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महामहिम राष्ट्रपति यू थेन सेन, इस शिखर सम्मेलन का आयोजन करने और इस सत्र की अध्यक्षता करने के लिए मैं आपका आभारी हूं। आपके नेतृत्व के तहत, म्यांमार इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इससे भारत-आसियान संबंधों को भी मजबूती मिली है।

आपके विचारों के लिए मैं आप सभी का आभारी हूं। इससे भारत-आसियान सामरिक साझेदारी में मेरा विश्वास और मजबूत हुआ है।

उपर्युक्त सभी बातों के साथ, अच्छे मित्रों की भांति आप सभी ने एक सफल और समृद्ध भारत की कामना की है।

मैं कुछ बिंदुओं का उल्लेख करना चाहता हूं। हमारे बीच में कई समानताएं और समरूपताएं हैं। भारत और आसियान जनसंख्या के मामले में द्वितीय और तृतीय नंबर पर हैं। हम सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और इस शताब्दी की सबसे तेजी से उभरती तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। हमारे पास एक युवा जनसंख्या की ताकत और क्षमता मौजूद है। भारत में 35 वर्ष की आयु से कम के आठ सौ मिलियन लोग एक बड़े अवसर का सृजन करते हैं।

हम भारत में एक नई आर्थिक यात्रा प्रारंभ कर चुके हैं। हम बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, व्यापार, कृषि, कौशल विकास, शहरी नवीकरण और स्मार्ट शहरों पर बल दे रहे हैं। ‘मेक इन इंडिया’ एक नया अभियान है। हम भारत में कारोबार करना आसान बनाने पर विशेष जोर दे रहे हैं और इसके तहत हम अपनी नीतियों को आकर्षक बना रहे हैं। मैं आपको भारत के इस नए वातावरण में शामिल होने के लिए आमंत्रण देता हूं। भारतीय कंपनियां भी आसियान के साथ निवेश और व्यापार करने की इच्छुक हैं।

मैं आपको यह भी विश्वास दिलाता हूं कि हमारी व्यापार नीति और माहौल में व्यापक सुधार होगा। हम आसियान के साथ त्वरित गति से संपर्क परियोजनाओं की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे। मैं यह भी सुझाव देता हूं कि हम भविष्य में और सुधार के लिए अपने सामान पर नि:शुल्क व्यापार समझौते की भी समीक्षा करें और इसे सभी के लिए लाभकारी बनाएं। मैं यह भी अपील करता हूं कि सेवा और निवेश पर मुक्त व्यापार समझौते को अति शीघ्र लागू किया जाए।

आपमें से कई महानुभावों ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर विचार व्यक्त किए हैं। यह इस क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण और समृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण मंच हो सकता है। हालांकि हमारा उद्देश्य एक संतुलित समझौते के लिए होना चाहिए, जो सभी के लिए लाभकारी हो और वस्तु एवं सेवा के लिए समान समय-सीमा के साथ समान महत्वाकांक्षी एजेंडे के माध्यम से अपने स्वरूप में व्यापक हो।

अपने संपर्कों को और गहन बनाने के लिए, मैं आपके सहयोग से एक विशेष सुविधा अथवा विशेष उद्देश्य साधन का गठन करने पर विचार कर रहा हूं जिससे कि परियोजना के वित्त पोषण और शीघ्र कार्यान्वयन की सुविधा दी जा सके।

हालांकि, इस युग में हमें भौतिक संपर्क से ज्यादा सूचना और इंटरनेट तकनीक की आवश्यकता है। मेरा अनुभव है कि जहां भी सड़क संपर्क मजबूत नहीं है, वहां हम इंटरनेट संपर्क के माध्यम से व्यापक आर्थिक अवसर और रोजगार सृजन कर सकते हैं। भारत इस क्षेत्र में सभी संभव सहायता और सहयोग देने के लिए तैयार है।

भारत और आसियान में बड़े शहर हैं और वह त्वरित गति से शहरीकरण का अनुभव कर रहे हैं। यह चुनौती और अवसर दोनों ही हैं। आइए, भारत के सौ स्मार्ट शहरों और पांच सौ शहरों के नवीकरण में भागीदार बनें। विज्ञान और तकनीक तथा शिक्षा, सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। हम नवीकरण ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में क्या कर सकते हैं, इस बारे में हमें महत्वाकांक्षी ढंग से सोचना चाहिए। आइए शोध, विनिर्माण और तैनाती के लिए एक प्रमुख आसियान-भारत सौर परियोजना के बारे में विचार करते हैं।

अंतरिक्ष विज्ञान भी हमें बहुत से क्षेत्रों में लाभ दे सकता है। हमें वियतनाम में एक नए भारत-आसियान अंतरिक्ष संबंधित भू-स्टेशन की स्थापना शीघ्रता से करनी चाहिए और इंडोनेशिया में मौजूदा स्टेशन के उन्नयन की परियोजना प्रारंभ करनी चाहिए। पड़ोसी के तौर पर भारत और आसियान आपदा जोखिम में कमी, त्वरित प्रतिक्रिया और प्रबंधन में सहयोग से अत्यंत लाभान्वित हो सकते हैं। भारत इस क्षेत्र में क्षमता निर्माण, सहयोग और त्वरित प्रक्रिया में पूर्ण सहायता देने के लिए तैयार है।

हमें पारंपरिक औषधि, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और वन सहित स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने सहयोग को आगे बढ़ाना चाहिए। जैसा कि आपमें से कुछ पहले ही उल्लेख कर चुके हैं कि कृषि और खाद्य सुरक्षा भी एक ऐसा अन्य क्षेत्र है, जहां मैं सहयोग की अपार संभावनाएं देखता हूं।

हमें आपसी मान्यता के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। हमें और अधिक अनुसंधान करने चाहिए तथा अपने प्राचीन संबंधों का आदान-प्रदान करना चाहिए। हमें यह भी देखना चाहिए कि कैसे हमारी सम्मिलित विरासत आधुनिक विश्व के लिए उपयोगी हो सकती है।

हमारे युवाओं और हमारे आर्थिक विकास के लिए रोजगार अवसरों का सृजन करने के लिए कौशल विकास आवश्यक है। हमें कौशल विकास में अपने संबंधित क्षेत्रों की विशेषज्ञताओं को साझा करने में सहयोग करना चाहिए।

मैं व्यक्तिगत रूप से जन संपर्क पर खास जोर देता हूं। मैं छात्रों, युवाओं, शिक्षकों, सांसदों, राजनयिकों, मीडिया, किसानों, कलाकारों और विशेषज्ञों के बीच संबंधों को बढ़ते हुए देखना चाहूंगा।

पर्यटन में भी उस तरह से वृद्धि नहीं हुई है जैसी होनी चाहिए। आज वास्तव में भारतीय पर्यटकों के लिए आसियान क्षेत्र सर्वाधिक लोकप्रिय स्थल है। मैं भविष्य में आसियान पर्यटकों की भारत में वृद्धि देखना चाहता हूं। इस संदर्भ में बौद्ध सर्किट व्यापक अवसर प्रदान करता है।

महानुभावों, हमने आर्थिक समृद्धि और अपने पर्यावरण की रक्षा पर काफी ध्यान दिया है। क्या हम अपने युवाओं की सुरक्षा और रक्षा पर भी समान ध्यान देते हैं? हमें आसियान देशों से उच्चस्तरीय सुरक्षा सहयोग मिला है, जिसके लिए मैं उनका आभारी हूं, लेकिन हमें भविष्य में आतंकवाद, चरमपंथ, मादक पदार्थों, हथियारों और काले धन जैसे मसलों से निपटने के लिए अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहिए।

महानुभावों, एशिया का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन यह कई चुनौतियों का भी सामना करता है। हमारी प्रगति और समृद्धि क्षेत्र की शांति और स्थिरता पर निर्भर करती है। दुनिया में परिवर्तन की लहर है और इस बदली हुई दुनिया में नई सच्चाइयां उभर कर सामने आ रही हैं। वैश्वीकरण जीवन का एक सच है। हम सभी इससे प्रभावित हैं और हम सभी इससे लाभान्वित भी हुए हैं।

विश्व में समुद्री व्यापार और यात्रा के संपर्कों को देखते हुए समुद्री सुरक्षा अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो चुकी है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम सभी समुद्री क्षेत्र के मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और मानदण्डों का पालन करें, जैसा कि हम वायु मार्ग के मामले में करते हैं। भविष्य में अंतरिक्ष में भी इसकी आवश्यकता होगी।

दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता के लिए, प्रत्येक को अंतर्राष्ट्रीय मानकों और नियमों का पालन करना चाहिए। इसमें समुद्र के कानून पर 1982 की संयुक्त राष्ट्र संधि भी शामिल है। हम यह भी आशा करते हैं कि 2002 के घोषणा-पत्र के दिशा-निर्देशों को सफलतापूर्वक लागू करेंगे और दक्षिण चीन सागर के मामले में आचार संहिता के आधार पर आम सहमति से जल्द ही निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

अंत में, मैं कहना चाहूंगा कि आप सभी से यहां मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। इससे आसियान देशों के साथ हमारे संबंधों के प्रति मेरा विश्वास और उत्साह दोगुना हो गया है।

मैं आसियान के साथ संबंधों के लिए आपको विश्वास दिलाता हूं कि इसे आगे बढ़ाने के प्रति मेरा व्यक्तिगत और निरंतर ध्यान बना रहेगा, ताकि हम इन संबंधों से अपनी उच्च अपेक्षाओं को पूरा कर सकें।

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May 14, 2021
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पश्चिम बंगाल के किसानों को पहली बार पीएम किसान योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ है
एमएसपी पर गेहूं की खरीद ने इस साल नए रिकॉर्ड बनाए हैं
सरकार पूरी ताकत से कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है

आप सभी किसान साथियों से ये चर्चा अपने आप में एक नई उम्‍मीद जगाती है, नया विश्‍वास पैदा करती है। आज जैसा अभी हमारे मंत्री जी श्रीमान नरेंद्र सिंह तोमर जी बता रहे थे आज भगवान बसवेश्वर जयंती है, परशुराम जयंती भी है। आज अक्षय तृतीया का भी पावन पर्व है। और मेरी तरफ से देशवासियों को ईद की भी मुबारक।

कोरोना के इस समय में समस्त देशवासियों का हौसला बढ़े, इस महामारी को परास्त करने का संकल्प और दृढ़ हो, इस कामना के साथ आप सब किसान भाईयों से जो मेरी बातचीत हुई है अब मैं इसको आगे बढ़ाउंगा। इस कार्यक्रम में उपस्थित कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र श्रीमान सिंह तोमर जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे अन्य सहयोगी गण, सभी मुख्यमंत्री, राज्य सरकारों के आदरणीय मंत्रिगण, सांसदगण, विधायकगण और देश भर के मेरे किसान भाईयों और बहनों,

आज बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय में हम ये संवाद कर रहे हैं। इस कोरोना काल में भी देश के किसानों, हमारे कृषि क्षेत्र मे अपने दायित्व को निभाते हुए, अन्न की रिकॉर्ड पैदावार की है, आप कृषि में नए-नए तरीके आजमा रहे हैं। आपके प्रयासों को पीएम किसान सम्मान निधि की एक और किश्त और मदद करने वाली है। आज अक्षय तृतीया का पावन पर्व है, कृषि के नए चक्र की शुरुआत का समय है और आज ही करीब 19 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर किए गए हैं। इसका लाभ करीब-करीब 10 करोड़ किसानों को होगा। बंगाल के किसानों को पहली बार इस सुविधा का लाभ मिलना शुरू हुआ है। आज बंगाल के लाखों किसानों को पहली किश्त पहुंची है। जैसे-जैसे राज्य से किसानों के नाम केंद्र सरकार को मिलेंगे, वैसे-वैसे लाभार्थी किसानों की संख्या और बढ़ती जाएगी।

 

साथियों,

पीएम किसान सम्मान निधि से विशेष रूप से छोटे और मझोले किसानों को अधिक लाभ हो रहा है। आज के कठिन समय में ये राशि इन किसान परिवारों के बहुत काम आ रही है। अभी तक इस योजना के तहत देश के लगभग 11 करोड़ किसानों के पास लगभग 1 लाख 35 हज़ार करोड़ रुपए पहुंच चुके हैं मतलब की सवा लाख करोड़ से भी ज्‍यादा सीधे किसानों के खाते में, कोई बिचौलिया नहीं। इनमें से सिर्फ कोरोना काल में ही 60 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंचे हैं। ज़रूरत के समय देशवासियों तक सीधी मदद पहुंचे, तेज़ी से पहुंचे, जिसको ज़रूरत है, उस तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे, यही सरकार का निरंतर प्रयास है।

भाइयों और बहनों,

तेजी से, सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाने का ये काम उपज की सरकारी खरीद में भी बहुत व्यापक स्केल पर किया जा रहा है। कोरोना की मुश्किल चुनौतियों के बीच जहां किसानों ने कृषि और बागबानी में रिकॉर्ड उत्पादन किया है, वहीं सरकार भी हर साल MSP पर खरीद के नए-नए रिकॉर्ड बना रही है। पहले धान की और अब गेहूं की भी रिकॉर्ड खरीद हो रही है। इस वर्ष, अभी तक बीते वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक गेहूं एमएसपी पर खरीदा जा चुका है। अभी तक गेहूं की खरीद का लगभग 58 हज़ार करोड़ रुपए सीधे किसानों के खाते में पहुंच चुका है। सबसे बड़ी बात ये कि अब किसान जो उपज मंडी में बेच रहा है, उसको अब अपने पैसे के लिए लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ता, परेशान नहीं होना पड़ता। किसान के हक का पैसा सीधा उसके बैंक खाते में जमा हो रहा है। मुझे संतोष है कि पंजाब और हरियाणा के लाखों किसान पहली बार डायरेक्ट ट्रांसफर की इस सुविधा से जुड़े हैं। अभी तक पंजाब के किसानों के बैंक खाते में करीब 18 हज़ार करोड़ रुपए, और हरियाणा के किसानों के बैंक खाते में 9 हज़ार करोड़ रुपए सीधे उनके बैंक अकाउंट में जमा हो चुके हैं। अपना पूरा पैसा अपने बैंक खाते में पाने का संतोष क्या होता है ये पंजाब और हरियाणा के किसान भी अनुभव भी कर रहे हैं और मुखर हो कर बोल भी रहे हैं। मैंने सोशल मीडिया में इतने वीडियो देखें हैं किसानों के खासकर के पंजाब के किसानों के कि इस प्रकार से उनको पैसा पहुंचाना और वो भी पूरा-पूरा पैसा पहुंचाना उसका संतोष इतने उमंग के साथ वो बता रहे हैं।

साथियों,

खेती में नए समाधान, नए विकल्प देने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। जैविक खेती को बढ़ावा देना ऐसा ही प्रयास है। इस प्रकार की फसलों में लागत भी कम है, ये मिट्टी और इंसान के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है और इनकी कीमत भी ज्यादा मिलती हैं। थोड़ी देर पहले इस प्रकार की खेती में जुटे देशभर के कुछ किसानों से मेरी बातचीत भी हुई है। उनके हौसले, उनके अनुभवों को जानकर मैं बहुत उत्साहित हूं। आज गंगा जी के दोनों ओर करीब 5 किलोमीटर के दायरे में जैविक खेती को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि वो जो खेत में उपयोग किया गया केमिकल है, बारिश के समय जो पानी बहकर के गंगा जी में न चला जाए और गंगा जी प्रदूषित न हों, इसलिए गंगा जी के दोनों तट के 5-5 किलोमीटर के करीब-करीब ये जैविक उत्‍पादक को विशेष बल दिया जा रहा है। ये जैविक उत्पाद नमामि गंगे के ब्रांड के साथ बाज़ार में उपलब्ध किए जा रहे हैं। इसी तरह भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति को, उसको भी व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ-साथ सरकार की ये निरंतर कोशिश है कि छोटे और सीमांत किसानों को बैंकों से सस्ता और आसान ऋण मिले। इसके लिए बीते डेढ़ साल से किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान 2 करोड़ से ज्यादा किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं। इन कार्ड्स पर किसानों ने 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का ऋण बैंकों से लिया है। इसका बहुत बड़ा लाभ पशुपालन, डेयरी और मछली पालन से जुड़े किसानों को भी मिलना शुरू हुआ है। अभी हाल ही में सरकार ने एक और अहम फैसला लिया है और मैं चाहूंगा कि मेरे किसान भाईयों-बहनों को ये सरकार के निर्णय से खुशी होगी, उनके लिए ये बहुत लाभकर्ता होगा। सरकार ने निर्णय किया है कि कोरोना काल को देखते हुए, KCC ऋण के भुगतान या फिर नवीनीकरण की समय सीमा को बढ़ा दिया गया है। ऐसे सभी किसान जिनका ऋण बकाया है, वो अब 30 जून तक ऋण का नवीनीकरण कर सकते हैं। इस बढ़ी हुई अवधि में भी किसानों को 4 प्रतिशत ब्याज पर जो ऋण मिलता है, जो लाभ मिलता है, वो लाभ भी चालू रहेगा, मिलता रहेगा।

साथियों,

गांव का, किसान का कोरोना के विरुद्ध भारत की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान रहा है। ये आपके ही श्रम का परिणाम है कि आज इस कोरोना काल में भारत दुनिया की सबसे बड़ी मुफ्त राशन की योजना चला रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से पिछले वर्ष आठ महीने तक गरीबों को मुफ्त राशन दिया गया था। इस बार मई और जून महीने में देश के 80 करोड़ से ज्यादा साथियों को राशन मिले, इसका प्रबंध किया गया है। इस पर भी केंद्र सरकार 26 हजार करोड़ रुपए, हमारे गरीब के घर में चूल्‍हा जले, इसलिए खर्च कर रही है। मैं राज्य सरकारों से आग्रह करूंगा कि गरीबों को इस राशन के वितरण में कोई परेशानी ना आए, ये सुनिश्‍चत करें।

