કાર્યક્રમમાં હિંદુસ્તાનની બધી ટી.વી. ચેનલો મોજૂદ છે, એમણે એક લાગણી વ્યક્ત કરી હતી કે મારું ભાષણ હિન્દીમાં થાય તો સારું. તો હું અહીંના સહુ નાગરિકોની ક્ષમા માગીને આજના આ સદભાવના મિશનના સમાપન કાર્યક્રમનું ભાષણ હિન્દીમાં કરું છું. અમસ્તાયે આપણને ગુજરાતના લોકોને હિન્દી સમજવામાં ક્યારેય મુશ્કેલી પડતી નથી, કારણ આપણે પહેલેથી રાષ્ટ્રીય ધારામાં ઉછરેલા લોકો છીએ.

 दभावना मिशन का जब से प्रारंभ किया तब से लेकर अब तक अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग तरीके से उसको जांचने की, परखने की कोशिश की, किसी ने उसमें से कमीयाँ ढूंढने की कोशिश की, किसी ने इस माहौल को अपने फायदे में कैसे लिया जाए, मीडिया का ध्यान आकर्षित कैसे किया जाए, इसलिए पेरेलल कुछ कोशिश की, अलग-अलग तरीके से, अलग-अलग ढंग से ये सारा घटनाक्रम चला. भाईयों-बहनों, ३६ दिन तक इस प्रकार से बैठना, जनता जनार्दन के दर्शन करना, उनके आशीर्वाद प्राप्त करना भाईयों-बहनों, मेरे लिए भी एक अकल्पनीय सुखद अनुभव रहा है. मैंने ऐसी कल्पना नहीं की थी कि इस प्रकार से लाखों लोग जुड जाएंगे. एकदम सात्विक कार्यक्रम, सिर्फ उपवास, किसी के खिलाफ कुछ नहीं, किसी से कुछ माँगना नहीं, उसके बावजूद भी ये जन सैलाब. जो लोग इस कार्यक्रम की आलोचना करते हैं, अगर ईमानदारी नाम की कोइ चीज़ उनके जीवन में बची हो, वो राजनीति के हों, गैर राजनीति के हों, मैं सबको सुनाना चाहता हूँ. क्या कोई कल्पना कर सकता है कि सदभावना यात्रा में आने के लिए एक लाख से भी अधिक लोग भिन्न-भिन्न स्थानों से पदयात्राएँ करके इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुऐ? एक लाख से अधिक लोग..! और कुछ लोग तो पचीस-पचीस तीस-तीस किलोमीटर की पदयात्रा करके आए थे. माणगर के आदिवासी भाईयों ने पाँच दिन तक पदयात्रा की. पावागढ से दो-दो दिन चलकर लोग आये. भाईयों-बहनों, अपने घर से निकल कर तीर्थ क्षेत्र पर जाने के लिए पदयात्रा हो ये तो हमने सुना है, लेकिन तीर्थ क्षेत्र से निकलकर इस प्रकार के कार्यक्रम में पदयात्री आए ये अपने आप मे एक अजूबा है, इसको समझने के लिए राजनैतिक चश्मे काम नहीं आ सकते. भाईयों-बहनों, इस सदभावना यात्रा में लोग पदयात्राएँ करके आए, साईकल पर जूलूस लेकर आए, स्कूटर पर जूलूस लेकर आए..! जब-जब जिस-जिस जिले में सदभावना यात्रा का कार्यक्रम हुआ, वहाँ के नागरिकों ने स्कूल में जो गरीब बच्चे पढ़ने आते हैं उनको विशिष्ट भोजन कराने का संकल्प किया, तिथिभोज दिया. इस सदभावना मिशन के कार्यक्रमों के दौरान, अब तक जो मुझे जानकारी मिली है, नागरिकों ने करीब ४५ लाख बच्चों को विशिष्ट भोजन करवाया. सदभावना का प्रभाव क्या है ये अनुभव हो रहा है. भाईयों-बहनों, कुछ लोगों ने गरीबों को अनाज बांटने का संकल्प लिया. छ: लाख किलोग्राम से अधिक अनाज लोगों ने दान में दिया जो लाखों परिवारों में बांटा गया. करोड़ों रूपयों का ये दान एक कार्यक्रम के निमित्त लोगों ने जोड़ा. ‘गर्ल चाइल्ड एज्युकेशन’ के लिए करीब चार करोड़ रूपये से ज्यादा, ‘कन्या शिक्षा’ के लिए पूरे गुजरात में से लोग मुझे दान दे रहे हैं. इस सदभावना मिशन के दौरान चार करोड़ से अधिक रूपये जनता जनार्दन ने दिये. भाईयों-बहनों, अभी तो मैं जानकारी एकत्र कर रहा हूँ, ये सारी जानकारी जब डिटेल में आएगी, तब पता नहीं कि अंत कहाँ पहुँचेगा. करीब १७,००० जितने प्रभात-फेरी के कार्यक्रम, प्रात: के समय अपने-अपने गाँव में सदभावना संदेश देने की यात्राएँ, १७,००० ऐसी यात्राएँ निकलीं और करीब २० लाख लोगों ने उसमें हिस्सा लिया. जब एक स्वप्न को ले करके चलते हैं, वो कैसे जन आंदोलन बन जाता है इसका ये जीता-जागता उदाहरण है.

भाईयों-बहनों, मैं माँ अंबा के चरणों में आज बैठा हूँ. जिस दिन मैंने सदभावना मिशन का प्रारंभ किया था, मैं अपनी माँ से मिलने के लिए गया था. मैंने उनके चरण छूकर, आशीर्वाद लेकर अनशन का आरंभ किया था. और आज जगत-जननी माँ के चरणों को छूकर इस संकल्प को आगे बढाने के लिए मैं आज आपके बीच आया हूँ. उपवास पूर्ण हो रहे हैं, लेकिन दुनिया को डंके की चोट पर गुजरात की शक्ति का परिचय कराने का मेरा संकल्प और मजबूत हुआ है, और ताकतवर हुआ है और दुनिया की हर शख़्सियत को मैं गुजरात की शक्ति का परिचय करवा कर रहूँगा. मित्रों, वार झेलना ही मेरी आदत है. माँ जगदंबा ने मुझे वो शक्ति दी है, मैं हमलों को बड़ी आसानी से झेल सकता हूँ और न ही मुझे ऐसे हमलों की परवाह होती है, न मुझे चिंता होती है. अगर मुझे चिंता होती है तो मेरे छ: करोड़ गुजरातीयों के सुख-दु:ख की चिंता होती है, और किसी बात की मुझे चिंता नहीं होती है. मैं इनमें रंग चुका हूँ, मैं डुब चुका हूँ और इसी के लिए अपने आप को समर्पित करता जा रहा हूँ. जब मैंने सभी जिलों में जाने का तय किया था तब कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि एक मुख्यमंत्री इतनी प्रतिबद्धता के साथ काम पूरा कर सकता है. आज मैंने उसे पूरा किया, मुझे बहुत संतोष है. मैं पूरे गुजरात का आभारी हूँ क्योंकि मेरे हिसाब से इस राज्य के ७५% परिवार ऐसे होंगे जिनके किसी न किसी प्रतिनिधि ने इस सदभावना मिशन में आकर मुझे आशीर्वाद दिये हैं. ऐसा सौभाग्य कहाँ मिल सकता है.

मित्रों, सदभावना की ताकत देखिये, गुजरात मुद्दों को कैसे लेता है उसको देखिये. कुछ दिन पूर्व देश के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंहजी टी.वी. पर बयान दे रहे थे. करीब १५-२० दिन पहले की बात है. वे कह रहे थे कि मालन्यूट्रिशन, कुपोषण, ये हमारे देश के लिए बहुत बड़ी शर्म की बात है. उन्होंने कहा शर्म की बात है, स्वीकार किया, लेकिन आगे क्या? आगे कोई खबर आयी आपके पास? क्या किया कुछ सुना, भाई? कुछ नहीं..! पीडा व्यक्त कर दी, बात खत्म. ये गुजरात देखिये; कैसे रास्ता दिखा रहा है. गुजरात के गाँव-गाँव में कुपोषण से मुक्ति की एक जंग छेड दी गई और लोग हजारों किलो सुखडी, हजारों लिटर दूध, हजारों किलो ड्रायफ्रूट कुपोषित बच्चों को दान में दे रहे हैं. इस आंदोलन की ताकत देखिये, भाईयों. मैं कांग्रेस के मेरे मित्रों को प्रेम से पूछना चाहता हूँ, क्या इस देश का कोई भी नागरिक, कोई भी बालक अगर कुपोषित है तो सार्वजनिक जीवन में आपको इसकी पीडा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? आप सरकार में हों या न हों. यहाँ ये नागरिक कहाँ सरकार में हैं जो हजारों किलो सुखडी दे रहे हैं, हजारों किलो ड्रायफ्रुट दे रहे हैं, हजारों लिटर दूध बांट रहे हैं, ये कहाँ सत्ता में हैं? आपकी पार्टी के प्रधानमंत्री हैं, उन्होंने पीडा व्यक्त की, तो कम से कम आप इतना तो सत्कर्म कर लेते कि आप भी कुछ इकट्ठा करके गरीबों को बांटने के लिए जाते और कुपोषण के खिलाफ अपना एक कमिट्मेन्ट दिखाते, आपके प्रधानमंत्री के लिए तो करते..! नहीं करते हैं, उनको जनता की चिंता नहीं है, उनको अपनी चिंता है. भाईयों-बहनों, हमारी शक्ति हमने लगाई है आपकी खुशी के लिए, उन्होंने शक्ति लगाई है उनकी कुर्सी के लिए. फर्क यही है. हमारा ध्यान केंद्रित हुआ है छ: करोड़ की खुशी पर, उनका ध्यान केंद्रित हुआ है सत्ता की कुर्सी पर. ये बहुत बड़ा फर्क है और तभी जनता इस प्रकार के लोगों को स्वीकार नहीं करती. भाईयों-बहनों, ये सदभावना मिशन की सफलता इस बात पर भी निर्भर है. आप देखना कल से, जो लोग पिछले दस सालों से गुजरात की बुराई कर रहे हैं, वे आने वाले २४ घंटों में ही पूरी ताकत के साथ फिर मैदान में आएँगे. मेरे शब्द बड़ी गंभीरता से लिख लिजिए. कल से ही देखना आप, २४ घंटे के भीतर-भीतर ये जितने लोग दस साल से गुजरात की बुराई कर रहे हैं, गुजरात को बदनाम कर रहे हैं, गुजरात पर गंदे, गलीच, झूठे आरोप लगा रहे हैं ये सारे लोग, पूरी जमात २४ घंटे के भीतर-भीतर फिर एक बार गुजरात को बदनाम करने के लिए पूरी ताकत से साथ मैदान में उतरेगी क्योंकि सदभावना मिशन की यह सफलता उनको हज़म होने वाली नहीं है. उनको बैचेन कर रही है कि ये कैसे हो सकता है, हमने तो गुजरात को ऐसा पेइंट किया था लेकिन गुजरात तो कुछ और है. हमने तो मुसलमानों को भी ये कह दिया था, लेकिन यहाँ तो लोग गले मिल रहे हैं. हमने ईसाइयों के लिए कहा था लेकिन यहाँ तो ईसाई भी साथ लग रहे हैं. ये गुजरात की एकता, गुजरात की शांति, गुजरात का भाईचारा... सदभावना मिशन के माध्यम से इस शक्ति के जो दर्शन हुए हैं इससे ये लोग, मुट्ठी भर लोग चौंक गये हैं. और मेरा एक-एक शब्द सही निकलने वाला है. ये पूरा फरवरी महीना वे चैन से नहीं बैठेंगे, हररोज़ नयी चीज़ उछालेंगे. झूठी बातें करेंगे, एकतरफ़ा बातें करेंगे. मैं गुजरात के सभी भाईयों-बहनों से इस अंबाजी की पवित्र धरती से कहना चाहता हूँ, १० साल से हो रहे हमलों से भी तीखे हमले होंगे. उन हमलों को भी सत्य के माध्यम से हम पराश्त करके रहेंगे, सत्य के आधार पर उनको तहसनहस करके रहेंगे ये में विश्वास दिलाना चाहता हूँ. भाईयों-बहनों, मेंने हर बार कहा है, मैं सत्य के सामने सौ बार झुकने को तैयार हूँ, लेकिन झूठ के खिलाफ जंग करना मेरी फ़ितरत है. हम झूठ के खिलाफ लड़ने वाले लोग हैं, हम सत्य के सामने समर्पित होने वाले लोग हैं. कितना झूठ चलाओगे? मेरे इस अच्छे-भले राज्य को कितना बदनाम करोगे आप लोग और कब तक करोगे..? ‘कहो नाखुदा से कि लंगर उठा दे, हम तूफान की जिद देखना चाहते हैं’. मित्रों, सदभावना मिशन के माध्यम से हमने शक्ति का साक्षात्कार किया है. जन-समर्थन का एहसास किया है. हमने सच्चाई को डंके की चोट पर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है.

ज गुजरात विकास के कारण जाना जाता है. विकास की नई-नई ऊँचाइयों में आज पूरे देश के अंदर गुजरात का लोहा मान लिया गया है. लेकिन ये विकास उस प्रकार का नहीं है, जो हमारे देश में कभी सोचा जाता था. कोई पाँच कि.मी. का रास्ता बनाऐ, दुसरा सात कि.मी. बना दे, तो बोले विकास हो गया... हमने ऐसा नहीं सोचा है. हमने सर्वांगी विकास की कल्पना की है. मित्रों, ये हमारा बनासकांठा, ये पाटण जिला, क्या हाल थे हमारे? बारह महीनों में से छ: महीने धूल ही धूल और हमारे नसीब में कुछ नहीं था. तपता हुआ सूरज, उड़ती हुई धूल, ये मिट्टी, इसके सिवाय इन दो जिलों के नसीब में क्या था, मित्रों? आज वही इलाका सूर्य उपासना के लिए, सौर ऊर्जा के लिए पूरे विश्व के अंदर अपना नाम रोशन करने जा रहा है. पूरे हिंदुस्तान में सोलार एनर्जी १२० मेगावॉट है, पूरे हिन्दुस्तान में १२०. आपके अकेले इस चारणका में २०० मेगावॉट है. और पूरे गुजरात में तो, ये आपके धानेरा के पास सोलार पार्क बन रहा है. मित्रों, कल तक जिस क्षेत्र को सोचा नहीं था, उसको आज विकास की मुख्य धारा मे ला करके रख दिया है. दिल्ली-मुंबई इन्डस्ट्रीअल कॉरीडोर, इस इन्डस्ट्रीअल कॉरीडोर के कारण जो विशिष्ट प्रकार की रेलवे लाइन लगने वाली है, पाटण जिला और बनासकांठा जिला, दोनों जिलों के हर गाँव को पूरी तरह उसका लाभ मिलने वाला है. ये बनासकांठा की धरती, बेटी की शादी करानी हो, और जमीन बेचने जाए, गिरवी रखने जाए, तो कोई पैसा नहीं देता था. बनासकांठा में किसान को जमीन कितनी ही क्यों न हो, बेटी की शादी कराने के लिए उस जमीन में से पैसे नहीं मिलते थे. जमीन की क़ीमत नहीं थी. कोई खरीदार नहीं था. जमीन पर कर्ज भी नहीं मिलता था, क्योंकि उसमें से कुछ पैदा नहीं होता था. आज जमीन के दाम कितने बढ गए हैं, मेरा किसान कितना ताकतवर बन गया है..! आज वो डंके की चोट पर कहता है, बेंक वालों को कहता है कि मेरी जमीन की क़ीमत इतनी है, मुझे इतनी लोन चाहिए और बेंक वाला लाइन लगाके खडा रहता है. लोन देने पर मजबूर हो जाता है..! एक जमाना था, बेटी की शादी तक संभव नहीं थी. आज अगर कोई जमीन लेने के लिए आता है तो मेरा किसान कहता है, आज मेरा मूड ठीक नहीं है, बुधवार को आना. ये स्थिति पैदा हुई है, इस जिले में ये बदलाव आया है. और भाईयों-बहनों, में देख रहा हूँ, समुद्र किनारे पर जाने का अगर कोई शॉर्टेस्ट रास्ता है तो वह बनासकांठा से गुजरता है और उसका सबसे ज्यादा बेनिफिट इस जिले को विकास के लिए मिलने वाला है, विकास की नई ऊँचाईयों को पार करने वाला है. भाईयों-बहनों, जो कुछ भी हुआ है, सबको संतोष है, आनंद है. लेकिन जितनी प्रगति हुई है, मैं तो अभी उससे बहुत आगे सोच रहा हूँ. मैं इससे संतुष्ट होने वाला इंसान नहीं हूँ, मुझे तो यहाँ इतनी समृध्दि लानी है कि दुनिया के देश चौकन्ने रह जाए कि एक राज्य इतना आगे बढ़ सकता है. ये सपने देख कर मैं मेहनत करता हूँ और मैं खुश हूँ, छ: करोड़ नागरिकों ने जो समर्थन दिया है..!

हिंदुस्तान में राजनैतिक अस्थिरता एक सहज स्वभाव बन गया है. गुजरात में भी दो साल, ढाई साल से ज्यादा मुख्यमंत्री नहीं रहते थे. आज में ग्यारहवें साल में भी आपके प्रेम को पा रहा हूँ. ये राजनैतिक स्थिरता, ये पोलिटिकल स्टेबिलिटी, नीतियों की स्टेबिलिटी, विकास की गति, प्रगति के नये-नये अंक, ये बातें हैं जो आज सारे विश्व में गुजरात का लोहा मनवाने के लिए दुनिया को मजबूर कर रही हैं. हमें इसे और आगे बढ़ाना है. हमें लक्ष्य की नई ऊँचाईयों को पार करना है. नर्मदा का पानी विकास की नई क्षितिजों को पार करे. लेकिन हम चाहते हैं कि जैसे मेरे बनासकांठा जिले के किसानों ने ड्रिप इरीगेशन को स्वीकार कर लिया, स्प्रिंक्लर को स्वीकार कर लिया, अब मेरा एक सपना आगे है मेरे किसानों से, मैं उनको ‘नेट हाउस’ की ओर ले जाना चाहता हूँ. खेत के अंदर ग्रीन कलर के छोटे-छोटे ‘ग्रीन हाउस’ बनें ताकि दो बीघा जमीन भी हो तो भी उसमें नये प्रकार की फसल पैदा हो सके. मेरा एक ठाकोर भाई, जमीन बहुत कम है, सीमांत किसान है, आज उसकी इन्कम मुश्किल से पचास हजार, साठ हजार, लाख रूपया है. मैं उसको ग्रीन हाउस टेक्नोलोजी में ले जाना चाहता हूँ और दो बीघा जमीन हो तो भी वो आठ लाख, दस लाख रूपए कमाई करे, खेती में कमाई करे ऐसी टेक्नोलोजी को मैं बनासकांठा में लाना चाहता हूँ.

मित्रों, चीज़ों को बदला जा सकता है, इन सपनों को लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं. एक नयी दुनिया, एक नया विश्व, विकास का एक नया सपना, हम उसको साकार करने की दिशा में आगे बढ रहे हैं. देश और दुनिया के लोग इस बात को मानने लगे हैं, गुजरात के विकास की ताकत को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन उसके पीछे कौन-सी ताकत है, उस विषय को स्वीकार करते हुए अभी उनको तकलीफ हो रही है. क्योंकि पहले इतना झूठ बोल दिया है कि कभी-कभी सत्य को स्वीकार करने में दिक्कत हो जाती है. ऐसे जो लोग बार-बार झूठ बोल चुके हैं उनको मेरी प्रार्थना है कि भाई, अब बहुत झूठ बोल दिया, अब झूठ बोलना बंद करो और गुजरात की शक्ति को स्वीकार करो और गुजरात की शक्ति है एकता, शांति और भाईचारा. एक जमाना था, आए दिन हमारे यहाँ कर्फ्यू लगते थे, चाकू चलते थे, एक जाति दूसरी जाति से झगड़ा करती थी, एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों के साथ झगड़ा करते थे. आज दस साल हो गए, सारा ख़त्म हो चुका भाई, कर्फ्यू का नामोनिशान नहीं है. नहीं तो पहले बच्चा पैदा होता था, माँ का नाम मालूम न हो, बाप का नाम न बोल सकता हो पर कर्फ्यू शब्द बोलना जानता था. आज आठ-दस साल के बच्चों को कर्फ्यू क्या होता है वो पता नहीं है. पुलिस का लाठीचार्ज क्या होता है वो पता नहीं है, अश्रु गैस क्या होता है वो मालूम नहीं है. गुजरात एकता, शांति और भाईचारे से आगे बढ़ रहा है, हमें और आगे बढ़ाना है. और गुजरात विरोधियों को मैं कहना चाहता हूँ कि आप अपनी राजनीति गुजरात के बाहर किया करो, आपको जो खेल खेलने हैं, वहाँ खेला करो. हम गुजरात के लोगों को एकता, शांति और भाईचारे से जीने का अवसर दो. बहुत हो चुका, हमारे घाव पर नमक छिड़कने का काम बंद होना चाहिए. हमने इंतजार किया, हर बात का इंतजार किया. गुजरात की जनता को आप झुका नहीं पा रहे हो, गुजरात की जनता को आप गुमराह नहीं कर पा रहे हो. और हिन्दुस्तान भी अब मानने लगा है कि गुजरात के साथ अन्याय हुआ है और यह बात अब घर-घर पहुँच चुकी है. और इसलिए मैं ऐसे लोगों को सदभावना मिशन के इस कार्यक्रम में हाथ जोड़ कर विनती करता हूँ, प्रेम से कहना चाहता हूँ कि दस साल जो हुआ सो हुआ, मेहरबानी करके आने वाले दिनों में गुजरात के सत्य को स्वीकार कीजिए, हमारी सच्चाई को स्वीकार कीजिए. हम देश के लिए काम करने वाले लोग हैं. हम यहाँ फसल पैदा करते हैं, देश का पेट भरने को काम आता है. अगर हम यहाँ कॉटन पैदा करते हैं तो मेरे देश के लोगों को कपडा मिलता है, हम यहाँ दवाईयाँ बनाते हैं तो मेरे देश के लोगों की बिमारी दूर होती है. हम देश के लिए काम करते हैं. जैसे किसी दुश्मन देश के नागरिक हों उस प्रकार से हम पर जुल्म चला है..! हर चीज़ की सीमा होती है. और इसलिए भाईयों-बहनों, मैंने पहले ही कहा कि आनेवाले दिनों में बहुत बड़ा तूफान लाने की कोशिश होने वाली है. सफलता नहीं मिलेगी, मुझे मालूम है. वो कुछ नहीं कर सकते, लेकिन वो आदत छोडेंगे नहीं. लेकिन लाखों लोगों ने, करोड़ों परिवारों ने जिस प्रकार से समर्थन दिया है, यह सिद्ध हो चुका है कि हमारा मार्ग सच्चाई का है.

भाईयों-बहनों, आइए, माँ अंबा के चरणों में बैठे हैं, हमें छोटा-सा भी मनमुटाव हो तो उससे गांव को मुक्त करें. तहसील में कोई मनमुटाव हो तो उसे मुक्त करें. विकास को ही अपना मार्ग बनाएँ. सारी समस्याओं का समाधान विकास में है, हर दुखों की दवाई विकास में है, हर संकट का सामना करने का सामर्थ्य विकास में है. आने वाली पीढी के बारे में सोचना है तो विकास ही रास्ता है. और अगर विकास करना है तो एकता, शांति और भाईचारे के बिना नहीं हो सकता. विकास करना है तो एकता, शांति, भाईचारे को गाँव-गाँव में एक ताकत के रूप में हमें प्रस्थापित करना पडेगा, इसी सामर्थ्य को लेकर आगे बढ़ना पडेगा और वो सदभावना के माध्यम से होता है. मुझे विश्वास है कि मेरे गुजरात के करोड़ों नागरिक मेरे इस छत्तीस दिन के अनशन को, मेरी इस तपस्या को कभी भी कोई नुकसान नहीं होने देंगे, एकता को बरकरार रखेंगे, ये मेरी माँ जगदंबा से प्रार्थना है और मेरे छ: करोड़ नागरिकों से भी प्रार्थना है. भाईयों-बहनों, मैंने तपस्या की है. गुजरात के आने वाले कल के लिए तपस्या की है, भाईचारे के लिए, एकता-शांति के लिए तपस्या की है. और हिंदुस्तान के इतिहास में इतने लंबे कालखंड के लिए इस प्रकार का अनशन चला हो ये पहली घटना है.

मारे कांग्रेस के मित्रों की मन:स्थिति में जानता हूँ. उनका सब कुछ चला गया है, इतने साल हो गये, जनता के दिलों में जगह नहीं बना पा रहे हैं और उसके कारण उनका मानसिक संतुलन खो जाना बहुत स्वाभाविक है. मानसिक संतुलन खो जाने के कारण कुछ भी अनाप-शनाप बोल देना भी बहुत स्वाभाविक है. अरे छोटा बालक हो, किसी खिलौने से खेलता हो, घड़ी से खेलता हो और हमें लगे कि टूट जाएगी, और हम घडी ले लें तो बच्चा कितना बौखला जाता है..? ये बहुत स्वाभाविक है. हमारे मित्र सब नाराज हो जाते हैं कि भाई, ये कांग्रेस के लोग ऐसा क्यों बोलते हैं, इतना क्यों बोलते हैं..? मैं तो पत्रकारों से भी प्रार्थना करता हूँ कि वो जितना बोलते हैं न, एक-एक शब्द छापिए, मैं टी.वी. के मित्रों को भी कहता हूँ, वो जो बोलते हैं, बिल्कुल सेन्सर मत किजिए, पूरा दिखाइए, जनता अपने आप इस भाषा को समझ लेगी, जनता अपने आप उन संस्कारों को जान लेगी. हमें कुछ करने की जरूरत नहीं पडेगी. ये गुजरात बड़े संस्कारी लोगों का समाज समूह है. लेकिन भाईयों-बहनों, मेरे मन में उनके प्रति कोई कटुता नहीं है. डिक्शनेरी में जितने शब्द हैं, जितनी गालियाँ हैं वे सारी मेरे लिए उपयोग कर चुके हैं, जिन गालियों को डिक्शनेरी में लिखना मुश्किल है वो भी सारी उपयोग कर चुके हैं. और कभी-कभी इस प्रकार का गुस्सा निकालने से मन थोडा हल्का हो जाता है. एक प्रकार से उनका मन शांत करने में मैं काम आया हूँ, ये भी मेरी सदभावना है, ये भी मेरी उनके प्रति सदभावना है. मुझे कभी लगता है कि अगर मैं न होता, तो वे अपना गुस्सा निकालते कहाँ? परिवार में जाकर बीवी को परेशान कर देते, अच्छा हुआ मैं हूँ..! मैं उनको शुभकामनाएँ देता हूँ कि माँ अंबा उनको शक्ति दें. और आधिक गालियाँ दें, और अधिक आरोप लगाएँ, और अधिक झूठ फैलाएँ और अधिक अनाप-शनाप बोलें और हमारी सदभावना की ताकत भी माँ अंबा बढ़ाती रहें ताकि किसी के प्रति कटुता पैदा न हो. प्रेम और सदभाव का महामंत्र ले कर हम आगे चलें.

 

ज जब बनासकांठा में आया हूँ तब, वर्तमान में सरकारी बजट से करीब ११०० करोड़ रूपयों के काम जारी हैं, प्रगति में हैं. लेकिन आज जब माँ अंबा के चरणों में आया हूँ और आपके सामने विकास की बात कर रहा हूँ तब आने वाले वर्ष के लिए विकास के काम जिसमें किसान का विकास हो, रास्ते चौड़े करने हों, केनाल का काम हो, पीने का पानी पहुँचाने का काम हो, गैस की पाइपलाइन का काम हो, स्कूल के कमरे बनाने हों, अस्पताल बनाने हों, विविध प्रकार के विकास के अनेक काम, उन सब कामों के लिए, आने वाले एक साल के लिए एक हजार सातसो करोड़ रूपया, १७०० करोड़ रूपया इस बनासकांठा की धरती के चरणों में दे रहा हूँ ताकि विकास की नई ऊँचाइयों को हम पार करें. फिर एक बार मेरे साथ बोलें...

 

भारत माता की जय..!

पूरी ताकत से बोलें,

भारत माता की जय..!

 

हुत बहुत धन्यवाद..!

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भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

मैं मेरा भाषण शुरू करूं उससे पहले यहां मेरे कुछ युवा मित्र बढ़िया-भढ़िया चित्र बनाकर के लाए हैं। मैं एसपीजी के लोगों से कहंगा ये जो छोटे-छोटे मेरे बाल मित्र चित्र लाएं हैं उनसे ले लीजिए और अगर आपने पीछे अपना एड्रेस लिखा है तो मैं आपको चिट्ठी भेजूंगा... मैं आपका बहुत आभारी हूं इतने प्यार से आपलोग बनाकर ले आए हो... बोलिए भारत माता की... भारत माता की...इस चुनाव में यहां से जो उम्मीदवार हैं, उनसे मेरा आग्रह है कि आगे खड़े हो जाएं.. जो चुनाव लड़ रहे हैं कैंडिडेट हैं जो कैंडिडेट हैं... मैं आता हूं। मैं जरा सभी कैंडिडेट को मिलकर के आता हूं उसके बाद मेरा बाषण शुरू करूंगा।

भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की..

जॉय माँ तारा, जॉय बक्रोनाथ, जॉय जगोन्नाथ जॉय निताई

बीरभूम की धरती ऐतिहासिक है...क्रांतिकारी है...और प्रेरणाओं से भरी भी हुई है। दुकुड़ीबाला देवी... महान साधक बामाख्यापा...भारत रत्न प्रणब मुखर्जी... उपन्यासकार ताराशंकर बंदोपाध्याय...पद्मश्री तृप्ति मुखर्जी और तकदीरा बेगम...ऐसी अनेक प्रेरक संतानों की धरती, ये हमारी बीरभूम है। बीरभूम ने संथाल क्रांति को ऊर्जा दी थी। आज उसी बीरभूम में पोरिबॉर्तन की आंधी नज़र आ रही है...मेरे सामने ये विशाल जनसागर, ये परिवर्तन की घोषणा कर रहा है। अभी मैं हेलीकॉप्टर से उतरा और हेलीपैड से यहां तक आया। दोनों तरफ इससे भी ज्यादा भीड़ा वहां लगी हुई थी। ये क्या अद्भुत नजारा है। आप सब इतनी बड़ी तादाद में उत्साह, उमंग और जोश के साथ हम सबको आशीर्वाद देने के लिए आए हम आप सबका अभिनंदन करता हूं प्रणाम करता हूं।
हमारा ये बीरभूम...'बाउल' संगीत की भूमि है...और आज यहां एक ही संगीत, एक ही धुन गूंज रही है...एक ही गूंज... एक ही संगीत... एक ही आवाज पाल्टानो दोरकार! पाल्टानो दोरकार! पाल्टानो दोरकार!

साथियों,

गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ऐसा समाज देखना चाहते थे...जहां हर कोई भय से मुक्त हो। लेकिन TMC के महाजंगलराज ने एकदम उलटा कर दिया है। ये मां, माटी और मानुष की बात करते थे... लेकिन मां आज रो रही है...माटी पर घुसपैठियों का कब्ज़ा हो रहा है...और मानुष, भयभीत है, डरा हुआ है, सहमा हुआ है। TMC के महाजंगलराज का साक्षी हमारा ये बीरभूम है।

साथियों,

बोगतुई में जो कुछ हुआ…वो सिर्फ एक घटना नहीं थी, वो मानवता के माथे पर कलंक था। निर्दोष महिलाओं और बच्चों को...जिंदा जला दिया गया। ये महा-जंगलराज नहीं है तो क्या है? ये महाजंगल राज है कि नहीं है… ये महाजंगल राज है कि नहीं है… ये महाजंगल राज जाना चाहिए कि नहीं चाहिए … ये महाजंगल राज का खात्मा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए… साथियों, ये घटना टीएससी सिंडिकेट के गुंडाराज का बहुत ही खतरनाक सबूत है । माटी आपकी, हक आपका...लेकिन इस पर कब्जे के लिए ये गैंगवॉर चल रही है। बालू, पत्थर और कोयला...ये जो लूट चल रही है ये TMC के बड़े-बड़े नेताओं उनके आलाकमान, उनके आशीर्वाद से हो रहा है।


साथियों,

बंगाल की माटी पर घुसपैठियों का कब्जा... बहुत ही खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। TMC का सिंडिकेट...घुसपैठियों को फर्जी सरकारी डॉक्यूमेंट दिलवा रहा है। पड़ोस से घुसपैठिए अंदर आते हैं...यहां पंचायत हो, अन्य सरकारी दफ्तर हों, वहां डरा-धमकाकर गलत काम कराए जा रहे हैं फर्ज़ी डॉक्यूमेंट बनाने का ये काला खेल...बंगाल की, देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसलिए आज मैं बंगाल के लोगों से एक वायदा करता हूं। बंगाल में बीजेपी सरकार बनते ही...घुसपैठ के मददगार लोगों के खिलाफ एक विशेष जांच बिठाई जाएगी। ये मेरी गारंटी है आपसबको... घुसपैठियों के हर मददगार को... चाहे वो कितना ही ताकतवर क्यों न हो, उसकी पहचान की जाएगी। घुसपैठियों को भी खदेड़ा जाएगा... और घुसपैठियों के जो आका हैं, उनको भी जेल में भरा जाएगा।

साथियों,

सरकारी योजना हो...मजदूरी का काम हो...घुसपैठिए, कम पैसे में ये काम यहां के लोगों से छीन लेते हैं। और यहां के लोकल लोगों को काम की तलाश में कहीं और जाना पड़ता है। पलायन करना पड़ता है। लिख लो साथियों अब ये नहीं चलेगा। रामपुर हाट की क्या स्थिति है... ये तो आप सभी प्रत्यक्ष देख ही रहे हैं। मालदा में बीते दिनों क्या हुआ...ये भी पूरे देश ने देखा। SIR के काम में लगे जो न्यायाधीश हैं...उनको तक, बंधक बना दिया गया। इस भय से बंगाल के मानुष को मुक्ति दिलानी ज़रूरी है।

साथियों,

मां-माटी और मानुष में से...मां की स्थिति तो और भी खराब है। हमारे SC/ST/OBC समाज की बेटियों के लिए तो जीना मुश्किल हो गया है। जो TMC देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति जी तक का अपमान कर सकती है...उसकी मानसिकता क्या होगी? कितना अहंकार होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, संथाल समाज के एक बड़े कार्यक्रम के लिए यहां आई थीं। देश में किसी की भी सरकार हो...राष्ट्रपति जी को उचित सम्मान देना संविधान के तहत आपका दायित्व है। लेकिन ये अहंकारी TMC सरकार...देश की राष्ट्रपति तक को कुछ भी नहीं समझती। सिर्फ इसलिए क्योंकि वो आदिवासी समाज की बेटी हैं और इसलिए आपको अपमान करने का हक मिल जाता है। ये देश के सभी आदिवासियों का अपमान है। देश की सभी महिलाओं का अपमान है। ये देश के संविदान का अपमान है।

साथियों,

पिछले साल की घटना आप सभी को अच्छे से याद होगी। बीरभूम में ही, स्कूल में पढ़ने वाली एक आदिवासी बिटिया...उसके साथ जो हुआ, वो बहुत ही परेशान करने वाला है। जिसने अपनी बेटी को खोया है...उसकी भरपाई कोई भी योजना, कितना भी पैसा कोई दे.. भरपाई नहीं हो सकती है। नहीं हो सकती है। यही तो, आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुआ था। एक डॉक्टर बेटी को हमसे छीन लिया गया। मैं सभी माताओं-बहनों से कहूंगा...ये चुनाव बेटियों की सुरक्षा के लिए है।

भॉय नॉय, भोरशा चाई... मां-बोनेदेर शोम्मान चाई...

बाकी बहनों के लिए हर महीने मदद देने की बात हो...अन्य सुविधाएं हों...ये बीजेपी की हर राज्य सरकार देती है। बिना कट कमीशन देती है.. जिसका हक है उसके खाते में पहुंचाती है। बंगाल बीजेपी ने भी माताओं-बहनों के लिए अनेक घोषणाएं की हैं...इन सारी घोषणाओं को तेज़ी से लागू किया जाएगा...ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

TMC की निर्मम सरकार की विदाई.. निर्मम सरकार की विदाई..बंगाल की युवाशक्ति तय कर रही है। बीते सालों में यहां के नौजवानों को जितनी लाठियां पड़ीं... जितने आंसू बहाने पड़े हैं...23 अप्रैल को और 29 अप्रैल को इसका जवाब मिलेगा। मैं बीरभूम के आप सभी साथियों को भय रहित.. भय रहित बंगाल का विश्वास दिलाने आया हूं।

साथियों,

जिस बंगाल ने दुनिया को विश्व-भारती जैसा संस्थान दिया...वहां से युवा पढ़ाई के लिए, रोजगार के लिए पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। और ये बंगाल का दुर्भाग्य देखिए... कोई नई यूनिवर्सिटी यहां खुल नहीं रही है। जो खुली हैं, उनके रेगुलर कैंपस नहीं हैं। जहां कैंपस हैं, वहां टीचर नहीं हैं। और जो शिक्षक हैं, उनकी सैलरी का कोई ठिकाना नहीं है। स्कूल भी यहां एक-एक करके बंद हो रहे हैं।
जेखाने स्कूल बोंदो, जेखाने स्कूल बोंदो, भोविष्योत बोंदो,
बांग्ला चाय...भोय नोय, भोरशा..!

साथियों,

आज केंद्र सरकार देश में रोजगार मेले आयोजित करती है। जहां-जहां भाजपा सरकारें हैं...वहां भी रोजगार मेले लगते हैं। इसके तहत लाखों नौजवानों को सरकारी नौकरियों के अपॉइंटमेंट लैटर दिए जाते हैं। बीते दो-ढाई वर्षों में ही...रोजगार मेलों से 17 लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी गई हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में...रोजगार मेला नहीं, नौकरियों की लूट का खेला चल रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाले ने...हज़ारों परिवारों के सपनों को कुचल दिया। लाखों नौजवानों को भयभीत कर दिया, आशंका से भर दिया।

साथियों,

भारत, आज डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग में नए रिकॉर्ड बना रहा है। आप अखबारों में पढ़ते होंगे...टीवी पर देखते होंगे.. मेड इन इंडिया हथियार दुनियाभर में एक्सपोर्ट हो रहे हैं। लेकिन TMC की दुर्नीति देखिए... यहां क्या हो रहा है। देश हथियार एक्सपोर्ट कर रहा है... और TMC की दुर्नीति देखिए.. यहां फैक्ट्रियां क्या करती है.. यहां फैक्ट्रियां कच्चे बम बना रही है कच्चे बम.. गली-मोहल्ले में कच्चे बम की फैक्ट्रियां चल रही हैं। बीरभूम में ही, टीएमसी से जुड़े लोगों के घर से कच्चे बम के भंडार मिलते हैं। TMC ने कच्चे बम के निर्माण को ही कुटीर उद्योग बना दिया है। TMC के राज में...लघु और कुटीर उद्योग बंद हो रहे हैं...लेकिन कच्चे बम के उद्योग फैल रहे हैं।

साथियों,

अब ये नहीं चलेगा... अब ये नहीं चलेगा..

आर नोय! चुप थाकबो ना ! आर नोय! चुप थाकबो ना!

आप कमल छाप पर बटन दबाइए...बीजेपी, बंगाल में भी रोज़गार मेले शुरू करेगी। बीजेपी, सभी खाली पड़े पदों पर तेज़ी से भर्ती करेगी। और बीजेपी, बंगाल सरकार के कर्मचारियों को... सेवेंन्थ पे कमीशन का लाभ देगी।

साथियों,

पश्चिम बंगाल को कुदरत ने बहुत कुछ दिया है। इस धरती के नीचे प्राकृतिक संपदा के खजाने हैं। लेकिन इस संपदा को TMC का सिंडिकेट लूट रहा है। TMC के सिंडिकेट का ये गुंडाराज... केंद्र सरकार को भी रोड और रेल जैसे काम तेज़ी से नहीं करने देता। ताकि यहां इंडस्ट्री न लगे...ताकि, यहां जो माइनिंग होती है, उसपर TMC के सिंडिकेट का राज चलता रहे। डेउचा पाचमी के साथ क्या हुआ... इसका जवाब भी TMC के पास नहीं है।

साथियों,

मैं यहां के सभी युवा साथियों को...हमारे SC परिवारों, मेरे आदिवासी परिवारों को भरोसा देता हूं... कि TMC के सिंडिकेट का अंत 4 मई को होकर रहेगा। 4 मई को टीएमसी जाएगी। भाजपा आएगी... भाजपा... भाजपा... साथियों, बंगाल में बीजेपी सरकार कनेक्टिविटी का नया अध्याय शुरू करेगी। खड़गपुर-मोरेग्राम एक्सप्रेसवे...दुबराजपुर बायपास...सिउरी रेलवे स्टेशन...ऐसे प्रोजेक्ट्स से कनेक्टिविटी भी अच्छी हुई है...और युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है। लेकिन अभी TMC ने 75 हज़ार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स रोक के रखे हैं। आपको आंकड़ा याद रहेगा...भारत सरकार 75 थाउजेंड करोड़ 75 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट यहां लाकर के खड़े किए हैं... लेकिन ये रोककर के बैठे हैं... आपको याद है ये आंकड़ा... कितने... 75 हजार करोड़... कितने... कितने...डबल इंजन सरकार बनते ही, ऐसे अनेक प्रोजेक्ट्स पर तेज़ी से काम होगा। जिससे बीरभूम में छोटे और बड़े, हर प्रकार के उद्योगों के लिए नए रास्ते बनेंगे।

साथियों,

आप सभी जानते हैं...TMC ने कैसे मनरेगा के नाम पर भी गरीब परिवारों, दलित परिवार और आदिवासी परिवारों को ठगा है। फर्जी जॉब कार्ड बनाए...कागज़ पर ही काम किया...बजट में हेराफेरी की...अब केंद्र सरकार जी राम जी कानून लेकर आई है। आप यहां बीजेपी सरकार बनाइए...हम, जी राम जी कानून लागू करेंगे। गरीबों को रोजगार देंगे... गांव-गांव रोजगार देंगे... इससे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के लिए नई सुविधाएं बनेंगी। और गांव में एक सौ पचीस दिन का रोजगार भी मिलेगा...और मजदूरी का पूरा पैसा आपके बैंक खाते में आएगा। कोई सिंडिकेट हाथ नहीं लगा पाएगी... कोई कटमनी नहीं, कोई कमीशन नहीं। ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

बीरभूम के आलू पॉस्तो की बहुत चर्चा होती है। लेकिन TMC की निर्ममता, आलू की खेती को तबाह कर रही है। इसके कारण, आलू किसान अपनी जान तक दे रहे हैं। ये बहुत ही गंभीर संकट है। पहले आलू किसानों से उपज खरीदने का वायदा किया...और फिर आलू की फसल को सड़ने के लिए छोड़ दिया। TMC को इस धोखे की सज़ा मिलनी चाहिए। सज़ा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए... टीएमसी को सज़ा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए... सजा देंगे... सजा देंगे... और इसलिए यहां बदलाव चाहिए।
एखोन बदोल चाई... एखोन बदोल चाई...बदोल चाई…

साथियों,

केंद्र सरकार ने छोटे किसानों के लिए FPO... यानि किसान उत्पादक संघ की योजना बनाई है। छोटे-छोटे किसान समूह बना सकते हैं..

इसमें किसान ही, लोन, बीज, खाद, बाज़ार में बिक्री...ये सबकुछ मिलकर संभालते हैं। सरकार FPO को कोल्ड स्टोरेज और आलू चिप्स जैसे कृषि आधारित उद्योगों को लिए भी मदद देती है। यानि किसानों को ये FPO चिप्स के उद्योग भी लगा सकते हैं। यहां भी आप बीजेपी सरकार बनाइए. बंगाल में किसानों के नए FPO बनाए जाएंगे, जिससे अनेक समस्याओं का समाधान होगा।

साथियों,

आपको याद रखना है...TMC को PM शब्द से तो नफरत ही …नफरत है। ये पीएम शब्द मोदी के परिवार का शब्द नहीं है। ये पीएम शब्द मोदी की जागिर नहीं है। ये पीएम शब्द भारत के संविधान ने दिया है और जनता के आशीर्वाद से मिलता है। इनको किसान से, गरीब से, आदिवासी से, श्रमिक से सभी से नफरत है।मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूं। बीजेपी सरकार की जिन भी योजनाओं में PM शब्द होता है..पीएम लगा है...TMC उनका फायदा यहां मिलने ही नहीं देती। जैसे, पीएम किसान सम्मान निधि है। शुरुआत के कई महीनों तक बंगाल के किसानों को इन्होंने इससे वंचित रखा। लेकिन जब किसानों ने दबाव डाला, तो निर्मम सरकार को झुकना पड़ा। अभी तक, इस योजना से बंगाल के छोटे किसानों को...14 हजार करोड़ रुपए से अधिक मिल चुके हैं। कोई कट नहीं, कोई कमिशन नहीं, कोई सिंडिकेट नहीं, 14 हजार करोड़ रुपए सीधा किसानों के खाते में पहुंच गया। और यहां बीरभूम के तीन लाख किसान परिवारों को भी...अभी तक करीब आठ सौ करोड़ रुपए मिल चुके हैं।

साथियों,

ऐसे ही, पीएम फसल बीमा योजना है। ये योजना यहां लागू होती, तो फसल बर्बाद होने पर किसानों को क्लेम मिलता। लेकिन इसमें पीएम है, तो यहां के सीएम को गुस्सा आ जाता है, पीएम का नाम सुनते ही सीएम भड़क जाती है। पीएम कुसुम योजना से, किसानों को सोलर पंप मिलते। ये भी, टीएमसी लागू नहीं करती है।

साथियों,

तृणमूल की नफरत हमारा आदिवासी समाज भी भुगत रहा है। पिछड़ी आदिवासी जनजातियों के लिए बीजेपी सरकार पीएम-जनमन योजना चला रही है। देशभर में इसके तहत काम हो रहा है। लेकिन बंगाल के आदिवासी परिवारों को इसका पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्यो…..क्योंकि इस योजना में पीएम लगा हुआ है।

साथियों,

चुनावों में आपका आशीर्वाद बीजेपी का पीएम तो बनाता आ रहा है... लेकिन अब इस चुनाव में आपको बंगाल में बीजेपी का सीएम बनाना है। सीएम बनाएंगे...बीजेपी का सीएम बनाएंगे... आप यहां 4 मई को यहां बीजेपी का सीएम बनाएंगे ताकि पीएम और सीएम, दोनों मिलकर आपके फायदे के लिए डबल काम करके रहेंगे।

साथियों,

मैं बंगाल के सभी साथियों से कहूंगा...इस बार कमल छाप पर भरोसा करना है। TMC ने आपके साथ जो कुछ किया है...उसका हिसाब करने का ये सबसे उत्तम मौका है। 23 अप्रैल को और 29 अप्रैल को इन सभी साथियों को विजयी बनाना है। और आज मैं आपको वादा करता हूं। आपने हमेशा मेरे मुंह से सुना होगा, सबका साथ सबका विकास... सुना है ना... सबका साथ सबका विकास सुना है ना... ये विकास का मेरा मंत्र है... लेकिन बंगाल में मुझे और ज्यादा करना है.. और इसलिए सबका साथ... सबका विकास और जिन्होंने बंगाल को लूटा है सबका हिसाब। ये मोदी इनको चोड़ने वाला नहीं है। चुन-चुन कर के हिसाब मांगेगा। चुन-चुन के हिसाब मांगा जाएगा। जिन्होंने बंगाल को लूटा है, उनको लौटाना पड़ेगा... बंगाल के मेरे भाई बहनों आप मेरा एक करोगे... सबके सब हाथ ऊपर करके बताओ... मेरा एक काम करोगे... पक्का करोगे आप जिससे भी मिलें, उनसे कहना कि मोदी जी आए थे... उन्होंने आपको पॉइला बैशाख की शुभेच्छा दी है। पॉइला बैशाख की शुभेच्छा पहुंचाओगे... पॉइला बैशाख की शुभेच्छा पहुंचाओगे...

बोलो मेरे साथ..

भारत माता की...

भारत माता की...

दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए.. भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे...