કાર્યક્રમમાં હિંદુસ્તાનની બધી ટી.વી. ચેનલો મોજૂદ છે, એમણે એક લાગણી વ્યક્ત કરી હતી કે મારું ભાષણ હિન્દીમાં થાય તો સારું. તો હું અહીંના સહુ નાગરિકોની ક્ષમા માગીને આજના આ સદભાવના મિશનના સમાપન કાર્યક્રમનું ભાષણ હિન્દીમાં કરું છું. અમસ્તાયે આપણને ગુજરાતના લોકોને હિન્દી સમજવામાં ક્યારેય મુશ્કેલી પડતી નથી, કારણ આપણે પહેલેથી રાષ્ટ્રીય ધારામાં ઉછરેલા લોકો છીએ.

 दभावना मिशन का जब से प्रारंभ किया तब से लेकर अब तक अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग तरीके से उसको जांचने की, परखने की कोशिश की, किसी ने उसमें से कमीयाँ ढूंढने की कोशिश की, किसी ने इस माहौल को अपने फायदे में कैसे लिया जाए, मीडिया का ध्यान आकर्षित कैसे किया जाए, इसलिए पेरेलल कुछ कोशिश की, अलग-अलग तरीके से, अलग-अलग ढंग से ये सारा घटनाक्रम चला. भाईयों-बहनों, ३६ दिन तक इस प्रकार से बैठना, जनता जनार्दन के दर्शन करना, उनके आशीर्वाद प्राप्त करना भाईयों-बहनों, मेरे लिए भी एक अकल्पनीय सुखद अनुभव रहा है. मैंने ऐसी कल्पना नहीं की थी कि इस प्रकार से लाखों लोग जुड जाएंगे. एकदम सात्विक कार्यक्रम, सिर्फ उपवास, किसी के खिलाफ कुछ नहीं, किसी से कुछ माँगना नहीं, उसके बावजूद भी ये जन सैलाब. जो लोग इस कार्यक्रम की आलोचना करते हैं, अगर ईमानदारी नाम की कोइ चीज़ उनके जीवन में बची हो, वो राजनीति के हों, गैर राजनीति के हों, मैं सबको सुनाना चाहता हूँ. क्या कोई कल्पना कर सकता है कि सदभावना यात्रा में आने के लिए एक लाख से भी अधिक लोग भिन्न-भिन्न स्थानों से पदयात्राएँ करके इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुऐ? एक लाख से अधिक लोग..! और कुछ लोग तो पचीस-पचीस तीस-तीस किलोमीटर की पदयात्रा करके आए थे. माणगर के आदिवासी भाईयों ने पाँच दिन तक पदयात्रा की. पावागढ से दो-दो दिन चलकर लोग आये. भाईयों-बहनों, अपने घर से निकल कर तीर्थ क्षेत्र पर जाने के लिए पदयात्रा हो ये तो हमने सुना है, लेकिन तीर्थ क्षेत्र से निकलकर इस प्रकार के कार्यक्रम में पदयात्री आए ये अपने आप मे एक अजूबा है, इसको समझने के लिए राजनैतिक चश्मे काम नहीं आ सकते. भाईयों-बहनों, इस सदभावना यात्रा में लोग पदयात्राएँ करके आए, साईकल पर जूलूस लेकर आए, स्कूटर पर जूलूस लेकर आए..! जब-जब जिस-जिस जिले में सदभावना यात्रा का कार्यक्रम हुआ, वहाँ के नागरिकों ने स्कूल में जो गरीब बच्चे पढ़ने आते हैं उनको विशिष्ट भोजन कराने का संकल्प किया, तिथिभोज दिया. इस सदभावना मिशन के कार्यक्रमों के दौरान, अब तक जो मुझे जानकारी मिली है, नागरिकों ने करीब ४५ लाख बच्चों को विशिष्ट भोजन करवाया. सदभावना का प्रभाव क्या है ये अनुभव हो रहा है. भाईयों-बहनों, कुछ लोगों ने गरीबों को अनाज बांटने का संकल्प लिया. छ: लाख किलोग्राम से अधिक अनाज लोगों ने दान में दिया जो लाखों परिवारों में बांटा गया. करोड़ों रूपयों का ये दान एक कार्यक्रम के निमित्त लोगों ने जोड़ा. ‘गर्ल चाइल्ड एज्युकेशन’ के लिए करीब चार करोड़ रूपये से ज्यादा, ‘कन्या शिक्षा’ के लिए पूरे गुजरात में से लोग मुझे दान दे रहे हैं. इस सदभावना मिशन के दौरान चार करोड़ से अधिक रूपये जनता जनार्दन ने दिये. भाईयों-बहनों, अभी तो मैं जानकारी एकत्र कर रहा हूँ, ये सारी जानकारी जब डिटेल में आएगी, तब पता नहीं कि अंत कहाँ पहुँचेगा. करीब १७,००० जितने प्रभात-फेरी के कार्यक्रम, प्रात: के समय अपने-अपने गाँव में सदभावना संदेश देने की यात्राएँ, १७,००० ऐसी यात्राएँ निकलीं और करीब २० लाख लोगों ने उसमें हिस्सा लिया. जब एक स्वप्न को ले करके चलते हैं, वो कैसे जन आंदोलन बन जाता है इसका ये जीता-जागता उदाहरण है.

भाईयों-बहनों, मैं माँ अंबा के चरणों में आज बैठा हूँ. जिस दिन मैंने सदभावना मिशन का प्रारंभ किया था, मैं अपनी माँ से मिलने के लिए गया था. मैंने उनके चरण छूकर, आशीर्वाद लेकर अनशन का आरंभ किया था. और आज जगत-जननी माँ के चरणों को छूकर इस संकल्प को आगे बढाने के लिए मैं आज आपके बीच आया हूँ. उपवास पूर्ण हो रहे हैं, लेकिन दुनिया को डंके की चोट पर गुजरात की शक्ति का परिचय कराने का मेरा संकल्प और मजबूत हुआ है, और ताकतवर हुआ है और दुनिया की हर शख़्सियत को मैं गुजरात की शक्ति का परिचय करवा कर रहूँगा. मित्रों, वार झेलना ही मेरी आदत है. माँ जगदंबा ने मुझे वो शक्ति दी है, मैं हमलों को बड़ी आसानी से झेल सकता हूँ और न ही मुझे ऐसे हमलों की परवाह होती है, न मुझे चिंता होती है. अगर मुझे चिंता होती है तो मेरे छ: करोड़ गुजरातीयों के सुख-दु:ख की चिंता होती है, और किसी बात की मुझे चिंता नहीं होती है. मैं इनमें रंग चुका हूँ, मैं डुब चुका हूँ और इसी के लिए अपने आप को समर्पित करता जा रहा हूँ. जब मैंने सभी जिलों में जाने का तय किया था तब कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि एक मुख्यमंत्री इतनी प्रतिबद्धता के साथ काम पूरा कर सकता है. आज मैंने उसे पूरा किया, मुझे बहुत संतोष है. मैं पूरे गुजरात का आभारी हूँ क्योंकि मेरे हिसाब से इस राज्य के ७५% परिवार ऐसे होंगे जिनके किसी न किसी प्रतिनिधि ने इस सदभावना मिशन में आकर मुझे आशीर्वाद दिये हैं. ऐसा सौभाग्य कहाँ मिल सकता है.

मित्रों, सदभावना की ताकत देखिये, गुजरात मुद्दों को कैसे लेता है उसको देखिये. कुछ दिन पूर्व देश के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंहजी टी.वी. पर बयान दे रहे थे. करीब १५-२० दिन पहले की बात है. वे कह रहे थे कि मालन्यूट्रिशन, कुपोषण, ये हमारे देश के लिए बहुत बड़ी शर्म की बात है. उन्होंने कहा शर्म की बात है, स्वीकार किया, लेकिन आगे क्या? आगे कोई खबर आयी आपके पास? क्या किया कुछ सुना, भाई? कुछ नहीं..! पीडा व्यक्त कर दी, बात खत्म. ये गुजरात देखिये; कैसे रास्ता दिखा रहा है. गुजरात के गाँव-गाँव में कुपोषण से मुक्ति की एक जंग छेड दी गई और लोग हजारों किलो सुखडी, हजारों लिटर दूध, हजारों किलो ड्रायफ्रूट कुपोषित बच्चों को दान में दे रहे हैं. इस आंदोलन की ताकत देखिये, भाईयों. मैं कांग्रेस के मेरे मित्रों को प्रेम से पूछना चाहता हूँ, क्या इस देश का कोई भी नागरिक, कोई भी बालक अगर कुपोषित है तो सार्वजनिक जीवन में आपको इसकी पीडा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? आप सरकार में हों या न हों. यहाँ ये नागरिक कहाँ सरकार में हैं जो हजारों किलो सुखडी दे रहे हैं, हजारों किलो ड्रायफ्रुट दे रहे हैं, हजारों लिटर दूध बांट रहे हैं, ये कहाँ सत्ता में हैं? आपकी पार्टी के प्रधानमंत्री हैं, उन्होंने पीडा व्यक्त की, तो कम से कम आप इतना तो सत्कर्म कर लेते कि आप भी कुछ इकट्ठा करके गरीबों को बांटने के लिए जाते और कुपोषण के खिलाफ अपना एक कमिट्मेन्ट दिखाते, आपके प्रधानमंत्री के लिए तो करते..! नहीं करते हैं, उनको जनता की चिंता नहीं है, उनको अपनी चिंता है. भाईयों-बहनों, हमारी शक्ति हमने लगाई है आपकी खुशी के लिए, उन्होंने शक्ति लगाई है उनकी कुर्सी के लिए. फर्क यही है. हमारा ध्यान केंद्रित हुआ है छ: करोड़ की खुशी पर, उनका ध्यान केंद्रित हुआ है सत्ता की कुर्सी पर. ये बहुत बड़ा फर्क है और तभी जनता इस प्रकार के लोगों को स्वीकार नहीं करती. भाईयों-बहनों, ये सदभावना मिशन की सफलता इस बात पर भी निर्भर है. आप देखना कल से, जो लोग पिछले दस सालों से गुजरात की बुराई कर रहे हैं, वे आने वाले २४ घंटों में ही पूरी ताकत के साथ फिर मैदान में आएँगे. मेरे शब्द बड़ी गंभीरता से लिख लिजिए. कल से ही देखना आप, २४ घंटे के भीतर-भीतर ये जितने लोग दस साल से गुजरात की बुराई कर रहे हैं, गुजरात को बदनाम कर रहे हैं, गुजरात पर गंदे, गलीच, झूठे आरोप लगा रहे हैं ये सारे लोग, पूरी जमात २४ घंटे के भीतर-भीतर फिर एक बार गुजरात को बदनाम करने के लिए पूरी ताकत से साथ मैदान में उतरेगी क्योंकि सदभावना मिशन की यह सफलता उनको हज़म होने वाली नहीं है. उनको बैचेन कर रही है कि ये कैसे हो सकता है, हमने तो गुजरात को ऐसा पेइंट किया था लेकिन गुजरात तो कुछ और है. हमने तो मुसलमानों को भी ये कह दिया था, लेकिन यहाँ तो लोग गले मिल रहे हैं. हमने ईसाइयों के लिए कहा था लेकिन यहाँ तो ईसाई भी साथ लग रहे हैं. ये गुजरात की एकता, गुजरात की शांति, गुजरात का भाईचारा... सदभावना मिशन के माध्यम से इस शक्ति के जो दर्शन हुए हैं इससे ये लोग, मुट्ठी भर लोग चौंक गये हैं. और मेरा एक-एक शब्द सही निकलने वाला है. ये पूरा फरवरी महीना वे चैन से नहीं बैठेंगे, हररोज़ नयी चीज़ उछालेंगे. झूठी बातें करेंगे, एकतरफ़ा बातें करेंगे. मैं गुजरात के सभी भाईयों-बहनों से इस अंबाजी की पवित्र धरती से कहना चाहता हूँ, १० साल से हो रहे हमलों से भी तीखे हमले होंगे. उन हमलों को भी सत्य के माध्यम से हम पराश्त करके रहेंगे, सत्य के आधार पर उनको तहसनहस करके रहेंगे ये में विश्वास दिलाना चाहता हूँ. भाईयों-बहनों, मेंने हर बार कहा है, मैं सत्य के सामने सौ बार झुकने को तैयार हूँ, लेकिन झूठ के खिलाफ जंग करना मेरी फ़ितरत है. हम झूठ के खिलाफ लड़ने वाले लोग हैं, हम सत्य के सामने समर्पित होने वाले लोग हैं. कितना झूठ चलाओगे? मेरे इस अच्छे-भले राज्य को कितना बदनाम करोगे आप लोग और कब तक करोगे..? ‘कहो नाखुदा से कि लंगर उठा दे, हम तूफान की जिद देखना चाहते हैं’. मित्रों, सदभावना मिशन के माध्यम से हमने शक्ति का साक्षात्कार किया है. जन-समर्थन का एहसास किया है. हमने सच्चाई को डंके की चोट पर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है.

ज गुजरात विकास के कारण जाना जाता है. विकास की नई-नई ऊँचाइयों में आज पूरे देश के अंदर गुजरात का लोहा मान लिया गया है. लेकिन ये विकास उस प्रकार का नहीं है, जो हमारे देश में कभी सोचा जाता था. कोई पाँच कि.मी. का रास्ता बनाऐ, दुसरा सात कि.मी. बना दे, तो बोले विकास हो गया... हमने ऐसा नहीं सोचा है. हमने सर्वांगी विकास की कल्पना की है. मित्रों, ये हमारा बनासकांठा, ये पाटण जिला, क्या हाल थे हमारे? बारह महीनों में से छ: महीने धूल ही धूल और हमारे नसीब में कुछ नहीं था. तपता हुआ सूरज, उड़ती हुई धूल, ये मिट्टी, इसके सिवाय इन दो जिलों के नसीब में क्या था, मित्रों? आज वही इलाका सूर्य उपासना के लिए, सौर ऊर्जा के लिए पूरे विश्व के अंदर अपना नाम रोशन करने जा रहा है. पूरे हिंदुस्तान में सोलार एनर्जी १२० मेगावॉट है, पूरे हिन्दुस्तान में १२०. आपके अकेले इस चारणका में २०० मेगावॉट है. और पूरे गुजरात में तो, ये आपके धानेरा के पास सोलार पार्क बन रहा है. मित्रों, कल तक जिस क्षेत्र को सोचा नहीं था, उसको आज विकास की मुख्य धारा मे ला करके रख दिया है. दिल्ली-मुंबई इन्डस्ट्रीअल कॉरीडोर, इस इन्डस्ट्रीअल कॉरीडोर के कारण जो विशिष्ट प्रकार की रेलवे लाइन लगने वाली है, पाटण जिला और बनासकांठा जिला, दोनों जिलों के हर गाँव को पूरी तरह उसका लाभ मिलने वाला है. ये बनासकांठा की धरती, बेटी की शादी करानी हो, और जमीन बेचने जाए, गिरवी रखने जाए, तो कोई पैसा नहीं देता था. बनासकांठा में किसान को जमीन कितनी ही क्यों न हो, बेटी की शादी कराने के लिए उस जमीन में से पैसे नहीं मिलते थे. जमीन की क़ीमत नहीं थी. कोई खरीदार नहीं था. जमीन पर कर्ज भी नहीं मिलता था, क्योंकि उसमें से कुछ पैदा नहीं होता था. आज जमीन के दाम कितने बढ गए हैं, मेरा किसान कितना ताकतवर बन गया है..! आज वो डंके की चोट पर कहता है, बेंक वालों को कहता है कि मेरी जमीन की क़ीमत इतनी है, मुझे इतनी लोन चाहिए और बेंक वाला लाइन लगाके खडा रहता है. लोन देने पर मजबूर हो जाता है..! एक जमाना था, बेटी की शादी तक संभव नहीं थी. आज अगर कोई जमीन लेने के लिए आता है तो मेरा किसान कहता है, आज मेरा मूड ठीक नहीं है, बुधवार को आना. ये स्थिति पैदा हुई है, इस जिले में ये बदलाव आया है. और भाईयों-बहनों, में देख रहा हूँ, समुद्र किनारे पर जाने का अगर कोई शॉर्टेस्ट रास्ता है तो वह बनासकांठा से गुजरता है और उसका सबसे ज्यादा बेनिफिट इस जिले को विकास के लिए मिलने वाला है, विकास की नई ऊँचाईयों को पार करने वाला है. भाईयों-बहनों, जो कुछ भी हुआ है, सबको संतोष है, आनंद है. लेकिन जितनी प्रगति हुई है, मैं तो अभी उससे बहुत आगे सोच रहा हूँ. मैं इससे संतुष्ट होने वाला इंसान नहीं हूँ, मुझे तो यहाँ इतनी समृध्दि लानी है कि दुनिया के देश चौकन्ने रह जाए कि एक राज्य इतना आगे बढ़ सकता है. ये सपने देख कर मैं मेहनत करता हूँ और मैं खुश हूँ, छ: करोड़ नागरिकों ने जो समर्थन दिया है..!

हिंदुस्तान में राजनैतिक अस्थिरता एक सहज स्वभाव बन गया है. गुजरात में भी दो साल, ढाई साल से ज्यादा मुख्यमंत्री नहीं रहते थे. आज में ग्यारहवें साल में भी आपके प्रेम को पा रहा हूँ. ये राजनैतिक स्थिरता, ये पोलिटिकल स्टेबिलिटी, नीतियों की स्टेबिलिटी, विकास की गति, प्रगति के नये-नये अंक, ये बातें हैं जो आज सारे विश्व में गुजरात का लोहा मनवाने के लिए दुनिया को मजबूर कर रही हैं. हमें इसे और आगे बढ़ाना है. हमें लक्ष्य की नई ऊँचाईयों को पार करना है. नर्मदा का पानी विकास की नई क्षितिजों को पार करे. लेकिन हम चाहते हैं कि जैसे मेरे बनासकांठा जिले के किसानों ने ड्रिप इरीगेशन को स्वीकार कर लिया, स्प्रिंक्लर को स्वीकार कर लिया, अब मेरा एक सपना आगे है मेरे किसानों से, मैं उनको ‘नेट हाउस’ की ओर ले जाना चाहता हूँ. खेत के अंदर ग्रीन कलर के छोटे-छोटे ‘ग्रीन हाउस’ बनें ताकि दो बीघा जमीन भी हो तो भी उसमें नये प्रकार की फसल पैदा हो सके. मेरा एक ठाकोर भाई, जमीन बहुत कम है, सीमांत किसान है, आज उसकी इन्कम मुश्किल से पचास हजार, साठ हजार, लाख रूपया है. मैं उसको ग्रीन हाउस टेक्नोलोजी में ले जाना चाहता हूँ और दो बीघा जमीन हो तो भी वो आठ लाख, दस लाख रूपए कमाई करे, खेती में कमाई करे ऐसी टेक्नोलोजी को मैं बनासकांठा में लाना चाहता हूँ.

मित्रों, चीज़ों को बदला जा सकता है, इन सपनों को लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं. एक नयी दुनिया, एक नया विश्व, विकास का एक नया सपना, हम उसको साकार करने की दिशा में आगे बढ रहे हैं. देश और दुनिया के लोग इस बात को मानने लगे हैं, गुजरात के विकास की ताकत को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन उसके पीछे कौन-सी ताकत है, उस विषय को स्वीकार करते हुए अभी उनको तकलीफ हो रही है. क्योंकि पहले इतना झूठ बोल दिया है कि कभी-कभी सत्य को स्वीकार करने में दिक्कत हो जाती है. ऐसे जो लोग बार-बार झूठ बोल चुके हैं उनको मेरी प्रार्थना है कि भाई, अब बहुत झूठ बोल दिया, अब झूठ बोलना बंद करो और गुजरात की शक्ति को स्वीकार करो और गुजरात की शक्ति है एकता, शांति और भाईचारा. एक जमाना था, आए दिन हमारे यहाँ कर्फ्यू लगते थे, चाकू चलते थे, एक जाति दूसरी जाति से झगड़ा करती थी, एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों के साथ झगड़ा करते थे. आज दस साल हो गए, सारा ख़त्म हो चुका भाई, कर्फ्यू का नामोनिशान नहीं है. नहीं तो पहले बच्चा पैदा होता था, माँ का नाम मालूम न हो, बाप का नाम न बोल सकता हो पर कर्फ्यू शब्द बोलना जानता था. आज आठ-दस साल के बच्चों को कर्फ्यू क्या होता है वो पता नहीं है. पुलिस का लाठीचार्ज क्या होता है वो पता नहीं है, अश्रु गैस क्या होता है वो मालूम नहीं है. गुजरात एकता, शांति और भाईचारे से आगे बढ़ रहा है, हमें और आगे बढ़ाना है. और गुजरात विरोधियों को मैं कहना चाहता हूँ कि आप अपनी राजनीति गुजरात के बाहर किया करो, आपको जो खेल खेलने हैं, वहाँ खेला करो. हम गुजरात के लोगों को एकता, शांति और भाईचारे से जीने का अवसर दो. बहुत हो चुका, हमारे घाव पर नमक छिड़कने का काम बंद होना चाहिए. हमने इंतजार किया, हर बात का इंतजार किया. गुजरात की जनता को आप झुका नहीं पा रहे हो, गुजरात की जनता को आप गुमराह नहीं कर पा रहे हो. और हिन्दुस्तान भी अब मानने लगा है कि गुजरात के साथ अन्याय हुआ है और यह बात अब घर-घर पहुँच चुकी है. और इसलिए मैं ऐसे लोगों को सदभावना मिशन के इस कार्यक्रम में हाथ जोड़ कर विनती करता हूँ, प्रेम से कहना चाहता हूँ कि दस साल जो हुआ सो हुआ, मेहरबानी करके आने वाले दिनों में गुजरात के सत्य को स्वीकार कीजिए, हमारी सच्चाई को स्वीकार कीजिए. हम देश के लिए काम करने वाले लोग हैं. हम यहाँ फसल पैदा करते हैं, देश का पेट भरने को काम आता है. अगर हम यहाँ कॉटन पैदा करते हैं तो मेरे देश के लोगों को कपडा मिलता है, हम यहाँ दवाईयाँ बनाते हैं तो मेरे देश के लोगों की बिमारी दूर होती है. हम देश के लिए काम करते हैं. जैसे किसी दुश्मन देश के नागरिक हों उस प्रकार से हम पर जुल्म चला है..! हर चीज़ की सीमा होती है. और इसलिए भाईयों-बहनों, मैंने पहले ही कहा कि आनेवाले दिनों में बहुत बड़ा तूफान लाने की कोशिश होने वाली है. सफलता नहीं मिलेगी, मुझे मालूम है. वो कुछ नहीं कर सकते, लेकिन वो आदत छोडेंगे नहीं. लेकिन लाखों लोगों ने, करोड़ों परिवारों ने जिस प्रकार से समर्थन दिया है, यह सिद्ध हो चुका है कि हमारा मार्ग सच्चाई का है.

भाईयों-बहनों, आइए, माँ अंबा के चरणों में बैठे हैं, हमें छोटा-सा भी मनमुटाव हो तो उससे गांव को मुक्त करें. तहसील में कोई मनमुटाव हो तो उसे मुक्त करें. विकास को ही अपना मार्ग बनाएँ. सारी समस्याओं का समाधान विकास में है, हर दुखों की दवाई विकास में है, हर संकट का सामना करने का सामर्थ्य विकास में है. आने वाली पीढी के बारे में सोचना है तो विकास ही रास्ता है. और अगर विकास करना है तो एकता, शांति और भाईचारे के बिना नहीं हो सकता. विकास करना है तो एकता, शांति, भाईचारे को गाँव-गाँव में एक ताकत के रूप में हमें प्रस्थापित करना पडेगा, इसी सामर्थ्य को लेकर आगे बढ़ना पडेगा और वो सदभावना के माध्यम से होता है. मुझे विश्वास है कि मेरे गुजरात के करोड़ों नागरिक मेरे इस छत्तीस दिन के अनशन को, मेरी इस तपस्या को कभी भी कोई नुकसान नहीं होने देंगे, एकता को बरकरार रखेंगे, ये मेरी माँ जगदंबा से प्रार्थना है और मेरे छ: करोड़ नागरिकों से भी प्रार्थना है. भाईयों-बहनों, मैंने तपस्या की है. गुजरात के आने वाले कल के लिए तपस्या की है, भाईचारे के लिए, एकता-शांति के लिए तपस्या की है. और हिंदुस्तान के इतिहास में इतने लंबे कालखंड के लिए इस प्रकार का अनशन चला हो ये पहली घटना है.

मारे कांग्रेस के मित्रों की मन:स्थिति में जानता हूँ. उनका सब कुछ चला गया है, इतने साल हो गये, जनता के दिलों में जगह नहीं बना पा रहे हैं और उसके कारण उनका मानसिक संतुलन खो जाना बहुत स्वाभाविक है. मानसिक संतुलन खो जाने के कारण कुछ भी अनाप-शनाप बोल देना भी बहुत स्वाभाविक है. अरे छोटा बालक हो, किसी खिलौने से खेलता हो, घड़ी से खेलता हो और हमें लगे कि टूट जाएगी, और हम घडी ले लें तो बच्चा कितना बौखला जाता है..? ये बहुत स्वाभाविक है. हमारे मित्र सब नाराज हो जाते हैं कि भाई, ये कांग्रेस के लोग ऐसा क्यों बोलते हैं, इतना क्यों बोलते हैं..? मैं तो पत्रकारों से भी प्रार्थना करता हूँ कि वो जितना बोलते हैं न, एक-एक शब्द छापिए, मैं टी.वी. के मित्रों को भी कहता हूँ, वो जो बोलते हैं, बिल्कुल सेन्सर मत किजिए, पूरा दिखाइए, जनता अपने आप इस भाषा को समझ लेगी, जनता अपने आप उन संस्कारों को जान लेगी. हमें कुछ करने की जरूरत नहीं पडेगी. ये गुजरात बड़े संस्कारी लोगों का समाज समूह है. लेकिन भाईयों-बहनों, मेरे मन में उनके प्रति कोई कटुता नहीं है. डिक्शनेरी में जितने शब्द हैं, जितनी गालियाँ हैं वे सारी मेरे लिए उपयोग कर चुके हैं, जिन गालियों को डिक्शनेरी में लिखना मुश्किल है वो भी सारी उपयोग कर चुके हैं. और कभी-कभी इस प्रकार का गुस्सा निकालने से मन थोडा हल्का हो जाता है. एक प्रकार से उनका मन शांत करने में मैं काम आया हूँ, ये भी मेरी सदभावना है, ये भी मेरी उनके प्रति सदभावना है. मुझे कभी लगता है कि अगर मैं न होता, तो वे अपना गुस्सा निकालते कहाँ? परिवार में जाकर बीवी को परेशान कर देते, अच्छा हुआ मैं हूँ..! मैं उनको शुभकामनाएँ देता हूँ कि माँ अंबा उनको शक्ति दें. और आधिक गालियाँ दें, और अधिक आरोप लगाएँ, और अधिक झूठ फैलाएँ और अधिक अनाप-शनाप बोलें और हमारी सदभावना की ताकत भी माँ अंबा बढ़ाती रहें ताकि किसी के प्रति कटुता पैदा न हो. प्रेम और सदभाव का महामंत्र ले कर हम आगे चलें.

 

ज जब बनासकांठा में आया हूँ तब, वर्तमान में सरकारी बजट से करीब ११०० करोड़ रूपयों के काम जारी हैं, प्रगति में हैं. लेकिन आज जब माँ अंबा के चरणों में आया हूँ और आपके सामने विकास की बात कर रहा हूँ तब आने वाले वर्ष के लिए विकास के काम जिसमें किसान का विकास हो, रास्ते चौड़े करने हों, केनाल का काम हो, पीने का पानी पहुँचाने का काम हो, गैस की पाइपलाइन का काम हो, स्कूल के कमरे बनाने हों, अस्पताल बनाने हों, विविध प्रकार के विकास के अनेक काम, उन सब कामों के लिए, आने वाले एक साल के लिए एक हजार सातसो करोड़ रूपया, १७०० करोड़ रूपया इस बनासकांठा की धरती के चरणों में दे रहा हूँ ताकि विकास की नई ऊँचाइयों को हम पार करें. फिर एक बार मेरे साथ बोलें...

 

भारत माता की जय..!

पूरी ताकत से बोलें,

भारत माता की जय..!

 

हुत बहुत धन्यवाद..!

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भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी पंकज चौधरी जी, जयंत चौधरी जी, उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी, यूपी सरकार के मंत्रीगण, सांसद में मेरे साथीगण, विधायकगण, और विशाल संख्या में आए हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों!

बाबा औघड़नाथ की इस पावन धरती पर, मेरठ की क्रांतिधरा पर, आज विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत, इसके लिए नई क्रांति को ऊर्जा मिल रही है। आज पहली बार, एक ही मंच से नमो भारत रैपिड रेल और मेट्रो सेवा का, एक ही दिन शुभारंभ हो रहा है। विकसित भारत की कनेक्टिविटी कैसी होगी, ये उसकी एक शानदार झांकी है। शहर के भीतर के लिए मेट्रो, और ट्विन सिटीज के विजन को गति देने के लिए नमो भारत जैसी आधुनिक ट्रेन, मुझे संतोष है, ये काम उत्तर प्रदेश में हुआ है।

भाइयों और बहनों,

आज का ये कार्यक्रम, भाजपा की डबल इंजन सरकार की कार्य-संस्कृति को भी दर्शाता है। और हमारी कार्य संस्कृति क्या है? हमारी कार्य संस्कृति है कि जिस काम का शिलान्यास किया जाए, उसे पूरा करने के लिए, दिन रात एक कर दिया जाए। और इसलिए अब परियोजनाएं पहले की तरह लटकती, भटकती नहीं हैं। नमो भारत या मेट्रो सेवा, दोनों का शिलान्यास करने का अवसर आप सबने मुझे दिया था। और आज मुझे ही इनके लोकार्पण का भी सौभाग्य मिला है।

साथियों,

थोड़ी देर पहले मैंने मेरठ मेट्रो में सफर किया है। इस दौरान मेरी स्कूल-कॉलेज के अनेक युवाओं से और अन्य यात्रियों से बातचीत हुई है। सबका यही कहना था, कि इतने शानदार काम की उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। और सब के सब लोग, वो पुराने दिनों को याद कर रहे थे। और खासतौर पर बहनों-बेटियों ने मुझे बताया, कुछ साल पहले तक शाम होते ही, पूरे रूट में सन्नाटा छा जाता था। यहां डर और भय का माहौल होता था। अब एक तरफ कानून-व्यवस्था भी सुधरी है और दूसरी तरफ, लोगों को सुविधापूर्ण और सुरक्षित यात्रा का भी माध्यम मिला है।

और साथियों,

मुझे खुशी है कि ये नमो भारत रैपिड रेल से, ये नारी-शक्ति के सामर्थ्य का प्रतीक भी बनी है। इसमें ट्रेन ऑपरेटर, स्टेशन कंट्रोल स्टाफ, ऐसे अधिकतर काम में हमारी बेटियां ही कार्यरत हैं, बेटियां ही नेतृत्व कर रही हैं। मैं आप सभी को, उत्तर प्रदेश को, और दिल्ली वासियों को देश की पहली नमो भारत रैपिड रेल सेवा और मेरठ मेट्रो के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

मेरठ की इस धरती से मेरा भी एक विशेष नाता रहा है। जब 2014 के चुनाव हुए, 2019 के चुनाव हुए और 2024 के लोकसभा चुनाव हुए, तो मेरठ से ही मेरी चुनावी सभाओं की शुरुआत हुई। मेरठ के आप लोगों ने, यहां के किसानों ने, उद्यमियों ने, लघु उद्योगों से जुड़े श्रमिकों ने, कारीगरों ने, दुकानदारों ने, मुझे हमेशा बहुत आशीर्वाद दिया है।

और साथियों,

मैंने तब भी कांग्रेस और सपा-बसपा को कहा था कि अपनी जहरीली राजनीति छोड़िए और आइए, विकास के मुद्दे पर मुकाबला करके देखते हैं।

साथियों,

इन दलों ने तो अपनी जहरीली राजनीति नहीं बदली, लेकिन भाजपा ने विकास और अपनी नीति रीति, अपनी नीयत में अगर एक बात को सर्वोपरि रखा, तो वो है विकास, देश का विकास। इसका एक उदाहरण हमारी मेट्रो भी है, मेरठ मेट्रो भी है।

साथियों,

2014 से पहले भारत में मेट्रो का विस्तार, बहुत ही धीमी गति से हो रहा था। हालत ये थी कि कांग्रेस सरकार के समय में देश के सिर्फ 5 शहरों में ही मेट्रो चल पाई थी। जबकि आज भाजपा सरकार में देश के 25 से ज्यादा शहरों में मेट्रो चलने लगी है। आज भारत, मेट्रो के मामले में दुनिया का तीसरा बड़ा नेटवर्क बन चुका है। यूपी में मेरठ के अलावा भी कई सारे शहरों में मेट्रो पर काम चल रहा है।

साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश के दर्जनों शहरों तक मेट्रो पहुंची, क्योंकि भाजपा सरकार देश की जनता को सुविधा देना चाहती है, देशवासियों को हाई-स्पीड, जाम और प्रदूषण से मुक्त सुविधा, ऐसे हर प्रकार की व्यवस्था देना चाहती है। इसलिए, आज नमो भारत जैसी आधुनिक सेमी-हाईस्पीड ट्रेन चल रही है, वंदे भारत ट्रेन चल रही है।

साथियों,

कांग्रेस-सपा की जब दिल्ली में सरकार थी, तब ये सब संभव ही नहीं था। क्योंकि तब इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स घोटालों में ही गुम हो जाते थे। मेट्रो जैसे और उससे जुड़ी अधिकतर टेक्नॉलॉजी भी हमें विदेशों से आयात करनी पड़ती थी। हमने घोटाले भी बंद किए, और देश को आत्मनिर्भरता के रास्ते पर भी आगे बढ़ाया। क्योंकि भाजपा की प्राथमिकता, देश का विकास है, देशवासियों की सुविधा और समृद्धि है। आप यहीं देखिए, मेरठ वासियों का, पश्चिम यूपी वासियों का जीवन कैसे बदलने वाला है। सराय काले खां, आनंद विहार, गाज़ियाबाद और मेरठ, इन स्टेशनों पर भारतीय रेल, मेट्रो और बस अड्डों को आपस में जोड़ा गया है। देश में ये पहली बार हो रहा है, जब एक ही स्टेशन, एक ही ट्रैक पर नमो भारत और मेट्रो रेल चलेगी। यानी एक ही प्लेटफॉर्म से आप शहर के भीतर भी यात्रा कर पाएंगे, और उसी स्टेशन से सीधे दिल्ली भी आ-जा सकते हैं। इससे मेरठ के आप जैसे हजारों साथियों को फायदा होगा, जो पढ़ाई के लिए, नौकरी के लिए, अन्य कामकाज के लिए, रोज़ाना दिल्ली आते-जाते हैं। जो लोग दिल्ली में नौकरी करते हैं और जिनका घर मेरठ में है, उनके लिए अब दिल्ली में किराए के घर में रहने की मजबूरी भी खत्म हुई है।

साथियों,

आज भाजपा की डबल इंजन सरकार, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो इतना सारा पैसा खर्च कर रहा है, उससे आपका पैसा भी बचता है और युवाओं को रोजगार भी मिलता है। यहां पश्चिम यूपी में ही देखिए, कैसे नए-नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन रहे हैं, जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है, ये प्रोजेक्ट जब बनते हैं तब भी रोजगार मिलते हैं, और बाद में नए उद्योग लगते हैं, नए कारोबार आते हैं, उससे भी रोजगार पैदा होते हैं।

साथियों,

उत्तर प्रदेश की ये धरती तो श्रम की धरती है, ये सृजन की धरती है। यहां के किसान हों, पशुपालक हों, छोटे-लघु उद्यमी हों, बुनकर-शिल्पकार हों, ये सभी विरासत और विकास के मंत्र को साकार कर रहे हैं। ऐसे में जब भारत का सामर्थ्य बढ़ता है, तो उत्तर प्रदेश के इन सभी साथियों को भी फायदा होता है।

साथियों,

आप आजकल देख रहे हैं कि दुनिया के प्रति और दुनिया के लोगों के मन में भारत के प्रति कितनी आस्था है, लोग कितने आशावान हैं। दुनिया के अनेक विकसित देश, आज भारत के साथ व्यापारिक समझौते कर रहे हैं। एक समय था, जब कांग्रेस की सरकार चाहकर भी विकसित देशों के साथ समझौते नहीं कर पाती थी। क्योंकि तब घोटालों के लिए बदनाम कांग्रेस सरकार से समझौते करने में दुनिया को हिचक होती थी। लेकिन आज विकसित देश, भारत के साथ जुड़ने के लिए उत्सुक हैं। क्योंकि उनको भारत के विकास में अपना भविष्य दिखता है, उनको भारत की युवाशक्ति में उम्मीद दिखती है। आज दुनिया को लगता है, कि भारत वो ताकत है, जो इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों का समाधान दे सकता है।

साथियों,

बीते वर्षों में भाजपा की सरकार ने जो वैश्विक समझौते किए हैं, उससे लघु और कुटीर उद्योगों से जुड़े लोगों को भी बहुत फायदा होगा। इसका फायदा, मेरठ के स्पोर्ट्स का सामान बनाने वालों को होगा, मेरठ की ही कैंची, खुर्जा की क्रॉकरी, मुरादाबाद का पीतल, बागपत का होम फर्निशिंग उद्योग, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी, लैदर, टेक्स्टाइल, ज्वैलरी से जुड़े उद्योग, ऐसे हर लघु और कुटीर उद्योगों को इन समझौतों का बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। भाजपा की प्राथमिकता, देश के छोटे-बड़े शहरों के सामर्थ्य को, दुनिया के कोने-कोने तक ले जाना है, यूपी के अलग-अलग जिलों की पहचान बढ़ाना है।

साथियों,

हमारा मेरठ और ये पूरा क्षेत्र, लघु उद्योगों का, MSMEs का बहुत बड़ा सेंटर है। इस वर्ष जो केंद्र सरकार का बजट आया है, उसमें हमने लघु उद्योगों के लिए 10 हजार करोड़ रुपए के विशेष फंड की घोषणा की है। इससे यूपी के MSMEs को लोन मिलना बहुत आसान हो जाएगा। बजट में हमने कपड़ा उद्योग के लिए, बुनकर समाज के लिए, महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना की घोषणा की है। इससे खादी, हैंडलूम, हस्तशिल्प को विश्व बाज़ार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

साथियों,

पहले छोटे कारीगर केवल 10 लाख रुपए तक का सामान कूरियर से भेज सकते थे। अब यह सीमा पूरी तरह हटा दी गई है। इससे मेरठ सहित, यूपी के सभी बुनकर, और अन्य छोटे उद्यमी, ऑनलाइन ऐप के ज़रिए, अमेरिका या यूरोप के ग्राहकों को भी अपने प्रोडक्ट आसानी से भेज पाएंगे।

साथियों,

मेरठ-हापुड़ और आसपास के इस क्षेत्र ने, चौधरी चरण सिंह जी के विजन को शुरुआती दिनों से देखा है। ये हमारी सरकार का सौभाग्य रहा, कि हमें चौधरी चरण सिंह जी को भारत रत्न देने का सौभाग्य मिला। भाजपा की डबल इंजन सरकार, उनके विजन पर चलते हुए किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसके लिए फूड-प्रोसेसिंग पर बहुत बल दिया जा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा भी छोटे किसानों के बहुत काम आ रहा है। अब तक यूपी के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत, लगभग 95 हज़ार करोड़ रुपए मिल चुके हैं। इसमें मेरठ के किसानों को भी लगभग 800 करोड़ रुपए मिले हैं।

भाइयों और बहनों,

एक तरफ आज देशवासी, भारत को विकसित बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन देश में ही कुछ राजनीतिक दल हैं, जो भारत की इस सफलता को पचा नहीं पा रहे। अभी आपने देखा, भारत में दुनिया का सबसे बड़ा AI सम्मेलन हुआ। दुनियाभर के 80 से अधिक देशों से प्रतिनिधि दिल्ली आए। दुनिया के करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत आए, लाखों लोग हिन्दुस्तान के कोने-कोने से दिल्ली में जुटे थे। दुनिया के विकासशील देशों में ऐसा सम्मेलन आज तक कभी नहीं हुआ। मैं जरा मेरठ के लोगों को पूछना चाहता हूं, ये जो एआई सम्मेलन हुआ, आपको गर्व हुआ की नहीं हुआ? पूरी ताकत से बातइये, आपको गर्व हुआ की नहीं हुआ? आपका माथा ऊंचा हुआ कि नहीं हुआ? आपका सीना चौड़ा हुआ कि नहीं हुआ, ये काम भारत के लिए हुआ कि नहीं हुआ है? भारत के युवाओं के लिए हुआ कि नहीं हुआ है? भारत के भाग्य को बदलने के लिए हुआ है कि नहीं हुआ है? 21वीं सदी में लीडरशिप लेने के लिए हुआ है कि नहीं हुआ है? पूरा देश गर्व से भर गया। लेकिन कांग्रेस और इसके इकोसिस्टम ने क्या किया?

साथियों,

कांग्रेस ने भारत के एक वैश्विक आयोजन को, अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया। समारोह स्थल पर विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस के नेता कपड़े उतारकर पहुंच गए, मैं कांग्रेस वालों को पूछता हूं, देश तो जानता है आप पहले से ही नंगे हो, फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्या पड़ी। कांग्रेस के नेताओं ने वहां जो कुछ किया, वो दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी, वैचारिक रूप से कितनी दिवालिया हो गई है, कितनी दरिद्र हो गई है।

साथियों,

कोई कल्पना नहीं कर सकता है, हम तो वो लोग हैं, जो गांव में किसी के यहां शादी ब्याह होता है, तो पूरा गांव उसे सफल बनाने में जी-जान से जुट जाता है। ताकि मेहमान, गांव की एक अच्छी छवि लेकर जाएं। कांग्रेस तो अपने ही देश को बदनाम करने में जुटी है।

साथियों,

कांग्रेस के नेताओं को मोदी से नफरत है, ये लोग मेरी कब्र खोदना चाहते हैं, मेरी मां को गाली देने से भी उनको कोई परहेज नहीं है, उन्हें भाजपा से विरोध है, उन्हें एनडीए से विरोध है, ठीक है आपकी राजनीति में यही करना जरूरी है, चलो भई समझ सकते हैं, हम इसको भी सहन कर लेंगे। लेकिन कांग्रेस को याद रखना चाहिए था, कि AI ग्लोबल समिट, ये बीजेपी का समारोह नहीं था और न ही उस समय बीजेपी का कोई नेता वहां मौजूद था, ये देश का कार्यक्रम था, देश के सम्मान का कार्यक्रम था, देश के लोगों के पसीने से, लेकिन कांग्रेस ने परसो सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। और पूरा देश, कांग्रेस की इस रीति नीति पर थू-थू हो रही है। लेकिन दुर्भाग्य देखिए, इतनी पुरानी पार्टी के नेता लाजने के बजाय गाजते हैं, बेशर्मी के साथ देश की बेज्जती करने वालों का जयकारा कर रहे हैं। और ये मामला कांग्रेस की हरकतों का लगातार चल रहा है। पार्लियामेंट में क्या किया, पार्लियामेंट में खुद परफोर्म कर नहीं पा रहे, तो अपने साथी दलों को भी बोलने का मौका नहीं देते, पार्लियामेंट को चलने नहीं देते। और उसका सबसे बड़ा नुकसान, कांग्रेस के जो साथी दल है ना उनको हो रहा है, अब वो समझ गए हैं। ये अभी दिल्ली में जो उन्होंने नंगापन दिखाया, उनके सारे साथी दल चौंक गए हैं, सबने किनारा कर लिया, और मैं नम्रता पूर्वक देश के मीडिया को भी एक रिक्वेस्ट करना चाहता हूं, वैसे मैं मीडिया को हर प्रकार से झेलने के लिए ईश्वर मुझे शक्ति दे, प्रार्थना करता रहता हूं। लेकिन आज मैं उनको प्रार्थना कर रहा हूं कि कृपा करके हम जब इस प्रकार की हरकतों की आलोचना करें, तो आप ये हेडलाइन मत बनाइये, कि मोदी ने विपक्ष को धो डाला, आप कांग्रेस को बचाने की ये चालाकियां बंद कीजिए। ये विपक्ष – विपक्ष करके आप कांग्रेस को बचा रहे हैं और विपक्ष में जो और साथी बैठे हैं, वो भी समझ गए हैं कि पाप कांग्रेस करती है और भुगतना उनको पड़ता है, और कांग्रेस की इकोसिस्टम हर बार बचकर निकलने का ये खेल खेलती है, कि पाप कांग्रेस करे, आलोचना कांग्रेस की हो, गुस्सा कांग्रेस पर हो, लेकिन मीडिया में कांग्रेस नहीं दिखती, विपक्ष शब्द दिखता है, क्यों भई, क्यों कांग्रेस को बचा रहे हो। ऐसा करने से आप न कांग्रेस को बचा पाते हो, न कांग्रेस को सुधरने के लिए मजबूर करते हो। अगर आप एक बार छापना शुरू कर दोगे, बोलना शुरू कर दोगे, ये जनरल विपक्ष का दोष नहीं, और देखिए दिल्ली में जो हुआ, क्या उसमें कोई टीएमसी के लोगों ने पाप किया है, नहीं किया है, डीएमके के लोगों ने पाप किया है, नहीं किया है, बसपा के लोगों ने पाप किया है, नहीं किया है, फारूख अब्दुल्ला जी की पार्टी ने पाप किया है, नहीं किया है, सिर्फ और सिर्फ, सरफिरे नेता, कांग्रेस के बेलगाम नेता, देश को तबाह करने पर तुले हुए हैं। अगर आपको प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठना है, तो पहले आपको जनता के दिल जीतने पड़ेंगे। महिला एमपीओं को भेजकर के सीट पर कब्जा करने से आप प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हो, और माताओं-बहनों को इस प्रकार से आगे करने की क्या मजबूरी है आपकी, क्या इतने खोखले हो गए हो आप लोग।

साथियों,

कांग्रेस देश के लिए बोझ बन गई है, और मुझे इस बात का संतोष है कि दिल्ली में जो घटना घटी, कांग्रेस के सभी साथी दलों ने, कांग्रेस की भरपूर आलोचना करने की हिम्मत दिखाई है। मैं विपक्ष के इन साथियों का सच्चाई के साथ और देश के गौरव के साथ खड़े रहने के लिए, उनका मैं सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

भाजपा सरकार के लिए देश का विकास, यूपी का विकास सर्वोपरि है। लेकिन आप याद करिए, 10 साल पहले तक, यूपी की चर्चा किन बातों के लिए होती थी? हर किसी को, मेरठ के दंगे, पश्चिम यूपी में क्रिमिनलों की गैंग, खराब सड़कें, बिजली की कटौती और पिछड़ेपन की परिस्थितियां, यही कुछ चर्चा में रहता था। पश्चिमी यूपी के अपराध पर फिल्में बनती थीं, फिल्में। सपा सरकार ने यूपी का ये हाल करके रखा था। लेकिन आज यूपी को विकास के लिए जाना जा रहा है। आज हमारे यूपी को, ब्रह्मोस के लिए, मोबाइल फोन बनाने और एयरपोर्ट के लिए, पर्यटकों की सुविधा लगातार बढ़ती संख्या के लिए जाना जाता है। यूपी, स्पोर्टिंग इकोसिस्टम में भी अपनी पहचान बढ़ा रहा है। मेरठ में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।

साथियों,

सपा राज में जो अपराधी बेखौफ घूमा करते थे, वो आज योगी जी की सरकार में जेलों में दिन बिता रहे हैं। आज किसी की हिम्मत नहीं है, कि कॉलेज से पढ़कर निकल रही हमारी किसी बेटी का अपमान कर सके।

साथियों,

जब कानून व्यवस्था सुधरती है, तो व्यापार-कारोबार और दुकानदारी के लिए भी माहौल बनता है। इसलिए आज यूपी की अर्थव्यवस्था में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। योगी जी के नेतृत्व में यूपी देश का बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग हब बन रहा है। कल ही मुझे यूपी की पहली सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का शिलान्यास करने का अवसर मिला है। इस सेमी-कंडक्टर फैक्ट्री के बनने से यूपी का सामर्थ्य और ज्यादा बढ़ जाएगा। इससे यहां नए निवेश, नए रोजगार के लिए अद्भुत संभावनाएं बनेंगी। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, भाजपा की डबल इंजन सरकार, ऐसे ही यूपी को देश की सबसे बड़ी इकॉनॉमी बनाने के लिए काम करती रहेगी। यूपी विकसित होगा, तो ही भारत विकसित होगा। एक बार फिर आप सभी को नमो भारत ट्रेन और मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। ये वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहे हैं। मेरे साथ बोलिये-

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !