जुलाई, २०१२

महात्मा मंदिर, गांधीनगर

भी महानुभावों तथा युवा मित्रों, आज चार जुलाई है। आज से ११० साल पहले स्वामी विवेकानंद का देहावसान हुआ था। ११० पहले आज की तारीख को स्वामी विवेकानंद इस जगत को छोड़ कर परलोक सिधार गए थे। परंतु उस समय अपने जीवनकाल के दौरान स्वामी विवेकानंद ने खुद कहा था और उनके जाने के बाद इस देश के अनेक महानुभावों ने भी कहा है तथा हम सब भी महसूस कर रहै हैं। उन्होंने कहा था कि इस शरीर के साथ मेरा संबंध तो बहुत छोटा है। सिर्फ ३९ साल की युवा अवस्था में समस्त विश्व को अचंभित करके विवेकानंद ने इस दुनिया से विदा ली। उन्होंने कहा कि शरीर के साथ तो मेरा संबंध बहुत छोटा है, पर मैं जन्म जन्मान्तर तक अपने मिशन की पूर्ति के लिए अविरल प्रयास करता रहूँगा। इस राष्ट्र के अनेक महापुरुषों, महात्मा गांधी से लेकर सुभाष चंद्र बोस हों या फिर अरविंद जी हों, सभी ने कहा है कि विवेकानंद जी आज भी इस राष्ट्र को प्रेरणा देते हैं और सामर्थ्य भी देते हैं। आज उनकी पुण्य तिथि पर हम एक ऐसा काम आरंभ कर रहे हैं, एक विचार को आज हकीकत में बदल रहे हैं, जिसका असर पीढिय़ों तक रहने वाला है।

दोस्तों, आज का यह घटनाक्रम सिर्फ कोई नई योजना की शुरूआत ही नहीं है। आज का यह अवसर गुजरात के लोगों को सिर्फ कम्प्यूटर के साथ जोडऩे का ही नहीं है। आज का अवसर वर्तमान पीढ़ी को आने वाली पीढ़ी के साथ जोडऩे का एक सफल प्रयास भी है। दोस्तों, आज दुनिया बदल चुकी है। दुनिया बदल रही है और इस बदलती दुनिया को जो नहीं जान पाएगा, बदलती दुनिया को जो स्वीकार नहीं कर पाएगा, तो वह काल-बाह्य हो जाएगा, इरेलवन्ट हो जाएगा। हम सिर्फ अपनी ही दुनिया में मस्त रहकर बाकी की दुनिया को देखते रहेंगे। मित्रों, बारह सौ साल की गुलामी में देश ने जो पिछड़ापन भोगा है, फिर से वही हालात बन जाएंगे। हिंदुस्तान को पिछड़ेपन के ग्रहण से मुक्त करवाने का संकल्प करना होगा. और आज जब हम स्वामी विवेकानंद की १५० वीं जंयती मना रहे हैं तब प्रत्येक युवा का एक सपना हो कि हमसे जितना हो सकता हो उतना, जहाँ भी होंगे, जो कोई छोटी-बड़ी जिम्मेदारी होगी उसकी मदद से, ईश्वर ने जो भी क्षमता मुझे दी है उसके भरोसे, इस देश से पिछड़ापन समाप्त करने के लिए भागीरथ, अविरल, अखंड, एकनिष्ठ पुरूषार्थ करते रहेंगे। यह संकल्प हर एक का होना चाहिए और इस संकल्प को पूरा करने के लिए अपने स्तर पर कोई ना कोई नई शुरूआत करनी होगी।

श्वर चन्द्र विद्यासागर जैसे महापुरुषों ने समाज सुधारक के रूप में अपने समय में आधुनिक शिक्षा को लेकर जब अलख जगाई होगी तब समाज को लगा होगा कि इन सब की क्या जरूरत है? परंतु ऐसे महापुरूषों के कारण ही सौ साल, सवा सौ साल, देढ़ सौ साल की अवधि में समाज में बदलाव आने शुरू होते हैं। भाइयों-बहनों, आज शायद यह टेक्नोलोजी, यह इन्फर्मेशन टेक्नोलोजी, यह बायो टेक्नोलोजी यह नैनो टेक्नोलोजी, यह लाइफ साइंस, यह सभी शब्द अनोखे लगते होंगे। परंतु यह बात सत्य है कि टेक्नोलोजी ने समस्त जगत को प्रभावित किया है, मानव जाति को प्रभावित किया है और टेक्नोलोजी के बिना जीवन की कल्पना करना भी असंभव सा लगता है और जब टेक्नोलोजी के बिना जीवन ही असंभव है तो नई पीढ़ी इस टेक्नोलोजी से अछूती कैसे रह सकती है? टेक्नोलोजी अलिप्त कैसे रह सकती है? और ऐसी परिस्थिति में आवश्यकता होती है कि समस्त बातों को सरलीकरण करके लोकोपयोगी कैसे बनाया जाए। आवश्यकता होती है कि सहज तथा सरल तरीके से इसे कैसे उपलब्ध करवा सकें। आवश्यकता होती है कि इन सभी बातों को शीघ्र उपलब्ध कैसे करवाया जाए। और एक बार यह सभी चीजें शीघ्र उपलब्ध हो जाएं तो सभी को अपने आप सीखने, समझने तथा उनका उपयोग करना आ जाता है। आप क्लास रूम में भाषण के रूप में कहो कि बैकिंग व्यवस्था में ए.टी.एम. नाम की ऐसी व्यवस्था आने वाली है, जिसमें आप इस तरह पैसे रख सकोगे, ले सकोगे, ऐसा कर सकेंगे, वैसा कर सकेंगे तो कई बार आदमी अपना सर खुजाने लगता है कि अब यह ए.टी.एम. क्या आया नया? लेकिन एक बार ए.टी.एम. लग जाए और फिर एक बार आप उसे ये बताओ की पैसों की लेन देन के लिए यह व्यवस्था है, तो अनपढ़ व्यक्ति भी इसके बारे में समझ जाता है, उसका अमल करता है, जान लेता है। कई लोग होंगे कि जिन्हों ने पहले मोबाइल देखा होगा तो उसको आश्चर्य हुआ होगा, परंतु आज गाँवों में जहाँ जिवन में शिक्षा का अवसर कभी न मिला हो, वे भी मोबाइल से पूरी तरह से परिचित होते हैं। और मैंने तो देखा है कि टेक्नोलोजी का पेनिट्रेशन किस हद तक हो रहा है। एक बार मैं वलसाड जिले के कपराडा तालुका के आदिवासी क्षेत्र में एक छोटे से कार्यक्रम के लिए गया था। काफी अन्दरूनी क्षेत्र है। वहाँ एक डेरी के चिलिंग सेन्टर का उद्घाटन था। और पूरा वनवासी क्षेत्र है, और उन जंगलों के बीच एक छोटे से कमरे में उस चिलिंग सेन्टर को बनाया गया था। लेकिन वहाँ सभा करने की जगह नहीं थी इसलिए वहाँ से तीन किलोमीटर दूर एक शाला के मैदान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। और इस कार्यक्रम स्थल पर दूध भरने वाली बहनें जो होती हैं, आदिवासी बहनें, ऐसी तीस-चालीस बहनें वहाँ हाजिर थी। बाकी कार्यक्रम तीन किलोमीटर दूर था। हमने चिलिंग सेन्टर का उद्घाटन किया। और सभी बहनें सुंदर वेशभूषा के साथ ऐसे तैयार होकर उपस्थित थीं जैसे कि घर में कोई अवसर हो। जब हम वहाँ से समारोह के बाद नीचे उतर रहे थे, तो मैंने देखा कि उन ३०-४० बहनों में से पौने भाग की बहनें ऐसी थीं जो मोबाइल से हमारी फोटो उतार रही थीं। आदिवासी बहनें, कपराडा तालुका के भीतरी आदिवासी विस्तार में। तब उनकों देखकर मुझे सहज कौतुहल हुआ, तो मैं उनके पास गया। मैंने कहा, “बहनों, ये मोबाइल पर फोटो खींच कर आप क्या करेंगी?” आप भी सोचिए, क्या जवाब मिल सकता है, मन में सोच लो। जनाब, उन बहनों ने मुझे कहा कि इसे तो हम डाउनलोड करवा लेंगे। कपराडा तालुका के आदिवासी विस्तार में दूध भरने आने वाली आदिवासी माँ या बहन... वे किसी कॉलेज में डाउनलोड किसे कहते हैं ये पढऩे नहीं गई थी। पर इस बात की जानकारी है कि मैं ये जो फोटो खींच रही हूँ इसे डाउनलोड किया जा सकता है और इस फोटो का प्रिंट-आउट तक उन्हें मिल सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि कोई फॉर्मल व्यवस्था नहीं होने के बाद भी, टेक्नोलोजी आपने आप ट्रैवल करती है। समयानुकूल परिवर्तन के साथ सामाजिक जीवन का अंग बन जाती है, जीवन व्यवस्था का अंग बन जाती है, प्रत्येक व्यक्ति के मन में अपनी जगह बनाने में भी टेक्नोलोजी को वक्त नहीं लगता। और अगर यह स्थिति सहज हो तो हम ‘आएगा तब देखा जाएगा’, ‘अभी तो यह है न’ के बजाए, इसे थोड़ी दूरंदेशी के साथ, एक अवसर के रूप में, ऑपर्च्यूनिटी के रूप में, एक मौके के रूप में देखते हुए आगे क्यों ना बढ़ें? और इस में से हम आगे बढ़ रहे हैं।

भाईयों-बहनों, दुनिया में चर्चा है कि इक्कीसवीं सदी किसकी? पूरा विश्व मानता है कि इक्कीसवीं सदी एशिया की है, पर यह निर्धारित नहीं है कि इक्कीसवीं सदी भारत की होगी या फिर चीन की। स्पर्धा जब हिंदुस्तान और चीन के बीच चल रही है तब हमारे पास इक्कीसवीं सदी हिंदुस्तान की बनाने के महत्वपूर्ण सश्क्त कारक कौन से हैं? हमारी एक सबसे बड़ी ताकत है, इस देश की ६५% जनसंख्या। इस देश की ६५% जनसंख्या ३५ वर्ष से कम उम्र की हैं। यह देश दुनिया का सबसे युवा देश है। यौवन से तरबतर जो भूमि हो, जिस समाज का ६५ प्रतिशत वर्ग ३५ वर्ष से कम आयु का हो, इसके बाहुओं में कितनी ताकत होगी, इसके सपने कितने ऊंचे हो इसका हम अंदाजा लगा सकते हैं। जरूरत है इसको अवसर प्रदान करने की और अगर अवसर देना है तो जिस प्रकार के युग की रचना हुई है उसमें इन सपनों को पूरा करने में युवा शक्ति को शामिल करने की। मित्रों, चीन ने आज से दस वर्ष पहले एक काम किया था। कौन सा काम? उसे लगा कि यदि चीन को इक्कीसवीं सदी में विश्व की एक बड़ी ताकत बनाना है तो चीन के लोगों को अंग्रेज़ी जाननी बहुत जरूरी है। और इसलिए चीन ने चीनी बच्चों को अंग्रेज़ी शिक्षा मिले इसके लिए एक व्यापक अभियान चलाया था। इसमें सफलता मिली कि नहीं, उसका लाभ मिला कि नहीं मिला... पर उसे पता था कि विश्व में अब अकेले चीन के अंदर खुद ताकतवर बनने से काम नहीं चलेगा, विश्व में प्रसारित होना पड़ेगा, फैलना पड़ेगा और उन्होंने इस दिशा में अपने प्रयास प्रारंभ कर दिए थे। मित्रों, अपने गुजरात में वर्षों तक, आपका तो उस समय जन्म भी नहीं हुआ होगा, मित्रों। ‘मगन पांचमावाला’ और ‘मगन सातमावाला’ की चर्चाएं चलती थीं। शिक्षण क्षेत्र में काम करने वाले दो नेता यहाँ थे। एक का कहना था कि अंग्रेज़ी पांचवीं से हो, दूसरे का कहना था कि अंग्रेज़ी सातवीं से हो। इस कारण से यहाँ तो चला था, ‘मगन माध्यम’, गुजराती माध्यम में पढ़ो तो लोग कहते थे, ‘मगन माध्यम’, ऐसे शब्दों को प्रयोग होता था। पूरी दुनिया के सामने गुजरात का नवयुवक आंख से आंख मिलाकर बात कर सके वह सामर्थ्य उसमें होना चाहिए। और गुजराती एक वैश्विक समुदाय है। हमने एक अभियान चलाया ‘स्कोप’ के जरिये, जिसमें हमारा प्रयास था कि बोलचाल जितनी अंग्रेज़ी तो आनी ही चाहिए। इस कारण से इनके लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े। आज उसे मॉल में नौकरी चाहिए, सातवीं-आठवीं या दसवीं पास हो तो उसे अमुक पगार मिलती है। परन्तु यदि उसने स्कोप में ट्रेनिंग ली है और पांच-पन्द्रह अंग्रेज़ी वाक्य बोलने का सामर्थ्य आ गया हो, उसकी सॉफ्ट स्किल डेवलप हो गई हो, उसके  व्यवहार की ट्रेनिंग हो गई हो तो उसकी पगार पांच की बजाए सात हो जाती है, सात के बदल ग्यारह हो जाती है। इसकी आवश्यकता बढऩे लगी। मित्रों, मुझे ये कहते हुए गर्व होता है कि गुजरात के स्वर्ण जयंती वर्ष में एक लाख लोग, अंग्रेज़ी बोलना-पढऩा सीखाने का जो प्रयास किया गया था, वह आंकड़ा एक लाख को पार कर गया है और वह काम आज भी चल रहा है।

मित्रों, हमने एक योजना बनाई थी, ‘ज्योतीग्राम’। गुजरात के गाँवों में २४ घंटे बिजली उपलब्ध हो। बहुत लोगों को लगता था कि यह बिजली तो टीवी चलाने के लिए आई है..! नहीं, जिस दिन ज्योतिग्राम योजना पर अरबों-खरबों रूपया खर्च होना शुरू हुआ, तब पता था कि यह ऊर्जा का रोपण किस चीज़ के लिए कर रहे हैं। इसमें से गुजरात के ग्रामीण जीवन को कैसा रूप देना है वह पूरी तरह से ज्ञात था। और एक बार बिजली की सारी व्यवस्था हो गई, फिर कौन सा कार्य उठाया? कम्प्यूटर नेटवर्क खड़ा करने का काम शुरू किया। हार्डवेयर, जहाँ देखो वहाँ, स्कूलों में, पंचायतों में हार्डवेयर दो. फिर शुरू शुरू किया, कनेक्टिविटी दो। नौजवान मित्रों, आपमें से ज्यादातर ग्रामीण परिवेश से हैं। भारत सरकार ने इसके पिछले वर्ष के अपने बजट में कहा था कि हम तीन हजार गाँवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का पायलट प्रोजेक्ट करेंगे। छह लाख गाँवों का हिंदुस्तान, इस के सामने तीन हजार गाँवों में भारत सरकार का पायलट प्रोजेक्ट। मुखवास जितना भी लाभ नहीं मिल सकता। मित्रों, मैं यह गर्व के साथ कहना चाहता हूँ कि गुजरात ने चार साल पहले १८,००० गाँवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का काम पूरा कर दिया है। बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध करवाया। अब समझ में आता है कि सामाजिक जीवन में टेक्नोलोजी ने इतनी जगह बना ली है कि उसके कारण थोड़ी बहुत टेक्नोलोजी की जानकारी रखने वाले लोगों की भी जरूरत होगी। मित्रों, कल तक बसों में कंडक्टर अपनी गड्डी में से फाड़ कर टिकट काटता था। अब समय ऐसा आनेवाला है कि उसके हाथ में एक छोटा सा उपकरण होगा, और सिर्फ एक बटन दबाकर ही आपको टिकट देता होगा। जिवन के प्रत्येक क्षेत्र में... आप छोटे से रेस्टोरेन्ट में जाओ तो अब वो भजियानंद चाय का बिल लिखता नहीं है। छोटा सा एक डिब्बा लेकर ऐसे-ऐसे दबाता है और तुरंत आपको कहता है कि आप गेट पर जाओ, आपका बिल तैयार होगा। यह बदलाव आ रहा है। तो गुजरात के गरीब परिवार के बच्चों को इस बदले हुए वातावरण में रोजी रोटी मिले, उनका शोषण न हो, उनके पास डिग्री के साथ एक अतिरिक्त गुण हो, वह पांच के बदले सात, सात के बदले नौ, नौ के बदले ग्यारह हजार रूपया कमा सके इस बात को सुनिश्चित करने के अभियान का एक भाग है एम्पावर स्कीम, इलेक्ट्रॉनिक मैन पावर। और मित्रों, भारत सरकार एक साल पहले तीन हजार गाँवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रारंभ करने का विचार कर रही थी। आज डेढ़ वर्ष हो गया है। उसका क्या हुआ यह तो जांच का विषय है। हमने मार्च के अंत में बजट पास किया और आज चार जुलाई को इस योजना को लागू कर रहे हैं।

मित्रों, बदलते हुए युग में जैसे आज अनपढ़ होना श्राप लगता है, हमें भी चार दोस्तों के बीच अनपढ़ होने की बात हो तो शर्मिंदगी होती है। अनपढ़ होना जैसे अपमानजनक है ऐसे ही आने वाले दिनों में आपको यदि कम्प्यूटर नहीं आता है, आप इन्फोर्मेशन टैक्नोलॉजी से परिचित नहीं हो तो आप दुनिया की नजरों में अनपढ़ ही गिने जाओगे। मैं नहीं चाहता कि मेरे गुजरात का कोई भी नौजवान दुनिया की नजरों में अनपढ़ हो। पूरा विश्व यदि पूछे तो वह कह सके कि हां, मैं ये जानता हूँ। अब गरीब बालक कहाँ जाए? उसे यह सब सीखना हो तो हजार, पन्द्रह सौ, दो हजार रूपया फीस होती है और फीस देने के बाद अगर कोई भगोड़ा मिल गया, तो सबकी फीस भर जाने के बाद कम्प्यूटर ले कर दूसरे गाँव में चला गया हो। गरीब आदमी धोखे का शिकार बन जाए। माताओं और बहनों को सीखना हो तो कहाँ जाएं? और इसी कारण हमने सोचा कि सरकार की अपनी योजना के तहत एक व्यापक अभियान का प्रारंभ किया जाए। जैसे ‘स्कोप’ का व्यापक अभियान शुरू किया, जिसकी वजह से पहले सीखने के लिए लोग ढ़ाई हजार, तीन हजार फीस भरते थे, इसके बदले मुफ्त बराबर दामों में सीखने को मिले ऐसी व्यवस्था की गई, और लोगों को इसका लाभ भी मिला। मित्रों, ये योजना भी कैसी है? अनुसूचित जाति के लिए मुफ्त, अनुसूचित जनजाति के लिए मुफ्त, ओबीसी के लिए मुफ्त, बहनों के लिए मुफ्त तथा अन्य समर्थ लोगों के लिए भी कितनी फीस? पचास रूपया, मात्र पचास रुपया..! पांच-दस कप चाय के दाम में हो जाए। और मुझे पूरी तरह से विश्वास है कि जो यह शिक्षा प्राप्त करेंगे तथा इसके प्रमाण पत्र संलग्न करेंगे, उनकी कीमत बढ़ेगी, बाज़ार में उनका महत्व बढ़ने वाला है। और मित्रों बहुत से लोगों को आश्चर्य होगा कि इस योजना की सफलता किसमें है? मैंने हमारे अधिकारियों को कहा था कि हमने इतनी सारी ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी दी हैं, गाँव-गाँव में कम्प्यूटर लगाए हैं तो मुझे ट्रायल लेना है कि सभी चीजें जनसामान्य के साथ जुड़ने वाली हैं भी कि नहीं और इसलिए मेरा आग्रह था कि ये एम्पावर की जो ट्रेनिंग होने वाली है, उसका रजिस्ट्रेशन लोग ऑन-लाइन करवाएं। पता तो चले कि इस टेक्नोलोजी से हम उनके साथ जुड़ सके हैं नहीं। और आज मुझे यह कहते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि आज शाम पांच बजे तक, आज शाम को जब मैं मंच पर आया तब तक का आंकड़ा कहता हूँ, आज शाम पांच बजे तक ऑन-लाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए एक लाख चार हजार लोगों ने अपना नामांकन करवाया है। और इसमें भी गर्व की बात, ८४% रजिस्ट्रेशन गाँव के लोगों ने करवाया है, १६% शहरी क्षेत्र के रजिस्ट्रेशन हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि तीर बराबर निशाने पर लगा है। क्योंकि इस पूरी योजना का उद्देश्य इस पूरे विषय को गाँव तक पहुँचाना है, गाँव के घर-घर तक पहुँचाना है। क्योंकि शहरों में तो ऐसी छोटी-मोटी सुविधाएं होती हैं, जिसका लाभ मिलता है। यह दोनों के लिए समांतर है, चाहे गाँव हो या शहर, पर गाँव के चौरासी प्रतिशत लोगों का यह उत्साह, यह रजिस्ट्रेशन खुद दर्शाता है कि आज यह योजना सफल हो गई है। उसमें भी एक आनंदप्रद खबर, ये जो एक लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है, उनमें ६६% पुरूष तथा ३४% महिलाएं हैं दोस्तों, ३४% बहनें हैं। यह बड़ी बात है। गुजरात के गाँव की गृहिणी या बेटी इस तरह की शिक्षा को समझे, उमंग के साथ जुड़े, यह बात ही उज्जवल भविष्य का संकेत देती है, दोस्तों और अभी तो इस योजना के विषय में आज अखबारों में जानकारी आई है। इससे पहले समाचार पत्रों में जिस दिन बजट में घोषणा की थी तब थोड़ा बहुत उल्लेख हुआ था। यह बात अभी तो कानों कान पहुंची है, कोई बड़ा कैम्पेन नहीं हुआ है। कैम्पेन शुरू होगा तो शायद आज से होगा। यहाँ सामाचार पत्रों से जुड़े मित्र हैं, टीवी, मीडिया वाले हैं, ये लोग थोड़ा बहुत बताएंगे इसलिए आज शुरूआत होगी। उस के बावजूद भी यदि इतना ज्यादा स्वीकार मिला हो तो उसका अर्थ यह हुआ कि राज्य सरकार ने जनता की नब्ज को पहचानते हुए कितना महत्वपूर्ण काम शुरू किया है इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है।

भाईयों और बहनों, ये बात निश्चित है कि हुनर के बिना सफलता मिलना संभव नहीं है। हम कोई रईस मां बाप के बच्चे नहीं हैं, पाँच पीढ़ियों तक चले ऐसी कुछ विरासत भी हमें नहीं मिली है। अपने पास तो ईश्वर की दी हुई क्षमता है। दो हाथ हैं, दिल है, दिमाग है, इन्हीं के साथ जिंदगी जीनी है। जब यह तय ही हो कि यह ही अपनी पूंजी है तो फिर इस पूंजी में वृद्घि करने का एक मात्र साधन है, हुनर। और ये कौशल वर्धन हो, विभिन्न ऐसी क्षमताओं का अभ्यास हो, इनसे परिचित हों तो जीवन को सफल बनाने के लिए बहुत बड़ी शक्ति मिल सकती है। मित्रों, एक समय था कि गुजरात में टेक्निकल एज्यूकेशन देने वाले कॉलेज की संख्या मात्र ४४२ थीं, २००१ में हमने जब जिम्मेदारी ली तब। आज यह संख्या लगभग १७००-१८०० तक पहुँची है। कहाँ ४४२..! हमने गुजरात की जिम्मेदारी ली तब इस राज्य में ११ यूनिवर्सिटी थीं। आज भाईयों, ४२ यूनिवर्सिटी हैं। यह सब किसके लिए? गुजरात के नौजवानों के लिए, गुजरात की भावी पीढ़ी के लिए, मेरे सामने बैठे इन सक्षम सपनों के लिए, उनके लिए है यह सब कुछ। एक समय था, डिप्लोमा या डिग्री इंजीनियरिंग में पढऩा हो तो मध्यम वर्ग के माँ बाप तो इस बारे में सोच भी नहीं सकते थे। डोनेशन कहाँ से लाएं, बच्चों का दाखिला कहाँ करवाएं..? फिर क्या होता था? भाई, कोई हल नहीं है तो तू अब कहीं से बी.ए., बी.कॉम. कुछ कर ले और तुझे कहीं क्लर्क की नौकरी मिल जाए तो देखना..! अनेक नौजवानों के सपने चूर चूर हो जाते थे। मित्रों, हमने दस सालों में तकनीकी शिक्षा को इतना बल दिया कि २००१ में डिप्लोमा या डिग्री इंजीनियरिंग के लिए शुरूआत में हमारे पास मुश्किल से २३,००० सीटें थीं। आज लगभग १,२३,००० सीटें तकनीकी शिक्षा के लिए उपलब्ध करा दी गई हैं। जिसको भी पढऩा है उसे मुझे अवसर प्रदान करवाना है। गरीब से गरीब परिवार के बेटे या बेटी को लाचारी की जिंदगी नहीं जीनी पड़े इसके लिए काम शुरू किया है। मित्रों, बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं जो सातवीं या आठवीं कक्षा के बाद कुछ परिस्थितियों के कारण पढऩा छोड़ देते हैं। या तो वे गलत रास्ते पर चलने लगे होते हैं या फिर कहीं दोस्त ऐसे मिल गए हों और फिर बाद में समझ आने पर आई.टी.आई. में चले गये हों। बेचारा टर्नर बने या फिर फिटर बने या फिर प्लम्बर बने या वेल्डर बने... और उसको यह लगता था कि सब खत्म हो गया, मेरी जिन्दगी तो बस अब यहाँ समाप्त हो गई। मित्रों, इस सरकार ने यह निश्चित किया कि मेरे गुजरात के किसी भी युवक की जिंदगी को, उसके सपने को मैं पूर्ण विराम नहीं लगने दूंगा। मैं फिर से दरवाजे खोलूंगा, मैं फिर से खिड़कियां खोलूंगा, इनमें फिर से सपने संजोऊंगा, उन्हें नई जिंदगी जीने की प्रेरणा दूंगा, उसे नया हौसला दूंगा। अरे, कल जैसा भी बीता हो, आने वाला समय अभी अच्छा हो सकता है ऐसा विश्वास उनको मैं दूंगा। और इसके लिए क्या किया? एक साहसपूर्ण निर्णय किया कि यदि किसी ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई करके छोड़ दी हो, परन्तु आई.टी.आई. के दो साल पूरे किये हों तो उसे दसवीं का प्रमाण पत्र दूंगा। दसवीं कक्षा करके दो साल आई.टी.आई. के पूरे किए हों तो बारहवीं कक्षा के समकक्ष गिना जाएगा, उसे बारहवीं पास माना जाएगा। इतना ही नहीं, इसके आधार पर यदि उसे डिप्लोमा इंजीनियरिंग करना हो तो दरवाजे खुले, उसमें जा सकता है। उसके बाद उसे डिग्री इंजीनियरिंग करनी हो तो उसमें भी जा सकता है। पहले जो दरवाजे बंद हो जाते थे कि सातवीं या आठवीं छोड़ी तो पूरा हो गया, खेल खत्म..! साहब, यह सब बदल दिया है। किसके लिए? दोस्तों, आपके लिए, गुजरात के आने वाले कल के लिए।

मित्रों, आज मैं आपसे विनती करना चाहता हूँ। मेरे सामने केवल इस सभागृह में ही लोग बैठे हैं ऐसा नहीं है। आई.टी.आई. में, सारे ट्रेनिंग सेन्टर में लाखों नौजवान इस कार्यक्रम में ऑन-लाइन मेरे साथ मौजूद हैं। दूर सुदूर एज्यूकेशन इंस्टिट्यूट में बैठे लोग, नौजवान मुझे सुन रहे हैं। मित्रों, आज मैं आपको कहना चाहता हूँ, सपने देखना बंद मत करना। अरे, कभी कोई बाधाएं आई होंगी, कभी रूकावटें आई होंगी, कभी विफलताओं का सामना करना पड़ा हो, फिर भी अगर उत्तम संकल्प के साथ सपनों को सच्चा करने की जिद होगी, परिश्रम होगा तो आपकी भी सभी इच्छाएं, आकांक्षाएं परिपूर्ण होंगी ये मैं विश्वास के साथ कहना चाहता हूँ। यह राज्य, इस देश की युवा पीढ़ी को, इस देश के युवा लडक़े-लड़कियों को एक अप्रतिम अवसर देने के लिए प्रतिबद्घ है, जिससे वह अपने सभी सपने साकार कर सके, अपने परिवार की आशा- आकांक्षाओं को पूरा कर सके। और एक बात तय मानना नौजवानों, ईश्वर ने मुझे तथा आपको एक समान शक्ति दी है। ईश्वर ने मुझे आप से दो चम्मच ज्यादा दिया है ऐसे भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है। ईश्वर ने जितना मुझे दिया है उतना ही आप को भी दिया है। दोस्तों, सपने देखो, संकल्प करो, साहस करो, कदम उठाओ, मित्रों, मंजिल सामने आकर खड़ी हो जाएगी ऐसा मेरा विश्वास है।

रकार के बजट में से इस राज्य में टेक्निकल मैनपावर, तकनीकी मानवशक्ति तैयार करने का जो अभियान शुरू किया है, गुजरात जिस तरह से प्रगति कर रहा है उसमें वह एक नई ताकत के रूप में जुड़ेगा, गुजरात को आगे बढ़ाने में पूरक बनने वाला है। मित्रों, हाल ही में गुजरात में करीब २६,००० जितने लोगों की पुलिस में भर्ती की। और इसमें एक शर्त थी कि जिनको कम्प्यूटर की जानकारी हो सिर्फ वे ही आवेदन करें। दोस्तों, मुझे बड़े आंनद के साथ कहना है कि आज गुजरात के पुलिस मेले में कांस्टेबल लेवल पर काम करने वाले कम्प्यूटर जानकार लोगों की फौज खड़ी हो गई है, एक प्रकार से मेरा यह पूरा विभाग तकनीकी रूप से सक्षम हो गया है। और अगर जो आने वाले दिनों में सभी जगह पर इस प्रकार का मानव संसाधन उपलब्ध हो तो यह राज्य कितनी तीव्र गति से आगे बढ़ सकता है..! उन सपनों को साकार करने के लिए आज यह योजना गुजरात के नौजवानों को समर्पित करता हूँ। इन नौजवान बहनों और नौजवान भाईयों की शक्ति पर मुझे पूरा भरोसा है, मित्रों। इस शक्ति को साथ लेकर हमें आगे बढऩा है और मुझे यकीन है दोस्तों, कि आप भी सपने देखते होंगे। अवसर देने का काम सरकार कर रही है, व्यवस्था खड़ी करने के लिए सरकार दो कदम आगे बढ़ रही है। और निर्धारित परिणाम प्राप्त करने में गुजरात का नौजवान सक्षम है ऐसा मेरा विश्वास है। मित्रों, गुजरात का समृद्घ भावी, उस समृद्घ भविष्य की समृद्घि के आप भी हकदार बनें, समृद्घ भविष्य की समृद्घि के आप भी भागीदार बनें उसके लिए यह एक अवसर है। और आज जब यह अवसर आया है तब, गुजरात भर के कोने-कोने में मेरी इस बात को सुन रहे सभी नवयुवकों को और इस सभागार में मेरे सामने बैठे सभी नौजवानों को सच्चे अर्थ में एक इलेक्ट्रॉनिक मैनपावर के रूप में, एक अतिरिक्त शक्ति वाली मानवशक्ति के रूप में, गुजरात की धरती पर एक नया अध्याय जोड़ने के लिए मैं आप सभी का स्वागत करता हूँ और आप सभी को अंतःकरण से बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ, दोस्तों। नौजवानों, आपके सपनों को साकार करने के लिए मैं सदा सर्वदा आप लोगों के साथ हूँ। आपके सपने साकार हों इसके लिए पसीना बहाने के लिए मैं तैयार हूँ। आपकी इच्छाएं, आकांक्षाएं पूरी हों इसके लिए सरकार दो कदम आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। शर्त यह है कि मेरे गुजरात का नौजवान अपना कदम उठाए..! उसकी उंगली पकडऩे के लिए मैं तैयार हूँ, उसका हाथ पकड़ के चलने के लिए मैं तैयार हूँ, उसे मुझसे आगे ले जाने के लिए मैं तैयार हूँ। यह मेरी पूरी सरकार गुजरात की नौजवान पीढ़ी को समर्पित है, उनकी किस्मत को बदलने के लिए समर्पित है, उनके सपने साकार करने के लिए समर्पित है। आओ दोस्तों, मैं जब आपकी उम्र का था तब मुझे ऐसा सौभाग्य नहीं मिला था, दोस्तों। मुझे उस समय ऐसा कोई नहीं मिला था जो इस तरह का विश्वास दे सके। भाइयों-बहनों, आज पूरी की पूरी सरकार आपके विश्वास का श्वास बन कर प्रत्येक पल आपके साथ है। इसके साथ आप भी जुड़ जाओ यही अपेक्षा के साथ, मेरे साथ पूरी ताकत से बोलें...

भारत माता की जय..!!

दोनों मुठ्ठी बंद करके पूरी ताकत से बोलो, दोस्तों

भारत माता की जय..!!

वंदे मातरम्... वंदे मातरम्... वंदे मातरम्..!!

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प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यवधान पूरी तरह से अस्वीकार्य है: प्रधानमंत्री
भारत ने नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा ऊर्जा और परिवहन से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों की निंदा की है : प्रधानमंत्री
युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक, मैंने पश्चिम एशिया के अधिकांश देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की टेलीफोन वार्ता की है : प्रधानमंत्री
हम सभी खाड़ी देशों के साथ निरंतर संपर्क में हैं, साथ ही, हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी लगातार संवाद बनाए हुए हैं: प्रधानमंत्री
हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से इस क्षेत्र में शांति बहाल करना है: प्रधानमंत्री
हमने संबंधित पक्षों के साथ क्षेत्रीय तनाव को कम करने और होर्मुज़ स्ट्रेट में आवाजाही पुनः बहाल करने पर भी चर्चा की है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा कि युद्ध के इस कठिन वातावरण में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत कूटनीतिक माध्यमों से निरंतर प्रयास कर रहा है
युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट मैं जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से रास्ता बनाने का प्रयास किया है: प्रधानमंत्री
हमारा निरंतर प्रयास है कि जहाँ से भी संभव हो, भारत को तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और देश ऐसे प्रत्येक प्रयास के सकारात्मक परिणामों का साक्षी बन रहा है: प्रधानमंत्री
पिछले कुछ दिनों में विश्व के कई देशों से कच्चे तेल और एलपीजी लेकर जहाज भारत पहुँचे हैं और इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी निरंतर जारी रहेंगे : प्रधानमंत्री
हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और सरकार तेजी से बदलती परिस्थितियों पर पैनी नजर रख रही है : प्रधानमंत्री
सरकार वर्तमान परिस्थितियों के अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों के समाधान हेतु एक सुनियोजित रणनीति के साथ काम कर रही है: प्रधानमंत्री
सरकार ने उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ कर ली हैं : प्रधानमंत्री
सरकार निरंतर यह प्रयास कर रही है कि किसी भी संकट का बोझ हमारे किसानों पर न पड़े : प्रधानमंत्री
मैं देश के किसानों को एक बार फिर आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हर चुनौती के समाधान के लिए सरकार पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है : प्रधानमंत्री

माननीय सभापति जी,

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बनी परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं। मैं आज संसद के उच्च सदन के सामने और देशवासियों के सामने इन विकट परिस्थितियों पर सरकार का पक्ष साझा करने के लिए उपस्थित हुआ हूं। पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है। इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान के रूटीन सप्लाई प्रभावित हो रही है। गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है। होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं। यह भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए।

सभापति जी,

युद्ध की शुरुआत के बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। हम गल्फ के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य डायलॉग और डिप्लोमेसी के माध्‍यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने डि एस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी उनसे बात की है। कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है। भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है। भारत डिप्लोमेसी के जरिए युद्ध के इस माहौल में भी भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सतत प्रयास कर रहा है। भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है। इस युद्ध में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है। इसलिए भारत का सतत प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है।

सभापति जी,

संकट की स्थिति में देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अब तक 3 लाख 75 हज़ार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक 1000 से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। हमारी सरकार संकट के इस समय में पूरी संवेदनशीलता से कम कर रही है। सभी देशों ने वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। हालांकि यह बहुत दुखद है कि हमलों के कारण कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई है और कुछ घायल भी हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में परिवारजनों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है।

सभापति जी,

होर्मुज स्ट्रेट विश्व व्यापार के सबसे बड़े रूट्स में से एक है। विशेष तौर पर कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़ा परिवहन इस क्षेत्र से बहुत बड़ी मात्रा में होता है। युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट मैं जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद से, कूटनीति के माध्यम से रास्ते बनाने का प्रयास किया है। प्रयास यह है कि जहां से भी संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई भारत पहुंचे। ऐसी हर कोशिश के नतीजे भी देश देख रहा है। बीते कुछ दिनों में दुनिया के अनेक देशों से कच्‍चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं। इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगे।

सभापति जी,

भारत का प्रयास है कि तेल हो, गैस हो, फर्टिलाइजर हो, ऐसे हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचे। लेकिन इस युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियों अगर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो गंभीर दुष्परिणाम तय है। इसलिए भारत अपनी रेसिलियंस बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास बीते वर्षों में किए हैं, उनको और गति दे रहा है।

सभापति जी,

कोई भी संकट हो, वह हमारे हौसलों और हमारे प्रयास दोनों की परीक्षा लेता है। देश ऐसे संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सके, इसके लिए बीते 11 वर्षों में निरंतर निर्णय लिए गए हैं। एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा है। पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी, ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था। वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट कर रहा है। बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारों को भी प्राथमिकता दी है। हमारी तेल कंपनियां संकट के समय के लिए काफी मात्रा में पेट्रोल और डीजल का भंडार रखती हैं। बीते 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक तक स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी डेवलप किया गया है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। साथ ही, बीते दशक में भारत की रिफायनिंग कैपेसिटी भी अच्छी-खासी बढ़ाई गई है। मैं आपके माध्यम से सदन को और देश को या यह देना चाहता हूं कि भारत के पास क्रूड ऑयल के पर्याप्त स्टोरेज के और निरंतर सप्लाई की व्यवस्थाएं हैं।

सभापति जी,

हमारी सरकार की कोशिश है कि ईंधन के किसी एक ही स्रोत पर ज्यादा निर्भरता ना रहे। सरकार घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के अलावा पीएनजी पर भी बल दे रही है। बीते दशक में देश में पीएनजी कनेक्शन पर अभूतपूर्व काम हुआ है। बीते दिनों में इस काम को और तेज किया गया है। साथ ही, एलजी के घरेलू उत्पादन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

सभापति जी,

बीते वर्षों में सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि हर सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम से कम हो। हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हों, यही एकमात्र विकल्प है। जैसे भारत का 90% से अधिक तेल विदेशी जहाजों पर होता है, यह स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को और भी गंभीर बना देती है। इसलिए सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए करीब 70000 करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया है। भारत आज शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग, मेंटेनेंस एंड ओवरहालिंग, ऐसी हर सुविधा का निर्माण पर तेज गति से कम कर रहा है। भारत अपने डिफेंस सेक्टर को भी अधिक रेसिलियंट बना रहा है। बीते दशक में किए गए प्रयासों से भारत आज अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार भारत में ही बना रहा है। एक समय था, जब भारत अपने जीवन रक्षक दावों के कच्चे माल यानी API के लिए भी दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भर था। बीते वर्षों में देश ने भारत में ही API इकोसिस्टम बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैंं। इसी प्रकार रेयर अर्थ मिनिरल्स में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी को हिला दिया है। अभी तक पश्चिम एशिया में जो नुकसान हुआ है, उससे रिकवर होने में भी दुनिया को बहुत समय लगेगा। भारत में इसका कम से कम दुष्प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहे हैं। हमारे इकोनॉमी के फंडामेंटल्‍स मजबूत हैं और सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए हैं। सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म ऐसे हर प्रभाव के लिए एक रणनीति के साथ काम कर रही है। भारत सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है, यह ग्रुप नियमित मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट में आने वाली हर दिक्कत का आकलन करता है और यह ग्रुप आवश्यक समाधान पर भी निरंतर काम करता रहा है। जैसे कोरोना के समय में अलग-अलग सेक्टर्स की चुनौतियों से निपटने के लिए एक्सपोर्ट्स और ऑफिसर्स के empowered groups बने थे, वैसे ही कल ही ऐसे 7 नए empowered groups का भी गठन किया गया है। यह ग्रुप सप्लाई चैन, पेट्रोल-डीजल, फर्टिलाइजर, गैस, महंगाई, ऐसे विषयों पर त्वरित और दूरगामी रणनीति के तहत कार्यवाही करने का काम करेंगे। मुझे पूरा भरोसा है कि इस साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे।

आदरणीय सभापति जी,

सरकार यह भी प्रयास कर रही है कि आने वाले बुवाई के सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद मिलती रहे। सरकार ने खाद की पर्याप्त सप्लाई के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं। सरकार का निरंतर प्रयास है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ ना पड़े। मैं देश के किसानों को फिर आश्वस्त करूंगा कि सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए उनके साथ खड़ी है।

आदरणीय सभापति जी,

यह राज्यों का सदन है। आने वाले समय में यह संकट हमारे देश की बड़ी परीक्षा लेने वाला है और इस परीक्षा में सफलता के लिए राज्यों का सहयोग बहुत आवश्यक है। इसलिए इस सदन के माध्यम से मैं देश के सभी राज्यों की सरकारों से भी कुछ आग्रह करना चाहता हूं। संकट के समय गरीबों पर, श्रमिकों पर, प्रवासी साथियों पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। इसलिए पीएम गरीब कल्याण अन्‍न योजना का लाभ समय पर मिलता रहे, यह सुनिश्चित करना होगा। जहां प्रवासी श्रमिक साथी काम करते हैं, उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए प्रोएक्टिव कदम उठाए जाएं। ऐसी स्थितियों पर नजर रखने के लिए राज्य सरकारें विशेष व्यवस्थाएं करें, तो इससे काफी सुविधा होगी। राज्य सरकारों को एक और चुनौती पर भी बहुत अधिक ध्यान देना होगा, ऐसे समय में कालाबाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वाले बहुत एक्टिव हो जाते हैं। जहां से भी ऐसी शिकायतें आती हैं, वहां पर त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए। जरूरी चीजों की सप्लाई निर्बाध चलती रहे, यह सुनिश्चित करना हर राज्‍य की प्राथमिकता होनी चाहिए।

आदरणीय सभापति जी,

मैं सभी राज्य सरकारों से एक अनुरोध और करना चाहता हूं। संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना, हम सभी का दायित्व है। हमें इसके लिए हर जरूरी कदम, हर जरूरी रिफॉर्म्स तेजी से करते रहने होंगे। यह राज्य सरकारों के पास बहुत बड़ा अवसर भी है। यह टीम इंडिया की भी बहुत बड़ी परीक्षा है। कोरोना के महासंकट में केंद्र और राज्यों ने टीम इंडिया बनकर कोविड मैनेजमेंट का एक बेहतरीन मॉडल सामने रखा था। अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टी की सरकारें होने के बावजूद टेस्टिंग, वैक्सीनेशन से लेकर जरूरी चीजों की आपूर्ति टीम इंडिया के प्रयासों से ही निश्चित हो पाई थी। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना है। सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के प्रयासों से देश इस गंभीर वैश्विक संकट का प्रभावी रूप से सामना कर पाएगा।

आदरणीय सभापति जी,

यह संकट अलग प्रकार का है और इसके समाधान भी अलग प्रकार से ही तय किया जा रहे हैं। हमें धीरज के साथ, संयम के साथ, शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है।

आदरणीय सभापति जी,

जैसा कि हम देख रहे हैं कि इस युद्ध को लेकर पल-पल में हालात बदल रहे हैं। इसलिए मैं देशवासियों से भी कहूंगा कि हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना ही होगा। इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रहने की प्रबल आशंका है। लेकिन मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं, सरकार सतर्क है, तत्पर है और पूरी गंभीरता से रणनीति बना रही है, हर निर्णय ले रही है। देश की जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। यही हमारी पहचान है, यही हमारी ताकत है। इसी भावना के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!