दि. २२/११/२०११ 

कराई पुलिस अकादमी, गांधीनगर

ज के इस समारोह के केन्द्रबिंदु, सभी ५३० नौजवान जो आज एक नये दायित्व का निर्वाह करने जा रहे हैं, इस समारोह में उपस्थित सभी अधिकारी, इन जवानों के अभिभावक, अतिथिगण और विद्यार्थी मित्रों...

९६० में गुजरात ने अपनी विकास यात्रा को प्रारंभ किया. इतने वर्षों में यह पहली घटना है कि पुलिस फोर्स में पी.एस.आई., जो एक महत्वपूर्ण इकाई है, उनकी इतनी बड़ी संख्या में एक साथ पास-आउट परेड हो रही है. यह भी बड़े गर्व की बात है कि इन ५३० में ६८ महिलाएँ हैं. पिछले ५० वर्षों में इस प्रकार के पास-आउट परेड में महिलाओं की जितनी टोटल संख्या थी, उससे यह ज्यादा है, एक ही परेड में. यह बात भी ध्यान में आयी है कि आज बहुत बड़ी संख्या में हाइली क्वॉलिफाइड नौजवान हैं जिन्होंने इस क्षेत्र को एक मिशन के रूप में स्वीकार किया है. इसमें कई इंजीनियर्स हैं, कई ऐसे नौजवान हैं जिन्होंने डॉक्टरेट किया है, बहुत सारे नौजवान लॉ ग्रेज्युएट हैं, बहुत सारे ऐसे हैं जो कभी शिक्षक थे, उस क्षेत्र को छोडकर यहाँ आये हैं. बहुत सारे नौजवान हैं जो सरकार में किसी न किसी पद पर थे, उसे छोडकर यहाँ आये हैं. तो एक मिशन के रूप में इस क्षेत्र में आना यह अपने आप में गुजरात के पुलिस दल के लिए एक शुभ संकेत है और इस बात पर मैं स्वय़ं गर्व अनुभव करता हूँ और आप सभी नौजवानों को इस क्षेत्र को चुनने के लिए मैं बधाई देता हूँ, अभिनंदन करता हूँ. मित्रों, एक कसौटी का काल रहता है, जब ट्रेनिंग होती है. कभी-कभी कुछ पल ऐसे भी आ जाते हैं कि जब लगता है इतनी मेहनत क्यों? ऐसे सुबह से शाम, महीनों तक जब ट्रेनिंग में होते हैं तो लगता है कि चलो भाई, जितनी जल्दी से निकल जाएँ, अच्छा होगा. और ऐसा लगना बहुत स्वाभाविक है. लेकिन यदि मंज़िल तक पहुँचना है तो सफ़र कितना ही कठिन क्यों न हो, उसको यदि हँसते-हँसते पार करते हैं तभी मंज़िल पर पहुँचने का आनंद आता है. आज आप सभी के लिए वही आनंद का पल है.

मित्रों, यहाँ जो शिक्षा-दीक्षा होती है, वो एक सर्टिफिकेट पाने के लिए, या एक ट्रोफी पाने के लिए नहीं होती है, नौकरी में स्थान पाने के लिए नहीं होती है, इस प्रकार की जो ट्रेनिंग होती है उसे जीवन भर जीना पडता है. और जीवन में वही सफल होता है जो शिक्षाकाल में जो पाया है, उसको जीवन की आदत बनाता है. यहाँ तो डिसीप्लिन में रहना स्वाभाविक है क्योंकि यह तो यहाँ की व्यवस्था में है, यहाँ जल्दी उठना स्वाभाविक है क्योंकि हम एक व्यवस्था में हैं. सुबह बिगुल बजता होगा, व्हिसल बजती होगी, वो हमें एक धरने मे ले जाती होगी. जब किसी एक व्यवस्था की चौखट में होते हैं तब अपने आपको ढालना मुश्किल नहीं होता है. कभी हमें एक तीन बाइ छ: के कमरे में रहने के लिए कोई कहे तो हम रह नहीं पाते और कोई कहे कि ४८ अवर्स आपको इसी में रहना है, कैसे भी गुजारा करना है, तो एक बोझ महसूस होता है. लेकिन यदि ४८ अवर्स की जर्नी हो और ट्रेन के उस छोटे से कम्पार्टमेन्ट में टाइम निकालना हो तो बड़े आराम से निकाल देते हैं. क्योंकि पता है कि मैं एक व्यवस्था के भीतर हूँ और ४८ घंटे के बाद ही मुझे उतरना है, तो अपने आप ही वो हँसते खेलते निकाल देते हैं. मित्रों, इसलिए इस साल भर के जीवन को पार करना उतना कठिन नहीं था, जितना कि कठिनाई अब शुरू होती है जब कोई कहने वाला नहीं होगा, कोई पूछने वाला नहीं होगा, एक्सरसाइज़ करिये यह कहने के लिए कोई होगा नहीं. जिन विषयों को देखा है, जिन कानूनी बारिकिओं को समझा है उनको स्मरण किजिए, उनको याद किजिए और हर घटना के साथ अपने मन को जोडकर... कि ऐसा हुआ; मैं होता तो क्या करता? जब तक अपना मन निरंतर यह काम नहीं करता है तब तक हम अपने प्रोफेशन में सफल नहीं होते हैं. यहाँ का जो कालख्ण्ड है, उसको चौबीसों घंटे जीने का प्रयास करना सबसे बड़ा चैलेन्ज होता है. मैं आशा करता हूँ कि आप सभी नौजवान जब आज यहाँ से जीवन के एक नये अवसर की ओर कदम रख रहे हैं तब आप इन बातों को ध्यान में रखेंगे कि इसे कैसे जिया जाए, ज़िंदगी का हिस्सा कैसे बनाया जाए, यह शिक्षा किसी पद के लिए नहीं; एक जीवन की पुन:प्रतिष्ठा के लिए कैसे काम आए. इसलिए यदि यह शिक्षा इस तरह उपयोग में आयेगी तो मैं मानता हूँ कि आप अपने युनिफॉर्म की शोभा बढ़ायेंगे, आपके कंधे पर जो नाम या पट्टियां लगी हैं, वो अपने आप में एक प्रतिष्ठा होती है. वे केवल आपके कंधे की शोभा नहीं बढाती है, बल्कि आपके कंधे पर जो निशान होता है वो आपकी इस राज्य के प्रति जिम्मेवारी को दर्शाता है. वो कंधा आपकी शोभा के लिए नहीं होता है, वो कंधा तो राज्य की शोभा के लिए होता है. और जो इस कंधे का सामर्थ्य समझता है, उस कंधे पर लगी हुई पट्टी, उस पर लगे हुए वो सिम्बोल, उस पर लगे हुए वो नाम, इन सबकी अपनी एक ताकत होती है, उसके साथ एक गरिमा जुडी होती है, एक सम्मान जुडा हुआ होता है और इसलिए आपका कंधा पूरे राज्य की शक्ति का कंधा बनता है और उस कंधे को सँभालने के लिए पूरे जीवन को, पूरे शरीर को, पूरे मन-मंदिर को प्रतिबद्ध करना पडता है और तभी जा करके जीवन बनता है.

भाईयों-बहनों, विद्यार्थी काल में मुक्ति का एक आनंद होता है और इसलिए चाहे कितने ही बड़े दायित्व को संभालना हो, हम विद्यार्थी अवस्था में होते हैं तब हमारा मन काफ़ी लचीला होता है, उसमें खुलापन भी होता है, लेकिन जब उसी शिक्षा-दीक्षा के साथ दायित्व में जाते हैं तब दायित्व का एक बहुत बड़ा बोझ होता है और यह एक ऐसा क्षेत्र है कि जहाँ सबसे ज्यादा तनाव का माहौल रहता है. हर पल अटेन्शन में रहना पडता है. पता नहीं कब क्या होगा, कहाँ दौडना पडेगा, कहाँ भागना पडेगा...! आपको यहाँ जो योग की दीक्षा दी गई है, वो यदि ऐसे समय में आपके जीवन का हिस्सा बनें तो तनाव से मुक्त हो करके, स्वस्थ मन से, कितनी ही बाधायें क्यों न आएँ, कितने ही संकट क्यों न आएँ, कितनी ही गहन परिस्थिति को निपटने की स्थिति क्यों न आए, यदि मन को स्वस्थ रखना है तो इस योग की शिक्षा को आप अपने जीवन का हिस्सा बनाएँगे ऐसी मैं आप सब से आशा करता हूँ. यदि आपके चेहरे पर मुस्कान होती है तो आप बहुत ही आसानी से कठोर से कठोर काम को भी कर पाते हैं और इसलिए यहाँ जो शिक्षा-दीक्षा मिली है, उसका जो ह्यूमन ऐंगल है, जो बारिकियाँ हैं, उन्हें कभी भूलना नहीं चाहिए, उसे प्राथमिकता देनी चाहिए.

भाईयों-बहनों, आज आप एक व्यवस्था के अंदर यहाँ से जा रहे हैं. एक बहुत बड़ी लंबी पाइप लाइन में एक ओर से घुसते हैं तो कुछ न चाहते हुए भी दूसरी ओर वैसे भी निकलने वाले ही होते हैं. और कुछ लोग ऐसे होते हैं कि जीवन में एक व्यवस्था के अंदर प्रवेश कर लेते हैं फिर उनको लगता है कि समय ही उन्हें आगे लेता चला जायेगा. मित्रों, जो समय का इंतजार करते हुए चलते रहते हैं, न वो ज़िंदगी में कुछ पा सकते हैं, न जीवन में किसी को देने का संतोष ले सकते हैं. नौजवानों, मैं आपसे ये नहीं चाहता हूँ कि आप इसे अपनी मंज़िल मानें, आप इसे एक मुकाम मानें. आप मन में तय करके जाएँ कि और आगे जाना है, और नयी ऊँचाईयोँ पर जाना है. इसके लिए जितनी अपनी क्षमता बढ़ानी होगी, जितना अपना ज्ञान बढ़ाना होगा, जितना अपना कौशल्य बढ़ाना होगा, आपको अपनी जिन-जिन क्वॉलिटीज़ को जोड़ना होगा, उनको जोड़ने के लिए आप प्रयास करेंगे और यदि आप ऐसा करते हैं तो मुझे विश्वास है मित्रों, आपके लिए यह मुकाम नहीं रहेगा. समय इंतजार नहीं करेगा, आप समय के पास जायेंगे और उच्च पदों पर पहुँचने का मौका आप भी ढ़ूँढ़ें, जितने भी रास्तों से गुज़रना पडे; गुज़रें, जितनी भी कसौटियों को पार करना पडे; करें लेकिन आप उच्च पद पर जाने के सपने देखते हुए अपनी मंजिल ऊँची रखिए, एक एक मुकाम को पार करते जाइए और कुछ नया पाने का संकल्प ले करके चलेंगे तो मुझे विश्वास है दोस्तों, आप में से कई लोग इस राज्य की आन-बान-शान बनकर पूरे हिंदुस्तान में अपना नाम रोशन कर सकते हैं. यह मेरा भरोसा है, आप अपने आप पर भरोसा किजिए, आप अपने जीवन को आगे बढ़ा सकते हैं.

मुझे इस बात का गर्व है, मैं यहाँ जब पासिंग आउट परेड के निरिक्षण के लिए जा रहा था तो पहले कुछ नागरिकों की ओर मैंने देखा और मैंने अनुभव किया कि उनमें ज्यादातर वो परिवार बैठे थे जिनका बेटा, जिसका भाई इस परेड मे शामिल है. मैं उनकी तरफ देख रहा था. बहुत ही सामान्य परिवार के स्वजन यहाँ बैठे हुए हैं. कोई बहुत उच्च घर से आए हुए लोग नहीं हैं. कई ऐसी विधवा माताएँ हैं, जिनका बेटा आज इस युनिफॉर्म में शान से खड़ा होगा. उस विधवा माँ ने कब सोचा होगा की मेरे बेटे को इस प्रकार का पद मिल सकता है. आज की व्यवस्था जिस प्रकार से गुज़र रही है, कोई भरोसा नहीं कर सकता है कि एक विधवा माँ का बेटा जिसे कोई पहचानता तक नहीं है, लेकिन व्यवस्था के तहत, ट्रैन्स्पेरन्सी के कारण, अपनी क्षमता के कारण वो यहाँ तक पहुँच गया है. भाईयों-बहनों, जिस प्रकार से हमें यह मौका मिला है, हम जीवन-भर इस बात को याद रखेंगे, कि आज मेरी माँ खुश है, क्योंकि एक ट्रैन्स्पेरन्ट व्यवस्था के कारण मैं इस जगह पर पहुंच पाया हूँ. मेरा भाई खुश है, मेरी बहन खुश है, मेरे पिताजी खुश है, मेरी माँ खुश है... मेरा परिवार खुश है. जिनको यह विश्वास होगा कि मुझे जो यह प्रवेश मिला है, यहाँ तक आने के लिए मेरे लिए जो खिड़की खुली है, उसमें जो पारदर्शिता थी, उस पारदर्शिता में बहुत बड़ी ताकत थी. यदि मेरी ज़िंदगी में आनंद का कारण वो पारदर्शिता है, मेरे परिवार की खुशी का कारण वो पारदर्शिता है तो मेरा कर्तव्य बनता है कि मैं जीवन-भर उस पारदर्शिता का पालन करूँ ताकि मैं भी हजारों-लाखों लोगों की खुशियों का कारण बन सकूँ. और इसलिए मित्रों, मैं आपसे अपेक्षा करूँगा, मैं आपसे प्रार्थना करूँगा, मैं आग्रह करूँगा... और जब आपने ईश्वर को साथ रखते हुए, आज जो शपथ ली है, उस शपथ का एक-एक शब्द जीना पडता है, दोस्तों. शपथ, यह केवल वाणी नहीं है, शपथ केवल शब्द नहीं होते हैं. तिरंगा झण्डा हमारे जीवन की आन, बान, शान है. उसे जब स्पर्श करते हैं, तो एक नई चेतना का संचार होता है. आपको जब ऐसी अवस्था में उसका स्पर्श होता है तो आप के भीतर उस चेतना का संचार होता है, आप जीवन-भर इस पल को याद रखेंगे. इस तिरंगे झंण्डे की शान के लिए महापुरूषों ने बलिदान दिये थे, १८५७ से लेकर १९४२ तक कितने ही लोगों ने अपने जीवन दे दिए और तब जाकर सन ’४७ में हमने इस तिरंगे झंण्डे का सम्मान और गौरव पाया है. भाईयों-बहनों,  जिस गौरव को आज हमें स्पर्श करने का अवसर मिला है, वो हमारी ज़िंदगी का कितना बड़ा सामर्थ्य बन सकता है, हमारी जिंदगी में कितनी बड़ी चेतना को जगाने का एक अवसर बन सकता है. शपथ के शब्द, शब्द न रहते हुए मेरे जीवन का संकल्प कैसे बन जाए, शपथ का भाव मेरे जीवन का भाव कैसे बन जाए और हर पल ईश्वर को स्मरण करते हुए मैं उसको जीने की कैसे कोशिश करुँ और तब जा करके इस शपथ का मूल्य बढ़ता जाता है. आपका जीवन इस शपथ की शक्ति के साथ आगे बढ़ता जाए, इसके लिए मैं आपको शुभकामनाएँ देता हूँ.

भाईयों-बहनों, देश नये नये संकटों से गुज़र रहा है. एक ज़माना था, जब सेनाएँ युद्ध करती थीं तो कितनों के लहू बहते थे, कितनी माँओं कि गोदें उजड़ जाती थीं..! वक्त बदल चुका है. आज युद्ध में टॅक्नोलोजी ने जगह ली है. सीना तानकर गोलियाँ खाने की नौबत कम होती चली जा रही है. इसके बावज़ूद भी देश की जय और पराजय संभव हो सकती है. नये क्षेत्र खुल चुके हैं. और इसी प्रकार सामान्य जीवन में सुरक्षा का विषय पहले जैसा नहीं रहा है. गुनाहित कृत्यों में टॅक्नोलोजी ने जगह ले ली है. विषय एक दो गुनाहों का नहीं रहा है, अब आतंकवाद, नक्सलवाद जैसी समस्याओं से देश को जूझना पड रहा है. मित्रों, युद्ध में जितने जवान नहीं मारे गये हैं, उससे ज़्यादा जवान आतंकवादियों की गोलियोँ से मारे गये हैं. देश के विकास को ठप करने में नक्सलवाद एक बहुत बड़ा कारण बना हुआ है आज. इस देश में कई इलाक़े हैं, जहाँ सरकार ने जाकर स्कूल बनाया, नक्सलवादिओं ने उड़ा दिया, कहीं अस्पताल बनाया तो नक्सलवादियों ने उड़ा दिया. असंतोष की आग पैदा करने के लिए न जाने कितने ही लोगों को मारा जा रहा है. भाईयों-बहनों, यह आतंकवाद हो, नक्सलवाद हो, हमें अपनी जान की बाजी लगाकर भी निर्दोष नागरिकों की रक्षा करनी पडती है. और मित्रों, जब तक भीतर साहस नहीं है, तब तक हम उस स्थिति से निपट नहीं सकते हैं. और साहस किताबों से प्राप्त नहीं होता है, साहस की माला नहीं जपी जाती है, अपने आप को तैयार करना पडता है और जब मन में पवित्रता हो, मन में संकल्प हो तो भय नाम की कोई चीज़ नहीं रहती, भाईयों. और इसलिए मैं आप से चाहता हूँ कि मेरा एक-एक साथी अभय होना चाहिये, निर्भय होना चाहिये, अभय और निर्भय इस वर्दी के सबसे प्रमुख गुण होने चाहिये. यदि वो अभय और निर्भय नहीं है तो शायद भय के सामने वह विचलित हो जायेगा और इसलिए, भाईयों-बहनों, आप एक ऐसे दायित्व की ओर जा रहे हैं जहाँ जीवन की ऊँचाइयोँ को पार करने के लिए सामान्य से समान्य मानवी की रक्षा के लिए अपने आपको लगायेंगे.

भाईयों-बहनों, पुलिस जनता जनार्दन की मित्र होती है, यह हम बचपन से सुनते आए हैं. मुझे यह चरित्र लाना है और इसलिए हमने ‘रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी’ शुरू की है. उस रक्षा शक्ति युनिवर्सिटी में पहले हम वो ट्रेनिंग देना चाहते हैं कि सुरक्षा बलों के जवानों की जो ट्रेनिंग हो वह नौकरी के लिए नहीं जीवन के लिए ट्रेनिंग हो. नौकरी, यह पेशा... ये तो बाइ-प्रोडक्ट हो, उस दिशा में हम जाना चाहते हैं. आने वाले दिनों में उसका भी हम उपयोग करना चाहते हैं. मैं आज सरकार के कुछ मित्रों से बात कर रहा था. अब डेढ़ साल का समय है आपके पास, जिसमें आपने यहाँ जो सिखा है, उसे तलवार की नोक पर जीकर दिखाना होगा आपको. सब लोग बारीकी से आपको देखेंगे, हर चीज़ का रिपोर्ट बनेगा, आपकी छोटी-सी गलती भी आपके लिए बहुत बड़ा संकट बन सकती है. ऐसे डेढ साल का समय होता है, जिसमें आपको सिर्फ़ डिसीप्लिन से अपने आप को सिद्ध करना होता है. उसकी अनेक प्रकार की पद्धतियाँ हैं. मैं उसमें एक नई पद्धति जोड़ने की सोच रहा हूँ. मैं इस क्षेत्र के जो विद्वान हैं उनसे कहूँगा कि उस पर काम करें और एक ही हफ्ते में कुछ निर्णय हम कर सकें. यहाँ से एक एक नौजवान जो तैयार हो कर जाता है, उसको डेढ़ साल के कार्यकाल में कम से कम १०० अवर्स अपने से नीचे जो कोन्स्टेबल्स हैं उन्हें वो ट्रेनिंग दें. यहाँ से जो उसने ट्रेनिंग ली है... १०० अवर्स, २५-२५ की चार बॅच हो या ३०-३० की तीन बॅच हो, हर दिन सुबह ५ से ८, ५:३० से ८, उन कोन्स्टेबल को ट्रेनिंग दें. जो यहाँ पर सीखा है, वो वहाँ सिखाएँ. एक सिलेबस बनाया जाये, १०० अवर्स का. और वो काम आप लोग करें ताकि यहाँ पर आप जो सीखे हैं, उसीको सिखाने से वो और अधिक पक्का होता है, और स्वभाव अधिक आक्रमक बन जाता है. कभी-कभी सीखते समय बहुत सी चीज़ों पर हमारा ध्यान नहीं जाता है. कभी-कभी इग्ज़ैम में तो निकल जाते हैं, लेकिन जब सिखाना होता है तब बहुत-सी बातों की ओर हमारा ध्यान जाता है और इसलिए आपके इस डेढ़ साल के काम में १०० अवर्स की एक और जिम्मेदारी जोड़ने की मैं सोच रहा हूँ. और हम देखेंगे कि जिन कोन्स्टेबल को आपने ट्रैन किया है, उसमें से कितने परसेन्ट हैं जिनको सफलता मिलती है, उसके आधार पर हम तय करेंगे कि आपने यहाँ से क्या पाया है. यहाँ से कुछ भी भूलकर नहीं जाना है.

मुझे विश्वास है मित्रों, राज्य में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में आप जैसे नौजवानों को पूरी व्यवस्था से जोड़ने के कारण गुजरात के पुलिस बल को एक नई ताकत मिलेगी, आम आदमी के सुख-दु:ख के साथी बनकर उन्हें हम सुरक्षा का एक नया एहसास दे पायेंगे और गुजरात का सामान्य से सामान्य व्यक्ति हमारी उपस्थिति मात्र से सुरक्षा का अनुभव करेगा. हमारी उपस्थिति मात्र से उसे चैन की नींद आ जाए इस प्रकार का अपना व्यवहार रहे, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबको बहुत बहुत शुभकामनाएँ. आपके परिवारजनों को भी शुभकामनाएँ देता हूँ कि समाज ने इतना सारा दिया है, आपके बेटे को एक प्रतिष्ठा दी है. जब भी मौका मिले हम सब मिलकर समाज के कर्ज़ को चुकाने के लिए कुछ न कुछ करते रहें. इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबको एक नयी जिम्मेदारी के साथ भारत माता की सेवा के लिए कदम आगे बढ़ाने का मैं आह्वान करता हूँ, शुभकामनाएँ देता हूँ.

 

हुत बहुत धन्यवाद..!

 

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दमन ‘मिनी इंडिया’ का जीवंत उदाहरण बन गया है: पीएम मोदी
June 05, 2026
हेल्थकेयर, एविएशन, टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत दमन के लिए विकास को नई गति देने वाली पहल है, जो केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी: पीएम
आज जारी किए गए आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। FY 2025-26 में 7.7% और 31 मार्च को समाप्त तिमाही में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की गई है: पीएम
वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौतियों के बावजूद, 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत न केवल मजबूती से आगे बढ़ रहा है, बल्कि दुनिया से एक कदम आगे भी बना हुआ है: पीएम
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे सरकार के हेल्थकेयर पर फोकस को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। पहले भारत में अधिकांश डिलिवरी अस्पतालों के बाहर होती थीं, लेकिन आज देश में 90% से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही हैं: पीएम
मिशन इंद्रधनुष की बदौलत भारत में बच्चों के टीकाकरण का कवरेज 2014 से पहले के 60% से बढ़कर आज करीब 90% तक पहुंच गया है: पीएम

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के एडमिनिस्ट्रेटर प्रफुल्ल भाई पटेल, संसद में मेरी सहयोगी कलाबेन डेलकर, दमन Municipal Council की President दीपिका टंडेल जी, दमन जिला पंचायत के अध्यक्ष धर्म बाबू पटेल, सिलवासा Municipal Council के अध्यक्ष सोमनाथ देवरे जी, दादरा नगर हवेली जिला पंचायत के अध्यक्ष निशा भावसार जी, दीव Municipal Council के अध्यक्ष हरीश कपाड़िया जी, दीव जिला पंचायत के अध्यक्ष कोटिया रंजिताबेन और यहां इतनी विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाइयों-बहनों,

आप जैसे यहां इकट्ठे हुए हैं, वैसे ही लक्षद्वीप में भी बहुत बड़ी तादाद में लोग वीडियो के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं, क्योंकि आज लक्षद्वीप के विकास की भी एक नई शुरुआत, एक नए प्रकल्‍प, जो पूरे लक्षद्वीप के जीवन में एक क्रांतिकारी काम करने वाले हैं, उसके लिए भी कुछ योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।

साथियों,

कुछ साल पहले, जब मैं आपके बीच आया था, तो मैंने कहा था यह हमारा दमन तेजी से मिनी इंडिया बन रहा है और आज मैं देख रहा हूं, बाईं तरफ पूरा बंगाल है और दाहिने तरफ पूरा असम है। दमन मिनी इंडिया का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां की विविधता, अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का यहां निवास करना, पूरे भारत की सुंदर सी झलक आपके बीच आकर के मिल जाती है। आप सब इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने आए, मैं इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

भाइयों-बहनों,

मुझे कई बार दमन और दीव आने का अवसर मिला है। दादरा और नगर हवेली भी आता रहता हूं और जब मैं मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं था, तब तो बहुत बार आता था। लेकिन अब जब मैं यहां आता हूं और यहां के सुशासन को देखकर, गवर्नेंस मॉडल को देखकर बहुत अच्छा लगता है। हर बार मुझे लगता है कि पिछली बार के मुकाबले यह क्षेत्र विकास की राह पर मीलों आगे बढ़ गया है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव ने दशकों से विकास के सपने देखे थे। जो सपने पहले देखे, वो पीढ़ियां तो चली गईं। लेकिन आज जो पीढ़ी है, वो अपनी आंखों के सामने देख रही है कि उनके मां-बाप, दादा-दादी जो सपने देखते थे, वो आज सपने पूरे होते हुए आप अपनी आंखों से देख रहे हैं। आज भी यहां कनेक्टिविटी, हेल्थ, एजूकेशन, टूरिज्‍म और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर इन से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है। विकास के यह काम दमन और पूरी यूनियन टेरिटरी के लिए यहां के लोगों के जीवन को आसान बनाएंगे। इनसे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे। इन कामों के पीछे प्रफुल्ल भाई पटेल की दृष्टि, उनकी और उनकी टीम की मेहनत साफ-साफ नजर आती है। मैं इसके लिए भी प्रफुल्ल भाई और उनकी पूरी टीम की सराहना करता हूं। मैं सभी को लक्षद्वीप के लोगों को, दादरा-नगर हवेली के लोगों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं, आप सबको बधाई देता हूं।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक सुखद खबर आई है। मैं तो आज सुबह दिल्ली से निकल चुका था, लेकिन अभी जो आंकड़े सामने आए हैं, जो खबर आई है, वो सचमुच में प्रसन्नता करने वाली है और मैं भी चाहता हूं, यह खुशी आपके साथ भी बाटूं। आज जो आंकड़े आए हैं, उन आंकड़ों से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव कितनी मजबूत है। वर्ष 2025-26 में यानी जो फाइनेंशियल ईयर पिछला पूरा हुआ, वर्ष 2025-26 में भारत ने 7.7 परसेंट की ग्रोथ रेट हासिल की है, 7.7 और पिछला क्वार्टर जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ 7.8 परसेंट रही है, 7.8 और यह दुनिया में तेज गति से आगे बढ़ने वाली बडी इकोनॉमी है। हर भारतीय को गर्व हो, यह है उसकी गति। आज देश जिस रिफॉर्म एक्‍सप्रेस पर चल रहा है, आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का जो इतना विकास हो रहा है, गरीब कल्‍याण को लेकर इतने बड़े स्‍तर जो काम चल रहा है, इन सारे प्रयासों का परिणाम है कि आज देश बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है और हम सब जानते हैं, दुनिया संकटों में घिरी हुई है, सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था सवालिया निशानों के नीचे दबी पड़ी है, वैश्विक संकट के इस बुरे से बुरे दौर में भी 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयासों से भारत खुद को संभाल तो पा ही रहा है, लेकिन साथ-साथ सबसे आगे रहने में भी उसके प्रयास सफल होते जा रहे हैं। मैं देशवासियों को आर्थिक क्षेत्र की इस नई ऊंचाई को प्राप्त करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मैं देश को फिर आश्‍वस्‍त करता हूं कि देश दुनिया भर में चल रहे इन संकटों का सामना करते हुए Reform, Perform और Transform के रास्ते पर ऐसे ही दृढ़ संकल्प के साथ, तेज गति से आगे बढ़ता ही रहेगा, यह मेरी देशवासियों को गारंटी है।

साथियों,

आज हमारे लिए विकास जितना जरूरी है, उतना ही अहम है हमारे विकास का मॉडल सस्टेनेबल हो। आज वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के दिन हमारे यहां यूनियन टेरिटरी स्टेट इस संकल्प को साकार कर रहा है। आज एक ओर यहां हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं को लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। साथ ही यहां करीब एक लाख एक पेड़ मां के नाम, एक लाख पौधे भी लगाए जा रहे हैं। मुझे गर्व है कि एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिसने सरकारी इमारतों में शत प्रतिशत, 100 परसेंट सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की उपलब्धि हासिल की है। आज दीव में दिन में जितनी बिजली की डिमांड होती है, वो सोलर पॉवर से ही पूरी हो रही है और हमें तो इसे और आगे लेकर के जाना है। घरों में भी सोलर ऊर्जा से बिजली मिले, यही नहीं अतिरिक्त बिजली से परिवार की आय भी हो, इसके लिए रूफटॉप सोलर प्लांट्स लगाने की पहल शुरू हुई है। मैं इन उपलब्धियों के लिए भी आप सबकी सराहना करता हूँ।

साथियों,

साथ-साथ मुझे यह भी बताया गया है, दमन के लोग इन दिनों यहाँ स्वच्छता अभियान भी चला रहे हैं। यह दिखाता है कि स्वच्छता किस तरह दमन के जनजीवन में संस्कार बन चुका है और यह संस्कार स्वच्छता में नजर आ रहे हैं। मैं इस जनभागीदारी के आपके प्रयासों के लिए दमन के लोगों का अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

दादरा नगर हवेली, दमन और दीव, यह संघ शासित प्रदेश होने के साथ ही भारत की पहचान और विरासत भी हैं। इसलिए, इसके विकास के लिए हमारे लक्ष्य भी साधारण नहीं हैं। मुझे याद है, जब मैं पिछले साल सिलवासा आया था, तब मैंने आपको सिंगापुर का उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि एक समय सिंगापुर मछुआरों का छोटा सा गांव था। लेकिन, सिंगापुर के लोगों ने एक सपना देखा, वहां के लोगों ने बड़ा लक्ष्य तय किया और आज वही सिंगापुर दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नस हब बन चुका है। आज दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव भी वही सपना देख रहे हैं। ये नमो एयरपोर्ट, दमणगंगा नदी पर बनने वाला आइकॉनिक ब्रिज, ‘बीच फ्रंट’ उस पर बनने वाला कन्वेंशन सेंटर, ऐसे सभी इनफ्रास्ट्रक्चर के जरिए हम भविष्य के बड़े संकल्पों की नींव रख रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए आप लोगों की आवाजाही आसान होगी। यहाँ बिज़नेस के लिए नई संभावनाएं बनेंगी। दमन के दोनों किनारों पर विकास की गति और तेज होगी।

साथियों,

यहाँ hospitality economy से जुड़े अवसर बढ़ेंगे और साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर जैसी सुविधा से व्यापार, लॉजिस्टिक्स को भी नई गति मिलेगी।

साथियों,

इस क्षेत्र में ब्लू इकॉनमी के लिए हमने जो विज़न तैयार किया है, वो विज़न भी हाइटेक इनफ्रास्ट्रक्चर की ताकत से ही साकार होगा। इसीलिए, लक्षद्वीप के कलपेनी और कदमत द्वीपों में भी आज ही आधुनिक पोर्ट्स की आधारशिला रखी जा रही है। यह सभी प्रयास ब्लू इकॉनमी में देश की ताकत को बढ़ाएँगे और जैसा मैंने कहा यह लक्षद्वीप का भाग्‍य बदलने वाले initiative हैं।

साथियों,

भाजपा की सरकार में, एनडीए की हमारी सरकार में हमारे लिए विकास की पहली कसौटी है- गरीब, वंचित, आदिवासी और मिडिल क्लास के जीवन में बदलाव! इसके लिए, हेल्थ सेक्टर हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। बीते वर्षों में देश हेल्थ केयर के लिए होलिस्टिक विजन लेकर आगे बढ़ा। हमने इलाज से जुड़ी हर चिंता का समाधान किया है। आज गरीब से गरीब के पास भी आयुष्मान कार्ड की सुविधा है। उनके पास 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का भरोसा है। बीमारी की समय से जांच हो सके, इसके लिए, प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था है। जन औषधि केन्द्रों के जरिए सस्ती दवाइयाँ भी मिल रही हैं। ये सुविधाएं और बेहतर हों, और आधुनिक हों, इसके लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए आज स्वास्थ्य सेवाओं को टेक्नॉलॉजी से जोड़ा जा रहा है।

साथियों,

आयुष्मान कार्ड और जन औषधि केंद्रों से ही गरीब और मध्यम वर्ग के करीब सवा दो लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं।

भाइयों-बहनों,

केंद्र सरकार की नीतियों का बहुत लाभ इस क्षेत्र के लोगों को भी हुआ है। एक समय यहां इलाज की अच्छी सुविधाओं का भी अभाव था। यहाँ मेडिकल कॉलेज तक नहीं था। लेकिन, अब मेडिकल कॉलेज भी है और उसमें post-graduation की पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सिलवासा का नमो हॉस्पिटल पिछले साल से हजारों लोगों की सेवा कर रहा है। आज दमन में भी नमो हॉस्पिटल का लोकार्पण हुआ है। इस क्षेत्र के लोगों को भी अब और बेहतर हेल्थ केयर का लाभ मिलेगा।

साथियों,

हमारी सरकार कैसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चल रही है, इसका एक प्रमाण नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के नतीजों में भी मिलता है। एक समय भारत में ज़्यादातर बच्चों की डिलिवरी अस्पताल में नहीं होती थी। आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही है, जिसके कारण माता मृत्यु या नवजात की मृत्यु में बहुत बड़ी रुकावट आई है। मिशन इंद्रधनुष की वजह से बच्चों के टीकाकरण के क्षेत्र में भी भारत ने अच्छी प्रगति की है। 2014 से पहले केवल 60 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हो पाता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले 30 प्रतिशत से भी कम परिवार स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े हुए थे। आज आयुष्मान भारत, उन आंकड़ों को भी बदल दिया है। अब 60 प्रतिशत से अधिक परिवारों को ये सुरक्षा मिल रही है।

साथियों,

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के इन प्रयासों का लाभ अगर किसी को सबसे ज्यादा मिला है, तो वो मेरे देश की नारी शक्ति है।

साथियों,

पहले इस क्षेत्र के युवाओं को हायर एजुकेशन के लिए भी बाहर जाना पड़ता था। लेकिन, आज यहाँ नेशनल लेवल के, एक नहीं कई इंस्टीट्यूट बन चुके हैं। पिछले वर्षों में यहां स्कूलों की नई बिल्डिंग्स बनी हैं, स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम भी बने हैं। 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों को इनका लाभ मिल रहा है। मुझे खुशी है कि केंद्र शासित प्रदेश धीरे-धीरे एजुकेशन के क्षेत्र में आगे आ रहा है। स्वामी विवेकानंद एजुकेशन हब जैसे कई निर्माण यहाँ हो रहे हैं।

भाइयों-बहनों,

इस शिक्षा क्रांति में हमारी बेटियाँ पीछे न रहें, ये भी हमारा संकल्प है। इसके लिए कई बड़े प्रयास किए जा रहे हैं। सरस्वती साइकिल स्कीम, सरस्वती विद्या योजना, यहां की बेटियों को बहुत मदद कर रही है।

साथियों,

आज भारत की कोशिश है कि देश के युवाओं को डिग्री के साथ ही सही दिशा भी मिले। उन्हें ऐसा एक्सपोजर मिले, जो लोकल टैलेंट को ग्लोबल अवसरों से जोड़े। डिजाइन, लॉ, इंजीनियरिंग, मेडिकल एजुकेशन, आईटी, ड्रोन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हमारी आज की तैयारी भारत की वर्कफोर्स को मजबूत बनाएगी। इसलिए प्रोफेशनल संस्थानों का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।

साथियों,

आज NIFT के अठारहवें campus की आधारशिला रखी गई है। ये संस्थान यहां के युवाओं को ग्लोबल एक्सपोजर से जोड़ेगा। आई.टी.आई. दमन में ड्रोन टेक्नीशियन जैसे नए कोर्सेस भी शुरू हुए हैं। पीएम विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, इनसे जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का लाभ भी युवाओं को मिल रहा है।

साथियों,

देश में खेलों को भी नई सोच के साथ आगे बढ़ाया गया। हमारे खेल अब केवल बड़े शहरों या बड़े स्टेडियमों तक सीमित नहीं हैं। खेलो इंडिया जैसे प्रयासों ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का नया मंच दिया है। इससे छोटे-छोटे क्षेत्रों में नेशनल लेवल पर खेल के जगत में हमारे बच्चे आगे आ रहे हैं और इसका भी लाभ इस क्षेत्र को हुआ है। दीव आज beach sports का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। घोघला बीच पर हुए Beach Games ने भी देश का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींचा है। आज यहां आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार काम हो रहा है। खानवेल में फुटबॉल सेंटर और दमन में वॉलीबॉल ट्रेनिंग सेंटर यहां खेल संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं।

साथियों,

आज देश का बहुत बड़ा फोकस टूरिज्म पर भी है। हमारा प्रयास है कि टूरिज्म से स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिले। छोटे-छोटे स्थानों को भी बड़े-बड़े अवसरों से जोड़ा जा सके। ‘देखो अपना देश’ जैसे प्रयास ने लोगों को देश की विविधता के बारे में जानने के लिए प्रेरित किया है। आज भारत में हैरिटेज टूरिज्म, ‘बीच टूरिज्म’, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, इन सेक्टर्स को नई ऊर्जा मिल रही है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में तो पर्यटन भी इतनी असीम संभावनाओं वाला एक क्षेत्र है। इस क्षेत्र को प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत वरदान मिला है। इसीलिए पर्यटन को लेकर देश ने जिन नीतियों पर काम किया है, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव को उसका बड़ा लाभ मिल रहा है। 2021 में यहां करीब 6 लाख टूरिस्ट आए थे। 2025 में ये संख्या बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही वर्षों में टूरिज्म फुटफॉल में करीब 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। यह बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सुविधाओं, साफ-सुथरे ‘बीच’ की वजह से संभव हुआ है। दमन नाइट मार्केट, रामसेतु सी-फ्रंट, नमोपथ सी-फ्रंट, नानी दमन फोर्ट, गंगेश्वर टेंपल कॉम्प्लेक्स, ऐसे अनेक स्थान आज इस पूरे क्षेत्र की नई पहचान बना रहे हैं।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, इसके सपनों को पूरा करने के लिए हमें यहाँ की औद्योगिक ताकत को भी बढ़ाना है। यह भी गर्व की बात है कि इस यूनियन टेरिटरी ने man-made fibre के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। दादरा और नगर हवेली को National Man-Made Fibre Capital के रूप में पहचाना जाता है। प्लास्टिक एक्सपोर्ट में भी ये क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार ने यहां इंडस्ट्रीज और MSMEs को सपोर्ट देने के लिए भी लगातार प्रयास किए हैं। यहां MSMEs और अन्य इंडस्ट्रीज को करोड़ों रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश के लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में ये क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनेगा।

साथियों,

जब विकास के विजन के साथ संवेदनशील गवर्नेंस जुड़ता है, तो परिवर्तन तेज गति से जमीन पर उतरता है। दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में हमारे इन प्रयासों का प्रभाव देखकर संतोष होता है। मुझे इस धरती के लोगों पर पूरा विश्वास है। यहां के युवा, यहां की माताएं-बहनें, यहां के किसान, कारीगर, श्रमिक और उद्यमी, आने वाले वर्षों में इस विकास यात्रा को और आगे ले जाएंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ, आपके सपनों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर विकास परियोजनाओं के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।