कच्छ का सफेद रण आपको आमंत्रित कर रहा है।

कच्छ के इस उत्सव पर्व से जुड़कर एक नए अनुभव के साक्षी बनिए।

और रण के इस उत्सव में प्रकृति, परंपरा और प्रचीनता के रंगों को जीवन का हिस्सा बनाइए।

भारत के सबसे पश्चिमी छोर पर स्थित कच्छ, विरासत और बहुसंस्कृति की भूमि है। कच्छ का सफेद रण और इसकी जीवंतता किसी का भी मन मोह लेती है। चांदनी रात में कच्छ के इस रण का अनुभव और अलौकिक हो जाता है, दिव्य हो जाता है। कच्छ की ये धरती जितनी सुंदर है, इसकी कला और शिल्प भी उतना ही विशेष है।

कच्छ के लोगों का आतिथ्य भाव तो सारी दुनिया जानती है। हर वर्ष लाखों पर्यटक इस धरती पर आते हैं और कच्छ के लोग उतने ही उत्साह से उनका स्वागत करते हैं। अतिथियों के सम्मान और उनके अनुभवों को संवारने के लिए कच्छ का हर परिवार पूरे आदर भाव से काम करता है। रण उत्सव, कच्छ की इसी आतिथ्य परंपरा और स्थानीय कला का उत्सव है। इस जीवंत उत्सव में, हमें इस क्षेत्र की अनोखी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, स्थानीय जनभावनाओं और कलाओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

इस पोस्ट के माध्यम से मैं विश्व भर के अतिथियों को रण उत्सव 2024-25 के लिए व्यक्तिगत आमंत्रण दे रहा हूं। आप सब अपने परिवार के साथ यहां आएं, यहां की संस्कृति और अनुभवों से जुड़ें, तो मुझे बहुत प्रसन्नता होगी। इस बार रण उत्सव 1 दिसंबर 2024 से लेकर 28 फरवरी 2025 तक आयोजित हो रहा है। इसके अलावा रण की टेंट सिटी मार्च 2025 तक पर्यटकों के लिए खुली रहेगी।

ये टेंट सिटी आपको कच्छ के अनुभवों से, यहां के विराट आतिथ्य से, भारत की संस्कृति से और प्रकृति के नए अनुभवों से जोड़ेगी। मैं पूरे विश्वास से कहता हूं, कच्छ के रण उत्सव का अनुभव आपके जीवन का सबसे अलौकिक और अविस्मरणीय अनुभव बनेगा।

कच्छ की इस टेंट सिटी में पर्यटकों के अनुरूप अनेक सुविधाओं को शामिल किया गया है। जो लोग रिलैक्स करने के लिए यहां आ रहे हैं, उन्हें यहां एक अलग अनुभव मिलेगा। संस्कृति और इतिहास के नए रंगों को खोज रहे लोगों के लिए, रण उत्सव एक इंद्रधनुष जैसा होगा।

देखिए, रण उत्सव की गतिविधियों का आनंद लेने के अलावा आप यहां और क्या-क्या कर सकते हैं:

सिंधु घाटी की सभ्यता से जुड़ा भारत का गौरव स्थल धोलावीरा यहीं पास में स्थित है। ये यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, जहां आपको भारत की प्राचीन सभ्यता से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

जिन लोगों को प्रकृति और स्थापत्य कला से प्रेम हो, उनके लिए काला डूंगर का विजय विलास पैलेस एक अद्भुत अनुभव का स्थान होगा।

सफेद नमक के मैदानों से घिरी रोड टू हैवन, अपने मनोरम दृश्यों से हर पर्यटक का मन मोह लेती है। 30 किलोमीटर लंबी ये सड़क खावड़ा और धोलावीरा को आपस में जोड़ती है और इसपर यात्रा करना बहुत ही खास अनुभव होता है।

18वीं शताब्दी का लखपत फोर्ट हमें प्राचीन भारत के गौरव से जोड़ता है।

माता नो मढ़ आशापुरा मंदिर कच्छ की धरती पर हमारी आध्यात्मिक चेतना का शक्ति तीर्थ बन जाता है।

श्यामजी कृष्ण वर्मा स्मारक और क्रांति तीर्थ पर श्रद्धांजलि अर्पित करके अपने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ सकते हैं।

और इन सब के साथ, रण उत्सव कच्छ की इस यात्रा में आप हस्तशिल्प के एक अद्भुत संसार से जुड़ सकते हैं। इस हस्तशिल्प मेले में हर उत्पाद की एक अलग पहचान है। ये उत्पाद कच्छ के लोगों की कलाओं से पूरी दुनिया को जोड़ते हैं।

कुछ समय पहले ही मुझे स्मृति वन के लोकार्पण का उत्सव मिला था। जिन लोगों ने 26 जनवरी 2001 के विनाशकारी भूकंप में अपना जीवन बनाया, ये उनकी स्मृतियों का स्मारक है। यहां दुनिया का सबसे खूबसूरत संग्रहालय है, जिसे 2024 का UNESCO Prix Versailles Interiors World Title मिला है! यह भारत का एकमात्र ऐसा संग्रहालय है, जिसे यह विशेष उपलब्धि हासिल हुई है। यह स्मारक हमें हमेशा याद दिलाता है कि कैसे बहुत विपरीत और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी हमारा मन, हमारी भावनाएं हमें फिर से आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

तब और अब को बताने वाली तस्वीर:

करीब दो दशक पहले स्थितियां ऐसी थीं कि अगर आपको कच्छ आने का निमंत्रण मिलता, तो आप सोचते कि कोई मजाक कर रहा है। कारण ये था कि तब तक भारत के सबसे बड़े जिलों में से एक होने के बावजूद भी, कच्छ बहुत बेहाल स्तिथि में था। ये स्थितियां तब थीं, जब कच्छ में एक तरफ रेगिस्तान था, दूसरी तरफ पाकिस्तान था। लेकिन सुरक्षा और पर्यटन दोनों ही क्षेत्र में ये स्थान पिछड़ा हुआ था।

कच्छ ने 1999 में चक्रवात और 2001 में भीषण भूकंप का सामना किया था। यहां सूखे की समस्या रहती थी। खेती के पर्याप्त साधन नहीं थे। यही कारण था कि अन्य लोग इसके अच्छे भविष्य की सोच तक नहीं पाते थे।। लेकिन वो नहीं जानते थे कि कच्छ के लोगों की ऊर्जा, उनकी इच्छा शक्ति क्या है। दो दशकों में अपनी मेहनत से, कच्छ के लोगों ने अपना भाग्य बदला। 21वीं शताब्दी के शुरुआत से कच्छ में एक परिवर्तन की भी शुरुआत हुई।

हम सबने मिलकर कच्छ के समावेशी विकास पर काम किया। हमने Disaster Resilient Infrastructure बनाने पर फोकस किया। इसके साथ ही यहां ऐसी आजीविका पर जोर दिया, जिससे यहां के युवाओं को काम की तलाश में अपना घर ना छोड़ना पड़े।

यही कारण है कि 21वीं सदी के पहले दशक के अंत तक जो धरती सूखे के लिए जानी जाती थी, वह आज कृषि के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियों के पड़ाव पर है। यहां के आम सहित कई फल विदेशी बाजार में एक्सपोर्ट हो रहे हैं। कच्छ के हमारे किसान भाई-बहनों ने ड्रिप सिंचाई और अन्य तकनीकों से खेती को बहुत समृद्ध किया है। इससे पानी की हर बूंद के संरक्षण के साथ अधिकतम उत्पादकता सुनिश्चित हुई है।

गुजरात सरकार के औद्योगिक विकास पर जोर देने से इस जिले में निवेश को भी काफी बढ़ावा मिला है। हमने कच्छ के तटीय क्षेत्र का उपयोग करके इसे एक महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार केंद्र के रूप में फिर से स्थापित करने का काम किया।

कच्छ में पर्यटन की संभावनाओं को और विस्तार देने के लिए 2005 में कच्छ रण उत्सव की शुरुआत की गई थी। आज यह स्थान एक Vibrant Tourism Centre बन चुका है। रण उत्सव को देश-विदेश के कई अवॉर्ड्स मिल चुके हैं।

हर साल धोरडो गांव में रण उत्सव का आयोजन होता है। ये प्रसन्नता और गर्व की बात है कि इस गांव को United Nations World Tourism Organization ने 2023 का बेस्ट टूरिज्म विलेज घोषित किया। इस गांव की संस्कृति, पर्यटन और यहां हुआ विकास हर देशवासी को गौरव से भर देता है।

मुझे विश्वास है कि आप सब भी, कच्छ की विरासत भूमि को देखने यहां आएंगे और अपनी इस यात्रा के अनुभवों से दूसरों को भी यहां आने की प्रेरणा देंगे। जब आप इन अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा करेंगे, तो पूरा विश्व भी इनसे जुड़ेगा। इस संस्कृति और आतिथ्य के भाव को जी सकेगा।

इसी आमंत्रण के साथ, मैं आप सभी को नववर्ष 2025 के लिए भी शुभकामनाएं देता हूं। आने वाला साल आपके और आपके परिवार के लिए सफलता, समृद्धि और आरोग्यपूर्ण जीवन लेकर आए, यही प्रार्थना है।

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इटली और भारत: इंडो-मेडिटेरेनियन के लिए एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
May 20, 2026

भारत और इटली के बीच संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी आई है और यह सौहार्दपूर्ण मित्रता से आगे बढ़कर स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य को लेकर साझा विजन पर आधारित एक सच्ची स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में बदल गए हैं।

ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गहरे बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संवाद से आगे बढ़ रही है और अब एक नए तथा व्यापक आयाम हासिल कर रही है, जो हमारी आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यतागत समझ को साथ जोड़ती है। हमारा सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात से तय होगी कि देश इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन के प्रबंधन और स्ट्रैटेजिक संप्रभुता को मजबूत करने में कितने सक्षम हैं। इसी उद्देश्य से हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा डाइवर्स बनाने का संकल्प लिया है, ताकि नए लक्ष्यों को हासिल किया जा सके और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का बेहतर उपयोग हो सके। हमारा लक्ष्य इटली की डिजाइन क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस और वर्ल्ड-क्लास सुपरकंप्यूटर्स, जो उसे एक इंडस्ट्रियल पावरहाउस बनाते हैं, को भारत की तेज आर्थिक ग्रोथ, इंजीनियरिंग टैलेंट, बड़े पैमाने की क्षमता, इनोवेशन और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न तथा 2 लाख स्टार्ट-अप वाले एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम के साथ जोड़कर मजबूत तालमेल बनाना है। यह केवल साधारण इंटीग्रेशन नहीं, बल्कि ऐसा साझा वैल्यू क्रिएशन है जिसमें दोनों देशों की औद्योगिक ताकतें एक-दूसरे को और मजबूत बनाती हैं।

यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों दिशाओं में ट्रेड और इनवेस्टमेंट बढ़ाने का रास्ता खोलता है। हमारा लक्ष्य 2029 तक इटली और भारत के बीच 20 बिलियन यूरो के ट्रेड टारगेट को हासिल करना और उससे आगे निकलना है। इसके लिए डिफेंस और एयरोस्पेस, क्लीन टेक्नोलॉजी, मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, केमिकल्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, एग्री-फूड, टूरिज्म समेत कई सेक्टर्स पर फोकस किया जाएगा।

“मेड इन इटली” हमेशा से पूरी वर्ल्ड में एक्सीलेंस का प्रतीक रहा है और आज इसकी स्वाभाविक साझेदारी “मेक इन इंडिया” पहल के हाई-क्वालिटी लक्ष्यों के साथ बन रही है। इस संदर्भ में भारत के लिए प्रोडक्शन को लेकर इटली की कंपनियों की बढ़ती रुचि और इटली में भारतीय इंडस्ट्री की बढ़ती मौजूदगी, जिनकी संख्या अब दोनों तरफ से 1,000 से ज्यादा हो चुकी है, एक सकारात्मक संकेत है जो हमारी सप्लाई चेन के इंटीग्रेशन को और मजबूत करेगा।

टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन हमारी साझेदारी के केंद्र में है। आने वाले दशकों को ऐसी टेक्नोलॉजिकल क्रांति आकार देगी जिसका दायरा बेहद व्यापक होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में तेज प्रगति शामिल है। भारत का डायनामिक इनोवेशन इकोसिस्टम, हाई स्किल्ड प्रोफेशनल टैलेंट पूल और इटली की एडवांस्ड इंडस्ट्रियल क्षमताएं इन सेक्टर्स में हमारे सहयोग को स्वाभाविक और रणनीतिक बनाती हैं। हमारी यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स के बीच बढ़ती साझेदारी भी इसे मजबूत आधार देगी।

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही बड़ी संख्या में देशों, खासकर ग्लोबल साउथ में, अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हमारे समाज और ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रही है। इटली और भारत लंबे समय से यह सुनिश्चित करने के लिए साथ काम कर रहे हैं कि AI डेवलपमेंट जिम्मेदारीपूर्ण और मानव-केंद्रित हो। इसी नजरिये से भारत और इटली AI को समावेशी विकास के एक मजबूत माध्यम के रूप में भी देखते हैं, खासकर ग्लोबल साउथ के लिए, जहां डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुलभ बहुभाषी टेक्नोलॉजी विभाजन बढ़ाने के बजाय उसे कम कर सकती हैं। टेक्नोलॉजी के केंद्र में इंसान को रखने वाले भारत के MANAV विजन और मानवीय परंपरा पर आधारित मानव-केंद्रित “एल्गोर-एथिक्स” को बढ़ावा देने में इटली की अग्रणी भूमिका के आधार पर हमारी साझेदारी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि AI सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बने। हमारा दृष्टिकोण भारत की डिजिटल क्षमता को इटली की एथिकल और इंडस्ट्रियल विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है, ताकि टेक्नोलॉजी मानव गरिमा की सेवा करे। सुरक्षित डिजिटल सहयोग, कैपेसिटी बिल्डिंग और मजबूत साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बेस्ट प्रैक्टिसेज को साझा करते हुए हमारा लक्ष्य ऐसा स्वतंत्र, भरोसेमंद और समान अवसर वाला डिजिटल स्पेस तैयार करना है, जिसमें हर देश AI को आकार देने और उससे लाभ उठाने में सक्षम हो। यही दृष्टिकोण इटली की G7 प्रेसीडेंसी और नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के निष्कर्षों के केंद्र में है। AI को इंसानों द्वारा इंसानों के लिए बनाए गए एक माध्यम के रूप में देखने का मतलब यह स्पष्ट करना है कि टेक्नोलॉजी न तो लोगों की जगह ले सकती है, न उनके मौलिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है और न ही इसका इस्तेमाल जनमत को प्रभावित करने या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बदलने के लिए होना चाहिए। तेजी से जुड़ती दुनिया में स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा को लेकर हमारा दृष्टिकोण इसी चुनौती पर आधारित है।

हमारा सहयोग स्पेस सेक्टर तक भी फैला हुआ है। स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में भारत की प्रभावशाली प्रगति, साथ ही एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में इटली की उत्कृष्ट क्षमता, संयुक्त पहलों और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है।

सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी देशों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी बनी हुई हैं। इटली और भारत डिफेंस, सिक्योरिटी और स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। हमारा सहयोग महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क, ड्रग तस्करी, साइबर क्राइम और मानव तस्करी जैसे खतरों के खिलाफ मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।

एनर्जी हमारी साझेदारी का एक और प्रमुख स्तंभ है। डाइवर्सिफाइड एनर्जी सोर्सेज की ओर बढ़ रहे ग्लोबल ट्रांजिशन के लिए इनोवेशन, इनवेस्टमेंट और सहयोग की जरूरत है। भारत और इटली रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी तक, और स्मार्ट ग्रिड से लेकर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने की भारत की पहल जहां अपार संभावनाएं प्रदान करती है, वहीं यह रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में इटली की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और यूरोप के लिए एनर्जी गेटवे के रूप में उसकी रणनीतिक भूमिका के साथ पूरी तरह मेल खाती है। इस संदर्भ में भारत की अगुवाई वाली प्रमुख पहलों, इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस (GBA) में अन्य देशों के साथ हमारा सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

फिजिकल, डिजिटल और मानवीय कनेक्टिविटी वह कड़ी है जो हमें एक साथ जोड़ती है। भारत और इटली दोनों ग्लोबल अर्थव्यवस्था के दो अहम केंद्रों, इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन, के मध्य स्थित हैं। इन क्षेत्रों को अलग-अलग दायरों के रूप में नहीं, बल्कि तेजी से एक-दूसरे से जुड़ते हुए क्षेत्रों के रूप में देखा जाना चाहिए।

दरअसल, हम उस उभरते हुए “इंडो-मेडिटेरेनियन” को देख रहे हैं, जो ट्रेड, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, डेटा और विचारों का एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनता जा रहा है, जो हिंद महासागर को यूरोप से जोड़ता है। इसी आपस में जुड़े हुए क्षेत्र में हमारे संबंध स्वाभाविक रूप से एक विशेष स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में विकसित हो रहे हैं, जो दो महाद्वीपों को जोड़ते हुए नई ग्लोबल डायनामिक्स को आकार दे रही है।

इसी संदर्भ में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे क्षेत्रों को मॉडर्न ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल नेटवर्क, एनर्जी सिस्टम और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए जोड़ने की एक दूरदर्शी पहल है। भारत और इटली इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

हम अपनी साझा चुनौतियों का समाधान दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी और दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में “धर्म” की अवधारणा उस जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है, जो हमारे कार्यों का आधार बननी चाहिए, जबकि “वसुधैव कुटुम्बकम”, यानी “पूरी दुनिया एक परिवार है”, का सिद्धांत आज के आपस में जुड़े डिजिटल युग में गहराई से प्रतिध्वनित होता है। ऐसे मूल्य इटली की पुनर्जागरण काल से जुड़ी मानवतावादी परंपरा में भी स्वाभाविक रूप से दिखाई देते हैं, जो हर व्यक्ति की गरिमा और समाजों तथा लोगों को जोड़ने में संस्कृति की शक्ति को महत्व देती है।

इसलिए हमारा साझा विजन लोगों को केंद्र में रखकर मजबूत और भविष्योन्मुखी भारत-इटली साझेदारी की नींव रखना है।

(लेखक: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी)