भारत माता की जय..!

आवाज दिल्ली तक सुनाई दे ऐसा करो...

भारत माता की जय..!

मंच पर बिराजमान भारतीय जनता पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता गण और इस चुनाव में मंडी के उम्मीदवार श्रीमान डी. डी. ठाकुरजी, बल्ह के उम्मीदवार श्रीमान इन्द्र सिंहजी गांधी, नाचन के उम्मीदवार भाई श्री बिनोद कुमार, सुन्दर नगर के उम्मीदवार भाई श्री राकेश जाम्वालजी, मंचस्थ सभी महानुभाव और इतनी विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाईयों और बहनों..!

मैं जब हिमाचल आता हूँ, तो मुझे लगता है कि गुजरात के बाहर यह मेरा दूसरा घर है। मैंने बहुत वर्ष आप लोगों के बीच रह करके काम किया है, यहाँ के चप्पे-चप्पे से परिचित हूँ और मंडी आते ही मैंने पूछा कि भाई आज भी सेपु वड़ी खाई जाती है कि नहीं खाई जाती है..? मेरा यहाँ बड़ा गहरा लगाव रहा है। अगर मेरे यहाँ गुजरात में चुनाव ना होता, तो मैं कई दिनों तक आप के बीच में रहता और उन पुरानी यादों को ताज़ा करता, लेकिन जैसे आप कांग्रेस को उखाड़ फैंकने में लगे हो, गुजरात की जनता भी कांग्रेस को हमेशा-हमेशा के लिए विदाई देने में लगी हुई है।

भाइयों-बहनों, आज पूरे विश्व में गुजरात के विकास की चर्चा हो रही है। कहीं पर भी जाइए, लोग कहते हैं कि भाई, गुजरात ने कमाल कर दिया..! ये कमाल हु आ इसका राज क्या है? अगर मेरे हिमाचल के भाई-बहन उस राज़ को जान लेंगे, तो मैं आपको दावे से कहता हूँ कि आज जिस प्रकार से दुनिया में गुजरात चमक रहा है, मेरा हिमाचल भी दुनिया में चमकने लग जाएगा, यह मैं आपको वादा करता हूँ। भाईयों-बहनों, गुजरात की जनता ने एक बहुत बड़ा काम किया है और आम तौर पर हिन्दुस्तान में इस प्रकार का काम बहुत कम राज्यों में होता है और मेरे गुजरात के छह करोड़ गुजरातियों ने किया है। और वह काम किया है उन्होंने, पॉलिटिकल स्टेबिलिटी, राजनैतिक स्थिरता। लगातार वहाँ बीजेपी की सरकार बनती जा रही है, लगातार..! और पॉलिटिकल स्थिरता के कारण, राजनैतिक स्थिरता के कारण एक पॉलिटिकल पार्टी की जवाबदेही भी बन जाती है। जब पाँच साल में सरकारें आती-जाती रहती हैं, तो कोई जवाबदेही बनती ही नहीं है। आज मेरे गुजरात ने तीन-तीन बार मुझे चुन कर बैठाया है, तो लोग मुझे पूछ सकते हैं कि मोदीजी बताओ इसका क्या हुआ, उसका क्या हुआ..? लेकिन अगर पाँच साल में आए गए, तो फिर पूछने के लिए जगह ही नहीं रहती है और इसलिए भाइयों-बहनों, अगर गुजरात से मैं आपके लिए कोई संदेश लेकर आया हूँ तो वो मेरा संदेश मेरे हिमाचल के भाई-बहनों के लिए है कि आप हिमाचल में बार-बार सरकारें बदलने का प्रयोग बहुत कर चुके और उसके कारण हिमाचल में ना नीतियों की सुदृढ़ता रहती है, ना व्यवस्थाएं ठीक रहती है और बदलाव के बाद दो-दो साल तो नए बदलावों में स्थिर होने में चले जाते हैं और राज्य वहीं ढेर का ढेर रह जाता है। भाइयों-बहनों, मैं हिमाचल से प्रार्थना करने आया हूँ, इस देवभूमि से मैं प्रार्थना करने आया हूँ, इस पवित्र धरती के पवित्र नागरिकों से प्रार्थना करने आया हूँ कि आप भी गुजरात के नागरिकों की तरह राजनैतिक स्थिरता पर ध्यान केन्द्रित करें। भाजपा की सरकार को दुबारा चुनिए, धूमलजी को दुबारा चुनिए, और मैं आपको वादा करता हूँ, पाँच साल के बाद मेरे से हिसाब मांगना, जो तरक्की गुजरात ने की है, वैसी ही तरक्की हिमाचल करके दिखाएगा..!

भी कल, हिमाचल के दौरे पर ‘मौन मोहन’ सिंहजी आए थे और आज की सबसे बड़ी खबर यही है अखबारों में कि ‘मौन मोहन’ सिंहजी ने हिमाचल में जा कर के मौन तोड़ा, यह भी एक बड़ी खबर है..! पता ही नहीं चल रहा है कि देश की हालत के संबंध में प्रधानमंत्रीजी क्या सोच रहे हैं। भाइयों-बहनों, मैं हैरान हूँ, कुछ दिन पहले यहीं पर मंडी में मैडम सोनियाजी आई थी, प्रधानमंत्रीजी आए, और भी लोग बारी-बारी से आएंगे, लेकिन भाइयों-बहनों, मुझे खुशी होती, कम से कम मेरे दिल को एक संतोष मिलता कि मेरे देश के प्रधानमंत्री को, कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा मैडम सोनिया गांधी को इस देश के गरीबों की चिंता होती, कम से कम एक बार वह महंगाई पर कुछ बोलते, दर्द जताते, गरीबों के प्रति संवेदना जताते और देश की जनता को कहते, हिमाचल की जनता को कहते कि महंगाई को रोकने में हम विफल हुए हैं, लेकिन आप विश्वास किजीए, हम कभी ना कभी महंगाई कम करने का प्रयास करेंगे..! भाइयों-बहनों, मैं आपको एक सवाल पूछ सकता हूँ? आप लोगों को एक सवाल पूछूँ? सब लोग हाँ बोलो तो मैं पूछूँ..! क्या इन दोनों लोगों ने महंगाई के लिए एक शब्द बोला है..? महंगाई बढ़ रही है इसके लिए जवाब दिया है..? महंगाई बढ़ रही है इसके लिए कोई दर्द व्यक्त किया है..? भाइयों-बहनों, इस देश की गंभीर समस्या है महंगाई, और इसके बावजूद भी उनके सीने में दर्द तक नहीं है..! क्या देश के प्रधानमंत्री का कर्तव्य नहीं है कि वह जा कर के कहें कि भाई, जब हम चुनाव लड़ रहे थे तब हमने वादा किया था कि सौ दिन में हम महंगाई कम करेंगे, लेकिन दो-दो हजार दिन हो गए उसके बावजूद भी हम महंगाई कम नहीं कर पाए, ये एक हमारी गलती है, जनता हमें माफ करें..! इतना तो कहना चाहिए था कि नहीं..? लेकिन कांग्रेस पार्टी को इतना अहंकार है, कांग्रेस पार्टी को जन भावनाओं की परवाह नहीं है, देश के प्रवाहों की परवाह नहीं है, वह अपनी ही चाल चलते जाते हैं और इतना अहंकार है कि वो मानते हैं कि दुनिया तो उनके झोले में है, वह दुनिया को जैसे चाहें मरोड़ सकते हैं।

इतना ही नहीं भाइयों-बहनो, महंगाई क्या कम थी, जो उन्होंने आपसे गैस का सिलेंडर भी छीन लिया..? मेरी माताएं-बहने इतनी यहाँ बैठी हैं, मैं समझता नहीं हूँ, घर के अंदर और जहाँ ठंडा प्रदेश है वहाँ दिन में कितनी बार चीजों को गरम करना पड़ता है, खाना थोड़ी देर में ठंडा हो जाता है, बार-बार उसको गर्म करना पड़ता है, खाते-खाते भी उसे गर्म करना पड़ता है, और वहाँ पर गैस के सिलेंडर ले लें, तो क्या वो अपने पतिदेव को कच्चा खिलाएं क्या..? एक परिवार को स्वाभाविक तौर पर 24 सिलेंडर लगते हैं, उन्होंने कह दिया छह सिलेंडर..! क्या 18 सिलेंडर यह गरीब काला बाजारी से खरीद पाएगा? क्या फिर से उसे चूल्हे की ओर जाना पड़ेगा? क्या फिर से उसको जंगल काटने पडेंगे? क्या फिर से उसे हमारी यह हरी-भरी हिमाचल की धरती को बर्बाद करने की नौबत आएगी? लकड़ी काटने के लिए मजबूर किया जाएगा मेरे हिमाचल को..? पूरा देश जिस हिमाचल के लिए गर्व करता है, उस हिमाचल के पेड़-पौधे काट-काट कर खाना पकाने की नौबत आएगी, तो इसके लिए अगर कोई गुनाहगार होगा तो यह दिल्ली की सल्तनत गुनहगार होगी भाइयों-बहनों, यह लोग जिम्मेदार होंगे। मैं प्रेम कुमार धूमलजी का अभिनंदन करना चाहता हूँ। दिल्ली से कोई मदद ना होने के बाद भी, दिल्ली सिलेंडर छीनती चली जा रही है उसके बावजूद भी, उन्होंनें हिमाचल की मेरी माताओं और बहनों की चिंता की, बच्चे को गर्म खाना मिले इसकी चिंता की और उन्होंने हर परिवार में मुफ्त में चूल्हा देने का वादा किया। यह मैं धूमलजी का बहुत बड़ा एक एहम कदम मानता हूँ। और आज आपको गैस के कारण जो खर्चा होता है... और मित्रों, कांग्रेस की तरह वादे नहीं, आपको लाकर के दिखा दिया कि यह होगा। झूठे नारे नहीं, झूठे वादे नहीं..! भाइयों-बहनों, मैं इस एक कारण के लिए भी वोट देना होता, अगर मैं हिमाचल का नागरिक होता तो धूमलजी की यह करूणा के कारण, गरीब परिवारों के प्रति प्रेम के कारण, मेरा वोट जरूर धूमलजी को देकर के जाता, इतना बढिय़ा काम किया है, कोई और नहीं कर सकता था और दिल्ली सरकार के मुंह पर तमाचा है ये..! यह सिर्फ चूल्हा नहीं है, यह चूल्हा सिर्फ रसोई पकाएगा ऐसा नहीं, यह धूमलजी का चूल्हा पूरी कांग्रेस को खाख करके रख देगा भाइयों, पूरी कांग्रेस को खाख करके रख देगा। इनके कारोबार ही ऐसे हैं..! भाइयों-बहनों, मैं गुजरात की एक घटना सुनाता हूँ। मेरे प्रदेश में मैंने एक काम किया है। हमने पाइप लाइन से लोगों के घर गैस पहुंचाने का काम आरंभ किया। 300 गाँवों में वो काम मैं कर पाया। सात लाख परिवारों को घर के अंदर जैसे नल से पानी आता है वैसे नल से गैस आता है। अब मेरा सपना था कि पिछले वर्ष इस बात को बीस लाख तक मैं पहुंचाऊं, लेकिन कांग्रेसवालों को पता चल गया कि मोदी अगर गैस घर-घर इस प्रकार से पहुंचा देगा और उनके इस दिल्ली के सिलेंडरवाले गैस से आधी कींमत में, और यदि यह महिलाएं सभी यह मोदी की तरफ चली गई तो तो कांग्रेस की मिट्टी पलीद हो जाएगी, कांग्रेस कभी जिंदा नहीं रहेगी..! तो उन्होंने क्या किया..? उन्होंने, भारत सरकार ने एक कानून निकाला कि गैस की पाइप लाइन डालने का अधिकार सिर्फ भारत सरकार को है, कोई राज्य सरकार गैस की पाइप लाइन नहीं डाल सकता है। अब मुझे बताइए भइया, इतना ज़हर क्या..? क्या गुजरात हिन्दुस्तान में नहीं है क्या..? यह कोई विदेश में है क्या..? जिसकी इस प्रकार से पाइप लाइन काट डालने का निर्णय करते हो आप..! शोभा देता है आपको..? वरना आज मेरे गुजरात में बीस लाख परिवारों में पाइपलाइन से गैस होता, तीन करोड़ गैस के सिलेन्डर बच जाते, तीन करोड़ सिलेन्डर भारत सरकार के बचते और तीन करोड़ गैस सिलेन्डर बचने के कारण सालाना भारत सरकार की पन्द्रह हजार करोड़ रुपये सब्सिडी बच जाती, उनके जेब में पैसे बच जाते..! लेकिन क्योंकि गुजरात में मोदी को क्रेडिट मिल रही है, मेरे काम को रोक दिया है। भाइयों-बहनों, मैं चुप रहने वाला इंसान नहीं हूँ। उनको पता नहीं यह मोदी है, वो ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है। अब मैंने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाए हैं और मैं दिल्ली सरकार को झुका के रहूँगा दोस्तों, झुका के रहूँगा..!

भाइयों-बहनों, कांग्रेस का चरित्र देखिए। कांग्रेस ने लोक लाज भी छोड़ दी है, सार्वजनिक जीवन में अगर सबसे बड़ी कोई पूंजी हुआ करती थी, तो वह लोकलाज होती थी। और प्रभु राम के जमाने से लोकलाज का विषय चला आ रहा है और हमारे देश में लोकलाज का महत्व बहुत रहा है। लेकिन कांग्रेस ने लोकलाज छोड़ दी है। उनके एक ऊर्जा मंत्री थे। वे ऊर्जा मंत्री के जमाने में हिन्दुस्तान के 19 राज्यों में 48 घंटे के लिए अंधेरा हो गया, बिजली गुल हो गई। देश के 70 करोड़ नागरिकों को 48 घंटे तक अंधेरे में जिंदगी गुजारनी पड़ी। आपरेशन थियेटर में किसी का आधा आपरेशन हुआ है और बिजली चली गई, आपरेशन अटक गया। लोग ट्रेन में सफर कर रहे थे, बिजली चली गई, ट्रेन बीच रास्ते में अटक गई। सारे विश्व में 21वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी की जहाँ चर्चा होती थी, पूरे विश्व के अखबारों ने लिखा कि यह कैसा देश है कि 21वीं सदी के पहले दशक के बाद भी लोगों को बिजली मुहैया नहीं करवा पा रहा है..! आधे-आधे पेज के लेख लिखे गए और आखिर में एक पैराग्राफ आता था और वह पैराग्राफ ये आता था कि एक तरफ पूरा हिन्दुस्तान अंधेरे में डूबा हुआ था, एक अकेला गुजरात ऐसा था जहाँ बिजली जगमगा रही थी..! लेकिन भाइयों-बहनों, मेरा विषय दूसरा है। जिस मंत्री के रहते हुए हिन्दुस्तान अंधेरे में डूब गया, जिस मंत्री के रहते हुए हिन्दुस्तान को दुनिया में नालेशी झेलनी पड़ी, उस मंत्री को उसी रात बिदाई कर देने की जरूरत थी। लेकिन यह दिल्ली की कांग्रेस का चरित्र देखिए, उनका कल्चर देखिए। लाज शर्म के बिना किस प्रकार से व्यवहार किया जाता है, लोकलाज की परवाह ना कर करना यह उनके जो तौर तरीके हैं वे देखिए, उन्होंने उसी मंत्री को एक ही हफ्ते में प्रमोशन दे दी, देश का गुह मंत्री बनाया..! अगर आप विफल हैं, गुनाह करते हो, गलत करते हो तो कांग्रेस में प्रमोशन मिलता है..! अभी उनके एक दूसरे मंत्री श्रीमान सलमान खुर्शीदजी, खुर्शीदजी हैं या कुर्सीजी हैं मालूम नहीं, उन पर बड़े गंभीर आरोप लगे, अपंग लोगों के पैसे ऐंठने के आरोप लगे। कोई इंक्वायरी नहीं हुई, कोई जानकारी नहीं आई, कुछ नहीं हुआ। उनका इस्तीफा लेना चाहिए था, देश के दिल में एक आग जल रही थी, लेकिन किया क्या..? कल उनका प्रमोशन कर दिया। आप गुनाह करो, प्रमोशन पाओ..! आप बेइमानी करो, प्रमोशन पाओ..! यही कांग्रेस के तौर तरीके हैं। कांग्रेस के एक मंत्री थे, पार्लियामेंट में पहले वो मिनीस्टर हुआ करते थे, उन पर आरोप लगे, पैसे की धांधली के, किक्रेट के, ढिकने, फलाने... उन्होंने संसद में खड़े होकर के कहा था कि जिस महिला के खाते में 50 करोड़ जमा हुए हैं, वो 50 करोड़ रुपये से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। ससंद में कहा था और महीने भर के अंदर-अंदर उनकी शादी की पत्रिकाएं सब जगह घूमने लगीं..! भाइयों-बहनों, बता दीजिए, इस देश में कभी किसी ने 50 करोड़ की गर्ल फ्रेन्ड देखी है..? 50 करोड़ की गर्ल फ्रेन्ड, इस गरीब देश में..! और उस समय माहौल इतना खराब हो गया कि उनसे इस्तीफा ले लिया गया, अभी भी वे मामले वैसे के वैसे लटके हुए हैं। कल उनको भी फिर से एक बार मंत्री बना कर के बाइज्जत बरी कर दिया गया, कांग्रेस का यह कल्चर देखिए..! भाइयों-बहनों, आपके हिमाचल के साथ क्या हुआ? केन्द्र में एक मंत्री, हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ आवाज उठाई और कांग्रेस को लगा कि अब जब न्यायालय ने आवाज़ उठाई है तो वीरभद्र सिंहजी का इस्तीफा ले लिया गया। इस्तीफा लेकर इनको कहते हैं कि ठीक है भाई, बस बहुत हो गया..! लेकिन क्या किया..? वहाँ से इस्तीफा लिया और यहाँ पूरा हिमाचल उनके हवाले कर दिया..! भाइयों-बहनों, यह उनके तौर तरीके हैं। मैं हैरान हूँ भाइयों, कांग्रेस किस कल्चर को देश में प्रवाहित करना चाहती है? और ऐसी कांग्रेस पार्टी को इस देश को क्यों झेलना चाहिए..? इतना ही नहीं भाइयों-बहनों, अभी एक स्टील कंपनी पर इनकम टैक्स की रेड हुई, तो उसमें नोट में पाया गया ‘वी.बी.एस.’, ‘वी.बी.एस.’ के नाम पर इतने रूपए..! इनकम टैक्स में खोज पड़ताल हुई। आप जानते हो यह ‘वी.बी.एस.’ कौन है..? भाइयों-बहनों, काग्रेंसवालों ने कह दिया कि यह वी.बी.एस. वीरभद्र सिंह नहीं है, यह तो वीरभ्रष्ट सिंह है। ये वीरभद्र सिंह नहीं है, ये तो वीरभ्रष्ट सिंह है, यह कोई और वी.बी.एस. होगा, हमारे वीरभद्र सिंह नहीं हो सकते। भाइयों-बहनों, कितने आरोप लग रहे हैं, लेकिन कांग्रेस को कोई परवाह नहीं है। भाइयों-बहनों, इक्का-दुक्का किसी ने भ्रष्टाचार किया हो तो यह देश उसको ठीक करने की ताकत रखता है, लेकिन सर्वोच्च स्थान पर जब भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन जाए, भ्रष्टाचार के प्रति लापरवाही बरती जाए, भ्रष्टाचार के प्रति अनदेखी करने का स्वभाव बन जाए तो वह देश बहुत गहरे संकट में जाकर के गिरता है भाइयों-बहनों, कांग्रेस से डरने की इसलिए जरूरत है..! यह कोई इक्के-दुक्के व्यक्ति के भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं है, यह मुद्दा है कांग्रेस के भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बनाने के चरित्र के सामने। और अगर भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बनाया गया, तो देश कितना बर्बाद हो जाएगा इसका आप अंदाज़ा लगा सकते हो।

भाइयों-बहनों, मैं कभी-कभी बहुत परेशान हो जाता हूँ। भारत एक संघीय ढ़ांचा है, राज्यों के समूह से बना हुआ देश है। यह संविधान निर्माताओं ने कहा हुआ है, लेकिन जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, उन सरकारों को विफल करने के लिए षड़यंत्र करना, उनके विकास के अंदर रोड़े अटकाना, यह दिल्ली सरकार का स्वाभाव बन गया है। मेरे पत्रकार मित्रों से भी मैं कहूँगा कि समय की मांग है कि वर्तमान कांग्रेस के चरित्र का एनालिसिस करने की जरूरत है, एक नए दृष्टिकोण से इसका रिसर्च करने की जरूरत है। जिस जमाने में कांग्रेस का झंडा चारों ओर फहराता था, पंचायत से लेकर के पार्लियामेंट सब ओर शासन करती थी और कहीं कोई राज्य अगर उभर कर आता था और विरोधी दल की सरकार बनती थी तो इस देश में दो दशक ऐसे गए, यह बहुत गंभीर सवाल मैं उठा रहा हूँ आज इस मंडी की सभा में, दो दशक तक कांग्रेस ने क्या किया..? अगर विरोधी दल की कहीं पर भी कोई सरकार बनी हो, कितना ही बहुमत क्यों ना आया हो, साम-दाम-दंड-भेद जो भी शस्त्र काम आए उसका उपयोग करके उस सत्तारूढ़ पार्टी को डिवाइड करना, एम.एल.ए. को खरीद फरोख्त करना, लोभ-लालच देना और विरोधी दलों की सरकारों को गिराना... 20 साल तक कांग्रेस इस काम को करती रही। और अगर कांग्रेस विरोधी दल की सरकार और वो दल के अंदर के बहुमत को डिवाइड नहीं कर सकती थी, तो धारा 356 का दुरूपयोग करना, किसी ना किसी नाम से जोड़ कर के उन सरकारों को गिरा देना, लेकिन हिन्दुस्तान में ना विपक्ष को पनपने देना, ना किसी दल की सरकार को पनपने देना, बीस साल तक लगातार कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग करते हुए हिन्दुस्तान के राजनैतिक दलों को कुचलने की लगातार कोशिश की थी। लेकिन अब कांग्रेस के बस का रोग नहीं रहा है, अब राज्यों को कुचल नहीं पाते हैं, किसी राज्य की सरकारों को तोड़ नहीं पाते हैं, धारा 356 का अनाप-शनाप दुरूपयोग नहीं कर पा रहे हैं और इसलिए पिछले दस साल से, मेरे पत्रकार मित्रों, अध्ययन करिए, देश के पॉलिटिकल पंडितों से मैं कहना चाहता हूँ कि अध्ययन कीजिए, कांग्रेस की रणनीति क्या है..? जो कांग्रेस 20 सालों तक सरकारों को तोडऩे के लिए संविधान का उपयोग करती थी, वह कांग्रेस आज अपने विरोधी दल के प्रमुख राजनेताओं के चरित्र पर कीचड़ उछालने के लिए षड़यंत्र करती है, संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग करती है, जितनी भी इन्वेस्टीगेशन की एजेंसीज उनके पास है, उसका दुरूपयोग करती है और कोई भी दल उभरने लगा हो तो उनके व्यक्तियों पर आरोप जड़ देना, झूठी बातें फैला देना, मीडिया के अंदर एक धारी कथाएं चालू करवा देना... एक नया षड़यंत्र चालू किया और हिन्दुस्तान में विरोधी दल का कोई नेता अछूता नहीं है जिस पर कांग्रेस ने इस प्रकार से पिछले दस साल में गंभीर आरोप ना लगाए हों। चरित्र हनन का रास्ता अपनाया है..! और बाद में क्या करते हैं..? सी.बी.आई. का राजनैतिक दुरूपयोग। जब पार्लियामेंट में वोट की जरूरत पड़े, तो सी.बी.आई. को मैदान में उतार दो। मेरे गुजरात में तो मित्रों, मैं दावे से कहता हूँ, मेरे गुजरात में कांग्रेस पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही है। आपको जान कर के आश्चर्य होगा, मेरे गुजरात के अंदर चुनाव के मैदान में कांग्रेस है ही नहीं, उम्मीदवार कांग्रेस के हैं, लेकिन चुनाव सी.बी.आई. लड़ रही है मेरे राज में, सी.बी.आई. चुनाव लड़ रही है..! यह तौर तरीके अपनाए जाते हैं।

भाइयों-बहनों, जहाँ-जहाँ भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं उनके साथ अन्याय करना, विकास की राह में रोड़े अटकाना और ऐसा व्यवहार किया जाता है कि जैसा किसी दुश्मन देश के राज्य के साथ किया जाए, यह भाजपा के राज्यों के साथ यह दिल्ली की सरकार करती है, यह मैं सार्वजनिक रूप से मैं उन पर आरोप लगाता हूँ। भाइयों-बहनों, मैं हमेशा देखता हूँ कि किस प्रकार से उन्होंने भाजपा सरकारों को विफल करने का प्रयास किया है। आप हिमाचल में देखिए, यहाँ पर रास्तों का काम प्रमुख काम होता है क्योंकि कभी भी पहाड़ ढह जाता है, जमीन ढह जाती है, नुकसान होता रहता है। भारत सरकार बहुत बड़ी-बड़ी बातें करती है और मैडम सोनियाजी यहाँ आकर बोली कि 10,000 करोड़ दिया है, 10,000 करोड..! मैडम, मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्या यह 10,000 करोड़ देहज में आए हुए हैं क्या..? यह हिन्दुस्तान की सौ करोड़ जनता की मेहनत की कमाई के पैसे हैं, यह आपकी व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। यह आपकी व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है, यह दिल्ली कान खोल कर सुन ले और आप हम लोगों को रूपयों के नाम पर दबा नहीं सकते हो। भारतीय जनता पार्टी जनता जर्नादन को समर्पित पार्टी है, हम जनता के विकास के लिए लगे हुए लोग हैं। भाइयों-बहनों, कभी कोई इस प्रकार का व्यवहार नहीं करता है। अरे, हमारे यहाँ अगर हम पड़ौस के घर से कभी एक प्याला भर अगर हम चीनी लाए हों, तो कभी वो कहता है कि अरे, उस दिन तुम्हारे यहाँ मेहमान आए थे तो मैंने चीनी दी थी, ऐसा कोई बोलता है क्या, कोई बोलता है..? कोई मैडम बोलती है, माताएं-बहनें बोलती है क्या..? अरे, वह रोज का व्यवहार होता है। यह आकर के बोलती है 10,00 करोड़ दिया..! अरे मैडम सोनियाजी, अगर आपको राज चलाना नहीं आता है तो दिल्ली का दौर छोड़ दीजिए, आपके पास हिसाब-किताब मांगने के लिए सारी संस्थाएं हैं और आज तक धूमलजी पर उंगली उठाने का साहस दिल्ली की आपकी एक भी संवैधानिक संस्था ने किया नहीं है..! अरे, उनको पूछ लीजिए, उनके पास हिसाब पड़ा है, प्लानिंग कमीशन के पास हिसाब पड़ा है, देश के हिसाब-किताब से चलता है। लेकिन लोगों को भ्रमित करने के लिए... और मैं तो हैरान हूँ, ‘मौन मोहन’ सिंहजी भी यही बोल कर गए..! यह अच्छा लगा मुझे कि ‘मौन मोहन’ सिंहजी ने एक आधा वाक्य ये कहा कि भाई, हिमाचल में विकास तो हुआ है। ये तो कहा, लेकिन बाद में कहा कि लेकिन पैसे दिल्ली के थे..! भाइयों-बहनों, दिल्ली हिन्दुस्तान की राजधानी है और हिमाचल हिन्दुस्तान का एक अंग है और हिमाचल को हिन्दुस्तान से अलग करके बोलने की भाषा हिन्दुस्तान के संविधान का अपमान है।

भाइयों-बहनों, धूमलजी मेरे बहुत अच्छे मित्र रहे हैं। जिस प्रकार से वे हिमाचल को नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं, मैंने बहुत निकट से जाना है। और मैं हिमाचल की मिट्टी से बहुत घुला-मिला इंसान हूँ, मैं देख रहा हूँ प्रगति को। और आज मैं गुजरात की धरती से आपसे खास मांगने आया हूँ और मैं आपसे चाहता हूँ कि 4 तारीख को आप भारी मतदान करें और भारतीय जनता पार्टी के कमल के निशान पर बटन दबाएं और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज़ प्रकट करें, कमल के निशान पर बटन दबा कर के महंगाई के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करें, कमल पर बटन दबा कर के दिल्ली की सल्तनत को उखाड़ फैंकने का संकल्प करें और भाइयों-बहनों, जो पाप दिल्ली में चल रहे हैं, उस पाप को इस देवभूमि में मत आने दीजिए मेरे भाइयों, उस पाप को इस देवभूमि में मत आने दीजिए..! यह हिन्दुस्तान की पवित्र जगह है, यह मेरा हिमाचल हिन्दुस्तान का पवित्र स्थान है, हिन्दुस्तान की देवभूमि है, कृपा करके इस देवभूमि में यह दिल्ली के पाप को प्रवेश मत करने दीजिए भाईयों, मत घुसने दीजिए, यह हिमाचल को सुरक्षित रखिए..! और धूमलजी इसको सुरक्षित रखेंगे यह मेरा पूरा विश्वास है। हिमाचल के भाइयों-बहनों ने मेरा स्वागत किया, सम्मान किया, मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूँ..! मेरे साथ बोलेंगे...

भारत माता की जय...!

दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए,

भारत माता की जय...!  भारत माता की जय...!  भारत माता की जय...!

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महिलाओं की भागीदारी ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में भारत की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है: लोकसभा में पीएम मोदी
April 16, 2026
यह हमारी नारी शक्ति को सशक्त बनाने का एक ऐतिहासिक अवसर है: प्रधानमंत्री
निर्णय लेने की प्रक्रिया में नारी शक्ति को सम्मिलित करना एक विकसित भारत के निर्माण की कुंजी है: प्रधानमंत्री मोदी
अधिक से अधिक महिलाएं जमीनी स्तर पर नेतृत्व कर रही हैं: प्रधानमंत्री
हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं; यह उनका अधिकार है: प्रधानमंत्री मोदी
हमारे संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या की बात नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्धता है: प्रधानमंत्री

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज सुबह से चर्चा प्रारंभ हुई है। काफी साथी यहां से भी जिन मुद्दों को स्पर्श किया गया है, उसको तथ्यों से और तर्क से सदन को जरूर जानकारी देंगे। और इसलिए मैं उन विषयों में जाना नहीं चाहता।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय की समाज की मनोस्थिति और नेतृत्व की क्षमता, उस पाल को कैप्चर करके एक राष्ट्र की अमानत बना देती है, एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती है। मैं समझता हूं कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह वैसे ही पल हैं। आवश्यकता तो यह थी कि 25-30 साल पहले जब से यह विचार सामने आया, आवश्यकता महसूस हुई, हम इसको लागू कर देते और हम आज उसको काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते हैं। और आवश्यकता के अनुसार उसमें समय-समय पर सुधार भी होते और यही तो लोकतंत्र की ब्‍यूटी होती है। हमारी, हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी हैं। हमारी हजारों साल की लोकतंत्र की एक विकास यात्रा रही है, और उस विकास यात्रा में एक नया आयाम जोड़ने का एक शुभ अवसर सदन के हम सभी साथियों को मिला है। और मैंने प्रारंभ में कहा है कि हम सब भाग्यवान हैं कि हमें ऐसे महत्वपूर्ण और देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। यह हम लोगों के लिए सौभाग्य है और मैं चाहता हूं कि मेरे सभी माननीय सांसद, मैं इधर-उधर की आज बात नहीं करना चाहता हूं, हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने ना दें। हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने के लिए जा रहे हैं और मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति की भी, उसके रूप स्वरूप को तो तय करने ही करने वाला है, लेकिन यह देश की दिशा और दशा भी तय करने वाला है, इतने महत्वपूर्ण मोड़ पर हम खड़े हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्व में भी आज भारत की स्वीकृति हम सब महसूस कर रहे हैं और यह हम सबके लिए गौरव का पल है। एक समय हमारे पास आया है, और इस समय को हमने एक विकसित भारत के संकल्प के साथ जोड़ा है। और मैं पक्का मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब केवल उत्तम प्रकार के रेल, रास्ते, इंफ्रास्ट्रक्चर या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े, सिर्फ इतने से ही विकसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम लोग नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत, जिसके नीति निर्धारण में सबका साथ सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50% जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने, यह समय की मांग है। हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कोई भी होंगे, जिम्‍मेवार कोई भी होंगे, लेकिन इस सच्चाई को हमें स्वीकार करना होगा कि जब हम अकेले मिलते हैं, तब मानते हैं हां यार! लेकिन जब सामूहिक रूप से मिलते हैंं, मुझे याद है जब इसकी प्रक्रिया चली थी, सभी दलों से मिलना हुआ है, एक दल को छोड़कर के, जिन-जिन से मिलना हुआ है, हर एक ने सैद्धांतिक विरोध नहीं किया है। बाद में जाकर के जो कुछ भी हुआ होगा, राजनीतिक दिशा पकड़ी जा रही है। लेकिन जो राजनीतिक दिशा में ही सोचते हैं, मैं उनको भी एडवाइस करना चाहूंगा, एक मित्र के रूप में एडवाइस करता हूं और सबको काम आएगी। हमारे देश में जबसे वूमेन रिजर्वेशन को लेकर चर्चा हुई है और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, हर चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया है, जिस-जिस ने विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है। उनका हाल बुरे से बुरा किया है। लेकिन यह भी देखिए कि 24 का चुनाव में ऐसा नहीं हुआ। क्यों नहीं हुआ? यह इसलिए नहीं हुआ कि 24 में सबने सहमति से इसको पारित किया, तो यह विषय ही नहीं रहा। किसी के पक्ष में पॉलिटिकल फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान भी नहीं हुआ। सहज रूप से जो मुद्दे थे, उन मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ा, क्योंकि 24 में सब साथ में थे। कुछ लोग यहां हैं, कुछ लोग नहीं है, लेकिन सब साथ में थे। आज भी मैं कहता हूं, अगर हम सब साथ में जाते हैं, तो इतिहास गवाह है कि यह किसी एक के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा। यह देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा, देश के सामूहिक निर्णय शक्ति के पक्ष में जाएगा और हम सब उसके यश के हकदार होंगे। ना ट्रेजरी बैंक इसका हकदार रहेगा, ना मोदी उसका हकदार रहेगा, यहां बैठे हुए सब हकदार रहेंगे और इसलिए जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है, मैं चाहूंगा कि वह खुद के परिणामों को पिछले 30 साल में देख लें। फायदा उनका भी इसी में है, रास्ता दिखा रहा हूं कि इसी में फायदा है कि जो नुकसान हो रहा है, उससे बच जाओगे और इसलिए मैं समझता हूं कि इसमें राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मुझे याद है, तब तो मैं शासकीय व्यवस्था की राजनीति में नहीं था, मैं एक एक संगठन के कार्यकर्ता के नाते काम करता था। उस समय एक चर्चा सुनने को मिलती थी गलियारों में कि देखिए यह कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण देना है, तो बहुत आराम से दे देते हैं। लेकिन पंचायतों में आरक्षण देना है, तो आराम से देते हैं क्योंकि उसमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है। उसको लगता है, हम सुरक्षित है यार, वहां दे दो। यह उस समय गलियारों में बहुत चर्चा थी कि बोले यह कभी नहीं करेंगे यहां बैठे हुए, क्यों? क्योंकि उनका कुछ जाएगा और इसलिए और बाकी पंचायत का हो जाता है, 50% तक पहुंच गए।

मैं राजनीतिक दृष्टि से और भी एक बात समझाना चाहता हूं साथियों,

आज से 25 साल, 30 साल पहले जिसने भी विरोध किया, तो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना, पिछले 25-30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर के आई हुई बहनों में एक political consciousness है, वह ओपिनियन मेकर हैं ग्रास रूट लेवल पर, 30 साल पहले वह शांत रहती थी, बोलती नहीं थी, समझती थी, बोलती नहीं थी। आज वह वोकल है और इसलिए अब जो भी पक्ष-विपक्ष होगा, वो जो लाखों बहनें कभी ना कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं, प्रतिनिधित्व कर चुकी है, जनता के सुख-दुख की समस्याओं को गहराई से देखा है, वह आंदोलित है। वह कहती हैं कि झाड़ू-कचरा वाले काम में तो हमें जोर देते हो, वह तो परिवार में भी पहले होता था, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभा में और पार्लियामेंट में होती हैं। और इसलिए मैं राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, मैं किसी भी संसद की बात करता हूं, किसी भी एमलए की बात करता हूं, यह दल वो दल की बात मैं नहीं कर रहा हूं। जो भी राजनीतिक जीवन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उनको यह मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25-30 साल में लाखों बहनें ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33% का नहीं, वहां भी वह आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं और इसलिए जो आज विरोध करेंगे उसको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी, लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। और इसलिए राजनीतिक समझदारी भी इसी में है कि हम ग्रास रूट लेवल पर महिलाओं की जो पॉलिटिकल लीडरशिप खड़ी हुई है, उसको आपने अब कंसीडर करना पड़ेगा। यहां मैंने सुना, हमारे मुलायम सिंह जी थे तब से एक विषय चला रहे हैं, उनके परिवार वाले भी चला रहे हैं। आप देश की बहनों पर भरोसा करो ना, उनकी समझदारी पर भरोसा करो, एक बार 33% बहनों को यहां आने दो, आकर के उनको निर्णय करने दो, किसको देना है, किसको नहीं देना है, इस वर्ग को देना है, उस वर्ग को देना है, करेंगे वह निर्णय, हम उनके सामर्थ्य पर आशंका क्यों करते हैं भाई? एक बार आने तो दो! उनको आने तो दो! जब आएंगे, तो 34 में और धर्मेंद्र जी, धर्मेंद्र जी मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह बात सही है, मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। धर्मेंद्र जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं और अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, तो कभी-कभी मदद कर देते हैं। यह बात सही है कि मैं अति पिछडे समाज से आता हूं, लेकिन मेरा दायित्व समाज के सबको साथ लेकर के चलने का है और यही मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है। मेरे लिए, मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है और इसलिए और यह संविधान की ताकत है कि मेरे जैसा अत्यंत छोटे समाज का अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को इतना बड़ा दायित्व देश ने दिया है। और इसलिए मैं तो देशवासियों का ऋणी हूँ और मैं तो संविधान निर्माताओं का ऋणी हूँ कि जिसके कारण आज मैं यहां हूं।

लेकिन आदरणीय अध्यक्ष जी!

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज जीवन के हर एक क्षेत्र में हम देखें कि नारी शक्ति देश के गौरव को बढ़ाने वाले, परचम लहराने में कहीं पीछे नहीं हैं जी। हम गर्व कर सकें, इस प्रकार से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में आज हमारी माताएं-बहनें बहुत बड़ा योगदान, हमारी बेटियां तो कमाल कर रही हैं, जीवन के हर क्षेत्र में! इतना बड़ा सामर्थ्‍य, उसको हम हिस्सेदारी से रोकने के लिए क्यों इतनी ताकत खपा रहे हैं जी, उनके जुड़ने से सामर्थ्‍य बढ़ने वाला है और इसलिए मैं आज अपील करने आया हूं आपके पास कि इसको राजनीति के तराजू से मत तौलिये। यह राष्ट्रहित का निर्णय है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज का हमारा यह, हमारे सामने यह अवसर एक साथ बैठकर के, एक दिशा में सोच करके विकसित भारत बनाने में हमारी नारी शक्ति की भागीदारी को एक खुले मन से निर्णय करने का अवसर है, स्वीकार करने का अवसर है और मैंने जैसा पहले भी कहा कि आज पूरा देश और विशेष करके नारी शक्ति, हमारे निर्णय तो देखेंगी, लेकिन निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। और इसलिए हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से एक प्रकार से इस अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना, उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगे और इसलिए वह कभी राजनीतिक इशू भी नहीं बना, एक अच्छी स्थिति है। अब सवाल यह है कि हमें कितने समय तक इसको रोकना है, अब यहां जो लोग जनसंख्या वगैरा के विषय उठाते हैं, क्या आपको मालूम नहीं है, मैं चाहूंगा कि अमित भाई अपने भाषण में इन सारी चीजों को उल्‍लेख करेंगे, जब कि हमने जनगणना के संबंध में कब-कब क्या-क्या किया था, बाद में कोविड आया, उसके कारण क्या मुसीबत आई, कैसे रुकावटें आई। यह सारी बात हम सबके सामने हैं, इसमें कोई विषय नहीं है। लेकिन पिछले दिनों जब हम 23 में चर्चा कर रहे थे, तब भी व्यापक रूप से बात यह थी कि इसको जल्दी करो, हर कोई कह रहा था जल्दी करो। अब 24 में संभव नहीं था क्योंकि इतने कम समय में यह करना मुश्किल था। अब 29 में हमारे पास अवसर है, अगर हम उन 29 में भी नहीं करते, तो स्थिति क्या बनेगी, हम कल्पना कर सकते हैं, तो फिर हम देश की माताओं-बहनों को यह विश्वास नहीं बना पाएंगे कि हम सचमुच में यह प्रयास सच्चे अर्थ से कर सकते हैं। और इसलिए समय की मांग है कि अब हम ज्यादा विलंब ना करें, इस दरमियान राजनीतिक दल के लोगों से, संविधान के जानकार लोगों से, जो महिलाओं में एक्टिविस्ट के नाते काम करने वाले, ऐसे लोगों से भी कई चर्चाएं हुई, कुछ लोगों ने खुद होकर के भी सुझाव दिए। सारा मंथन करते-करते यहां भी सभी दलों से लगातार बातें करके होती रही हैं। स्ट्रक्चरल वे में भी हुई है, इनफॉर्मल वे में भी हुई है और उसमें से आखिर बनाए हुए यह कुछ रास्ता निकालना होगा, ताकि हम हमारी माताओं-बहनों की शक्ति को जोड़ सकते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा। यहां बैठ करके हमें किसी को संविधान ने देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। जो शपथ लेकर के हम बैठे हैं ना, हम सबको एक राष्ट्र के रूप में विचार करना हमारा दायित्व बनता है। चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, हम टुकड़ों में ना सोच सकते हैं, ना टुकड़ों में हम निर्णय कर सकते हैं। और इसलिए निराधार रूप में, जिसमें कोई सच्चाई नहीं, रत्ती भर सच्चाई नहीं, सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए जो बवंडर खड़ा किया जा रहा है, मैं आज बड़ी जिम्मेवारी के साथ इस सदन में इस पवित्र जगह से कहना चाहता हूं, क्या यह दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हो, बड़े राज्य हो, मैं आज यह जिम्मेवारी से कहना चाहता हूं कि यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी, भूतकाल में जो सरकारें रहीं और जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, तो उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात पर होगी। अगर गारंटी शब्द चाहिए, तो मैं गारंटी शब्द उपयोग करता हूं। वादा की बात करते हो, तो मैं वादा शब्द उपयोग करता हूं। अगर तमिल में कोई अच्छा शब्द हो, तो वो भी मैं बोलने के लिए तैयार हूं, क्योंकि जब नियत साफ है, तो फिर शब्दों का खेल करने की हमें जरूरत नहीं है जी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं आज सदन के सभी साथियों को यह भी कहना चाहता हूं कि साथियों, हम भ्रम में ना रहे, हम उस अहंकार में ना रहे हैं और मैं हम शब्द का उपयोग कर रहा हूं। मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं मैं, हम इस भ्रम में ना रहें कि हम देश की नारी शक्ति को हम कुछ दे रहे हैं, जी नहीं। उसका हक है; और हमने, हमने कई दशकों से उसको रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित करके हमें उस पाप में से मुक्ति पाने का यह अवसर है। हम सब जानते हैं, हर एक ने कैसे चालाकी की हर बार, चतुराई की, बिल्कुल हम तो इसके पक्ष में ही है, लेकिन; हम इसके साथ ही हैं, लेकिन; हर बार कोई ना कोई टेक्निकल पूंछ लगा दी इसको और इसको रोका गया है। हर बार ऐसे ही चीजें लाई गई हैं। हिम्मत नहीं हैं कि हम 33% महिलाओं के आरक्षण का विरोध कर पाए, वह तो जमाना चला गया, आपको करना नहीं है, लेकिन कहने की हिम्मत भी नहीं है। और इसलिए टेक्निकल बहानेबाजी, यह करो तो यह, वो करो तो वो, ढिकना करो तो, अब देश की नारी को यह नहीं समझा पाओगे, सदन में नंबर का खेल क्या होता है, वह तो समय तय करेगा, लेकिन यह पक्का है कि अब इन भांति-भांति के बहानेबाजी, भांति-भांति टेक्निकल मुद्दों के आधार पर चीजों को उलझा करके तीन दशक तक इसको अड़ंगे डालें हमने फंसा-फंसा कर रखा, आपने जो अचीव करना था, कर लिया, अब छोड़ दो ना भाई! तीन दशक कम पढ़ते हैं क्या रोकने में, तीन दशक तक आपने रोका, फिर भी कुछ कर नहीं पाए, तो अब तो करो।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं ना कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अरे भाई, इनको बोलने दीजिए, वहां पर बेचारे के मुंह पर ताला लगा हुआ है, वहां बंगाल में कोई बोलने नहीं देता उसको।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आदरणीय अध्यक्ष जी,

देखिए इसका अगर विरोध करेंगे, तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। लेकिन साथ चलेंगे, तो किसी को भी नहीं होगा, यह लिखकर रखो। किसी को नहीं होगा, क्योंकि फिर अलग पहलू हो जाता है, फिर किसी को फायदा नहीं होता। और इसलिए हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही यह पारित हो जाए, मैं कल advertisement दे करके सबका धन्यवाद करने के लिए तैयार हूं, सबकी फोटो छपवाने के लिए तैयार हूं, क्रेडिट आप ले लो चलो! क्रेडिट की चिंता है क्या जी? ले लो ना क्रेडिट, आपको जिसकी फोटो छपवानी है, सरकारी खर्चे से हम करवा देंगे। सामने से, सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूँ।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारी संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी यह सिर्फ आंकड़ों का खेल या एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार, इतना सीमित नहीं है। लोकतंत्र की जननी के रूप में, मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में यह निर्णय भारत का कमिटमेंट है, यह सांस्कृतिक कमिटमेंट है और इसी कमिटमेंट के कारण पंचायतों में यह व्यवस्था बनी और अब तो 20 से अधिक राज्‍यों में 50% हुआ है और हमने अनुभव किया है, मुझे लंबे अरसे तक, मुझे लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का जनता ने अवसर दिया और उसी कालखंड में ग्रासरूट लेवल पर वूमेन लीडरशिप को मैंने देखा है। मेरा अनुभव है कि संवेदनशीलता के साथ समस्याओं के समाधान में उनका कमिटमेंट बहुत ही परिणामकारी रहते थे, विकास की यात्रा को गति देने में रहते थे और उस अनुभव के आधार पर मैं कहता हूं कि इस सदन में उनकी आवाज नई शक्ति बनेगी, नई सोच जुड़ेगी, देश की दिशा में एक संवेदनशीलता जुड़ेगी, तथ्य और तर्क के आधारों पर अनुभव जब जुड़ता है, तब मैं समझता हूं उसका सामर्थ्य अनेक गुना बढ़ जाता है और सदन कितना समृद्ध होता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारे देश में अनुभवी नारी शक्ति की कोई कमी नहीं है, सामर्थ्यवान में कोई कमी नहीं है, हम भरोसा करें, वह कंट्रीब्यूट करेंगी, बहुत अच्छा कंट्रीब्यूट करेंगी और आज भी जितनी हमारी बहनें यहां हैं, जब भी उनको अवसर मिला है, उन्होंने बहुत अच्छे ढंग से अपनी बात बताई है, सदन को समृद्ध किया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज देश में वर्तमान में, देश में 650 से ज्यादा पंचायत हैं, डिस्ट्रिक्ट पंचायत, करीब पौने तीन सौ महिलाएं उसका नेतृत्व कर रही हैं और केंद्र के कैबिनेट मिनिस्टर से ज्यादा उनके पास जिम्मेदारी और धन और व्यवस्था होती है, काम करती हैं जी। करीब 6700 ब्लॉक पंचायतों में 2700 से अधिक ब्लॉक पंचायत ऐसी हैं, जिसका नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। आज देश में 900 से अधिक शहरों में अर्बन लोकल बॉडीज की हेड के रूप में मेयर्स हों या स्टैंडिंग कमेटी का काम देखने वाली बहनें हैं, उनकी ताकत है। और मैं मानता हूं कि आज देश जो प्रगति कर रहा है, उस प्रगति में इनका भी महत्वपूर्ण योगदान है, उस ऋण को हमें स्वीकार करने का यह अवसर है। और जब यह अनुभव सदन के साथ जड़ेगा, तब वह अनेक गुना ताकत बढ़ा देगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

एक लंबी प्रतीक्षा यानी एक प्रकार से हम सबके लिए यह सवालिया निशान पैदा हो, ऐसी परिस्थिति हम ही लोगों ने पैदा की है। यह अवसर है कि हम पुरानी जो कुछ भी मर्यादा रही होंगी, मुश्किलें रही होंगी, उससे बाहर निकले, हिम्मत के साथ हम आगे बढ़े और नारी शक्ति का राष्ट्र के विकास में उनकी सहभागिता को हम सुनिश्चित करें और मैं पक्का मानता हूं कि अगर आज हम मिलकर के निर्णय करते हैं और मैं तो आग्रह करूंगा कि हमें सर्व सहमति से इसको को आगे बढ़ना चाहिए और जब सर्वसम्मति से बढ़ता है, तो ट्रेजरी बैंक पर एक दबाव रहता है जी, उनको भी लगता है कि नहीं भाई सबको सबका इसमें हक है, हर एक की बात मान के चलो, कोई नुकसान नहीं है। सामूहिक शक्ति से तो अनेक परिणाम हमें अच्छे मिलते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं ज्यादा समय न लेते हुए इतना ही कहूंगा कि इसको राजनीति के तराजू से ना तोलें। हम जब भी कुछ निर्णय करने जा रहे हैं, तो देश के, इतने बड़े देश का आधा जिम्मा जो उठा रहे हैं, उनका भी कोई हक बनता है यहां आने का, हमें रोकना नहीं चाहिए। और दूसरा संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी एक मत पहले से बनता आया था, चर्चा थी कि साहब यह जो है, इनका कम मत करो, अधिक कर दो, तो जल्दी हो जाएगा। वह अधिक वाला विषय अब आया है कि चलो भाई पहले जो संख्या थी 33% और बढ़ा दो, ताकि किसी को ऐसा ना लगे कि मेरा हक चला गया। एक नई शक्ति जुड़ेगी, अतिरिक्त शक्ति जुड़ेगी और अब सदन के रचना भी तो अब, जो पहले से हमने सोच कर रखा है, जगह तो बना ली है।

और आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं लाइटर वे में जरूर कहना चाहूंगा, हर एक के अपने राजनीतिक कारण होते हैं और पराजय का डर जरा हैरान करने वाला होता है। लेकिन अपने यहां जब कोई भी शुभ काम होता है, उसको नजर ना लग जाए, इसलिए काला टीका लगाने की परंपरा है। मैं आपका धन्यवाद करता हूं काला टीका लगाने के लिए!

बहुत-बहुत धन्यवाद!