देश में जमीनी स्तर पर खेलों को पुनर्जीवित करने के मकसद से #KheloIndia कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है 
#KheloIndia कार्यक्रम के तहत प्राथमिकता वाले खेलों में प्रतिभावान खिलाड़ियों को 8 साल तक हर साल 5 लाख रुपए की वित्तीय मदद दी जाएगी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 31 जनवरी, 2018 को नई दिल्‍ली के इंदि‍रा गांधी स्‍टेडियम में स्‍कूली खेलों के प्रथम ‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम का उद्देश्‍य जमीनी स्‍तर पर खेल संस्‍कृति को पुनर्जीवित करना है। इसके लिए देश में खेले जाने वाले सभी खेलों के लिए एक मजबूत संरचना का निर्माण किया जाएगा ताकि भारत खेलों में एक अग्रणी राष्‍ट्र के रूप में स्‍थापित हो सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के विजन को ध्‍यान में रखते हुए ‘खेलो इंडिया’ स्‍कूलों में युवा खेल प्रतिभाओं की पहचान करेगा और उन्‍हें भविष्‍य के चैम्पियन के रूप में विकसित करने में सहायता प्रदान करेगा।

एक उच्‍च स्‍तरीय समिति युवा खेल प्रतिभाओं की पहचान करेगी और उन्‍हें आठ सालों तक पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

‘खेलो इंडिया’ का आयोजन 31 जनवरी से 8 फरवरी, 2018 तक नई दिल्‍ली में किया जाएगा। 17 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को निम्‍न 16 खेलों के लिए आमंत्रित किया गया है- तीरंदाजी, एथलेटिक्‍स, बैडमिंटन, बास्‍केटबॉल, मुक्‍केबाजी, फुटबॉल, जिमनास्टिक्‍स, हॉकी, जूडो, कबड्डी, खो-खो, निशानेबाजी, तैराकी, वॉलीबॉल, भारोत्तोलन, कुश्‍ती। इस आयोजन से भारत की युवा खेल प्रतिभाएं उभरकर सामने आएंगी और इससे देश की खेल शक्ति का भी पता चलेगा।

‘खेलो इंडिया’ स्‍कूली खेलों में 199 स्‍वर्ण पदक, 199 रजत पदक और 275 कॉस्‍य पदक दिए जाएंगे। 17 वर्ष से कम आयु के देश की बेहतरीन खेल प्रतिभाएं इस आयोजन में हिस्‍सा लेंगी।

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प्रधानमंत्री ने सत्य की विजय पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
March 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने उन सभी महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने वर्ष 1930 में आज ही के दिन शुरू हुए दांडी मार्च में भाग लिया था।

प्रधानमंत्री ने सत्य की विजय पर बल देने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को भी साझा किया:

“सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।

येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥”

सुभाषितम् का संदेश है कि सत्य की सदैव विजय होती है और असत्य अंततः नष्ट हो जाता है। इसलिए, उसी मार्ग का अनुसरण करना चाहिए जिस पर चलकर ऋषियों ने परमानंद प्राप्त किया और परम सत्य को जाना।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्‍ट में लिखा;

“सन् 1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण!

सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।

येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥”