प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बैंकॉक में आसियान/ईएएस संबंधित बैठकों के दौरान 3 नवंबर 2019 को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति महामहिम जोको विडोडो से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के रूप में दूसरे कार्यकाल की शुरुआत पर राष्ट्रपति विडोडो को बधाई दी और बताया कि विश्व के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक और बहुसंख्यक समाजों के रूप में, भारत इंडोनेशिया के साथ प्रतिरक्षा, सुरक्षा, संपर्क, व्यापार और निवेश तथा लोगों का लोगों के साथ परस्पर विनिमय के क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह देखते हुए कि भारत और इंडोनेशिया करीबी समुद्री पड़ोसी हैं, दोनों नेताओं ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग पर अपना साझा विजन अर्जित करने हेतु शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए एक साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने चरमपंथ और आतंकवाद के खतरे पर चर्चा की और इस खतरे से निपटने के लिए द्विपक्षीय और वैश्विक स्तर पर घनिष्ठतापूर्वक काम करने पर सहमति व्यक्त की।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने पर दूरदर्शितापूर्ण चर्चा की और दवा, मोटर वाहन और कृषि उत्पादों सहित भारतीय वस्तुओं के लिए अधिक बाजार पहुंच की आवश्यकता को रेखांकित किया। यह देखते हुए कि भारतीय कंपनियों ने इंडोनेशिया में पर्याप्त निवेश किया है, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इंडोनेशिया की कंपनियों को निवेश के लिए भारत में प्रस्तुत अवसरों का उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राष्ट्रपति विडोडो को अगले वर्ष पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

भारत इंडोनेशिया, जिसके साथ हम एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं, के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को उच्च प्राथमिकता देता है। इस वर्ष, भारत और इंडोनेशिया कूटनीतिक संबंधों की स्थापना की 70 वीं वर्षगांठ भी मना रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ सेवा और करुणा की भावना को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 06, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसे कार्य न सिर्फ आत्मिक खुशी प्रदान करते हैं, बल्कि समाज के कल्याण में भी योगदान देते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”

सुभाषितम् यह संदेश देता है कि किसी भी जीव के प्रति मन, वचन और कर्म से द्वेष न रखना, सभी के प्रति करुणा भाव रखना और उदारतापूर्वक दान करना—इन्हें आचरण का सर्वोच्च रूप माना गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। इससे आत्मिक खुशी तो मिलती ही है, समाज का भी कल्याण होता है।

अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”