साथियों,

100 साल बाद आई इतनी भीषण महामारी कदम-कदम पर दुनिया की परीक्षा ले रही है। हमारे सामने एक अदृश्य दुश्मन है और ये दुश्‍मन बहुरूपिया भी है और इस दुश्‍मन के कारण, इस कोरोना वायरस के कारण हम अपने बहुत से करीबियों को खो चुके हैं। बीते कुछ समय से जो कष्ट देशवासियों ने सहा है, अनेकों लोग जिस दर्द से गुजरे हैं, तकलीफ से गुजरे हैं, वो मैं भी उतना ही महसूस कर रहा हूं। देश का प्रधान सेवक होने के नाते, आपकी हर भावना का मैं सहभागी हूं। कोरोना की सेकेंड वेव से मुकाबले में, संसाधनों से जुड़े जो भी गतिरोध थे, वो तेजी से दूर किए जा रहे हैं। युद्ध स्‍तर पर काम करने के प्रयास हो रहा है। आपने देखा होगा, सरकार के सभी विभाग, सारे संसाधन, हमारे देश के सुरक्षा बल, हमारे साइंटिस्ट, हर कोई दिन रात कोविड की चुनौती का मुकाबला करने में एकजुट है। देश के अलग-अलग हिस्सों में तेजी के साथ कोविड अस्पताल बन रहे हैं, नई टेक्नोलॉजी से ऑक्सीजन प्लांट लगाये जा रहे हैं। हमारी तीनों सेनाएं- वायुसेना, नेवी, आर्मी सभी पूरी शक्‍ति से इस काम में जुटे हैं। ऑक्सीजन रेल, इसने कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई को बहुत बड़ी ताकत दी है। देश के दूर-सुदूर हिस्सों में ये स्पेशल ट्रेन्स, ये ऑक्‍सीजन रेल ऑक्सीजन पहुंचाने में जुटीं हैं। ऑक्सीजन टैंकर्स ले जाने वाले ट्रक ड्राइवर्स, बिना रुके काम कर रहे हैं। देश के डॉक्टर्स हों, नर्सिंग स्टाफ हो, सफाई कर्मचारी हों, एंबुलेंस के ड्राइवर्स हों, लैब में काम करने वाले सज्‍जन हों, सैंपल कलेक्ट करने वाले हों, एक-एक जीवन को बचाने के लिए चौबीसों घंटे जुटे हुए हैं। आज देश में जरूरी दवाइयों की आपूर्ति बढ़ाने पर युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। सरकार और देश के फार्मा सेक्टर ने पिछले कुछ दिनों में जरूरी दवाइयों का उत्पादन कई गुना बढ़ाया है। बाहर से भी दवाइयां मंगवाई जा रही हैं। इस संकट के समय में, दवाइयों और जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में भी कुछ लोग अपने निहित स्‍वार्थ के कारण लगे हुए हैं। मैं राज्य सरकारों से आग्रह करूंगा कि ऐसे लोगों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। ये मानवता के खिलाफ का कृत्‍य है। भारत हिम्मत हारने वाला देश नहीं है। न भारत हिम्मत हारेगा और न कोई भारतवासी हिम्मत हारेंगे। हम लड़ेंगे और जीतेंगे।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम में, मैं देश के सभी किसानों को, गांव में रहने वाले सभी भाइयों-बहनों को कोरोना से फिर सतर्क करना चाहता हूं। ये संक्रमण अभी गांव में भी तेजी से पहुंच रहा है। देश की हर सरकार इससे निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसमें गांव के लोगों की जागरूकता, हमारी पंचायती राज से जुड़ी जो भी व्यवस्थाएं हैं, उनका सहयोग, उनकी भागीदारी उतनी ही आवश्यक है। आपने देश को कभी निराश नहीं किया है, इस बार भी आपसे यही अपेक्षा है। कोरोना से बचाव के लिए आपको खुद पर, अपने परिवार पर, सामाजिक स्तर पर जो भी ज़रूरी कदम हैं, आवश्‍यकताएं हैं, उसे हमें उठाने ही हैं। मास्क लगातार पहनना बहुत ज़रुरी है। वो भी ऐसा पहनना है कि नाक और मुंह पर पूरी तरह से ढका रहे। दूसरी बात, आपको किसी भी प्रकार के खांसी, सर्दी ज़ुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त, जैसे लक्षणों को सामान्य मान कर नहीं चलना है। पहले तो खुद को यथासंभव दूसरों से अलग करना है। फिर जल्द से जल्द कोरोना टेस्ट करना है। और जब तक रिपोर्ट ना आए तब तक डॉक्टरों ने जो दवा बताई हैं, वो ज़रूर लेते रहना है।

साथियों,

बचाव का एक बहुत बड़ा माध्यम है, कोरोना का टीका। केंद्र सरकार और सारी राज्य सरकारें मिलकर ये निरंतर प्रयास कर रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा देशवासियों को तेज़ी से टीका लग पाए। देशभर में अभी तक करीब 18 करोड़ वैक्सीन डोज दी जा चुकी है। देशभर के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है। इसलिए जब भी आपकी बारी आए तो टीका ज़रूर लगाएं। ये टीका हमें कोरोना के विरुद्ध सुरक्षा कवच देगा, गंभीर बीमारी की आशंका को कम करेगा। हां, टीका लगाने के बाद भी मास्क और दो गज़ की दूरी के मंत्र को अभी हमें छोड़ना नहीं है। एक बार फिर सभी किसान साथियों को मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !