सेशेल्स की सफल और ऐतिहासिक यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय यात्रा के लिए 11 मार्च की शाम मॉरीशस पहुंचे। श्री मोदी का हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से एवं समारोहपूर्ण स्वागत किया गया। मॉरीशस के प्रधानमंत्री सर अनिरूद्ध जगन्‍नाथप्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद थे। हमेशा की तरह उन्होंने ट्विटर पर अपने सभी प्रशंसकों के साथ खुशी के पल साझा किये।

शाम में श्री नरेन्द्र मोदी ने मॉरीशस के राष्ट्रपति श्री राकेश्वर प्रयाग और अन्य प्रतिनिधियों के साथ व्यापक बैठक की।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ मीडिया को संबोधित किया। श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और मॉरीशस दोनों के विशेष एवं ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला। 12 मार्च को मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किये जाने पर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत और मॉरीशस एक दूसरे के समर्थन और एकजुटता के लिए सदा तैयार रहते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अगालेगा द्वीप के विकास पर समझौते को बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में भारत-मॉरीशस सहयोग में एक बड़ा कदम बताया। 

12 मार्च को प्रधानमंत्री ने गंगा तालाब जाकर अपने दिन की शुरुआत की। श्री मोदी ने वहां पहुँचते ही वाराणसी की पवित्र नदी गंगा को याद किया। उन्होंने हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने के लिए भी मॉरीशस की सराहना की।

श्री नरेन्द्र मोदी ने मॉरीशस के लोगों को उनके राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर बधाई दी। इसी दिन उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में मॉरीशस के नेशनल असेंबली को संबोधित करने का मौका मिलने पर अपनी खुशी भी जताई।

नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि मॉरीशस ने हमेशा बेहतरीन चयन किये हैं; कड़ी मेहनत और उद्यम को प्रोत्साहित किया है। 2003 में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा समर्थित पहले साइबर सिटी के निर्माण के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस में ऐसे ही एक दूसरे शहर के लिए सहयोग करने की घोषणा की। श्री मोदी ने प्रसन्नतापूर्वक कहा कि भारत और मॉरीशस का भाग्य हिंद महासागर की धाराओं से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री ने आशा जताई कि भारत-मॉरीशस संबंध हमेशा से दोनों देशों के लिए अत्यंत खुशी और शक्ति का स्रोत रहेगा।

हिंद महासागर क्षेत्र को दोनों राष्ट्रों की प्रमुख नीति की प्राथमिकताओं में से एक बताते हुए प्रधानमंत्री ने यह संतोष व्यक्त किया कि भारत मॉरीशस का एक महत्वपूर्ण साथी है और भारत के लिए यह एक गर्व की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस के राष्ट्रीय तटरक्षक बल में शामिल हुए बाराकुडा पोत के जलावतरण कार्यक्रम में भाग लिया।

श्री नरेन्द्र मोदी ने बहादुर आप्रवासियों को उनके मानवीय मनोभाव के लिए श्रद्धांजलि अर्पित किया और आप्रवासी घाट को भारत और मॉरीशस के बीच स्थायी लिंक भी बताया।

श्री नरेन्द्र मोदी के सम्मान में नागरिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया था। एक साथ बड़ी संख्या में लोग भारतीय प्रधानमंत्री को देखने और उन्हें सुनने के लिए एकत्र हुए। वहाँ भारी बारिश हो रही थी लेकिन इससे लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। बारिश वाले मौसम में लोग प्रधानमंत्री का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। प्रधानमंत्री के पहुंचने के बाद लोग “मोदी मोदी” बोल रहे थे। श्री मोदी खुद इस तरह की विशाल जनसभा को देख कर अचंभित थे।

12 मार्च की शाम में श्री नरेन्द्र मोदी मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मेहमान के रूप में शामिल हुए। तीन देशों की अपनी यात्रा के तहत श्रीलंका के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने मॉरीशस के लोगों को सौहाद्र आतिथ्य और भरपूर प्यार एवं स्नेह देने के लिए धन्यवाद दिया।

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प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 21, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि नदियों का अविरल प्रवाह हमें सिखाता है कि हम किस प्रकार अपनी क्षमताओं का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नि:स्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।

इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”

इस सुभाषितम् का संदेश है कि हमें अपना जीवन दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस प्रकार नदियां निरंतर और निस्वार्थ भाव से बहती हुई अपने जल मार्ग में आने वाले असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं और अंतत: समुद्र में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार हमें भी अपना समय, क्षमता और संसाधन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता नि:स्वार्थ सेवा, परोपकार और लोककल्याण में ही निहित है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:

“नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।

जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।

इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”