ढाई लाख से अधिक MSME’s हैं, यहां अलग-अलग इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स में, स्क्रू ड्राइवर से लेकर ऑटो पार्ट्स, मशीन टूल्स, लग्जरी कार के लाइनर्स, एयरोप्लेन, फाइटर प्लेन और रॉकेट तक के पार्ट्स, ये हमारे राजकोट में बनते हैं। यानी यह Region Low-Cost Manufacturing से लेकर High-Precision, High-Technology Manufacturing तक, पूरी Value Chain को सपोर्ट करता है। और यहां का ज्वैलरी उद्योग तो अपने आप में विश्व प्रसिद्ध है। यह Sector, Scale, Skill और Global Linkage तीनों का उदाहरण है।

साथियों,

अलंग, दुनिया का सबसे बड़ा शिप-ब्रेकिंग यार्ड है, दुनिया के One-Third Ships यहीं पर Recycle होते हैं। यह Circular Economy में भारत की लीडरशिप का भी प्रमाण है। भारत Tiles के बड़े Producers में से एक है, इसमें भी मोरबी जिले का योगदान बहुत बड़ा है। यहां Manufacturing Cost-Competitive भी है और ये Globally Benchmarked भी है। और मुझे याद है, सौराष्ट्र के अखबार के लोग यहां मौजूद होंगे, वो मेरे बाल नोच लेते थे, एक बार मैंने यहां सौराष्ट्र में भाषण में कहा था। मैंने ऐसा कहा था कि में देख सकता हूं कि एक वक्त ऐसा आएगा कि मोरबी, जामनगर और राजकोट, यह त्रिकोण मिनी जापान बनेगा। तब मेरा बहुत मजाक उडाया गया था, आज में मेरी आँखो के सामने हकीकत देख रहा हूं। हमें धोलेरा Special Investment Region पर भी बहुत गर्व है। आज ये शहर Modern Manufacturing का बहुत बड़ा केंद्र बन रहा है। धोलेरा में भारत की पहली Semiconductor Fabrication Facility तैयार हो रही है। यह Region Future Technologies के लिए Early-Mover Advantage दे रहा है। यानी आपका Investment बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में जमीन पूरी तरह तैयार है। Infrastructure Ready है, Policy Predictable है और Vision Long-Term है।

साथियों,

सौराष्ट्र और कच्छ, भारत की Green Growth का, Green Mobility का और Energy Security का भी एक बड़ा Hub बन रहा है। कच्छ में 30 Gigawatt Capacity का Renewable Energy Park बन रहा है, ये दुनिया का सबसे बड़ा Hybrid Energy Park होगा। आप कल्पना कर सकते हैं, यह Park Paris City से भी पांच गुना बड़ा है। यानी इस क्षेत्र में Clean Energy, एक Commitment के साथ साथ, Commercial Scale Reality भी है। आप सभी Green Hydrogen के Potential से परिचित हैं, भारत में इस दिशा में अभूतपूर्व Speed और Scale पर काम चल रहा है। यहां कच्छ और जामनगर Green Hydrogen Production के बड़े केंद्र बन रहे हैं। कच्छ में एक विशाल Battery Energy Storage System (BESS) भी स्थापित किया जा रहा है। यानी Renewable Energy के साथ Grid Stability और Reliability भी Ensure की जा रही है।

साथियों,

कच्छ और सौराष्ट्र का एक और बहुत बड़ा सामर्थ्य है। यह Region भारत के World-Class Ports से लैस है। भारत के Exports का बहुत बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। पिपावाव और मुंद्रा जैसे Ports, भारत के Automobile Exports के Major Hubs बन चुके हैं। पिछले वर्ष गुजरात के Ports से करीब पौने दो लाख Vehicles Export हुए हैं। Logistics ही नहीं, यहां Port-Led Development के हर Aspect में Investments की अनंत संभावनाएं हैं। इसके साथ ही गुजरात सरकार Fisheries Sector को भी विशेष प्राथमिकता दे रही है। Fisheries Infrastructure पर यहां बड़े पैमाने पर काम हुआ है। Sea-Food Processing से जुड़े Investors के लिए यहां Strong Ecosystem तैयार है।

साथियों,

Infrastructure के साथ-साथ, Industry-Ready Workforce आज सबसे बड़ी आवश्यकता है। और गुजरात इस मोर्चे पर Investors को पूरी Certainty देता है। यहां Education और Skill Development का International Ecosystem मौजूद है। गुजरात सरकार की कौशल Skill University, Future-Ready Skills में युवाओं को तैयार कर रही है। ये Australia और Singapore की Universities के साथ Collaboration में काम कर रही है। National Defence University., भारत की पहली National-Level Defence University है। Gatishakti University, Road, Railway, Airway, Waterways और Logistics, हर Sector के लिए, Skilled Manpower तैयार कर रही है। यानी Investment के साथ-साथ यहाँ Talent Pipeline भी Assured है। आज ढेर सारी Foreign Universities भारत में नए-नए अवसर देख रही हैं। और Gujarat उनके लिए Preferred Destination बन रहा है। गुजरात में Australia की दो प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ अपने Campus शुरू कर चुकी हैं। आने वाले समय में ये संख्या और बढ़ने वाली है।

साथियों,

गुजरात में नेचर भी है, एडवेंचर भी है, कल्चर भी है और हैरिटेज तो है ही है। यानी टूरिज्म का जो भी अनुभव चाहिए, वो यहां मिलेगा। लोथल, भारत की साढ़े चार हज़ार साल पुरानी समुद्री विरासत का प्रतीक है। यहाँ दुनिया का सबसे प्राचीन मानव निर्मित डॉकयार्ड मिला है। यहाँ नेशनल मैरिटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स तैयार हो रहा है। कच्छ में आजकल रण उत्सव का आयोजन भी हो रहा है। यहां की टेंट सिटी में रुकना एक अलग अनुभव होता है।

साथियों,

जो जंगलों का, वाइल्ड लाइफ का शौकीन है, उसके लिए गिर फोरेस्ट में एशियाटिक लॉयन के दर्शन से बेहतर भला क्या अनुभव हो सकता है? यहां हर वर्ष नौ लाख से अधिक पर्यटक आते हैं। जिसे समंदर का साथ अच्छा लगता है, उनके लिए शिवराजपुर बीच है, जो ब्लू फ्लैग सर्टिफाइड है। इसके अलावा मांडवी, सोमनाथ, द्वारका में भी बीच टूरिज्म के लिए अनेक संभावनाएं हैं। यहां पास ही में दीव भी है, दीव भी वॉटर स्पोर्ट्स का, बीच गेम्स का बेहतरीन डेस्टिनेशन बन रहा है। यानी आप इंवेस्टर्स के लिए सामर्थ्य से, संभावनाओं से भरा ये पूरा क्षेत्र है। आप जरूर इसका पूरा लाभ उठाइए। और मैं बहुत पहले से कहता आया हूं- अगर आप देरी करें तो मुझे दोष मत देना। सौराष्ट्र-कच्छ में आपका हर निवेश, गुजरात के विकास को गति देगा, देश के विकास को गति देगा। और सौराष्ट्र की ताकत अभी Rwanda के हाई कमिशनर बता रहे थे कि जब मैं Rwanda गया, तो मैंने 200 गाय वहां गिफ्ट की थी। ये 200 गाय हमारी गीर गाय थीं। लेकिन उसकी एक विशेषता है, जब हमने 200 गाय दीं वहां की ग्रामीण इकॉनमी के लिए, तो उसमें एक नियम है, कि गाय तो आपको देंगे, लेकिन उसकी जो पहली बछड़ी होगी, वो आपको वापस देनी होगी, और वो हम दूसरे परिवार को देते हैं। यानी इन दिनों वो 200 गाय से शुरू हुआ, हजारों परिवारों के पास आज गाय पहुंच चुकी है, Rwanda ग्रामीण इकॉनमी को बहुत बड़ी ताकत दे रही है और हर घर में गीर गाय नजर आ रही है, ये है मेरा सौराष्ट्र।

साथियों,

आज का भारत, विकसित होने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रहा है। और हमारे इस लक्ष्य की प्राप्ति में रिफॉर्म एक्सप्रेस की बहुत बड़ी भूमिका है। रिफॉर्म एक्सप्रेस यानी हर सेक्टर में नेक्स्ट जनरेशन रिफ़ॉर्म, जैसे अब से कुछ समय पहले ही देश ने नेक्स्ट जनरेशन GST रीफॉर्म लागू किए थे। हर सेक्टर पर इसका अच्छा असर दिखा, विशेष रूप से हमारे MSMEs को बहुत फायदा हो रहा है। रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार भारत ने बहुत बड़ा रिफॉर्म, इंश्योरेंस सेक्टर में किया गया है। भारत ने Insurance sector में 100 परसेंट FDI को मंजूरी दे दी है। इससे देशवासियों को शत-प्रतिशत बीमा कवरेज देने के अभियान को गति मिलेगी। इसी तरह, करीब छह दशक के बाद इनकम टैक्स कानून को आधुनिक किया गया है। इससे करोड़ों टैक्स-पेयर्स को फायदा होगा। भारत ने ऐतिहासिक लेबर रिफॉर्म्स को भी लागू कर दिया है। इससे Wages, social security और industry, तीनों को एक unified framework मिला है। यानी श्रमिक हों या फिर इंडस्ट्री, सभी का इससे फायदा है।

साथियों,

आज भारत, डेटा आधारित इनोवेशन का, AI रिसर्च का, सेमीकंडक्टर मैन्युफेक्चरिंग का, एक ग्लोबल हब बनता जा रहा है। यानी भारत की पावर डिमांड लगातार बढ़ रही है। भारत को एश्योयर्ड एनर्जी की बहुत जरूरत है और इसका बहुत बड़ा माध्यम न्यूक्लियर पावर है। इसको देखते हुए, हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में भी नेक्स्ट जनरेशन रिफॉर्म किया है। भारत ने पिछले संसद के सत्र में शांति एक्ट के जरिए, civil nuclear energy को private partnership के लिए open कर दिया है। ये इन्वेस्टर्स के लिए बहुत बड़ा अवसर है।

साथियों,

यहां उपस्थित सभी निवेशकों को मैं विश्वास दिलाता हूं, हमारी रिफॉर्म्स एक्सप्रेस, अब रुकने वाली नहीं है। भारत की reform journey, institutional transformation की दिशा में बढ़ चुकी है।

साथियों,

आप सभी यहां, सिर्फ एक MoU के साथ नहीं आए हैं, आप यहां सौराष्ट्र-कच्छ के विकास और विरासत से जुड़ने आए हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, आपके इन्वेस्टमेंट की पाई-पाई यहां शानदार रिटर्न्स देकर के जाएगी। एक बार फिर आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। मैं गुजरात सरकार को, गुजरात की टीम को भी उनके इन प्रयासों के लिए, उनकी सराहना करता हूं, बहुत-बहुत बधाई देता हूं। 2027 में शायद उनका वाइब्रेंट समिट होगा, उसके पहले ये रीजनल समिट एक अच्छा प्रयोग हो रहा है, और मुझे खुशी हो रही है कि जिस काम को शुरू करते समय मुझे काम करने का अवसर मिला था, आज जब मेरे साथियों के द्वारा उसका विस्तार हो रहा है, उसको नई ऊर्जा मिल रही है, तो आनंद अनेक गुणा बढ़ जाता है। मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। धन्यवाद!